बरगी डैम के 17 गेट खुलने से नर्मदा का जलस्तर बढ़ा, सांडिया शिवनी पुल पर अलर्ट पिपरिया । जबलपुर स्थित बरगी डैम के 17 गेट खोले जाने के बाद नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। पिपरिया से करीब 22 किलोमीटर दूर पिपरिया- पिपरिया के ग्राम साड़िंया के नर्मदा नदी के सिवनी पुल घाट पर सोमवार सुबह 11 बजे जलस्तर 11.38 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग (जल बोर्ड) के अनुसार पानी 10 से 12 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है, सांडिया स्थित केंद्रीय जल आयोग कार्यालय लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है । अधिकारियों के मुताबिक पुल की कुल ऊंचाई 15.50 मीटर है। रविवार, 27 सितंबर को यहां जलस्तर 6.26 मीटर था, लेकिन बरगी डैम से पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। हालांकि विभाग का अनुमान है कि सोमवार शाम तक जलस्तर में बढ़ोतरी रुक सकती है। प्रशासन ने नर्मदा किनारे रहने वाले लोगों और घाटों पर जाने वालों से सतर्क रहने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि पिपरिया क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं हुई है । इस वर्ष अब तक करीब 31 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 57 इंच से अधिक बारिश हो चुकी थी।
बरगी डैम के 17 गेट खुलने से नर्मदा का जलस्तर बढ़ा, सांडिया शिवनी पुल पर अलर्ट पिपरिया । जबलपुर स्थित बरगी डैम के 17 गेट खोले जाने के बाद नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। पिपरिया से करीब 22 किलोमीटर दूर पिपरिया- पिपरिया के ग्राम साड़िंया के नर्मदा नदी के सिवनी पुल घाट पर सोमवार सुबह 11 बजे जलस्तर 11.38 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग (जल बोर्ड) के अनुसार पानी 10 से 12 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है, सांडिया स्थित केंद्रीय जल आयोग कार्यालय लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है । अधिकारियों के मुताबिक पुल की कुल ऊंचाई 15.50 मीटर है। रविवार, 27 सितंबर को यहां जलस्तर 6.26 मीटर था, लेकिन बरगी डैम से पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। हालांकि विभाग का अनुमान है कि सोमवार शाम तक जलस्तर में बढ़ोतरी रुक सकती है। प्रशासन ने नर्मदा किनारे रहने वाले लोगों और घाटों पर जाने वालों से सतर्क रहने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि पिपरिया क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं हुई है । इस वर्ष अब तक करीब 31 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 57 इंच से अधिक बारिश हो चुकी थी।
- बरगी डैम के 17 गेट खुलने से नर्मदा का जलस्तर बढ़ा, सांडिया शिवनी पुल पर अलर्ट पिपरिया । जबलपुर स्थित बरगी डैम के 17 गेट खोले जाने के बाद नर्मदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। पिपरिया से करीब 22 किलोमीटर दूर पिपरिया- पिपरिया के ग्राम साड़िंया के नर्मदा नदी के सिवनी पुल घाट पर सोमवार सुबह 11 बजे जलस्तर 11.38 मीटर दर्ज किया गया। केंद्रीय जल आयोग (जल बोर्ड) के अनुसार पानी 10 से 12 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है, सांडिया स्थित केंद्रीय जल आयोग कार्यालय लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है । अधिकारियों के मुताबिक पुल की कुल ऊंचाई 15.50 मीटर है। रविवार, 27 सितंबर को यहां जलस्तर 6.26 मीटर था, लेकिन बरगी डैम से पानी छोड़े जाने के बाद नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया। हालांकि विभाग का अनुमान है कि सोमवार शाम तक जलस्तर में बढ़ोतरी रुक सकती है। प्रशासन ने नर्मदा किनारे रहने वाले लोगों और घाटों पर जाने वालों से सतर्क रहने की अपील की है। उल्लेखनीय है कि पिपरिया क्षेत्र में पिछले एक सप्ताह से बारिश नहीं हुई है । इस वर्ष अब तक करीब 31 इंच बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 57 इंच से अधिक बारिश हो चुकी थी।1
- आनंद बाग में गूंज रहा रामायण का मंचन, रामलीला देखने उमड़ रहे श्रद्धालु पिपरिया। सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और भगवान श्रीराम की लीलाओं को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आनंद बाग में इन दिनों भव्य रामलीला का मंचन किया जा रहा है। सनातन धर्म प्रचारक रामायण रामलीला मंडल के तत्वावधान में आयोजित रामलीला का आयोजन 20 सितंबर से 1 अक्टूबर तक चलेगा। रामलीला के मंचन के लिए विंध्याचल धाम, मिर्जापुर (उत्तर प्रदेश) से करीब 20 सदस्यीय कलाकारों की टीम पिपरिया पहुंची है। कलाकारों द्वारा रामायण के विभिन्न प्रसंगों का जीवंत मंचन किया जा रहा है। मंचन के दौरान भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों और रामायण से जुड़े प्रसंगों को आकर्षक ढंग से प्रस्तुत किया जा रहा है। रामलीला में भगवान श्रीराम के चित्रण और कलाकारों की प्रस्तुति श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु आनंद बाग पहुंचकर रामलीला का आनंद ले रहे हैं। धार्मिक वातावरण के बीच रामायण के प्रसंगों का मंचन दर्शकों को आध्यात्मिकता से जोड़ रहा है।3
- जब भूखों का पेट भरता है तभी पितर तृप्त होते हैं -श्राद्ध नहीं यह श्रद्धा है- सोहागपुर (होशंगाबाद) !! "पितृ देवो भव:" !! आज पितृपक्ष के इस पावन काल में राम रहीम रोटी बैंक का आंगन एक बार फिर भावुक पलों का साक्षी बना। जब पाँच परिवारों ने अपने-अपने घर के दीये, अपने पूर्वजों की पुण्यतिथि को भूखे, जरूरतमंदों को भोजन कराकर मनाया। इससे बड़ा तर्पण और क्या हो सकता है? आज जिन पुण्यात्माओं की स्मृति में स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ भोजन प्रसादी का आयोजन हुआ - 1. ग्राम लखनपुर निवासी श्री रोहित पुरी, राहुल पुरी एवं ऋषभ पुरी ने अपने पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री राधेपुरी जी गोस्वामी की श्राद्ध तिथि पर। 2. ग्राम करनपुर निवासी श्री मनोज पुरविया ने अपनी अर्धांगिनी स्वर्गीय श्रीमती कौशल्या देवी की श्राद्ध तिथि पर। 3. रामगंज वार्ड निवासी कुमारी मेनका भावसार ने अपने पूज्य पिताजी स्वर्गीय श्री जगदीश भावसार (पंडा भैया) की श्राद्ध तिथि पर। 4. शोभापुर निवासी श्री रीतेश पाराशर एवं राहुल पाराशर ने अपनी पूज्यनीय माताजी स्वर्गीय श्रीमती राजा बाई पाराशर की श्राद्ध तिथि पर। 5. ग्राम करनपुर निवासी श्री अवधेश कुमार, वल्द मुल्लू सिंह जी की पुण्य स्मृति में। कहते हैं पितर तभी तृप्त होते हैं, जब उनके नाम पर किसी भूखे का पेट भरता है। आज आप पाँचों परिवारों ने सिर्फ भोजन नहीं कराया, आपने अपने पितरों को सच्ची श्रद्धांजलि दी है, उन्हें मोक्ष का मार्ग दिखाया है। राम रहीम रोटी बैंक परिवार की ओर से सभी दिवंगत पुण्यात्माओं को शत्-शत् नमन एवं विनम्र श्रद्धांजलि! ईश्वर उन सभी को अपने श्रीचरणों में स्थान दें। और उन सभी दानदाता परिवारों को हृदय की गहराइयों से धन्यवाद, साधुवाद, जो इस पितृपक्ष में श्राद्ध को एक उत्सव नहीं, सेवा बना रहे हैं। आप सभी के पितरों का आशीर्वाद सदा आप पर बना रहे। ॐ पितृभ्यो नमः 🙏1
- *पितृपक्ष में बरमान में श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन, 4 अक्टूबर को निकलेगी भव्य कलश यात्रा; पोलखोल से संत रघुनाथदास और छोटे सरकार ने क्या कहा? देखिए पूरी खबर!* नरसिंहपुर। 28 सितम्बर 2026 पितृपक्ष के पावन अवसर पर बरमान में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा का आयोजन 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर 2026 तक नवीन विद्या भवन ग्राउंड, पुराने बस स्टैंड के पास, बरमान में होगा। कथा व्यास महंत श्री 108 पंडित विपिन बिहारी दास जी महाराज के मुखारविंद से श्रद्धालुओं को श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण कराया जाएगा। आयोजन को लेकर संत रघुनाथ दास राम जानकी मंदिर एवं छोटे सरकार सहित आयोजन से जुड़े संतों और सदस्यों ने दादा महाराज मंदिर परिसर में प्रेस वार्ता कर पत्रकारों को कार्यक्रम एवं व्यवस्थाओं की जानकारी दी। आयोजकों ने बताया कि कथा का आयोजन समस्त पितरों को समर्पित है। पितृपक्ष के दौरान होने वाली इस कथा में श्रद्धालुओं के लिए तर्पण एवं धार्मिक अनुष्ठानों का भी विशेष महत्व रहेगा। आयोजकों के अनुसार कथा स्थल पर करीब 15 हजार श्रद्धालुओं के बैठने की व्यवस्था की जा रही है। 4 अक्टूबर को कलश यात्रा के साथ कथा का शुभारंभ होगा। कलश यात्रा बरमान स्थित शारदा मठ मंदिर से प्रारंभ होकर नर्मदा तट तक जाएगी। इसके बाद कथा का नियमित आयोजन दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक किया जाएगा। कथा का कथाविश्राम 10 अक्टूबर को होगा और इसी दिन भंडारे का आयोजन भी किया जाएगा। आयोजन समस्त ग्रामवासी बरमान, जिला नरसिंहपुर द्वारा कराया जा रहा है। आयोजकों ने श्रद्धालुओं से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होकर श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करने का आग्रह किया है। प्रेस वार्ता में आप सभी की उपस्थिति रही! संत रघुनाथ दास, राम जानकी मंदिर छोटे सरकार ब्रजेश तिवारी शुभम पटेल बलराम प्रजापति अल्लू महाराज शैलेश शर्मा1
- रोजगार के अभाव में पातालकोट से पलायन को मजबूर भारिया और आदिवासी समाज, दांव पर पारंपरिक अस्तित्व आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति 'भारिया' के लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण लगातार पलायन करने को मजबूर हैं। चिंताजनक: रोजगार के अभाव में पातालकोट से पलायन को मजबूर भारिया और आदिवासी समाज, दांव पर पारंपरिक अस्तित्व पातालकोट (छिंदवाड़ा)। अपनी अनूठी संस्कृति, जड़ी-बूटियों के खजाने और गहरी घाटियों के लिए दुनिया भर में मशहूर पातालकोट अंचल के मूल निवासी आज एक गंभीर संकट से जूझ रहे हैं। अंचल के विभिन्न ढानों में रहने वाले आदिवासी और विशेष पिछड़ी जनजाति 'भारिया' के लोग स्थानीय स्तर पर रोजगार न मिलने के कारण लगातार पलायन करने को मजबूर हैं। हर साल बड़ी संख्या में यहाँ के परिवार अपनी जड़ों को छोड़कर रोजी-रोटी की तलाश में दूसरे राज्यों और बड़े शहरों की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे पातालकोट की पारंपरिक संस्कृति और जनसांख्यिकी पर भी असर पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर काम का अभाव बनी मुख्य वजह पातालकोट के ग्रामीणों का कहना है कि कृषि और वनोपज (Forest Produce) पर निर्भरता अब उनके जीवनयापन के लिए पर्याप्त नहीं रह गई है। मानसून के बाद अंचल में कृषि कार्य लगभग ठप हो जाता है। मनरेगा (MGNREGA) जैसी सरकारी योजनाओं के तहत भी नियमित और पर्याप्त काम न मिलने के कारण युवाओं के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। परिवार का पेट पालने के लिए उनके पास पलायन के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं बचता। होम स्टे और पर्यटन जैसी पहलों से जगी उम्मीदें, लेकिन बड़े स्तर पर प्रयास जरूरी प्रशासन द्वारा हाल ही में शुरू की गई 'होम स्टे' (Home Stay) जैसी योजनाएं ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय रोजगार पैदा करने की दिशा में एक अच्छी पहल मानी जा रही हैं। हालांकि, ग्रामीणों का मानना है कि इन पहलों का लाभ सीमित परिवारों तक ही पहुँच पाता है। पातालकोट से पलायन की इस बड़ी समस्या को पूरी तरह रोकने के लिए बड़े पैमाने पर स्थानीय कुटीर उद्योगों, जड़ी-बूटी प्रसंस्करण केंद्रों (Herb Processing Units) और साल भर चलने वाले रोजगार मूलक कार्यों की सख्त आवश्यकता है। संस्कृति और अस्तित्व पर संकट सामाजिक कार्यकर्ताओं और जानकारों का कहना है कि भारिया और आदिवासी समाज का इस तरह सामूहिक पलायन करना बेहद चिंताजनक है। यदि युवा पीढ़ी रोजगार के लिए लगातार बाहर जाती रही, तो पातालकोट की वह पारंपरिक जीवनशैली और अनूठा ज्ञान (विशेषकर पारंपरिक चिकित्सा और जड़ी-बूटी का ज्ञान) धीरे-धीरे लुप्त हो जाएगा, जिसके लिए यह क्षेत्र जाना जाता है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और प्रशासन को इस दिशा में तत्काल ठोस और दीर्घकालिक रोजगार नीतियां बनाने की जरूरत है, ताकि पातालकोट के बेटे-बेटियों को अपने ही घर में सम्मानजनक आजीविका मिल सके।4
- भुगतान अटका, मानदेय कम और रसोई का खर्च बढ़ा—पोषण आहार समूहों की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू 10 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन तेज, जुलाई से लंबित भुगतान और भोजन पकाने की लागत बढ़ाने की मांग नर्मदापुरम। आंगनवाड़ी और स्कूलों में बच्चों व गर्भवती महिलाओं के लिए पोषण आहार तैयार करने वाले समूहों ने लंबित भुगतान और कम मानदेय समेत कई मांगों को लेकर आंदोलन तेज कर दिया है। 15 सितंबर से चल रही हड़ताल के बाद अब समूहों ने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर ठोस निर्णय नहीं होता, आंदोलन जारी रहेगा। समूहों के मुताबिक जुलाई से कई मदों का भुगतान लंबित है। भुगतान में देरी के कारण समूहों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। उनका कहना है कि मौजूदा राशि में भोजन तैयार करना लगातार मुश्किल होता जा रहा है और कई बार खर्च अपनी जेब से करना पड़ रहा है। 4 हजार का मानदेय, 8 हजार करने की मांग आंदोलनकारियों ने रसोइयों का मानदेय 4 हजार से बढ़ाकर 8 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग की है। इसके साथ ही प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों में भोजन पकाने की लागत बढ़ाने की मांग भी रखी गई है। बच्चों के लिए खाद्यान्न बढ़ाने की मांग समूहों का कहना है कि वर्तमान व्यवस्था में प्राथमिक स्तर के बच्चों के लिए करीब 100 ग्राम और माध्यमिक स्तर पर 150 ग्राम गेहूं उपलब्ध कराया जाता है। सफाई के बाद इसकी मात्रा और कम हो जाती है। उन्होंने प्राथमिक बच्चों के लिए 200 ग्राम और माध्यमिक बच्चों के लिए 300 ग्राम खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की है। पोषण आहार की राशि और खाद्यान्न भुगतान की मांग समूहों ने घर ले जाने वाले पोषण आहार की राशि तथा संबंधित खाद्यान्न का लंबित भुगतान जल्द जारी करने की मांग की है। उनका कहना है कि भुगतान समय पर नहीं मिलने से व्यवस्था चलाना मुश्किल हो रहा है। रसोई, किराया और गैस का खर्च भी बढ़ा आंदोलनकारियों ने रसोई के लिए किराये की राशि, बर्तन, गैस सिलेंडर और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है। कई केंद्रों पर पर्याप्त रसोई व्यवस्था नहीं होने से भोजन तैयार करने में अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है। क्षतिग्रस्त रसोई की मरम्मत और आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की मांग भी की गई है। इसके अलावा पूरक पोषण शक्ति निर्माण योजना से जुड़े समूहों की महिलाओं का बीमा कराने, नाश्ता और भोजन की दर बढ़ाने तथा गर्भवती महिलाओं और बच्चों के भोजन के लिए निर्धारित राशि में वृद्धि की मांग की गई है। आंदोलनकारियों गौरी इस्कर और कविता राजपूत ने कहा कि पहले भी कई बार अधिकारियों के समक्ष समस्याएं रखी गईं और आंदोलन किए गए, लेकिन अपेक्षित समाधान नहीं हुआ। अब अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की गई है। उनका कहना है कि मांगों पर ठोस निर्णय होने तक आंदोलन जारी रहेगा।3
- 14 दिन से धरना! रसोइया बहनों का बड़ा सवाल -हमारा भुगतान कब?1
- बरगी डैम का पानी छोड़ा, नर्मदा में उफान के हालात, घाटों पर प्रशासन अलर्ट पिपरिया। जबलपुर क्षेत्र में लगातार हो रही तेज बारिश के बाद बरगी डैम से पानी छोड़े जाने का असर अब नर्मदा नदी में साफ दिखाई देने लगा है। डैम से पानी छोड़े जाने के बाद नर्मदा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है, जिससे नदी किनारे बसे क्षेत्रों और घाटों पर प्रशासन ने सतर्कता बढ़ा दी है। सांडिया और सिवनी घाटों पर बढ़ा खतरा नर्मदा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन ने सांडिया, सिवनी सहित नदी से लगे घाटों पर लोगों को जाने से बचने और नदी से पर्याप्त दूरी बनाए रखने की अपील की है। प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। बरगी डैम से छोड़े जा रहे पानी और लगातार बारिश के चलते नर्मदा के जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए लोगों से विशेष सावधानी बरतने को कहा गया है। प्रशासन की साफ अपील—नदी का जलस्तर बढ़ रहा है, इसलिए घाटों पर जाने का जोखिम न उठाएं और सुरक्षित दूरी बनाए रखें।1