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पाकुड़ से धुलियान जाने वाले मुख्य मार्ग और तिलभिट्टा स्टेशन रोड पर आए दिन लग रहे भीषण जाम से आम जनता का जीना मुहाल हो गया है। सड़कों पर घंटों गाड़ियां फंसी रहती हैं, लेकिन मौके पर कोई पुलिस या ट्रैफिक प्रशासन नज़र नहीं आता। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस जाम में अक्सर एम्बुलेंस भी फंस जाती हैं, जिससे मरीजों की जान पर कभी भी बड़ा खतरा बन सकता है। माननीय उपायुक्त (डीसी) पाकुड़ से इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द संज्ञान लेने का विनम्र अनुरोध किया गया है। मांग की गई है कि इन प्रमुख मार्गों पर स्थायी पुलिस बल और ट्रैफिक जवानों की तैनाती की जाए, ताकि एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं और आम नागरिकों को इस रोज़-रोज़ की ट्रैफिक परेशानी से निजात मिल सके।
Abdur rajjak
पाकुड़ से धुलियान जाने वाले मुख्य मार्ग और तिलभिट्टा स्टेशन रोड पर आए दिन लग रहे भीषण जाम से आम जनता का जीना मुहाल हो गया है। सड़कों पर घंटों गाड़ियां फंसी रहती हैं, लेकिन मौके पर कोई पुलिस या ट्रैफिक प्रशासन नज़र नहीं आता। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस जाम में अक्सर एम्बुलेंस भी फंस जाती हैं, जिससे मरीजों की जान पर कभी भी बड़ा खतरा बन सकता है। माननीय उपायुक्त (डीसी) पाकुड़ से इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द संज्ञान लेने का विनम्र अनुरोध किया गया है। मांग की गई है कि इन प्रमुख मार्गों पर स्थायी पुलिस बल और ट्रैफिक जवानों की तैनाती की जाए, ताकि एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं और आम नागरिकों को इस रोज़-रोज़ की ट्रैफिक परेशानी से निजात मिल सके।
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- पाकुड़ से धुलियान जाने वाले मुख्य मार्ग और तिलभिट्टा स्टेशन रोड पर आए दिन लग रहे भीषण जाम से आम जनता का जीना मुहाल हो गया है। सड़कों पर घंटों गाड़ियां फंसी रहती हैं, लेकिन मौके पर कोई पुलिस या ट्रैफिक प्रशासन नज़र नहीं आता। सबसे चिंताजनक बात यह है कि इस जाम में अक्सर एम्बुलेंस भी फंस जाती हैं, जिससे मरीजों की जान पर कभी भी बड़ा खतरा बन सकता है। माननीय उपायुक्त (डीसी) पाकुड़ से इस गंभीर समस्या का जल्द से जल्द संज्ञान लेने का विनम्र अनुरोध किया गया है। मांग की गई है कि इन प्रमुख मार्गों पर स्थायी पुलिस बल और ट्रैफिक जवानों की तैनाती की जाए, ताकि एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाओं और आम नागरिकों को इस रोज़-रोज़ की ट्रैफिक परेशानी से निजात मिल सके।1
- पाकुड़ जिले के महेशपुर थाना क्षेत्र की मानिकपुर पंचायत स्थित कांकजोल प्रधान टोला में पिछले 2 महीने से चापाकल खराब पड़ा हुआ है। चापाकल से पानी बिल्कुल नहीं निकल रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों के सामने पीने के पानी की बड़ी किल्लत पैदा हो गई है। यह क्षेत्र खगड़ा डाकघर और रद्दीपुर ओ.पी. के अंतर्गत आता है। पानी पीने में आ रही भारी दिक्कतों को देखते हुए ग्रामीणों ने इस समस्या का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।2
- मेहरमा प्रखंड अंतर्गत चांदपुर मौजा में निजी जमीन पर बिना अनुमति बनाई गई सड़क पर प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए उसे जेसीबी मशीन से हटवा दिया है। चांदपुर मौजा के लालूबांध से कब्रिस्तान तक सड़क निर्माण का यह मामला तब तूल पकड़ा था जब संवेदक ने रैयतों को बिना सूचना दिए और बिना उनकी सहमति के निजी भूमि पर सड़क बना दी। अपनी जमीन की सुरक्षा और सड़क निर्माण निरस्त करने की मांग को लेकर रैयतों ने मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री सचिवालय, राज्यपाल, संथाल परगना आयुक्त, सांसद, उपायुक्त तथा अनुमंडल पदाधिकारी को आवेदन दिया था। शिकायत मिलने के बाद प्रशासन द्वारा मामले की जांच कराई गई। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर उपायुक्त के निर्देश पर मंगलवार को अंचल निरीक्षक लोकनाथ गोंड, ठाकुरगंगटी थाना के पुलिस अवर निरीक्षक अशोक कुमार एवं कामेश्वर उरांव पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी और निगरानी में जेसीबी मशीन से निजी भूमि पर किए गए सड़क निर्माण को हटवा दिया गया। यह पूरी कार्रवाई बिना किसी कानून-व्यवस्था की समस्या के शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। कार्रवाई के बाद से इलाके में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। रैयतों ने राहत जताते हुए कहा कि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई कर उनकी निजी भूमि की सुरक्षा सुनिश्चित की है। दूसरी ओर प्रशासन का कहना है कि निजी भूमि से जुड़े मामलों में विधिसम्मत प्रक्रिया का पूरी तरह पालन किया जाएगा और किसी की भी निजी संपत्ति पर अवैध निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी।1
- गोड्डा में अपनी खुशियों की तलाश में तीन मासूम बच्चों को बेसहारा छोड़ दिया गया है। इन मासूम बच्चों को इस हाल में बेसहारा छोड़े जाने के बाद यही सवाल उठ रहा है कि आखिर उनका क्या कसूर था।1
- गोड्डा जिले के महागामा प्रखंड अंतर्गत जटामा और मोहानी के बीच तीन मासूम बच्चे लावारिस हालत में मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई है। यह एक बेहद संवेदनशील और दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। लावारिस मिले बच्चों में एक मासूम की उम्र करीब डेढ़ माह, दूसरे की लगभग डेढ़ साल और तीसरे बच्चे की उम्र करीब ढाई से तीन साल बताई जा रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इन बच्चों के साथ एक बुजुर्ग महिला को देखा गया था, जो सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक तीनों बच्चों को वहीं छोड़कर चली गई। बच्चों के पास से एक फोटो भी बरामद हुई है, जिसे असोता का बताया जा रहा है। हालांकि, इस फोटो और पूरे मामले की असली हकीकत क्या है, इसका अभी तक पता नहीं चल पाया है।1
- छोटे बच्चे और बच्ची के बीच पढ़ाई, खेल और हंसी-मजाक को दर्शाती मजेदार कविताएं साझा की गई हैं। 'नन्हे दोस्त' शीर्षक वाली पहली कविता में बच्चा बाहर खेलने की बात कहता है, जिस पर बच्ची पहले पढ़ाई और फिर खेल की सलाह देती है। दोनों मिलकर साथ रहने और प्यार व खुशी बांटने का संदेश देते हैं। दूसरी कविता में भूख लगने पर बच्ची पहले हाथ धोने और फिर मजाक में पूछती है कि खाना नहीं, होमवर्क कर लिया क्या। वहीं एक अन्य मजेदार संवाद में पेंसिल गुम होने की बात पर बच्चा पूछता है कि जब बच्ची ने पेंसिल नहीं ली तो वह उसके अपने ही कान के पीछे कैसे मिली।1
- गोड्डा के मेहरमा में एक मां अपने तीन मासूम बच्चों के हाथ में एक फोटो थमाकर उन्हें छोड़कर फरार हो गई है। बेसहारा छूटे इन तीनों मासूमों को लेकर यह सवाल उठ रहा है कि आखिर इन बेकसूर बच्चों की क्या गलती थी जो मां इन्हें इस तरह अकेला छोड़कर चली गई।1
- दिल्ली के बाद अब पटना की सड़कों पर भी अहंकारी सत्ता की तानाशाही का प्रदर्शन शुरू हो गया है। पेपर लीक के खिलाफ और नाकाम शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जायज मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पटना के जेपी गोलंबर और गांधी मैदान में बर्बरता से लाठीचार्ज किया गया, वॉटर कैनन की बौछारें छोड़ी गईं और आंसू गैस के गोले दागे गए। अपने अधिकारों के लिए आवाज उठा रहे नौजवानों पर इस तरह पुलिसिया गुंडाराज का इस्तेमाल करना सीधे तौर पर लोकतंत्र की हत्या है। शिक्षा माफियाओं के सामने घुटने टेकने वाले बड़बोले सत्ताधीश अब पुलिस बल के दम पर युवाओं की आवाज को कुचलना चाहते हैं। सत्ता के नशे में चूर बीजेपी और एनडीए की सरकार को कान खोलकर सुन लेना चाहिए कि छात्रों के तीखे सवालों का जवाब उनकी लाठियां और पानी की बौछारें कभी नहीं बन सकतीं। इतिहास गवाह है कि युवाओं की जिस आवाज को लाठियों और दमन से दबाने की कोशिश की जा रही है, वही आक्रोश का सैलाब बहुत जल्द इस सत्ता के अहंकार और गुरूर को चकनाचूर कर देगा।1