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उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक बुजुर्ग की जमीन का फर्जी तरीके से नामांतरण किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में पटवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक बुजुर्ग की जमीन का फर्जी तरीके से नामांतरण किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में पटवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।
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- उत्तर प्रदेश के मेरठ में एक बुजुर्ग की जमीन का फर्जी तरीके से नामांतरण किए जाने का मामला सामने आया है। इस मामले में पटवारी पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं।1
- सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो ने दांपत्य जीवन में आपसी समझ और परवाह के मुद्दे को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। वीडियो में एक युवक अपनी व्यथा साझा करते हुए कहता है कि वह दिनभर कड़ी मेहनत और धूप-धूल के बीच काम करने के बाद जब लंच के समय घर पहुंचा, तो वहां उसके लिए खाना तक तैयार नहीं था। उसने भावुक होते हुए अपनी बात रखी कि एक पति दिनभर की थकान के बाद बहुत अधिक की अपेक्षा नहीं करता, बल्कि सिर्फ दो वक्त की रोटी और अपनेपन के दो मीठे शब्दों की उम्मीद रखता है। यह मामला इस विचार को पुख्ता करता है कि कोई भी रिश्ता केवल जिम्मेदारियों से नहीं, बल्कि एक-दूसरे के प्रति परवाह से चलता है। जिस तरह परिवार की सुरक्षा और पालन करना पति का कर्तव्य है, उसी तरह पत्नी का साथ और सम्मान भी रिश्ते को मजबूती प्रदान करता है। यही सिद्धांत पत्नी के मामले में भी समान रूप से लागू होता है—यदि वह घर या बाहर मेहनत कर रही है, तो उसकी जरूरतों और सम्मान का ध्यान रखना भी अनिवार्य है। अंततः, घर की खुशहाली तभी संभव है जब पति-पत्नी दोनों एक-दूसरे की मेहनत और भावनाओं की कद्र करना सीखें।1
- मेरठ में ललिता कांड के दौरान आंदोलनकारियों पर लाठी-डंडे बरसाए जाने और पुलिस की गाड़ी में बैठकर कप्तान द्वारा आंदोलनकारियों को पीटने की घटना पर बहुजन मुक्ति पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने इसे अफसोसजनक करार देते हुए कहा कि जो लोग संवैधानिक पदों पर बैठकर जनता की सुरक्षा, सामाजिक न्याय और उनके हक की बात नहीं कर सकते, उन्हें इस्तीफा देकर कुर्सी खाली कर देनी चाहिए। प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि जनता के टैक्स से वेतन पाने वाले किसी भी प्रशासनिक अधिकारी को ऐसी हरकतें करने का कोई अधिकार नहीं है। आंदोलन के समर्थन में पार्टी ने হুঁकार भरते हुए कहा कि वे मनुस्मृति के आधार पर देश चलाने की कोशिश करने वालों को चुनौती देते हैं और उन्हें देश छोड़ने की बात कही। इसके साथ ही, मौजूदा शासन और प्रशासन में बैठे लोगों पर भ्रष्टाचार और घोटालों के आरोप लगाते हुए जनता को सावधान रहने की अपील की गई है। पार्टी ने नारा दिया है कि 'वोट हमारा राज तुम्हारा नहीं चलेगा' और जनता से आह्वान किया है कि अब वक्त आ गया है कि ऐसी सरकारों को बदल दिया जाए जो रोजी-रोटी देने में अक्षम हैं। प्रवक्ता ने यह भी कहा कि मूल निवासियों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले किसी भी अधिकारी को जनता के पैसे से तनख्वाह पाने का हक नहीं है।4
- उत्तर प्रदेश के मेरठ स्थित सिवाया टोल प्लाजा पर नगीना के सांसद चंद्रशेखर जी को रोक दिया गया। इस घटना के बाद, मेरठ प्रशासन ने ललिता गौतम के पीड़ित परिवार के साथ सांसद की वार्ता करवाई।1
- मेरठ में खुद को एडवोकेट बताने वाले एक व्यक्ति ने एसएसपी अविनाश पांडेय के सरकारी नंबर पर फोन कर उनके पीआरओ रमाकांत पचौरी को धमकी दी है। इस फोन कॉल के दौरान आरोपी ने पीआरओ से अभद्र भाषा का प्रयोग करते हुए उन्हें गाड़ी में अकेले मिलने की चुनौती दी। आरोपी ने धमकी भरे लहजे में कहा कि जिस तरह कप्तान साहब उस गाड़ी में चढ़े थे, उसी तरह एक बार मुझे भी अकेले में उनसे मिलवा दीजिए। फोन पर उसने पीआरओ को धमकाते हुए कहा कि फिर देखते हैं कि कौन गाड़ी से बाहर निकलता है। इस घटना ने पुलिस महकमे में हलचल पैदा कर दी है।1
- उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले में गहिरा के UPSIDA क्षेत्र में अवैध खनन का सिलसिला एक बार फिर शुरू हो गया है। आज दोपहर ग्रामीणों ने इस अवैध गतिविधि के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन करते हुए मौके से 5 जेसीबी और 10 डम्फरों को पकड़ा था। उस समय लेखपाल भी घटनास्थल पर मौजूद थे, लेकिन बदरका चौकी इंचार्ज पर गाड़ियों को वहां से भगाने का आरोप लगा है। स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए लोगों का कहना है कि एसडीएम सदर को इस पूरे मामले की सूचना दी गई, जिन्होंने केवल कार्रवाई का आश्वासन दिया, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। प्रशासन की इस चुप्पी और निष्क्रियता के कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की ईमानदार छवि धूमिल हो रही है। यह उन्नाव का तानाशाह प्रशासन ही है जो किसी भी अधिकारी द्वारा कोई कार्यवाही न करने के कारण अवैध खनन को बड़े पैमाने पर फलने-फूलने दे रहा है।1
- मेरठ में हाल ही में हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर सार्वजनिक मंचों और सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। इस घटना पर प्रतिक्रियाएं बंटी हुई हैं, जहाँ एक तरफ लोग पुलिस की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा जारी आधिकारिक स्पष्टीकरण पर सवाल उठा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ पुलिस का पक्ष है कि यह कार्रवाई कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से नियमानुसार की गई थी। लोकतंत्र के संदर्भ में नागरिकों को किसी भी सरकारी कार्रवाई पर अपनी राय रखने और सवाल उठाने का अधिकार है। हालांकि, इस स्थिति में किसी भी घटना का अंतिम निष्कर्ष केवल साक्ष्यों, तथ्यों और एक निष्पक्ष जांच के जरिए ही निकाला जाना चाहिए। यदि किसी अधिकारी या कर्मचारी के आचरण के प्रति कोई शिकायत है, तो उसे संबोधित करने के लिए संविधान और कानून में निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करना ही सही मार्ग है।1
- मेरठ के किठौर के गोविंदपुर-शकरपुर गांव में एक पेंटर ने अपनी पत्नी से मामूली विवाद का बदला लेने के लिए अपने 3 साल के मासूम बेटे 'लड्डू' को जहर देकर मार डाला और फिर खुद भी जहर खाकर जान दे दी। इस खौफनाक वारदात में पिता और पुत्र दोनों की मौत हो गई है। शराब की लत और गुस्से पर काबू न होना इस पूरे घटनाक्रम की मुख्य वजह बनकर सामने आया है। मामूली नोकझोंक के बाद उठाए गए इस खौफनाक कदम ने पूरे इलाके को गहरे सदमे में डाल दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है, लेकिन इस हादसे ने समाज के सामने यह गंभीर सवाल खड़ा कर दिया है कि शराब की लत और गुस्से पर काबू न होना आखिर हमें किस ओर ले जा रहा है।1