कैमूर/बिहार, दिल्ली के सासंद सह भोजपुरी इंडस्ट्री फिल्मों व लोकगीतों के कलाकार मनोज तिवारी का प्राथमिक विद्यालय बना बदहाली का शिकार: कचरे के ढेर से गुजरकर जाने को मजबूर हैं बच्चे कैमूर। एक ओर जहां सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और स्कूलों की तस्वीर बदलने के लंबे-चौड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर कैमूर जिले के मोहनियां प्रखंड क्षेत्र से एक सरकारी स्कूल की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है। बता दें कि मोहनियां प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पुसौली (पोस्ट- भीटी, थाना- मोहनियां) आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यह वही विद्यालय है, जहां भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, दिल्ली के सांसद और प्रसिद्ध भोजपुरी गायक व अभिनेता मनोज तिवारी ने अपने बचपन के दिन बिताए और अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। देश की संसद में गूंजने वाली आवाज देने वाले इस ऐतिहासिक स्कूल का आज बुरा हाल है। वही विद्यालय परिसर और इसके मुख्य आवागमन के रास्तों पर कचरे व गंदगी का अंबर लगा हुआ है। हालात इतने विकट हैं कि यहां आने-जाने वाले छोटे-छोटे मासूम बच्चों को रोज गंदे पानी, कीचड़ और कचरे के ढेर से होकर स्कूल के अंदर प्रवेश करना पड़ता है। इससे न सिर्फ बच्चों को आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है, बल्कि बदबू और गंदगी के कारण संक्रमण व गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। आपको बताते हुए चलें कि स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि एक तरफ इस विद्यालय का एक गौरवशाली इतिहास रहा है, लेकिन वर्तमान में जनप्रतिनिधियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण विद्यालय की स्थिति दयनीय हो चुकी है। अभिभावकों ने मांग की है कि विद्यालय परिसर और आवागमन के मुख्य मार्ग से कचरे और गंदगी को तत्काल हटाया जाए। साथ ही नियमित सफाई और जलजमाव से मुक्ति के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। आपको बता दें कि यदि समय रहते स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। अब देखना यह है कि मनोज तिवारी के इस ऐतिहासिक विद्यालय की सुध लेने के लिए जिम्मेदार कब जागते हैं।
कैमूर/बिहार, दिल्ली के सासंद सह भोजपुरी इंडस्ट्री फिल्मों व लोकगीतों के कलाकार मनोज तिवारी का प्राथमिक विद्यालय बना बदहाली का शिकार: कचरे के ढेर से गुजरकर जाने को मजबूर हैं बच्चे कैमूर। एक ओर जहां सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और स्कूलों की तस्वीर बदलने के लंबे-चौड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर कैमूर जिले के मोहनियां प्रखंड क्षेत्र से एक सरकारी स्कूल की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है। बता दें कि मोहनियां प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पुसौली (पोस्ट- भीटी, थाना- मोहनियां) आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यह वही विद्यालय है, जहां भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, दिल्ली के सांसद और प्रसिद्ध भोजपुरी गायक व अभिनेता मनोज तिवारी ने अपने बचपन के दिन बिताए और अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। देश की संसद में गूंजने वाली आवाज देने वाले इस ऐतिहासिक स्कूल का आज बुरा हाल है। वही विद्यालय परिसर और इसके मुख्य आवागमन के रास्तों पर कचरे व गंदगी का अंबर लगा हुआ है। हालात इतने विकट हैं कि यहां आने-जाने वाले छोटे-छोटे मासूम
बच्चों को रोज गंदे पानी, कीचड़ और कचरे के ढेर से होकर स्कूल के अंदर प्रवेश करना पड़ता है। इससे न सिर्फ बच्चों को आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है, बल्कि बदबू और गंदगी के कारण संक्रमण व गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। आपको बताते हुए चलें कि स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि एक तरफ इस विद्यालय का एक गौरवशाली इतिहास रहा है, लेकिन वर्तमान में जनप्रतिनिधियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण विद्यालय की स्थिति दयनीय हो चुकी है। अभिभावकों ने मांग की है कि विद्यालय परिसर और आवागमन के मुख्य मार्ग से कचरे और गंदगी को तत्काल हटाया जाए। साथ ही नियमित सफाई और जलजमाव से मुक्ति के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। आपको बता दें कि यदि समय रहते स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। अब देखना यह है कि मनोज तिवारी के इस ऐतिहासिक विद्यालय की सुध लेने के लिए जिम्मेदार कब जागते हैं।
- अजगरा में छत पर सो रहे दो मासूम भाइयों को सांप ने काटा, दोनों की मौत, मोहनिया :-कुदरा थाना क्षेत्र के अजगरा गांव में सांप के काटने से एक दर्दनाक हादसा हो गया। गुरुवार की रात घर की छत पर सो रहे दो सगे भाइयों को जहरीले सांप ने काट लिया। इस घटना में दोनों की मौत हो गई.।मृतक की पहचान अजगरा निवासी सतेन्द्र बैठा के 14 वर्षीय पुत्र धर्मवीर कुमार व 12 वर्षीय छोटा भाई धर्मराज कुमार शामिल है.।परिजनों के अनुसार, गुरुवार की रात खाना खाने के बाद दोनों भाई घर की छत पर सोने चले गए.सांप ने काट लिया.1
- कैमूर/बिहार, दिल्ली के सासंद सह भोजपुरी इंडस्ट्री फिल्मों व लोकगीतों के कलाकार मनोज तिवारी का प्राथमिक विद्यालय बना बदहाली का शिकार: कचरे के ढेर से गुजरकर जाने को मजबूर हैं बच्चे कैमूर। एक ओर जहां सरकार शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और स्कूलों की तस्वीर बदलने के लंबे-चौड़े दावे करती है, वहीं दूसरी ओर कैमूर जिले के मोहनियां प्रखंड क्षेत्र से एक सरकारी स्कूल की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आ रही है जो व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाती है। बता दें कि मोहनियां प्रखंड स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, पुसौली (पोस्ट- भीटी, थाना- मोहनियां) आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। यह वही विद्यालय है, जहां भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता, दिल्ली के सांसद और प्रसिद्ध भोजपुरी गायक व अभिनेता मनोज तिवारी ने अपने बचपन के दिन बिताए और अपनी प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। देश की संसद में गूंजने वाली आवाज देने वाले इस ऐतिहासिक स्कूल का आज बुरा हाल है। वही विद्यालय परिसर और इसके मुख्य आवागमन के रास्तों पर कचरे व गंदगी का अंबर लगा हुआ है। हालात इतने विकट हैं कि यहां आने-जाने वाले छोटे-छोटे मासूम बच्चों को रोज गंदे पानी, कीचड़ और कचरे के ढेर से होकर स्कूल के अंदर प्रवेश करना पड़ता है। इससे न सिर्फ बच्चों को आवाजाही में भारी परेशानी हो रही है, बल्कि बदबू और गंदगी के कारण संक्रमण व गंभीर बीमारियों के फैलने का खतरा लगातार मंडरा रहा है। आपको बताते हुए चलें कि स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों का कहना है कि एक तरफ इस विद्यालय का एक गौरवशाली इतिहास रहा है, लेकिन वर्तमान में जनप्रतिनिधियों और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों की अनदेखी के कारण विद्यालय की स्थिति दयनीय हो चुकी है। अभिभावकों ने मांग की है कि विद्यालय परिसर और आवागमन के मुख्य मार्ग से कचरे और गंदगी को तत्काल हटाया जाए। साथ ही नियमित सफाई और जलजमाव से मुक्ति के लिए स्थायी व्यवस्था की जाए। आपको बता दें कि यदि समय रहते स्थानीय प्रशासन और शिक्षा विभाग ने इस समस्या का समाधान नहीं किया, तो नौनिहालों के स्वास्थ्य के साथ-साथ उनके भविष्य पर भी इसका गहरा असर पड़ेगा। अब देखना यह है कि मनोज तिवारी के इस ऐतिहासिक विद्यालय की सुध लेने के लिए जिम्मेदार कब जागते हैं।2
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