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सीएम योगी के आदेश को ठेंगा दिखाते नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी कुशीनगर में सीएम योगी के आदेश को ठेंगा दिखाते नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी - सुबह 10 से 12 बजे तक होने वाले जनता दर्शन को ठेंगा दिखा रहे कप्तानगंज EO - सुबह के 10 बजकर 47 मिनट तक अपने कार्यालय में नही पहुँचे साहब - जनता दर्शन को समय से नही पहुँचने वाले अधिषासी अधिकारी नही उठाते है सीयूजी मोबाइल नंबर - कुशीनगर के कप्तानगंज नगर पंचायत में तैनात है अधिषासी अधिकारी योगेंद्र प्रताप मिश्रा
Aditya pandey
सीएम योगी के आदेश को ठेंगा दिखाते नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी कुशीनगर में सीएम योगी के आदेश को ठेंगा दिखाते नगर पंचायत के अधिशासी अधिकारी - सुबह 10 से 12 बजे तक होने वाले जनता दर्शन को ठेंगा दिखा रहे कप्तानगंज EO - सुबह के 10 बजकर 47 मिनट तक अपने कार्यालय में नही पहुँचे साहब - जनता दर्शन को समय से नही पहुँचने वाले अधिषासी अधिकारी नही उठाते है सीयूजी मोबाइल नंबर - कुशीनगर के कप्तानगंज नगर पंचायत में तैनात है अधिषासी अधिकारी योगेंद्र प्रताप मिश्रा
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- पोखरी में बना आंगनबाड़ी केंद्र पांच साल बाद भी अधूरा, ग्रामीणों ने उठाए निर्माण और स्वीकृति पर सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता, निर्माण स्थल के चयन और धन के उपयोग की जांच की मांग पडरौना, कुशीनगर। विकासखंड पडरौना की ग्राम पंचायत रहसू खुदरा के टोला खुदरा में प्राथमिक विद्यालय के पीछे पोखरी में निर्मित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र पिछले लगभग पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2021 में शुरू हुआ निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते भवन महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित भी नहीं किया जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण पूर्व ग्राम प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। निर्माण स्थल पोखरी के किनारे होने के कारण तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती गुंजन द्विवेदी ने खंड विकास अधिकारी पडरौना से रिपोर्ट तलब कर निर्माण कार्य पर रोक लगाई थी। उस समय बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस स्थान को अनुपयुक्त माना गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत के कार्यकाल में आखिर किन परिस्थितियों में इस निर्माण को पुनः स्वीकृति प्रदान की गई, यह जांच का विषय है। उनका कहना है कि भवन की छत डाली जा चुकी है और फाटक भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब भी अधूरा है। भवन के एक ओर प्राथमिक विद्यालय, दूसरी ओर सड़क तथा शेष दो ओर पोखरी होने से यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में कराए गए कई विकास कार्यों की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण भी बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों का ध्यान रखे कराया गया है। यदि केंद्र का संचालन शुरू होता है तो बच्चों के लिए दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण स्थल के चयन, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, इंजीनियर की रिपोर्ट, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मनरेगा के संयुक्त बजट से कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधूरा पड़ा यह भवन सरकारी धन के उपयोग और निर्माण प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है। पोखरी में बना आंगनबाड़ी केंद्र पांच साल बाद भी अधूरा, ग्रामीणों ने उठाए निर्माण और स्वीकृति पर सवाल बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता, निर्माण स्थल के चयन और धन के उपयोग की जांच की मांग पडरौना, कुशीनगर। विकासखंड पडरौना की ग्राम पंचायत रहसू खुदरा के टोला खुदरा में प्राथमिक विद्यालय के पीछे पोखरी में निर्मित हो रहा आंगनबाड़ी केंद्र पिछले लगभग पांच वर्षों से अधूरा पड़ा है। वर्ष 2021 में शुरू हुआ निर्माण कार्य आज तक पूरा नहीं हो सका है, जिसके चलते भवन महिला एवं बाल विकास विभाग को हस्तांतरित भी नहीं किया जा सका। स्थानीय लोगों का कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण पूर्व ग्राम प्रधान के कार्यकाल में शुरू हुआ था। निर्माण स्थल पोखरी के किनारे होने के कारण तत्कालीन मुख्य विकास अधिकारी श्रीमती गुंजन द्विवेदी ने खंड विकास अधिकारी पडरौना से रिपोर्ट तलब कर निर्माण कार्य पर रोक लगाई थी। उस समय बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए इस स्थान को अनुपयुक्त माना गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत चुनाव के बाद नई ग्राम पंचायत के कार्यकाल में आखिर किन परिस्थितियों में इस निर्माण को पुनः स्वीकृति प्रदान की गई, यह जांच का विषय है। उनका कहना है कि भवन की छत डाली जा चुकी है और फाटक भी लगाए जा चुके हैं, लेकिन निर्माण कार्य अब भी अधूरा है। भवन के एक ओर प्राथमिक विद्यालय, दूसरी ओर सड़क तथा शेष दो ओर पोखरी होने से यहां आने वाले छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्राम पंचायत में कराए गए कई विकास कार्यों की गुणवत्ता और क्रियान्वयन पर पहले से सवाल उठते रहे हैं। उनका कहना है कि आंगनबाड़ी केंद्र का निर्माण भी बिना पर्याप्त सुरक्षा मानकों का ध्यान रखे कराया गया है। यदि केंद्र का संचालन शुरू होता है तो बच्चों के लिए दुर्घटना की आशंका बनी रहेगी। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण स्थल के चयन, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति, इंजीनियर की रिपोर्ट, तत्कालीन ग्राम पंचायत सचिव तथा अन्य संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही महिला एवं बाल विकास विभाग तथा मनरेगा के संयुक्त बजट से कराए जा रहे इस निर्माण कार्य में यदि किसी प्रकार की अनियमितता या वित्तीय गड़बड़ी पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से अधूरा पड़ा यह भवन सरकारी धन के उपयोग और निर्माण प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। उन्होंने जिला प्रशासन से मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई तथा बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उचित निर्णय लेने की मांग की है।1
- कुशीनगर। जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के सखोपार निवासी एक महिला ने पुलिस अधीक्षक कुशीनगर को शिकायती पत्र देकर भूमि विवाद में मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। कुशीनगर। जनपद के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के सखोपार निवासी एक महिला ने पुलिस अधीक्षक कुशीनगर को शिकायती पत्र देकर भूमि विवाद में मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। पीड़िता ने मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपितों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायती पत्र के अनुसार, 31 जुलाई 2026 को गांव के कुछ लोगों ने कथित रूप से जमीन पर जबरन कब्जा करने का प्रयास किया। विरोध करने पर आरोपितों ने महिला व उसके परिवार के साथ मारपीट की, गाली-गलौज की तथा लाठी-डंडा और धारदार हथियार दिखाकर जान से मारने की धमकी दी। पीड़िता का आरोप है कि घटना में उसके परिवार के कई सदस्य घायल हुए। महिला का यह भी आरोप है कि मामले की सूचना स्थानीय थाना पुलिस को दी गई, लेकिन अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके चलते आरोपित लगातार परिवार को धमका रहे हैं, जिससे पूरा परिवार भय के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर है। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने तथा अपने परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।4
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- पूर्व राज्यमंत्री के नेतृत्व में किसानों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, 50 वर्षों से आबाद भूमि से बेदखली पर जताई आपत्ति* पूर्व राज्यमंत्री के नेतृत्व में किसानों ने डीएम को सौंपा ज्ञापन, 50 वर्षों से आबाद भूमि से बेदखली पर जताई आपत्ति* कुशीनगर में वर्षों से आबाद भूमि से बेदखली के नोटिस का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह के नेतृत्व में किसानों और ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई पर रोक लगाने और निष्पक्ष जांच की मांग की। किसानों का कहना है कि उन्होंने जमीन खरीदकर विधिवत खारिज-दाखिल कराया था और दशकों से उसी भूमि पर रह रहे हैं, इसके बावजूद अब उन्हें जमीन खाली करने का नोटिस दिया जा रहा है। पूरा मामला मामला हाटा तहसील क्षेत्र के मौजा पट्टन, तप्पा देवरार, परगना हवेली का है। पूर्व राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह के नेतृत्व में बड़ी संख्या में किसान और ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया कि गाटा संख्या 59, रकबा 2.5700 हेक्टेयर भूमि पर कई परिवार वर्षों से निवास कर रहे हैं। उनका दावा है कि वर्ष 1994 और 2003 में विधिवत बेनामा कराकर भूमि खरीदी गई थी और उसके आधार पर खारिज-दाखिल की प्रक्रिया भी पूरी की गई थी। ग्रामीणों का कहना है कि वे करीब 30 से 50 वर्षों से शांतिपूर्वक उक्त भूमि पर रह रहे हैं। उनका आरोप है कि अब कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से फर्जी नामांतरण के आधार पर उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई की जा रही है। ग्रामीणों ने इसे पूरी तरह गलत और बेबुनियाद बताते हुए कहा कि पूर्व में न्यायालय के आदेशों के आधार पर उनके नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज हुए थे। इस दौरान पूर्व राज्यमंत्री राधेश्याम सिंह ने कहा कि किसानों ने उन्हें बताया है कि उन्होंने जमीन खरीदकर विधिवत खारिज-दाखिल कराया था और करीब 50 वर्षों से उसी भूमि पर रह रहे हैं। अब अचानक जमीन खाली करने का नोटिस दिए जाने से गरीब परिवारों के सामने बेघर होने का संकट खड़ा हो गया है। ज्ञापन में किसानों ने जिलाधिकारी से मांग की है कि सभी पक्षों को सुनवाई का अवसर दिया जाए, राजस्व अभिलेखों और न्यायालय के आदेशों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की बेदखली की कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाई जाए। किसानों का कहना है कि यदि बिना सुनवाई उन्हें हटाया गया तो दर्जनों परिवार बेघर हो जाएंगे और उन्हें अपूरणीय क्षति होगी। इस मौके पर पूर्व सपा जिला अध्यक्ष इलियास अंसारी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।3
- बच्चों को स्कूल छोड़कर लौट रहे युवक को अज्ञात वाहन ने मारी टक्कर, हालत गंभीर हाटा (कुशीनगर)। हाटा कोतवाली क्षेत्र में नेशनल हाईवे-28 पर सड़क पार कर रहे एक युवक को अज्ञात वाहन ने जोरदार टक्कर मार दी। हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। पुलिस मामले की जांच में जुट गई है और फरार वाहन की तलाश के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। घायल युवक की पहचान दिवाकर पुत्र मृत्युञ्जय चौहान के रूप में हुई है। बताया गया कि बुधवार सुबह वह संत पुष्पा इंटरमीडिएट कॉलेज के सामने अपने बच्चों को स्कूल छोड़ने आया था। बच्चों को विद्यालय में छोड़ने के बाद वह पैदल ही नेशनल हाईवे-28 पार कर रहा था। इसी दौरान हाटा की ओर से तेज रफ्तार में आ रहे एक अज्ञात वाहन ने उसे जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी तेज थी कि वह सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद वाहन चालक मौके से फरार हो गया। आसपास मौजूद लोगों ने तत्काल घायल की पहचान कर एनएचएआई की एंबुलेंस सेवा को सूचना दी। सूचना मिलते ही एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायल को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुकरौली ले जाया गया। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार के बाद सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटों के कारण उसे बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंच गए। सूचना पर पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। पुलिस अज्ञात वाहन और उसके चालक की पहचान के लिए आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। इस हादसे के बाद स्थानीय लोगों में आक्रोश है। उनका कहना है कि हाईवे पर तेज रफ्तार वाहनों के कारण आए दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं। लोगों ने प्रशासन से हाईवे पर गति नियंत्रण के प्रभावी इंतजाम, सुरक्षित पैदल पार मार्ग तथा सड़क पार करने वालों की सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।1