बारेसाढ़ रेंज मे नए रेंजर के अतिरिक्त प्रभार का चौथे दिन भी बिरोध डेढ़गांव मे ग्रामीणों की बैठक ग्रामीणों ने अतिरिक्त प्रभार रद्द कर पूर्व रेंजर को पुनः जिम्मेदारी देने की मांग की* गारु : पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के महत्वपूर्ण बारेसांड़ वन क्षेत्र में नए रेंजर तरुण कुमार सिंह को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। विरोध के चौथे दिन डेढ़ गांव में ग्रामीणों और ग्राम प्रधान मिठू सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर सर्वसम्मति से नए रेंजर के पदस्थापन का विरोध जताया गया और इसे तत्काल रद्द करने की मांग की गई।बैठक में दौना, लाटु सहित कई गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि तरुण कुमार सिंह की नियमित पोस्टिंग चाईबासा वन प्रमंडल के आनंदपुर में है, जो बारेसांड़ से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी से अतिरिक्त प्रभार संभालने के कारण वन क्षेत्र के कार्यों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि बारेसांढ़ रेंजअत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है,जहां हाथियों सहित कई दुर्लभ वन्यजीव निवास करते हैं। ऐसे क्षेत्र में रेंजर की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तरुण कुमार सिंह पूर्व में भी बारेसांड़ रेंज में पदस्थापित रह चुके हैं और उस दौरान उनका कार्यकाल संतोषजनक नहीं रहा। ग्राम प्रधान मिठू सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पूर्व कार्यकाल में बिचौलियों को संरक्षण दिया गया और कई कार्य टेकरगार्ड के माध्यम से कराकर फर्जी तरीके से राशि निकाली गई, जिससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है।इससे पूर्व दुरुप के प्रधान दानियल ब्रिजिया लाटु के प्रधान प्रकाश मुंडा तथा कुजरूम के प्रधान उपेन्द्र उरांव सहित कई जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय विधायक रामचंद्र सिंह से मुलाकात कर तरुण कुमार सिंह का अतिरिक्त प्रभार रद्द करने की मांग की है। ग्रामीणों ने ग्राम सभा के माध्यम से मुख्य वन संरक्षक को लिखित आवेदन भी भेजा है।ग्रामीणों ने पूर्व रेंजर नंदकुमार मेहता को पुनः बारेसांड़ रेंज का प्रभार सौंपने की मांग करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में वन क्षेत्र का संचालन बेहतर तरीके से हुआ था और उनका व्यवहार भी ग्रामीणों के प्रति सहयोगात्मक था।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो वे व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। साथ ही उन्होंने वन विभाग से इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में नियमित रेंजर की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा और वन प्रबंधन सुचारू रूप से संचालित हो सके।
बारेसाढ़ रेंज मे नए रेंजर के अतिरिक्त प्रभार का चौथे दिन भी बिरोध डेढ़गांव मे ग्रामीणों की बैठक ग्रामीणों ने अतिरिक्त प्रभार रद्द कर पूर्व रेंजर को पुनः जिम्मेदारी देने की मांग की* गारु : पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के महत्वपूर्ण बारेसांड़ वन क्षेत्र में नए रेंजर तरुण कुमार सिंह को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। विरोध के चौथे दिन डेढ़ गांव में ग्रामीणों और ग्राम प्रधान मिठू सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर सर्वसम्मति से नए रेंजर के पदस्थापन का विरोध जताया गया और इसे तत्काल रद्द करने की मांग की गई।बैठक में दौना, लाटु सहित कई गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि तरुण कुमार सिंह की नियमित पोस्टिंग चाईबासा वन प्रमंडल के आनंदपुर में है, जो बारेसांड़ से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी से अतिरिक्त प्रभार संभालने के कारण वन क्षेत्र के कार्यों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि बारेसांढ़ रेंजअत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है,जहां हाथियों सहित कई दुर्लभ वन्यजीव निवास करते हैं। ऐसे क्षेत्र में रेंजर की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तरुण कुमार सिंह पूर्व में भी बारेसांड़ रेंज में पदस्थापित रह चुके हैं और उस दौरान उनका कार्यकाल संतोषजनक नहीं रहा। ग्राम प्रधान मिठू सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पूर्व कार्यकाल में बिचौलियों को संरक्षण दिया गया और कई कार्य टेकरगार्ड के माध्यम से कराकर फर्जी तरीके से राशि निकाली गई, जिससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है।इससे पूर्व दुरुप के प्रधान दानियल ब्रिजिया लाटु के प्रधान प्रकाश मुंडा तथा कुजरूम के प्रधान उपेन्द्र उरांव सहित कई जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय विधायक रामचंद्र सिंह से मुलाकात कर तरुण कुमार सिंह का अतिरिक्त प्रभार रद्द करने की मांग की है। ग्रामीणों ने ग्राम सभा के माध्यम से मुख्य वन संरक्षक को लिखित आवेदन भी भेजा है।ग्रामीणों ने पूर्व रेंजर नंदकुमार मेहता को पुनः बारेसांड़ रेंज का प्रभार सौंपने की मांग करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में वन क्षेत्र का संचालन बेहतर तरीके से हुआ था और उनका व्यवहार भी ग्रामीणों के प्रति सहयोगात्मक था।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो वे व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। साथ ही उन्होंने वन विभाग से इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में नियमित रेंजर की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा और वन प्रबंधन सुचारू रूप से संचालित हो सके।
- ग्रामीणों ने अतिरिक्त प्रभार रद्द कर पूर्व रेंजर को पुनः जिम्मेदारी देने की मांग की* गारु : पलामू टाइगर रिजर्व (पीटीआर) के महत्वपूर्ण बारेसांड़ वन क्षेत्र में नए रेंजर तरुण कुमार सिंह को अतिरिक्त प्रभार दिए जाने के बाद स्थानीय ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है। विरोध के चौथे दिन डेढ़ गांव में ग्रामीणों और ग्राम प्रधान मिठू सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित कर सर्वसम्मति से नए रेंजर के पदस्थापन का विरोध जताया गया और इसे तत्काल रद्द करने की मांग की गई।बैठक में दौना, लाटु सहित कई गांवों के ग्रामीण शामिल हुए। ग्रामीणों ने कहा कि तरुण कुमार सिंह की नियमित पोस्टिंग चाईबासा वन प्रमंडल के आनंदपुर में है, जो बारेसांड़ से लगभग 300 किलोमीटर दूर है। इतनी दूरी से अतिरिक्त प्रभार संभालने के कारण वन क्षेत्र के कार्यों एवं वन्यजीवों की सुरक्षा प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों का कहना है कि बारेसांढ़ रेंजअत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है,जहां हाथियों सहित कई दुर्लभ वन्यजीव निवास करते हैं। ऐसे क्षेत्र में रेंजर की नियमित उपस्थिति अत्यंत आवश्यक है।ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि तरुण कुमार सिंह पूर्व में भी बारेसांड़ रेंज में पदस्थापित रह चुके हैं और उस दौरान उनका कार्यकाल संतोषजनक नहीं रहा। ग्राम प्रधान मिठू सिंह ने आरोप लगाया कि उनके पूर्व कार्यकाल में बिचौलियों को संरक्षण दिया गया और कई कार्य टेकरगार्ड के माध्यम से कराकर फर्जी तरीके से राशि निकाली गई, जिससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है।इससे पूर्व दुरुप के प्रधान दानियल ब्रिजिया लाटु के प्रधान प्रकाश मुंडा तथा कुजरूम के प्रधान उपेन्द्र उरांव सहित कई जनप्रतिनिधियों ने स्थानीय विधायक रामचंद्र सिंह से मुलाकात कर तरुण कुमार सिंह का अतिरिक्त प्रभार रद्द करने की मांग की है। ग्रामीणों ने ग्राम सभा के माध्यम से मुख्य वन संरक्षक को लिखित आवेदन भी भेजा है।ग्रामीणों ने पूर्व रेंजर नंदकुमार मेहता को पुनः बारेसांड़ रेंज का प्रभार सौंपने की मांग करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में वन क्षेत्र का संचालन बेहतर तरीके से हुआ था और उनका व्यवहार भी ग्रामीणों के प्रति सहयोगात्मक था।ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र विचार नहीं किया गया तो वे व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। साथ ही उन्होंने वन विभाग से इस महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्र में नियमित रेंजर की नियुक्ति सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा और वन प्रबंधन सुचारू रूप से संचालित हो सके।1
- लस्थानीय लोगों की देखने के लिए उमड़ी भीड़,उस मार्ग से गुजरने वाले सभी लोगों रूके हुए हैं सड़क हुई जाम,,, कुटमू- सरईडीह मुख्य मार्ग पर क्षतिग्रस्त पुलिया के पास सभी वाहन चालक सावधानी से अपने वाहन को करें पार,, नहीं तो हो सकती है बड़ी हादसा,,,, क्यों की क्षतिग्रस्त हैं पुलिया ,, मिट्टी का भरावट भी भहर गया है। बरवाडीह (लातेहार): बरवाडीह प्रखंड क्षेत्र के कुटमू–सरईडीह मुख्य मार्ग स्थित कुटमू के समीप बड़का पुल पर शनिवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जानकारी के अनुसार सरईडीह गांव से अपने घर लौट रहे कार सवार पुल पार करने के दौरान दुर्घटना का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। पुल की जर्जर स्थिति के कारण वाहन अनियंत्रित होकर पलटने की स्थिति में पहुंच गया, लेकिन चालक की सूझबूझ से सभी यात्रियों की जान बच गई। बताया जाता है कि पोखरी कलां–सरईडीह मार्ग पर शिव मंदिर के समीप स्थित यह पुल पिछले वर्ष 28 जून को हुई भारी बारिश में क्षतिग्रस्त हो गया था। करीब आठ माह बीत जाने के बावजूद पुल की मरम्मत नहीं कराई गई है। बीच-बीच में मिट्टी भरकर आवागमन चालू रखने का प्रयास किया गया, लेकिन हाल की बारिश में वह भी बह गया, जिससे रास्ता और अधिक खतरनाक हो गया है।स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि यह पुल क्षेत्र के लोगों के लिए प्रमुख संपर्क मार्ग है,जो घनी आबादी वाले इस मुख्य मार्ग है जहां से प्रतिदिन सैकड़ों छोटे-बड़े वाहन, स्कूल वाहन और बाइक सवार गुजरते हैं। पुल में दरारें और धंसाव बढ़ने से हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। कई बार विभागीय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को सूचना देने के बावजूद अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है।ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब पुल की मरम्मत या पुनर्निर्माण कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी है कि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।1
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- Post by Sunil singh1
- गुमला: 23 फरवरी को प्रस्तावित नगरपालिका (आम) निर्वाचन को निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न कराने की दिशा में प्रशासन द्वारा सभी आवश्यक तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इसी क्रम में आज मतदान दलों के गठन हेतु पीठासीन पदाधिकारी एवं मतदान पदाधिकारियों का तृतीय (फाइनल) रेंडमाइजेशन सम्पन्न कराया गया। यह रेंडमाइजेशन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप पूर्ण पारदर्शिता के साथ संपन्न हुआ। पूरी प्रक्रिया सामान्य प्रेक्षक, नगर परिषद क्षेत्र गुमला, कमला कांत गुप्ता, तथा जिला निर्वाचन पदाधिकारी (नगरपालिका) सह उपायुक्त गुमला, प्रेरणा दीक्षित की उपस्थिति में संपन्न कराई गई, जिससे निर्वाचन प्रक्रिया की निष्पक्षता सुनिश्चित हो सके। तृतीय रेंडमाइजेशन के उपरांत सभी मतदान दलों को उनके निर्धारित मतदान केंद्रों के लिए अंतिम रूप से चिन्हित कर दिया गया है। इसके साथ ही कार्मिक प्रबंधन, सामग्री वितरण एवं अन्य व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की गई। इस अवसर पर उप विकास आयुक्त दिलेश्वर महतो, अपर समाहर्ता गुमला शशिंद्र कुमार बड़ाइक, सभी निर्वाची पदाधिकारी, उप निर्वाचन पदाधिकारी ( नगर पालिका) सह जिला पंचायती राज पदाधिकारी, जिला सूचना विज्ञान पदाधिकारी तथा कार्मिक कोषांग के वरीय पदाधिकारी सहित अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। जिला निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि तृतीय रेंडमाइजेशन निर्वाचन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है, जिससे मतदान कार्य पूर्णतः पारदर्शी एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराया जा सके। उन्होंने सभी अधिकारियों को सौंपे गए दायित्वों का निर्वहन पूरी जिम्मेदारी एवं सतर्कता के साथ सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 को सफलतापूर्वक संपन्न कराने हेतु प्रशासन प्रतिबद्ध है तथा सभी तैयारियां निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप पूर्ण की जा रही हैं।3
- चैनपुर: भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) ने चैनपुर के पूर्व प्रभार थाना अध्यक्ष अशोक कुमार को गुमला से गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ के बाद उन्हें रांची ले जाया गया, जहां आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए जेल भेज दिया गया।1
- एक ओर सरकारें ग्रामीण क्षेत्रों को ‘आदर्श ग्राम’ बनाने का दावा करती हैं, वहीं चैनपुर प्रखंड के रामपुर पंचायत अंतर्गत झड़गाँव में आज भी बुनियादी सड़क सुविधा सपना बनी हुई है। जानकारी देते हुए शुक्रवार को शाम चार बजे ग्रामीणों ने बताया कि बीते दो दशकों से पक्की सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई है। उन्होंने कहा कि बरसात के मौसम में गांव का संपर्क लगभग कट जाता है, जिससे गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार आवेदन और शिकायत के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों ने गंभीरता नहीं दिखाई, जिससे ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीण राजेश किशोर एक्का ने कहा कि वे लंबे समय से भूषण तिर्की और सरकार से सड़क निर्माण की गुहार लगा रहे हैं। चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे किए गए थे, लेकिन आज तक गांव की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। “हमें सिर्फ आश्वासन मिला, सड़क नहीं,” उन्होंने कहा। अलम बेला कुजूर ने बताया कि गाँव से मुख्य सड़क तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह कच्चा है और बरसात में दलदल बन जाता है। स्कूली बच्चे कीचड़ में गिरकर चोटिल हो जाते हैं। अल्कमनी एक्का ने कहा कि फिसलन के कारण पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है, जबकि गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक जोखिम उठाना पड़ता है क्योंकि एम्बुलेंस गांव के भीतर नहीं आती। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब बैठक में छोटे वाहन की मांग की गई, तो अधिकारियों ने व्यंग्य करते हुए कहा, “एरोप्लेन से बात कीजिए, वह सीधे आपके गांव उड़कर आएगा।” इस टिप्पणी से ग्रामीणों में गहरा रोष है। मरियम इक्का ने बताया कि एम्बुलेंस केवल बैरटोली तक ही पहुंचती है। वहां से मरीजों और प्रसव पीड़ित महिलाओं को कंधे पर ढोकर मुख्य सड़क तक लाना पड़ता है। समय पर अस्पताल न पहुंच पाने के कारण कई बार घर पर ही जोखिम भरा प्रसव कराना पड़ता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पक्की सड़क निर्माण कार्य शुरू नहीं किया गया, तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।4
- Post by Sonu Ram1