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मध्य प्रदेश के मैहर में नागपुर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर मृतक महिला के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि महिला की मौत के बाद अस्पताल के डॉक्टर विपिन सिंह ने शव सौंपने से पहले ₹25 हजार की मांग की। विरोध करने पर कथित तौर पर अभद्रता की गई और शव देने में घंटों की देरी की गई। परिजनों के मुताबिक, महज करीब 3 घंटे के इलाज के बदले ₹25 हजार मांगे जा रहे थे। मामला बिगड़ता देख और पत्रकारों के अस्पताल पहुंचने के बाद कथित रूप से ₹13 हजार लेकर शव सौंपा गया। अब सवाल यह है कि क्या अस्पताल में इलाज के नाम पर मनमानी वसूली का खेल चल रहा है? क्या मौत के बाद भी परिजनों की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाया जा रहा है? पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब निगाहें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
Shiv Singh rajput dahiya journ
मध्य प्रदेश के मैहर में नागपुर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर मृतक महिला के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि महिला की मौत के बाद अस्पताल के डॉक्टर विपिन सिंह ने शव सौंपने से पहले ₹25 हजार की मांग की। विरोध करने पर कथित तौर पर अभद्रता की गई और शव देने में घंटों की देरी की गई। परिजनों के मुताबिक, महज करीब 3 घंटे के इलाज के बदले ₹25 हजार मांगे जा रहे थे। मामला बिगड़ता देख और पत्रकारों के अस्पताल पहुंचने के बाद कथित रूप से ₹13 हजार लेकर शव सौंपा गया। अब सवाल यह है कि क्या अस्पताल में इलाज के नाम पर मनमानी वसूली का खेल चल रहा है? क्या मौत के बाद भी परिजनों की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाया जा रहा है? पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब निगाहें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।
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- मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को दतिया में एक महत्वपूर्ण रोड शो किया। यह रोड शो भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रत्याशी आशुतोष तिवारी के समर्थन में आयोजित किया गया था। मुख्यमंत्री ने जनता से आग्रह किया कि वे आशुतोष तिवारी को समर्थन दें और भाजपा को ऐतिहासिक मतों से विजयी बनाएं। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा का लक्ष्य विकास और सुशासन है और जनता का समर्थन इसी लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि दतिया की जनता भाजपा को निराश नहीं करेगी और प्रचंड मतों से जीत दिलाएगी।1
- सतना शहर के गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड में फर्जी मेडिकल बनाने वाले मास्टरमाइंड अमित खरे का एक और कारनामा सामने आया है। जबलपुर स्थित स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल के संचालक अमित खरे ने सुनियोजित तरीके से पांच लोगों को डंपर से कुचलवाकर मौत के घाट उतरवा दिया। पुलिस ने इस पूरे मामले का खुलासा कर दिया है। जघन्य वारदात का पर्दाफाश होने के बाद मुख्य आरोपी अमित खरे को उसके साथियों के साथ जेल भेज दिया गया है।1
- भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान वैज्ञानिक और भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की गई है। देश के पूर्व राष्ट्रपति और महान वैज्ञानिक के रूप में उन्हें याद करते हुए श्रद्धासुमन अर्पित किए गए हैं।1
- गब्बर Is Back स्टाइल: "मौत के बाद भी बिल...! मैहर के अस्पताल की डरावनी कहानी",मैहर को किसी गब्बर का इंतजार मौत हुई... लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली सवाल तब शुरू हुआ, जब परिजनों से कहा—"पहले ₹25 हजार दो... फिर शव मिलेगा!" गब्बर Is Back स्टाइल: "मौत के बाद भी बिल...! मैहर के अस्पताल की डरावनी कहानी",मैहर को किसी गब्बर का इंतजार मौत हुई... लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। असली सवाल तब शुरू हुआ, जब परिजनों से कहा—"पहले ₹25 हजार दो... फिर शव मिलेगा!" मैहर-कटनी रोड पर स्थित नागपुर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल एक बार फिर गंभीर आरोपों के कारण चर्चा में है। इस बार मामला सिर्फ इलाज का नहीं, बल्कि मौत के बाद कथित वसूली का है। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती महिला ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। लेकिन दुख और सदमे के बीच परिवार पर एक और बोझ डाल दिया गया। आरोप है कि अस्पताल के डॉक्टर विपिन सिंह ने शव सौंपने से पहले ₹25 हजार जमा करने की मांग की। परिजनों का कहना है कि इलाज महज करीब तीन घंटे चला था, लेकिन बिल ऐसा बनाया गया कि परिवार सकते में आ गया। जब उन्होंने विरोध किया तो कथित तौर पर अभद्र व्यवहार हुआ और शव देने में भी घंटों की देरी की गई। फिर कहानी में नया मोड़ आया... जैसे ही पत्रकार अस्पताल पहुंचे और मामला तूल पकड़ने लगा, परिजनों का दावा है कि अस्पताल ने कथित रूप से ₹13 हजार लेकर शव सौंप दिया। क्या इंसान की सांसों की कीमत तय होती है... और मौत के बाद भी शव की रिहाई बिल की रकम से होती है? अगर परिजनों के आरोप सही हैं, तो यह केवल एक अस्पताल का मामला नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र पर बड़ा सवाल है। क्या इलाज सेवा है या कारोबार? क्या मजबूर परिवारों के आंसुओं की भी कोई कीमत तय कर दी गई है? निगाहें ढूढ़ती है स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन को। क्या इन आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी? क्या अस्पताल प्रबंधन से जवाब मांगा जाएगा? या फिर यह मामला भी कुछ दिनों की सुर्खियां बनकर फाइलों में दफन हो जाएगा? या फिर कोई गब्बर मैहर मे भी आयेगा2
- उँचेहरा में तहसीलदार कार्यालय परिसर के अंदर स्थित सार्वजनिक शौचालय की बदहाल स्थिति ने लोगों के लिए परेशानी बढ़ा दी है। शौचालय के चारों ओर घनी झाड़ियाँ, गंदगी और अव्यवस्था इस कदर फैल चुकी है कि पूरा परिसर किसी जंगल जैसा दिखाई देता है। इस परिसर के सामने जनपद पंचायत कार्यालय, आईटीआई सहित कई शासकीय कार्यालय स्थित हैं, जहाँ प्रतिदिन हजारों महिला एवं पुरुष अपने कार्यों के लिए आते हैं। लेकिन सार्वजनिक शौचालय की जर्जर एवं गंदगी से भरी स्थिति के कारण लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। सबसे अधिक परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों एवं दिव्यांगजनों को उठानी पड़ रही है। यह स्थिति न केवल प्रशासन की लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि स्वच्छता अभियान और नागरिक सुविधाओं के दावों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। यदि समय रहते शौचालय की साफ-सफाई, झाड़ियों की कटाई और नियमित रखरखाव नहीं कराया गया तो भविष्य में यह स्थान दुर्घटनाओं एवं असामाजिक गतिविधियों का केंद्र भी बन सकता है। जनहित में मांग की जाती है कि सार्वजनिक शौचालय की तत्काल साफ-सफाई कराई जाए, आसपास उगी झाड़ियों को हटाया जाए, शौचालय को नियमित रूप से संचालित एवं स्वच्छ रखा जाए और महिलाओं एवं आम नागरिकों के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएँ सुनिश्चित की जाएँ। स्वच्छ और सुरक्षित उँचेहरा, हम सबकी जिम्मेदारी है। अब प्रशासन को इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देना चाहिए।2
- उचेहरा (सतना, म.प्र.): बिजली संकट को लेकर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी उचेहरा ने विद्युत विभाग को ज्ञापन सौंपा है। क्षेत्र में अघोषित बिजली कटौती, लंबे समय से जले पड़े ट्रांसफार्मर और सड़कों व खेतों में लटकती खतरनाक तारों की समस्या से जूझ रही जनता और किसानों की परेशानी को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि बिजली विभाग की लापरवाही के कारण आम जनता और किसान बेहद परेशान हैं, जिससे खेती का काम ठप पड़ा है और जान-माल का खतरा बना हुआ है। ज्ञापन में उठाई गई मुख्य माँगों में शामिल हैं: गाँवों में लंबे समय से जले पड़े ट्रांसफार्मरों को तत्काल बदला जाए, सुचारू रूप से बिजली आपूर्ति और सही वोल्टेज सुनिश्चित किया जाए, लगभग 80% ट्रांसफार्मरों से जुड़ी पुरानी व जली हुई तारों को तुरंत बदला जाए, पोलों और पेड़ों पर लटक रही खतरनाक तारों का सुधार किया जाए और झाड़ियों की सफाई कराई जाए ताकि फॉल्ट न हो, शिकायत करने पर विभागीय कर्मचारियों द्वारा फोन न उठाने और ढिलाई बरतने के रवैये में सुधार किया जाए। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने विद्युत विभाग को चेतावनी देते हुए स्पष्ट कहा कि यदि 3 दिनों के भीतर ज्ञापन में दी गई समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया, तो उचेहरा विद्युत विभाग कार्यालय के सामने उग्र धरना-प्रदर्शन एवं आंदोलन किया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विभाग और प्रशासन की होगी। ज्ञापन प्राप्त करते हुए कनिष्ठ यंत्री (JE) ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं को आश्वस्त किया कि वे स्वयं किसान पृष्ठभूमि से आते हैं और समस्या की गंभीरता को समझते हैं। उन्होंने 2 दिनों के भीतर प्राथमिकता के आधार पर ट्रांसफार्मरों की मरम्मत कराने और विद्युत सप्लाई दुरुस्त करने का आश्वासन दिया। इस दौरान ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मोतीलाल कुशवाहा, युवा कांग्रेस ब्लॉक उपाध्यक्ष निखिल कुशवाहा, शुभम कुशवाहा, कमलेश पाल, सुखेंद्र कुशवाहा, शिवपूजन त्रिवेदी, शीलभद्र कुशवाहा, रूपकुमार गौतम, रामबालक विश्वकर्मा सहित कई कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- मध्य प्रदेश के मैहर में नागपुर मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल पर मृतक महिला के परिजनों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि महिला की मौत के बाद अस्पताल के डॉक्टर विपिन सिंह ने शव सौंपने से पहले ₹25 हजार की मांग की। विरोध करने पर कथित तौर पर अभद्रता की गई और शव देने में घंटों की देरी की गई। परिजनों के मुताबिक, महज करीब 3 घंटे के इलाज के बदले ₹25 हजार मांगे जा रहे थे। मामला बिगड़ता देख और पत्रकारों के अस्पताल पहुंचने के बाद कथित रूप से ₹13 हजार लेकर शव सौंपा गया। अब सवाल यह है कि क्या अस्पताल में इलाज के नाम पर मनमानी वसूली का खेल चल रहा है? क्या मौत के बाद भी परिजनों की मजबूरी को कमाई का जरिया बनाया जा रहा है? पूरे मामले में स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। अब निगाहें प्रशासन की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।1
- मध्य प्रदेश के सतना शहर में गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड के मास्टरमाइंड अमित खरे ने एक और संगीन अपराध को अंजाम दिया है। अमित खरे, जो स्मार्ट सिटी हॉस्पिटल, जबलपुर के संचालक हैं, ने सुनियोजित तरीके से पांच लोगों को डंपर से कुचलवाकर मौत के घाट उतार दिया। पुलिस ने इस कांड का खुलासा कर दिया है और अमित खरे को उसके साथियों के साथ जेल भेज दिया गया है। इससे पहले, अमित खरे पर फर्जी मेडिकल बनाने का आरोप था, जो गुप्ता पैलेस पुष्कर्णी पार्क कांड से जुड़ा था। अब इस नए खुलासे ने राज्य में सनसनी फैला दी है। पुलिस की तत्परता से मामले का पर्दाफाश हुआ और अपराधियों को सलाखों के पीछे पहुंचाया गया।1