Shuru
Apke Nagar Ki App…
शंकरगढ़ पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस अब इस दर्ज मामले की आगे की जांच में जुट गई है।
Vijay Singh
शंकरगढ़ पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस अब इस दर्ज मामले की आगे की जांच में जुट गई है।
More news from छत्तीसगढ़ and nearby areas
- शंकरगढ़ पुलिस ने एक शिकायत के आधार पर अपराध पंजीबद्ध कर लिया है। पुलिस अब इस दर्ज मामले की आगे की जांच में जुट गई है।1
- छत्तीसगढ़ के रामानुजगंज में जिला मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) ने एक दुर्लभ कार्रवाई करते हुए पुलिस विभाग के एक सरकारी वाहन को कुर्क कर लिया है। यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट द्वारा निर्देशित लगभग 48 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान न करने के कारण की गई। जिला एवं सत्र न्यायाधीश हेमंत सराफ के आदेश पर कैदियों को न्यायालय लाने वाले पुलिस वाहन को न्यायालय परिसर में ही जब्त कर लिया गया। इस घटना ने पूरे जिले में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। यह मामला नारायण यादव एवं अन्य द्वारा दायर मोटर दुर्घटना दावा प्रकरण (एम.ए.सी. क्रमांक 154/2021) से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 3 सितंबर 2025 को अपने फैसले में छत्तीसगढ़ शासन के गृह विभाग को पीड़ित पक्ष को ब्याज सहित करीब 48 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था। न्यायालय के इस स्पष्ट आदेश के बावजूद, शासन की ओर से लंबे समय तक राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिसके बाद पीड़ित पक्ष ने न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के लिए निष्पादन की प्रक्रिया शुरू की। पीड़ित पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता आर.के. पटेल ने सिविल प्रक्रिया संहिता (सीपीसी) के आदेश 21 नियम 30 के तहत निष्पादन याचिका दायर की, जिसमें हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन न होने के कारण शासन की संपत्ति कुर्क करने की मांग की गई थी। निष्पादन याचिका में पुलिस विभाग के आठ अन्य सरकारी वाहनों का भी उल्लेख है, जिनमें बोलेरो और पुलिस बस जैसे वाहन शामिल हैं। इन वाहनों के पंजीयन नंबर और संबंधित अधिकारियों का विवरण भी न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है। सूत्रों के अनुसार, यदि शासन द्वारा जल्द ही क्षतिपूर्ति राशि जमा नहीं की जाती है, तो इन शेष आठ वाहनों को भी क्रमवार कुर्क किया जा सकता है। आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय पीड़ित पक्ष को देय राशि का भुगतान सुनिश्चित करने के लिए इन वाहनों की नीलामी की प्रक्रिया भी शुरू कर सकता है। कानूनी जानकारों के मुताबिक, न्यायालय के आदेशों की अवहेलना होने पर सरकारी संपत्ति की कुर्की की जा सकती है, हालांकि सरकारी विभागों के वाहनों की कुर्की जैसे मामले बहुत कम सामने आते हैं। एमएसीटी की इस कार्रवाई को न्यायालय के आदेशों का पालन सुनिश्चित कराने, शासन की जवाबदेही तय करने और पीड़ित पक्ष को समय पर न्याय दिलाने की दिशा में एक सख्त और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि शासन कब तक क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान करता है और अन्य सूचीबद्ध वाहनों पर क्या कार्रवाई होती है।4
- रंका प्रखंड में शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित 65वीं सुब्रतो मुखर्जी प्रखंड स्तरीय फुटबॉल प्रतियोगिता का शुभारंभ रंका प्लस टू हाई स्कूल के खेल मैदान में उत्साहपूर्ण माहौल में हुआ। इस प्रतियोगिता में रंका प्रखंड के सभी मिडिल एवं प्लस टू सरकारी विद्यालयों के छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इसका उद्घाटन अनुमंडल पुलिस निरीक्षक अभिजीत गौतम मिश्रा, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी रवि कुमार सिंह, रंका थाना प्रभारी रवि कुमार केसरी, बुनियादी संकुल साधनसेवी देवेंद्र नाथ उपाध्याय, दौनादाग संकुल साधनसेवी संजय प्रसाद गुप्ता तथा रंका युवराज गुलाब प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर किया। उद्घाटन समारोह में उपस्थित अतिथियों ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास का माध्यम नहीं, बल्कि अनुशासन, नेतृत्व क्षमता, टीम भावना और आत्मविश्वास का भी विकास करते हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ बेहतर प्रदर्शन करने का आह्वान किया। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने बताया कि प्रखंड स्तर पर विजयी टीम जिला स्तरीय प्रतियोगिता में भाग लेगी, जिसके बाद जिला स्तर पर सफलता प्राप्त करने वाली टीमें राज्य स्तर पर और अंततः राज्य विजेता टीम राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में हिस्सा लेगी।1
- झारखंड की राजस्व और आर्थिक भागीदारी में 32% से 72% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसका मुख्य कारण खनिज संसाधनों का कुप्रबंधन, राजनीतिक अस्थिरता और भारी भ्रष्टाचार बताए गए हैं। राज्य में देश की 40% खनिज संपदा होने के बावजूद, स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास, शिक्षा के अभाव और रोजगार न मिलने के कारण झारखंड आज भी पिछड़ा हुआ है। राज्य के अविकसित रहने के प्रमुख कारणों में राजनीतिक अस्थिरता और भ्रष्टाचार शामिल हैं। वर्ष 2000 में गठन के बाद से राज्य में बार-बार सरकारें बदलीं, जिससे दीर्घकालिक विकास नीतियां नहीं बन पाईं। कोयला और खनन घोटालों में कई नेताओं और अधिकारियों के नाम सामने आने से जनता का विश्वास और विकास के लिए आवंटित धन, दोनों बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। इसके अतिरिक्त, 'संसाधन अभिशाप' भी एक बड़ी समस्या है, जहाँ झारखंड देश को सर्वाधिक खनिज (जैसे कोयला, लौह अयस्क, यूरेनियम) प्रदान करता है, लेकिन खदानों के कारण स्थानीय लोगों को विस्थापन, पर्यावरण को नुकसान और आदिवासी अधिकारों के हनन का सामना करना पड़ा है। उत्पादन का लाभ ज्यादातर बाहरी बड़ी कंपनियों को मिला है, जिससे स्थानीय आबादी गरीबी में ही फँसी रही है। कृषि क्षेत्र का पिछड़ापन भी राज्य के विकास में बाधक रहा है। अलग राज्य बनने के बाद भी सिंचाई का पर्याप्त विकास न होने से ग्रामीण गरीबी कम नहीं हो पाई है। इसके साथ ही, 1932 के खतियान (स्थानीय नीति) और आरक्षण को लेकर स्थानीय बनाम बाहरी (Domicile) विवाद भी लगातार बना हुआ है। इन मुद्दों ने मूल निवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा का विषय तो उठाया, लेकिन राजनीतिक गतिरोध और अदालती मामलों के कारण सरकारी नियुक्तियों और अन्य नियुक्तियों में काफी देरी हुई है। झारखंड के आर्थिक सफर और बुनियादी समस्याओं को विस्तार से समझने के लिए एक संबंधित वीडियो देखने का सुझाव दिया गया है।1
- अनंत प्रताप देव जी पर उनके विधानसभा क्षेत्र में चंदा इकट्ठा कर बनाई जा रही सड़क को लेकर सवाल उठाए गए हैं। जनता ने सीधे तौर पर उनसे जवाब मांगा है कि आखिर वह इस मामले पर चुप क्यों हैं।1
- अम्बिकापुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 13, शिवशंकर वार्ड में गंदगी का आलम है, जहाँ सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, नगर निगम के सफाई कर्मचारी रोज़ सुबह 6 बजे से पूरे वार्ड में सफाई करते हैं। इसके बावजूद, कुछ रहवासियों की लापरवाही के कारण लोग कचरा सड़कों पर इधर-उधर फेंक देते हैं, जिससे सफाई के बाद भी वार्ड में गंदगी बनी रहती है। नागरिकों ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक लोग स्वयं जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक वार्ड साफ नहीं हो सकता। वार्ड 13 के पार्षद ने इस समस्या पर अपनी बात रखते हुए बताया कि सफाई के लिए प्रतिदिन टीम भेजी जा रही है और सफाई कर्मचारी रोज़ सुबह 6 बजे से शिवशंकर वार्ड में लगातार सफाई कर रहे हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से निवेदन किया है कि वे कचरा केवल डस्टबिन में ही डालें और स्वच्छता अभियान में अपना सहयोग दें। इसके अतिरिक्त, वार्ड में पोल और नाली की समस्या भी मौजूद है, जिसके बारे में पार्षद ने जानकारी दी कि इसका प्रस्ताव नगर निगम में प्रक्रियाधीन है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही यह प्रस्ताव पारित होगा, संबंधित काम तुरंत शुरू करवा दिए जाएंगे। प्रशासन ने अम्बिकापुर को स्वच्छ बनाने के लिए लोगों से अपील की है कि वे सफाई कर्मियों का सहयोग करें और गंदगी न फैलाएं।3
- गढ़वा के भंडारीया में एक बैंक मैनेजर को रात के अंधेरे में एक विधवा महिला से मिलने पहुंचने पर ग्रामीणों ने वहां से भगा दिया। ग्रामीणों ने इस घटना को अनुचित मानते हुए बैंक मैनेजर का विरोध किया और उन्हें वापस जाने पर मजबूर कर दिया।1
- झारखंड, देश की 40% खनिज संपदा का घर होने के बावजूद, आज भी एक पिछड़ा राज्य है। राज्य की राजस्व और आर्थिक भागीदारी में 32% से 72% तक की गिरावट आई है, जिसका मुख्य कारण खनिज संसाधनों का कुप्रबंधन, राजनीतिक अस्थिरता और भारी भ्रष्टाचार बताया गया है। स्थानीय स्तर पर औद्योगिक विकास, शिक्षा की कमी और रोजगार के अवसर न मिलना भी इसकी प्रमुख वजहें हैं। राज्य के अविकसित रहने के कई कारण गिनाए गए हैं। वर्ष 2000 में गठन के बाद से झारखंड में लगातार सरकारें बदलती रहीं, जिससे दीर्घकालिक विकास नीतियां नहीं बन पाईं। कोयला और खनन घोटालों में कई नेताओं और अधिकारियों के नाम सामने आने से जनता का विश्वास टूटा और विकास के लिए आवंटित धन का दुरुपयोग हुआ। इसके अतिरिक्त, राज्य "संसाधन अभिशाप" का भी शिकार है; जहां देश को कोयला, लौह अयस्क और यूरेनियम जैसे महत्वपूर्ण खनिज उपलब्ध कराने के बावजूद, खनन गतिविधियों के कारण स्थानीय आदिवासियों को विस्थापन, पर्यावरण क्षति और उनके अधिकारों के हनन का सामना करना पड़ा है। इस उत्पादन का लाभ बाहरी बड़ी कंपनियों को अधिक मिलता रहा है, जिससे स्थानीय आबादी गरीबी में ही फंसी हुई है। कृषि क्षेत्र में भी पिछड़ापन हावी है, क्योंकि अलग राज्य बनने के बाद भी सिंचाई का पर्याप्त विकास नहीं हो सका है, जो ग्रामीण गरीबी का एक बड़ा कारण बना हुआ है। राज्य में 1932 के खतियान (स्थानीय नीति) और आरक्षण को लेकर लंबे समय से "स्थानीय बनाम बाहरी" विवाद चलता रहा है। इन मुद्दों ने भले ही मूल निवासियों की सामाजिक-सांस्कृतिक पहचान की रक्षा की बात उठाई हो, लेकिन इसके परिणामस्वरूप राजनीतिक गतिरोध और अदालती मामले बढ़े हैं, जिससे सरकारी नियुक्तियों और पदों पर भर्तियां भारी देरी से हुई हैं।2