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जहानाबाद जिले में कोर्ट से लेकर स्टेशन तक के मार्ग पर एक भी स्ट्रीटलाइट नहीं है। इसी गंभीर समस्या को उजागर करते हुए, सभी संबंधित पक्षों से विनम्रतापूर्वक निवेदन किया गया है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर प्रकाश की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तत्काल आवश्यक प्रयास किए जाएँ।
Ajit Kumar
जहानाबाद जिले में कोर्ट से लेकर स्टेशन तक के मार्ग पर एक भी स्ट्रीटलाइट नहीं है। इसी गंभीर समस्या को उजागर करते हुए, सभी संबंधित पक्षों से विनम्रतापूर्वक निवेदन किया गया है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर प्रकाश की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तत्काल आवश्यक प्रयास किए जाएँ।
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- जहानाबाद जिले में कोर्ट से लेकर स्टेशन तक के मार्ग पर एक भी स्ट्रीटलाइट नहीं है। इसी गंभीर समस्या को उजागर करते हुए, सभी संबंधित पक्षों से विनम्रतापूर्वक निवेदन किया गया है कि इस महत्वपूर्ण मार्ग पर प्रकाश की उचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए तत्काल आवश्यक प्रयास किए जाएँ।1
- बिहार सरकार के खान एवं भूतत्व तथा कला-संस्कृति मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने जहानाबाद में लालू परिवार पर तीखा हमला करते हुए कहा है कि वे खुद को संविधान से ऊपर समझते हैं, जबकि सार्वजनिक मंचों पर वे बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के नाम का सर्वाधिक उल्लेख करते हैं। मंत्री ने तंज कसते हुए यह भी कहा कि लालू परिवार का सत्ता से मोहभंग नहीं हुआ है और वे आज भी खुद को बिहार का मुख्यमंत्री मानते हैं। डॉ. चंद्रवंशी ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा और सरकारी आवास के लिए स्पष्ट प्रोटोकॉल और नियम बनाए गए हैं, जो विधायक, मंत्री, केंद्रीय मंत्री और मुख्यमंत्री सहित सभी के लिए लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत अलग-अलग दायित्व और सुविधाएं निर्धारित करते हैं। उन्होंने लालू परिवार पर वीआईपी संस्कृति का प्रतीक बनने और हर जगह 'खूंटा गाड़ने' की आदत डालने का आरोप लगाया, जिसके तहत वे नियम-कानून से ऊपर खुद को स्थापित करने का प्रयास करते हैं। मंत्री ने यह भी जोड़ा कि सार्वजनिक पद पर रहने वाले लोगों को मिसाल पेश करनी चाहिए। राजद कार्यकर्ताओं के व्यवहार पर भी निशाना साधते हुए मंत्री ने आरोप लगाया कि नेताओं के अड़ियल रवैये का असर उनके समर्थकों पर भी दिखाई देता है। उन्होंने कहा कि पटना में सरकार के खिलाफ आक्रामक राजनीति करने वाले लोग गांवों में गरीब, पिछड़े, अतिपिछड़े और दलितों पर दबाव बनाते हैं तथा उन्हें प्रताड़ित करते हैं। मंत्री के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में सियासी तापमान एक बार फिर बढ़ गया है और सुरक्षा, प्रोटोकॉल तथा वीआईपी सुविधाओं को लेकर चल रही बहस अब एक नए राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का मुद्दा बनती दिख रही है।1
- बिहार का जहानाबाद ज़िला इतिहास और अध्यात्म की गहरी जड़ों वाला एक ऐसा स्थान है, जिसने दरभंगा महाराज के काल से लेकर मगध के गौरवशाली इतिहास तक, समय के कई उतार-चढ़ाव देखे हैं। यहाँ की 'बराबर की गुफाएं' तीसरी सदी ईसा पूर्व के मौर्य काल में ले जाती हैं, जो चट्टानों को काटकर बनाई गई देश की सबसे पुरानी गुफाएं और स्थापत्य कला का एक अद्भुत चमत्कार हैं। सिर्फ प्राचीन इतिहास ही नहीं, जहानाबाद साझी संस्कृति और सूफी परंपरा का भी महत्वपूर्ण केंद्र रहा है, जहाँ काको स्थित बीबी कमाल का मज़ार देश की पहली महिला सूफी संत के निवास स्थान के रूप में जाना जाता है। यह मज़ार आज भी कौमी एकता और आस्था का एक बड़ा प्रतीक है। अपने अतीत के गौरव को समेटे हुए, आज का जहानाबाद शिक्षा और विकास के नए रास्तों पर आगे बढ़ रहा है। यह मगध की पावन धरती हमें इसके समृद्ध इतिहास को नमन करने और उज्ज्वल भविष्य के भागीदार बनने का आह्वान करती है।1
- जहानाबाद जिले के मखदुमपुर स्थित आवाहन एकेडमी में रविवार को बिहार पुलिस में चयनित हुए अभ्यर्थियों के सम्मान में एक समारोह का आयोजन किया गया। इस अवसर पर संस्था के संचालक रोशन कुमार ने सफल छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया, जिसमें बताया गया कि बिहार पुलिस भर्ती प्रक्रिया में उनकी एकेडमी के कुल 45 अभ्यर्थियों का चयन हुआ है। संस्था के संचालक रोशन कुमार ने इस उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि आवाहन एकेडमी का मुख्य उद्देश्य स्थानीय युवाओं को मखदुमपुर में ही बेहतर प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन प्रदान करना है। इस सम्मान समारोह में प्रणव प्रकाश, कमलेश शर्मा, जुगल किशोर शर्मा सहित कई गणमान्य लोग भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान, बिहार पुलिस में चयनित हुए इन अभ्यर्थियों ने अपने अनुभवों को भी साझा किया, जिससे अन्य युवाओं को प्रेरणा मिली।1
- मसौढ़ी के बदरोई गांव के निवासी डॉ. दिलीप कुमार ने विश्व मंच पर भारत का नाम रोशन करते हुए इतिहास रच दिया है। उन्होंने प्रथम विश्व योगासन चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर यह गौरव हासिल किया है। डॉ. दिलीप कुमार ने 2017 से योग साधना की शुरुआत की थी और 2022 से योगासन खेल में कदम रखा। विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने से पहले, वे कर्नाटक में स्वर्ण पदक और आंध्र प्रदेश में रजत व कांस्य पदक भी अपने नाम कर चुके हैं। इस नवीनतम जीत के साथ, उन्होंने विश्व मंच पर तिरंगा लहरा दिया है। अपनी इस शानदार सफलता का श्रेय डॉ. दिलीप कुमार ने अपने माता-पिता, गुरुजनों, स्वामी रामदेव, बिहार योगासन स्पोर्ट्स संघ और अपनी कड़ी मेहनत को दिया है। उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए संदेश दिया कि यदि मन से कोई लक्ष्य ठान लिया जाए, तो असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। उनके अनुसार, योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन का आधार है। पिछले 15 वर्षों से समाज सेवा में सक्रिय रहे डॉ. दिलीप कुमार की इस उल्लेखनीय उपलब्धि से पूरे मसौढ़ी और बिहार में हर्ष और खुशी का माहौल व्याप्त है।1
- मखदुमपुर में टेहटा थाना पुलिस ने शराब के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत चार शराब कारोबारियों को गिरफ्तार किया है। इस संबंध में शनिवार को जानकारी देते हुए थाना अध्यक्ष गुफरान अली ने बताया कि पुलिस टीम बाईपास सड़क पर नियमित गश्ती कर रही थी, तभी सरेन मोड़ के समीप संदिग्ध गतिविधि के आधार पर यह कार्रवाई की गई। पुलिस ने मौके से चार लोगों को पकड़ा, जिनकी तलाशी के दौरान तीन केन में रखी कुल 1.50 लीटर शराब बरामद की गई। साथ ही, शराब के परिवहन में प्रयुक्त एक मोटरसाइकिल को भी जब्त कर लिया गया। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए सभी व्यक्ति शराब के नशे में भी पाए गए। इस मामले में उनके विरुद्ध बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों की पहचान शकुराबाद थाना क्षेत्र के सुमित कुमार, अभय कुमार और विकास कुमार के साथ-साथ परसबिगहा थाना क्षेत्र के रवि कुमार के रूप में हुई है। थाना अध्यक्ष ने बताया कि सभी आरोपितों को आवश्यक चिकित्सीय जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायिक हिरासत में भेजते हुए जहानाबाद न्यायालय में प्रस्तुत किया गया। पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि क्षेत्र में शराब तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ उनका अभियान लगातार जारी रहेगा।1
- बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और जद(यू) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार ने रविवार को नालंदा जिले के हरनौत नगर पंचायत के मधोपुर-सबनहुआ गांव का दौरा किया। करीब 40 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद अपने मौसी के गांव पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री का ग्रामीणों ने जोरदार स्वागत किया, उनके आगमन पर 'नीतीश कुमार जिंदाबाद' के नारों से पूरा इलाका गूंज उठा। नीतीश कुमार का काफिला गांव पहुंचते ही लोगों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसका उन्होंने अपने वाहन से ही हाथ जोड़कर अभिवादन स्वीकार किया। गांव में उनका प्रवास लगभग पांच मिनट का रहा, इस दौरान उन्होंने अपनी स्वर्गीय मौसी देव लगन देवी और स्वर्गीय मौसा रामानंद सिंह के तैलचित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उनके मौसेरे भाई रामजी प्रसाद के अनुसार, मौसी-मौसा को श्रद्धांजलि देने पहुंचे नीतीश कुमार के आगमन से पूरा परिवार भावुक हो गया। इस अवसर पर उन्होंने परिजनों से शिष्टाचार मुलाकात भी की। इस दौरान बिहार विधान परिषद के मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी, विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के उपनेता ललन सर्राफ, जदयू जिलाध्यक्ष मो. अरशद, प्रखंड अध्यक्ष रविकांत कुमार, समाजसेवी सुरेश सिंह, निरंजन सिंह, रामजी सिंह सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। ग्रामीणों ने बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर सुबह से ही लोगों में खासा उत्साह था और कई ग्रामीणों ने अपनी स्थानीय समस्याओं से संबंधित आवेदन भी उन्हें सौंपे। मौके पर बीडीओ डॉ. पंकज कुमार, ईओ सौरव सुमन, जदयू प्रखंड प्रवक्ता रौशन कुमार, नगर अध्यक्ष श्याम बालक साव, परमेंद्र पांडे, बंटी सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और ग्रामीण भी उपस्थित रहे। पूर्व मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर था। गांव से लेकर कल्याण बिगहा रोड तक सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। बिहारशरीफ एसडीएम किसलय श्रीवास्तव, एसडीपीओ-2 संजय कुमार जायसवाल, हरनौत थानाध्यक्ष मुकेश वर्मा और कल्याण बिगहा थानाध्यक्ष निशा भारती के नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया था।1
- जहानाबाद जिले के मखदुमपुर प्रखंड स्थित चाँढ गांव निवासी प्रगतिशील किसान समरकांत ने पारंपरिक खेती का रास्ता छोड़कर वैज्ञानिक तरीके से केले का उत्पादन कर एक नई मिसाल कायम की है। उन्होंने अपनी एक एकड़ निचली ज़मीन पर 'जी-9' प्रजाति के केले की खेती शुरू की है और आज वे इससे बेहतर उत्पादन और अच्छी आय अर्जित कर रहे हैं। समरकांत पहले निचली जमीन में खरीफ फसल के नुकसान से परेशान रहते थे। इस समस्या से निजात पाने के लिए उन्हें जिला उद्यान कार्यालय, जहानाबाद से आवश्यक प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता मिली। इसके अतिरिक्त, उन्होंने महाराष्ट्र के जलगांव में केले की खेती का विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। उनकी यह सफलता केवल उनकी ही नहीं, बल्कि आसपास के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है, जो अब वैज्ञानिक खेती के महत्व को समझ रहे हैं।1