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धरियावद के जवाहरनगर पंचायत भवन में केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर (टोंक) द्वारा अनुसूचित जनजाति उपयोजना (टीएसपी) के अंतर्गत 'खेत बचाओ अभियान' के तहत एक रात्रि चौपाल और किसान-वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थान निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 400 से अधिक आदिवासी किसानों ने भाग लिया, जहाँ उन्होंने वैज्ञानिक खेती और पशुपालन संबंधी नवीनतम जानकारियाँ प्राप्त कीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक थावरचंद मीना ने किसानों को संबोधित करते हुए रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया, जिसमें सब्जियों, फलों और खाद्यान्नों के उत्पादन से शुरुआत करने की सलाह दी गई, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरेगा और खेती की लागत भी कम होगी। विधायक ने बताया कि उन्होंने जनवरी 2026 में अविकानगर संस्थान का दौरा कर भेड़, बकरी और खरगोश पालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का अवलोकन किया था, और उनका मानना है कि संस्थान द्वारा विकसित ये तकनीकें क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती हैं। संगोष्ठी में टीएसपी नोडल अधिकारी डॉ. अमरसिंह मीना ने भेड़-बकरी एवं खरगोश पालन, उन्नत नस्लों, टीकाकरण, पशु आवास, चारा प्रबंधन और मौसम आधारित पशुधन प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र प्रतापगढ़ के प्रभारी डॉ. योगेश कनोजिया और रमेश कुमार डामोर ने खरीफ फसलों में विविधीकरण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के लाभों पर प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. रंगलाल मीना ने किसानों को नकली खाद की पहचान, मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जीवामृत और प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में विस्तार से समझाया। कार्यक्रम के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया, जिसमें 108 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी महेश कोटेड ने भी प्राकृतिक खेती और पशुधन संरक्षण के महत्व पर अपने विचार साझा किए, और किसानों से रासायनिक खादों का उपयोग कम करके पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को बैग, स्टील तसला और भेड़पालन कैलेंडर प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाराम मीना अविकानगर, संतोष अहारी, जवाहरनगर सरपंच रेणु परमार, लोहागढ़ सरपंच गंगा देवी मीना, जनप्रतिनिधियों, सहायक कृषि अधिकारी धारियावद धनराज मीना, धारियावद किसान उत्पादक संगठन से श्रीमती उषा मीना और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

20 hrs ago
user_जुबेर अहमद पत्रकार व लॉ छात्र
जुबेर अहमद पत्रकार व लॉ छात्र
धरियावद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
20 hrs ago

धरियावद के जवाहरनगर पंचायत भवन में केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर (टोंक) द्वारा अनुसूचित जनजाति उपयोजना (टीएसपी) के अंतर्गत 'खेत बचाओ अभियान' के तहत एक रात्रि चौपाल और किसान-वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थान निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 400 से अधिक आदिवासी किसानों ने भाग लिया, जहाँ उन्होंने वैज्ञानिक खेती और पशुपालन संबंधी नवीनतम जानकारियाँ प्राप्त कीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक थावरचंद मीना ने किसानों को संबोधित करते हुए रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ने वाले

नकारात्मक प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया, जिसमें सब्जियों, फलों और खाद्यान्नों के उत्पादन से शुरुआत करने की सलाह दी गई, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरेगा और खेती की लागत भी कम होगी। विधायक ने बताया कि उन्होंने जनवरी 2026 में अविकानगर संस्थान का दौरा कर भेड़, बकरी और खरगोश पालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का अवलोकन किया था, और उनका मानना है कि संस्थान द्वारा विकसित ये तकनीकें क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती हैं। संगोष्ठी में टीएसपी नोडल अधिकारी डॉ. अमरसिंह मीना

ने भेड़-बकरी एवं खरगोश पालन, उन्नत नस्लों, टीकाकरण, पशु आवास, चारा प्रबंधन और मौसम आधारित पशुधन प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र प्रतापगढ़ के प्रभारी डॉ. योगेश कनोजिया और रमेश कुमार डामोर ने खरीफ फसलों में विविधीकरण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के लाभों पर प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. रंगलाल मीना ने किसानों को नकली खाद की पहचान, मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जीवामृत और प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में विस्तार से समझाया। कार्यक्रम के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया, जिसमें 108 वर्षीय स्वतंत्रता

सेनानी महेश कोटेड ने भी प्राकृतिक खेती और पशुधन संरक्षण के महत्व पर अपने विचार साझा किए, और किसानों से रासायनिक खादों का उपयोग कम करके पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को बैग, स्टील तसला और भेड़पालन कैलेंडर प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाराम मीना अविकानगर, संतोष अहारी, जवाहरनगर सरपंच रेणु परमार, लोहागढ़ सरपंच गंगा देवी मीना, जनप्रतिनिधियों, सहायक कृषि अधिकारी धारियावद धनराज मीना, धारियावद किसान उत्पादक संगठन से श्रीमती उषा मीना और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

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  • धरियावद के मूंगाणा-जूना बारिया ग्राम पंचायत के वैली फल क्षेत्र में वन विभाग की कथित कार्रवाई को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। एक गरीब परिवार ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के दल ने उनका निर्माणाधीन मकान ध्वस्त कर दिया, महिलाओं के साथ मारपीट की और सामान को भी नुकसान पहुंचाया। पीड़ित पवन नाथ (45) ने बताया कि उनका मकान सरकारी योजना के तहत जियो टैगिंग के बाद स्वीकृत हुआ था और इंदिरा आवास योजना के तहत उन्हें ₹15 हजार की किस्त भी मिली थी। उन्होंने दो वर्षों तक अहमदाबाद में मजदूरी करके मकान के लिए सामग्री जुटाई थी, और छत डलनी ही बाकी थी। आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मूंगाणा और पारसोला क्षेत्र से आए एक दल ने जेसीबी, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और जीपों सहित मौके पर पहुंचकर इस निर्माणाधीन मकान को तोड़ा। परिवार का कहना है कि इस दौरान पवन नाथ की पत्नी पूंजी देवी और बहू सुमित्रा के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई; पूंजी देवी ने तो एक महिला कांस्टेबल पर कपड़े फाड़ने और मारपीट का आरोप लगाया है। परिवार ने बताया कि सुमित्रा की डिलीवरी को केवल 25 दिन हुए हैं और उनका बच्चा आईसीयू में भर्ती है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उनके दो बकरे और एक बकरी लापता हो गए। ग्रामीणों ने शिकायत की कि यह कार्रवाई केवल एक मकान तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास कुमारी क्षेत्र में हर्निया, कैलाश और गणेश के परिवारों की तीन झोपड़ियां भी तोड़ी गईं, और उन्हें जबरन वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। इसके अतिरिक्त, गीता नाथ के बिजली के पोल तोड़ दिए गए और तारबंदी भी क्षतिग्रस्त कर दी गई। पीड़ित परिवार ने वनरक्षक कैलाश चौधरी पर कार्रवाई से पहले ₹20 हजार से ₹50 हजार मांगने और राशि न देने पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित भूमि लगभग चार बीघा क्षेत्र में थी और उस पर वन विभाग का अधिकार नहीं बनता। घटना की सूचना पर क्षेत्रीय विधायक थावरचंद डामोर मौके पर पहुंचे, जिन्होंने रेंजर रामलाल भील और पटवारी को बुलाकर स्थिति की जानकारी ली। पटवारी बाबूलाल मीणा ने स्पष्ट किया कि जुना बोरिया आराजी नंबर 1/3 ऑनलाइन जमाबंदी के अनुसार ग्राम पंचायत गोठड़ा सुरक्षित चारागाह दर्ज है, और इस स्थान पर वन विभाग का कोई आधिपत्य नहीं है। इसके बाद, रेंजर रामलाल भील ने पीड़ित परिवार को तत्काल राशन और छत के लिए अस्थायी सहायता राशि उपलब्ध कराई। विधायक थावरचंद डामोर ने अधिकारियों को 29 जून तक पीड़ित परिवार का मकान पुनः निर्माण कर तैयार करके देने का अल्टीमेटम दिया है, साथ ही संबंधित अधिकारी को निलंबित करने की भी मांग की है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
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    धरियावद के मूंगाणा-जूना बारिया ग्राम पंचायत के वैली फल क्षेत्र में वन विभाग की कथित कार्रवाई को लेकर एक गंभीर विवाद सामने आया है। एक गरीब परिवार ने आरोप लगाया है कि वन विभाग के दल ने उनका निर्माणाधीन मकान ध्वस्त कर दिया, महिलाओं के साथ मारपीट की और सामान को भी नुकसान पहुंचाया। पीड़ित पवन नाथ (45) ने बताया कि उनका मकान सरकारी योजना के तहत जियो टैगिंग के बाद स्वीकृत हुआ था और इंदिरा आवास योजना के तहत उन्हें ₹15 हजार की किस्त भी मिली थी। उन्होंने दो वर्षों तक अहमदाबाद में मजदूरी करके मकान के लिए सामग्री जुटाई थी, और छत डलनी ही बाकी थी।

आरोप है कि वन विभाग के कर्मचारियों के साथ मूंगाणा और पारसोला क्षेत्र से आए एक दल ने जेसीबी, ट्रैक्टर, मोटरसाइकिल और जीपों सहित मौके पर पहुंचकर इस निर्माणाधीन मकान को तोड़ा। परिवार का कहना है कि इस दौरान पवन नाथ की पत्नी पूंजी देवी और बहू सुमित्रा के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट की गई; पूंजी देवी ने तो एक महिला कांस्टेबल पर कपड़े फाड़ने और मारपीट का आरोप लगाया है। परिवार ने बताया कि सुमित्रा की डिलीवरी को केवल 25 दिन हुए हैं और उनका बच्चा आईसीयू में भर्ती है। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि कार्रवाई के दौरान उनके दो बकरे और एक बकरी लापता हो गए। ग्रामीणों ने शिकायत की कि यह कार्रवाई केवल एक मकान तक सीमित नहीं रही, बल्कि आसपास कुमारी क्षेत्र में हर्निया, कैलाश और गणेश के परिवारों की तीन झोपड़ियां भी तोड़ी गईं, और उन्हें जबरन वाहनों में बैठाकर ले जाया गया। इसके अतिरिक्त, गीता नाथ के बिजली के पोल तोड़ दिए गए और तारबंदी भी क्षतिग्रस्त कर दी गई।

पीड़ित परिवार ने वनरक्षक कैलाश चौधरी पर कार्रवाई से पहले ₹20 हजार से ₹50 हजार मांगने और राशि न देने पर मारपीट करने का आरोप लगाया है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित भूमि लगभग चार बीघा क्षेत्र में थी और उस पर वन विभाग का अधिकार नहीं बनता। घटना की सूचना पर क्षेत्रीय विधायक थावरचंद डामोर मौके पर पहुंचे, जिन्होंने रेंजर रामलाल भील और पटवारी को बुलाकर स्थिति की जानकारी ली। पटवारी बाबूलाल मीणा ने स्पष्ट किया कि जुना बोरिया आराजी नंबर 1/3 ऑनलाइन जमाबंदी के अनुसार ग्राम पंचायत गोठड़ा सुरक्षित चारागाह दर्ज है, और इस स्थान पर वन विभाग का कोई आधिपत्य नहीं है। इसके बाद, रेंजर रामलाल भील ने पीड़ित परिवार को तत्काल राशन और छत के लिए अस्थायी सहायता राशि उपलब्ध कराई।

विधायक थावरचंद डामोर ने अधिकारियों को 29 जून तक पीड़ित परिवार का मकान पुनः निर्माण कर तैयार करके देने का अल्टीमेटम दिया है, साथ ही संबंधित अधिकारी को निलंबित करने की भी मांग की है। इस घटना के बाद से ग्रामीणों में भारी नाराजगी है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग जोर पकड़ने लगी है।
    user_जुबेर अहमद पत्रकार व लॉ छात्र
    जुबेर अहमद पत्रकार व लॉ छात्र
    धरियावद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • बरोठा ग्राम पंचायत में एक ग्राम सेवा शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। इस शिविर में नायब तहसीलदार, सहायक विकास अधिकारी और सरपंच जुझार लाल मीणा सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे। ग्रामीणों ने आवास, मनरेगा, पेंशन, पट्टा, राजस्व और अन्य योजनाओं से संबंधित अपनी समस्याएँ रखीं, जिनमें से कई का समाधान मौके पर ही कर दिया गया। अधिकारियों ने शेष बचे प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
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    बरोठा ग्राम पंचायत में एक ग्राम सेवा शिविर का आयोजन किया गया, जहाँ विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर ग्रामीणों की समस्याओं को सुना। इस शिविर में नायब तहसीलदार, सहायक विकास अधिकारी और सरपंच जुझार लाल मीणा सहित अन्य विभागीय अधिकारी मौजूद थे।

ग्रामीणों ने आवास, मनरेगा, पेंशन, पट्टा, राजस्व और अन्य योजनाओं से संबंधित अपनी समस्याएँ रखीं, जिनमें से कई का समाधान मौके पर ही कर दिया गया। अधिकारियों ने शेष बचे प्रकरणों के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया। इस शिविर में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने भाग लिया और सरकारी योजनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।
    user_Vikram Singh
    Vikram Singh
    Local News Reporter प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • प्रतापगढ़ में मोहर्रम की 7 तारीख के अवसर पर बारी दरवाजे की छड़ी निकाली गई। इस कार्यक्रम में रतलाम से आए अखाड़े के पहलवानों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए हैरतअंगेज़ करतब दिखाए।
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    प्रतापगढ़ में मोहर्रम की 7 तारीख के अवसर पर बारी दरवाजे की छड़ी निकाली गई। इस कार्यक्रम में रतलाम से आए अखाड़े के पहलवानों ने अपनी कला का प्रदर्शन करते हुए हैरतअंगेज़ करतब दिखाए।
    user_रिपोर्टर मकसूदअहमद राईन
    रिपोर्टर मकसूदअहमद राईन
    Local News Reporter प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    7 hrs ago
  • रतलाम के सैलाना स्थित गांव करिया के पहाड़ी बांग्ला बंगला के जंगल में एक तेंदुआ देखे जाने से हड़कंप मच गया है। गांव के ईश्वर पिता देवीलाल खराड़ी ने अपने खेत पर जाते समय पहाड़ी क्षेत्र में इस तेंदुआ को घूमते हुए देखा। उन्होंने दूर से इसका एक वीडियो भी बनाया और तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम अलर्ट हो गई और जंगल क्षेत्र में पहुंचकर सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है। वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि वे अपने मवेशियों को खुला न छोड़ें और रात के समय घरों से बाहर न निकलें।
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    रतलाम के सैलाना स्थित गांव करिया के पहाड़ी बांग्ला बंगला के जंगल में एक तेंदुआ देखे जाने से हड़कंप मच गया है। गांव के ईश्वर पिता देवीलाल खराड़ी ने अपने खेत पर जाते समय पहाड़ी क्षेत्र में इस तेंदुआ को घूमते हुए देखा। उन्होंने दूर से इसका एक वीडियो भी बनाया और तुरंत वन विभाग को इसकी जानकारी दी।

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम अलर्ट हो गई और जंगल क्षेत्र में पहुंचकर सर्चिंग अभियान शुरू कर दिया है। हालांकि, अभी तक तेंदुआ पकड़ में नहीं आया है। वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए अलर्ट जारी करते हुए कहा है कि वे अपने मवेशियों को खुला न छोड़ें और रात के समय घरों से बाहर न निकलें।
    user_Shamshuddin Sheikh
    Shamshuddin Sheikh
    प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    9 hrs ago
  • प्रतापगढ़ जिले के सोहनपुर गांव में भूमि और रास्ते से जुड़े एक विवाद के बीच ग्रामीणों ने कथित तौर पर रास्ते पर पत्थर डालने के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक आवागमन के लिए उपयोग किए जाने वाले इस रास्ते पर किसी भी तरह का अवरोध या पत्थर डालना बिल्कुल अनुचित है, जिससे आम लोगों और किसानों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा। महावीर जी, अक्षयनाथ जी, नाथूलाल जी, पन्नालाल जी, कंकूबाई, राधा देवी, ईश्वरलाल जी और भेरूलाल जी सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए रास्ते पर पत्थर न डालने की मांग की है। उन्होंने राजस्व विभाग और प्रशासन से मौके पर निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की अपील की है, साथ ही यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक कोई भी पक्ष रास्ते या भूमि की स्थिति में कोई बदलाव न करे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर रास्ते पर पत्थर डाले गए, तो क्षेत्र में विवाद की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
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    प्रतापगढ़ जिले के सोहनपुर गांव में भूमि और रास्ते से जुड़े एक विवाद के बीच ग्रामीणों ने कथित तौर पर रास्ते पर पत्थर डालने के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है। ग्रामीणों का कहना है कि सार्वजनिक आवागमन के लिए उपयोग किए जाने वाले इस रास्ते पर किसी भी तरह का अवरोध या पत्थर डालना बिल्कुल अनुचित है, जिससे आम लोगों और किसानों को आवागमन में भारी परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

महावीर जी, अक्षयनाथ जी, नाथूलाल जी, पन्नालाल जी, कंकूबाई, राधा देवी, ईश्वरलाल जी और भेरूलाल जी सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्ति दर्ज कराते हुए रास्ते पर पत्थर न डालने की मांग की है। उन्होंने राजस्व विभाग और प्रशासन से मौके पर निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की अपील की है, साथ ही यह भी मांग की है कि जांच पूरी होने तक कोई भी पक्ष रास्ते या भूमि की स्थिति में कोई बदलाव न करे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी आपत्तियों को नजरअंदाज कर रास्ते पर पत्थर डाले गए, तो क्षेत्र में विवाद की गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
    user_Anil Jatiya news repotar
    Anil Jatiya news repotar
    Local News Reporter प्रतापगढ़, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    20 hrs ago
  • बांसवाड़ा नगर निगम ने धरोहर कोचिंग सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत कोचिंग सेंटर को सील कर दिया गया।
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    बांसवाड़ा नगर निगम ने धरोहर कोचिंग सेंटर के खिलाफ कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के तहत कोचिंग सेंटर को सील कर दिया गया।
    user_VAGAD news24
    VAGAD news24
    Farmer आसपुर, डूंगरपुर, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • छोटे सादड़ी के धामनिया गांव में पिछले चार दिनों से बिजली आपूर्ति ठप है, जिससे स्थानीय ग्रामीण बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस गंभीर समस्या के बावजूद किसी भी जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध नहीं ली। जनप्रतिनिधियों द्वारा अपेक्षित कार्य न किए जाने पर ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए, एकजुट होकर छोटे सादड़ी स्थित कार्यालय तक पहुंचकर अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत कराया। यह दर्शाता है कि ग्रामीणों को अपनी परेशानी दूर करने के लिए खुद ही कदम उठाने पड़े।
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    छोटे सादड़ी के धामनिया गांव में पिछले चार दिनों से बिजली आपूर्ति ठप है, जिससे स्थानीय ग्रामीण बेहद परेशान हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इस गंभीर समस्या के बावजूद किसी भी जनप्रतिनिधि ने उनकी सुध नहीं ली। जनप्रतिनिधियों द्वारा अपेक्षित कार्य न किए जाने पर ग्रामीणों ने स्वयं पहल करते हुए, एकजुट होकर छोटे सादड़ी स्थित कार्यालय तक पहुंचकर अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत कराया। यह दर्शाता है कि ग्रामीणों को अपनी परेशानी दूर करने के लिए खुद ही कदम उठाने पड़े।
    user_Reporter ambalal suthar
    Reporter ambalal suthar
    Video Creator छोटी सादड़ी, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • धरियावद के जवाहरनगर पंचायत भवन में केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर (टोंक) द्वारा अनुसूचित जनजाति उपयोजना (टीएसपी) के अंतर्गत 'खेत बचाओ अभियान' के तहत एक रात्रि चौपाल और किसान-वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थान निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 400 से अधिक आदिवासी किसानों ने भाग लिया, जहाँ उन्होंने वैज्ञानिक खेती और पशुपालन संबंधी नवीनतम जानकारियाँ प्राप्त कीं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक थावरचंद मीना ने किसानों को संबोधित करते हुए रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया, जिसमें सब्जियों, फलों और खाद्यान्नों के उत्पादन से शुरुआत करने की सलाह दी गई, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरेगा और खेती की लागत भी कम होगी। विधायक ने बताया कि उन्होंने जनवरी 2026 में अविकानगर संस्थान का दौरा कर भेड़, बकरी और खरगोश पालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का अवलोकन किया था, और उनका मानना है कि संस्थान द्वारा विकसित ये तकनीकें क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती हैं। संगोष्ठी में टीएसपी नोडल अधिकारी डॉ. अमरसिंह मीना ने भेड़-बकरी एवं खरगोश पालन, उन्नत नस्लों, टीकाकरण, पशु आवास, चारा प्रबंधन और मौसम आधारित पशुधन प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र प्रतापगढ़ के प्रभारी डॉ. योगेश कनोजिया और रमेश कुमार डामोर ने खरीफ फसलों में विविधीकरण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के लाभों पर प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. रंगलाल मीना ने किसानों को नकली खाद की पहचान, मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जीवामृत और प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में विस्तार से समझाया। कार्यक्रम के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया, जिसमें 108 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी महेश कोटेड ने भी प्राकृतिक खेती और पशुधन संरक्षण के महत्व पर अपने विचार साझा किए, और किसानों से रासायनिक खादों का उपयोग कम करके पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की अपील की। कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को बैग, स्टील तसला और भेड़पालन कैलेंडर प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाराम मीना अविकानगर, संतोष अहारी, जवाहरनगर सरपंच रेणु परमार, लोहागढ़ सरपंच गंगा देवी मीना, जनप्रतिनिधियों, सहायक कृषि अधिकारी धारियावद धनराज मीना, धारियावद किसान उत्पादक संगठन से श्रीमती उषा मीना और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
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    धरियावद के जवाहरनगर पंचायत भवन में केंद्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान अविकानगर (टोंक) द्वारा अनुसूचित जनजाति उपयोजना (टीएसपी) के अंतर्गत 'खेत बचाओ अभियान' के तहत एक रात्रि चौपाल और किसान-वैज्ञानिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संस्थान निदेशक डॉ. अरुण कुमार तोमर के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम में क्षेत्र के 400 से अधिक आदिवासी किसानों ने भाग लिया, जहाँ उन्होंने वैज्ञानिक खेती और पशुपालन संबंधी नवीनतम जानकारियाँ प्राप्त कीं।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक थावरचंद मीना ने किसानों को संबोधित करते हुए रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से मिट्टी की उर्वरता पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने किसानों से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ने का आह्वान किया, जिसमें सब्जियों, फलों और खाद्यान्नों के उत्पादन से शुरुआत करने की सलाह दी गई, जिससे मिट्टी का स्वास्थ्य सुधरेगा और खेती की लागत भी कम होगी। विधायक ने बताया कि उन्होंने जनवरी 2026 में अविकानगर संस्थान का दौरा कर भेड़, बकरी और खरगोश पालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों का अवलोकन किया था, और उनका मानना है कि संस्थान द्वारा विकसित ये तकनीकें क्षेत्र के किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हो सकती हैं।

संगोष्ठी में टीएसपी नोडल अधिकारी डॉ. अमरसिंह मीना ने भेड़-बकरी एवं खरगोश पालन, उन्नत नस्लों, टीकाकरण, पशु आवास, चारा प्रबंधन और मौसम आधारित पशुधन प्रबंधन की विस्तृत जानकारी दी। कृषि विज्ञान केंद्र प्रतापगढ़ के प्रभारी डॉ. योगेश कनोजिया और रमेश कुमार डामोर ने खरीफ फसलों में विविधीकरण और वैज्ञानिक कृषि पद्धतियों के लाभों पर प्रकाश डाला। वहीं, डॉ. रंगलाल मीना ने किसानों को नकली खाद की पहचान, मिट्टी परीक्षण के आधार पर उर्वरकों के संतुलित उपयोग तथा जीवामृत और प्राकृतिक खेती की तकनीकों के बारे में विस्तार से समझाया। कार्यक्रम के दौरान किसानों की जिज्ञासाओं का समाधान भी किया गया, जिसमें 108 वर्षीय स्वतंत्रता सेनानी महेश कोटेड ने भी प्राकृतिक खेती और पशुधन संरक्षण के महत्व पर अपने विचार साझा किए, और किसानों से रासायनिक खादों का उपयोग कम करके पर्यावरण अनुकूल खेती अपनाने की अपील की।

कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को बैग, स्टील तसला और भेड़पालन कैलेंडर प्रदान कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर महाराम मीना अविकानगर, संतोष अहारी, जवाहरनगर सरपंच रेणु परमार, लोहागढ़ सरपंच गंगा देवी मीना, जनप्रतिनिधियों, सहायक कृषि अधिकारी धारियावद धनराज मीना, धारियावद किसान उत्पादक संगठन से श्रीमती उषा मीना और बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
    user_जुबेर अहमद पत्रकार व लॉ छात्र
    जुबेर अहमद पत्रकार व लॉ छात्र
    धरियावद, प्रतापगढ़, राजस्थान•
    20 hrs ago
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