*शहर के प्राचीन अस्तल मंदिर में आधी रात गूंजा ‘जय कन्हैया लाल की’ का जयघोष, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव* इटावा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के पावन अवसर पर शहर के प्राचीन अस्तल मंदिर में शुक्रवार रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही मध्यरात्रि में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ, मंदिर परिसर ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना की और पंचामृत व पंजीरी का भोग अर्पित किया। जन्मोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक झांकियों, रंग-बिरंगी लाइटों और सजावट से भव्य रूप दिया गया था। देर रात तक मंदिर में भक्तों की आवाजाही बनी रही। करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है अस्तल मंदिर अस्तल मंदिर को शहर के प्राचीन और सिद्धपीठ मंदिरों में शामिल बताया जाता है। मंदिर में भगवान श्री नरसिंह और राधाकृष्ण की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। स्थानीय लोगों में प्रचलित मान्यता के अनुसार करीब 500 वर्ष पूर्व मुगल शासक औरंगजेब इन मूर्तियों को खंडित करने के उद्देश्य से मंदिर पहुंचा था। मान्यता है कि इसी दौरान मंदिर से विराट आवाज सुनाई दी, जिसके बाद औरंगजेब अपने सैनिकों के साथ वापस लौट गया। इसी वजह से श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर परिसर में कभी पहलवानों के लिए अस्तल अखाड़ा भी हुआ करता था, जिसकी अपनी अलग पहचान रही है। अस्तल अखाड़े से जुड़ी हैं स्वर्गीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव की स्मृतियां अस्तल मंदिर और यहां के अखाड़े का संबंध समाजवादी आंदोलन के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव की पुरानी स्मृतियों से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, राजनीतिक जीवन के शुरुआती सोशलिस्ट पार्टी के दौर में स्वगीर्य नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव इटावा में रहकर इसी अखाड़े में पहलवानी किया करते थे। बताया जाता है कि अखाड़े में अभ्यास के बाद वह कुएं के पानी से स्नान कर मंदिरों में पूजा-अर्चना करते और इसके बाद साइकिल से क्षेत्र में निकलकर लोगों से संपर्क करते थे। जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और आगे चलकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के रक्षा मंत्री तक का दायित्व संभाला। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब भी स्वगीर्य नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव इटावा आते थे, वह इन प्राचीन मंदिरों में पूजा-अर्चना अवश्य करते थे। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वह इन मंदिरों को अपनी आस्था से जोड़कर देखते थे और भगवान का आशीर्वाद अपने राजनीतिक जीवन की शक्ति मानते थे। अस्तल मंदिर के साथ ही शहर के नीलकंठ महादेव मंदिर को भी स्थानीय श्रद्धालु सिद्ध मंदिर के रूप में मानते हैं। मंदिर से जुड़ी पुरानी स्मृतियां आज भी शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। रजत यादव पत्रकार जन नीति 24 इटावा मो. 7417197064
*शहर के प्राचीन अस्तल मंदिर में आधी रात गूंजा ‘जय कन्हैया लाल की’ का जयघोष, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव* इटावा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के पावन अवसर पर शहर के प्राचीन अस्तल मंदिर में शुक्रवार रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही मध्यरात्रि में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ, मंदिर परिसर ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना की और पंचामृत व पंजीरी का भोग अर्पित किया। जन्मोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक झांकियों, रंग-बिरंगी
लाइटों और सजावट से भव्य रूप दिया गया था। देर रात तक मंदिर में भक्तों की आवाजाही बनी रही। करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है अस्तल मंदिर अस्तल मंदिर को शहर के प्राचीन और सिद्धपीठ मंदिरों में शामिल बताया जाता है। मंदिर में भगवान श्री नरसिंह और राधाकृष्ण की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। स्थानीय लोगों में प्रचलित मान्यता के अनुसार करीब 500 वर्ष पूर्व मुगल शासक औरंगजेब इन मूर्तियों को खंडित करने के उद्देश्य से मंदिर पहुंचा था। मान्यता है कि इसी दौरान मंदिर से विराट आवाज सुनाई दी, जिसके बाद औरंगजेब अपने सैनिकों के साथ वापस लौट गया। इसी वजह से श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर परिसर में कभी पहलवानों के लिए अस्तल अखाड़ा भी हुआ
करता था, जिसकी अपनी अलग पहचान रही है। अस्तल अखाड़े से जुड़ी हैं स्वर्गीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव की स्मृतियां अस्तल मंदिर और यहां के अखाड़े का संबंध समाजवादी आंदोलन के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव की पुरानी स्मृतियों से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, राजनीतिक जीवन के शुरुआती सोशलिस्ट पार्टी के दौर में स्वगीर्य नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव इटावा में रहकर इसी अखाड़े में पहलवानी किया करते थे। बताया जाता है कि अखाड़े में अभ्यास के बाद वह कुएं के पानी से स्नान कर मंदिरों में पूजा-अर्चना करते और इसके बाद साइकिल से क्षेत्र में निकलकर लोगों से संपर्क करते थे। जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष करते हुए उन्होंने
उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और आगे चलकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के रक्षा मंत्री तक का दायित्व संभाला। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब भी स्वगीर्य नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव इटावा आते थे, वह इन प्राचीन मंदिरों में पूजा-अर्चना अवश्य करते थे। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वह इन मंदिरों को अपनी आस्था से जोड़कर देखते थे और भगवान का आशीर्वाद अपने राजनीतिक जीवन की शक्ति मानते थे। अस्तल मंदिर के साथ ही शहर के नीलकंठ महादेव मंदिर को भी स्थानीय श्रद्धालु सिद्ध मंदिर के रूप में मानते हैं। मंदिर से जुड़ी पुरानी स्मृतियां आज भी शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। रजत यादव पत्रकार जन नीति 24 इटावा मो. 7417197064
- *शहर के प्राचीन अस्तल मंदिर में आधी रात गूंजा ‘जय कन्हैया लाल की’ का जयघोष, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव* इटावा में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव के पावन अवसर पर शहर के प्राचीन अस्तल मंदिर में शुक्रवार रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव बड़े श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान मंदिर परिसर में सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे। जैसे ही मध्यरात्रि में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ, मंदिर परिसर ‘नंद घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ और ‘हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालुओं ने भजन-कीर्तन के साथ भगवान श्री कृष्ण की पूजा-अर्चना की और पंचामृत व पंजीरी का भोग अर्पित किया। जन्मोत्सव को लेकर मंदिर परिसर को आकर्षक झांकियों, रंग-बिरंगी लाइटों और सजावट से भव्य रूप दिया गया था। देर रात तक मंदिर में भक्तों की आवाजाही बनी रही। करीब 500 वर्ष पुराना बताया जाता है अस्तल मंदिर अस्तल मंदिर को शहर के प्राचीन और सिद्धपीठ मंदिरों में शामिल बताया जाता है। मंदिर में भगवान श्री नरसिंह और राधाकृष्ण की प्राचीन मूर्तियां स्थापित हैं। स्थानीय लोगों में प्रचलित मान्यता के अनुसार करीब 500 वर्ष पूर्व मुगल शासक औरंगजेब इन मूर्तियों को खंडित करने के उद्देश्य से मंदिर पहुंचा था। मान्यता है कि इसी दौरान मंदिर से विराट आवाज सुनाई दी, जिसके बाद औरंगजेब अपने सैनिकों के साथ वापस लौट गया। इसी वजह से श्रद्धालुओं में इस मंदिर के प्रति विशेष आस्था जुड़ी हुई है। मंदिर परिसर में कभी पहलवानों के लिए अस्तल अखाड़ा भी हुआ करता था, जिसकी अपनी अलग पहचान रही है। अस्तल अखाड़े से जुड़ी हैं स्वर्गीय नेताजी श्री मुलायम सिंह यादव की स्मृतियां अस्तल मंदिर और यहां के अखाड़े का संबंध समाजवादी आंदोलन के संस्थापक एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव की पुरानी स्मृतियों से भी जोड़ा जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, राजनीतिक जीवन के शुरुआती सोशलिस्ट पार्टी के दौर में स्वगीर्य नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव इटावा में रहकर इसी अखाड़े में पहलवानी किया करते थे। बताया जाता है कि अखाड़े में अभ्यास के बाद वह कुएं के पानी से स्नान कर मंदिरों में पूजा-अर्चना करते और इसके बाद साइकिल से क्षेत्र में निकलकर लोगों से संपर्क करते थे। जनसमस्याओं को लेकर संघर्ष करते हुए उन्होंने उत्तर प्रदेश की राजनीति में अपनी अलग पहचान बनाई और आगे चलकर प्रदेश के मुख्यमंत्री से लेकर देश के रक्षा मंत्री तक का दायित्व संभाला। स्थानीय लोगों के अनुसार, जब भी स्वगीर्य नेता जी श्री मुलायम सिंह यादव इटावा आते थे, वह इन प्राचीन मंदिरों में पूजा-अर्चना अवश्य करते थे। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वह इन मंदिरों को अपनी आस्था से जोड़कर देखते थे और भगवान का आशीर्वाद अपने राजनीतिक जीवन की शक्ति मानते थे। अस्तल मंदिर के साथ ही शहर के नीलकंठ महादेव मंदिर को भी स्थानीय श्रद्धालु सिद्ध मंदिर के रूप में मानते हैं। मंदिर से जुड़ी पुरानी स्मृतियां आज भी शहरवासियों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई हैं। रजत यादव पत्रकार जन नीति 24 इटावा मो. 74171970644
- भारत के अंतरिक्ष सफर में एक और शानदार उपलब्धि! क्रायोजेनिक इंजन ने अपना निर्धारित संचालन पूरा किया और EOS-05 को सफलतापूर्वक उसकी निर्धारित कक्षा में स्थापित कर दिया गया। इसके साथ ही GSLV-F17/EOS-05 मिशन सफलतापूर्वक पूरा हुआ।1
- नगला घनु में दो साल से जलभराव, ग्रामीण परेशान: स्कूल जाने वाले बच्चों और बुजुर्गों को दिक्कत, तालाब पर कब्जे का आरोप जसवंतनगर के नगला घनु गांव में पिछले करीब दो साल से जलभराव की समस्या बनी हुई है। लंबे समय से समाधान न होने से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों से कई बार शिकायत के बावजूद जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में सबसे ज्यादा समस्या सुघर सिंह के मकान से लेकर राम गोपाल के मकान तक है। इस रास्ते पर लंबे समय से पानी भरा होने के कारण आना-जाना मुश्किल हो गया है। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और बुजुर्गों को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार लोग फिसलकर गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। जलभराव के कारण दोपहिया वाहन निकालना भी मुश्किल है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी जमा रहने से आसपास गंदगी और बदबू का माहौल है। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे बीमारियां फैलने की आशंका है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के तालाब पर अवैध कब्जा होने के कारण पानी की निकासी रुक गई है। इसी वजह से बारिश या अन्य स्रोतों से आने वाला पानी लंबे समय तक रास्ते में जमा रहता है। रणवीर, पान सिंह, विशुन दयाल, राजवीर, हिम्मत सिंह, राजकुमारी, किरन देवी और छोटी देवी समेत कई ग्रामीणों ने प्रशासन से जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान और जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की मांग की है। इस संबंध में एडीओ पंचायत देवेंद्र पाल सिंह ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए टीम बनाई जाएगी और जल निकासी की व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मौके का निरीक्षण कर जरूरी कार्रवाई करते हुए जलभराव की समस्या को हल किया जाएगा। जसवंतनगर के नगला घनु गांव में पिछले करीब दो साल से जलभराव की समस्या बनी हुई है। लंबे समय से समाधान न होने से ग्रामीण परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों से कई बार शिकायत के बावजूद जल निकासी की व्यवस्था नहीं हुई है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में सबसे ज्यादा समस्या सुघर सिंह के मकान से लेकर राम गोपाल के मकान तक है। इस रास्ते पर लंबे समय से पानी भरा होने के कारण आना-जाना मुश्किल हो गया है। स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और बुजुर्गों को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार लोग फिसलकर गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं। जलभराव के कारण दोपहिया वाहन निकालना भी मुश्किल है। ग्रामीणों ने बताया कि पानी जमा रहने से आसपास गंदगी और बदबू का माहौल है। मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, जिससे बीमारियां फैलने की आशंका है। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के तालाब पर अवैध कब्जा होने के कारण पानी की निकासी रुक गई है। इसी वजह से बारिश या अन्य स्रोतों से आने वाला पानी लंबे समय तक रास्ते में जमा रहता है। रणवीर, पान सिंह, विशुन दयाल, राजवीर, हिम्मत सिंह, राजकुमारी, किरन देवी और छोटी देवी समेत कई ग्रामीणों ने प्रशासन से जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान और जल निकासी की उचित व्यवस्था करने की मांग की है। इस संबंध में एडीओ पंचायत देवेंद्र पाल सिंह ने बताया कि समस्या के समाधान के लिए टीम बनाई जाएगी और जल निकासी की व्यवस्था कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि मौके का निरीक्षण कर जरूरी कार्रवाई करते हुए जलभराव की समस्या को हल किया जाएगा।1
- *इटावा:-* *सरकारी निर्देशों के बावजूद सड़कों पर दौड़ रहीं डग्गामार बसें!* *इटावा शहर में डग्गामार बसों के संचालन को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।* *उत्तर प्रदेश सरकार के सख्त निर्देशों के बावजूद आगरा, किशनी बेवर रूट पर इटावा से डग्गामार बसों का संचालन जारी है।* *वहीं आगरा ,कुसमरा , भिंड के लिए सुबह होते ही डग्गामार गाड़िया और बसें चलने की बात सामने आ रही है। *डग्गामार वाहन संचालक पुलिस प्रशासन के सामने ही खड़े होकर सवारियां भरते हैं पर उन पर कोई रोक टोक नहीं* *इससे परिवहन विभाग की कार्रवाई और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।* *परिवहन विभाग और पुलिस प्रशासन इन बसों के खिलाफ क्या कार्रवाई करता है।1
- करहल आज संत विवेकानंद ग्रुप ऑफ स्कूल्स में धूमधाम से डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाया ! निदेशक डॉ.जे.पी.यादव ने कहा माता-पिता हमें जीवन देते हैं,लेकिन उस जीवन को सही दिशा,संस्कार और आकार हमारे शिक्षक ही देते हैं। शिक्षक वह दीपक हैं जो खुद जलकर हमारे जीवन को रोशन करते हैं,वे हमें सिर्फ किताबों का ज्ञान नहीं देते, बल्कि सही और गलत में फर्क करना सिखाते हैं। जब हम गलती करते हैं तो उनकी डांट में हमारी परवाह छिपी होती है,और जब हम सफल होते हैं तो उनकी आँखों में जो गर्व होता है,वही उनका असली इनाम होता है। 5 सितंबर का यह दिन हम सबके लिए बेहद खास है,साल के बाकी दिन तो कक्षाओं,घंटी और पढ़ाई-लिखाई के नाम होते हैं,लेकिन आज का यह पूरा दिन सिर्फ और सिर्फ हमारे प्यारे गुरुजनों को समर्पित है!" इसी खूबसूरत अहसास के साथ अपने कार्यक्रम की शुरुआत करते हैं।" आज का दिन अपने उन सभी गुरुओं को धन्यवाद कहने का दिन है,जिन्होंने हमें बेहतर इंसान बनाया। आज 5 सितंबर है और हम सब यहाँ डॉ.सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जन्मदिन को 'शिक्षक दिवस' के रूप में मनाते हैं ।1
- मुख्यमंत्री के हाथों अरविंद कुमार यादव को मिला सम्मान 20000 का चेक प्रदान ब्यूरो रिपोर्ट रामनरेश विश्वकर्मा लखनऊ। उत्तर प्रदेश में आयोजित एक सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री द्वारा अरविंद कुमार यादव को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उन्हें ₹20,000 की धनराशि का चेक प्रदान किया। समारोह के दौरान मंच पर मौजूद अतिथियों ने भी सम्मानित होने वाले लोगों का उत्साहवर्धन किया। मुख्यमंत्री के हाथों मिला यह सम्मान अरविंद कुमार यादव के लिए गौरव और प्रेरणा का विषय बना। मुख्यमंत्री द्वारा प्रदान किया गया यह सम्मान उनकी उपलब्धि और योगदान की सराहना के रूप में देखा जा रहा है। समारोह में बड़ी संख्या में अधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।3
- कोतवाली औरैया मंदिर में श्रद्धा-भक्ति से मनाया गया श्रीकृष्ण जन्मोत्सव औरैया। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन अवसर पर कोतवाली औरैया परिसर स्थित मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान विधि-विधान से पूजा-अर्चना के साथ भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रसाद वितरण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक, अपर जिलाधिकारी, अपर पुलिस अधीक्षक एवं क्षेत्राधिकारी सहित जनपद के अधिकारी-कर्मचारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और शांति की कामना की। भक्ति और उल्लास से सराबोर माहौल में सभी ने एक साथ भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव की खुशियां मनाईं। मंदिर परिसर में देर रात तक धार्मिक वातावरण बना रहा। इस अवसर पर जनपदवासियों को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं दी गईं।1
- *बढ़पुरा के कामेत में 600 मीटर रास्ता बना तालाब किसानों की बढ़ी मुश्किलें खेतों तक पहुंचना हुआ दुश्वार* जनपद इटावा के ब्लाक बढ़पुरा ग्राम पंचायत कामेत में बाह रोड से बेदरी के घर होते हुए नहर तक जाने वाला करीब 600 मीटर लंबा और 11 फीट चौड़ा रास्ता इन दिनों बदहाल स्थिति में है। रास्ते पर पानी भर जाने के कारण यह मार्ग तालाब में तब्दील हो गया है। चकरोड भी बंद होने से आसपास के किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार रास्ता खराब होने और जलभराव के चलते किसानों को खेतों की जुताई-बुवाई, खाद-बीज पहुंचाने तथा कृषि संबंधी अन्य सामान ले जाने में काफी दिक्कत हो रही है। बरसात के दौरान समस्या और गंभीर हो गई है। किसानों को अपने खेतों तक पहुंचने के लिए वैकल्पिक और लंबा रास्ता अपनाना पड़ रहा है। बताया गया है कि इस मार्ग से खेत संख्या 1666, 1667 और 1668 सहित आसपास के कई खेतों तक पहुंच होती है। इन खेतों में कृष्णा गोपाल, ब्रजेश, राकेश, ब्रजकिशोर, योगेश चंदन, योगेंद्र, अमन, गौरव, सनी राजावत सहित कई अन्य किसानों की कृषि भूमि है। रास्ता बंद होने से इन सभी किसानों की रोजमर्रा की कृषि गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। रास्ता ठीक होने से किसानों के साथ क्षेत्रवासियों को भी मिलेगी राहत ग्रामीणों का कहना है कि यदि इस रास्ते की मरम्मत कराकर इसे आवागमन योग्य बना दिया जाए तो किसानों की समस्या दूर होने के साथ-साथ पारपट्टी क्षेत्र के लोगों को भी स्टेशन जाने में काफी सुविधा मिलेगी। यह मार्ग क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग है, लेकिन लंबे समय से इसकी स्थिति खराब होने के कारण लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। ग्रामीणों ने जिले के जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि मौके का निरीक्षण कराकर रास्ते से जलभराव हटवाया जाए तथा चकरोड को दुरुस्त कराकर मार्ग को जल्द से जल्द आवागमन योग्य बनाया जाए, जिससे किसानों को खेतों तक पहुंचने और आम लोगों को आवागमन में राहत मिल सके। रजत यादव संवाददाता जन नीति 24 इटावा मो.74171970644