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115 खाद्य प्रोडक्ट पर शिकंजा, कहीं आपकी पसंदीदा चीज तो नहीं! *भ्रामक दावों और मिस-लेबलिंग वाले 115 खाद्य उत्पादों पर गुमला प्रशासन सख्त; बाजार से हटाने का निर्देश, धारा 52 व 53 के तहत होगी कार्रवाई* गुमला:-भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), नई दिल्ली और अपर मुख्य सचिव-सह-खाद्य सुरक्षा आयुक्त, झारखंड के निर्देश पर अमानक, मिस-लेबलिंग और भ्रामक दावों (Misleading Claims) वाले खाद्य पदार्थों के खिलाफ राज्यव्यापी सघन जांच व प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया है। इस संबंध में अभिहित अधिकारी -सह- अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (खाद्य सुरक्षा शाखा), गुमला द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया गया है।  FSSAI द्वारा नियमों के उल्लंघन और भ्रामक प्रचार को लेकर चिन्हित 115 उत्पादों/कंपनियों की सूची जारी करते हुए सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs), वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को इन उत्पादों के मौजूदा स्टॉक को बाजार से तुरंत वापस लेने (रिकॉल करने) का आदेश दिया गया है।  व्यापारिक संगठनों के साथ समन्वय, बिक्री रोकने की तैयारी इस रोक को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने हेतु आज अध्यक्ष चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स, गुमला एवं अध्यक्ष/सचिव, गुमला डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रगस एसोसिएशन को भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया गया है। प्रशासन ने व्यावसायिक संगठनों से अपील की है कि वे व्यापारियों और दवा विक्रेताओं के बीच जागरूकता फैलाएं ताकि ऐसे किसी भी भ्रामक उत्पाद की बिक्री जिले में न हो सके।  जांच के दायरे में आए प्रमुख ब्रांड्स और उत्पाद FSSAI की ओर से जारी सूची में कई बड़े और रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय ब्रांड्स शामिल हैं:  पतंजलि फूड्स लिमिटेड: पतंजलि दूध बिस्कुट (100% आटा होने का दावा)।  फेरेरो इंडिया: किंडर जॉय (मिल्क सॉलिड्स के भ्रामक दावे)।  मैरिको लिमिटेड: सफोला टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल (हार्ट-हेल्थ को लेकर भ्रामक दावे)।  एनर्जी व कैफीन युक्त पेय पदार्थ: स्टिंग एनर्जी, रेड बुल, मॉन्स्टर एनर्जी, हेल एनर्जी, एड्रेनालाईन रश, कैम्पा एनर्जी और गैटोरेड स्पोर्ट्स ड्रिंक (कैफीनेटेड बेवरेज पर बिना उचित नियमों के 'एनर्जी ड्रिंक' या 'स्पोर्ट्स ड्रिंक' नाम का इस्तेमाल)।  इमामी एग्रोटेक व अमूल: इमामी 'हेल्दी एंड टेस्टी' तेल और अमूल शुगर-फ्री आइसक्रीम।  अन्य उत्पाद: बिस्लेरी (एडेड मिनरल्स दावा), रॉ प्रेसर्री मैंगो ड्रिंक (बिना एडेड शुगर का भ्रामक दावा), मास्टरचाउ रेमन नूडल्स, लोटे चोको पाई, डाबर हार्ट केयर, विभिन्न कंपनियों के ब्राउन ब्रेड, टोफू एवं बेबी फूड उत्पाद।  लापरवाही पर होगी दंडात्मक कार्रवाई अभिहित अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने, भ्रामक विज्ञापन देने और गलत ब्रांडिंग करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 52 और 53 सहित अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  आम जनता से अपील स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन ने आम उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील की है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पैकेजिंग पर लिखे भ्रामक दावों व अधूरी न्यूट्रिशन जानकारी वाले उत्पादों को खरीदने से बचें। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को लगातार फील्ड विजिट कर इन उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

1 day ago
user_Shivam Singh
Shivam Singh
Local News Reporter गुमला, गुमला, झारखंड•
1 day ago

115 खाद्य प्रोडक्ट पर शिकंजा, कहीं आपकी पसंदीदा चीज तो नहीं! *भ्रामक दावों और मिस-लेबलिंग वाले 115 खाद्य उत्पादों पर गुमला प्रशासन सख्त; बाजार से हटाने का निर्देश, धारा 52 व 53 के तहत होगी कार्रवाई* गुमला:-भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), नई दिल्ली और अपर मुख्य सचिव-सह-खाद्य सुरक्षा आयुक्त, झारखंड के निर्देश पर अमानक, मिस-लेबलिंग और भ्रामक दावों (Misleading Claims) वाले खाद्य पदार्थों के खिलाफ राज्यव्यापी सघन जांच व प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया है। इस संबंध में अभिहित अधिकारी -सह- अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (खाद्य सुरक्षा शाखा), गुमला द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया गया है।  FSSAI द्वारा नियमों के उल्लंघन और भ्रामक प्रचार को लेकर चिन्हित 115 उत्पादों/कंपनियों की सूची जारी करते हुए सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs), वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को इन उत्पादों के मौजूदा स्टॉक को बाजार से तुरंत वापस लेने (रिकॉल करने) का आदेश दिया गया है।  व्यापारिक संगठनों के साथ समन्वय, बिक्री रोकने की तैयारी इस रोक को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने हेतु आज अध्यक्ष चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स, गुमला एवं अध्यक्ष/सचिव, गुमला डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रगस एसोसिएशन को भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया गया है। प्रशासन ने व्यावसायिक संगठनों से अपील की है कि वे व्यापारियों और दवा विक्रेताओं के बीच जागरूकता फैलाएं ताकि ऐसे किसी भी भ्रामक उत्पाद की बिक्री जिले में न हो सके।  जांच के दायरे में आए प्रमुख ब्रांड्स और उत्पाद FSSAI की ओर से जारी सूची में कई बड़े और रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय ब्रांड्स शामिल हैं:  पतंजलि फूड्स लिमिटेड: पतंजलि दूध बिस्कुट (100% आटा होने का दावा)।  फेरेरो इंडिया: किंडर जॉय (मिल्क सॉलिड्स के भ्रामक दावे)।  मैरिको लिमिटेड: सफोला टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल (हार्ट-हेल्थ को लेकर भ्रामक दावे)।  एनर्जी व कैफीन युक्त पेय पदार्थ: स्टिंग एनर्जी, रेड बुल, मॉन्स्टर एनर्जी, हेल एनर्जी, एड्रेनालाईन रश, कैम्पा एनर्जी और गैटोरेड स्पोर्ट्स ड्रिंक (कैफीनेटेड बेवरेज पर बिना उचित नियमों के 'एनर्जी ड्रिंक' या 'स्पोर्ट्स ड्रिंक' नाम का इस्तेमाल)।  इमामी एग्रोटेक व अमूल: इमामी 'हेल्दी एंड टेस्टी' तेल और अमूल शुगर-फ्री आइसक्रीम।  अन्य उत्पाद: बिस्लेरी (एडेड मिनरल्स दावा), रॉ प्रेसर्री मैंगो ड्रिंक (बिना एडेड शुगर का भ्रामक दावा), मास्टरचाउ रेमन नूडल्स, लोटे चोको पाई, डाबर हार्ट केयर, विभिन्न कंपनियों के ब्राउन ब्रेड, टोफू एवं बेबी फूड उत्पाद।  लापरवाही पर होगी दंडात्मक कार्रवाई अभिहित अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने, भ्रामक विज्ञापन देने और गलत ब्रांडिंग करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 52 और 53 सहित अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  आम जनता से अपील स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन ने आम उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील की है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पैकेजिंग पर लिखे भ्रामक दावों व अधूरी न्यूट्रिशन जानकारी वाले उत्पादों को खरीदने से बचें। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को लगातार फील्ड विजिट कर इन उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।

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    user_Shivam Singh
    Shivam Singh
    Local News Reporter गुमला, गुमला, झारखंड•
    21 hrs ago
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    user_Aevlogs
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    8 hrs ago
  • पशु जन्म नियंत्रण एवं श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश एवं पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 के अनुरूप समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश गुमला। उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में आज उनके कार्यालय कक्ष में पशु जन्म नियंत्रण, श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम, रेबीज नियंत्रण तथा पशु कल्याण से संबंधित विषयों की समीक्षा को लेकर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में गुमला के पुलिस उपाधीक्षक, जिला पशुपालन पदाधिकारी, नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि सहित संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों एवं पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 के आलोक में जिले में पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, आवारा कुत्तों की आबादी के नियंत्रण, नसबंदी एवं एंटी रेबीज टीकाकरण, डॉग बाइट की घटनाओं की रोकथाम, पशु क्रूरता पर नियंत्रण तथा पशु कल्याण से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों एवं संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ पशुओं के प्रति मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। पशुओं के साथ क्रूरता किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में नगर परिषद एवं संबंधित स्थानीय निकायों को जिले में सघन पशु जन्म नियंत्रण अभियान चलाने, चिन्हित क्षेत्रों एवं हॉटस्पॉट में आवारा कुत्तों को मानवीय तरीके से पकड़कर नसबंदी, कृमिनाशक उपचार एवं एंटी रेबीज टीकाकरण सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। उपचार एवं टीकाकरण के बाद स्वस्थ कुत्तों को नियमानुसार उसी क्षेत्र में वापस छोड़ने तथा आक्रामक एवं बीमार कुत्तों के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप शेल्टर होम में रखने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। उपायुक्त ने आक्रामक आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की उपलब्धता एवं आवश्यकता का आकलन करते हुए भूमि, क्षमता, आधारभूत संरचना, उपकरण एवं मानव संसाधन से संबंधित आवश्यकताओं को उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने हेतु निर्देश दिया गया। साथ ही, जिले में वार्डवार आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित फीडिंग जोन चिन्हित कर आवश्यक सूचना-पट्ट लगाने तथा नागरिकों एवं पशु प्रेमियों को निर्धारित स्थानों पर ही पशुओं को भोजन कराने के लिए जागरूक करने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को डॉग बाइट के मामलों में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के प्रावधानों के अनुरूप एंटी रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यकतानुसार रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों एवं चिकित्सकों को आवश्यक प्रोटोकॉल के संबंध में प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया। डॉग बाइट से संबंधित मामलों का समुचित अभिलेखीकरण एवं डाटा रिपोर्टिंग करने पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि डॉग बाइट की घटना होने पर नागरिकों को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेने के संबंध में जागरूक किया जाए। काटने वाले कुत्ते की, जहां संभव हो, निर्धारित अवधि तक निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा संबंधित मामले की सूचना स्थानीय निकाय एवं संबंधित विभाग को देने की व्यवस्था विकसित की जाए। पालतू पशुओं के संबंध में उपायुक्त ने अनिवार्य पंजीकरण एवं वार्षिक एंटी रेबीज टीकाकरण को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। पालतू कुत्तों के मालिकों को पशु नियंत्रण, टीकाकरण एवं सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित निर्धारित नियमों के पालन के लिए जागरूक करने को कहा गया। पशु क्रूरता से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए पुलिस विभाग एवं संबंधित पदाधिकारियों को प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में भारतीय न्याय संहिता सहित पशु क्रूरता से संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के अनुपालन तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को जिले में पशु जन्म नियंत्रण एवं रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए नोडल समन्वय एवं निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। साथ ही ABC केंद्रों एवं शेल्टर होम निर्माण हेतु निर्देश दिया गया। बैठक के दौरान अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्यक्रम के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों के निराकरण पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को आगामी माह के लिए पशु जन्म नियंत्रण अभियान के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा सघन जनजागरूकता अभियान की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण, रेबीज की रोकथाम, नागरिकों की सुरक्षा और पशु कल्याण इन सभी पहलुओं को साथ लेकर समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। संबंधित विभाग अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करते हुए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया एवं सक्षम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
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    पशु जन्म नियंत्रण एवं श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक

सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश एवं पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 के अनुरूप समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश
गुमला। उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में आज उनके कार्यालय कक्ष में पशु जन्म नियंत्रण, श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम, रेबीज नियंत्रण तथा पशु कल्याण से संबंधित विषयों की समीक्षा को लेकर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में गुमला के पुलिस उपाधीक्षक, जिला पशुपालन पदाधिकारी, नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि सहित संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों एवं पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 के आलोक में जिले में पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, आवारा कुत्तों की आबादी के नियंत्रण, नसबंदी एवं एंटी रेबीज टीकाकरण, डॉग बाइट की घटनाओं की रोकथाम, पशु क्रूरता पर नियंत्रण तथा पशु कल्याण से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
उपायुक्त ने संबंधित विभागों एवं संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ पशुओं के प्रति मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। पशुओं के साथ क्रूरता किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
बैठक में नगर परिषद एवं संबंधित स्थानीय निकायों को जिले में सघन पशु जन्म नियंत्रण अभियान चलाने, चिन्हित क्षेत्रों एवं हॉटस्पॉट में आवारा कुत्तों को मानवीय तरीके से पकड़कर नसबंदी, कृमिनाशक उपचार एवं एंटी रेबीज टीकाकरण सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। उपचार एवं टीकाकरण के बाद स्वस्थ कुत्तों को नियमानुसार उसी क्षेत्र में वापस छोड़ने तथा आक्रामक एवं बीमार कुत्तों के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप शेल्टर होम में रखने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया।
उपायुक्त ने आक्रामक आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की उपलब्धता एवं आवश्यकता का आकलन करते हुए भूमि, क्षमता, आधारभूत संरचना, उपकरण एवं मानव संसाधन से संबंधित आवश्यकताओं को उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने हेतु निर्देश दिया गया। साथ ही, जिले में वार्डवार आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित फीडिंग जोन चिन्हित कर आवश्यक सूचना-पट्ट लगाने तथा नागरिकों एवं पशु प्रेमियों को निर्धारित स्थानों पर ही पशुओं को भोजन कराने के लिए जागरूक करने को कहा गया।
स्वास्थ्य विभाग को डॉग बाइट के मामलों में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के प्रावधानों के अनुरूप एंटी रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यकतानुसार रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों एवं चिकित्सकों को आवश्यक प्रोटोकॉल के संबंध में प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया। डॉग बाइट से संबंधित मामलों का समुचित अभिलेखीकरण एवं डाटा रिपोर्टिंग करने पर भी विशेष जोर दिया गया।
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि डॉग बाइट की घटना होने पर नागरिकों को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेने के संबंध में जागरूक किया जाए। काटने वाले कुत्ते की, जहां संभव हो, निर्धारित अवधि तक निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा संबंधित मामले की सूचना स्थानीय निकाय एवं संबंधित विभाग को देने की व्यवस्था विकसित की जाए।
पालतू पशुओं के संबंध में उपायुक्त ने अनिवार्य पंजीकरण एवं वार्षिक एंटी रेबीज टीकाकरण को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। पालतू कुत्तों के मालिकों को पशु नियंत्रण, टीकाकरण एवं सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित निर्धारित नियमों के पालन के लिए जागरूक करने को कहा गया।
पशु क्रूरता से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए पुलिस विभाग एवं संबंधित पदाधिकारियों को प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में भारतीय न्याय संहिता सहित पशु क्रूरता से संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के अनुपालन तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर भी चर्चा की गई।
उपायुक्त ने संबंधित विभागों को जिले में पशु जन्म नियंत्रण एवं रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए नोडल समन्वय एवं निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। साथ ही ABC केंद्रों एवं शेल्टर होम निर्माण हेतु निर्देश दिया गया।
बैठक के दौरान अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्यक्रम के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों के निराकरण पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को आगामी माह के लिए पशु जन्म नियंत्रण अभियान के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा सघन जनजागरूकता अभियान की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण, रेबीज की रोकथाम, नागरिकों की सुरक्षा और पशु कल्याण इन सभी पहलुओं को साथ लेकर समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। संबंधित विभाग अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करते हुए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया एवं सक्षम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।
    user_राहुल कुमार
    राहुल कुमार
    Local News Reporter चैनपुर, गुमला, झारखंड•
    2 hrs ago
  • ए.डी. पब्लिक स्कूल में स्काउट्स एवं गाइड्स का 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह ए.डी. पब्लिक स्कूल में स्काउट्स एवं गाइड्स का 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह ए.डी. पब्लिक स्कूल में सोमवार को तीन दिवसीय स्काउट्स एवं गाइड्स विशेष प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। शिविर के पहले ही दिन योग्य छात्र-छात्राओं का जोश और अनुशासन देखने लायक था। यह विशेष कैंप अगले तीन दिनों तक स्कूल कैंपस में चलेगा। इसके बाद विद्यार्थियों के निरंतर अभ्यास के लिए तय शेड्यूल के मुताबिक हर महीने 2 दिन इसका नियमित आयोजन किया जाएगा। शिविर में मुख्य ट्रेनर के तौर पर हरिओम जी बच्चों को स्काउटिंग के नियम, प्राथमिक उपचार, अनुशासन और सेवा भावना की बारीकियां सिखा रहे हैं। वहीं उनका साथ देने के लिए विद्यालय की पीटी टीचर निक्की आर्या भी मैदान पर सक्रिय रहकर बच्चों का मार्गदर्शन कर रही हैं। कार्यक्रम के शुभारंभ पर विद्यालय के निदेशक ने बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि स्काउट्स एवं गाइड्स केवल एक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक अनुशासित कला है। यह बच्चों में आत्मनिर्भरता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और देश सेवा का जज्बा पैदा करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को पूरी लगन से सीखने के लिए प्रेरित किया। शिविर के पहले दिन बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
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    ए.डी. पब्लिक स्कूल में स्काउट्स एवं गाइड्स का 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह
ए.डी. पब्लिक स्कूल में स्काउट्स एवं गाइड्स का 3 दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरू, बच्चों में दिखा जबर्दस्त उत्साह
ए.डी. पब्लिक स्कूल में सोमवार को तीन दिवसीय स्काउट्स एवं गाइड्स विशेष प्रशिक्षण शिविर की शुरुआत बेहद उत्साहपूर्ण माहौल में हुई। शिविर के पहले ही दिन योग्य छात्र-छात्राओं का जोश और अनुशासन देखने लायक था।
यह विशेष कैंप अगले तीन दिनों तक स्कूल कैंपस में चलेगा। इसके बाद विद्यार्थियों के निरंतर अभ्यास के लिए तय शेड्यूल के मुताबिक हर महीने 2 दिन इसका नियमित आयोजन किया जाएगा।
शिविर में मुख्य ट्रेनर के तौर पर हरिओम जी बच्चों को स्काउटिंग के नियम, प्राथमिक उपचार, अनुशासन और सेवा भावना की बारीकियां सिखा रहे हैं। वहीं उनका साथ देने के लिए विद्यालय की पीटी टीचर निक्की आर्या भी मैदान पर सक्रिय रहकर बच्चों का मार्गदर्शन कर रही हैं।
कार्यक्रम के शुभारंभ पर विद्यालय के निदेशक ने बच्चों की हौसला अफजाई करते हुए कहा कि स्काउट्स एवं गाइड्स केवल एक ट्रेनिंग नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक अनुशासित कला है। यह बच्चों में आत्मनिर्भरता, त्वरित निर्णय लेने की क्षमता और देश सेवा का जज्बा पैदा करता है। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को पूरी लगन से सीखने के लिए प्रेरित किया।
शिविर के पहले दिन बच्चों ने विभिन्न गतिविधियों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
    user_A.D. PUBLIC SCHOOL, SENHA
    A.D. PUBLIC SCHOOL, SENHA
    Primary school सेन्हा, लोहरदगा, झारखंड•
    23 hrs ago
  • कौन-कौन खाए हैं कांदा? कमेंट करके बताइए! #shorts #shortvideo #youtubeshorts #viralvideo #tanda
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    कौन-कौन खाए हैं कांदा? कमेंट करके बताइए! #shorts #shortvideo #youtubeshorts #viralvideo #tanda
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    2 hrs ago
  • 'बैंकित' (Bankit) का 599 रुपये का "साइलेंट कट" धमाका: 'हमारा क्या उखाड़ लोगे?' वाला एटीट्यूड और 45 दिनों से लगातार सिर्फ 'झांसा'! बिना बताए अकाउंट से कट गए ₹599, सवाल पूछने पर अफसरों की फौज का 'अहंकार' और 'इग्नोर मोड' ऑन! जानिए कैसे छोटे दुकानदारों के पसीने की कमाई पर चल रहा है 'आश्वासन का खेल'। न्यूज़ डेस्क / विशेष रिपोर्ट: अगर आप अपनी दुकान पर ग्राहकों का पैसा निकालने या डिजिटल लेन-देन के लिए FINDI / BANKIT (बैंकित) ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो ज़रा अपने खाते के ट्रांजैक्शन संभालकर देख लीजिए! हो सकता है कि आपकी जेब से भी चुपके से "सब्सक्रिप्शन प्लान" के नाम पर डाका डाला जा चुका हो और आपको खबर तक न हो। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक दुकानदार एजेंट के खाते से बिना किसी सहमति या जानकारी के सीधे ₹599 काट लिए गए (सेवा: Subscription Plan - 599 - M)। जब इस "साइलेंट कटौती" का पता चला, तो लगा कि कोई गलती से कटा होगा, लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू हुई! 🎭 'अधिकारियों की बारात' और 45 दिनों की 'आश्वासन एक्सप्रेस' जब दुकानदार ने अपने हक का पैसा वापस मांगा और पूछा कि “किसकी इजाजत से ये पैसे काटे गए?”, तो जवाब में कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। बस इतना कहा गया—“एक बार कट गया है, आगे से नहीं कटेगा!” (मानो 599 रुपये कोई खैरात में बांटे जा रहे हों!) बात यहीं खत्म नहीं हुई। समाधान के नाम पर कस्टमर केयर और सेल्स टीम ने अधिकारियों की पूरी 'पदानुक्रम' (Hierarchy) की लिस्ट थमा दी: निचले स्तर पर: शोएब खान (Shoaib Khan) * उनके ऊपर: महफूज अली (Mahfuj Ali) और सबसे ऊपर: विजय श्रीवास्तव (Vijay Shrivastav) लेकिन नतीजा? ढाक के वही तीन पात! जब इन साहबानों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कुछ ने तो फरियाद सुनते ही फोन उठाना बंद कर दिया, तो कुछ के पास जवाब देने की फुरसत ही नहीं थी! 45 दिन बीत जाने के बाद भी हर बार सिर्फ एक ही घुट्टी पिलाई जा रही है—“पैसे वापस आ जाएंगे, प्रोसेस में है।” लेकिन वो 'जल्द' कब आएगा, इसकी कोई सीमा-रेखा नहीं है। 📱 स्क्रीनशॉट में खुला 'अहंकार' और लाचारी का सच! कंपनी के प्रतिनिधियों के रवैये की पोल उनके चैट और कॉल लॉग्स खुद खोल रहे हैं: "कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" (शोएब खान की वॉर्निंग): चैट में साफ़ देखा जा सकता है कि जब पीड़ित दुकानदार ने कानूनी रास्ता अपनाने या FIR की बात कही, तो शोएब खान (Shoaib Khan Bankit) की तरफ से जवाब आता है: > "परेशान मत होइए आप लोग, ये सब से कुछ नहीं होगा। आप ही सिर्फ परेशान होंगे, कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" > इसके बाद आगे बड़े ही बेपरवाह लहजे में लिखा गया—"एक बार और अगर हो गया रिफंड तो ठीक, वरना आप लोग करना जो भी करना होगा!" > वाह! क्या ग्राहक सेवा है! यह बातचीत साफ़ दर्शाती है कि छोटे दुकानदारों की परेशानी पर कंपनी के नुमाइंदों को कितना 'फर्क' पड़ता है। > "I'll call you back later" का अटूट लूप: दुकानदार दिन भर फोन मिलाता रहता है और उधर से एक ऑटो-जनरेटेड या रूखा मैसेज आता है—"I'll call you back later." पीड़ित पूछ रहा है “क्या हुआ सर, 4 दिन हो गए?” लेकिन जवाब में फिर वही घिसा-पिटा मैसेज। कॉल लॉग्स बने 'नॉट कनेक्टेड': कॉल हिस्ट्री गवाह है कि लगातार कोशिशों के बाद भी फोन काट दिए जा रहे हैं या अनसुने किए जा रहे हैं। 💣 क्या यह सिर्फ ₹599 का मामला है? सोचने वाली बात यह है कि ₹599 की रकम एक छोटे दुकानदार के लिए दिन भर की मेहनत की कमाई हो सकती है। अगर ऐसी कटौती देश भर के हज़ारों दुकानदारों के खातों से 'बिना अनुमति' की जा रही है, तो यह आंकड़ा लाखों-करोड़ों का खेल बन जाता है! सवाल यह है कि: जब सब्सक्रिप्शन ग्राहक ने मांगा ही नहीं, तो पैसे काटने का अधिकार किसने दिया? दूसरा सवाल: 45 दिनों तक रिफंड अटकाना और 'कंपनी को फर्क नहीं पड़ता' जैसी धमकियां देना किस कंज्यूमर लॉ (Customer Rights) के तहत सही है? अब देखना यह होगा कि क्या BANKIT प्रबंधन अपने इन 'भगवान स्वरूप' रवैये वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करता है और पीड़ित का पैसा रिफंड करता है, या फिर पीड़ित दुकानदारों को मजबूरन कंज्यूमर फोरम (Consumer Court) और साइबर पुलिस का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा!
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    'बैंकित' (Bankit) का 599 रुपये का "साइलेंट कट" धमाका: 'हमारा क्या उखाड़ लोगे?' वाला एटीट्यूड और 45 दिनों से लगातार सिर्फ 'झांसा'!
बिना बताए अकाउंट से कट गए ₹599, सवाल पूछने पर अफसरों की फौज का 'अहंकार' और 'इग्नोर मोड' ऑन! जानिए कैसे छोटे दुकानदारों के पसीने की कमाई पर चल रहा है 'आश्वासन का खेल'।
न्यूज़ डेस्क / विशेष रिपोर्ट:
अगर आप अपनी दुकान पर ग्राहकों का पैसा निकालने या डिजिटल लेन-देन के लिए FINDI / BANKIT (बैंकित) ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो ज़रा अपने खाते के ट्रांजैक्शन संभालकर देख लीजिए! हो सकता है कि आपकी जेब से भी चुपके से "सब्सक्रिप्शन प्लान" के नाम पर डाका डाला जा चुका हो और आपको खबर तक न हो।
ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक दुकानदार एजेंट के खाते से बिना किसी सहमति या जानकारी के सीधे ₹599 काट लिए गए (सेवा: Subscription Plan - 599 - M)। जब इस "साइलेंट कटौती" का पता चला, तो लगा कि कोई गलती से कटा होगा, लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू हुई!
🎭 'अधिकारियों की बारात' और 45 दिनों की 'आश्वासन एक्सप्रेस'
जब दुकानदार ने अपने हक का पैसा वापस मांगा और पूछा कि “किसकी इजाजत से ये पैसे काटे गए?”, तो जवाब में कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। बस इतना कहा गया—“एक बार कट गया है, आगे से नहीं कटेगा!” (मानो 599 रुपये कोई खैरात में बांटे जा रहे हों!)
बात यहीं खत्म नहीं हुई। समाधान के नाम पर कस्टमर केयर और सेल्स टीम ने अधिकारियों की पूरी 'पदानुक्रम' (Hierarchy) की लिस्ट थमा दी:
निचले स्तर पर: शोएब खान (Shoaib Khan)
* उनके ऊपर: महफूज अली (Mahfuj Ali)
और सबसे ऊपर: विजय श्रीवास्तव (Vijay Shrivastav)
लेकिन नतीजा? ढाक के वही तीन पात!
जब इन साहबानों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कुछ ने तो फरियाद सुनते ही फोन उठाना बंद कर दिया, तो कुछ के पास जवाब देने की फुरसत ही नहीं थी! 45 दिन बीत जाने के बाद भी हर बार सिर्फ एक ही घुट्टी पिलाई जा रही है—“पैसे वापस आ जाएंगे, प्रोसेस में है।” लेकिन वो 'जल्द' कब आएगा, इसकी कोई सीमा-रेखा नहीं है।
📱 स्क्रीनशॉट में खुला 'अहंकार' और लाचारी का सच!
कंपनी के प्रतिनिधियों के रवैये की पोल उनके चैट और कॉल लॉग्स खुद खोल रहे हैं:
"कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" (शोएब खान की वॉर्निंग):
चैट में साफ़ देखा जा सकता है कि जब पीड़ित दुकानदार ने कानूनी रास्ता अपनाने या FIR की बात कही, तो शोएब खान (Shoaib Khan Bankit) की तरफ से जवाब आता है:
> "परेशान मत होइए आप लोग, ये सब से कुछ नहीं होगा। आप ही सिर्फ परेशान होंगे, कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!"
> इसके बाद आगे बड़े ही बेपरवाह लहजे में लिखा गया—"एक बार और अगर हो गया रिफंड तो ठीक, वरना आप लोग करना जो भी करना होगा!"
> वाह! क्या ग्राहक सेवा है! यह बातचीत साफ़ दर्शाती है कि छोटे दुकानदारों की परेशानी पर कंपनी के नुमाइंदों को कितना 'फर्क' पड़ता है।
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"I'll call you back later" का अटूट लूप:
दुकानदार दिन भर फोन मिलाता रहता है और उधर से एक ऑटो-जनरेटेड या रूखा मैसेज आता है—"I'll call you back later." पीड़ित पूछ रहा है “क्या हुआ सर, 4 दिन हो गए?” लेकिन जवाब में फिर वही घिसा-पिटा मैसेज।
कॉल लॉग्स बने 'नॉट कनेक्टेड':
कॉल हिस्ट्री गवाह है कि लगातार कोशिशों के बाद भी फोन काट दिए जा रहे हैं या अनसुने किए जा रहे हैं।
💣 क्या यह सिर्फ ₹599 का मामला है?
सोचने वाली बात यह है कि ₹599 की रकम एक छोटे दुकानदार के लिए दिन भर की मेहनत की कमाई हो सकती है। अगर ऐसी कटौती देश भर के हज़ारों दुकानदारों के खातों से 'बिना अनुमति' की जा रही है, तो यह आंकड़ा लाखों-करोड़ों का खेल बन जाता है!
सवाल यह है कि: जब सब्सक्रिप्शन ग्राहक ने मांगा ही नहीं, तो पैसे काटने का अधिकार किसने दिया?
दूसरा सवाल: 45 दिनों तक रिफंड अटकाना और 'कंपनी को फर्क नहीं पड़ता' जैसी धमकियां देना किस कंज्यूमर लॉ (Customer Rights) के तहत सही है?
अब देखना यह होगा कि क्या BANKIT प्रबंधन अपने इन 'भगवान स्वरूप' रवैये वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करता है और पीड़ित का पैसा रिफंड करता है, या फिर पीड़ित दुकानदारों को मजबूरन कंज्यूमर फोरम (Consumer Court) और साइबर पुलिस का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा!
    user_ANURAG
    ANURAG
    Media house जशपुर, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
  • गुमला जिले के बिशनपुर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में गलत ढंग से आंगनबाड़ीका सेविका का चुनाव किया गया गुमला जिले के बिशनपुर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में गलत ढंग से आंगनबाड़ीका सेविका का चुनाव किया गया
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    गुमला जिले के बिशनपुर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में गलत ढंग से आंगनबाड़ीका सेविका का चुनाव किया गया
गुमला जिले के बिशनपुर प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्र में गलत ढंग से आंगनबाड़ीका सेविका का चुनाव किया गया
    user_Sirf such
    Sirf such
    Local News Reporter लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    11 hrs ago
  • 115 खाद्य प्रोडक्ट पर शिकंजा, कहीं आपकी पसंदीदा चीज तो नहीं! *भ्रामक दावों और मिस-लेबलिंग वाले 115 खाद्य उत्पादों पर गुमला प्रशासन सख्त; बाजार से हटाने का निर्देश, धारा 52 व 53 के तहत होगी कार्रवाई* गुमला:-भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), नई दिल्ली और अपर मुख्य सचिव-सह-खाद्य सुरक्षा आयुक्त, झारखंड के निर्देश पर अमानक, मिस-लेबलिंग और भ्रामक दावों (Misleading Claims) वाले खाद्य पदार्थों के खिलाफ राज्यव्यापी सघन जांच व प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया है। इस संबंध में अभिहित अधिकारी -सह- अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (खाद्य सुरक्षा शाखा), गुमला द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया गया है।  FSSAI द्वारा नियमों के उल्लंघन और भ्रामक प्रचार को लेकर चिन्हित 115 उत्पादों/कंपनियों की सूची जारी करते हुए सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs), वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को इन उत्पादों के मौजूदा स्टॉक को बाजार से तुरंत वापस लेने (रिकॉल करने) का आदेश दिया गया है।  व्यापारिक संगठनों के साथ समन्वय, बिक्री रोकने की तैयारी इस रोक को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने हेतु आज अध्यक्ष चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स, गुमला एवं अध्यक्ष/सचिव, गुमला डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रगस एसोसिएशन को भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया गया है। प्रशासन ने व्यावसायिक संगठनों से अपील की है कि वे व्यापारियों और दवा विक्रेताओं के बीच जागरूकता फैलाएं ताकि ऐसे किसी भी भ्रामक उत्पाद की बिक्री जिले में न हो सके।  जांच के दायरे में आए प्रमुख ब्रांड्स और उत्पाद FSSAI की ओर से जारी सूची में कई बड़े और रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय ब्रांड्स शामिल हैं:  पतंजलि फूड्स लिमिटेड: पतंजलि दूध बिस्कुट (100% आटा होने का दावा)।  फेरेरो इंडिया: किंडर जॉय (मिल्क सॉलिड्स के भ्रामक दावे)।  मैरिको लिमिटेड: सफोला टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल (हार्ट-हेल्थ को लेकर भ्रामक दावे)।  एनर्जी व कैफीन युक्त पेय पदार्थ: स्टिंग एनर्जी, रेड बुल, मॉन्स्टर एनर्जी, हेल एनर्जी, एड्रेनालाईन रश, कैम्पा एनर्जी और गैटोरेड स्पोर्ट्स ड्रिंक (कैफीनेटेड बेवरेज पर बिना उचित नियमों के 'एनर्जी ड्रिंक' या 'स्पोर्ट्स ड्रिंक' नाम का इस्तेमाल)।  इमामी एग्रोटेक व अमूल: इमामी 'हेल्दी एंड टेस्टी' तेल और अमूल शुगर-फ्री आइसक्रीम।  अन्य उत्पाद: बिस्लेरी (एडेड मिनरल्स दावा), रॉ प्रेसर्री मैंगो ड्रिंक (बिना एडेड शुगर का भ्रामक दावा), मास्टरचाउ रेमन नूडल्स, लोटे चोको पाई, डाबर हार्ट केयर, विभिन्न कंपनियों के ब्राउन ब्रेड, टोफू एवं बेबी फूड उत्पाद।  लापरवाही पर होगी दंडात्मक कार्रवाई अभिहित अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने, भ्रामक विज्ञापन देने और गलत ब्रांडिंग करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 52 और 53 सहित अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  आम जनता से अपील स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन ने आम उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील की है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पैकेजिंग पर लिखे भ्रामक दावों व अधूरी न्यूट्रिशन जानकारी वाले उत्पादों को खरीदने से बचें। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को लगातार फील्ड विजिट कर इन उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
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    115 खाद्य प्रोडक्ट पर शिकंजा, कहीं आपकी पसंदीदा चीज तो नहीं!


*भ्रामक दावों और मिस-लेबलिंग वाले 115 खाद्य उत्पादों पर गुमला प्रशासन सख्त; बाजार से हटाने का निर्देश, धारा 52 व 53 के तहत होगी कार्रवाई*
गुमला:-भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI), नई दिल्ली और अपर मुख्य सचिव-सह-खाद्य सुरक्षा आयुक्त, झारखंड के निर्देश पर अमानक, मिस-लेबलिंग और भ्रामक दावों (Misleading Claims) वाले खाद्य पदार्थों के खिलाफ राज्यव्यापी सघन जांच व प्रवर्तन अभियान शुरू किया गया है। इस संबंध में अभिहित अधिकारी -सह- अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी (खाद्य सुरक्षा शाखा), गुमला द्वारा सार्वजनिक नोटिस जारी कर कड़ा रुख अपनाया गया है।  
FSSAI द्वारा नियमों के उल्लंघन और भ्रामक प्रचार को लेकर चिन्हित 115 उत्पादों/कंपनियों की सूची जारी करते हुए सभी खाद्य व्यवसाय संचालकों (FBOs), वितरकों, खुदरा विक्रेताओं और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को इन उत्पादों के मौजूदा स्टॉक को बाजार से तुरंत वापस लेने (रिकॉल करने) का आदेश दिया गया है।  
व्यापारिक संगठनों के साथ समन्वय, बिक्री रोकने की तैयारी
इस रोक को धरातल पर प्रभावी रूप से लागू करने हेतु आज अध्यक्ष चैम्बर ऑफ़ कॉमर्स, गुमला एवं अध्यक्ष/सचिव, गुमला डिस्ट्रिक्ट केमिस्ट एंड ड्रगस एसोसिएशन को भी इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए पत्र प्रेषित किया गया है। प्रशासन ने व्यावसायिक संगठनों से अपील की है कि वे व्यापारियों और दवा विक्रेताओं के बीच जागरूकता फैलाएं ताकि ऐसे किसी भी भ्रामक उत्पाद की बिक्री जिले में न हो सके।  
जांच के दायरे में आए प्रमुख ब्रांड्स और उत्पाद
FSSAI की ओर से जारी सूची में कई बड़े और रोजमर्रा इस्तेमाल होने वाले लोकप्रिय ब्रांड्स शामिल हैं:  
पतंजलि फूड्स लिमिटेड: पतंजलि दूध बिस्कुट (100% आटा होने का दावा)।  
फेरेरो इंडिया: किंडर जॉय (मिल्क सॉलिड्स के भ्रामक दावे)।  
मैरिको लिमिटेड: सफोला टोटल हार्ट प्रो कुकिंग ऑयल (हार्ट-हेल्थ को लेकर भ्रामक दावे)।  
एनर्जी व कैफीन युक्त पेय पदार्थ: स्टिंग एनर्जी, रेड बुल, मॉन्स्टर एनर्जी, हेल एनर्जी, एड्रेनालाईन रश, कैम्पा एनर्जी और गैटोरेड स्पोर्ट्स ड्रिंक (कैफीनेटेड बेवरेज पर बिना उचित नियमों के 'एनर्जी ड्रिंक' या 'स्पोर्ट्स ड्रिंक' नाम का इस्तेमाल)।  
इमामी एग्रोटेक व अमूल: इमामी 'हेल्दी एंड टेस्टी' तेल और अमूल शुगर-फ्री आइसक्रीम।  
अन्य उत्पाद: बिस्लेरी (एडेड मिनरल्स दावा), रॉ प्रेसर्री मैंगो ड्रिंक (बिना एडेड शुगर का भ्रामक दावा), मास्टरचाउ रेमन नूडल्स, लोटे चोको पाई, डाबर हार्ट केयर, विभिन्न कंपनियों के ब्राउन ब्रेड, टोफू एवं बेबी फूड उत्पाद।  
लापरवाही पर होगी दंडात्मक कार्रवाई
अभिहित अधिकारी ने स्पष्ट किया है कि निर्देशों का उल्लंघन करने, भ्रामक विज्ञापन देने और गलत ब्रांडिंग करने वालों पर खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 की धारा 52 और 53 सहित अन्य सुसंगत धाराओं के तहत कठोर दंडात्मक व कानूनी कार्रवाई की जाएगी।  
आम जनता से अपील
स्वास्थ्य विभाग व जिला प्रशासन ने आम उपभोक्ताओं से भी सतर्क रहने की अपील की है। नागरिकों को सलाह दी गई है कि वे पैकेजिंग पर लिखे भ्रामक दावों व अधूरी न्यूट्रिशन जानकारी वाले उत्पादों को खरीदने से बचें। इसके साथ ही खाद्य सुरक्षा पदाधिकारियों को लगातार फील्ड विजिट कर इन उत्पादों की बिक्री पर पूर्ण रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है।
    user_Shivam Singh
    Shivam Singh
    Local News Reporter गुमला, गुमला, झारखंड•
    1 day ago
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