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12 अगस्त की रात सूर्य ग्रहण और अमावस्या का दुर्लभ संयोग, भारत में दिखेगा नहीं फिर भी इन 4 राशियों को क्यों रहना होगा सावधान? 12 अगस्त 2026 की रात आसमान में बड़ी खगोलीय घटना होने जा रही है. चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक देगा. दुनिया के कई हिस्सों में दिन के समय अंधेरा छा जाएगा. हालांकि भारत में उस समय रात होगी. इसलिए यहां पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा. भारत में ग्रहण नहीं दिखने के कारण सूतक भी मान्य नहीं होगा. पूजा-पाठ, मंदिर और दैनिक काम सामान्य रूप से किए जा सकेंगे. फिर भी ज्योतिष के जानकार इस ग्रहण को पूरी तरह प्रभावहीन नहीं मान रहे. इसकी वजह ग्रहण का कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगना है. ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होंगे. अमावस्या भी रहेगी. ज्योतिषीय मान्यता है कि ऐसी स्थिति व्यक्ति के मन, परिवार, पद और फैसलों पर असर डाल सकती है. विशेष रूप से कर्क, मकर, मेष और तुला राशि के लोगों को थोड़ा संभलकर चलने की सलाह दी जा रही है.वैज्ञानिक दृष्टि से हर सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन ही लगता है. अमावस्या पर चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है. लेकिन हर अमावस्या पर तीनों खगोलीय पिंड एक सीधी रेखा में नहीं होते. इसीलिए हर महीने सूर्य ग्रहण नहीं लगता. 12 अगस्त का ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा. यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक ग्रहण नजर आएगा. पूर्णता की स्थिति अधिकांश स्थानों पर दो मिनट से कम रहेगी.

19 hrs ago
user_राठौड़ न्यूज एजेंसी
राठौड़ न्यूज एजेंसी
Jawad, Neemuch•
19 hrs ago

12 अगस्त की रात सूर्य ग्रहण और अमावस्या का दुर्लभ संयोग, भारत में दिखेगा नहीं फिर भी इन 4 राशियों को क्यों रहना होगा सावधान? 12 अगस्त 2026 की रात आसमान में बड़ी खगोलीय घटना होने जा रही है. चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक देगा. दुनिया के कई हिस्सों में दिन के समय अंधेरा छा जाएगा. हालांकि भारत में उस समय रात होगी. इसलिए यहां पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा. भारत में ग्रहण नहीं दिखने के कारण सूतक भी मान्य नहीं होगा. पूजा-पाठ, मंदिर और दैनिक काम सामान्य रूप से किए जा सकेंगे. फिर भी ज्योतिष के जानकार इस ग्रहण को पूरी तरह प्रभावहीन नहीं मान रहे. इसकी वजह ग्रहण का कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगना है. ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होंगे. अमावस्या भी रहेगी. ज्योतिषीय मान्यता है कि ऐसी स्थिति व्यक्ति के मन, परिवार, पद और फैसलों पर असर डाल सकती है. विशेष रूप से कर्क, मकर, मेष और तुला राशि के लोगों को थोड़ा संभलकर चलने की सलाह दी जा रही है.वैज्ञानिक दृष्टि से हर सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन ही लगता है. अमावस्या पर चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है. लेकिन हर अमावस्या पर तीनों खगोलीय पिंड एक सीधी रेखा में नहीं होते. इसीलिए हर महीने सूर्य ग्रहण नहीं लगता. 12 अगस्त का ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा. यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक ग्रहण नजर आएगा. पूर्णता की स्थिति अधिकांश स्थानों पर दो मिनट से कम रहेगी.

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  • 🇮🇳 हर घर तिरंगा अभियान को लेकर नीमच में होंगे व्यापक आयोजन नीमच। जिले में 9 से 17 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में अभियान की तैयारियों की समीक्षा की गई। तिरंगा यात्रा, रैली, मैराथन, साइक्लोथॉन, बाइक रैली, मानव श्रृंखला, तिरंगा सजावट, प्रदर्शनी, प्रश्नोत्तरी और देशभक्ति सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने पर चर्चा हुई। कलेक्टर ने ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मौन जुलूस और श्रद्धांजलि सभा होगी। साथ ही ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष गतिविधियां भी आयोजित होंगी।
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    🇮🇳 हर घर तिरंगा अभियान को लेकर नीमच में होंगे व्यापक आयोजन
नीमच। जिले में 9 से 17 अगस्त तक हर घर तिरंगा अभियान के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। कलेक्टर हिमांशु चंद्रा की अध्यक्षता में हुई बैठक में अभियान की तैयारियों की समीक्षा की गई। तिरंगा यात्रा, रैली, मैराथन, साइक्लोथॉन, बाइक रैली, मानव श्रृंखला, तिरंगा सजावट, प्रदर्शनी, प्रश्नोत्तरी और देशभक्ति सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करने पर चर्चा हुई। कलेक्टर ने ग्रामीण और नगरीय क्षेत्रों में अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 14 अगस्त को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मौन जुलूस और श्रद्धांजलि सभा होगी। साथ ही ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में विशेष गतिविधियां भी आयोजित होंगी।
    user_मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
    मुकेश शर्मा पत्रकार नीमच
    Carpenter Neemuch Nagar, Madhya Pradesh•
    17 hrs ago
  • भाटखेड़ी में रिमझिम बारिश के बीच निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी भाटखेड़ी में रिमझिम बारिश के बीच निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी जय जय महाकाल के जयकारों से गूंज उठा पूरा नगर मनासा। समीप गांव भाटखेड़ी में सावन के दूसरे सोमवार को रिमझिम बारिश के बीच बाबा महाकाल की ऐसी भव्य शाही सवारी निकली, जिसे देख हर कोई शिवभक्ति के रंग में रंग गया। डीजे और ढोल की धुन पर झूमते इन श्रद्धालुओं का उत्साह आसमान छू रहा है!सावन के पावन सोमवार को ग्राम भाटखेड़ी के प्रसिद्ध श्री शेषावतार मंदिर से इस भव्य शाही सवारी का आगाज हुआ। जैसे ही बाबा की पालकी नगर भ्रमण पर निकली, पूरा इलाका 'हर-हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा। आसमान से बरसती रिमझिम फुहारें भी शिवभक्तों के इस सैलाब को रोक नहीं पाईं। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं... हर कोई भजनों की धुन पर थिरकता नजर आया। गांव की गलियों में जगह-जगह बाबा का स्वागत किया गया।पूरे नगर का भ्रमण करने के बाद यह शाही सवारी वापस शेषावतार मंदिर पहुंची, जहाँ शंखध्वनि के साथ बाबा की अलौकिक महाआरती की गई और भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया।
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    भाटखेड़ी में रिमझिम बारिश के बीच निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी 
भाटखेड़ी में रिमझिम बारिश के बीच निकली बाबा महाकाल की भव्य शाही सवारी जय जय महाकाल के जयकारों से गूंज उठा पूरा नगर
मनासा। समीप गांव भाटखेड़ी में सावन के दूसरे सोमवार को रिमझिम बारिश के बीच बाबा महाकाल की ऐसी भव्य शाही सवारी निकली, जिसे देख हर कोई शिवभक्ति के रंग में रंग गया। डीजे और ढोल की धुन पर झूमते इन श्रद्धालुओं का उत्साह आसमान छू रहा है!सावन के पावन सोमवार को ग्राम भाटखेड़ी के प्रसिद्ध श्री शेषावतार मंदिर से इस भव्य शाही सवारी का आगाज हुआ। जैसे ही बाबा की पालकी नगर भ्रमण पर निकली, पूरा इलाका 'हर-हर महादेव' और 'जय महाकाल' के जयकारों से गूंज उठा। आसमान से बरसती रिमझिम फुहारें भी शिवभक्तों के इस सैलाब को रोक नहीं पाईं। बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं... हर कोई भजनों की धुन पर थिरकता नजर आया। गांव की गलियों में जगह-जगह बाबा का स्वागत किया गया।पूरे नगर का भ्रमण करने के बाद यह शाही सवारी वापस शेषावतार मंदिर पहुंची, जहाँ शंखध्वनि के साथ बाबा की अलौकिक महाआरती की गई और भक्तों में महाप्रसाद का वितरण किया गया।
    user_Rakeshsharma Rakeshsharma
    Rakeshsharma Rakeshsharma
    मनासा, नीमच, मध्य प्रदेश•
    18 hrs ago
  • माधोपुर में 12 फीट का विशाल अजगर, वन विभाग ने किया रेस्क्यू माधोपुर में खेत में निकला 12 फीट लंबा विशालकाय अजगर, 40 किलो वजन—वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
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    माधोपुर में 12 फीट का विशाल अजगर, वन विभाग ने किया रेस्क्यू
माधोपुर में खेत में निकला 12 फीट लंबा विशालकाय अजगर, 40 किलो वजन—वन विभाग ने किया सुरक्षित रेस्क्यू
    user_Hello Chittorgarh News
    Hello Chittorgarh News
    Local News Reporter चित्तौड़गढ़, चित्तौड़गढ़, राजस्थान•
    3 hrs ago
  • MP मुर्दा भी शर्मा गया होगा मेरे घर की ये हालात मुझे यहां भी सुकून से नहीं जलने दिया अंतिम संस्कार के लिए चिता जल रही है ऊपर छत से पानी टपक रहा है लोग भीगते हुए खड़े हैं श्मशान की छत और व्यवस्थाएं जर्जर हालत में हैं बारिश में टेंट लगाकर किसी तरह अंतिम संस्कार करना पड़ा दाग देने वाले लोग भी परेशान सीतामऊ जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलारा के ग्राम वर्दीचंद पाटीदार के निधन होने से अंतिम संस्कार में पड़े फोड़े श्मशान की बदहाली हर किसी से छुपी नहीं बारिश में टेंट लगाकर करना पड़ा अंतिम संस्कार पंचायत के श्मशान की हालत इतनी खराब है कि बारिश के कारण परिजनों को टेंट लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा ऊपर से पानी टपकता रहा और लोग भीगते हुए दाग देने को मजबूर हुए ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान में न तो पक्की छत है न ही बैठने की व्यवस्था शायद *मुर्दा भी शर्मा गया होगा कि मेरे घर की ये हालत है ये दर्द हर किसी की जुबान पर है* ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि श्मशान का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कर के शेड बैठने की व्यवस्था और पानी की निकासी की जाए ताकि किसी और को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े.! ये है बेलारा पंचायत के श्मशान की हकीकत बारिश में टेंट लगाकर अंतिम संस्कार। ऊपर से टपकता पानी क्या यही है हमारी व्यवस्था? जिम्मेदारों से निवेदन है जल्द ध्यान दें अंतिम विदाई भी सम्मान से नहीं -बेलारा श्मशान में मूलभूत सुविधाएं तक नही दागी हुए लोग परेशान। कृपया संज्ञान लें श्मशान भी रो रहा है बेलारा में श्मशान की हालत देखकर हर कोई शर्मसार प्रशासन से मांग तुरंत मरम्मत हो
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    MP मुर्दा भी शर्मा गया होगा मेरे घर की ये हालात मुझे यहां भी सुकून से नहीं जलने दिया
अंतिम संस्कार के लिए चिता जल रही है ऊपर छत से पानी टपक रहा है लोग भीगते हुए खड़े हैं श्मशान की छत और व्यवस्थाएं जर्जर हालत में हैं बारिश में टेंट लगाकर किसी तरह अंतिम संस्कार करना पड़ा दाग देने वाले लोग भी परेशान
सीतामऊ जनपद पंचायत के अंतर्गत ग्राम पंचायत बेलारा के ग्राम वर्दीचंद पाटीदार के निधन होने से अंतिम संस्कार में पड़े फोड़े श्मशान की बदहाली हर किसी से छुपी नहीं बारिश में टेंट लगाकर करना पड़ा अंतिम संस्कार पंचायत के श्मशान की हालत इतनी खराब है कि बारिश के कारण परिजनों को टेंट लगाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा ऊपर से पानी टपकता रहा और लोग भीगते हुए दाग देने को मजबूर हुए ग्रामीणों का कहना है कि श्मशान में न तो पक्की छत है न ही बैठने की व्यवस्था शायद *मुर्दा भी शर्मा गया होगा कि मेरे घर की ये हालत है ये दर्द हर किसी की जुबान पर है* ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि श्मशान का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कर के शेड बैठने की व्यवस्था और पानी की निकासी की जाए ताकि किसी और को ऐसी स्थिति का सामना न करना पड़े.! ये है बेलारा पंचायत के श्मशान की हकीकत बारिश में टेंट लगाकर अंतिम संस्कार। ऊपर से टपकता पानी क्या यही है हमारी व्यवस्था? जिम्मेदारों से निवेदन है जल्द ध्यान दें अंतिम विदाई भी सम्मान से नहीं -बेलारा श्मशान में मूलभूत सुविधाएं तक नही दागी हुए लोग परेशान। कृपया संज्ञान लें
श्मशान भी रो रहा है बेलारा में श्मशान की हालत देखकर हर कोई शर्मसार प्रशासन से मांग तुरंत मरम्मत हो
    user_Mangal Dev Rathore
    Mangal Dev Rathore
    मंदसौर नगर, मंदसौर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • 12 अगस्त की रात सूर्य ग्रहण और अमावस्या का दुर्लभ संयोग, भारत में दिखेगा नहीं फिर भी इन 4 राशियों को क्यों रहना होगा सावधान? 12 अगस्त 2026 की रात आसमान में बड़ी खगोलीय घटना होने जा रही है. चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक देगा. दुनिया के कई हिस्सों में दिन के समय अंधेरा छा जाएगा. हालांकि भारत में उस समय रात होगी. इसलिए यहां पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा. भारत में ग्रहण नहीं दिखने के कारण सूतक भी मान्य नहीं होगा. पूजा-पाठ, मंदिर और दैनिक काम सामान्य रूप से किए जा सकेंगे. फिर भी ज्योतिष के जानकार इस ग्रहण को पूरी तरह प्रभावहीन नहीं मान रहे. इसकी वजह ग्रहण का कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगना है. ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होंगे. अमावस्या भी रहेगी. ज्योतिषीय मान्यता है कि ऐसी स्थिति व्यक्ति के मन, परिवार, पद और फैसलों पर असर डाल सकती है. विशेष रूप से कर्क, मकर, मेष और तुला राशि के लोगों को थोड़ा संभलकर चलने की सलाह दी जा रही है.वैज्ञानिक दृष्टि से हर सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन ही लगता है. अमावस्या पर चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है. लेकिन हर अमावस्या पर तीनों खगोलीय पिंड एक सीधी रेखा में नहीं होते. इसीलिए हर महीने सूर्य ग्रहण नहीं लगता. 12 अगस्त का ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा. यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक ग्रहण नजर आएगा. पूर्णता की स्थिति अधिकांश स्थानों पर दो मिनट से कम रहेगी.
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    12 अगस्त की रात सूर्य ग्रहण और अमावस्या का दुर्लभ संयोग, भारत में दिखेगा नहीं फिर भी इन 4 राशियों को क्यों रहना होगा सावधान?
12 अगस्त 2026 की रात आसमान में बड़ी खगोलीय घटना होने जा रही है. चंद्रमा कुछ समय के लिए सूर्य को पूरी तरह ढक देगा. दुनिया के कई हिस्सों में दिन के समय अंधेरा छा जाएगा. हालांकि भारत में उस समय रात होगी. इसलिए यहां पूर्ण सूर्य ग्रहण दिखाई नहीं देगा.
भारत में ग्रहण नहीं दिखने के कारण सूतक भी मान्य नहीं होगा. पूजा-पाठ, मंदिर और दैनिक काम सामान्य रूप से किए जा सकेंगे. फिर भी ज्योतिष के जानकार इस ग्रहण को पूरी तरह प्रभावहीन नहीं मान रहे.
इसकी वजह ग्रहण का कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र में लगना है. ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में होंगे. अमावस्या भी रहेगी. ज्योतिषीय मान्यता है कि ऐसी स्थिति व्यक्ति के मन, परिवार, पद और फैसलों पर असर डाल सकती है.
विशेष रूप से कर्क, मकर, मेष और तुला राशि के लोगों को थोड़ा संभलकर चलने की सलाह दी जा रही है.वैज्ञानिक दृष्टि से हर सूर्य ग्रहण अमावस्या के दिन ही लगता है. अमावस्या पर चंद्रमा पृथ्वी और सूर्य के बीच आता है. लेकिन हर अमावस्या पर तीनों खगोलीय पिंड एक सीधी रेखा में नहीं होते. इसीलिए हर महीने सूर्य ग्रहण नहीं लगता.
12 अगस्त का ग्रहण इसलिए खास है क्योंकि यह पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा. ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन, उत्तरी रूस और पुर्तगाल के एक छोटे हिस्से में सूर्य पूरी तरह ढक जाएगा. यूरोप, उत्तरी अमेरिका और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में आंशिक ग्रहण नजर आएगा. पूर्णता की स्थिति अधिकांश स्थानों पर दो मिनट से कम रहेगी.
    user_राठौड़ न्यूज एजेंसी
    राठौड़ न्यूज एजेंसी
    Jawad, Neemuch•
    19 hrs ago
  • पूर्वोत्तर राज्य असम में मानसूनी बारिश और नदियों के उफान के चलते आई बाढ़ ने गंभीर रूप ले लिया है। राज्य के कई जिले इस आपदा की चपेट में हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के कारण मरने वालों की कुल संख्या 100 तक पहुंच गई है, जबकि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं। पूर्वोत्तर राज्य असम में मानसूनी बारिश और नदियों के उफान के चलते आई बाढ़ ने गंभीर रूप ले लिया है। राज्य के कई जिले इस आपदा की चपेट में हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के कारण मरने वालों की कुल संख्या 100 तक पहुंच गई है, जबकि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में राज्य के 7 जिले गंभीर रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें दरांग, चराईदेव, जोरहाट, गोलाघाट, नगांव, कार्बी आंगलोंग और शिवसागर जिले शामिल हैं, जहां कुल मिलाकर 1.37 लाख से अधिक लोग इस आपदा का सामना कर रहे हैं। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गोलाघाट शीर्ष पर है, जहां लगभग 70 हजार लोग संकट में जीवन गुजार रहे हैं। इसके अलावा, शिवसागर और जोरहाट में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं, जहां क्रमशः 40 हजार और 16 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान गोलाघाट और कार्बी आंगलोंग जिलों में दो और लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिससे कुल मृत्युदंड का आंकड़ा 100 हो गया है।बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एएसडीएमए के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके चलते नए इलाकों के भी बाढ़ की जद में आने का खतरा लगातार बना हुआ है। वर्तमान में राज्य के 456 गांव जलमग्न हैं। बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र को भारी क्षति पहुंची है और शुरुआती आकलन के अनुसार लगभग 11,933.46 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि पर खड़ी फसलें नष्ट हो चुकी हैं, जिससे किसानों की आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
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    पूर्वोत्तर राज्य असम में मानसूनी बारिश और नदियों के उफान के चलते आई बाढ़ ने गंभीर रूप ले लिया है। राज्य के कई जिले इस आपदा की चपेट में हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के कारण मरने वालों की कुल संख्या 100 तक पहुंच गई है, जबकि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।
पूर्वोत्तर राज्य असम में मानसूनी बारिश और नदियों के उफान के चलते आई बाढ़ ने गंभीर रूप ले लिया है। राज्य के कई जिले इस आपदा की चपेट में हैं, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार, बाढ़ के कारण मरने वालों की कुल संख्या 100 तक पहुंच गई है, जबकि राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर जारी हैं।असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) की रिपोर्ट के मुताबिक, वर्तमान में राज्य के 7 जिले गंभीर रूप से बाढ़ से प्रभावित हैं। इनमें दरांग, चराईदेव, जोरहाट, गोलाघाट, नगांव, कार्बी आंगलोंग और शिवसागर जिले शामिल हैं, जहां कुल मिलाकर 1.37 लाख से अधिक लोग इस आपदा का सामना कर रहे हैं।
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गोलाघाट शीर्ष पर है, जहां लगभग 70 हजार लोग संकट में जीवन गुजार रहे हैं। इसके अलावा, शिवसागर और जोरहाट में भी हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं, जहां क्रमशः 40 हजार और 16 हजार लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 24 घंटों के दौरान गोलाघाट और कार्बी आंगलोंग जिलों में दो और लोगों की मौत दर्ज की गई है, जिससे कुल मृत्युदंड का आंकड़ा 100 हो गया है।बाढ़ का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। एएसडीएमए के अधिकारियों ने आशंका जताई है कि ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियां कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिसके चलते नए इलाकों के भी बाढ़ की जद में आने का खतरा लगातार बना हुआ है।
वर्तमान में राज्य के 456 गांव जलमग्न हैं। बाढ़ के कारण कृषि क्षेत्र को भारी क्षति पहुंची है और शुरुआती आकलन के अनुसार लगभग 11,933.46 हेक्टेयर उपजाऊ भूमि पर खड़ी फसलें नष्ट हो चुकी हैं, जिससे किसानों की आजीविका पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है।
    user_राठौड़ न्यूज एजेंसी
    राठौड़ न्यूज एजेंसी
    Jawad, Neemuch•
    19 hrs ago
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