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राजस्थान के भीलवाड़ा में खेत जाने के लिए निकले माँ-बेटे के शव पिपलिया गाँव के एक कुएँ से मिलने से हड़कंप मच गया। घटना के बाद पूरे गाँव में मातम पसरा हुआ है, जबकि पुलिस आत्महत्या, हादसा और हत्या तीनों पहलुओं पर जांच कर रही है।

on 16 May
user_Puneet jain
Puneet jain
भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
on 16 May

राजस्थान के भीलवाड़ा में खेत जाने के लिए निकले माँ-बेटे के शव पिपलिया गाँव के एक कुएँ से मिलने से हड़कंप मच गया। घटना के बाद पूरे गाँव में मातम पसरा हुआ है, जबकि पुलिस आत्महत्या, हादसा और हत्या तीनों पहलुओं पर जांच कर रही है।

  • user_Pinki Bhati
    Pinki Bhati
    Bhilwara, Rajasthan
    🙏
    on 20 May
More news from Rajasthan and nearby areas
  • महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार, राजस्थान पुलिस ने प्रदेशव्यापी विशेष यातायात एवं कानून पालन अभियान के आठवें दिन 8,448 वाहन चालकों के विरुद्ध व्यापक कार्रवाई की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना, यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना और आमजन में जिम्मेदार वाहन संचालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ. बी एल मीणा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने वाहनों में अवैध संरचनात्मक परिवर्तन, अनधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर व स्ट्रोब लाइट, प्रेशर हॉर्न, काली फिल्म, वाहनों पर अनाधिकृत शब्द व चिन्ह तथा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट लगाने जैसे उल्लंघनों पर विशेष कार्रवाई की है। आँकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि राज्य में सबसे ज्यादा 3,264 कार्रवाई वाहनों के शीशों पर काली फिल्म के खिलाफ की गईं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। इसके अतिरिक्त, नियम विरुद्ध और वीआईपी स्टाइल में नंबर प्लेट लगाने वाले 2,079 वाहन चालक, अपनी गाड़ियों पर अवैध रूप से पद, जाति या अनाधिकृत शब्द लिखवाने वाले 1,204 लोग, और बिना अनुमति के गाड़ी की चेसिस या बॉडी मॉडिफाई कराने वाले 861 वाहनों पर भी कार्रवाई की गई। पुलिस ने सड़कों पर बेवजह रौब झाड़ने और शोर मचाने वालों को भी नहीं बख्शा। राज्यभर में 544 मामले ऐसे सामने आए जहाँ गाड़ियों पर अनाधिकृत रूप से लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर या हूटर लगे हुए थे, जबकि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले 496 प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया। 'पटाखे' जैसी ध्वनि करती बुलेट गाड़ियों के विरुद्ध भी लगातार कार्रवाई की जा रही है। इस अभियान में कोटा शहर सर्वाधिक 572 कार्रवाइयों के साथ प्रथम स्थान पर रहा। अन्य जिलों में अजमेर में 416, बाड़मेर में 340, चित्तौड़गढ़ में 311, तथा भरतपुर में 309 कार्रवाइयाँ दर्ज की गईं। भीलवाड़ा में 281, झुंझुनूं में 257, जयपुर ग्रामीण में 247, तथा उदयपुर में 215 कार्रवाई कर नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए गए। जयपुर यातायात पुलिस ने भी 320 मामलों में, जोधपुर ट्रैफिक पुलिस ने 180 मामलों में, और जयपुर ग्रामीण पुलिस ने कुल 247 मामलों में कार्रवाई की है। महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने सभी पुलिस इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान निरंतर जारी रखे जाएँ। उन्होंने जोर देकर कहा कि यातायात नियमों का पालन केवल एक कानूनी दायित्व ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी भी है। राजस्थान पुलिस का लक्ष्य दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता बढ़ाकर एक सुरक्षित और अनुशासित यातायात व्यवस्था स्थापित करना है।
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    महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार, राजस्थान पुलिस ने प्रदेशव्यापी विशेष यातायात एवं कानून पालन अभियान के आठवें दिन 8,448 वाहन चालकों के विरुद्ध व्यापक कार्रवाई की है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा को मजबूत करना, यातायात नियमों का पालन सुनिश्चित करना और आमजन में जिम्मेदार वाहन संचालन के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

डीजी ट्रैफिक अनिल पालीवाल के पर्यवेक्षण में और अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस यातायात डॉ. बी एल मीणा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पुलिस ने वाहनों में अवैध संरचनात्मक परिवर्तन, अनधिकृत लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर व स्ट्रोब लाइट, प्रेशर हॉर्न, काली फिल्म, वाहनों पर अनाधिकृत शब्द व चिन्ह तथा नियम विरुद्ध नंबर प्लेट लगाने जैसे उल्लंघनों पर विशेष कार्रवाई की है।

आँकड़ों के विश्लेषण से पता चला है कि राज्य में सबसे ज्यादा 3,264 कार्रवाई वाहनों के शीशों पर काली फिल्म के खिलाफ की गईं, जो सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अवहेलना है। इसके अतिरिक्त, नियम विरुद्ध और वीआईपी स्टाइल में नंबर प्लेट लगाने वाले 2,079 वाहन चालक, अपनी गाड़ियों पर अवैध रूप से पद, जाति या अनाधिकृत शब्द लिखवाने वाले 1,204 लोग, और बिना अनुमति के गाड़ी की चेसिस या बॉडी मॉडिफाई कराने वाले 861 वाहनों पर भी कार्रवाई की गई।

पुलिस ने सड़कों पर बेवजह रौब झाड़ने और शोर मचाने वालों को भी नहीं बख्शा। राज्यभर में 544 मामले ऐसे सामने आए जहाँ गाड़ियों पर अनाधिकृत रूप से लाल-नीली बत्ती, फ्लैशर या हूटर लगे हुए थे, जबकि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले 496 प्रेशर हॉर्न और एयर हॉर्न के खिलाफ सख्त एक्शन लिया गया। 'पटाखे' जैसी ध्वनि करती बुलेट गाड़ियों के विरुद्ध भी लगातार कार्रवाई की जा रही है।

इस अभियान में कोटा शहर सर्वाधिक 572 कार्रवाइयों के साथ प्रथम स्थान पर रहा। अन्य जिलों में अजमेर में 416, बाड़मेर में 340, चित्तौड़गढ़ में 311, तथा भरतपुर में 309 कार्रवाइयाँ दर्ज की गईं। भीलवाड़ा में 281, झुंझुनूं में 257, जयपुर ग्रामीण में 247, तथा उदयपुर में 215 कार्रवाई कर नियम उल्लंघन करने वालों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए गए। जयपुर यातायात पुलिस ने भी 320 मामलों में, जोधपुर ट्रैफिक पुलिस ने 180 मामलों में, और जयपुर ग्रामीण पुलिस ने कुल 247 मामलों में कार्रवाई की है।

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने सभी पुलिस इकाइयों को निर्देश दिए हैं कि सड़क सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए ऐसे अभियान निरंतर जारी रखे जाएँ। उन्होंने जोर देकर कहा कि यातायात नियमों का पालन केवल एक कानूनी दायित्व ही नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक जिम्मेदारी भी है। राजस्थान पुलिस का लक्ष्य दंडात्मक कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता बढ़ाकर एक सुरक्षित और अनुशासित यातायात व्यवस्था स्थापित करना है।
    user_राजकुमार गोयल
    राजकुमार गोयल
    Local News Reporter Bhilwara, Rajasthan•
    12 hrs ago
  • राजस्थान पुलिस द्वारा बाल श्रम से मुक्ति हेतु भीलवाड़ा में चलाए जा रहे 'उमंग 7' अभियान के अंतर्गत, टंकी के बालाजी मंदिर क्षेत्र से चार बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया है। बचाव के बाद, इन बच्चों को बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष चंद्रकला ओझा और सदस्य विनोद राव के सामने प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात्, बाल कल्याण समिति ने बच्चों को आश्रय प्रदान करते हुए 'एवरेस्ट शेल्टर' में रखवाया। इस संयुक्त कार्रवाई में मानव तस्करी विरोधी इकाई के उप निरीक्षक ओम प्रकाश सैन, सहायक उप निरीक्षक ईश्वर सिंह और कांस्टेबल किशन सिंह ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक धर्मराज प्रतिहार के निर्देशानुसार, चाइल्डलाइन (1098) के परियोजना समन्वयक हेमंत सिंह सिसोदिया, सुपरवाइजर आनंद कुमार सुमनारिया, नवाचार संस्थान के जिला समन्वयक जितेंद्र सिंह तोमर और रेड एंड रेस्क्यू ऑफिसर भगवत सिंह चारण ने भी इस अभियान में सहयोग किया। इस पूरी कार्रवाई की जानकारी भीलवाड़ा चाइल्ड हेल्पलाइन के हेमंत ने मंगलवार शाम करीब 4 बजे प्रदान की।
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    राजस्थान पुलिस द्वारा बाल श्रम से मुक्ति हेतु भीलवाड़ा में चलाए जा रहे 'उमंग 7' अभियान के अंतर्गत, टंकी के बालाजी मंदिर क्षेत्र से चार बच्चों को भिक्षावृत्ति से मुक्त कराया गया है। बचाव के बाद, इन बच्चों को बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष चंद्रकला ओझा और सदस्य विनोद राव के सामने प्रस्तुत किया गया। इसके पश्चात्, बाल कल्याण समिति ने बच्चों को आश्रय प्रदान करते हुए 'एवरेस्ट शेल्टर' में रखवाया।

इस संयुक्त कार्रवाई में मानव तस्करी विरोधी इकाई के उप निरीक्षक ओम प्रकाश सैन, सहायक उप निरीक्षक ईश्वर सिंह और कांस्टेबल किशन सिंह ने अहम भूमिका निभाई। साथ ही, जिला बाल संरक्षण इकाई एवं बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक धर्मराज प्रतिहार के निर्देशानुसार, चाइल्डलाइन (1098) के परियोजना समन्वयक हेमंत सिंह सिसोदिया, सुपरवाइजर आनंद कुमार सुमनारिया, नवाचार संस्थान के जिला समन्वयक जितेंद्र सिंह तोमर और रेड एंड रेस्क्यू ऑफिसर भगवत सिंह चारण ने भी इस अभियान में सहयोग किया।

इस पूरी कार्रवाई की जानकारी भीलवाड़ा चाइल्ड हेल्पलाइन के हेमंत ने मंगलवार शाम करीब 4 बजे प्रदान की।
    user_Puneet jain
    Puneet jain
    भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    14 hrs ago
  • भीलवाड़ा ज़िले के कांवाखेड़ा वार्ड 27 में 9 जून को चम्बल परियोजना की पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। कांवाखेड़ा नाले की पुलिया से गुज़र रही इस पाइपलाइन से हर रोज़ सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है, क्योंकि एक तरफ जहाँ घरेलू नल कनेक्शनों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, वहीं दूसरी ओर बेवजह पानी व्यर्थ बह रहा है। इस समस्या को लेकर चम्बल जल परियोजना अधिकारी से फोन पर संपर्क कर शिकायत भी की गई थी, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। कांग्रेस कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ, भीलवाड़ा (शहर) के ज़िला उपाध्यक्ष राकेश देसाई ने संगठन के तत्वावधान में मांग की है कि इस समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाए ताकि वार्ड वासियों को राहत मिल सके।
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    भीलवाड़ा ज़िले के कांवाखेड़ा वार्ड 27 में 9 जून को चम्बल परियोजना की पानी की पाइपलाइन क्षतिग्रस्त हो गई है। कांवाखेड़ा नाले की पुलिया से गुज़र रही इस पाइपलाइन से हर रोज़ सैकड़ों लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। इस स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है, क्योंकि एक तरफ जहाँ घरेलू नल कनेक्शनों में पर्याप्त मात्रा में पानी नहीं मिलता, वहीं दूसरी ओर बेवजह पानी व्यर्थ बह रहा है। इस समस्या को लेकर चम्बल जल परियोजना अधिकारी से फोन पर संपर्क कर शिकायत भी की गई थी, लेकिन इस पर कोई सुनवाई नहीं हुई। कांग्रेस कच्ची बस्ती प्रकोष्ठ, भीलवाड़ा (शहर) के ज़िला उपाध्यक्ष राकेश देसाई ने संगठन के तत्वावधान में मांग की है कि इस समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाए ताकि वार्ड वासियों को राहत मिल सके।
    user_Rakesh Desai
    Rakesh Desai
    भीलवाड़ा, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    18 hrs ago
  • भीलवाड़ा नगर निगम की स्थिति अत्यंत दयनीय बताई गई है, जहाँ कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं दिखते। लोगों द्वारा बार-बार शिकायतें दर्ज कराने, ज्ञापन देने और निगम के सचिव व अन्य अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से कई बार अनुरोध करने के बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं की जाती है। शहर में नालियाँ इतनी भर गई हैं कि आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, और उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जब स्थिति इतनी बिगड़ गई, तब जाकर दो कर्मचारी मौके पर आते हैं। हालाँकि, उनकी कार्रवाई भी अधूरी रहती है, क्योंकि वे कचरा निकालकर सड़कों पर ही छोड़कर चले जाते हैं। विशेष रूप से यूआईटी की 2013 की नगर विकास न्यास कॉलोनी में, जहाँ 20 फीट चौड़ी सड़कें हैं, वहाँ भी यह कचरा सड़कों पर ही पड़ा रहता है। कुल मिलाकर, नगर निगम की ओर से कभी कोई उचित कार्रवाई नहीं होती। चाहे लोग कितने भी परेशान क्यों न हों, उन्हें निगम से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
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    भीलवाड़ा नगर निगम की स्थिति अत्यंत दयनीय बताई गई है, जहाँ कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं दिखते। लोगों द्वारा बार-बार शिकायतें दर्ज कराने, ज्ञापन देने और निगम के सचिव व अन्य अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से कई बार अनुरोध करने के बावजूद, कोई कार्रवाई नहीं की जाती है।

शहर में नालियाँ इतनी भर गई हैं कि आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, और उन्हें सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जब स्थिति इतनी बिगड़ गई, तब जाकर दो कर्मचारी मौके पर आते हैं। हालाँकि, उनकी कार्रवाई भी अधूरी रहती है, क्योंकि वे कचरा निकालकर सड़कों पर ही छोड़कर चले जाते हैं। विशेष रूप से यूआईटी की 2013 की नगर विकास न्यास कॉलोनी में, जहाँ 20 फीट चौड़ी सड़कें हैं, वहाँ भी यह कचरा सड़कों पर ही पड़ा रहता है।

कुल मिलाकर, नगर निगम की ओर से कभी कोई उचित कार्रवाई नहीं होती। चाहे लोग कितने भी परेशान क्यों न हों, उन्हें निगम से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।
    user_नारायण शर्मा
    नारायण शर्मा
    बीजोलीया, भीलवाड़ा, राजस्थान•
    23 hrs ago
  • एक 14 साल की नाबालिग बच्ची के साथ ओपीडी में हुई बलात्कार की घटना को केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता बताया गया है। इस गंभीर घटना के संदर्भ में, यह सवाल उठाया जा रहा है कि लापरवाही पर सवाल उठाने और जवाबदेही तय करने वाले किसी पदाधिकारी से इस्तीफा मांगना कितना उचित है। स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई पदाधिकारी पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए व्यवस्था से टकराता है, तो उसका साथ दिया जाना चाहिए, न कि उसे निशाना बनाया जाए। इस प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, रेणु जी ने यह बयान दिया है कि "माफी नहीं मांगी जाएगी, इंसाफ के लिए ऐसे 100 पद भी कुर्बान हैं," जो जवाबदेही और न्याय के प्रति उनके दृढ़ संकल्प का संदेश देता है। इस मामले में बहस का मुख्य विषय इस्तीफा नहीं, बल्कि यह होना चाहिए कि ऐसी भयावह घटना दोबारा न हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। इसके साथ ही, यह गंभीर प्रश्न भी उठाया गया है कि नाबालिग बच्ची के जांच या उपचार के दौरान कोई महिला नर्स अथवा महिला डॉक्टर क्यों मौजूद नहीं थी।
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    एक 14 साल की नाबालिग बच्ची के साथ ओपीडी में हुई बलात्कार की घटना को केवल एक अपराध नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था की विफलता बताया गया है। इस गंभीर घटना के संदर्भ में, यह सवाल उठाया जा रहा है कि लापरवाही पर सवाल उठाने और जवाबदेही तय करने वाले किसी पदाधिकारी से इस्तीफा मांगना कितना उचित है।

स्पष्ट किया गया है कि यदि कोई पदाधिकारी पीड़िता को इंसाफ दिलाने के लिए व्यवस्था से टकराता है, तो उसका साथ दिया जाना चाहिए, न कि उसे निशाना बनाया जाए। इस प्रतिबद्धता को दर्शाते हुए, रेणु जी ने यह बयान दिया है कि "माफी नहीं मांगी जाएगी, इंसाफ के लिए ऐसे 100 पद भी कुर्बान हैं," जो जवाबदेही और न्याय के प्रति उनके दृढ़ संकल्प का संदेश देता है।

इस मामले में बहस का मुख्य विषय इस्तीफा नहीं, बल्कि यह होना चाहिए कि ऐसी भयावह घटना दोबारा न हो और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिल सके। इसके साथ ही, यह गंभीर प्रश्न भी उठाया गया है कि नाबालिग बच्ची के जांच या उपचार के दौरान कोई महिला नर्स अथवा महिला डॉक्टर क्यों मौजूद नहीं थी।
    user_प्रतापhttps://www.facebook.com
    प्रतापhttps://www.facebook.com
    Nurse चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    1 hr ago
  • राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट प्लांट परियोजना के लिए लाइमस्टोन उत्पादन संबंधी पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय, उत्थेन कला के पास स्थित खाली जमीन पर आयोजित इस सुनवाई में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। जनसुनवाई के दौरान, चंदाखेड़ी, डोरिया, ठुकराई, शादी, परख्याखेड़ी, पालका, उत्थेन कला एवं रायता सहित विभिन्न प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी राय, सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत कीं। ग्रामीणों ने विशेष रूप से परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, जल स्रोतों पर पड़ने वाले असर, कृषि भूमि के उपयोग, रोजगार के अवसरों तथा स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं। कार्यवाही के दौरान, प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत सभी सुझावों एवं आपत्तियों को विधिवत रूप से दर्ज किया और यह जानकारी दी कि इन्हें संबंधित विभाग को आगे भेजा जाएगा। जनसुनवाई में एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) चित्तौड़गढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष बोरासी, डीएसपी अंजलि सिंह, तहसीलदार गोपाल जीनगर और विकास अधिकारी सुरेश गिरी गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत प्राप्त इन सभी सुझावों और आपत्तियों को अंतिम प्रतिवेदन में शामिल किया जाएगा, जिसे सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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    राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र में प्रस्तावित जेके सीमेंट प्लांट परियोजना के लिए लाइमस्टोन उत्पादन संबंधी पर्यावरणीय स्वीकृति हेतु मंगलवार को जनसुनवाई का आयोजन किया गया। जिला कलेक्टर के निर्देशानुसार राजकीय प्राथमिक विद्यालय, उत्थेन कला के पास स्थित खाली जमीन पर आयोजित इस सुनवाई में प्रभावित क्षेत्र के ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।

जनसुनवाई के दौरान, चंदाखेड़ी, डोरिया, ठुकराई, शादी, परख्याखेड़ी, पालका, उत्थेन कला एवं रायता सहित विभिन्न प्रभावित गांवों के ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी राय, सुझाव और आपत्तियां प्रस्तुत कीं। ग्रामीणों ने विशेष रूप से परियोजना के संभावित पर्यावरणीय प्रभावों, जल स्रोतों पर पड़ने वाले असर, कृषि भूमि के उपयोग, रोजगार के अवसरों तथा स्थानीय जनजीवन पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त कीं।

कार्यवाही के दौरान, प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत सभी सुझावों एवं आपत्तियों को विधिवत रूप से दर्ज किया और यह जानकारी दी कि इन्हें संबंधित विभाग को आगे भेजा जाएगा। जनसुनवाई में एसडीएम गंगरार पुनीत कुमार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल (आरएसपीसीबी) चित्तौड़गढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी आशीष बोरासी, डीएसपी अंजलि सिंह, तहसीलदार गोपाल जीनगर और विकास अधिकारी सुरेश गिरी गोस्वामी सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे। पर्यावरणीय स्वीकृति प्रक्रिया के तहत प्राप्त इन सभी सुझावों और आपत्तियों को अंतिम प्रतिवेदन में शामिल किया जाएगा, जिसे सक्षम प्राधिकारी को भेजा जाएगा, जिसके आधार पर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
    user_Alert Nation News
    Alert Nation News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    2 hrs ago
  • आज सांवरिया सेठ जी के मनमोहक दर्शन हुए, जिसके बाद भक्त ने अपनी गहरी भावनाएँ साझा कीं। भक्त ने सांवरिया सेठ जी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक सबका बहुत साथ दिया और बहुत निभा लिया है, लेकिन अब वे स्वयं के लिए जीने का इरादा रखते हैं।
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    आज सांवरिया सेठ जी के मनमोहक दर्शन हुए, जिसके बाद भक्त ने अपनी गहरी भावनाएँ साझा कीं। भक्त ने सांवरिया सेठ जी को संबोधित करते हुए कहा कि उन्होंने अब तक सबका बहुत साथ दिया और बहुत निभा लिया है, लेकिन अब वे स्वयं के लिए जीने का इरादा रखते हैं।
    user_Lucky sukhwal
    Lucky sukhwal
    Priest चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • भीलवाड़ा/आकोला क्षेत्र के चांदगढ़ गांव में मंगलवार दोपहर एक तेज रफ्तार वाहन ने जमकर कहर बरपाया। बड़लियास की ओर से तेज गति से आ रही एक गाड़ी अनियंत्रित होकर चांदगढ़ निवासी भगवान लाल ओड के मकान से जा टकराई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि घर के बाहर बना लोहे का छपरा क्षतिग्रस्त हो गया और उसकी टीन की चादरें नीचे गिर गईं। इस घटना में मकान के बाहर बैठी एक गाय वाहन की चपेट में आने से मौके पर ही मर गई। हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि वाहन चालक नशे की हालत में था। दुर्घटना में चालक भी घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। सूचना मिलते ही बड़लियास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर थाने पहुंचा दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। ग्रामीणों ने लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और क्षेत्र में यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करवाने की मांग की है।
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    भीलवाड़ा/आकोला क्षेत्र के चांदगढ़ गांव में मंगलवार दोपहर एक तेज रफ्तार वाहन ने जमकर कहर बरपाया। बड़लियास की ओर से तेज गति से आ रही एक गाड़ी अनियंत्रित होकर चांदगढ़ निवासी भगवान लाल ओड के मकान से जा टकराई। यह टक्कर इतनी भीषण थी कि घर के बाहर बना लोहे का छपरा क्षतिग्रस्त हो गया और उसकी टीन की चादरें नीचे गिर गईं। इस घटना में मकान के बाहर बैठी एक गाय वाहन की चपेट में आने से मौके पर ही मर गई।

हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई और बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर एकत्र हो गए। ग्रामीणों का कहना है कि वाहन चालक नशे की हालत में था। दुर्घटना में चालक भी घायल हो गया, जिसे उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया। सूचना मिलते ही बड़लियास थाना पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को संभाला। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहन को जब्त कर थाने पहुंचा दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है।

ग्रामीणों ने लापरवाह वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और क्षेत्र में यातायात नियमों का सख्ती से पालन सुनिश्चित करवाने की मांग की है।
    user_राजकुमार गोयल
    राजकुमार गोयल
    Local News Reporter Bhilwara, Rajasthan•
    12 hrs ago
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