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उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के रिवंई क्षेत्र में खनन माफियाओं द्वारा कथित तौर पर मनमर्जी से काम किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन पर इस स्थिति की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय, आईजी रेंज लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार और महोबा के जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित किया गया है।

3 hrs ago
user_इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
महोबा, महोबा, उत्तर प्रदेश•
3 hrs ago

उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के रिवंई क्षेत्र में खनन माफियाओं द्वारा कथित तौर पर मनमर्जी से काम किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन पर इस स्थिति की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय, आईजी रेंज लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार और महोबा के जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित किया गया है।

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  • उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के रिवंई क्षेत्र में खनन माफियाओं द्वारा कथित तौर पर मनमर्जी से काम किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन पर इस स्थिति की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय, आईजी रेंज लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार और महोबा के जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित किया गया है।
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    उत्तर प्रदेश के महोबा जिले के रिवंई क्षेत्र में खनन माफियाओं द्वारा कथित तौर पर मनमर्जी से काम किया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन पर इस स्थिति की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया है। इस मामले में मुख्यमंत्री कार्यालय, आईजी रेंज लखनऊ, उत्तर प्रदेश सरकार और महोबा के जिलाधिकारी का ध्यान आकर्षित किया गया है।
    user_इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
    इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
    महोबा, महोबा, उत्तर प्रदेश•
    3 hrs ago
  • यह पोस्ट वीरपाल जी लोधी राजपूत के प्रति गहरा स्नेह और सम्मान व्यक्त करती है। इसमें वीरपाल जी का उल्लेख लोधी राजपूत समुदाय से संबंधित व्यक्ति के रूप में किया गया है, जिसके साथ भावनात्मक जुड़ाव और प्रशंसा दर्शाई गई है।
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    यह पोस्ट वीरपाल जी लोधी राजपूत के प्रति गहरा स्नेह और सम्मान व्यक्त करती है। इसमें वीरपाल जी का उल्लेख लोधी राजपूत समुदाय से संबंधित व्यक्ति के रूप में किया गया है, जिसके साथ भावनात्मक जुड़ाव और प्रशंसा दर्शाई गई है।
    user_Veerpal ji Rajput
    Veerpal ji Rajput
    Pharmacist महोबा, महोबा, उत्तर प्रदेश•
    11 hrs ago
  • महोबा जनपद में रेवंई से धवार तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य में कथित लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान न तो सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके चलते आम जनता को असुविधा और दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है। स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण स्थल पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या रात में प्रकाश व्यवस्था का कोई इंतजाम नहीं है। सड़क पर निर्माण सामग्री के बिखरे होने से राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि कई स्थानों पर कार्य की गुणवत्ता संदिग्ध प्रतीत हो रही है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए। क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण करने और सुरक्षा मानकों व निर्माण गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क में यदि शुरू से ही लापरवाही बरती गई, तो भविष्य में इसकी मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के लिए बाध्य होंगे।
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    महोबा जनपद में रेवंई से धवार तक चल रहे सड़क निर्माण कार्य में कथित लापरवाही को लेकर स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण के दौरान न तो सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा है और न ही गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिसके चलते आम जनता को असुविधा और दुर्घटना का खतरा लगातार बना हुआ है।

स्थानीय लोगों के अनुसार, निर्माण स्थल पर पर्याप्त चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग या रात में प्रकाश व्यवस्था का कोई इंतजाम नहीं है। सड़क पर निर्माण सामग्री के बिखरे होने से राहगीरों और वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया है कि कई स्थानों पर कार्य की गुणवत्ता संदिग्ध प्रतीत हो रही है, जिसकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

क्षेत्रवासियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से तत्काल सड़क निर्माण कार्य का निरीक्षण करने और सुरक्षा मानकों व निर्माण गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये की लागत से बन रही इस सड़क में यदि शुरू से ही लापरवाही बरती गई, तो भविष्य में इसकी मजबूती और टिकाऊपन पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग जाएंगे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के लिए बाध्य होंगे।
    user_Nitendra Jha
    Nitendra Jha
    Mahoba Insight & Ikvnews Sharafipura, Mahoba•
    13 hrs ago
  • हमीरपुर जिले के राठ कोतवाली क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। एक मानसिक रूप से विक्षिप्त बेटे ने लकड़ी की पटिया से हमला कर अपने ही पिता को कथित तौर पर मौत के घाट उतार दिया। गंभीर रूप से घायल पिता को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
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    हमीरपुर जिले के राठ कोतवाली क्षेत्र में रिश्तों को शर्मसार करने वाली एक घटना सामने आई है। एक मानसिक रूप से विक्षिप्त बेटे ने लकड़ी की पटिया से हमला कर अपने ही पिता को कथित तौर पर मौत के घाट उतार दिया।

गंभीर रूप से घायल पिता को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है।
    user_निर्दोष राजपूत रिपोर्टर वन्दे भारत लाईव टीवी न्यूज़
    निर्दोष राजपूत रिपोर्टर वन्दे भारत लाईव टीवी न्यूज़
    राठ, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    5 hrs ago
  • मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि विधानसभा सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण और समसामयिक विषयों को लेकर आ रही है, जिनमें समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक भी शामिल है। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि UCC विधेयक इसी सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी विश्वास जताया कि बाबा महाकाल की कृपा से यह विधेयक इसी सत्र में पारित हो जाएगा।
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    मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की है कि विधानसभा सत्र के दौरान सरकार कई महत्वपूर्ण और समसामयिक विषयों को लेकर आ रही है, जिनमें समान नागरिक संहिता (UCC) विधेयक भी शामिल है। डॉ. यादव ने स्पष्ट किया कि UCC विधेयक इसी सत्र में प्रस्तुत किया जाएगा। उन्होंने इस बात पर भी विश्वास जताया कि बाबा महाकाल की कृपा से यह विधेयक इसी सत्र में पारित हो जाएगा।
    user_BALKISHUN VISHWAKARMA
    BALKISHUN VISHWAKARMA
    Lawyer राजनगर, छतरपुर, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • जब सत्ता की तारों में संवेदनाएं जल जाए तो अंधेरे में सिर्फ गांव नहीं व्यवस्था भी डूबती है बांदा के तिंदवारा गांव से उठी यह आवाज केवल बिजली की मांग नहीं है, बल्कि उस प्रशासनिक संवेदनहीनता के खिलाफ एक तीखा प्रतिरोध है, जो हर बार आश्वासनों के बल्ब तो जलाती है, लेकिन गांवों के घरों में उजाला पहुंचाने में असफल रहती है। एक ओर सरकार 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे करती है, दूसरी ओर तिंदवारा के ग्रामीण 105 घंटे से अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि आखिर यह कैसा विकास है, जिसमें टूटे हुए बिजली के पोल महीनों तक व्यवस्था की टूटी हुई रीढ़ का प्रतीक बने रहते हैं? यह कैसी जवाबदेही है, जिसमें अधिकारी जनता के फोन तक उठाना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते? बिजली केवल तारों में बहने वाली धारा नहीं है, यह जीवन की गति है। जब बिजली जाती है तो केवल पंखे नहीं रुकते, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, किसानों की उम्मीदें, बुजुर्गों की राहत और घरों की सामान्य दिनचर्या भी ठहर जाती है। भीषण गर्मी में 10 से 12 घंटे की कटौती और फिर लगातार कई दिनों तक अंधेरा, किसी तकनीकी खराबी से ज्यादा प्रशासनिक विफलता की कहानी कहता है।विडंबना यह है कि शिकायतें ऊपर तक पहुंचती हैं, ज्ञापन दिए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई की गति उतनी ही सुस्त रहती है, जितनी गांव की बंद पड़ी बिजली लाइनें। जब व्यवस्था सुनना बंद कर दे, तब जनता सड़कों पर उतरती है। चक्का जाम की चेतावनी दरअसल आक्रोश का वह अंतिम स्वर है, जो बताता है कि धैर्य की भी एक सीमा होती है। लोकतंत्र में जनता केवल वोट देने वाली भीड़ नहीं होती, वह व्यवस्था की असली मालिक होती है। यदि उसके घर अंधेरे में हैं, तो सरकारी दावों की चमक भी फीकी पड़ जाती है। तिंदवारा का सवाल केवल बिजली का नहीं है, बल्कि यह पूछता है कि क्या सरकारी मशीनरी का दायित्व सिर्फ योजनाओं की घोषणा करना है या फिर लोगों के जीवन में वास्तविक राहत पहुंचाना भी? यदि अब भी जिम्मेदार लोग नहीं चेते, तो यह अंधेरा केवल गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी निगल जाएगा। क्योंकि इतिहास गवाह है—जब समस्याओं की अनदेखी की जाती है, तो शिकायतें धीरे-धीरे आंदोलनों का रूप ले लेती हैं।
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    जब सत्ता की तारों में संवेदनाएं जल जाए तो अंधेरे में सिर्फ गांव नहीं व्यवस्था भी डूबती है 
बांदा के तिंदवारा गांव से उठी यह आवाज केवल बिजली की मांग नहीं है, बल्कि उस प्रशासनिक संवेदनहीनता के खिलाफ एक तीखा प्रतिरोध है, जो हर बार आश्वासनों के बल्ब तो जलाती है, लेकिन गांवों के घरों में उजाला पहुंचाने में असफल रहती है।
एक ओर सरकार 24 घंटे बिजली आपूर्ति के दावे करती है, दूसरी ओर तिंदवारा के ग्रामीण 105 घंटे से अंधेरे में रहने को मजबूर हैं। सवाल यह है कि आखिर यह कैसा विकास है, जिसमें टूटे हुए बिजली के पोल महीनों तक व्यवस्था की टूटी हुई रीढ़ का प्रतीक बने रहते हैं? यह कैसी जवाबदेही है, जिसमें अधिकारी जनता के फोन तक उठाना अपनी जिम्मेदारी नहीं समझते?
बिजली केवल तारों में बहने वाली धारा नहीं है, यह जीवन की गति है। जब बिजली जाती है तो केवल पंखे नहीं रुकते, बल्कि बच्चों की पढ़ाई, किसानों की उम्मीदें, बुजुर्गों की राहत और घरों की सामान्य दिनचर्या भी ठहर जाती है। भीषण गर्मी में 10 से 12 घंटे की कटौती और फिर लगातार कई दिनों तक अंधेरा, किसी तकनीकी खराबी से ज्यादा प्रशासनिक विफलता की कहानी कहता है।विडंबना यह है कि शिकायतें ऊपर तक पहुंचती हैं, ज्ञापन दिए जाते हैं, लेकिन कार्रवाई की गति उतनी ही सुस्त रहती है, जितनी गांव की बंद पड़ी बिजली लाइनें। जब व्यवस्था सुनना बंद कर दे, तब जनता सड़कों पर उतरती है। चक्का जाम की चेतावनी दरअसल आक्रोश का वह अंतिम स्वर है, जो बताता है कि धैर्य की भी एक सीमा होती है।
लोकतंत्र में जनता केवल वोट देने वाली भीड़ नहीं होती, वह व्यवस्था की असली मालिक होती है। यदि उसके घर अंधेरे में हैं, तो सरकारी दावों की चमक भी फीकी पड़ जाती है। तिंदवारा का सवाल केवल बिजली का नहीं है, बल्कि यह पूछता है कि क्या सरकारी मशीनरी का दायित्व सिर्फ योजनाओं की घोषणा करना है या फिर लोगों के जीवन में वास्तविक राहत पहुंचाना भी?
यदि अब भी जिम्मेदार लोग नहीं चेते, तो यह अंधेरा केवल गांव तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि व्यवस्था की विश्वसनीयता को भी निगल जाएगा। क्योंकि इतिहास गवाह है—जब समस्याओं की अनदेखी की जाती है, तो शिकायतें धीरे-धीरे आंदोलनों का रूप ले लेती हैं।
    user_Amod Kumar
    Amod Kumar
    रिपोर्टर बांदा, बांदा, उत्तर प्रदेश•
    54 min ago
  • हिसार के नवला से विधायक ने सतलोक आश्रम धनाना धाम में संत रामपाल जी महाराज से मुलाकात की। विधायक ने सत्ता के गलियारों से निकलकर आध्यात्म की चौखट पर पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से मानव जीवन के उद्देश्य के बारे में जानकारी प्राप्त की।
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    हिसार के नवला से विधायक ने सतलोक आश्रम धनाना धाम में संत रामपाल जी महाराज से मुलाकात की। विधायक ने सत्ता के गलियारों से निकलकर आध्यात्म की चौखट पर पहुंचकर संत रामपाल जी महाराज से मानव जीवन के उद्देश्य के बारे में जानकारी प्राप्त की।
    user_Akhilesh
    Akhilesh
    मौदहा, हमीरपुर, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • महोबा जिले के पनवाड़ी ब्लॉक के भुजपुरा से एक खबर सामने आई है, जिसमें सरकारी काम का 'अपहरण' किए जाने और एक महिला मेट को धमकी दिए जाने का मामला उजागर हुआ है।
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    महोबा जिले के पनवाड़ी ब्लॉक के भुजपुरा से एक खबर सामने आई है, जिसमें सरकारी काम का 'अपहरण' किए जाने और एक महिला मेट को धमकी दिए जाने का मामला उजागर हुआ है।
    user_इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
    इंडिया न्यूज यूपी एक्सप्रेस
    महोबा, महोबा, उत्तर प्रदेश•
    9 hrs ago
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