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ek chhoti Si majburi ek chhoti Si baat Hai ki Bala Devi urf gurmel Singh Bittu uske Mata pita ki death ho chuki hai lekin unke pass Rahane Ke liye Koi Ghar nahin Hai isiliye main aapko yah batana chahta Hun ki uska koi bhi masala. nahin kar raha hai vaise hi firti hai usko uska baccha bhi thoda dimag se HAL Tak se kharab hai usko bechari Ko Na Koi kuchh Karta uska vah bechari

3 hrs ago
user_Gurmeet singh
Gurmeet singh
Shahbad, Kurukshetra•
3 hrs ago
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ek chhoti Si majburi ek chhoti Si baat Hai ki Bala Devi urf gurmel Singh Bittu uske Mata pita ki death ho chuki hai lekin unke pass Rahane Ke liye Koi Ghar nahin Hai isiliye main aapko yah batana chahta Hun ki uska koi bhi masala. nahin kar raha hai vaise hi firti hai usko uska baccha bhi thoda dimag se HAL Tak se kharab hai usko bechari Ko Na Koi kuchh Karta uska vah bechari

  • user_Gurmeet singh
    Gurmeet singh
    Shahbad, Kurukshetra
    iski bahut tagdi majburi hai
    3 hrs ago
More news from Kurukshetra and nearby areas
  • मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" ​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" ​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? ​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: ​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? ​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। ​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? ​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? ​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? ​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
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    मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?"
​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?"
​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं?
​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल:
​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं?
​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं
लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था।
​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा?
​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा?
​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी
अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा?
​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट—
विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
    user_IndiaNews 9Live
    IndiaNews 9Live
    Media company Shahbad, Kurukshetra•
    20 hrs ago
  • Post by Narayan Verma
    1
    Post by Narayan Verma
    user_Narayan Verma
    Narayan Verma
    अंबाला, अंबाला, हरियाणा•
    48 min ago
  • गुरुग्राम में हरियाणा पत्रकार संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्री राजेश नागर जी ने मेवात के दिवंगत पत्रकार स्वर्गीय कौशल किशोर सिंगला जी की धर्मपत्नी श्रीमती सीमा सिंगला को ₹5,00,000 की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया। इस दौरान मंत्री जी ने पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए कैशलैस योजना लागू करवाने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। कार्यक्रम में संघ के प्रदेश अध्यक्ष के.बी. पंडित जी ने बताया कि हरियाणा पत्रकार संघ अब तक दिवंगत एवं असाध्य रोग से पीड़ित पत्रकार परिवारों को ₹2.40 करोड़ की सहायता प्रदान कर चुका है। साथ ही, वृद्ध पत्रकारों के लिए ₹15,000 मासिक पेंशन और ₹5 लाख तक की कैशलैस चिकित्सा बीमा योजना के प्रयास भी जारी हैं। स्वामी धर्मदेव जी ने दिवंगत पत्रकार की दोनों बेटियों को ₹1-1 लाख की सहायता दी, वहीं मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर मुकेश वशिष्ठ जी ने राज्य सरकार से ₹2.50 लाख दिलवाने का भरोसा देते हुए अपनी ओर से ₹50-50 हजार देने की घोषणा की। इस अवसर पर अनिल आर्य, धर्मपाल आर्य, नरेश गर्ग, मनु मैहता सहित अनेक पत्रकार साथी उपस्थित रहे। 🙏 समाज के प्रति पत्रकारों की सेवाओं को नमन
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    गुरुग्राम में हरियाणा पत्रकार संघ द्वारा आयोजित कार्यक्रम में हरियाणा के खाद्य एवं आपूर्ति मंत्री श्री राजेश नागर जी ने मेवात के दिवंगत पत्रकार स्वर्गीय कौशल किशोर सिंगला जी की धर्मपत्नी श्रीमती सीमा सिंगला को ₹5,00,000 की आर्थिक सहायता का चेक प्रदान किया।
इस दौरान मंत्री जी ने पत्रकारों के हितों की रक्षा के लिए कैशलैस योजना लागू करवाने हेतु पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया।
कार्यक्रम में संघ के प्रदेश अध्यक्ष के.बी. पंडित जी ने बताया कि हरियाणा पत्रकार संघ अब तक दिवंगत एवं असाध्य रोग से पीड़ित पत्रकार परिवारों को ₹2.40 करोड़ की सहायता प्रदान कर चुका है। साथ ही, वृद्ध पत्रकारों के लिए ₹15,000 मासिक पेंशन और ₹5 लाख तक की कैशलैस चिकित्सा बीमा योजना के प्रयास भी जारी हैं।
स्वामी धर्मदेव जी ने दिवंगत पत्रकार की दोनों बेटियों को ₹1-1 लाख की सहायता दी, वहीं मुख्यमंत्री के मीडिया कोऑर्डिनेटर मुकेश वशिष्ठ जी ने राज्य सरकार से ₹2.50 लाख दिलवाने का भरोसा देते हुए अपनी ओर से ₹50-50 हजार देने की घोषणा की।
इस अवसर पर अनिल आर्य, धर्मपाल आर्य, नरेश गर्ग, मनु मैहता सहित अनेक पत्रकार साथी उपस्थित रहे।
🙏 समाज के प्रति पत्रकारों की सेवाओं को नमन
    user_Gulshan Dhiman
    Gulshan Dhiman
    रादौर, यमुनानगर, हरियाणा•
    2 hrs ago
  • राधा कृष्ण
    2
    राधा कृष्ण
    user_Rajnath Singh
    Rajnath Singh
    Digital Marketing Specialist इंद्री, करनाल, हरियाणा•
    7 hrs ago
  • रायपुररानी स्थित माता बगलामुखी मंदिर में 24 अप्रैल दिन शुक्रवार को वार्षिक हवन यज्ञ एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर के बगलामुखी सिद्ध तांत्रिक पीठाध्यक्ष डॉ. रोहित ठाकुर ने बताया कि कोरोना काल के दौरान जब सभी धार्मिक स्थल बंद थे, उसी समय इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि आज यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
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    रायपुररानी स्थित माता बगलामुखी मंदिर में
24 अप्रैल दिन शुक्रवार को वार्षिक हवन यज्ञ एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। मंदिर के बगलामुखी सिद्ध तांत्रिक पीठाध्यक्ष डॉ. रोहित ठाकुर ने बताया कि कोरोना काल के दौरान जब सभी धार्मिक स्थल बंद थे, उसी समय इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू किया गया था। उन्होंने कहा कि आज यह मंदिर आस्था का प्रमुख केंद्र बन चुका है, जहां दिल्ली, पंजाब, हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु पहुंचकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
    user_PANCHKULA HEADLINES
    PANCHKULA HEADLINES
    बरवाला सेंट, पंचकूला, हरियाणा•
    3 hrs ago
  • प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आज देश की महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हैं। यह रोष प्रदर्शन महिलाओं की आवाज बुलंद करने का प्रतीक है। भारतीय जनता पार्टी सदैव महिला सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ी रही है और आगे भी महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
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    प्रदर्शन के माध्यम से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि महिलाओं के सम्मान और उनके अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। आज देश की महिलाएं जागरूक हैं और अपने अधिकारों के लिए मजबूती से खड़ी हैं।
यह रोष प्रदर्शन महिलाओं की आवाज बुलंद करने का प्रतीक है। भारतीय जनता पार्टी सदैव महिला सशक्तिकरण के पक्ष में खड़ी रही है और आगे भी महिलाओं को उनका हक दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष करती रहेगी।
    user_Kulwant Singh Reporter India T
    Kulwant Singh Reporter India T
    Local News Reporter जगाधरी, यमुनानगर, हरियाणा•
    21 hrs ago
  • कैलाश भाई कि मदद कपड़े कि फैक्ट्री है!, मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी के द्वारा
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    कैलाश भाई कि मदद कपड़े कि फैक्ट्री है!, मिस्टी हेल्पिंग फाउंडेशन के ट्रस्टी के द्वारा
    user_Misty Helping Foundation
    Misty Helping Foundation
    Voice of people Bilaspur, Yamunanagar•
    22 hrs ago
  • मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?" ​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?" ​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं? ​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल: ​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं? ​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था। ​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा? ​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा? ​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा? ​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट— विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
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    मीडिया के जमीर से जनता का सवाल: "हम किसके रक्षक और काहे के पत्रकार, जब अपनों की चोट पर ही हम लाचार?"
​कुरुक्षेत्र की चौपालों से गूंजा कड़वा सच— "जो पत्रकार अपनों के साथ नहीं खड़ा, वो जनता की लड़ाई क्या लड़ेगा?"
​कुरुक्षेत्र (India News 9 Live): आज कुरुक्षेत्र की जागरूक जनता ने लोकतंत्र के चौथे स्तंभ यानी मीडिया को वह आईना दिखाया है जिसमें चेहरा देखना शायद हर पत्रकार के लिए मुश्किल होगा। जनता ने किसी राजनेता से नहीं, बल्कि सीधा पत्रकारों की बिरादरी से पूछा है कि आप किसका प्रचार कर रहे हैं और किसकी ढाल बन रहे हैं?
​आईने के सामने खड़े मीडिया से जनता के सीधे सवाल:
​लाचार पत्रकार या सरकारी प्रचारक? जनता पूछ रही है कि जब सच दिखाने वाले एक पत्रकार के परिवार को निशाना बनाया जाता है, उसे डराया-धमकाया जाता है, तो बाकी पत्रकार चुप क्यों रहते हैं? क्या हम वाकई जनता की आवाज़ हैं या सिर्फ सत्ता के गुणगान का जरिया बन कर रह गए हैं?
​अपनों की बेरुखी और जनता का अविश्वास: ग्रामीणों का कहना है कि जब पत्रकार ही पत्रकार के अधिकार के लिए साथ खड़ा नहीं होता, तो आम आदमी किस पर भरोसा करे? " काहे की भ्रष्टाचार विरोधी सरकार और काहे के फिर पत्रकार, जब हम ही हैं
लाचार"—यह जुमला आज हर उस शख्स की ज़ुबान पर है जो मीडिया को उम्मीद की नज़रों से देखता था।
​भ्रष्टाचार पर मौन क्यों? फैमिली आईडी की गड़बड़ी से डेढ़ साल तक तड़पते गरीब और कटे हुए राशन कार्डों पर मीडिया का एक बड़ा हिस्सा खामोश क्यों है? क्या अधिकारियों के गैर-जिम्मेदार रवैये को उजागर करना अब पत्रकारों के एजेंडे में नहीं रहा?
​रक्षक या भक्षक की मंशा? जो लोग चौथे स्तंभ को टारगेट कर रहे हैं, वे हमारे बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेल रहे हैं। जनता पूछ रही है कि क्या मीडिया इन 'क्रिमिनल माइंडसेट' वाले लोगों के खिलाफ खड़ा होने का साहस दिखाएगा?
​निष्कर्ष: जनता की खरी-खरी
अब वक्त आ गया है कि मीडिया अपनी भूमिका को फिर से पहचाने। जनता का साफ संदेश है—वोट मांगने वाले चेहरे पुराने हो सकते हैं, लेकिन अगर उन्हें आइना दिखाने वाला पत्रकार ही डर गया या बिक गया, तो लोकतंत्र का भविष्य क्या होगा?
​मीडिया के आत्ममंथन की एक रिपोर्ट—
विशाल शर्मा (Freelancer Journalist Researcher) जनता की आवाज
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    20 hrs ago
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