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रविवार, 28 जून को ऊना जिले की अख़बारों में बंगाणा, मैहतपुर, चिंतपूर्णी, अम्ब और गगरेट जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी सुर्खियां प्रमुखता से छाई रहीं। इन समाचारों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंधित खबरें भी शामिल थीं।
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रविवार, 28 जून को ऊना जिले की अख़बारों में बंगाणा, मैहतपुर, चिंतपूर्णी, अम्ब और गगरेट जैसे विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी सुर्खियां प्रमुखता से छाई रहीं। इन समाचारों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संबंधित खबरें भी शामिल थीं।
More news from Bilaspur and nearby areas
- झंडूता विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत स्थानीय विधायक जीत राम कटवाल की अध्यक्षता में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मंडल झंडूता और झंडूता कॉलेज के विद्यार्थियों ने विज्ञान संकाय की कक्षाओं को बंद किए जाने के विरोध में एक शांतिपूर्ण रैली निकाली।1
- सुजानपुर नगर परिषद में नवनिर्वाचित प्रधान नीलम धीमान और उपप्रधान विनय स्याल को उनके पदों की शपथ ग्रहण करवाई गई। इस अवसर पर सुजानपुर के विधायक कैप्टन रंजीत सिंह, सुमन भारती, राजेंद्र वर्मा सहित कई अन्य कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी विशेष रूप से उपस्थित रहे। शपथ ग्रहण समारोह के समापन के बाद, विधायक कैप्टन रंजीत सिंह ने नवनिर्वाचित प्रधान और उपप्रधान को उनका कार्यभार सौंपा और उन्हें सम्मानित भी किया।2
- जिला बिलासपुर में टीबी उन्मूलन अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में शनिवार को एक महत्वपूर्ण पहल की गई। उपायुक्त राहुल कुमार ने क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में एनटीपीसी के कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) के तहत लगभग 30 लाख रुपये की लागत से उपलब्ध कराई गई अल्ट्रा पोर्टेबल एक्स-रे मशीन का शुभारंभ किया। यह जिले को मिली तीसरी पोर्टेबल एक्स-रे मशीन है, जिसे अब दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में घर-घर पहुंचकर लोगों की मौके पर ही जांच करने के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। उपायुक्त राहुल कुमार ने बताया कि यह आधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) तकनीक से लैस मशीन टीबी के साथ-साथ निमोनिया, फेफड़ों के कैंसर और फेफड़ों से संबंधित अन्य गंभीर बीमारियों की शुरुआती अवस्था में पहचान करने में सक्षम है। इससे समय पर उपचार शुरू करके संक्रमण की श्रृंखला को प्रभावी ढंग से रोका जा सकेगा। उन्होंने इस मशीन को विशेष रूप से बुजुर्गों, बीपीएल परिवारों, प्रवासी श्रमिकों और अन्य संवेदनशील वर्गों तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने में अत्यंत उपयोगी बताया। स्वास्थ्य विभाग के पास अब कुल तीन पोर्टेबल एक्स-रे मशीनें उपलब्ध हैं, जिनमें से एक केंद्र सरकार, दूसरी अदाणी समूह और तीसरी एनटीपीसी द्वारा सीएसआर के तहत दी गई है। इन मशीनों के माध्यम से टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत गांव-गांव में स्वास्थ्य शिविर आयोजित कर 14 वर्ष से अधिक आयु के लोगों की एक्स-रे जांच की जा रही है। जिले में 244 उच्च जोखिम वाले गांवों की पहचान की गई है, जहां लगभग 90 हजार लोगों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अब तक 183 गांवों में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए जा चुके हैं और 20 हजार से अधिक लोगों की एक्स-रे जांच की जा चुकी है। उपायुक्त ने बताया कि वर्ष 2027 से पहले शेष सभी गांवों और लक्षित आबादी का शत-प्रतिशत कवरेज सुनिश्चित करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि अभी तक दो पोर्टेबल एक्स-रे मशीनों के माध्यम से प्रतिदिन लगभग 200 एक्स-रे किए जा रहे थे, लेकिन तीसरी मशीन उपलब्ध होने से अब प्रतिदिन लगभग 300 लोगों की जांच संभव होगी, जिससे अभियान को और गति मिलेगी तथा संदिग्ध मरीजों की शीघ्र पहचान सुनिश्चित हो सकेगी। इस अवसर पर उपायुक्त राहुल कुमार और सहायक आयुक्त राजकुमार ने स्वयं भी नई पोर्टेबल एक्स-रे मशीन के माध्यम से अपनी जांच करवाई। उपायुक्त ने कहा कि जिला प्रशासन रेडक्रॉस सोसायटी, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) और विभिन्न संस्थानों के सीएसआर सहयोग से टीबी मरीजों को निक्षय पोषण किट भी उपलब्ध करा रहा है, ताकि उपचार के दौरान उन्हें आवश्यक पोषण मिल सके और वे शीघ्र स्वस्थ हो सकें। उन्होंने एनटीपीसी के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल जिला बिलासपुर को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी। उन्होंने लोगों से स्वास्थ्य विभाग द्वारा आयोजित जांच शिविरों में बढ़-चढ़कर भाग लेने तथा टीबी के लक्षण दिखाई देने पर बिना किसी संकोच के चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील की। कार्यक्रम में एनटीपीसी कोलडैम परियोजना के परियोजना प्रमुख एस.एस. राव, मंगला हरिन्द्रम, अंजुला अग्रवाल, पूरन सिंह और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. शशिदत्त शर्मा सहित स्वास्थ्य विभाग एवं एनटीपीसी के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।1
- शिमला में भाजपा ने कांग्रेस सरकार के खिलाफ शनिवार को जोरदार धरना-प्रदर्शन किया। पार्टी ने जिला परिषद, बीडीसी और नगर निकायों के चेयरमैन व वाइस चेयरमैन के चुनाव में जानबूझकर की जा रही देरी को लेकर सरकार पर लोकतांत्रिक संस्थाओं की अनदेखी करने का गंभीर आरोप लगाया। प्रदर्शन के बाद, भाजपा नेताओं ने उपायुक्त के माध्यम से राज्यपाल को एक ज्ञापन भी सौंपा, जिसमें चेतावनी दी गई कि यदि जल्द चुनाव नहीं करवाए गए तो प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। शिमला के सीटीओ चौक पर स्थित उपायुक्त कार्यालय के बाहर हुए इस प्रदर्शन में भाजपा के वरिष्ठ नेताओं और कार्यकर्ताओं ने प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। भाजपा ने आरोप लगाया कि सरकार पंचायत चुनावों में मिली हार से बौखलाई हुई है और इसी कारण जिला परिषद, बीडीसी और नगर निकायों में चेयरमैन तथा वाइस चेयरमैन के चुनाव लगातार टाल रही है। इसे लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनता के जनादेश का अपमान बताया गया। भाजपा राज्यसभा सांसद हर्ष महाजन ने सरकार पर संवैधानिक संस्थाओं के साथ खिलवाड़ करने और चुने हुए जनप्रतिनिधियों के अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने जल्द चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं की, तो पार्टी पूरे प्रदेश में एक बड़ा जन आंदोलन चलाएगी और इस मामले में कोर्ट का रुख भी कर सकती है। भाजपा जिला अध्यक्ष केशव चौहान ने कहा कि भाजपा ने सरकार को दो दिन का अल्टीमेटम दिया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में चुनाव की तिथि घोषित नहीं की गई, तो पार्टी जिला, मंडल, ब्लॉक और वार्ड स्तर पर व्यापक धरना-प्रदर्शन करेगी। जिला परिषद सदस्यों ने भी सरकार के खिलाफ इस धरने में भाग लेते हुए चुनाव में देरी को असंवैधानिक करार दिया।4
- रैला पंचायत में प्रधान टेक सिंह ठाकुर ने नव निर्वाचित वार्ड सदस्यों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलवाई। यह जानकारी बुद्धि सिंह ठाकुर की एक वीडियो रिपोर्ट के माध्यम से सामने आई है।1
- आज जम्मू-कश्मीर के प्रवेश द्वार लखनपुर स्थित जय मां भद्रकाली किलेवाली माता मंदिर से भक्तों के लिए सीधा आरती दर्शन प्रसारित किया गया।1
- कौशल विकास भत्ता योजना को बहाल करने की मांग की गई है। इस संबंध में राज्य में यह मांग सामने आई है।1
- झंडूता विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत, स्थानीय विधायक जीत राम कटवाल की अध्यक्षता में भाजपा मंडल झंडूता और झंडूता कॉलेज के विद्यार्थियों ने एक शांतिपूर्ण रैली निकाली। यह रैली विज्ञान संकाय की कक्षाओं को बंद किए जाने के विरोध में आयोजित की गई थी।1
- प्रदेश कांग्रेस के पूर्व मीडिया कॉर्डिनेटर संदीप सांख्यान ने राम मंदिर में चढ़ावे के गबन और घोटाले को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा है कि देश के करोड़ों हिंदुओं की आस्था के प्रतीक भगवान श्री राम मंदिर में हुए इस गबन और घोटाले की जांच के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी की जांच संदेह के घेरे में है। सांख्यान ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की जांच देश के उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की देखरेख में की जानी चाहिए। संदीप सांख्यान के अनुसार, इस पूरे मामले से न केवल देश के हिंदुओं के साथ खिलवाड़ हुआ है, बल्कि सभी राम भक्तों की धार्मिक भावनाओं को भी गहरी चोट पहुंची है। उन्होंने मंदिर ट्रस्ट के अधिकारियों की नियुक्तियों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी निशाना साधा है। सांख्यान ने आरोप लगाया कि चंदे और चढ़ावे की कम रिपोर्टिंग की गई और करोड़ों रुपयों का कोई उचित हिसाब-किताब नहीं रखा गया। मीडिया रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए संदीप सांख्यान ने बताया कि यह घोटाला ₹200 करोड़ से अधिक का अनुमानित है। उन्होंने कहा कि सामान्य दिनों में प्रतिदिन श्री राम मंदिर अयोध्या में औसतन ₹8 से ₹10 लाख का चढ़ावा आता था, जबकि व्रत और त्योहारों के दौरान यह चढ़ावा ₹18 से ₹20 लाख तक पहुंच जाता था, जिसमें नकद राशि, सोना-चांदी और बहुमूल्य आभूषण भी शामिल होते थे, जो कि कथित तौर पर गायब किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, सांख्यान ने सवाल उठाया कि मंदिर न्यास में ₹14-15 हजार वेतन पाने वाले कुछ अस्थायी कर्मचारियों और उनके करीबियों ने पिछले कुछ महीनों में ₹40 लाख से लेकर ₹1.5 करोड़ तक के प्लॉट और मकान कैसे खरीद लिए, यह कैसे संभव हो सकता है। संदीप सांख्यान ने भाजपा की केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकारों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्होंने राम मंदिर के मुद्दे पर सरकारें बनाईं, लेकिन आज उसी राम मंदिर का चढ़ावा और संपत्ति चोरी होती रही और सरकारें मूकदर्शक बनी रहीं, जिससे देश के 100 करोड़ हिंदुओं की भावनाओं से खिलवाड़ होता रहा। उन्होंने इसे 'शर्मनाक' बताया और पूछा कि इस मसले पर आज भाजपा, विश्व हिन्दू परिषद, स्वयं सेवक संघ, बजरंग दल, हिन्दू जागरण मंच व इनकी अन्य संस्थाएं क्यों चुप हैं, जबकि देश की जनता इस पर जवाब चाहती है। सांख्यान ने मांग की है कि वर्तमान ट्रस्ट, जिसमें 'राजनीतिक लोग शामिल हैं', उसे भंग किया जाए और उसमें संतों, पुजारियों व धर्मगुरुओं को जगह दी जानी चाहिए।1