चैनपुर स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा प्रदेश कार्य समिति के सदस्य कृष्ण बिहारी जायसवाल ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का 'काला अध्याय' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपनी सत्ता बचाने के उद्देश्य से लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को सीमित किया था। जायसवाल ने आरोप लगाया कि इस दौरान विपक्षी नेताओं को कारागार में डाल दिया गया और प्रेस की स्वतंत्रता का दमन किया गया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आपातकाल के समय लाखों लोगों के मौलिक अधिकार बुरी तरह प्रभावित हुए थे। जायसवाल ने नई पीढ़ी को लोकतंत्र की रक्षा के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस कार्यक्रम में जिला प्रवक्ता जमुना पाण्डेय, मीडिया प्रभारी रामचरित द्विवेदी, राहुल सिंह, उजित नारायण सिंह, रमेश यादव सहित भाजपा के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
चैनपुर स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा प्रदेश कार्य समिति के सदस्य कृष्ण बिहारी जायसवाल ने 25 जून 1975 को लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र का 'काला अध्याय' करार दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने अपनी सत्ता बचाने के उद्देश्य से लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता को सीमित किया था। जायसवाल ने आरोप लगाया कि इस दौरान विपक्षी नेताओं को कारागार में डाल दिया गया और प्रेस की स्वतंत्रता का दमन किया गया। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आपातकाल के समय लाखों लोगों के मौलिक अधिकार बुरी तरह प्रभावित हुए थे। जायसवाल ने नई पीढ़ी को लोकतंत्र की रक्षा के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता पर बल दिया। इस कार्यक्रम में जिला प्रवक्ता जमुना पाण्डेय, मीडिया प्रभारी रामचरित द्विवेदी, राहुल सिंह, उजित नारायण सिंह, रमेश यादव सहित भाजपा के अनेक पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
- अंबिकापुर स्थित बाल संप्रेषण गृह से एक महत्वपूर्ण घटना सामने आई है, जहाँ से 11 बच्चे खिड़की तोड़कर फरार हो गए हैं। इस ब्रेकिंग न्यूज़ ने स्थानीय प्रशासन और बाल संरक्षण व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस घटना पर चिंता व्यक्त करते हुए सवाल उठाया गया है कि इतनी आसानी से इतने लोग एक साथ कैसे फरार हो गए और उस जगह किसी को इसकी भनक तक नहीं लगी। पोस्ट में इस स्थिति को सोचने योग्य बताया गया है, जो हर तरफ देखने को मिल रही लापरवाही को उजागर करती है। खबर साझा करने वाले ने इस पूरे मामले पर लोगों की राय जानने की अपेक्षा की है और पाठकों को हर खबर के लिए उनके चैनल से जुड़े रहने का धन्यवाद और आग्रह किया है।1
- अनूपपुर जिले में सर्पदंश की घटनाओं को कम करने, अंधविश्वास को मिटाने और मानव-वन्यजीवों के बीच सुरक्षित सह-अस्तित्व को बढ़ावा देने के लिए जिला प्रशासन ने एक बड़ी पहल की है। कलेक्टर हर्षल पंचोली ने कलेक्ट्रेट स्थित नर्मदा सभागार में जिलेभर से आए सक्रिय स्नेक कैचर्स के लिए एक विशेष सम्मान एवं 'स्नेक किट' वितरण कार्यक्रम आयोजित किया। इस दौरान सर्प मित्रों को आधुनिक और सुरक्षित रेस्क्यू उपकरणों से लैस किट प्रदान की गई, ताकि वे संकट के समय अपनी और वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए प्रभावी ढंग से कार्य कर सकें। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कलेक्टर हर्षल पंचोली ने कहा कि पर्यावरण संतुलन के लिए सांप पारिस्थितिकी तंत्र का एक अत्यंत महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और लोग अक्सर भय व जागरूकता की कमी के कारण सांपों को मार देते हैं। उन्होंने इस मानसिकता में बदलाव लाने की आवश्यकता पर जोर दिया और सर्प मित्रों की भूमिका को मार्गदर्शक बताया। कलेक्टर ने यह भी जानकारी दी कि ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश से होने वाली जनहानि को रोकने और त्वरित सहायता पहुंचाने के उद्देश्य से आने वाले समय में प्रत्येक गांव में एक ‘सर्प प्रहरी’ तैयार करने की योजना पर गंभीरता से काम किया जा रहा है। श्री पंचोली ने अमरकंटक क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता का उल्लेख करते हुए बताया कि जिले के वनों में विषैली और दुर्लभ सर्प प्रजातियां पाई जाती हैं। उन्होंने वन विभाग और सर्प मित्रों से सुरक्षित सह-अस्तित्व बनाए रखने के लिए आपसी समन्वय से काम करने का आग्रह किया तथा जिले के सभी प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित शासकीय चिकित्सालयों में सर्पदंश उपचार हेतु पर्याप्त मात्रा में एंटी-वेनम की उपलब्धता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर वनमंडलाधिकार डेविड वेंकटेश चनाब ने सर्प मित्रों को रेस्क्यू कार्यों के दौरान सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी, यह स्पष्ट करते हुए कि सर्प रेस्क्यू का उद्देश्य किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत प्रसिद्धि पाना नहीं, बल्कि मानव और सर्प दोनों के अनमोल जीवन की रक्षा करना है। डीएफओ ने सर्पदंश के मामलों में पहले एक घंटे को ‘गोल्डन आवर’ बताते हुए नागरिकों से झाड़-फूंक या अंधविश्वास के जाल में न फंसने और पीड़ित को तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की अपील की। कार्यक्रम में वन्यजीव संरक्षक शशिधर अग्रवाल ने विभिन्न प्रजातियों के सांपों की पहचान, उनके व्यवहार और सुरक्षित व वैज्ञानिक तरीके से सर्प रेस्क्यू करने की तकनीकों तथा बरती जाने वाली सावधानियों और सुरक्षा उपायों की विस्तृत जानकारी प्रदान की। उन्होंने कहा कि जागरूकता और सही जानकारी से सांपों के प्रति अनावश्यक भय को दूर किया जा सकता है, जिससे मानव और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सकेगी।1
- अनूपपुर पुलिस को एक बड़ी सफलता मिली है, जहाँ थाना बिजुरी पुलिस ने बिजुरी अस्पताल के पास बाइक की डिग्गी से ₹50,000 चुराने वाले अंतर्राज्यीय शातिर आरोपी ओमप्रकाश सिसोदिया उर्फ बच्चा कंजर को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर चोरी किए गए ₹47,500 नकद और घटना में इस्तेमाल की गई मोटरसाइकिल बरामद कर ली है। पूछताछ के दौरान आरोपी ने बिजुरी के अलावा थाना रामनगर क्षेत्र में भी इसी तरह की वारदातें करने की बात कबूल की है। आरोपी ओमप्रकाश सिसोदिया के खिलाफ मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चोरी, लूट, नकबजनी और आर्म्स एक्ट के तहत 15 से अधिक मामले दर्ज हैं। इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी विकास सिंह और उनकी टीम की भूमिका सराहनीय रही है। अनूपपुर पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे वाहनों में नकदी, कीमती सामान और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को असुरक्षित न छोड़ें, और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत पुलिस को दें।1
- अंबिकापुर स्थित राजीव गांधी शिक्षा मिशन कार्यालय में बुधवार दोपहर भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम पहुंच गई, जहां वे वर्ष 2011-12 में उजागर हुए करोड़ों रुपए के फर्नीचर घोटाले से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज खंगाल रहे हैं। यह कार्रवाई घोटाले की जांच को तेज करने और वांछित साक्ष्य जुटाने के उद्देश्य से की जा रही है। करीब 15 वर्ष पूर्व राजीव गांधी शिक्षा मिशन के तहत करोड़ों रुपए के फर्नीचर खरीदे गए थे, जिन्हें स्कूलों में वितरित किया गया था। हालांकि, इन फर्नीचर की गुणवत्ता और कीमत को लेकर सवाल उठे थे, जिसके बाद जांच में एक बड़ा घोटाला सामने आया। वर्ष 2011-12 में उजागर हुए इस घोटाले में विभाग के 6-7 अधिकारियों के साथ-साथ फर्नीचर और अन्य सामान की आपूर्ति करने वाली 12 फर्मों की मिलीभगत का खुलासा हुआ था। इस मामले में आईपीसी की धारा 420 और 120 (बी) के साथ-साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13 (1) और 13 (2) के तहत अपराध दर्ज किया गया था। प्रारंभिक जांच के बावजूद, कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज अभी तक बरामद नहीं हो सके थे। आरोपियों को बचने से रोकने के लिए इस करोड़ों रुपए के फर्नीचर घोटाले की जांच का जिम्मा एसीबी को सौंपा गया था। एसीबी ने विभाग से घोटाले से संबंधित कुछ दस्तावेज मांगे थे, लेकिन विभाग द्वारा उन्हें उपलब्ध नहीं कराया गया था। इसी कारण बुधवार दोपहर एसीबी की टीम सीधे कार्यालय पहुंची। टीम द्वारा फिलहाल दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड को खंगाला जा रहा है, हालांकि अब तक क्या मिला है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। बताया जा रहा है कि यदि ये वांछित दस्तावेज मिल जाते हैं, तो तत्कालीन अधिकारियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा सकेंगे, जिसके आधार पर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने की बात कही जा रही है।1
- अनूपपुर पुलिस महिला सुरक्षा के प्रति सजगता दिखाते हुए त्वरित वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। पुलिस अधीक्षक श्री विक्रांत मुराब के निर्देश पर जिले के सभी थाना प्रभारियों को महिला संबंधी घटनाओं में संवेदनशीलता और तत्परता से कार्रवाई करने के लिए निर्देशित किया गया है। इसी क्रम में, कोतवाली अनूपपुर पुलिस ने छेड़छाड़ के एक आरोपी को गिरफ्तार कर एक त्वरित और प्रभावी ऑपरेशन को अंजाम दिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब दिनांक 23 जून 2026 को कोतवाली अनूपपुर में एक 27 वर्षीय महिला ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि शाम करीब 04:00 से 05:00 बजे के बीच, जब वह अपने घर पर अकेली थी, आरोपी नीरज यादव (लगभग 22 वर्षीय, पिता: प्रहलाद यादव, निवासी ग्राम औढेरा, अनूपपुर) उसके घर पहुंचा। आरोपी ने महिला के साथ अश्लील हरकत तथा छेड़छाड़ का प्रयास किया, जिसके बाद महिला के विरोध करने और आवाज़ लगाने पर वह मौके से भाग गया। महिला की शिकायत पर, थाने में अपराध क्रमांक 380/26 दर्ज करते हुए, भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(va) के तहत वैधानिक कार्रवाई शुरू की गई। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए, थाना प्रभारी निरीक्षक अरविंद जैन के नेतृत्व में उपनिरिक्षक सरिता लकड़ा, प्रधान आरक्षक विनय बैस, प्रधान आरक्षक शिवशंकर प्रजापति और चालक प्रधान आरक्षक खेमराज सिंह की एक टीम ने तत्काल जांच कर आरोपी नीरज यादव को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की आवश्यक प्रक्रियाएं जारी हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही एक महिला संबंधी प्रकरण माननीय न्यायालय में विचाराधीन है।2
- छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ने वाले पुलिस अधिकारी आज अपने ही विभाग की स्थानांतरण नीति पर सवाल उठाने को मजबूर हैं। बस्तर रेंज में पिछले 8 से 10 वर्षों से पदस्थ करीब 200 से 250 निरीक्षक और उपनिरीक्षक अब भी नई पदस्थापना का इंतजार कर रहे हैं। कई बार मांग उठने, शासन को ज्ञापन सौंपने और यहां तक कि उच्च न्यायालय में याचिका दायर होने के बावजूद इन अधिकारियों को केवल आश्वासन ही मिल रहा है, जिससे लंबे समय से बस्तर में तैनात इन पुलिस अधिकारियों और उनके परिवारों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने बताया कि वर्ष 2013 बैच के उपनिरीक्षकों को वर्ष 2016 में बिना किसी बांड के तीन वर्ष की पदस्थापना के लिए बस्तर रेंज भेजा गया था, लेकिन निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद भी अधिकांश अधिकारी आज तक वहीं तैनात हैं। इन अधिकारियों ने नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों का सामना करते हुए सेवाएं दी हैं, और शहीद उपनिरीक्षक मूलचंद कंवर, विनोद कौशिक, रूद्रप्रताप सिंह, श्याम किशोर शर्मा और दीपक भारद्वाज जैसे जांबाज अधिकारियों ने नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। संघ का कहना है कि जब प्रदेश में नक्सलवाद पर लगातार नियंत्रण स्थापित हो रहा है और सरकार भी बस्तर में सामान्य हालात लौटने का दावा कर रही है, तो फिर वर्षों से एक ही क्षेत्र में पदस्थ अधिकारियों का स्थानांतरण क्यों नहीं किया जा रहा, यह सवाल अब पुलिसकर्मियों और उनके परिवारों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। यह मामला उच्च न्यायालय बिलासपुर तक भी पहुंच चुका है, जहां पुलिस विभाग की ओर से बताया गया था कि अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का सामान्यतः तीन वर्षों में स्थानांतरण किया जाता है। हालांकि, वास्तविकता यह है कि अनेक अधिकारी 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में ही सेवाएं दे रहे हैं, जिससे लंबे समय से परिवार से दूर रह रहे पुलिस अधिकारियों के बच्चों की पढ़ाई, पारिवारिक जिम्मेदारियां और सामाजिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। जून माह में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के बीच अधिकारी अपने बच्चों का प्रवेश नए जिलों के स्कूलों में कराने की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन तबादला सूची का इंतजार अब भी खत्म नहीं हुआ है। संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और पुलिस महानिदेशक से भावुक अपील करते हुए कहा है कि नक्सल मोर्चे पर वर्षों तक सेवा देने वाले इन निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के योगदान का सम्मान किया जाए और उनका शीघ्र स्थानांतरण कर उन्हें परिवार के साथ रहने का अवसर दिया जाए। नक्सलवाद के खिलाफ मोर्चा संभालने वाले इन अधिकारियों ने प्रदेश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण वर्ष बस्तर की कठिन परिस्थितियों में बिताए हैं। उनका सवाल सिर्फ इतना है कि यदि स्थानांतरण नीति में तीन वर्ष का प्रावधान है, तो फिर 8 से 10 वर्षों से अधिक समय से बस्तर में तैनात अधिकारियों को राहत कब मिलेगी? यह सवाल आज सिर्फ पुलिसकर्मियों का नहीं, बल्कि उनके परिवारों की उम्मीदों और इंतजार का भी है।4
- अनूपपुर जिले में नशा मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत जिला स्तरीय मास्टर वॉलिंटियर्स प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला पंचायत सभागार में आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज को नशामुक्त बनाने के प्रयासों को गति देना था। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत की सीईओ श्रीमती अर्चना कुमारी ने नशा मुक्ति के लिए सघन प्रयासों पर बल दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह केवल शासकीय उत्तरदायित्व नहीं है, बल्कि सर्व समाज के लोगों को भी इसमें शामिल कर सार्थक प्रयास किए जाने चाहिए ताकि नशा ग्रस्त लोगों को नया जीवन मिल सके। श्रीमती कुमारी ने निचले स्तर तक नशा मुक्ति के प्रयासों, नशा मुक्त केंद्रों और सहायता केंद्रों के नंबरों का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। प्रशिक्षण कार्यक्रम में मध्य प्रदेश जल एवं भूमि प्रबंध संस्थान (वाल्मी) भोपाल के मास्टर ट्रेनर ने नशा छोड़ने के लिए किए जाने वाले प्रयासों पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि नशा मुक्ति केंद्र के लिए टोल फ्री नंबर 14446 पर संपर्क किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, नशे से संबंधित सामग्री बेचने वालों की जानकारी एनसीबी हेल्पलाइन नंबर 1933 पर दी जा सकती है, और खुशी हेल्पलाइन 14416 का उपयोग कर नशा मुक्त समाज की स्थापना में सहयोग देने की अपेक्षा की गई। ट्रेनर ने वॉलिंटियर्स तथा उपस्थित विभिन्न विभागीय अधिकारी-कर्मचारियों को नशा से संबंधित अनेक मुद्दों पर विस्तृत जानकारी प्रदान की। यह प्रशिक्षण नशा मुक्त भारत अभियान के मास्टर वॉलिंटियर्स को समाज में नशा मुक्ति के संदेश को प्रभावी ढंग से फैलाने और लोगों को जागरूक करने के लिए तैयार करने हेतु दिया गया था।1
- एक 22 वर्षीय युवक 33 KV हाई टेंशन विद्युत लाइन की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गया है।1