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प्रदर्शन होना तो सही था, लेकिन इस दौरान लड़कियों को भी नहीं छोड़ा गया और उनकी पिटाई की गई। लड़कियों के साथ हुई इस मारपीट पर गहरा दुख और ऐतराज जताते हुए कहा गया है कि ऐसा बिलकुल भी नहीं किया जाना चाहिए था। प्रदर्शन अपनी जगह ठीक है, लेकिन इस तरह से लड़कियों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है।
Vipul singh
प्रदर्शन होना तो सही था, लेकिन इस दौरान लड़कियों को भी नहीं छोड़ा गया और उनकी पिटाई की गई। लड़कियों के साथ हुई इस मारपीट पर गहरा दुख और ऐतराज जताते हुए कहा गया है कि ऐसा बिलकुल भी नहीं किया जाना चाहिए था। प्रदर्शन अपनी जगह ठीक है, लेकिन इस तरह से लड़कियों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है।
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- नवादा जिले के हिसुआ प्रखंड क्षेत्र के मंझवे, तुंगी, चक, धरमपुर, उमराव बीघा समेत कई गांवों में सोमवार को दोपहर में झमाझम बारिश हुई। इस बारिश ने गर्मी से हलकान लोगों को राहत प्रदान की। बारिश का लुत्फ उठाते नन्हे बच्चे अली और आफिया की तस्वीर ने बारिश की खुशी को और बढ़ा दिया। हालांकि, यह बारिश सिर्फ 10 मिनट तक ही हुई, लेकिन इस छोटे से समय में ही मौसम सुहाना हो गया और गर्मी से परेशान लोगों को काफी राहत मिली।1
- बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र में एक मामले की कवरेज के दौरान दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील कुमार ने सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान पर अभद्र व्यवहार और मारपीट करने की कोशिश का आरोप लगाया है। सुशील कुमार ने बताया कि वह सूचना मिलने पर संतोष कुमार अग्रवाल के घर पहुंचे थे, जहां पुलिस मौजूद थी। वह पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। इसी दौरान, सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया, वीडियो बनाने से रोकने का प्रयास किया तथा उनकी ओर हाथ उठाकर मारपीट करने की कोशिश की। सुशील कुमार का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध है, जिसकी जांच से वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। सुशील कुमार ने गया के वरीय पुलिस अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान के विरुद्ध आवश्यक विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वह जिले के पत्रकारों के साथ मिलकर शांतिपूर्ण धरना-प्रदर्शन करेंगे।1
- मॉडर्न इंटरनेशनल स्कूल, हिसुआ के बहुउद्देशीय सभागार में रविवार को शिक्षक-अभिभावक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दो सत्रों में संपन्न हुआ। प्रथम सत्र में नर्सरी से कक्षा पाँच तक तथा द्वितीय सत्र में कक्षा छह से दस तक के विद्यार्थियों के अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यालय परिसर अभिभावकों की उपस्थिति से खचाखच भरा रहा और लगभग शत-प्रतिशत अभिभावकों की सहभागिता ने कार्यक्रम को विशेष बना दिया। संगोष्ठी को संबोधित करते हुए मॉडर्न शैक्षणिक समूह के निदेशक डॉ. अनुज सिंह ने अध्येता, अध्यापक और अभिभावक के बीच बेहतर समन्वय को बच्चों के सर्वांगीण विकास की आधारशिला बताया। उन्होंने कहा कि आज के बदलते शैक्षिक परिवेश में बच्चों का इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के प्रति बढ़ता आकर्षण चिंता का विषय है। यदि शिक्षक और अभिभावक मिलकर बच्चों को मोबाइल एवं अन्य डिजिटल उपकरणों के अनावश्यक उपयोग से दूर रखते हुए स्वाध्याय, पुस्तक-पठन और रचनात्मक गतिविधियों की ओर प्रेरित करें, तो उनमें अनुशासन, आत्मविश्वास और नैतिक मूल्यों का विकास होगा। डॉ. अनुज सिंह ने कहा कि मॉडर्न की पहचान केवल उत्कृष्ट शैक्षणिक परिणामों तक सीमित नहीं है, बल्कि अच्छी शिक्षा, अनुशासन, सुंदर लिखावट, संस्कार, खेल, संगीत, नृत्य एवं अन्य सह-पाठ्यक्रम गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन भी इसकी विशेषता है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि वे बच्चों के सामने अपने व्यवहार, भाषा और आदतों का सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें, क्योंकि बच्चे अपने माता-पिता से ही जीवन के प्रारंभिक संस्कार सीखते हैं। उन्होंने भारतीय संस्कृति, नैतिक मूल्यों और पारिवारिक परंपराओं को बच्चों के जीवन में अपनाने पर विशेष बल दिया। विद्यालय के प्राचार्य योगलाल चौधरी ने अपने संबोधन में कहा कि विद्यालय में बच्चों का नामांकन कराना पहला कदम है, लेकिन उनके सर्वांगीण विकास के लिए अभिभावकों की सक्रिय भागीदारी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यार्थी में शैक्षणिक, व्यवहारिक अथवा अन्य किसी प्रकार की समस्या दिखाई दे, तो अभिभावक बिना संकोच विद्यालय प्रशासन अथवा संबंधित वर्ग शिक्षक से संपर्क करें। विद्यालय प्रत्येक विद्यार्थी के उज्ज्वल भविष्य के लिए सदैव तत्पर है। संगोष्ठी के दौरान अभिभावकों ने विद्यालय की शिक्षण व्यवस्था, अनुशासन, शैक्षणिक वातावरण एवं नियमित संवाद की सराहना की। अनेक अभिभावकों ने अपने सुझाव एवं समस्याएँ भी विद्यालय प्रबंधन के समक्ष रखीं, जिन पर सकारात्मक चर्चा हुई। विद्यालय प्रबंधन ने अभिभावकों को विश्वास दिलाया कि उनके सुझावों को प्राथमिकता देते हुए बच्चों के हित में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। कार्यक्रम के सफल आयोजन में विद्यालय के सभी शिक्षक-शिक्षिकाओं एवं कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अभिभावकों ने इस प्रकार के संवादात्मक कार्यक्रमों को समय-समय पर आयोजित करने की आवश्यकता पर बल देते हुए विद्यालय प्रबंधन के प्रयासों की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।2
- बिहार के नवादा जिले में एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ है जिसमें दो चचेरे भाइयों की मौत हो गई। हादसा रविवार देर रात कोडरमा घाटी में हुआ। 44 वर्षीय ट्रक चालक साधू यादव और उनके 22 वर्षीय चचेरे भाई सह उपचालक अमरजीत उर्फ छोटू यादव झारखंड से रजौली की ओर लोडेड ट्रक लेकर आ रहे थे। इसी दौरान कोडरमा घाटी में ट्रक का संतुलन बिगड़ गया। वाहन पहले सड़क किनारे एक पेड़ से टकराया और फिर विपरीत दिशा से आ रहे एक अन्य ट्रक से जा भिड़ा। भीषण टक्कर में चालक और उपचालक दोनों की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही सदर विधायक विभा देवी एवं विधान परिषद सदस्य अशोक कुमार ने अपने प्रतिनिधियों को घटनास्थल पर भेजा। विधायक प्रतिनिधि सुरेंद्र यादव एवं बृज यादव ने बताया कि उनके पहुंचने से पहले दोनों शव कोडरमा थाना लाए जा चुके थे, जहां कानूनी प्रक्रिया पूरी कर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिया गया। सोमवार शाम करीब चार बजे जब दोनों का पार्थिव शरीर गांव पहुंचा तो परिजनों के बीच चीख-पुकार मच गई। पूरे गांव का माहौल गमगीन हो गया और बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए जुट गए। विधायक विभा देवी ने पटना से फोन पर मृतकों के परिजनों से बात कर उन्हें सांत्वना दी और हरसंभव सहायता का आश्वासन दिया। वहीं एमएलसी अशोक कुमार ने कहा कि मृतक परिवारों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिलाने का प्रयास किया जाएगा तथा हर संभव सहयोग किया जाएगा। साधू यादव अपने पीछे तीन पुत्रियां और एक पुत्र छोड़ गए हैं, जबकि अमरजीत उर्फ छोटू यादव की आठ माह की एक मासूम पुत्री है। इस दर्दनाक हादसे से दोनों परिवारों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।1
- नवादा जिले के रजौली क्षेत्र अंतर्गत स्थित अंबेडकर आवासीय विद्यालय में बच्चों को कीड़ा नुमा खाना दिया जा रहा है। रजौली के इस अंबेडकर आवासीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को खाने में कीड़े युक्त भोजन ही परोसा जाता है।1
- गोविंदपुर (नवादा): बिहार सरकार के पंचायती राज विभाग के निर्देशानुसार प्रत्येक माह के अंतिम रविवार को मनाए जाने वाले 'पंचायत विकास दिवस' के अवसर पर रविवार को गोविंदपुर प्रखंड की बनिया बीघा ग्राम पंचायत स्थित पंचायत सरकार भवन में बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पंचायत क्षेत्र में संचालित विकास योजनाओं की समीक्षा की गई और ग्रामीणों की समस्याओं को सुनकर उनके शीघ्र समाधान की दिशा में आवश्यक पहल करने पर जोर दिया गया। बैठक के दौरान सड़क, नाली, पेयजल, स्वच्छता और जनकल्याणकारी योजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा हुई। ग्रामीणों ने अपनी समस्याओं एवं सुझावों को अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के समक्ष रखा। अधिकारियों ने संबंधित मामलों के त्वरित निष्पादन का आश्वासन देते हुए योजनाओं के प्रभावी एवं पारदर्शी क्रियान्वयन के लिए सभी से सहयोग की अपील की। इस अवसर पर पंचायत में चल रही विकास योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करते हुए समयबद्ध कार्यान्वयन, पारदर्शिता तथा पात्र लाभुकों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर विशेष बल दिया गया। पंचायत प्रतिनिधियों ने ग्रामीणों से ग्राम सभा एवं पंचायत की बैठकों में अधिक से अधिक संख्या में भाग लेने की अपील करते हुए कहा कि जनभागीदारी से ही पंचायत का समग्र एवं सतत विकास संभव है। बैठक में पंचायत सचिव प्रिंस कुमार, जी. राम जी, पीटीए रवींद्र कुमार, PRS अमित कुमार, स्वच्छता प्रेक्षक रंजन कुमार, ग्राम पंचायत की मुखिया मिनती देवी, मुखिया प्रतिनिधि पंकज सिंह, कार्यपालक सहायक नीलम कुमारी सहित दिनेश यादव, अरमान खान, मनोज राम, माणिक चंद चौधरी, पिंटू यादव तथा पंचायत क्षेत्र के सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित रहे।1
- बिहार के गया जिले के इमामगंज थाना क्षेत्र में एक पत्रकार पर कथित तौर पर पुलिस द्वारा हमला किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर के संवाददाता सुशील कुमार ने आरोप लगाया है कि इमामगंज थाना में पदस्थापित सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उनके साथ कवरेज के दौरान अभद्र व्यवहार किया और मारपीट करने की कोशिश की। सुशील कुमार का कहना है कि वह संतोष कुमार अग्रवाल के घर पर एक घटना की कवरेज के लिए पहुंचे थे, जहां पहले से ही पुलिस मौजूद थी। पत्रकारिता के दायित्व का निर्वहन करते हुए वह घटनास्थल की वीडियो रिकॉर्डिंग कर रहे थे। आरोप है कि इसी दौरान सब-इंस्पेक्टर नौशाद खान ने उन्हें वीडियो बनाने से रोका, अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया और हाथ उठाकर मारपीट करने का प्रयास किया। पत्रकार सुशील कुमार का दावा है कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो उपलब्ध है, जिसकी निष्पक्ष जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। यदि यह आरोप सही साबित होते हैं, तो यह केवल एक पुलिस अधिकारी के अनुचित व्यवहार का मामला नहीं रहेगा, बल्कि यह पुलिस की कार्यशैली, जवाबदेही और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़ा अत्यंत गंभीर विषय होगा। संविधान प्रत्येक नागरिक को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और पत्रकारों का कार्य जनता तक सत्य और तथ्य पहुंचाना है। ऐसे में कवरेज के दौरान पत्रकारों के साथ डराने-धमकाने या दुर्व्यवहार की घटनाएं किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए शुभ संकेत नहीं मानी जा सकतीं। इस मामले में पत्रकार सुशील कुमार ने गया के वरीय पुलिस अधिकारियों से निष्पक्ष जांच कर दोषी पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि यदि मामले को दबाने या अनदेखा करने का प्रयास हुआ, तो जिले के पत्रकार एकजुट होकर शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक आंदोलन और धरना-प्रदर्शन करने को बाध्य होंगे। पुलिस और पत्रकार—दोनों लोकतंत्र के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने का कार्य करती है, जबकि पत्रकार समाज के सामने सच रखने का। दोनों के बीच टकराव नहीं, बल्कि पारदर्शिता और पारस्परिक सम्मान होना चाहिए। यदि घटना का वीडियो वास्तव में उपलब्ध है, तो जिला पुलिस प्रशासन को बिना किसी पक्षपात के उसकी तकनीकी जांच करानी चाहिए और रिपोर्ट सार्वजनिक करनी चाहिए। यदि आरोप गलत हैं तो पुलिस अधिकारी को न्याय मिलना चाहिए, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित अधिकारी पर कठोर विभागीय कार्रवाई होनी चाहिए। किसी भी स्तर पर वर्दी की आड़ में शक्ति का दुरुपयोग स्वीकार नहीं किया जा सकता। गया पुलिस प्रशासन के लिए यह मामला केवल एक शिकायत नहीं, बल्कि अपनी निष्पक्षता और जवाबदेही साबित करने की परीक्षा है। यदि ऐसे मामलों में समय पर और पारदर्शी कार्रवाई नहीं होती, तो पुलिस व्यवस्था पर जनता का विश्वास कमजोर होगा और यह लोकतांत्रिक संस्थाओं के लिए चिंताजनक स्थिति होगी।1