गरहवा जिले के रंका प्रखंड में स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय के मैदान में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 65वें सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल टूर्नामेंट का दूसरा दिन गुरुवार को उत्साह और खेल भावना के साथ संपन्न हुआ। दोपहर करीब 3:00 बजे, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला टोपनो ने बालिका फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर विधिवत मैच का शुभारंभ किया। इस टूर्नामेंट में रंका प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों की बालिका टीमों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे मैदान में खिलाड़ियों के उत्साह और दर्शकों की मौजूदगी से खेल का माहौल काफी रोमांचक बना रहा। इस अवसर पर बीडीओ शुभम बेला टोपनो ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अनुशासन, टीम भावना और खेल भावना के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेल विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। बीडीओ ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
गरहवा जिले के रंका प्रखंड में स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय के मैदान में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 65वें सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल टूर्नामेंट का दूसरा दिन गुरुवार को उत्साह और खेल भावना के साथ संपन्न हुआ। दोपहर करीब 3:00 बजे, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला टोपनो ने बालिका फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर विधिवत मैच का शुभारंभ किया। इस टूर्नामेंट में रंका प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों की बालिका टीमों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे मैदान में खिलाड़ियों के उत्साह और दर्शकों की मौजूदगी से खेल का माहौल काफी रोमांचक बना रहा। इस अवसर पर बीडीओ शुभम बेला टोपनो ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अनुशासन, टीम भावना और खेल भावना के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेल विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। बीडीओ ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
- गरहवा जिले के रंका प्रखंड में स्थित प्लस टू उच्च विद्यालय के मैदान में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 65वें सुब्रतो मुखर्जी फुटबॉल टूर्नामेंट का दूसरा दिन गुरुवार को उत्साह और खेल भावना के साथ संपन्न हुआ। दोपहर करीब 3:00 बजे, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) शुभम बेला टोपनो ने बालिका फुटबॉल टीम की खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर विधिवत मैच का शुभारंभ किया। इस टूर्नामेंट में रंका प्रखंड के विभिन्न विद्यालयों की बालिका टीमों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया, जिससे मैदान में खिलाड़ियों के उत्साह और दर्शकों की मौजूदगी से खेल का माहौल काफी रोमांचक बना रहा। इस अवसर पर बीडीओ शुभम बेला टोपनो ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें अनुशासन, टीम भावना और खेल भावना के साथ बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा दी। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि खेल विद्यार्थियों के शारीरिक, मानसिक और बौद्धिक विकास का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। बीडीओ ने यह भी कहा कि ऐसे आयोजन ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करते हैं।1
- झारखंड और बिहार में दलित समुदाय अभी भी सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक रूप से काफी पिछड़ा हुआ है, जिससे उन्हें गंभीर संरचनात्मक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बिहार में दलितों की स्थिति विशेष रूप से दयनीय है। एक रिपोर्ट (NACDAOR) के अनुसार, राज्य में लगभग 84% दलित परिवार भूमिहीन हैं और उनकी औसत मासिक आय लगभग ₹6,480 है, जो राज्य के औसत से काफी कम है। साक्षरता दर भी चिंताजनक है, जहां लगभग 62% दलित आबादी अशिक्षित है और बेरोजगारी दर 63% के करीब बनी हुई है। इसके अतिरिक्त, दलितों के खिलाफ उत्पीड़न के मामले लगातार सामने आ रहे हैं; वर्ष 2010 से 2022 के बीच राज्य में 85,000 से अधिक अत्याचार के मामले दर्ज किए गए। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि चुनाव दर चुनाव दलितों को लुभाया तो गया, लेकिन योजनाएँ और वादे केवल राजनीति तक ही सीमित रह गए, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में कोई वास्तविक सुधार नहीं हुआ। झारखंड में भी दलित आबादी आर्थिक रूप से पिछड़ी है। राज्य बनने के बाद भी, वे मुख्य रूप से भूमिहीन हैं और अनौपचारिक व मजदूरी कार्यों पर निर्भर हैं, जिससे वे मुख्यधारा के विकास से वंचित हैं। यहां भूमि विवाद और अत्याचार की घटनाएं एक प्रमुख समस्या हैं, जिसमें जमीन हथियाने और सीएनटी/CNT एक्ट का उल्लंघन जैसे मामले शामिल हैं। राजनीतिक रूप से भी दलित हाशिए पर हैं; कई दलित बस्तियां मतदान तो करती हैं लेकिन उन्हें बुनियादी सुविधाएं और सरकारी लाभ का पूरा हिस्सा नहीं मिल पाता है।2
- पलामू जिले के चैनपुर थाना क्षेत्र में रामपुर हत्याकांड से जुड़े एक मामले में फरार चल रहे चार मुख्य अभियुक्तों के घर पर माननीय न्यायालय, मेदिनीनगर से प्राप्त इश्तिहार चिपकाए गए हैं। यह कार्रवाई चैनपुर थाना कांड संख्या 124/2026 से संबंधित है, जो दिनांक 23.05.2026 को दर्ज किया गया था। प्राथमिकी अभियुक्तों में राहुल कुमार सिंह उर्फ बादल सिंह (पिता स्व0 मृत्युंजय सिंह), जयराम सिंह (पिता स्व0 चंद्रिका सिंह), चंदन सिंह (पिता स्व0 लालो सिंह) और बगन सिंह (पिता स्व0 लालमुनी सिंह) शामिल हैं। ये सभी रामपुर, पोस्ट-कटुअल, थाना-चैनपुर, जिला-पलामू के निवासी हैं। चैनपुर थाना के पदाधिकारी, पु0अ0नि0 क्षितिज कुमार सोनी ने दिनांक 06.07.2026 को इन चारों अभियुक्तों के घरों पर बारी-बारी से इश्तिहार चिपकाकर विधिवत तामिला की। यह मामला धारा 190, 191(2), 191(3), 115(2), 117(2), 118(1), 118(2), 333, 103(1), 109, 303(2), 75, 351(2), 352 BNS एवं 27(1) आर्म्स एक्ट के तहत दर्ज है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि यदि उपरोक्त चारों प्राथमिकी अभियुक्त दिनांक 05.08.2026 तक माननीय न्यायालय में आत्मसमर्पण नहीं करते हैं, तो माननीय न्यायालय के अगले आदेशानुसार उनके खिलाफ कुर्की-जप्ती की कार्रवाई की जाएगी। स्थानीय लोगों और इस मामले के संदर्भ में यह स्पष्ट है कि इन फरार अभियुक्तों को सख्त सजा मिलनी चाहिए, विशेषकर रामपुर हत्याकांड में उनकी कथित संलिप्तता को देखते हुए।1
- गढ़वा जिले के भवनाथपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में मानवीय संवेदना को तार-तार करने का एक मामला सामने आया है। अस्पताल पर गंभीर आरोप है कि उसने प्रसव पीड़ा से कराहती एक महिला को रेफर करने के बाद गढ़वा ले जाने के लिए एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराई, जबकि उसी अस्पताल में एक बुजुर्ग महिला की मौत होने पर उसके शव को ले जाने के लिए एम्बुलेंस की सुविधा तुरंत प्रदान की गई। जानकारी के अनुसार, भवनाथपुर पंचायत के बुका गांव की सुमन देवी (पति दुर्गेश पासवान) को बीती रात करीब 9 बजे प्रसव पीड़ा शुरू हुई, जिसके बाद परिजन उन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाए। एएनएम गुलाब खलखो ने जांच के बाद 'अभी विलंब है' कहकर महिला को घर भेज दिया। रात लगभग 2-2:30 बजे फिर से पीड़ा बढ़ने पर परिजन दोबारा अस्पताल पहुंचे, जहाँ एएनएम गुलाब खलखो ने फिर आश्वासन दिया कि कोई दिक्कत नहीं है और सब ठीक हो जाएगा, बावजूद इसके कि परिजनों ने बाहर ले जाने की इच्छा जताई थी। चार-पांच घंटे बाद जब प्रसव पीड़ा अत्यधिक बढ़ गई और महिला दर्द से कराहने लगी, तब एएनएम ने हाथ खड़े कर दिए और बाहर ले जाने को कहा। करीब 10 बजे डॉक्टर रंजन दास ने महिला की जांच कर उसे रेफर कर दिया। रेफर किए जाने के बाद महिला को अस्पताल परिसर में खुले आसमान के नीचे एक चबूतरे पर घंटों दर्द से कराहते हुए छोड़ दिया गया। अस्पताल प्रबंधन ने उसे डेढ़ घंटे तक एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं कराया, जिससे परिजनों को निजी वाहन की तलाश करनी पड़ी। इतना ही नहीं, परिजनों से बाहर से दवाइयां भी मंगवाई गई थीं। इसी बीच, अस्पताल में माईधिया गांव की बुजुर्ग महिला सरोज देवी की मौत हो जाती है। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिनेश कुमार सिंह के निर्देश पर उस मृत महिला का शव ले जाने के लिए एम्बुलेंस तुरंत उपलब्ध करा दिया जाता है। दूसरी ओर, प्रसव पीड़ा से छटपटाती महिला को एम्बुलेंस नहीं दिया गया और उसे निजी गाड़ी खोजने को कहा गया। इस संबंध में डॉ. दिनेश कुमार सिंह ने बाद में कहा कि उन्हें प्रसव पीड़ा से कराहती महिला के बारे में जानकारी नहीं दी गई थी, और मृत महिला के परिजनों के पास संसाधन न होने के कारण एम्बुलेंस से शव भेजने का आदेश उन्होंने दिया था, जिसे उन्होंने 'थोड़ी सी चूक' बताया। अस्पताल प्रबंधन की इस घोर लापरवाही और अमानवीय संवेदना पर पीड़ित के भाई गनौरी पासवान, बहन गीता देवी और अन्य परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। अंततः, डेढ़ घंटे के बाद निजी वाहन से प्रसव पीड़ा से कराहती महिला को गढ़वा ले जाया गया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर मानवीय संवेदना को तार-तार करने का आरोप लगाया है।3
- बलरामपुर जिले में विरोध प्रदर्शन की एक अनोखी और हैरान कर देने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ रामानुजगंज के वार्ड क्रमांक 10 निवासी राहुल जीत सिंह ने जेल से छूटते ही सीधे कलेक्टर कार्यालय पहुँचकर अपना बाल मुंडन कराया और कलेक्टर मैडम को एक ज्ञापन सौंपा। राहुल का कहना है कि उन्हें एक झूठे मामले में फंसाकर जेल भेजा गया था और अब वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। दरअसल, यह पूरा विवाद कुछ समय पहले रामानुजगंज की एक चाय की टपरी पर शुरू हुआ था, जहाँ राहुल जीत सिंह का एक महिला फूड इंस्पेक्टर से किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। आरोप है कि राहुल ने उस महिला फूड इंस्पेक्टर पर जंगली और अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया था। इस विवाद के बाद राहुल जीत सिंह के खिलाफ एट्रोसिटी (SC/ST Act) समेत कई अन्य गंभीर धाराओं में मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया गया था। हाल ही में जेल से छूटकर बाहर आने के बाद राहुल जीत सिंह ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनका मामला फिलहाल कोर्ट में लंबित है, इसलिए वे उस पर ज्यादा टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन उनके साथ अन्याय हुआ है। उनकी मुख्य मांग है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की जाए और जो भी दोषी हो, उस पर कड़ी कार्रवाई हो। राहुल ने प्रशासन को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे चुप नहीं बैठेंगे और बलरामपुर जिले से पदयात्रा निकालकर सीधे अंबिकापुर कमिश्नर कार्यालय के सामने जाकर धरना प्रदर्शन पर बैठ जाएंगे। फिलहाल, कलेक्ट्रेट के सामने युवक द्वारा मुंडन कराकर ज्ञापन सौंपने का यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस पर क्या कदम उठाता है।1
- देशभर के किसानों के लिए एक बहुत बड़ी और अच्छी खबर सामने आई है।1
- श्रीनगर नगर निवासी ओमप्रकाश चंद्रवंशी की हत्या कर दी गई है, जिनका शव पलामू जिले के मोहम्मद गंज जंगल में एक पेड़ से लटका हुआ मिला। कांडी थाना को इसकी सूचना दिए जाने के कुछ ही घंटों बाद ओमप्रकाश का शव पेड़ से लटका हुआ पाया गया, जिससे पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है। इस घटना को लेकर जब ओमप्रकाश के माता-पिता और उनके बड़े जीजा से पूछताछ की गई, तो परिवार वालों ने सीधे तौर पर एक लड़की और उसके परिजनों पर हत्या का आरोप लगाया। पुलिस से कार्रवाई की मांग करते हुए, लड़के के परिजन और गांव वाले कांडी थाना का घेराव करने पहुंचे, उनका कहना था कि पुलिस द्वारा सिर्फ आश्वासन दिया जा रहा है और अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है।1
- आज प्रातः लगभग 07:30 बजे, वाराणसी के दांडी घाट पर गंगा नदी में पिकेट और पेट्रोलिंग ड्यूटी के दौरान 11वीं वाहिनी एनडीआरएफ की टीम ने एक व्यक्ति को स्नान करते समय गहरे पानी में डूबते हुए देखा। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, निकट तैनात एनडीआरएफ के बचावकर्मी तत्काल सक्रिय हो गए और बिना समय गंवाए नदी में छलांग लगाकर बचाव अभियान शुरू किया। एनडीआरएफ टीम के बचावकर्मियों ने तेजी और तत्परता से उस व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालकर नदी तट पर पहुँचाया। बचाए गए व्यक्ति की पहचान बिहार के नालंदा निवासी श्री सतीश कुमार पटेल के 20 वर्षीय पुत्र रिशुराज के रूप में हुई। समय रहते किए गए इस त्वरित बचाव अभियान के कारण युवक की जान बचाई जा सकी। एनडीआरएफ द्वारा किए गए इस साहसिक बचाव कार्य को वाराही घाट सहित आसपास के अन्य घाटों पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने प्रत्यक्ष रूप से देखा और बचाव दल की जमकर प्रशंसा की। इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन ने एक बार फिर एनडीआरएफ की तत्परता, दक्षता और जनसेवा के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित किया। इस घटना पर एनडीआरएफ के उप महानिरीक्षक श्री मनोज कुमार शर्मा ने भी गंगा में डूब रहे युवक की जान बचाने में एनडीआरएफ की तत्परता की सराहना की।1