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इस आकर्षक और मनोहारी संसार में मनुष्य की इच्छाओं का अंत नहीं है। इसलिए इंसान मात्र को संतुष्ट और संयम पूर्ण जीवन बिताना चाहिए।
दधिवल मानव
इस आकर्षक और मनोहारी संसार में मनुष्य की इच्छाओं का अंत नहीं है। इसलिए इंसान मात्र को संतुष्ट और संयम पूर्ण जीवन बिताना चाहिए।
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- बड़वानी। राजघाट बसाहट निवासी लखन वर्मा की सौंफ मंडी स्थित दुकान से पर्स चोरी का मामला सामने आया है। उनकी माता द्वारा रखा गया पर्स एक महिला उठाकर ले गई, जिसकी हरकत दुकान में लगे CCTV में कैद हो गई। पर्स में सोने के टॉप्स और 15–16 हजार रुपये नकद थे। टॉप्स की कीमत करीब 40–50 हजार रुपये बताई जा रही है। पीड़ित पक्ष के अनुसार महिला को पाला बाजार में पकड़कर नगद राशि वापस ले ली गई। मामले की रिपोर्ट नानपुर थाने में दर्ज कराई गई है। घटना के समय नानपुर में भगोरिया उत्सव भी चल रहा है। पुलिस CCTV के आधार पर जांच कर रही है।1
- 1.83 करोड़ की टंकी बनी खतरे की घंटी, जेतपुरा में हादसे किनार संकेत देती पानी की टंकी। धार जिले के समीप ग्राम जेतपुरा से विकास के दावों की हकीकत उजागर करती एक गंभीर तस्वीर सामने आई है। जहां मछली केंद्र के पास लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) द्वारा करीब 1 करोड़ 83 लाख रुपये की लागत से निर्मित पानी की टंकी आज ग्रामीणों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि भय का कारण बन चुकी है। वर्ष 2022 में निर्मित और 2023 में शुरू की गई यह टंकी महज तीन वर्षों में ही जर्जर हालत में पहुंच गई है। टंकी के चारों ओर गहरी दरारें साफ दिखाई दे रही हैं, जिनसे लगातार पानी रिस रहा है। रिसाव के चलते पिलर और नींव कमजोर होते जा रहे हैं, जिससे किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है। पानी की सप्लाई ठप, बढ़ी दहशत रिसाव इतना अधिक हो गया है कि टंकी भरते ही पानी रिसने लगता है। हालात ऐसे हो गए थे कि 15 से 20 दिनों तक पूरे क्षेत्र में जल आपूर्ति बंद रखनी पड़ी। हजारों की आबादी को बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान होना पड़ा। टंकी के आसपास घनी आबादी और बच्चों का खेल क्षेत्र होने से ग्रामीणों में हर पल दुर्घटना का डर बना हुआ है। ग्रामीणों के आरोप ग्राम के उपसरपंच सुरेश मेडा का कहना है कि टंकी शुरू से ही रिसाव कर रही थी, लेकिन अब स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है। उनका आरोप है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा। स्थानीय निवासी लखन भिड़े ने बताया कि उनका घर टंकी के पास है और परिवार हमेशा दहशत में रहता है। वहीं प्रीति व्यास का कहना है कि टंकी की सीढ़ियां जर्जर हो चुकी हैं और ऊपर चढ़ते ही ढांचा हिलने लगता है। खराब निर्माण के आरोप ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया और भ्रष्टाचार के चलते यह स्थिति बनी। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद तीन साल में टंकी की हालत खराब होना कई सवाल खड़े करता है। विभागीय लापरवाही? पीएचई विभाग के अधिकारी सुरेश चंद्र जालोनिया से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे बात नहीं हो सकी। न तो फोन का जवाब मिला और न ही वे कार्यालय में उपलब्ध बताए गए। अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? क्या ग्रामीणों की सुरक्षा से बढ़कर कागजी योजनाएं हैं? ग्रामीणों की मांग है कि तत्काल तकनीकी जांच कराई जाए, टंकी की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराया जाए और यदि निर्माण में लापरवाही पाई जाए तो जिम्मेदारों पर सख्त कार्रवाई की जाए। फिलहाल, 1.83 करोड़ की यह पानी की टंकी विकास का प्रतीक नहीं, बल्कि खतरे की चेतावनी बनकर खड़ी है।1
- छकताला भगोरिया में ऐतिहासिक जनसैलाब, संस्कृति के रंग में रंगा पूरा क्षेत्र प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने मांदल बजाकर किया भव्य गैर का नेतृत्व, कार्यकर्ताओं संग जमकर थिरके जिला ब्यूरो मुस्तकीम मुगल छकताला भगोरिया महोत्सव इस वर्ष अभूतपूर्व उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक वैभव के साथ मनाया गया। आदिवासी परंपरा, रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधानों और ढोल-मांदल की गूंजती थाप के बीच आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने स्वयं मंदल बजाकर भव्य गैर का नेतृत्व किया। जैसे ही मंदल की थाप गूंजी, पूरा छकताला क्षेत्र झूम उठा और हजारों की संख्या में ग्रामीणजन, युवा व कार्यकर्ता गैर में शामिल होकर संस्कृति के रंग में रंग गए। इस बार छकताला भगोरिया में केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि पड़ोसी राज्यों की संस्कृति की भी झलक नजर आई। गुजरात और महाराष्ट्र से आए समाजजनों की उपस्थिति ने आयोजन को और अधिक रंगीन बना दिया। पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में गुजरात और महाराष्ट्र की सांस्कृतिक छाप स्पष्ट दिखाई दी, जिसने भगोरिया को बहुरंगी और अंतरराज्यीय स्वरूप प्रदान किया। गैर के दौरान युवक कांग्रेस के जिला अध्यक्ष पुष्पराज रावत को कार्यकर्ताओं ने कंधों पर बैठाकर पारंपरिक नृत्य कराया। यह दृश्य पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण बना रहा। युवाओं का जोश, ढोल-मांदल की लय और पारंपरिक गीतों की गूंज ने पूरे वातावरण को उत्सवमय बना दिया। सोंडवा ब्लॉक से हजारों कार्यकर्ता गैर में शामिल हुए, जिससे आयोजन और भी भव्य व ऐतिहासिक बन गया। छकताला बेल्ट के वरिष्ठ नेता और बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने एकजुटता का संदेश दिया। व्हिसिल ब्लोवर के रूप में चर्चित डॉ आनंद राय ने भी भगोरिया में पहुंचकर आदिवासी संस्कृति का आनंद लिया। उन्होंने गैर में शामिल होकर पारंपरिक उत्सव की सराहना की और इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बताया। इस बार भगोरिया महोत्सव में विदेशी सैलानियों का भी विशेष जमावड़ा देखने को मिला। देश-विदेश से आए पर्यटकों ने आदिवासी लोकनृत्य, वेशभूषा और परंपराओं को करीब से देखा और ग्रामीणों के साथ नृत्य कर इस आयोजन को अंतरराष्ट्रीय रंग प्रदान किया। आदिवासी विकास परिषद के प्रदेश उपाध्यक्ष महेश पटेल ने कहा कि भगोरिया केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी अस्मिता, परंपरा और सामाजिक एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी जड़ों से जोड़ता है और भाईचारे का संदेश देता है। छकताला भगोरिया ने एक बार फिर साबित कर दिया कि यह सांस्कृतिक आयोजन क्षेत्र की गौरवशाली विरासत, अंतरराज्यीय सांस्कृतिक समन्वय और सामूहिक एकजुटता का प्रतीक है, जो आने वाली पीढ़ियों को अपनी परंपराओं से जुड़े रहने की प्रेरणा देता रहेगा।1