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“कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई! सिस्टम की बेरुखी ने इंसानियत को किया शर्मसार” ओडिशा के केओंझर जिले के पटना ब्लॉक के मल्लीपोसी गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां आदिवासी युवक जीतू मुंडा अपनी ही मृत अविवाहित बहन का कंकाल बोरे में भरकर बैंक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि जनवरी 2026 में बहन की मौत के बाद उसके खाते में जमा करीब 19-20 हजार रुपये निकालने के लिए भाई लगातार बैंक के चक्कर काट रहा था, लेकिन हर बार उससे मृत्यु प्रमाण पत्र और “पति या बच्चों” की मौजूदगी मांगी जा रही थी — जबकि बहन अविवाहित थी और भाई ही उसका इकलौता वारिस था।
Lakhimpur Kheri दस्तक
“कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई! सिस्टम की बेरुखी ने इंसानियत को किया शर्मसार” ओडिशा के केओंझर जिले के पटना ब्लॉक के मल्लीपोसी गांव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां आदिवासी युवक जीतू मुंडा अपनी ही मृत अविवाहित बहन का कंकाल बोरे में भरकर बैंक पहुंच गया। बताया जा रहा है कि जनवरी 2026 में बहन की मौत के बाद उसके खाते में जमा करीब 19-20 हजार रुपये निकालने के लिए भाई लगातार बैंक के चक्कर काट रहा था, लेकिन हर बार उससे मृत्यु प्रमाण पत्र और “पति या बच्चों” की मौजूदगी मांगी जा रही थी — जबकि बहन अविवाहित थी और भाई ही उसका इकलौता वारिस था।
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- रिपोर्ट -शहनवाज़ गौरी लखीमपुर खीरी जनपद का कस्बा खीरी टाउन एक ऐसा कस्बा, जहां कभी ब्रिटिश शासनकाल में छोटी लाइन का रेलवे स्टेशन हुआ करता था। उस समय यह स्टेशन सिर्फ एक यात्रा का साधन नहीं, बल्कि पूरे कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों की जीवनरेखा था। व्यापार, नौकरी, पढ़ाई और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए हजारों लोग इसी स्टेशन पर निर्भर रहते थे। समय बदला, छोटी लाइन को बड़ी लाइन में बदलने यानी अमान परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू हुई। लोगों को उम्मीद जगी कि अब कस्बा खीरी को एक आधुनिक बड़ी लाइन का रेलवे स्टेशन मिलेगा। लोगों ने सोचा कि अब सफर आसान होगा, ट्रेनों की संख्या बढ़ेगी, व्यापार को गति मिलेगी और कस्बे को नई पहचान मिलेगी।लेकिन जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि बड़ी लाइन बनने के बाद खीरी रेलवे स्टेशन को स्टेशन नहीं बल्कि सिर्फ रेलवे हाल्ट बना दिया जाएगा, लोगों में भारी नाराजगी फैल गई। कस्बे के लोग सड़कों पर उतर आए। धरना-प्रदर्शन हुआ, कई दिनों तक अनशन चला। स्थानीय नेताओं ने मंच से आश्वासन दिया कि खीरी का स्टेशन, स्टेशन ही रहेगा, उसे हाल्ट में तब्दील नहीं होने दिया जाएगा।लोगों ने नेताओं के वादों पर भरोसा किया। धरना खत्म हुआ, अनशन टूटा और लोगों को लगा कि अब न्याय होगा। लेकिन वक्त बीतता गया और नेताओं के वादे भी हवा हो गए। आखिरकार खीरी रेलवे स्टेशन को खीरी टाउन हाल्ट में बदल दिया गया। सिंगल पटरी बिछा दी गई और दोनों तरफ खीरी टाउन हाल्ट का बोर्ड लगा दिया गया, जो आज भी लोगों को अधूरे वादों की याद दिलाता है।रेलवे स्टेशन के हाल्ट में बदलने के बाद सबसे बड़ा असर आम जनता और व्यापारियों पर पड़ा। करीब 70 हजार की आबादी वाले इस कस्बे और आसपास के दर्जनों गांवों के लोग इसी स्टेशन से सफर करते थे। सुबह 5 बजे और 6 बजे की ट्रेन पकड़कर व्यापारी लखनऊ जाते थे, अपना कारोबार संभालते थे और शाम को वापस लौट आते थे। उस समय कई ट्रेनें रुकती थीं और स्टेशन होने की वजह से पर्याप्त समय तक ठहराव भी रहता था। लेकिन आज हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। ट्रेनें कम हो गई हैं और जो ट्रेनें आती भी हैं, उनका ठहराव एक मिनट से भी कम का होता है। इतनी कम देर में अधिकांश यात्री ट्रेन में चढ़ ही नहीं पाते। कई बार बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे प्लेटफॉर्म पर ही छूट जाते हैं।स्थिति और भी चिंताजनक इसलिए है क्योंकि यहां बुनियादी सुविधाओं का भी अभाव है। न बैठने की समुचित व्यवस्था, न पीने के पानी की सुविधा, न शौचालय, और सबसे बड़ी समस्या यात्रियों को समय पर टिकट तक नहीं मिल पाता। यानी नाम के लिए रेलवे हाल्ट, लेकिन सुविधाएं लगभग शून्य।स्थानीय लोग कई बार रेलवे विभाग, जनप्रतिनिधियों, सांसदों और मंत्रियों तक अपनी आवाज पहुंचा चुके हैं। पत्राचार हुआ, शिकायतें हुईं, मीडिया ने भी कई बार इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाया, लेकिन नतीजा आज भी जस का तस है। अब सवाल यह उठता है कि आखिर खीरी टाउन रेलवे स्टेशन किन नेताओं की उदासीनता का शिकार हुआ? जब यहां हजारों यात्री रोज सफर करते हैं, जब यह कस्बा व्यापारिक रूप से महत्वपूर्ण है, जब जनता लगातार मांग कर रही है तो फिर इसे दोबारा रेलवे स्टेशन का दर्जा क्यों नहीं दिया जा सकता। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से खीरी टाउन की जनता की सीधी मांग है कि इस उपेक्षित हाल्ट की तरफ ध्यान दिया जाए। यहां ट्रेनों का ठहराव बढ़ाया जाए, बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं और सबसे महत्वपूर्ण खीरी टाउन हाल्ट को फिर से रेलवे स्टेशन का दर्जा दिया जाए।क्योंकि विकास की बात तभी पूरी होगी, जब छोटे कस्बों की आवाज भी सुनी जाएगी। खीरी टाउन आज भी अपने हिस्से के उस विकास का इंतजार कर रहा है, जिसका वादा वर्षों पहले किया गया था। #KheriTown #KheriTownRailwayHalt #RailwayStation #LakhimpurKheri #SaveKheriStation #RailwayDevelopment #PublicIssue #GroundReport #UPNews #IndianRailways #RailwayMinistry #PMOIndia #DevelopmentForAll #VoiceOfPeople #JusticeForKheriTown1
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- Post by संदीप कुमार शर्मा1