logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…
  • Latest News
  • News
  • Politics
  • Elections
  • Viral
  • Astrology
  • Horoscope in Hindi
  • Horoscope in English
  • Latest Political News
logo
Shuru
Apke Nagar Ki App…

पौनिया के छोटे तालाब में मिला 23 वर्षीय युवक का शव, हादसा या आत्महत्या पुलिस कर रही जांच

21 hrs ago
user_Dev Anand
Dev Anand
कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
21 hrs ago

पौनिया के छोटे तालाब में मिला 23 वर्षीय युवक का शव, हादसा या आत्महत्या पुलिस कर रही जांच

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • मेढकी में गाइड ने फहराया ध्वज शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पीता है, वह दहाड़ता है वारासिवनी। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेंडकी में स्काउट गाइड का ध्वज बड़े ही हर्षोल्लाह से फहराया गया। मुख्य अतिथि प्राचार्य नंदा रंगारी, गाइड कैप्टन उमा मार्को के निर्देशन में सर्वप्रथम गाइडो द्वारा हरसू बनवाया गया। गाइड के द्वारा सुविचार कहा गया कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पीता है, वह दहाड़ता है। इस प्रार्थना के उपरांत कलर पार्टी को बुलाया गया और गाइड माही मेश्राम के द्वारा ध्वजारोहण कराया गया। सेल्यूट के साथ ध्वज का सम्मान किया गया। इसके बाद झंडा गीत गाया गया। कार्यक्रम में संकेत शुक्ला, उमेश कुमार सानेकर, महेश मसकरे, झंकार बिसेन, ओरेलाल बघेले, कलीराम दमाहे, ईश्वरी कुमार सोनवाने, कोमल प्रसाद खांडे, कुलदीप बिसेन, अनिरुद्ध चौबे, दीपक गजभिए, प्रतिभा गौतम, ज्योति पाटील, अनीता डोंगरे, सरस्वती हेड़ाऊ, रश्मि पांचे, प्रियंका ठाकरे, शीला बोरकर, योगिता डोंगरे, सविता राहंगडाले, रेणुका बिसेन, दिव्या मांद्रे, शैली भीमटे, ग्राम की मुखिया सरपंच सावित्री कुंजाम, जन भागीदारी अध्यक्ष उपेंद्र बिसेन, भूतपूर्व सरपंच सचिन बिसेन एवं समस्त ग्रामीण जनों ने बढ़-चढ़कर के भाग लिया। ग्रामीण जान इस गतिविधि को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और इसकी सराहना की।
    1
    मेढकी में गाइड ने फहराया ध्वज 
शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पीता है, वह दहाड़ता है 
वारासिवनी। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मेंडकी में स्काउट गाइड का ध्वज बड़े ही हर्षोल्लाह से फहराया गया। मुख्य अतिथि प्राचार्य नंदा रंगारी, गाइड कैप्टन उमा मार्को के निर्देशन में सर्वप्रथम गाइडो द्वारा हरसू बनवाया गया। गाइड के द्वारा सुविचार कहा गया कि शिक्षा वह शेरनी का दूध है, जो पीता है, वह दहाड़ता है।
इस प्रार्थना के उपरांत कलर पार्टी को बुलाया गया और गाइड माही मेश्राम के द्वारा ध्वजारोहण कराया गया। सेल्यूट के साथ ध्वज का सम्मान किया गया।  इसके बाद झंडा गीत गाया गया। 
कार्यक्रम में संकेत शुक्ला, उमेश कुमार सानेकर, महेश मसकरे, झंकार बिसेन, ओरेलाल बघेले, कलीराम दमाहे, ईश्वरी कुमार सोनवाने, कोमल प्रसाद खांडे, कुलदीप बिसेन, अनिरुद्ध चौबे, दीपक गजभिए, प्रतिभा गौतम, ज्योति पाटील, अनीता डोंगरे, सरस्वती हेड़ाऊ, रश्मि पांचे, प्रियंका ठाकरे, शीला बोरकर, योगिता डोंगरे, सविता राहंगडाले, रेणुका बिसेन, दिव्या मांद्रे, शैली भीमटे, ग्राम की मुखिया सरपंच सावित्री कुंजाम, जन भागीदारी अध्यक्ष उपेंद्र बिसेन, भूतपूर्व सरपंच सचिन बिसेन एवं समस्त ग्रामीण जनों ने बढ़-चढ़कर के भाग लिया। ग्रामीण जान इस गतिविधि को देखकर बहुत प्रसन्न हुए और इसकी सराहना की।
    user_Aanand Verma
    Aanand Verma
    वारासिवनी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
  • *श्मशान घाट की रोड बनाने ग्राम बडझिर की महिलाओं ने संभाली कमान* *श्मशान घाट/शांति धाम तक रास्ते के लिए ग्राम बड़झिर में नाराज ग्रामीणों महिलाओं ने खुद संभाली कमान भाजपा नेता नीलकंठ तिवारी जो जिला संगठन मंत्री है उस पर लगाया रोड न बनने देने का आरोप* *ग्राम बड़झिर में सड़क के अभाव से नाराज ग्रामीणों का अनोखा विरोध — महिलाओं ने भी हाथों में फावड़ा, गैंती और तसला लेकर शुरू किया रास्ता बनाने का काम* बड़झिर/मोहगांव सड़क। ग्राम पंचायत मोहगांव सड़क के अंतर्गत आने वाले ग्राम बड़झिर में श्मशान घाट “शांति धाम” तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क नहीं होने का मामला अब ग्रामीणों के आक्रोश का कारण बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी गांव के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित मार्ग उपलब्ध नहीं हो पाया है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है तथा कीचड़, पानी और खराब रास्ते के कारण शवयात्रा लेकर श्मशान घाट तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए बेहद कठिन हो जाता है। *भाजपा नेता नीलकंठ तिवारी पर ग्रामीणों के आरोप निष्पक्ष जांच की मांग* *ग्रामीणों ने भाजपा नेता नीलकंठ तिवारी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर डराने या दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है।* ग्रामीणों द्वारा कथित रूप से यह भी कहा जा रहा है कि राजनीतिक पद और सामाजिक पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रास्ते के मामले में विशेष अधिकार नहीं मिल सकता। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नीलकंठ तिवारी का पक्ष इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके द्वारा यदि भूमि संबंधी दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड या रास्ते पर आपत्ति का कोई वैधानिक आधार प्रस्तुत किया जाता है तो उसे भी सार्वजनिक रूप से सामने रखा जाना चाहिए। सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि समस्या का समाधान प्रशासन और पंचायत से होने की प्रतीक्षा करने के बजाय ग्रामीणों ने स्वयं ही रास्ता बनाने का बीड़ा उठा लिया। ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों के बीच चर्चा और निर्णय के बाद गांव की महिलाओं एवं ग्रामीणों ने हाथों में गैंती, कुदारी, फावड़ा और तसले उठाए और शांति धाम तक पहुंचने वाले रास्ते पर श्रमदान शुरू कर दिया। ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सड़क बनाने का काम नहीं है, बल्कि यह उनके मूलभूत अधिकार, सम्मान और अंतिम संस्कार के अधिकार की आवाज है। “जीते-जी रास्ता नहीं तो कम से कम अंतिम यात्रा का रास्ता तो मिले” ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जीवन के अंतिम पड़ाव पर श्मशान घाट तक पहुंचने का अधिकार है। इसके लिए किसी व्यक्ति विशेष की कृपा या अनुमति पर निर्भरता नहीं होनी चाहिए। ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि जब घर का कोई सदस्य दुनिया से विदा होता है, तब परिवार पहले ही दुख में डूबा होता है। ऐसे समय में शवयात्रा को खराब और कच्चे रास्ते से ले जाना अत्यंत पीड़ादायक हो जाता है। बरसात में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है। इसी पीड़ा के चलते ग्रामीणों ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन और ग्राम पंचायत सड़क बनाने में असमर्थ हैं, तो गांव के लोग स्वयं श्रमदान करके रास्ता बनाएंगे। ग्राम सभा के बाद ग्रामीणों ने खुद उठाए औजार प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सभा की बैठक में श्मशान घाट तक सड़क निर्माण को लेकर चर्चा हुई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस मार्ग की समस्या पंचायत और संबंधित अधिकारियों के सामने रखी जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ। बैठक के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि अब वे किसी के भरोसे नहीं बैठेंगे। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष खेतों की ओर पहुंचे और गैंती, फावड़ा, कुदारी तथा तसले लेकर रास्ते को तैयार करने के काम में जुट गए। महिलाओं का इस तरह आगे आना ग्रामीणों के लिए विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि और पंचायत व्यवस्था समस्या का समाधान नहीं कर पा रही है, तब गांव की मातृशक्ति ने स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी संभाली है। जमीन को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप ग्रामीणों ने भाजपा नेता नीलकंठ तिवारी, जिन्हें ग्रामीण भाजपा जिला संगठन मंत्री के पद पर होना बता रहे हैं, पर श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते में बाधा उत्पन्न करने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि शांति धाम तक पहुंचने वाले रास्ते का एक हिस्सा उनकी जमीन से होकर गुजरता है और वे ग्रामीणों को उस ओर से जाने से रोकते हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद बताया जा रहा है, उसमें से कुछ भूमि पूर्व में गांव में स्कूल निर्माण के लिए दान किए जाने की बात कही जाती है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से राजस्व अभिलेखों एवं संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पुष्टि किया जाना आवश्यक है। यदि भूमि वास्तव में दान की गई थी तो उसकी वैधानिक स्थिति, दानपत्र, राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान स्वामित्व की जांच किए जाने की मांग ग्रामीणों द्वारा की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट तक जाने के लिए आगे किसानों की जमीन भी आती है और संबंधित किसान कथित तौर पर रास्ते के लिए जमीन देने को तैयार हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि अन्य ग्रामीण अपनी जमीन देने को तैयार हैं तो रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा? “गांव वाले जमीन देने को तैयार, फिर रास्ता क्यों नहीं?” ग्रामीणों का कहना है कि शांति धाम तक पहुंचने के लिए जिस मार्ग की आवश्यकता है, उसमें कई किसान सहयोग करने को तैयार हैं। ग्रामीणों के अनुसार यदि प्रशासन मौके पर पहुंचकर सीमांकन कराए और उपलब्ध भूमि तथा सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे, तो रास्ते का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले का राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता किस भूमि से होकर गुजरता है, रास्ते की चौड़ाई कितनी है तथा पंचायत अथवा शासन की ओर से इस मार्ग के निर्माण के लिए क्या प्रावधान किया जा सकता है। सुदूर सड़क योजना का एस्टीमेट भी अधर में? ग्रामीणों ने संबंधित तकनीकी अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार इंजीनियर योगेन्द्र कुमरे द्वारा श्मशान घाट तक पहुंच मार्ग के लिए सुदूर सड़क अथवा एप्रोच रोड का एस्टीमेट तैयार करने की बात सामने आई थी, लेकिन अभी तक सड़क का निर्माण धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी से संपर्क करने में भी परेशानी होती है और कई बार अधिकारी क्षेत्र में उपलब्ध नहीं रहते। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में केवल कागजी कार्रवाई न हो बल्कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखें और सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करें। यदि सड़क निर्माण के लिए पहले से कोई प्रस्ताव, एस्टीमेट या स्वीकृति जारी हुई है तो उसकी वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए। पंचायत की भूमिका पर भी उठे सवाल ग्राम पंचायत मोहगांव सड़क की कार्यप्रणाली को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत का मूल दायित्व गांव की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना है। सड़क, नाली, पेयजल और सार्वजनिक उपयोग की भूमि जैसे विषय पंचायत व्यवस्था के सामने लगातार आते हैं। लेकिन श्मशान घाट जैसे अत्यंत आवश्यक सार्वजनिक स्थल तक पहुंचने के लिए भी यदि ग्रामीणों को स्वयं सड़क बनानी पड़े तो यह पंचायत व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का कहना है कि शांति धाम कोई निजी स्थान नहीं है। यहां गांव के प्रत्येक परिवार को अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ता है। इसलिए वहां तक पहुंचने का मार्ग भी सार्वजनिक सुविधा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए। महिलाओं ने कहा — “अब हम पीछे नहीं हटेंगे” रास्ता निर्माण के दौरान गांव की महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। महिलाओं ने अपने हाथों में फावड़ा और तसला लेकर मिट्टी हटाने तथा रास्ता बनाने के कार्य में सहयोग किया। महिलाओं का कहना था कि वे किसी से विवाद नहीं चाहतीं। उनकी मांग केवल इतनी है कि गांव के लोगों को श्मशान घाट तक सम्मानपूर्वक पहुंचने के लिए रास्ता मिले। ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति रास्ते में आपत्ति करता है तो प्रशासन को मौके पर आकर राजस्व रिकॉर्ड देखना चाहिए और निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए। गांव के लोगों को कानून हाथ में लेने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन प्रशासन को भी उनकी समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन दोनों पक्षों को बुलाकर सुनवाई करे और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय ले। “किसी की जमीन पर जबरन कब्जा नहीं, लेकिन सार्वजनिक रास्ता भी जरूरी” ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी व्यक्ति की निजी भूमि पर अवैध कब्जा करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि रास्ते को लेकर भूमि विवाद है तो उसका समाधान कानून और राजस्व नियमों के अनुसार किया जाए। ग्रामीणों की मुख्य मांग यह है कि शांति धाम तक पहुंचने के लिए वैधानिक और स्थायी रास्ता उपलब्ध कराया जाए। यदि संबंधित भूमि निजी है तो प्रशासन वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाश सकता है। यदि रास्ता सरकारी अथवा सार्वजनिक उपयोग की भूमि में आता है तो उसकी स्थिति स्पष्ट कर रास्ते को अतिक्रमणमुक्त किया जा सकता है। इसीलिए ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत से संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है। ग्रामीणों का श्रमदान बना प्रशासन के लिए आईना आज ग्रामीणों द्वारा किया गया श्रमदान केवल मिट्टी खोदने का कार्य नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के सामने एक सवाल के रूप में देखा जा रहा है। एक तरफ गांव के लोग वर्षों से श्मशान घाट तक सड़क की मांग कर रहे हैं और दूसरी तरफ जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने स्वयं ही रास्ता बनाने का निर्णय लिया। गांव की महिलाओं का खेतों में उतरकर गैंती-फावड़ा चलाना इस बात का प्रतीक है कि ग्रामीण अब अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए संगठित होकर आवाज उठाने लगे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे सड़क निर्माण का कार्य किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं बल्कि अपने गांव और अपने शांति धाम के सम्मान के लिए कर रहे हैं। प्रशासन से सात प्रमुख मांगें ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि— 1. शांति धाम तक जाने वाले पूरे मार्ग का तत्काल राजस्व सीमांकन कराया जाए। 2. रास्ते में आने वाली सरकारी, निजी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाए। 3. संबंधित भूमि के दान, स्वामित्व एवं राजस्व रिकॉर्ड की जांच की जाए। 4. यदि कोई व्यक्ति रास्ते में आपत्ति कर रहा है तो दोनों पक्षों की सुनवाई कर वैधानिक समाधान निकाला जाए। 5. सुदूर सड़क/एप्रोच रोड के प्रस्ताव एवं एस्टीमेट की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए। 6. संबंधित इंजीनियर एवं पंचायत अधिकारियों को मौके पर भेजकर सड़क निर्माण की कार्यवाही शुरू कराई जाए। 7. शांति धाम तक स्थायी, सर्वसुलभ और बरसात में भी उपयोग योग्य सड़क का निर्माण कराया जाए। “अब शांति धाम तक रास्ता बनाकर ही दम लेंगे” ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी व्यक्ति विशेष से संघर्ष नहीं चाहते। उनका संघर्ष केवल उस समस्या से है जिसने गांव के लोगों को वर्षों से परेशान कर रखा है। ग्रामीणों ने कहा कि अंतिम यात्रा किसी जाति, धर्म, दल या व्यक्ति की नहीं होती। मृत्यु के बाद प्रत्येक व्यक्ति को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक ले जाना पड़ता है। इसलिए श्मशान घाट तक रास्ता होना किसी भी गांव की बुनियादी आवश्यकता है। ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रशासन से न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। यदि प्रशासन मौके पर आकर राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर रास्ता निर्धारित करता है और सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करता है तो ग्रामीण हर संभव सहयोग करने को तैयार हैं। अब देखना होगा प्रशासन क्या कदम उठाता है बड़झिर की यह तस्वीर अब केवल एक गांव की समस्या नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन गई है। एक ओर ग्रामीण महिलाएं और पुरुष अपने हाथों में गैंती, फावड़ा और तसला लेकर शांति धाम तक रास्ता बनाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर पंचायत और प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वे इस समस्या का स्थायी और वैधानिक समाधान कब तक करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे चाहते हैं कि यह मामला किसी राजनीतिक टकराव का रूप न ले। प्रशासन निष्पक्ष जांच करे, भूमि और रास्ते की वास्तविक स्थिति सामने लाए और सभी पक्षों को सुनकर निर्णय करे। श्मशान घाट तक रास्ता किसी व्यक्ति की कृपा नहीं, बल्कि गांव की मूलभूत आवश्यकता है। अब सवाल यही है कि क्या ग्राम पंचायत, जनपद और प्रशासन ग्रामीणों की इस आवाज को सुनकर शांति धाम तक स्थायी सड़क उपलब्ध कराएगा, या फिर ग्रामीणों को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए इसी तरह स्वयं गैंती-फावड़ा लेकर सड़क बनानी पड़ेगी? ग्रामीणों की स्पष्ट मांग “हमें किसी से लड़ाई नहीं चाहिए, हमें सिर्फ शांति धाम तक जाने का सम्मानजनक रास्ता चाहिए। राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जांच कराइए, रास्ता निर्धारित कराइए और सड़क बनाइए।”
    3
    *श्मशान घाट की रोड बनाने ग्राम बडझिर की महिलाओं ने संभाली कमान*
*श्मशान घाट/शांति धाम तक रास्ते के लिए ग्राम बड़झिर में नाराज ग्रामीणों महिलाओं ने खुद संभाली कमान भाजपा नेता नीलकंठ तिवारी जो जिला संगठन मंत्री है उस पर लगाया रोड न बनने देने का आरोप*
*ग्राम बड़झिर में सड़क के अभाव से नाराज ग्रामीणों का अनोखा विरोध — महिलाओं ने भी हाथों में फावड़ा, गैंती और तसला लेकर शुरू किया रास्ता बनाने का काम*
बड़झिर/मोहगांव सड़क।
ग्राम पंचायत मोहगांव सड़क के अंतर्गत आने वाले ग्राम बड़झिर में श्मशान घाट “शांति धाम” तक पहुंचने के लिए समुचित सड़क नहीं होने का मामला अब ग्रामीणों के आक्रोश का कारण बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के लगभग 80 वर्ष बाद भी गांव के लोगों को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक पहुंचने के लिए व्यवस्थित मार्ग उपलब्ध नहीं हो पाया है। बरसात के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है तथा कीचड़, पानी और खराब रास्ते के कारण शवयात्रा लेकर श्मशान घाट तक पहुंचना ग्रामीणों के लिए बेहद कठिन हो जाता है।
*भाजपा नेता नीलकंठ तिवारी पर ग्रामीणों के आरोप निष्पक्ष जांच की मांग*
*ग्रामीणों ने भाजपा नेता नीलकंठ तिवारी को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। कुछ ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें राजनीतिक प्रभाव का हवाला देकर डराने या दबाव बनाने का प्रयास किया जाता है।*
ग्रामीणों द्वारा कथित रूप से यह भी कहा जा रहा है कि राजनीतिक पद और सामाजिक पहचान के आधार पर किसी व्यक्ति को सार्वजनिक रास्ते के मामले में विशेष अधिकार नहीं मिल सकता।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। नीलकंठ तिवारी का पक्ष इस मामले में अत्यंत महत्वपूर्ण है और उनके द्वारा यदि भूमि संबंधी दस्तावेज, राजस्व रिकॉर्ड या रास्ते पर आपत्ति का कोई वैधानिक आधार प्रस्तुत किया जाता है तो उसे भी सार्वजनिक रूप से सामने रखा जाना चाहिए।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि समस्या का समाधान प्रशासन और पंचायत से होने की प्रतीक्षा करने के बजाय ग्रामीणों ने स्वयं ही रास्ता बनाने का बीड़ा उठा लिया। ग्राम सभा की बैठक में ग्रामीणों के बीच चर्चा और निर्णय के बाद गांव की महिलाओं एवं ग्रामीणों ने हाथों में गैंती, कुदारी, फावड़ा और तसले उठाए और शांति धाम तक पहुंचने वाले रास्ते पर श्रमदान शुरू कर दिया।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सड़क बनाने का काम नहीं है, बल्कि यह उनके मूलभूत अधिकार, सम्मान और अंतिम संस्कार के अधिकार की आवाज है।
“जीते-जी रास्ता नहीं तो कम से कम अंतिम यात्रा का रास्ता तो मिले”
ग्रामीणों का कहना है कि गांव में रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को जीवन के अंतिम पड़ाव पर श्मशान घाट तक पहुंचने का अधिकार है। इसके लिए किसी व्यक्ति विशेष की कृपा या अनुमति पर निर्भरता नहीं होनी चाहिए।
ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि जब घर का कोई सदस्य दुनिया से विदा होता है, तब परिवार पहले ही दुख में डूबा होता है। ऐसे समय में शवयात्रा को खराब और कच्चे रास्ते से ले जाना अत्यंत पीड़ादायक हो जाता है। बरसात में रास्ते की स्थिति और खराब हो जाती है।
इसी पीड़ा के चलते ग्रामीणों ने कहा कि यदि शासन-प्रशासन और ग्राम पंचायत सड़क बनाने में असमर्थ हैं, तो गांव के लोग स्वयं श्रमदान करके रास्ता बनाएंगे।
ग्राम सभा के बाद ग्रामीणों ने खुद उठाए औजार
प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम सभा की बैठक में श्मशान घाट तक सड़क निर्माण को लेकर चर्चा हुई। ग्रामीणों का कहना है कि लंबे समय से इस मार्ग की समस्या पंचायत और संबंधित अधिकारियों के सामने रखी जा रही है, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
बैठक के बाद ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से निर्णय लिया कि अब वे किसी के भरोसे नहीं बैठेंगे। इसके बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण महिलाएं और पुरुष खेतों की ओर पहुंचे और गैंती, फावड़ा, कुदारी तथा तसले लेकर रास्ते को तैयार करने के काम में जुट गए।
महिलाओं का इस तरह आगे आना ग्रामीणों के लिए विशेष चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि जब जनप्रतिनिधि और पंचायत व्यवस्था समस्या का समाधान नहीं कर पा रही है, तब गांव की मातृशक्ति ने स्वयं आगे आकर जिम्मेदारी संभाली है।
जमीन को लेकर विवाद, ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीणों ने भाजपा नेता नीलकंठ तिवारी, जिन्हें ग्रामीण भाजपा जिला संगठन मंत्री के पद पर होना बता रहे हैं, पर श्मशान घाट तक जाने वाले रास्ते में बाधा उत्पन्न करने के आरोप लगाए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि शांति धाम तक पहुंचने वाले रास्ते का एक हिस्सा उनकी जमीन से होकर गुजरता है और वे ग्रामीणों को उस ओर से जाने से रोकते हैं। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि जिस भूमि को लेकर विवाद बताया जा रहा है, उसमें से कुछ भूमि पूर्व में गांव में स्कूल निर्माण के लिए दान किए जाने की बात कही जाती है।
हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से राजस्व अभिलेखों एवं संबंधित दस्तावेजों के आधार पर पुष्टि किया जाना आवश्यक है। यदि भूमि वास्तव में दान की गई थी तो उसकी वैधानिक स्थिति, दानपत्र, राजस्व रिकॉर्ड और वर्तमान स्वामित्व की जांच किए जाने की मांग ग्रामीणों द्वारा की जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान घाट तक जाने के लिए आगे किसानों की जमीन भी आती है और संबंधित किसान कथित तौर पर रास्ते के लिए जमीन देने को तैयार हैं। ऐसे में उनका सवाल है कि यदि अन्य ग्रामीण अपनी जमीन देने को तैयार हैं तो रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान क्यों नहीं किया जा रहा?
“गांव वाले जमीन देने को तैयार, फिर रास्ता क्यों नहीं?”
ग्रामीणों का कहना है कि शांति धाम तक पहुंचने के लिए जिस मार्ग की आवश्यकता है, उसमें कई किसान सहयोग करने को तैयार हैं। ग्रामीणों के अनुसार यदि प्रशासन मौके पर पहुंचकर सीमांकन कराए और उपलब्ध भूमि तथा सरकारी भूमि की वास्तविक स्थिति स्पष्ट करे, तो रास्ते का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि पूरे मामले का राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर निष्पक्ष सीमांकन कराया जाए। यह भी स्पष्ट किया जाए कि श्मशान घाट तक जाने वाला रास्ता किस भूमि से होकर गुजरता है, रास्ते की चौड़ाई कितनी है तथा पंचायत अथवा शासन की ओर से इस मार्ग के निर्माण के लिए क्या प्रावधान किया जा सकता है।
सुदूर सड़क योजना का एस्टीमेट भी अधर में?
ग्रामीणों ने संबंधित तकनीकी अमले की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार इंजीनियर योगेन्द्र कुमरे द्वारा श्मशान घाट तक पहुंच मार्ग के लिए सुदूर सड़क अथवा एप्रोच रोड का एस्टीमेट तैयार करने की बात सामने आई थी, लेकिन अभी तक सड़क का निर्माण धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि संबंधित अधिकारी से संपर्क करने में भी परेशानी होती है और कई बार अधिकारी क्षेत्र में उपलब्ध नहीं रहते। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मामले में केवल कागजी कार्रवाई न हो बल्कि अधिकारी मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति देखें और सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करें।
यदि सड़क निर्माण के लिए पहले से कोई प्रस्ताव, एस्टीमेट या स्वीकृति जारी हुई है तो उसकी वर्तमान स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
पंचायत की भूमिका पर भी उठे सवाल
ग्राम पंचायत मोहगांव सड़क की कार्यप्रणाली को लेकर भी ग्रामीणों में नाराजगी देखी जा रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत का मूल दायित्व गांव की बुनियादी समस्याओं का समाधान करना है। सड़क, नाली, पेयजल और सार्वजनिक उपयोग की भूमि जैसे विषय पंचायत व्यवस्था के सामने लगातार आते हैं। लेकिन श्मशान घाट जैसे अत्यंत आवश्यक सार्वजनिक स्थल तक पहुंचने के लिए भी यदि ग्रामीणों को स्वयं सड़क बनानी पड़े तो यह पंचायत व्यवस्था की कार्यक्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों का कहना है कि शांति धाम कोई निजी स्थान नहीं है। यहां गांव के प्रत्येक परिवार को अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ता है। इसलिए वहां तक पहुंचने का मार्ग भी सार्वजनिक सुविधा के रूप में विकसित किया जाना चाहिए।
महिलाओं ने कहा — “अब हम पीछे नहीं हटेंगे”
रास्ता निर्माण के दौरान गांव की महिलाओं की भागीदारी विशेष रूप से दिखाई दी। महिलाओं ने अपने हाथों में फावड़ा और तसला लेकर मिट्टी हटाने तथा रास्ता बनाने के कार्य में सहयोग किया।
महिलाओं का कहना था कि वे किसी से विवाद नहीं चाहतीं। उनकी मांग केवल इतनी है कि गांव के लोगों को श्मशान घाट तक सम्मानपूर्वक पहुंचने के लिए रास्ता मिले।
ग्रामीण महिलाओं ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति रास्ते में आपत्ति करता है तो प्रशासन को मौके पर आकर राजस्व रिकॉर्ड देखना चाहिए और निष्पक्ष निर्णय लेना चाहिए। गांव के लोगों को कानून हाथ में लेने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन प्रशासन को भी उनकी समस्या को गंभीरता से लेना चाहिए।
ग्रामीणों की मांग है कि प्रशासन दोनों पक्षों को बुलाकर सुनवाई करे और दस्तावेजों के आधार पर निर्णय ले।
“किसी की जमीन पर जबरन कब्जा नहीं, लेकिन सार्वजनिक रास्ता भी जरूरी”
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी व्यक्ति की निजी भूमि पर अवैध कब्जा करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका कहना है कि यदि रास्ते को लेकर भूमि विवाद है तो उसका समाधान कानून और राजस्व नियमों के अनुसार किया जाए।
ग्रामीणों की मुख्य मांग यह है कि शांति धाम तक पहुंचने के लिए वैधानिक और स्थायी रास्ता उपलब्ध कराया जाए।
यदि संबंधित भूमि निजी है तो प्रशासन वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाश सकता है। यदि रास्ता सरकारी अथवा सार्वजनिक उपयोग की भूमि में आता है तो उसकी स्थिति स्पष्ट कर रास्ते को अतिक्रमणमुक्त किया जा सकता है।
इसीलिए ग्रामीणों ने कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत एवं ग्राम पंचायत से संयुक्त रूप से मौके का निरीक्षण कर समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।
ग्रामीणों का श्रमदान बना प्रशासन के लिए आईना
आज ग्रामीणों द्वारा किया गया श्रमदान केवल मिट्टी खोदने का कार्य नहीं बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था के सामने एक सवाल के रूप में देखा जा रहा है।
एक तरफ गांव के लोग वर्षों से श्मशान घाट तक सड़क की मांग कर रहे हैं और दूसरी तरफ जब समस्या का समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों ने स्वयं ही रास्ता बनाने का निर्णय लिया।
गांव की महिलाओं का खेतों में उतरकर गैंती-फावड़ा चलाना इस बात का प्रतीक है कि ग्रामीण अब अपनी बुनियादी सुविधाओं के लिए संगठित होकर आवाज उठाने लगे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे सड़क निर्माण का कार्य किसी राजनीतिक दल के विरोध में नहीं बल्कि अपने गांव और अपने शांति धाम के सम्मान के लिए कर रहे हैं।
प्रशासन से सात प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि—
1. शांति धाम तक जाने वाले पूरे मार्ग का तत्काल राजस्व सीमांकन कराया जाए।
2. रास्ते में आने वाली सरकारी, निजी एवं सार्वजनिक उपयोग की भूमि की स्थिति स्पष्ट की जाए।
3. संबंधित भूमि के दान, स्वामित्व एवं राजस्व रिकॉर्ड की जांच की जाए।
4. यदि कोई व्यक्ति रास्ते में आपत्ति कर रहा है तो दोनों पक्षों की सुनवाई कर वैधानिक समाधान निकाला जाए।
5. सुदूर सड़क/एप्रोच रोड के प्रस्ताव एवं एस्टीमेट की वर्तमान स्थिति सार्वजनिक की जाए।
6. संबंधित इंजीनियर एवं पंचायत अधिकारियों को मौके पर भेजकर सड़क निर्माण की कार्यवाही शुरू कराई जाए।
7. शांति धाम तक स्थायी, सर्वसुलभ और बरसात में भी उपयोग योग्य सड़क का निर्माण कराया जाए।
“अब शांति धाम तक रास्ता बनाकर ही दम लेंगे”
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी व्यक्ति विशेष से संघर्ष नहीं चाहते। उनका संघर्ष केवल उस समस्या से है जिसने गांव के लोगों को वर्षों से परेशान कर रखा है।
ग्रामीणों ने कहा कि अंतिम यात्रा किसी जाति, धर्म, दल या व्यक्ति की नहीं होती। मृत्यु के बाद प्रत्येक व्यक्ति को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट तक ले जाना पड़ता है। इसलिए श्मशान घाट तक रास्ता होना किसी भी गांव की बुनियादी आवश्यकता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे प्रशासन से न्यायपूर्ण और शांतिपूर्ण समाधान चाहते हैं। यदि प्रशासन मौके पर आकर राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर रास्ता निर्धारित करता है और सड़क निर्माण की प्रक्रिया शुरू करता है तो ग्रामीण हर संभव सहयोग करने को तैयार हैं।
अब देखना होगा प्रशासन क्या कदम उठाता है
बड़झिर की यह तस्वीर अब केवल एक गांव की समस्या नहीं बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा सवाल बन गई है।
एक ओर ग्रामीण महिलाएं और पुरुष अपने हाथों में गैंती, फावड़ा और तसला लेकर शांति धाम तक रास्ता बनाने में जुटे हैं, वहीं दूसरी ओर पंचायत और प्रशासन के सामने यह चुनौती है कि वे इस समस्या का स्थायी और वैधानिक समाधान कब तक करते हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि वे चाहते हैं कि यह मामला किसी राजनीतिक टकराव का रूप न ले। प्रशासन निष्पक्ष जांच करे, भूमि और रास्ते की वास्तविक स्थिति सामने लाए और सभी पक्षों को सुनकर निर्णय करे।
श्मशान घाट तक रास्ता किसी व्यक्ति की कृपा नहीं, बल्कि गांव की मूलभूत आवश्यकता है।
अब सवाल यही है कि क्या ग्राम पंचायत, जनपद और प्रशासन ग्रामीणों की इस आवाज को सुनकर शांति धाम तक स्थायी सड़क उपलब्ध कराएगा, या फिर ग्रामीणों को अपनी बुनियादी जरूरत के लिए इसी तरह स्वयं गैंती-फावड़ा लेकर सड़क बनानी पड़ेगी?
ग्रामीणों की स्पष्ट मांग
“हमें किसी से लड़ाई नहीं चाहिए, हमें सिर्फ शांति धाम तक जाने का सम्मानजनक रास्ता चाहिए। राजस्व रिकॉर्ड के आधार पर जांच कराइए, रास्ता निर्धारित कराइए और सड़क बनाइए।”
    user_बिहारीलाल सोनी
    बिहारीलाल सोनी
    पत्रकार कुरई, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • कलेक्टर ने की 'प्रोजेक्ट सिवनी की उड़ान' की समीक्षा... सिवनी जिला कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने 'प्रोजेक्ट सिवनी की उड़ान' की समीक्षा करते हुए जिले के अधिक से अधिक युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं व पुलिस भर्ती से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने वंचित युवाओं तक व्यापक प्रचार-प्रसार कर पंजीयन कराने तथा मॉक टेस्ट व नियमित रिवीजन पर विशेष जोर दिया। इसी क्रम में 22 अगस्त 2026 को पंजीकृत महिला अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक परीक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा, जहाँ नए पंजीयन की सुविधा भी मिलेगी।
    1
    कलेक्टर ने की 'प्रोजेक्ट सिवनी की उड़ान' की समीक्षा...
सिवनी जिला कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने 'प्रोजेक्ट सिवनी की उड़ान' की समीक्षा करते हुए जिले के अधिक से अधिक युवाओं को प्रतियोगी परीक्षाओं व पुलिस भर्ती से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने वंचित युवाओं तक व्यापक प्रचार-प्रसार कर पंजीयन कराने तथा मॉक टेस्ट व नियमित रिवीजन पर विशेष जोर दिया।
इसी क्रम में 22 अगस्त 2026 को पंजीकृत महिला अभ्यर्थियों के लिए शारीरिक परीक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा, जहाँ नए पंजीयन की सुविधा भी मिलेगी।
    user_Devendra thakur
    Devendra thakur
    Salesperson सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • Seoni News: रफ्तार का कहर, तेज रफ्तार कार पलटी, चालक घायल
    1
    Seoni News: रफ्तार का कहर, तेज रफ्तार कार पलटी, चालक घायल
    user_BS News Network
    BS News Network
    Local News Reporter सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    17 hrs ago
  • युवा परिवर्तन संघ ने बिछुआ ब्लॉक के स्कूलों में बांटी किताबें और पेन अभिजीत मिंटू पटेल के नेतृत्व में बच्चों को दी गई शिक्षा सामग्री बिछुआ। युवा परिवर्तन संघ के नेतृत्व में सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत मिंटू पटेल ने बिछुआ ब्लॉक के प्रत्येक स्कूलों में जाकर बच्चों को पेन और किताबें गिफ्ट कीं।इस पहल का उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देना और जरूरतमंद बच्चों की मदद करना था। संघ के सदस्यों ने स्कूल पहुंचकर बच्चों से मुलाकात की और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ देखी गई। पेन और किताबें पाकर बच्चों ने खुशी-खुशी धन्यवाद कहा। शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसी सामाजिक मदद से बच्चों का मनोबल बढ़ता है। अभिजीत मिंटू पटेल ने कहा कि "शिक्षा ही समाज की असली ताकत है। युवा परिवर्तन संघ का प्रयास है कि बिछुआ ब्लॉक का कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में पढ़ाई से वंचित न रहे। आगे भी इस तरह के सेवा कार्य जारी रहेंगे।" संघ के पदाधिकारियों ने यहां भी कहा कि युवा परिवर्तन संघ के आगे में भी ऐसे कार्य किए जाएंगे।
    1
    युवा परिवर्तन संघ ने बिछुआ ब्लॉक के स्कूलों में बांटी किताबें और पेन  
अभिजीत मिंटू पटेल के नेतृत्व में बच्चों को दी गई शिक्षा सामग्री
बिछुआ। युवा परिवर्तन संघ के नेतृत्व में सामाजिक कार्यकर्ता अभिजीत मिंटू पटेल  ने बिछुआ ब्लॉक के प्रत्येक स्कूलों में जाकर बच्चों को पेन और किताबें गिफ्ट कीं।इस पहल का उद्देश्य शिक्षा को बढ़ावा देना और जरूरतमंद बच्चों की मदद करना था। संघ के सदस्यों ने स्कूल पहुंचकर बच्चों से मुलाकात की और उन्हें पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित किया।
कार्यक्रम के दौरान बच्चों के चेहरे पर खुशी साफ देखी गई। पेन और किताबें पाकर बच्चों ने खुशी-खुशी धन्यवाद कहा। शिक्षकों ने भी इस पहल की सराहना की और कहा कि ऐसी सामाजिक मदद से बच्चों का मनोबल बढ़ता है।
अभिजीत मिंटू पटेल  ने कहा कि "शिक्षा ही समाज की असली ताकत है। युवा परिवर्तन संघ का प्रयास है कि बिछुआ ब्लॉक का कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में पढ़ाई से वंचित न रहे। आगे भी इस तरह के सेवा कार्य जारी रहेंगे।"
संघ के पदाधिकारियों ने यहां भी कहा कि युवा परिवर्तन संघ के आगे में भी ऐसे कार्य किए जाएंगे।
    user_Baljeet Chouhan
    Baljeet Chouhan
    Credit reporting agency बिछुआ, छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • *राज्य कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन* भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर देशव्यापी आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंग के नेतृत्व में राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष सतीश गोंडाने,जिला अध्यक्ष रमेश शर्मा,सचिव अरविंद भट्ट एवं कोषाध्यक्ष शंकरलाल ब्रम्हे के द्वारा प्रदेश के मुखिया माननीय डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश को कलेक्टर महोदय के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया प्रमुख मांगो में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, शिक्षकों के लिए TET शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों मुक्त रखने हेतु पुनर्विचार करने, शिक्षकों की वरिष्ठता की गणना नियुक्ति दिनांक से की जावे, ईअटेंडेंस की अनिवार्यता के आदेश में संशोधन, लिपिकों के वेतनमान को मंत्रालय में कार्यरत लिपिक के वेतनमान के अनुसार किया जावे। शिक्षा विभाग अंतर्गत सहायक अध्यापक/शिक्षक एवं अध्यापक/उच्च श्रेणी शिक्षक की पदोन्नति शीघ्र की जावे। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमोन्नति संबंधी आदेश शीघ्र किये जावे। क्रमोन्नति प्राप्त लोकसेवकों को एरियर्स राशि का भुगतान शीघ्र किया जावे सहित अन्य विभागों की प्रमुख मांगे शामिल है। कार्यक्रम में राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ.महेंद्र मौर्य, तहसील अध्यक्ष शेखर पाण्डेय, जितेश राय,अरुण दत्त मिश्रा,रामाजी पाठे,संतोष डोंगरे, देवराव पवार, सुशील दोईजड़,शिवमन गौतम,आकाश पवार, विनोद हेड़ाऊ आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे। *राज्य कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन* भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर देशव्यापी आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंग के नेतृत्व में राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष सतीश गोंडाने,जिला अध्यक्ष रमेश शर्मा,सचिव अरविंद भट्ट एवं कोषाध्यक्ष शंकरलाल ब्रम्हे के द्वारा प्रदेश के मुखिया माननीय डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश को कलेक्टर महोदय के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया प्रमुख मांगो में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, शिक्षकों के लिए TET शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों मुक्त रखने हेतु पुनर्विचार करने, शिक्षकों की वरिष्ठता की गणना नियुक्ति दिनांक से की जावे, ईअटेंडेंस की अनिवार्यता के आदेश में संशोधन, लिपिकों के वेतनमान को मंत्रालय में कार्यरत लिपिक के वेतनमान के अनुसार किया जावे। शिक्षा विभाग अंतर्गत सहायक अध्यापक/शिक्षक एवं अध्यापक/उच्च श्रेणी शिक्षक की पदोन्नति शीघ्र की जावे। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमोन्नति संबंधी आदेश शीघ्र किये जावे। क्रमोन्नति प्राप्त लोकसेवकों को एरियर्स राशि का भुगतान शीघ्र किया जावे सहित अन्य विभागों की प्रमुख मांगे शामिल है। कार्यक्रम में राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ.महेंद्र मौर्य, तहसील अध्यक्ष शेखर पाण्डेय, जितेश राय,अरुण दत्त मिश्रा,रामाजी पाठे,संतोष डोंगरे, देवराव पवार, सुशील दोईजड़,शिवमन गौतम,आकाश पवार, विनोद हेड़ाऊ आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
    4
    *राज्य कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन*
भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर देशव्यापी आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंग के नेतृत्व में राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष सतीश गोंडाने,जिला अध्यक्ष रमेश शर्मा,सचिव अरविंद भट्ट एवं कोषाध्यक्ष शंकरलाल ब्रम्हे के द्वारा प्रदेश के मुखिया माननीय डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश को कलेक्टर महोदय के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया प्रमुख मांगो में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, शिक्षकों के लिए TET शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों मुक्त रखने हेतु पुनर्विचार करने, शिक्षकों की वरिष्ठता की गणना नियुक्ति दिनांक से की जावे, ईअटेंडेंस की अनिवार्यता के आदेश में संशोधन, लिपिकों के वेतनमान को मंत्रालय में कार्यरत लिपिक के वेतनमान के अनुसार किया जावे। शिक्षा विभाग अंतर्गत सहायक अध्यापक/शिक्षक  एवं अध्यापक/उच्च श्रेणी शिक्षक की पदोन्नति शीघ्र की जावे। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमोन्नति संबंधी आदेश शीघ्र किये जावे। क्रमोन्नति प्राप्त लोकसेवकों को एरियर्स राशि का भुगतान शीघ्र किया जावे सहित अन्य विभागों की प्रमुख मांगे शामिल है। कार्यक्रम में राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ.महेंद्र मौर्य, तहसील अध्यक्ष शेखर पाण्डेय, जितेश राय,अरुण दत्त मिश्रा,रामाजी पाठे,संतोष डोंगरे, देवराव पवार, सुशील दोईजड़,शिवमन गौतम,आकाश पवार, विनोद हेड़ाऊ आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
*राज्य कर्मचारी संघ ने सौंपा ज्ञापन*
भारतीय मजदूर संघ के आह्वान पर देशव्यापी आंदोलन में भारतीय मजदूर संघ के प्रदेश अध्यक्ष संजय सिंग के नेतृत्व में राज्य कर्मचारी संघ के संभागीय अध्यक्ष सतीश गोंडाने,जिला अध्यक्ष रमेश शर्मा,सचिव अरविंद भट्ट एवं कोषाध्यक्ष शंकरलाल ब्रम्हे के द्वारा प्रदेश के मुखिया माननीय डॉक्टर मोहन यादव मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश को कलेक्टर महोदय के माध्यम से ज्ञापन सौंपा गया प्रमुख मांगो में पुरानी पेंशन योजना की बहाली, शिक्षकों के लिए TET शिक्षक पात्रता परीक्षा की अनिवार्यता से 2009 से पूर्व नियुक्त शिक्षकों मुक्त रखने हेतु पुनर्विचार करने, शिक्षकों की वरिष्ठता की गणना नियुक्ति दिनांक से की जावे, ईअटेंडेंस की अनिवार्यता के आदेश में संशोधन, लिपिकों के वेतनमान को मंत्रालय में कार्यरत लिपिक के वेतनमान के अनुसार किया जावे। शिक्षा विभाग अंतर्गत सहायक अध्यापक/शिक्षक  एवं अध्यापक/उच्च श्रेणी शिक्षक की पदोन्नति शीघ्र की जावे। प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय क्रमोन्नति संबंधी आदेश शीघ्र किये जावे। क्रमोन्नति प्राप्त लोकसेवकों को एरियर्स राशि का भुगतान शीघ्र किया जावे सहित अन्य विभागों की प्रमुख मांगे शामिल है। कार्यक्रम में राज्य कर्मचारी संघ के पूर्व जिला अध्यक्ष डॉ.महेंद्र मौर्य, तहसील अध्यक्ष शेखर पाण्डेय, जितेश राय,अरुण दत्त मिश्रा,रामाजी पाठे,संतोष डोंगरे, देवराव पवार, सुशील दोईजड़,शिवमन गौतम,आकाश पवार, विनोद हेड़ाऊ आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे।
    user_संतोष कुमार बाथरी
    संतोष कुमार बाथरी
    Chhindwara, Madhya Pradesh•
    13 hrs ago
  • नवांकुर सखी द्वारा हरियाली यात्रा का सेक्टर स्तरीय कार्यक्रम चंगेरा में संपन्न* *विकासखंड के सभी 25 प्रस्फुटन समितियों में नवांकुर सखीयो की सहभागिता* वारासिवनी। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड वारासिवनी द्वारा हरियाली अमावस्या के पावन अवसर से प्रारम्भ हरियाली नवांकुर सखी यात्रा आज ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति चंगेरा में सेक्टर स्तरीय कार्यक्रम आनंदमय उत्साहपूर्वक वातावरण में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम पंचायत चंगेरा के सभागार में मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष पूजा-अर्चना के साथ हुआ संगोष्ठी चौपाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जन अभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक सुरेंद्र कुमार भगत ने नवांकुर सखी कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि जन अभियान परिषद के माध्यम से आओ बनाए मध्य प्रदेश के अंतर्गत अनेकानेक जन जागरूकता के कार्यक्रम किया जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 313 विकासखंड में हरियाली अमावस्या से प्रारंभ होकर प्रत्येक गांव में नवांकुर सखियों के माध्यम से पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के लिए जन जागरूकता रैली कलश यात्रा और अन्य जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीण लोगों को पर्यावरण के प्रति जन जागरूक करना अधिक से अधिक पौधे लगाना और उनका संरक्षण और संवर्धन करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए हमारे पूर्वजों ने बहुत पहले से ही आम, नीम, जामुन, बढ़, पीपल, बरगद, जैसे फलदार और छायादार पौधे लगाने को जोर दिया और गांव में बड़े-बड़े फलों के बगीचे हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद इसी प्रकार नवांकुर नर्सरी नवांकुर वन के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए काम कर रहा है, जिसमें आप सभी इस काम को आगे बढ़ाने में जन अभियान परिषद का सहयोग करें। करियर शिक्षा समिति के अध्यक्ष निरंजन बिसेन ने कहा कि जन अभियान परिषद अपने प्रारंभ कल से ही पर्यावरण के संरक्षण लिए काम कर रहा है। इसी के अंतर्गत आज हमारी केरियर शिक्षा समिति के माध्यम से यह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा लाडली लक्ष्मी, लाडली बहन और अब नवांकुर सखी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रहा है। आप सभी सशक्त बने यही मध्य प्रदेश सरकार चाहती भी है। इसके साथ-साथ आप सामाजिक सहभागिता के काम में भी आगे आए और सामाजिक सरोकार के काम आप सभी को करना है, ऐसी मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नवांकुर सखी के माध्यम से आप स्वर्णिम मध्य प्रदेश बनाने में प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री का साथ देंगे । कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद पंचायत वारासिवनी अध्यक्ष श्रीमती माया उईके ने कहा कि यह हमारी भूमि देवभूमि है और इस देवभूमि पर हम सब लोग प्रकृति के पूजा करें और प्रकृति की पूजा हम वृक्ष लगाकर इसे हरा-भरा करने में सहयोगी बने, हम रासायनिक खादो का उपयोग कम कर जैविकता की ओर बड़े और गौशाला पशुधन को महत्व दें। उन्होंने कहा कि हम सब लोगों को देसी गायों के माध्यम से अपनी प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन करना चाहिए। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही जनपद पंचायत वारासिवनी की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा निरंजन बिसेन ने कहा कि आज समाज में जितनी सहभागिता पुरुष वर्ग की है, उतनी ही हम सब माता बहनों की है। हम सब लोगों को अपने घर गृहस्थी के काम के साथ-साथ समाज के काम में भी हाथ बटाना चाहिए। जन अभियान परिषद के माध्यम से यह अभिनव कार्यक्रम नवांकुर सखी हम सब लोगों के लिए प्रेरणादायक बनेगा और हम सब पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के लिए कम करें और अपने गांव खेत खलियान में अधिक से अधिक पौधे लगाने का काम करें । संवाद चौपाल कार्यक्रम के पश्चात नवांकुर सखी और ग्रामीणों द्वारा कलश यात्रा ढोल मंजीरे के साथ प्रारंभ कर हनुमान मंदिर में समापन किया गया। यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रेरणादायक पर्यावरण संबंधी नारे लगाए गए। कलश यात्रा ग्राम का भ्रमण करते हुए हनुमान मंदिर पहुंची, जहां नवांकुर सखियों द्वारा जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना किया गया । इसके उपरांत स्कुल प्रांगण में नवांकुर योजना के अंतर्गत पर्यावरण संरक्षण हेतु पौधारोपण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्रीमती माया उईके अध्यक्ष जनपद पंचायत वारासिवनी, श्रीमती पुष्पा निरंजन बिसेन पूर्व अध्यक्ष जनपद पंचायत वारासिवनी, निरंजन बिसेन सामाजिक कार्यकर्ता एवं अध्यक्ष केरियर शिक्षा समिति, सुरेन्द्र कुमार भगत विकासखंड समन्वयक, संजय टेम्भरे अध्यक्ष ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति, कोमेन्द्र बिसेन परामर्शदाता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग और नवांकुर सखीयां उपस्थित रहे।
    3
    नवांकुर सखी द्वारा हरियाली यात्रा का सेक्टर स्तरीय कार्यक्रम चंगेरा में संपन्न*
 *विकासखंड के सभी 25 प्रस्फुटन समितियों में नवांकुर सखीयो की सहभागिता* 
वारासिवनी। मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद विकासखंड वारासिवनी द्वारा हरियाली अमावस्या के पावन अवसर से प्रारम्भ हरियाली नवांकुर सखी यात्रा आज ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति चंगेरा में  सेक्टर स्तरीय कार्यक्रम आनंदमय उत्साहपूर्वक वातावरण में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ ग्राम  पंचायत चंगेरा के सभागार में मां सरस्वती के छायाचित्र के समक्ष पूजा-अर्चना के साथ हुआ  संगोष्ठी चौपाल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जन अभियान परिषद के विकासखंड समन्वयक सुरेंद्र कुमार भगत ने नवांकुर सखी कार्यक्रम की प्रस्तावना रखते हुए कहा कि जन अभियान परिषद के माध्यम से आओ बनाए मध्य प्रदेश के अंतर्गत अनेकानेक जन जागरूकता के कार्यक्रम किया जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत मध्यप्रदेश के 313 विकासखंड में हरियाली अमावस्या से प्रारंभ होकर प्रत्येक गांव में नवांकुर सखियों के माध्यम से पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के लिए जन जागरूकता रैली कलश यात्रा और अन्य जन चौपाल के माध्यम से ग्रामीण लोगों को पर्यावरण के प्रति जन जागरूक करना अधिक से अधिक पौधे लगाना और उनका संरक्षण और संवर्धन करना इसका प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण के लिए हमारे पूर्वजों ने बहुत पहले से ही आम, नीम, जामुन, बढ़, पीपल, बरगद, जैसे फलदार और छायादार पौधे लगाने को जोर दिया और गांव में बड़े-बड़े फलों के बगीचे हुआ करते थे। उन्होंने कहा कि जन अभियान परिषद इसी प्रकार नवांकुर नर्सरी नवांकुर वन के माध्यम से प्रकृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए काम कर रहा है, जिसमें आप सभी  इस काम को आगे बढ़ाने में जन अभियान परिषद का सहयोग करें। 
करियर शिक्षा समिति के अध्यक्ष निरंजन बिसेन ने कहा कि जन अभियान परिषद अपने प्रारंभ कल से ही पर्यावरण के संरक्षण लिए काम कर रहा है। इसी के अंतर्गत आज हमारी  केरियर शिक्षा समिति के माध्यम से यह कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। मध्यप्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री डॉक्टर मोहन यादव द्वारा लाडली लक्ष्मी,  लाडली बहन और अब नवांकुर सखी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण के लिए काम कर रहा है। आप सभी सशक्त बने यही मध्य प्रदेश सरकार चाहती भी है। इसके साथ-साथ आप सामाजिक सहभागिता के काम में भी आगे आए और सामाजिक सरोकार के काम आप सभी को करना है, ऐसी मध्य प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी योजना नवांकुर सखी  के माध्यम से आप स्वर्णिम मध्य प्रदेश बनाने में प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री का साथ देंगे ।   
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जनपद पंचायत वारासिवनी अध्यक्ष श्रीमती माया उईके ने कहा कि यह हमारी भूमि देवभूमि है और इस देवभूमि पर हम सब लोग प्रकृति के पूजा करें और प्रकृति की पूजा हम वृक्ष लगाकर इसे हरा-भरा करने में सहयोगी बने, हम रासायनिक खादो का उपयोग कम कर जैविकता की ओर बड़े और गौशाला पशुधन को महत्व दें। उन्होंने कहा कि हम सब लोगों को देसी गायों के माध्यम से अपनी प्रकृति का संरक्षण और संवर्धन करना चाहिए। 
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रही जनपद पंचायत वारासिवनी की पूर्व अध्यक्ष श्रीमती पुष्पा निरंजन बिसेन ने कहा कि आज समाज में जितनी सहभागिता पुरुष वर्ग की है, उतनी ही हम सब माता बहनों की है। हम सब लोगों को अपने घर गृहस्थी के काम के साथ-साथ समाज के काम में भी हाथ बटाना चाहिए। जन अभियान परिषद के माध्यम से यह अभिनव कार्यक्रम नवांकुर सखी हम सब लोगों के लिए प्रेरणादायक बनेगा और हम सब पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के लिए कम करें और अपने गांव खेत खलियान में अधिक से अधिक पौधे लगाने का काम करें ।  
संवाद चौपाल कार्यक्रम के पश्चात नवांकुर सखी और ग्रामीणों द्वारा कलश यात्रा ढोल मंजीरे के साथ प्रारंभ कर हनुमान मंदिर में समापन किया गया। यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण एवं वृक्षारोपण के प्रति ग्रामीणों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रेरणादायक पर्यावरण संबंधी नारे लगाए गए।
कलश यात्रा ग्राम का भ्रमण करते हुए हनुमान मंदिर पहुंची, जहां नवांकुर सखियों द्वारा जलाभिषेक एवं पूजा-अर्चना किया गया । इसके उपरांत स्कुल प्रांगण में नवांकुर योजना के अंतर्गत पर्यावरण  संरक्षण हेतु पौधारोपण का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से श्रीमती माया उईके अध्यक्ष जनपद पंचायत वारासिवनी, श्रीमती पुष्पा निरंजन बिसेन पूर्व अध्यक्ष जनपद पंचायत वारासिवनी, निरंजन  बिसेन सामाजिक कार्यकर्ता एवं अध्यक्ष केरियर शिक्षा समिति,  सुरेन्द्र कुमार भगत विकासखंड समन्वयक,  संजय टेम्भरे अध्यक्ष ग्राम विकास प्रस्फुटन समिति,  कोमेन्द्र बिसेन परामर्शदाता सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण लोग और नवांकुर सखीयां उपस्थित रहे।
    user_Aanand Verma
    Aanand Verma
    वारासिवनी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    13 hrs ago
  • अनुकम्पा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में करें निराकरण: कलेक्टर नेहा मीना ​सिवनी जिला कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने अनुकम्पा नियुक्ति और पदोन्नति के प्रकरणों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सहमति देने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया 10 दिवस के भीतर पूर्ण की जाए। ​कलेक्टर ने 31 अगस्त 2026 तक सभी विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि रिक्त पदों पर शेष अनुकम्पा प्रकरणों का निराकरण हो सके। साथ ही, अपात्र आवेदकों को नियम अनुसार आर्थिक अनुदान देने और राजस्व विभाग से समन्वय हेतु अपर कलेक्टर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
    1
    अनुकम्पा नियुक्ति के लंबित प्रकरणों का समय-सीमा में करें निराकरण: कलेक्टर नेहा मीना
​सिवनी जिला कलेक्टर श्रीमती नेहा मीना ने अनुकम्पा नियुक्ति और पदोन्नति के प्रकरणों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चतुर्थ श्रेणी के पदों पर सहमति देने वाले अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया 10 दिवस के भीतर पूर्ण की जाए।
​कलेक्टर ने 31 अगस्त 2026 तक सभी विभागों में पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि रिक्त पदों पर शेष अनुकम्पा प्रकरणों का निराकरण हो सके। साथ ही, अपात्र आवेदकों को नियम अनुसार आर्थिक अनुदान देने और राजस्व विभाग से समन्वय हेतु अपर कलेक्टर को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है।
    user_Devendra thakur
    Devendra thakur
    Salesperson सिवनी, सिवनी, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
  • पौनिया के छोटे तालाब में मिला 23 वर्षीय युवक का शव, हादसा या आत्महत्या पुलिस कर रही जांच
    1
    पौनिया के छोटे तालाब में मिला 23 वर्षीय युवक का शव, हादसा या आत्महत्या पुलिस कर रही जांच
    user_Dev Anand
    Dev Anand
    कटंगी, बालाघाट, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
View latest news on Shuru App
Download_Android
  • Terms & Conditions
  • Career
  • Privacy Policy
  • Blogs
Shuru, a product of Close App Private Limited.