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यूपी में स्मार्ट मीटर के विरोध में जमकर प्रदर्शन हो रहे हैं. खास तौर से महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं । आज मेरठ, लखनऊ, बांदा, हापुड़, आगरा, प्रतापगढ़ में प्रदर्शन हुए । इससे पहले कानपुर, हमीरपुर और कई जिलों में प्रदर्शन हो चुके हैं. हर जगह लोग मीटर उखाड़ कर विरोध जता रहे ।
Hindustan Express News
यूपी में स्मार्ट मीटर के विरोध में जमकर प्रदर्शन हो रहे हैं. खास तौर से महिलाएं प्रदर्शन कर रही हैं । आज मेरठ, लखनऊ, बांदा, हापुड़, आगरा, प्रतापगढ़ में प्रदर्शन हुए । इससे पहले कानपुर, हमीरपुर और कई जिलों में प्रदर्शन हो चुके हैं. हर जगह लोग मीटर उखाड़ कर विरोध जता रहे ।
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- फ्रीज मरम्मत करने के दौरान बिजली करंट की चपेट में आने से सोकी गांव निवासी छात्रधारी महतो (45 वर्ष) की सोमवार की देर शाम मौत हो गयी. जानकारी के अनुसार छात्रधारी महतो सोमवार की शाम अपने घर में फ्रीज़ मरम्मत का कार्य कर रहा था. इस दौरान फ्रीज के ऊपरी भाग में प्रवाहित करंट ने उन्हें अपने चपेट में ले लिया. मौके पर उनकी मौत हो गयी. परिजनों ने उन्हें संतुष्टि व जांच-पड़ताल के लिये आनन-फानन में हजारीबाग अस्पताल ले गये. जहां चिकित्सकों ने देर रात उन्हें मृत घोषित कर दिया. मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद मृतक का शव उनके परिजनों को अस्पताल ने सौंप दिया. उसके बाद शव को गांव लाया गया. जहां अग्नि संस्कार किया गया. मृतक एक पैर से निःशक्त था.1
- Post by SATISH KUMAR (पत्रकार)1
- Post by द कहर न्यूज़ एजेंसी1
- बिहार के गया से एक अहम खबर सामने आ रही है। गया टाउन सीडी ब्लॉक में बुद्ध पूर्णिमा 2026 की तैयारियों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता अनुमंडल पदाधिकारी, सदर गया ने की। प्रेस कॉन्फ्रेंस में प्रशासन की ओर से बताया गया कि बुद्ध पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात नियंत्रण और साफ-सफाई को लेकर विशेष तैयारियां की जा रही हैं। अधिकारियों ने कहा कि इस बार आयोजन को और भी व्यवस्थित और भव्य बनाने पर जोर दिया जा रहा है। बताया जा रहा है कि यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उस वीडियो के पोस्ट होने से करीब 40 मिनट पहले आयोजित की गई थी, जिसमें तैयारियों की झलक सामने आई है। फिलहाल, प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है ताकि बुद्ध पूर्णिमा का पर्व शांतिपूर्ण और सफल तरीके से संपन्न हो सके।1
- I am Neha Sinha please subscribe my channel1
- Post by Rohit Kumar1
- प्रखंड के केंद्ररी गांव निवासी होमगार्ड अशोक यादव के छः वर्षीय पुत्र निशांत कुमार को सर्प दंश से मौत हो गई, जानकारी के अनुसार अशोक यादव के चाचा के यहां लड़की की शादी थी सोमवार को बारात आने वाला था, इसी दौरान शाम पांच बजे निशांत घर के पाश स्थित चंपाकल पर पानी पीने गया, इसी दौरान सर्प ने दो बार पैर में दंश लिया, परिजनों ने आनन फानन में सदर अस्पताल चतरा ले जा रहे थे इसी दौरान रास्ते में ही दम तोड़ दिया, देखते ही देखते खुशी गम में बदल गई, परिजनों का रो रो कर बुरा हाल है,1
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- ये तस्वीरें आपको बिचलित कर सकती हैँ! ये तस्वीरें आपको अंदर से झकझोर सकती हैँ! लेकिन उससे पहले देश का सिस्टम समझ लीजिये! एक ऐसा देश जहाँ सरकारी अधिकारी और नेताओं के अगर कुत्ते गुम हो जाएं तो पुरा सिस्टम लग जाता है! ये वही देश है जहाँ मंत्री के भैंस गुम होने पर वहाँ के पुरा थाना पुरे इलाके की खाख छान मार देता है! इसी देश की सरकारी बैंक के हज़ारो करोड़ रूपये लेकर लोग हवा में उड़ जाते है!और इसी भारत देश में एक गरीब आदिवासी अपने मृत बहन की कंकाल को कंधो पर लेकर मिलो पैदल चल बैंक पहुंचता है! क्योंकि वो जबतक साबित नहीं करेंगा की उसकी बहन मर चुकी है! बैंक के खाते में पड़े शोलह हज़ार रूपये उसे बैंक वाले नहीं देंगे! बंगाल आसाम चुनाव से यदि फुरसत मिल गया होगा तब ईस तस्वीर को भी देखिये लीजियेगा! और यदि देख ही लिए है तब जरा सोचिये की हमने अस्सी सालों में क्या पाया है! अस्सी सालों में हमारे कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति को क्या दिया है! ईस देश में झालमुड़ी से लेकर मांस तक सब की बाते होती है! लेकिन बाते उनकी नहीं होती जिनकी वोट लेकर सरकार चुनी जाती है! उड़ीसा से जो तस्वीर निकलकर सामने आई है उसे देख कर किसी भी भारतीय की आँखों में आंसू आ जायेगा!क्योंकि ईस भारत की तस्वीर को शायद काले चश्मे के भीतर लुटियन्स जोन में बाटने वाले नेता देख नहीं पाते! सरकारी बाबुओ को तो मलाई खाने की आदत सी लग गई है!ईस देश में एक गरीब आदिवासी की औकात क्या हो सकती है!ईस तस्वीर को देख कर आप समझ जायेंगे!ईस तस्वीर में आपको क्या दिख रहा है!ये जो आदमी है जो दिखने से ही गरीब दिख रहा है!उसके कंधे पर बोर में क्या हो सकता है!सोचिये उस बोर से जो दिख रहा है वो क्या है!तो सुनिए ईस गरीब से दिखने वाले आदिवासी आदमी का नाम है जीतू मुंडा! जीतू मुंडा की बहन की मौत दो महीने पहले हो गई थी!उसकी बहन ने उड़ीसा के ग्रामीण बैंक में खाता भी खुलवा रखा था!मरने से पहले उसने अपने मावेसिओं को बेच कर कुछ पैसे बैंक में जमा किये थे! क्योंकि जीतू मुंडा के बहन के पति और बेटे की मौत पहले ही हो चुकी थी !ऐसे में उसका कोई वारिस नहीं था, जीतू मुंडा अपने बहन के बैंक अकाउंट में जमा पैसे को निकालने केलिए उड़ीसा ग्रामीण बैंक पहुंचता है! लेकिन वहाँ बैंक में मौजूद अधिकारी उनसे कहते है की उनको सबसे पहले डेथ सर्टिफिकेट लाना होगा जिससे ये साबित हो की उसकी बहन की मौत हो चुकी हो!लेकिन जीतू मुंडा अनपढ़ और अनपढ़ होने पर देश में एक लम्बी बहस हो सकती है!क्योंकि जीतू मुंडा जैसे करोड़ो ऐसे भारतीय है जो अनपढ़ है!जो ग्रामीण इलाकों में बस्ते है जंगल इलाकों में बस्ते है!पीढ़ी दर पीढ़ी से अनपढ़ ही होते आएं है!लेकिन फिलहाल इनकी बात तो किसी चुनाव में नहीं सुनाई देता है!तो अब कहानी को आगे बढ़ाते है, जीतू मुंडा बार बार बैंक की चककर काटता है!लेकिन हर बार बैंक से यही जवाब सुनने को मिलता है की आप अपनी का बहन का डेथ सर्टिफिकेट लेकर आएं तभी बैंक से पैसे मिलेंगे!हार कर जीतू मुंडा फैसला लेता है, वो अपनी बहन की मौत को साबित करना चाहता हैँ!इसी लिए वो सीधे कब्रिस्तान जाता हैँ, जहाँ उसने दो महीने पहले उसने अपनी बहन को दफनाया था!उसके मृत शरीर को बाहर निकालता हैँ!लेकिन दो महीनों में वो शव कंकाल में तब्दील हो चुका था!उसे वो बोर में डालता हैँ!अपने कंधे पर लेता हैँ और तीन किलोमीटर पैदल चलकर ग्रामीण बैंक के बरामदे तक पहुंचता हैँ!ग्रामीण बैंक के बरामदे में वो शव रख देता हैँ!बैंक अधिकारी ईस हरकत को देख कर हक्के बक्के हो जाते हैँ!वो अंदर से ग्रिल बंद कर देते हैँ ये खबर शहर में आग की तरह फैलती हैँ!खबर पुलिस स्टेशन तक भी पहुंच जाती हैँ!पुलिस के अधिकारी दौड़े दौड़े बैंक पहुंच जाते हैँ!और फिर जीतू को समझाने लग जाते हैँ!पुलिस के अनुसार जीतू अनपढ़ हैँ और कानूनी प्रक्रिया से अनजान था!पुलिस ने उसे नियम समझाया और जल्द ही पैसे दिलाने का भरोसा दिया!पुलिस के आश्वासन के बाद जीतू दुबारा कब्रिस्तान जाता हैँ और अपनी बहन के कंकाल को फिर से दफना दिया! कहने को तो यह एक मामूली घटना हो सकती हैँ!लेकिन जरा सोचिये भारत के ग्रामीण इलाको में रहने वाले जीतू जैसे ना जाने कितने करोड़ लोग रहते हैँ! इनलोग के साथ आएं दिन सरकारी विभागों में आएं दिन इसी तरह का व्यवहार किया जाता हैँ!एक अदना सा कागज लेने केलिए इन्हे बारा बार दौड़ाया जाता हैँ!बैंक के अधिकारी भी इसी आदत से मजबूर थे! उन्होंने जीतू मुंडा को देखकर ये नहीं समझा की जीतू मुंडा की स्थिति क्या हैँ!जीतू मुंडा की मदद कैसे की जा सकती हैँ!उन्होंने जीतू मुंडा के बहन के डेथ सर्टिफिकेट लाने की बात कहीं, जबकि ग्रामीण इलाकों में आम तौर पर ये होता हैँ की किसी मौत के बाद शायद ही कोई डेथ सर्टिफिकेट बनवाता हो!जीतू मुंडा के कहानी ये बताती हैँ की भारत में कतार में खड़े आख़िरी पंक्ति में लोग ईस हालत में आज भी जी रहे हैँ! फिलहाल आप इंतजार कीजिये 4 मई का क्योंकि 4 मई को 5 राज्यों के चुनाव के नतीजे आने हैँ और उसके बाद फिर नेताओं का इंटरभिव देखिये और मजा लीजिये! धन्यवाद1