मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के राजतिलक के साथ दस दिवसीय भव्य रामलीला महोत्सव संपूर्ण। आबूरोड के न्यू अंबिका कॉलोनी महावीर टॉकीज के पास चल रही रामलीला का दसवें दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के राजतिलक के साथ रामलीला संपन्न हुई। काशी बनारस से आये रामलीला मण्डल के सचिव मकरनाथ चौरसिया ने बताया दसवे दिन की रामलीला में सर्वप्रथम कुंभकरण और मेघनाथ वध हुआ तत्पश्चात रावण वध हुआ। अधर्म पर धर्म की विजय हुई। रावण का वध होते ही जय श्री राम के नारो से पंडाल गूंज उठा। प्रभु श्री रामचंद्र जी अपने 14 वर्ष के वनवास को पूर्ण करते हुए अयोध्या को वापस आए। आबूरोड़ के वरिष्ठ जनों एवं नगर वासियों ने स्वयं भगवान का राजतिलक अपने हाथों से किया। रामलीला देखने के लिए रामलीला पंडाल में जन सैलाब उमड़ा पड़ा एव काशी के 25 कलाकारों का आभार प्रकट करते हुए कहा की बहुत ही अद्भुत मंचन किया जिसे देख दर्शक बहुत ही प्रसन्न हुए और उनके मन में भावना जागृत हुई की ऐसी रामलीलाओं का मंचन नगर में हर 2 से 4 सालों में होनी चाहिए क्योंकि यह कला एवं संस्कृति विलुप्त होती जा रही है इस इस प्रकार से निरंतर जीवन पर रखना बहुत आवश्यक है। भूपेन्द्र सम्बरिया ने बताया रामलीला मण्डल द्वारा हनुमान चालीसा का वितरण एवं सामूहिक पाठ का विशाल आयोजन भी हुआ। रामलीला से बच्चों में संस्कार स्थापित होते हैं एवं समापन पर भगवान श्री रामचंद्र जी की राजतिलक में प्रसाद भी वितरण किया गया। रामलीला के मंचन को सफल बनाने हेतु अशोक मालवीया, अनिल मालवीया, भूपेन्द्र सम्बरिया, राधेश्याम शाक्य, डॉ एमपी बंसल, नरेश त्रिवेदी, रमेश अग्रवाल, केके अग्रवाल, दिलीप सोनी, मदनसिंह कोली, सुमिता सांखला, सुनीता सम्बरिया, सुनीता श्रीवास्तव, मकरनाथ चौरासिया रामलीला मण्डल के सदस्यों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के राजतिलक के साथ दस दिवसीय भव्य रामलीला महोत्सव संपूर्ण। आबूरोड के न्यू अंबिका कॉलोनी महावीर टॉकीज के पास चल रही रामलीला का दसवें दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के राजतिलक के साथ रामलीला संपन्न हुई। काशी बनारस से आये रामलीला मण्डल के सचिव मकरनाथ चौरसिया ने बताया दसवे दिन की रामलीला में सर्वप्रथम कुंभकरण और मेघनाथ वध हुआ तत्पश्चात रावण वध हुआ। अधर्म पर धर्म की विजय हुई। रावण का वध होते ही जय श्री राम के नारो से पंडाल गूंज उठा। प्रभु श्री रामचंद्र जी अपने 14
वर्ष के वनवास को पूर्ण करते हुए अयोध्या को वापस आए। आबूरोड़ के वरिष्ठ जनों एवं नगर वासियों ने स्वयं भगवान का राजतिलक अपने हाथों से किया। रामलीला देखने के लिए रामलीला पंडाल में जन सैलाब उमड़ा पड़ा एव काशी के 25 कलाकारों का आभार प्रकट करते हुए कहा की बहुत ही अद्भुत मंचन किया जिसे देख दर्शक बहुत ही प्रसन्न हुए और उनके मन में भावना जागृत हुई की ऐसी रामलीलाओं का मंचन नगर में हर 2 से 4 सालों में होनी चाहिए क्योंकि यह कला एवं संस्कृति विलुप्त होती जा रही है इस
इस प्रकार से निरंतर जीवन पर रखना बहुत आवश्यक है। भूपेन्द्र सम्बरिया ने बताया रामलीला मण्डल द्वारा हनुमान चालीसा का वितरण एवं सामूहिक पाठ का विशाल आयोजन भी हुआ। रामलीला से बच्चों में संस्कार स्थापित होते हैं एवं समापन पर भगवान श्री रामचंद्र जी की राजतिलक में प्रसाद भी वितरण किया गया। रामलीला के मंचन को सफल बनाने हेतु अशोक मालवीया, अनिल मालवीया, भूपेन्द्र सम्बरिया, राधेश्याम शाक्य, डॉ एमपी बंसल, नरेश त्रिवेदी, रमेश अग्रवाल, केके अग्रवाल, दिलीप सोनी, मदनसिंह कोली, सुमिता सांखला, सुनीता सम्बरिया, सुनीता श्रीवास्तव, मकरनाथ चौरासिया रामलीला मण्डल के सदस्यों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
- आबूरोड के न्यू अंबिका कॉलोनी महावीर टॉकीज के पास चल रही रामलीला का दसवें दिन मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के राजतिलक के साथ रामलीला संपन्न हुई। काशी बनारस से आये रामलीला मण्डल के सचिव मकरनाथ चौरसिया ने बताया दसवे दिन की रामलीला में सर्वप्रथम कुंभकरण और मेघनाथ वध हुआ तत्पश्चात रावण वध हुआ। अधर्म पर धर्म की विजय हुई। रावण का वध होते ही जय श्री राम के नारो से पंडाल गूंज उठा। प्रभु श्री रामचंद्र जी अपने 14 वर्ष के वनवास को पूर्ण करते हुए अयोध्या को वापस आए। आबूरोड़ के वरिष्ठ जनों एवं नगर वासियों ने स्वयं भगवान का राजतिलक अपने हाथों से किया। रामलीला देखने के लिए रामलीला पंडाल में जन सैलाब उमड़ा पड़ा एव काशी के 25 कलाकारों का आभार प्रकट करते हुए कहा की बहुत ही अद्भुत मंचन किया जिसे देख दर्शक बहुत ही प्रसन्न हुए और उनके मन में भावना जागृत हुई की ऐसी रामलीलाओं का मंचन नगर में हर 2 से 4 सालों में होनी चाहिए क्योंकि यह कला एवं संस्कृति विलुप्त होती जा रही है इस इस प्रकार से निरंतर जीवन पर रखना बहुत आवश्यक है। भूपेन्द्र सम्बरिया ने बताया रामलीला मण्डल द्वारा हनुमान चालीसा का वितरण एवं सामूहिक पाठ का विशाल आयोजन भी हुआ। रामलीला से बच्चों में संस्कार स्थापित होते हैं एवं समापन पर भगवान श्री रामचंद्र जी की राजतिलक में प्रसाद भी वितरण किया गया। रामलीला के मंचन को सफल बनाने हेतु अशोक मालवीया, अनिल मालवीया, भूपेन्द्र सम्बरिया, राधेश्याम शाक्य, डॉ एमपी बंसल, नरेश त्रिवेदी, रमेश अग्रवाल, केके अग्रवाल, दिलीप सोनी, मदनसिंह कोली, सुमिता सांखला, सुनीता सम्बरिया, सुनीता श्रीवास्तव, मकरनाथ चौरासिया रामलीला मण्डल के सदस्यों ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।3
- आबू रोड- रेलवे स्टेशन परिसर में बिना स्टेशन अधीक्षक और उच्च अधिकारियों की अनुमति के टेंट लगाए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार किसी सत्ताधारी पार्टी के नेता के संभावित आगमन को लेकर यह टेंट लगाया गया, लेकिन इसकी आधिकारिक स्वीकृति नहीं ली गई। स्टेशन अधीक्षक ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और न ही उन्होंने कोई अनुमति दी है। रेलवे परिसर में इस तरह का अतिक्रमण सुरक्षा और नियमों पर सवाल खड़े करता है। अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किसकी सहमति से यह टेंट लगाया गया। रिपोर्टर - रितिक सरगरा,आबूरोड1
- जावाल श्री श्री 1008 राम गिरिजा महाराज अग्नि परीक्षा का प्रथम दिन1
- रानीवाड़ा में एक बुजुर्ग किसान अपने परिवार के साथ भीषण गर्मी के बीच धरने पर बैठा हुआ है। यह अपने आप में एक गंभीर संकेत है कि उसकी समस्या कितनी बड़ी और जटिल होगी, जो उसे इस कठिन परिस्थिति में कदम उठाने के लिए मजबूर होना पड़ा। सबसे चिंताजनक बात यह है कि प्रशासनिक अधिकारी इस स्थिति से अवगत होने के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकाल पाए हैं। यह स्थिति न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है, बल्कि हमारे लोकतंत्र की संवेदनशीलता पर भी प्रश्नचिह्न लगाती है। और भी दुखद पहलू यह है कि अब तक कोई जिम्मेदार प्रतिनिधि मौके पर पहुंचकर इस बुजुर्ग किसान की पीड़ा को सामने नहीं ला पाया है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि इस मुद्दे को गंभीरता से लें, इसे अधिक से अधिक शेयर करें ताकि संबंधित अधिकारियों और प्रशासन तक यह आवाज पहुंचे और जल्द से जल्द इस बुजुर्ग किसान को न्याय मिल सके।1
- लखनऊ में भीषण आग, 50 से ज्यादा झोपड़ियां जलीं, 30 सिलेंडर फटे लखनऊ के विकासनगर इलाके में बुधवार शाम करीब 5:30 बजे भीषण आग लगने से बड़ा हादसा हो गया। आग इतनी तेजी से फैली कि 50 से ज्यादा झोपड़ियां जलकर राख हो गईं। इस दौरान करीब 30 गैस सिलेंडर फटने से हालात और भयावह हो गए। आग की लपटें लगभग 10 किलोमीटर दूर तक दिखाई दीं। घटना के बाद आसपास के करीब 20 मकानों को खाली कराया गया। दमकल विभाग की 10 से ज्यादा गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग बुझाने का काम देर तक जारी रहा। सुरक्षा के लिहाज से इलाके की बिजली भी काट दी गई। हादसे में एक युवक ने दावा किया कि उसके 4 बच्चे जिंदा जल गए, जिससे इलाके में मातम का माहौल है। कई लोगों का सारा सामान जलकर राख हो गया और चारों तरफ अफरा-तफरी मच गई। मामले की जानकारी मिलने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने तुरंत संज्ञान लिया और अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। वहीं बृजेश पाठक भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य जारी है और पीड़ितों को हर संभव मदद देने का आश्वासन दिया गया है। #LucknowFire #Vikasnagar #FireAccident #UPNews #BreakingNews1
- धर्म नगरी ग्राम गोगला में 22 अप्रैल 2026 को श्री मंशापूर्ण गणपति, लक्ष्मी नारायण भगवान एवं सोमनाथ महादेव का प्रथम पाटोत्सव भव्य रूप से आयोजित होगा। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातः 7 बजे हवन से होगी, इसके बाद 10 बजे ध्वजा रोहण किया जाएगा। 11:30 बजे से महाप्रसादी का आयोजन रखा गया है। दोपहर 3 बजे भगवान की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी। शाम 7:15 बजे महा आरती तथा रात्रि 8:30 बजे से विशाल भजन संध्या आयोजित होगी। आयोजन समिति ने सभी धर्म प्रेमियों से अधिक संख्या में उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है।1
- सुमेरपुर विधायक ओर राजस्थान सरकार में कैबिनेट मंत्री जोराराम कुमावत ने महिला विधेयक को लेकर बातचीत में कहा कि यह विधेयक महिलाओं के लिए राजनीति में नए अवसर खोलने वाला साबित होगा।1
- आबूरोड रेलवे स्टेशन पर बिना अनुमति के लगाया टेंट, जिम्मेदारों पर उठे सवाल। आबू रोड- रेलवे स्टेशन परिसर में बिना स्टेशन अधीक्षक और उच्च अधिकारियों की अनुमति के टेंट लगाए जाने का मामला सामने आया है। जानकारी के अनुसार किसी सत्ताधारी पार्टी के नेता के संभावित आगमन को लेकर यह टेंट लगाया गया, लेकिन इसकी आधिकारिक स्वीकृति नहीं ली गई। स्टेशन अधीक्षक ने साफ तौर पर कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है और न ही उन्होंने कोई अनुमति दी है। रेलवे परिसर में इस तरह का अतिक्रमण सुरक्षा और नियमों पर सवाल खड़े करता है। अब यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर किसकी सहमति से यह टेंट लगाया गया।2