लखनऊ के अलीगंज स्थित लोक सेवा आयोग के पीछे चल रहे एक कोचिंग सेंटर में आज दोपहर भीषण आग लगने से 15 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। जमीन पर बनी एक दुकान से उठी आग और दम घोंटू धुएं ने देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के वक्त ऊपर की मंजिलों पर क्लास चल रही थी, जिससे छात्र भीतर ही फंस गए और जान बचाने के लिए बच्चों को दो मंजिला इमारत की छत तथा संकरे छज्जों से कूदना पड़ा, जिसमें कई गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रॉमा सेंटर प्रशासन के मुताबिक, अब तक 15 बच्चों की जान दम घुटने और बुरी तरह झुलसने की वजह से गई है। ग्राउंड जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बेसमेंट में अवैध निर्माण किया गया था और ऊपर की मंजिल की छत पूरी तरह लॉक थी, जिस कारण यह पूरी इमारत छात्रों के लिए एक 'डेथ ट्रैप' साबित हुई और उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। हादसे की भयावहता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा रद्द कर दिया और सीधे लखनऊ के घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और घायलों के समुचित उपचार के सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। घटना की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी CM ब्रजेश पाठक, DM विशाख अय्यर और ADCP नॉर्थ ट्विंकल जैन समेत प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग की कई गाड़ियों और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से आग पर काबू पाया गया। इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 नामजद और 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 6 नामजद आरोपियों में से रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेन्द्र प्रसाद शुक्ला, तूशांक कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू नामक 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि इस अवैध निर्माण की जड़ें तलाशी जा सकें, लेकिन इस त्रासदी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मुआवजा उन मासूमों की जिंदगी वापस ला सकता है, इस भीषण लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है और उस पर क्या ठोस कार्रवाई होगी, या एसआईटी जांच का मतलब सिर्फ मामलों को ठंडे बस्ते में डालना होगा।
लखनऊ के अलीगंज स्थित लोक सेवा आयोग के पीछे चल रहे एक कोचिंग सेंटर में आज दोपहर भीषण आग लगने से 15 मासूम बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई। जमीन पर बनी एक दुकान से उठी आग और दम घोंटू धुएं ने देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। हादसे के वक्त ऊपर की मंजिलों पर क्लास चल रही थी, जिससे छात्र भीतर ही फंस गए और जान बचाने के लिए बच्चों को दो मंजिला इमारत की छत तथा संकरे छज्जों से कूदना पड़ा, जिसमें कई गंभीर रूप से घायल हो गए। ट्रॉमा सेंटर प्रशासन के मुताबिक, अब तक 15 बच्चों की जान दम घुटने और बुरी तरह झुलसने की वजह से गई है। ग्राउंड जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि बेसमेंट में अवैध निर्माण किया गया था और ऊपर की मंजिल की छत पूरी तरह लॉक थी, जिस कारण यह पूरी इमारत छात्रों के लिए एक 'डेथ ट्रैप' साबित हुई और उन्हें बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं मिला। हादसे की भयावहता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना अलीगढ़ दौरा रद्द कर दिया और सीधे लखनऊ के घटनास्थल पर पहुंचे। मुख्यमंत्री ने हादसे पर गहरा दुख जताते हुए राहत एवं बचाव कार्य तेज करने और घायलों के समुचित उपचार के सख्त निर्देश दिए हैं। सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है। घटना की गंभीरता को देखते हुए डिप्टी CM ब्रजेश पाठक, DM विशाख अय्यर और ADCP नॉर्थ ट्विंकल जैन समेत प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। दमकल विभाग की कई गाड़ियों और हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म की मदद से आग पर काबू पाया गया। इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए 6 नामजद और 3 अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। 6 नामजद आरोपियों में से रामकृष्ण उपाध्याय, वीरेन्द्र प्रसाद शुक्ला, तूशांक कृष्ण जायसवाल और सुरेश कुमार साहू नामक 4 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं ताकि इस अवैध निर्माण की जड़ें तलाशी जा सकें, लेकिन इस त्रासदी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि क्या मुआवजा उन मासूमों की जिंदगी वापस ला सकता है, इस भीषण लापरवाही का असली जिम्मेदार कौन है और उस पर क्या ठोस कार्रवाई होगी, या एसआईटी जांच का मतलब सिर्फ मामलों को ठंडे बस्ते में डालना होगा।
- उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के बिसवां कस्बे के आदित्य श्रीवास्तव का लखनऊ के एक कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग में दुखद निधन हो गया, जिससे उनके पैतृक आवास कैथी टोला पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में मातम छा गया। बेटे का शव घर आने पर परिवार में कोहराम मच गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। मृतक के पिता आलोक श्रीवास्तव अपने बेटे का शव लेकर घर पहुंचे। इस दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, रिश्तेदार, मित्रगण और प्रशासनिक अधिकारी आदित्य को अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद रहे, जिनकी आंखें नम थीं और पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई। परिजनों और दोस्तों ने बताया कि आदित्य एक होनहार और मेहनती युवक था, जिसने 3D आर्टिस्ट का कोर्स पूरा कर लिया था और नौकरी करते हुए परिवार की जिम्मेदारियों को भी बखूबी निभा रहा था। उसके सपनों और संघर्षों की चर्चा करते हुए मित्र भावुक हो उठे। आदित्य की असमय मृत्यु ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है, क्योंकि जिस बेटे से उन्होंने उज्ज्वल भविष्य की उम्मीदें संजो रखी थीं, उसकी अचानक मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया। अंतिम संस्कार की तैयारियों के बाद आदित्य का अंतिम संस्कार कर दिया गया और अंतिम यात्रा में शामिल लोगों ने नम आंखों से उसे विदाई दी। इस दर्दनाक हादसे के बाद बिसवां क्षेत्र में शोक और संवेदना का माहौल बना हुआ है, जहां लोग पीड़ित परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त कर रहे हैं।1
- अलीगंज अग्निकांड मामले में निलंबित किए गए फायर स्टेशन ऑफिसर (FSSO) कमलेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री योगी को पत्र लिखा है। उन्होंने अपने खिलाफ की गई कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए इस पर पुनर्विचार करने की मांग की है। सिंह ने अपने पत्र में तर्क दिया है कि उनका कार्यक्षेत्र सीमित है, जबकि मुख्य अग्निशमन अधिकारी (CFO) के पास सारे अधिकार होते हैं। उन्होंने बताया कि NOC (अनापत्ति प्रमाण पत्र) CFO द्वारा दिए जाते हैं और दमकल के मौके पर देर से पहुंचने के लिए भी CFO ही जिम्मेदार हैं। FSSO कमलेंद्र सिंह ने स्पष्ट रूप से CFO की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है।1
- हरदोई के सण्डीला नगर में ज्येष्ठ माह के अंतिम मंगलवार के पावन अवसर पर धार्मिक आस्था, सेवा और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। इस दौरान नगर के विभिन्न स्थानों पर भव्य भंडारों का आयोजन किया गया, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और राहगीरों ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया। पूरे नगर में भक्तिमय वातावरण बना रहा और लोगों ने उत्साहपूर्वक इन आयोजनों में भाग लिया। आयोजनों के क्रम में, पूर्व प्रतिभा सिनेमा – चक्कर रोड मार्ग पर स्थित बिहारी हॉस्पिटल के सामने बेवफा पान भंडार के प्रो० शिवम प्रजापति और उनके सहयोगियों ने एक भव्य भंडारा आयोजित किया, जहां आने-जाने वाले राहगीरों और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इसी तरह, सण्डीला के हरदोई रोड स्थित श्री बिहारी जी होटल एंड बैंकेट हॉल में डॉ० बिहारी लाल, अरुण पाल और आलोक पाल द्वारा विशाल भंडारा कराया गया, जिसमें लोगों को पूड़ी-सब्जी, छोला-चावल समेत अन्य प्रसाद दिए गए। वहीं, पूर्व प्रतिभा सिनेमा तिराहे पर एक पुजारी ने श्रद्धालुओं को शीतल शरबत बांटा। सेलिब्रेशन लॉन के निकट विनीत कुमार ने भी अपने आवास के बाहर सहयोगियों के साथ मिलकर श्रद्धालुओं और राहगीरों को छोला-चावल वितरित किए। विनीत कुमार ने इस अवसर पर कहा कि हनुमानजी की कृपा से पिछले कई वर्षों से निष्ठा के साथ गरीबों की सेवा करना ही उनका उद्देश्य है। नगर के कई अन्य स्थानों पर भी लोगों ने पूड़ी-सब्जी, छोला-चावल और शरबत आदि का वितरण कर सेवा और धार्मिक श्रद्धा का परिचय दिया।2
- लखनऊ कोचिंग सेंटर में हुए अग्निकांड को लेकर समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि फायर NOC जारी करने में लगातार हो रही अनियमितताओं और प्रशासन की विफलता के कारण ही ऐसी दुखद घटनाएँ घट रही हैं, जिनमें मासूमों की जान जा रही है। अखिलेश यादव ने साफ तौर पर कहा कि बिना पूरे सुरक्षा मानकों के ही NOC दे दी जाती है, और अग्निशमन सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम भी नहीं किए जाते। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि राजधानी में ऐसे कितने कोचिंग सेंटर हैं जो बिना फायर NOC के ही चल रहे हैं। SP प्रमुख ने गंभीर आरोप लगाया कि इतनी बार आग लगने की घटनाओं के बावजूद सरकार व्यवस्था में सुधार लाने पर कोई ध्यान नहीं दे रही है।1
- समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने लखनऊ के अलीगंज में हुए अग्निकांड में घायल हुए लोगों और उनके परिजनों से मुलाकात करने के लिए KGMU ट्रॉमा सेंटर का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सभी पीड़ितों का हालचाल जाना और उनके परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त की। अखिलेश यादव ने घायलों को तत्काल बेहतर इलाज उपलब्ध कराने की मांग भी की।1
- सीतापुर में मोहर्रम के दौरान आने-जाने वाले श्रद्धालुओं को पानी की दिक्कत न हो, इसके लिए सरकार की ओर से इमाम बारगाह कलां के सामने खाली कराई गई जगह पर पानी की टंकी का इंतजाम किया गया है। सीतापुर के बड़े इमाम बड़े के पास इस सबील पानी की टंकी (पियाऊ) की शुरुआत मौलाना एजाज मेहदी और अन्य लोगों ने की।1
- लखनऊ के अलीगंज इलाके (उषा मेहता मार्ग, पुरनिया) में स्थित एक व्यावसायिक इमारत में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इस आग लगने का कारण सुरक्षा मानकों की अनदेखी और अवैध निर्माण बताया गया है। घटना के बाद प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं, जिसके तहत 15 दिन के भीतर इस इमारत को ढहाने (बुलडोजर चलाने) का नोटिस जारी किया गया है। साथ ही, गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) के छह अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले उत्तर प्रदेश के 48 कोचिंग सेंटरों को सील कर दिया गया है। अग्निकांड के मृतकों के परिजनों के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार ने ₹5-5 लाख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ₹2-2 लाख की आर्थिक सहायता देने का ऐलान किया है। इस घटना को लेकर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे एक सामान्य हादसा मानने से इनकार किया है। उन्होंने सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए पीड़ित परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा देने की मांग की है। इस पूरी घटना की जांच के लिए शासन द्वारा एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है, जिसमें आईपीएस प्रवीण कुमार और आईएएस अमृत अभिजात शामिल हैं।1