बड़वानी में धूमधाम से मनाया जा रहा भगोरिया हाट बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद बड़वानी। जिले में आदिवासी समाज का पारंपरिक और बहुप्रतीक्षित भगोरिया हाट पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। 24 फरवरी को पलसूद से शुरू हुए इस सांस्कृतिक पर्व ने अब पूरे जिले को उत्सव के रंग में रंग दिया है। शनिवार को बड़वानी शहर के दशहरा मैदान में आयोजित भगोरिया हाट में हजारों की संख्या में समाजजन उमड़े। सुबह से ही मैदान और आसपास के क्षेत्रों में चहल-पहल का माहौल रहा। दशहरा मैदान में चारों ओर रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां नजर आए। ढोल-मांदल की गूंज पर समूहों में लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। युवाओं ने पारंपरिक साफा-फेंटा बांधा तो युवतियों ने चांदी के आभूषण और पारंपरिक श्रृंगार से अपनी संस्कृति की झलक पेश की। बुजुर्गों ने लोकगीत गाकर वातावरण को और भी जीवंत बना दिया। पूरा मैदान आदिवासी परंपराओं, संगीत और उल्लास से सराबोर दिखा। परंपरा का पर्व भगोरिया हाट होली पर्व से पूर्व मनाया जाने वाला आदिवासी समाज का प्रमुख उत्सव है। यह केवल खरीद-फरोख्त का बाजार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण अवसर है। भगोरिया को प्रेम और सामाजिक स्वीकृति का प्रतीक भी माना जाता है। होलिका दहन तक जिले के अलग-अलग स्थानों पर हाट आयोजित होते हैं और इसके साथ ही पर्व का समापन होता है। बाजार में रही विशेष रौनक दशहरा मैदान में सजी दुकानों पर कृषि उत्पाद, वन उपज, महुआ, तेंदूपत्ता, स्थानीय हस्तशिल्प, घरेलू सामग्री, श्रृंगार वस्तुएं और पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाओं ने होली पूजन सामग्री की खरीदी की, वहीं बच्चों ने खिलौनों और मिठाइयों का आनंद लिया। त्योहार से एक सप्ताह पहले ही नए कपड़ों और आभूषणों की खरीदारी शुरू हो गई थी। जनप्रतिनिधि भी हुए शामिल भगोरिया हाट के आयोजन में जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की और समाजजनों को शुभकामनाएं दीं। विष्णु बंडे (बड़वानी विधायक प्रतिनिधि) ने कहा कि भगोरिया हाट हमारी आदिवासी संस्कृति की पहचान है और इसे सहेजना सभी की जिम्मेदारी है। वहीं दूधी राम (ग्रामीण) ने बताया कि यह पर्व समाज को एकजुट रखने और परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है।
बड़वानी में धूमधाम से मनाया जा रहा भगोरिया हाट बड़ी संख्या में लोग रहे मौजूद बड़वानी। जिले में आदिवासी समाज का पारंपरिक और बहुप्रतीक्षित भगोरिया हाट पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। 24 फरवरी को पलसूद से शुरू हुए इस सांस्कृतिक पर्व ने अब पूरे जिले को उत्सव के रंग में रंग दिया है। शनिवार को बड़वानी शहर के दशहरा मैदान में आयोजित भगोरिया हाट में हजारों की संख्या में समाजजन उमड़े। सुबह से ही मैदान और आसपास के क्षेत्रों में चहल-पहल का माहौल रहा। दशहरा मैदान में चारों ओर रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां नजर आए। ढोल-मांदल की गूंज पर समूहों में लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। युवाओं ने पारंपरिक साफा-फेंटा बांधा तो युवतियों ने चांदी के आभूषण और पारंपरिक श्रृंगार से अपनी संस्कृति की झलक पेश की। बुजुर्गों ने लोकगीत गाकर वातावरण को और भी जीवंत बना दिया। पूरा मैदान आदिवासी परंपराओं, संगीत और उल्लास से सराबोर दिखा। परंपरा का पर्व भगोरिया हाट होली पर्व से पूर्व मनाया जाने वाला आदिवासी समाज का प्रमुख उत्सव है। यह केवल खरीद-फरोख्त का बाजार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण अवसर है। भगोरिया को प्रेम और सामाजिक स्वीकृति का प्रतीक भी माना जाता है। होलिका दहन तक जिले के अलग-अलग स्थानों पर हाट आयोजित होते हैं और इसके साथ ही पर्व का समापन होता है। बाजार में रही विशेष रौनक दशहरा मैदान में सजी दुकानों पर कृषि उत्पाद, वन उपज, महुआ, तेंदूपत्ता, स्थानीय हस्तशिल्प, घरेलू सामग्री, श्रृंगार वस्तुएं और पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाओं ने होली पूजन सामग्री की खरीदी की, वहीं बच्चों ने खिलौनों और मिठाइयों का आनंद लिया। त्योहार से एक सप्ताह पहले ही नए कपड़ों और आभूषणों की खरीदारी शुरू हो गई थी। जनप्रतिनिधि भी हुए शामिल भगोरिया हाट के आयोजन में जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की और समाजजनों को शुभकामनाएं दीं। विष्णु बंडे (बड़वानी विधायक प्रतिनिधि) ने कहा कि भगोरिया हाट हमारी आदिवासी संस्कृति की पहचान है और इसे सहेजना सभी की जिम्मेदारी है। वहीं दूधी राम (ग्रामीण) ने बताया कि यह पर्व समाज को एकजुट रखने और परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है।
- Post by Hemant Nagziriya2
- बड़वानी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में 2 मार्च को नागलवाड़ी में आयोजित होने जा रही कृषि कैबिनेट बैठक के राजनीतिक मायने भी निकाले जा रहे हैं। निमाड़ अंचल के सात जिलों—खंडवा, खरगोन, बड़वानी, बुरहानपुर, धार, झाबुआ और आलीराजपुर—को साधने की रणनीति के रूप में इस बैठक को देखा जा रहा है। इन सात जिलों की कुल 28 विधानसभा सीटों में से 14 पर कांग्रेस और 14 पर भाजपा का कब्जा है। ऐसे में 2028 के विधानसभा चुनाव से पहले आदिवासी वोट बैंक को साधने के लिहाज से यह बैठक अहम मानी जा रही है। नागलवाड़ी में अस्थायी मंत्रालय बैठक का आयोजन शिखरधाम स्थित भिलट देव मंदिर की तलहटी में बने आठ एकड़ के गार्डन में किया जा रहा है। यहां एसी डोम और अस्थायी मंत्रालय का स्वरूप तैयार किया गया है। भाजपा जिलाध्यक्ष अजय यादव के अनुसार, सुबह करीब 11:30 बजे मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बैठक प्रारंभ होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री जुलवानिया में आयोजित भगोरिया हाट में भी शामिल होंगे। यह प्रदेश की छठी डेस्टिनेशन कैबिनेट बैठक है। इससे पहले जबलपुर (भेड़ाघाट), सिंग्रामपुर, महेश्वर, इंदौर और पचमढ़ी में बैठकें हो चुकी हैं। इन मुद्दों पर होगी चर्चा सूत्रों के मुताबिक बैठक में निम्न विषयों पर मंथन संभव है— किसानों के लिए सिंचाई सुविधाओं का विस्तार,उन्नत बीज और बेहतर बाजार व्यवस्था,आय दोगुनी करने की कार्ययोजना मसाला फसलों (मिर्च, हल्दी, धनिया) को बढ़ावा,पशुपालकों को आधुनिक प्रशिक्षण (ब्राजील मॉडल),किसानों के खातों को समग्र आईडी से जोड़ना,कृषि संबंधी जानकारी मोबाइल पर उपलब्ध कराना उद्यानिकी विभाग द्वारा मसाला फसलों के लिए नई योजना की घोषणा भी संभव बताई जा रही है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट की मांग नागलवाड़ी क्षेत्र टमाटर उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। स्थानीय किसान संतोष भायल, दिनेश यादव और मुकेश गेहलोत ने क्षेत्र में फूड प्रोसेसिंग यूनिट (कैचप प्लांट) स्थापित करने की मांग उठाई है। किसानों का कहना है कि यहां का टमाटर देश के 10 से अधिक राज्यों में सप्लाई होता है और निर्यात की भी संभावनाएं हैं। प्रशासनिक तैयारियां पूरी कलेक्टर जयति सिंह ने बताया कि कृषि कैबिनेट को लेकर सुरक्षा, पार्किंग, मंच और वीआईपी व्यवस्थाएं लगभग पूरी कर ली गई हैं। अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। कांग्रेस-भाजपा में जुबानी जंग पूर्व गृहमंत्री बाला बच्चन ने आरोप लगाया कि मोहन सरकार की कथनी और करनी में अंतर है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार के समय नागलवाड़ी को 1900 करोड़ रुपए की सौगात दी गई थी। विधानसभा सत्र समय से पहले समाप्त कर सरकार जनता के सवालों से बच रही है। वहीं भाजपा जिला प्रभारी बाबूलाल यादव ने पलटवार करते हुए कहा कि भाजपा सरकार विकास के लिए प्रतिबद्ध है। कांग्रेस के नेताओं ने अपने कार्यकाल में जिले के विकास के लिए ठोस कार्य नहीं किए। चुनावी नजर से अहम बैठक राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, निमाड़ के आदिवासी बहुल क्षेत्रों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। ऐसे में कृषि कैबिनेट के माध्यम से सरकार विकास और किसान हितैषी निर्णयों का संदेश देना चाहती है।नागलवाड़ी की यह बैठक प्रशासनिक के साथ-साथ राजनीतिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।1
- *अली खामेनेई की मौत पर कश्मीर में लाल चौक पर प्रदर्शन,..* *शिया समुदाय के लोगों ने अमेरिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी की...* जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत पर आक्रोश देखने को मिल रहा है. इस बीच शिया समुदाय के लोगों के ने अमेरिका के खिलाफ जमकर नारेबाजी की है. खामेनेई की मौत पर लोगों ने कड़ा विरोध जताते हुए सड़कों पर उतर आए हैं. इस दौरान लोगों द्वारा जमकर नारेबाजी करते हुए अमेरिका का विरोध किया जा रहा है. इस दौरान प्रदर्शनकारी लोग ‘रहबर तेरे खून से इंकलाब आएगा’ के नारे लगा रहे हैं. लोगों में अली खामेनेई की मौत पर जबरदस्त गुस्सा देखने को मिल रहा है. जम्मू-कश्मीर के लोगों में ईरान के सर्वोच्च नेता आयातुल्ला अली खामेनेई की मौत पर आक्रोश है. श्रीनगर के लाल चौक पर लोग तस्वीरें, पोस्टर, बैनर और ईरानी झंडे लेकर खड़े हैं. हजारों की तादाद में लोगों में साफतौर पर ईरान के सर्वोच्च लीडर की मौत पर गुस्सा देखने को मिल रही है. इस बीच प्रदर्शनकारी ‘एक से बढ़कर एक जलील, अमेरिका-इजराइल’ के भी नारे लगा रहे हैं. वहीं आगे इन लोगों का साफ कहना है कि ‘अमेरिका को जो यार है, गद्दार है’. अली खामेनेई की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर के लाल चौक पर लोगों का जमावड़ा लग गया है. इस दौरान लाल चौक पुरुष और युवा अपने हाथों में अली खामेनेई के फोटो लेकर दिखाई दे रहे हैं. इस दौरान कश्मीर के अलग-अलग हिस्सों में इस मौत पर लगातार आक्रोश बढ़ता जा रहा है. कश्मीर के अंदर हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. लोग भारी संख्या में अपने घरों से निकलकर सड़कों, इमामबाड़ों पर आकर प्रदर्शन कर रहे हैं. ईरान ने लगभग 8 देशों में करारा जवाब दिया. इसी बीच खबर आ रही है कि ईरान के सर्वोच्च नेता के परिवार पर हमला हुआ जिसमें उन समेत कई लोग मारे गए हैं. बता दें कि शनिवार (1 मार्च) को इजराइल ने अमेरिका के साथ मिलकर ईरान के तेहरान पर शुरुआती हमला किया. जिसके जवाब में ईरान की तरफ से अमेरिका के सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया. ईरान की सरकारी मीडिया ने रविवार (1 मार्च) की सुबह पुष्टि की और कहा कि इजराइल और अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत हो गई है. अधिकारियों ने बताया कि शिया बहुल इलाकों में सैकड़ों प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने शांतिपूर्वक सड़कों पर मार्च किया और अमेरिका तथा इजराइल विरोधी नारे लगाए।1
- श्रीराम चौक निवाली पर बाबा श्री श्याम का फाल्गुन माह की बारस पर 101 लीटर दूध की खीर व 11 किलो से अधिक का चूरमा वितरित * निवाली, 28 फरवरी शनिवार, (स्वतंत्र पत्रकार सुनील सोनी) फाल्गुन माह में ग्यारस पर कीर्तन कर बारस पर खीर चूरमे का लगाया भोग। निवाली 1 मार्च रविवार (स्वतंत्र पत्रकार सुनील सोनी)नगर में श्यामप्रेमियो द्वारा फाल्गुन माह की शुक्ल पक्ष की ग्यारस को बाबा श्री खाटूश्याम का कीर्तन किया गया साथ श्री श्याम सेवा समिति द्वारा दुसरे दिन बारस पर श्रीराम चौक पर खाटूश्याम की आरती कर खीर व चूरमे की प्रसादी वितरित की गई जिसमें सैकड़ो महिला व पुरुष मौजूद रहे वही साथ मे महिलाओं द्वारा रंग लगाकर फाग उत्सव मनाते हुए होली खेली।4
- Post by निमाड़ का दबंग न्यूज2
- Post by दधिवल मानव1
- 2 मार्च को मध्यप्रदेश के सीएम मोहन यादव, 25 मंत्रियों के साथ सेंधवा के नागलवाड़ी पहुंचेंगे, जहां कृषि कैबिनेट की बैठक आयोजित होगी, पश्चात सीएम यादव जुलवानिया के भगोरिया हाट पर्व में भी शामिल हो सकते हैं, प्रभारी मंत्री ने दी जानकारी1
- बड़वानी। जिले में आदिवासी समाज का पारंपरिक और बहुप्रतीक्षित भगोरिया हाट पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया जा रहा है। 24 फरवरी को पलसूद से शुरू हुए इस सांस्कृतिक पर्व ने अब पूरे जिले को उत्सव के रंग में रंग दिया है। शनिवार को बड़वानी शहर के दशहरा मैदान में आयोजित भगोरिया हाट में हजारों की संख्या में समाजजन उमड़े। सुबह से ही मैदान और आसपास के क्षेत्रों में चहल-पहल का माहौल रहा। दशहरा मैदान में चारों ओर रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा में सजे युवक-युवतियां नजर आए। ढोल-मांदल की गूंज पर समूहों में लोकनृत्य प्रस्तुत किए गए। युवाओं ने पारंपरिक साफा-फेंटा बांधा तो युवतियों ने चांदी के आभूषण और पारंपरिक श्रृंगार से अपनी संस्कृति की झलक पेश की। बुजुर्गों ने लोकगीत गाकर वातावरण को और भी जीवंत बना दिया। पूरा मैदान आदिवासी परंपराओं, संगीत और उल्लास से सराबोर दिखा। परंपरा का पर्व भगोरिया हाट होली पर्व से पूर्व मनाया जाने वाला आदिवासी समाज का प्रमुख उत्सव है। यह केवल खरीद-फरोख्त का बाजार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता, पारिवारिक संबंधों और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का महत्वपूर्ण अवसर है। भगोरिया को प्रेम और सामाजिक स्वीकृति का प्रतीक भी माना जाता है। होलिका दहन तक जिले के अलग-अलग स्थानों पर हाट आयोजित होते हैं और इसके साथ ही पर्व का समापन होता है। बाजार में रही विशेष रौनक दशहरा मैदान में सजी दुकानों पर कृषि उत्पाद, वन उपज, महुआ, तेंदूपत्ता, स्थानीय हस्तशिल्प, घरेलू सामग्री, श्रृंगार वस्तुएं और पारंपरिक व्यंजन आकर्षण का केंद्र रहे। महिलाओं ने होली पूजन सामग्री की खरीदी की, वहीं बच्चों ने खिलौनों और मिठाइयों का आनंद लिया। त्योहार से एक सप्ताह पहले ही नए कपड़ों और आभूषणों की खरीदारी शुरू हो गई थी। जनप्रतिनिधि भी हुए शामिल भगोरिया हाट के आयोजन में जनप्रतिनिधियों ने भी सहभागिता की और समाजजनों को शुभकामनाएं दीं। विष्णु बंडे (बड़वानी विधायक प्रतिनिधि) ने कहा कि भगोरिया हाट हमारी आदिवासी संस्कृति की पहचान है और इसे सहेजना सभी की जिम्मेदारी है। वहीं दूधी राम (ग्रामीण) ने बताया कि यह पर्व समाज को एकजुट रखने और परंपराओं को जीवित रखने का माध्यम है।1