सरकार की 'हर घर नल-जल' योजना के बड़े-बड़े दावों के विपरीत, बागीदौरा पंचायत समिति के हमीरपुरा गाँव से विकास की पोल खोलती एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ भीषण जल संकट के चलते महिलाओं को प्यास बुझाने के लिए एक हैरान करने वाला तरीका अपनाना पड़ा है। गाँव की मंजुला, भावना, पुष्पा और रीना जैसी सैकड़ों महिलाएँ रोज़ाना सुबह अपने घरों से एक किलोमीटर दूर निर्जन रास्तों पर निकलती हैं। सुनसान रास्तों पर सुरक्षा और भारी बर्तनों के बोझ से निपटने के लिए इन महिलाओं ने चारपाई को पानी ढोने का ज़रिया बना लिया है, जिस पर वे सामूहिक रूप से बर्तन रखकर मीलों का सफर तय करती हैं। जल जीवन मिशन के तहत कागज़ों पर भले ही योजनाएं मुकम्मल दिख रही हों, लेकिन हमीरपुरा गाँव की ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों ने पाइप लाइन बिछाने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की है। गाँव के सुभाष, राजू और विकेश ने बताया कि अधिकांश घरों में तो आज तक नल का कनेक्शन ही नहीं पहुँचा है। वहीं दूसरी ओर, शक्ति और बंशी जैसे ग्रामीणों का दर्द यह है कि जिन घरों में सालभर पहले नल लगा भी दिए गए, उनमें आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है। जलदाय विभाग की एक पुरानी और एक नई टंकी गाँव से कुछ दूरी पर स्थित ज़रूर है, लेकिन उनसे नियमित जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। यह गंभीर जल समस्या केवल इन चंद महिलाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे गाँव के 200 से अधिक परिवारों की दैनंदिन चुनौती बन चुकी है। नॉन-कमांड क्षेत्र होने के कारण हमीरपुरा में पेयजल का कोई स्थाई स्रोत नहीं है। गाँव के पुरुष सुबह होते ही रोज़गार के लिए मजदूरी पर निकल जाते हैं, जिसके बाद पानी का इंतज़ाम करने की पूरी ज़िम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर आ जाती है। चिलचिलाती गर्मी में गाँव के कुएँ सूख चुके हैं और साढ़े तीन सौ फीट तक बोरिंग करवाने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। इस भीषण संकट के बीच ग्रामीण व्यवस्था से यह सवाल पूछ रहे हैं कि आख़िर उनके हिस्से का हक कब तक सिर्फ कागज़ों में ही बहता रहेगा।
सरकार की 'हर घर नल-जल' योजना के बड़े-बड़े दावों के विपरीत, बागीदौरा पंचायत समिति के हमीरपुरा गाँव से विकास की पोल खोलती एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ भीषण जल संकट के चलते महिलाओं को प्यास बुझाने के लिए एक हैरान करने वाला तरीका अपनाना पड़ा है। गाँव की मंजुला, भावना, पुष्पा और रीना जैसी सैकड़ों महिलाएँ रोज़ाना सुबह अपने घरों से एक किलोमीटर दूर निर्जन रास्तों पर निकलती हैं। सुनसान रास्तों पर सुरक्षा और भारी बर्तनों के बोझ से निपटने के लिए इन महिलाओं ने चारपाई को पानी ढोने का ज़रिया बना लिया है, जिस पर वे सामूहिक रूप से बर्तन रखकर मीलों का सफर तय करती हैं। जल जीवन मिशन के तहत कागज़ों पर भले ही योजनाएं मुकम्मल दिख रही हों, लेकिन हमीरपुरा गाँव की ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों ने पाइप लाइन बिछाने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की है। गाँव के सुभाष, राजू और विकेश ने बताया कि अधिकांश घरों में तो आज तक नल का कनेक्शन ही नहीं पहुँचा है। वहीं दूसरी ओर, शक्ति और बंशी जैसे ग्रामीणों का दर्द यह है कि जिन घरों में सालभर पहले नल लगा भी दिए गए, उनमें आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है। जलदाय विभाग की एक पुरानी और एक नई टंकी गाँव से कुछ दूरी पर स्थित ज़रूर है, लेकिन उनसे नियमित जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। यह गंभीर जल समस्या केवल इन चंद महिलाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे गाँव के 200 से अधिक परिवारों की दैनंदिन चुनौती बन चुकी है। नॉन-कमांड क्षेत्र होने के कारण हमीरपुरा में पेयजल का कोई स्थाई स्रोत नहीं है। गाँव के पुरुष सुबह होते ही रोज़गार के लिए मजदूरी पर निकल जाते हैं, जिसके बाद पानी का इंतज़ाम करने की पूरी ज़िम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर आ जाती है। चिलचिलाती गर्मी में गाँव के कुएँ सूख चुके हैं और साढ़े तीन सौ फीट तक बोरिंग करवाने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। इस भीषण संकट के बीच ग्रामीण व्यवस्था से यह सवाल पूछ रहे हैं कि आख़िर उनके हिस्से का हक कब तक सिर्फ कागज़ों में ही बहता रहेगा।
- सरकार की 'हर घर नल-जल' योजना के बड़े-बड़े दावों के विपरीत, बागीदौरा पंचायत समिति के हमीरपुरा गाँव से विकास की पोल खोलती एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहाँ भीषण जल संकट के चलते महिलाओं को प्यास बुझाने के लिए एक हैरान करने वाला तरीका अपनाना पड़ा है। गाँव की मंजुला, भावना, पुष्पा और रीना जैसी सैकड़ों महिलाएँ रोज़ाना सुबह अपने घरों से एक किलोमीटर दूर निर्जन रास्तों पर निकलती हैं। सुनसान रास्तों पर सुरक्षा और भारी बर्तनों के बोझ से निपटने के लिए इन महिलाओं ने चारपाई को पानी ढोने का ज़रिया बना लिया है, जिस पर वे सामूहिक रूप से बर्तन रखकर मीलों का सफर तय करती हैं। जल जीवन मिशन के तहत कागज़ों पर भले ही योजनाएं मुकम्मल दिख रही हों, लेकिन हमीरपुरा गाँव की ज़मीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। ग्रामीणों का आरोप है कि ठेकेदारों ने पाइप लाइन बिछाने के नाम पर सिर्फ औपचारिकता पूरी की है। गाँव के सुभाष, राजू और विकेश ने बताया कि अधिकांश घरों में तो आज तक नल का कनेक्शन ही नहीं पहुँचा है। वहीं दूसरी ओर, शक्ति और बंशी जैसे ग्रामीणों का दर्द यह है कि जिन घरों में सालभर पहले नल लगा भी दिए गए, उनमें आज तक पानी की एक बूंद भी नहीं टपकी है। जलदाय विभाग की एक पुरानी और एक नई टंकी गाँव से कुछ दूरी पर स्थित ज़रूर है, लेकिन उनसे नियमित जलापूर्ति पूरी तरह ठप पड़ी है। यह गंभीर जल समस्या केवल इन चंद महिलाओं तक सीमित नहीं, बल्कि पूरे गाँव के 200 से अधिक परिवारों की दैनंदिन चुनौती बन चुकी है। नॉन-कमांड क्षेत्र होने के कारण हमीरपुरा में पेयजल का कोई स्थाई स्रोत नहीं है। गाँव के पुरुष सुबह होते ही रोज़गार के लिए मजदूरी पर निकल जाते हैं, जिसके बाद पानी का इंतज़ाम करने की पूरी ज़िम्मेदारी महिलाओं के कंधों पर आ जाती है। चिलचिलाती गर्मी में गाँव के कुएँ सूख चुके हैं और साढ़े तीन सौ फीट तक बोरिंग करवाने के बाद भी पानी नहीं मिल रहा है। इस भीषण संकट के बीच ग्रामीण व्यवस्था से यह सवाल पूछ रहे हैं कि आख़िर उनके हिस्से का हक कब तक सिर्फ कागज़ों में ही बहता रहेगा।1
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- Post by Bapulal Ahari1
- आदिम जाति आदिवासी बिरसा गुरु दादा विलेश जी खराड़ी को जेल से रिहाई मिल गई है। इस अवसर पर भारत सरकार का भी उल्लेख किया गया है।1
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- जैन समाज ने रीवा में जिला प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें आर्यिका माताजी दुर्घटना प्रकरण की निष्पक्ष जांच और विहाररत जैन साधु-संतों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की गई है। समाज ने इस मामले में गहरा आक्रोश व्यक्त करते हुए साफ कहा कि जैन संत की मौत एक दुर्घटना नहीं बल्कि हत्या है। ज्ञापन में प्रमुख मांगों के तौर पर SIT या न्यायिक जांच की बात कही गई है। इसके साथ ही, जैन समाज ने संत सुरक्षा प्रोटोकॉल लागू करने, राष्ट्रीय संत सुरक्षा नीति बनाने, विहार मार्गों पर पुलिस और ट्रैफिक सहयोग प्रदान करने तथा एक “Sant Security Coordination Cell” के गठन की मांग भी रखी है। इस दौरान समाज ने यह स्पष्ट किया कि साधु-संत अहिंसा और संयम का संदेश देते हैं और ऐसे में उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। ज्ञापन सौंपते समय नरेंद्र गलालिया, राजेंद्र जैन, राजेंद्र वेड़ा, चंद्रकुमार जैन, संतोष गलालिया सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।1
- Post by Bhagirath Megwh राजलदेसर गोगा22
- बांसवाड़ा जिला पुलिस मुख्यालय ने अपराधियों की धरपकड़ करने और कानून व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से आगामी दिनों में विशेष अभियान चलाने का निर्णय लिया है। रिजर्व पुलिस लाइन स्थित शौर्य सदन सभागार में आयोजित उच्च स्तरीय अपराध समीक्षा बैठक में कानून व्यवस्था से संबंधित कई कड़े फैसले लिए गए। पुलिस अधीक्षक सुधीर जोशी की अध्यक्षता में हुई इस गोष्ठी में थानों में लंबित मामलों का त्वरित निपटारा करने और सड़क सुरक्षा के लिए एक पुख्ता कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश जारी किए गए। इस बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरपत सिंह सहित जिले के सभी वृत्ताधिकारी, थानाधिकारी और शाखा प्रभारी उपस्थित रहे। पुलिस अधीक्षक ने थानावार लंबित प्रकरणों की समीक्षा करते हुए सभी थानाधिकारियों को स्पष्ट हिदायत दी कि मुकदमों का समयबद्ध निस्तारण कर पीड़ितों को जल्द राहत प्रदान की जाए। इसके अतिरिक्त, साइबर अपराधों से निपटने के लिए चलाए जा रहे 'ऑपरेशन म्युल हंटर' और रेंज स्तर पर वांछित अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए विशेष अभियान 'ऑपरेशन सुदर्शन चक्र 2' के तहत दबिश तेज करने के निर्देश दिए गए, ताकि हार्डकोर अपराधियों और इनामी बदमाशों को शीघ्र ही सलाखों के पीछे पहुंचाया जा सके। बैठक में अवैध मादक पदार्थों की तस्करी को ध्वस्त करने के लिए चलाए जा रहे 'ऑपरेशन त्रिनेत्र' की भी समीक्षा की गई। पुलिस अधीक्षक ने दो टूक शब्दों में कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी और तस्करों के खिलाफ कठोर कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए। सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की गई। पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए कि अधिक दुर्घटनाओं वाले थाना क्षेत्रों को चिन्हित किया जाए और थानाधिकारी स्वयं इन दुर्घटना स्थलों का भौतिक निरीक्षण करें। उन्होंने यह भी कहा कि इन क्षेत्रों में सुधारात्मक कदमों के लिए सार्वजनिक निर्माण विभाग के साथ समन्वय स्थापित किया जाए। वहीं, बिना हेलमेट दुपहिया वाहन चालकों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाते हुए कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और बड़े पैमाने पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करने के भी निर्देश दिए गए।2