शिकायत के एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं, पंचायत की कथित अनियमितताओं पर जांच का इंतजार पत्थलगांव। ग्राम पंचायत सुखरापारा में पंचायत राज अधिनियम एवं नियमों के उल्लंघन सहित विभिन्न कथित अनियमितताओं को लेकर उप सरपंच एवं पंचगण द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पत्थलगांव के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बावजूद एक माह बीत जाने के बाद भी मामले में कार्रवाई नहीं होने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी है। शिकायत में ग्राम सभा एवं मासिक बैठक नियमित रूप से आयोजित नहीं करने, बैठक के बिना फर्जी कार्यवाही दर्ज करने, प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों का प्रस्ताव पंचों की सहमति के बिना तैयार करने तथा पंचायत निधि के कथित रूप से नियम विरुद्ध व्यय किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत के बैंक खाते से उप सरपंच एवं पंचों की जानकारी अथवा सहमति के बिना राशि का आहरण किया जा रहा है। साथ ही पंचायत के आय-व्यय एवं संबंधित अभिलेख पंचों को उपलब्ध नहीं कराने की भी शिकायत की गई है। पंचायत कार्यों में सरपंच-पति के कथित हस्तक्षेप तथा पंचायत सचिव कार्यालय की सील निजी कब्जे में रखने जैसे आरोप भी आवेदन में लगाए गए हैं। शिकायत के साथ पंचायत के बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई तथा जांच में उन्हें भी शामिल किए जाने की मांग की थी। लेकिन शिकायत के एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने से अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पंचायत से जुड़ी इन गंभीर शिकायतों की जांच कब होगी? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की �
शिकायत के एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं, पंचायत की कथित अनियमितताओं पर जांच का इंतजार पत्थलगांव। ग्राम पंचायत सुखरापारा में पंचायत राज अधिनियम एवं नियमों के उल्लंघन सहित विभिन्न कथित अनियमितताओं को लेकर उप सरपंच एवं पंचगण द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पत्थलगांव के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बावजूद एक माह बीत जाने के बाद भी मामले में कार्रवाई नहीं होने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी है। शिकायत में ग्राम सभा एवं मासिक बैठक नियमित रूप से आयोजित नहीं करने, बैठक के बिना फर्जी कार्यवाही दर्ज करने, प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों का प्रस्ताव पंचों की सहमति के बिना तैयार करने तथा पंचायत निधि के कथित रूप से नियम विरुद्ध व्यय किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत के बैंक खाते से उप सरपंच एवं पंचों की जानकारी अथवा सहमति के बिना राशि का आहरण किया जा रहा है। साथ ही पंचायत के आय-व्यय एवं संबंधित अभिलेख पंचों को उपलब्ध नहीं कराने की भी शिकायत की गई है। पंचायत कार्यों में सरपंच-पति के कथित हस्तक्षेप तथा पंचायत सचिव कार्यालय की सील निजी कब्जे में रखने जैसे आरोप भी आवेदन में लगाए गए हैं। शिकायत के साथ पंचायत के बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई तथा जांच में उन्हें भी शामिल किए जाने की मांग की थी। लेकिन शिकायत के एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने से अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पंचायत से जुड़ी इन गंभीर शिकायतों की जांच कब होगी? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की �
- 'बैंकित' (Bankit) का 599 रुपये का "साइलेंट कट" धमाका: 'हमारा क्या उखाड़ लोगे?' वाला एटीट्यूड और 45 दिनों से लगातार सिर्फ 'झांसा'! बिना बताए अकाउंट से कट गए ₹599, सवाल पूछने पर अफसरों की फौज का 'अहंकार' और 'इग्नोर मोड' ऑन! जानिए कैसे छोटे दुकानदारों के पसीने की कमाई पर चल रहा है 'आश्वासन का खेल'। न्यूज़ डेस्क / विशेष रिपोर्ट: अगर आप अपनी दुकान पर ग्राहकों का पैसा निकालने या डिजिटल लेन-देन के लिए FINDI / BANKIT (बैंकित) ऐप का इस्तेमाल करते हैं, तो ज़रा अपने खाते के ट्रांजैक्शन संभालकर देख लीजिए! हो सकता है कि आपकी जेब से भी चुपके से "सब्सक्रिप्शन प्लान" के नाम पर डाका डाला जा चुका हो और आपको खबर तक न हो। ऐसा ही एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है जहाँ एक दुकानदार एजेंट के खाते से बिना किसी सहमति या जानकारी के सीधे ₹599 काट लिए गए (सेवा: Subscription Plan - 599 - M)। जब इस "साइलेंट कटौती" का पता चला, तो लगा कि कोई गलती से कटा होगा, लेकिन असली कहानी तो इसके बाद शुरू हुई! 🎭 'अधिकारियों की बारात' और 45 दिनों की 'आश्वासन एक्सप्रेस' जब दुकानदार ने अपने हक का पैसा वापस मांगा और पूछा कि “किसकी इजाजत से ये पैसे काटे गए?”, तो जवाब में कोई ठोस वजह नहीं बताई गई। बस इतना कहा गया—“एक बार कट गया है, आगे से नहीं कटेगा!” (मानो 599 रुपये कोई खैरात में बांटे जा रहे हों!) बात यहीं खत्म नहीं हुई। समाधान के नाम पर कस्टमर केयर और सेल्स टीम ने अधिकारियों की पूरी 'पदानुक्रम' (Hierarchy) की लिस्ट थमा दी: निचले स्तर पर: शोएब खान (Shoaib Khan) * उनके ऊपर: महफूज अली (Mahfuj Ali) और सबसे ऊपर: विजय श्रीवास्तव (Vijay Shrivastav) लेकिन नतीजा? ढाक के वही तीन पात! जब इन साहबानों से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो कुछ ने तो फरियाद सुनते ही फोन उठाना बंद कर दिया, तो कुछ के पास जवाब देने की फुरसत ही नहीं थी! 45 दिन बीत जाने के बाद भी हर बार सिर्फ एक ही घुट्टी पिलाई जा रही है—“पैसे वापस आ जाएंगे, प्रोसेस में है।” लेकिन वो 'जल्द' कब आएगा, इसकी कोई सीमा-रेखा नहीं है। 📱 स्क्रीनशॉट में खुला 'अहंकार' और लाचारी का सच! कंपनी के प्रतिनिधियों के रवैये की पोल उनके चैट और कॉल लॉग्स खुद खोल रहे हैं: "कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" (शोएब खान की वॉर्निंग): चैट में साफ़ देखा जा सकता है कि जब पीड़ित दुकानदार ने कानूनी रास्ता अपनाने या FIR की बात कही, तो शोएब खान (Shoaib Khan Bankit) की तरफ से जवाब आता है: > "परेशान मत होइए आप लोग, ये सब से कुछ नहीं होगा। आप ही सिर्फ परेशान होंगे, कंपनी को कोई फर्क नहीं पड़ेगा!" > इसके बाद आगे बड़े ही बेपरवाह लहजे में लिखा गया—"एक बार और अगर हो गया रिफंड तो ठीक, वरना आप लोग करना जो भी करना होगा!" > वाह! क्या ग्राहक सेवा है! यह बातचीत साफ़ दर्शाती है कि छोटे दुकानदारों की परेशानी पर कंपनी के नुमाइंदों को कितना 'फर्क' पड़ता है। > "I'll call you back later" का अटूट लूप: दुकानदार दिन भर फोन मिलाता रहता है और उधर से एक ऑटो-जनरेटेड या रूखा मैसेज आता है—"I'll call you back later." पीड़ित पूछ रहा है “क्या हुआ सर, 4 दिन हो गए?” लेकिन जवाब में फिर वही घिसा-पिटा मैसेज। कॉल लॉग्स बने 'नॉट कनेक्टेड': कॉल हिस्ट्री गवाह है कि लगातार कोशिशों के बाद भी फोन काट दिए जा रहे हैं या अनसुने किए जा रहे हैं। 💣 क्या यह सिर्फ ₹599 का मामला है? सोचने वाली बात यह है कि ₹599 की रकम एक छोटे दुकानदार के लिए दिन भर की मेहनत की कमाई हो सकती है। अगर ऐसी कटौती देश भर के हज़ारों दुकानदारों के खातों से 'बिना अनुमति' की जा रही है, तो यह आंकड़ा लाखों-करोड़ों का खेल बन जाता है! सवाल यह है कि: जब सब्सक्रिप्शन ग्राहक ने मांगा ही नहीं, तो पैसे काटने का अधिकार किसने दिया? दूसरा सवाल: 45 दिनों तक रिफंड अटकाना और 'कंपनी को फर्क नहीं पड़ता' जैसी धमकियां देना किस कंज्यूमर लॉ (Customer Rights) के तहत सही है? अब देखना यह होगा कि क्या BANKIT प्रबंधन अपने इन 'भगवान स्वरूप' रवैये वाले अधिकारियों पर कोई कार्रवाई करता है और पीड़ित का पैसा रिफंड करता है, या फिर पीड़ित दुकानदारों को मजबूरन कंज्यूमर फोरम (Consumer Court) और साइबर पुलिस का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा!4
- पशु जन्म नियंत्रण एवं श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम को लेकर उपायुक्त की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश एवं पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 के अनुरूप समन्वित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश गुमला। उपायुक्त दिलेश्वर महतो की अध्यक्षता में आज उनके कार्यालय कक्ष में पशु जन्म नियंत्रण, श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम, रेबीज नियंत्रण तथा पशु कल्याण से संबंधित विषयों की समीक्षा को लेकर विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में गुमला के पुलिस उपाधीक्षक, जिला पशुपालन पदाधिकारी, नगर परिषद, स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधि सहित संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे। बैठक में सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशों एवं पशु जन्म नियंत्रण नियमावली, 2023 के आलोक में जिले में पशु जन्म नियंत्रण कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन, आवारा कुत्तों की आबादी के नियंत्रण, नसबंदी एवं एंटी रेबीज टीकाकरण, डॉग बाइट की घटनाओं की रोकथाम, पशु क्रूरता पर नियंत्रण तथा पशु कल्याण से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों एवं संस्थाओं को आपसी समन्वय के साथ मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के अनुरूप कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि श्वान जनित घटनाओं की रोकथाम के साथ-साथ पशुओं के प्रति मानवीय एवं संवेदनशील व्यवहार सुनिश्चित करना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। पशुओं के साथ क्रूरता किए जाने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में नगर परिषद एवं संबंधित स्थानीय निकायों को जिले में सघन पशु जन्म नियंत्रण अभियान चलाने, चिन्हित क्षेत्रों एवं हॉटस्पॉट में आवारा कुत्तों को मानवीय तरीके से पकड़कर नसबंदी, कृमिनाशक उपचार एवं एंटी रेबीज टीकाकरण सुनिश्चित करने पर बल दिया गया। उपचार एवं टीकाकरण के बाद स्वस्थ कुत्तों को नियमानुसार उसी क्षेत्र में वापस छोड़ने तथा आक्रामक एवं बीमार कुत्तों के लिए निर्धारित व्यवस्था के अनुरूप शेल्टर होम में रखने की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। उपायुक्त ने आक्रामक आवारा कुत्तों के लिए शेल्टर होम की उपलब्धता एवं आवश्यकता का आकलन करते हुए भूमि, क्षमता, आधारभूत संरचना, उपकरण एवं मानव संसाधन से संबंधित आवश्यकताओं को उपलब्ध कराने हेतु आवश्यक कार्रवाई करने हेतु निर्देश दिया गया। साथ ही, जिले में वार्डवार आवारा कुत्तों के लिए निर्धारित फीडिंग जोन चिन्हित कर आवश्यक सूचना-पट्ट लगाने तथा नागरिकों एवं पशु प्रेमियों को निर्धारित स्थानों पर ही पशुओं को भोजन कराने के लिए जागरूक करने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को डॉग बाइट के मामलों में राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम के प्रावधानों के अनुरूप एंटी रेबीज वैक्सीन एवं आवश्यकतानुसार रेबीज इम्यूनोग्लोबुलिन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने तथा संबंधित स्वास्थ्यकर्मियों एवं चिकित्सकों को आवश्यक प्रोटोकॉल के संबंध में प्रशिक्षण देने का निर्देश दिया गया। डॉग बाइट से संबंधित मामलों का समुचित अभिलेखीकरण एवं डाटा रिपोर्टिंग करने पर भी विशेष जोर दिया गया। बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि डॉग बाइट की घटना होने पर नागरिकों को तत्काल प्राथमिक उपचार एवं स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेने के संबंध में जागरूक किया जाए। काटने वाले कुत्ते की, जहां संभव हो, निर्धारित अवधि तक निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा संबंधित मामले की सूचना स्थानीय निकाय एवं संबंधित विभाग को देने की व्यवस्था विकसित की जाए। पालतू पशुओं के संबंध में उपायुक्त ने अनिवार्य पंजीकरण एवं वार्षिक एंटी रेबीज टीकाकरण को लेकर विशेष जागरूकता अभियान चलाने का निर्देश दिया। पालतू कुत्तों के मालिकों को पशु नियंत्रण, टीकाकरण एवं सार्वजनिक सुरक्षा से संबंधित निर्धारित नियमों के पालन के लिए जागरूक करने को कहा गया। पशु क्रूरता से संबंधित मामलों की समीक्षा करते हुए पुलिस विभाग एवं संबंधित पदाधिकारियों को प्राप्त शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। बैठक में भारतीय न्याय संहिता सहित पशु क्रूरता से संबंधित लागू कानूनी प्रावधानों के अनुपालन तथा नियमों के उल्लंघन की स्थिति में आवश्यक कानूनी कार्रवाई पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को जिले में पशु जन्म नियंत्रण एवं रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम की प्रभावी निगरानी के लिए नोडल समन्वय एवं निगरानी व्यवस्था को सुदृढ़ करने का निर्देश दिया। साथ ही ABC केंद्रों एवं शेल्टर होम निर्माण हेतु निर्देश दिया गया। बैठक के दौरान अब तक किए गए कार्यों की समीक्षा करते हुए कार्यक्रम के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों के निराकरण पर भी चर्चा की गई। उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को आगामी माह के लिए पशु जन्म नियंत्रण अभियान के स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों की पहचान करने तथा सघन जनजागरूकता अभियान की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि पशु जन्म नियंत्रण, रेबीज की रोकथाम, नागरिकों की सुरक्षा और पशु कल्याण इन सभी पहलुओं को साथ लेकर समन्वित एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। संबंधित विभाग अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता एवं संवेदनशीलता के साथ निर्वहन करते हुए निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया एवं सक्षम न्यायालय के दिशा-निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करें।2
- बागबहार में 60 किलो गांजा जब्त, अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार बागबहार में 60 किलो गांजा जब्त, अंतर्राज्यीय तस्कर गिरफ्तार जशपुर पुलिस ने “ऑपरेशन आघात” के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए बागबहार के गांधी चौक में 60 किलो अवैध गांजा के साथ एक आरोपी को गिरफ्तार किया। ➡️ आरोपी विकास चौधरी (27), निवासी बिहार, वर्तमान निवास गाजियाबाद ➡️ उड़ीसा से उत्तर प्रदेश ले जाया जा रहा था गांजा ➡️ वैन्यू कार UP-91-U 6302 भी जब्त ➡️ गांजे की कीमत करीब ₹30 लाख ➡️ वाहन की कीमत करीब ₹10 लाख ➡️ कुल करीब ₹40 लाख की जप्ती मामले में NDPS एक्ट के तहत अपराध दर्ज कर आगे की जांच जारी है। #JashpurTimes #JashpurPolice #OperationAghaat #Bagbahar #CrimeNews #BreakingNews1
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- गांव में आया 20 हाथी का दल,जंगल या रस्ते में आने जाने वाले सतर्क रहें ग्राम पंचायत केरसई से सटे सिहारजौरी जंगल में 20 हाथी का दल आया है। कृपया जंगल या रस्ते में आने जाने वाले सतर्क रहें।1
- भारतपुर पंचायत में डस्टबिन खरीदी के नाम पर बड़ा घोटाला। ₹1.76 लाख खर्च का दावा, ग्रामीणों को अब तक एक भी डस्टबिन नहीं मिला पढ़िए सीतापुर सरपंच संघ की अध्यक्ष का महा घोटाला। टूल किट के नाम पर भी ₹1 लाख की राशि; स्वच्छता दीदियों के काम नहीं करने के दावे से व्यवस्था पर उठे सवाल सीतापुर। जनपद पंचायत सीतापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत भारतपुर में डस्टबिन खरीदी और स्वच्छता से जुड़ी सामग्री पर खर्च की गई राशि को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। उपलब्ध भुगतान विवरण के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में डस्टबिन खरीदी के नाम पर चार अलग-अलग भुगतान आदेशों के जरिए कुल ₹1,76,035 का भुगतान दर्शाया गया है। दूसरी ओर ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत क्षेत्र में आज तक एक भी डस्टबिन वितरित नहीं किया गया है। भारतपुर ग्राम पंचायत की जनसंख्या लगभग 1,545 बताई जा रही है, जबकि पंचायत क्षेत्र में करीब 520 राशन कार्ड होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में इतनी बड़ी राशि से खरीदे गए बताए जा रहे डस्टबिन की संख्या, उनकी कीमत, साइज और वर्तमान स्थिति को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। चार भुगतान आदेशों में ₹1.76 लाख उपलब्ध भुगतान विवरण के अनुसार— X VFC/2025-26/P/5 — 31 अगस्त 2025 — ₹26,315 X VFC/2025-26/P/6 — 31 अगस्त 2025 — ₹49,860 X VFC/2025-26/P/10 — 12 सितंबर 2025 — ₹49,860 X VFC/2025-26/P/12 — 26 मार्च 2026 — ₹50,000 इन चारों भुगतानों को जोड़ने पर कुल राशि ₹1,76,035 होती है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इन भुगतानों के बदले वास्तव में डस्टबिन खरीदे गए हैं तो डस्टबिन गए कहां? लगभग एक साल बाद भी ग्रामीणों को वितरण नहीं ग्रामीणों के अनुसार पंचायत में आज तक डस्टबिन का वितरण नहीं हुआ है। यदि सामग्री खरीदी गई है और पंचायत के पास उपलब्ध है तो पंचायत को यह बताना चाहिए कि डस्टबिन वर्तमान में किस स्थान पर रखे गए हैं, उनकी कुल संख्या कितनी है और उनका वितरण कब किया जाएगा। वहीं यह भी स्पष्ट होना जरूरी है कि एक डस्टबिन की खरीद दर कितनी थी और कुल कितने डस्टबिन खरीदे गए। क्या खरीदी के लिए कोटेशन, बिल-वाउचर, सप्लाई ऑर्डर, जीएसटी बिल और स्टॉक रजिस्टर में आवश्यक प्रविष्टियां की गई हैं? टूल किट के नाम पर भी ₹1 लाख का भुगतान? डस्टबिन खरीदी के अलावा पंचायत में टूल किट के नाम पर करीब ₹1 लाख की राशि खर्च किए जाने की बात भी सामने आ रही है। ग्रामीणों का दावा है कि पंचायत क्षेत्र में वर्तमान में स्वच्छता दीदियां काम करती हुई दिखाई नहीं देतीं। ऐसे में सवाल उठता है कि यदि टूल किट खरीदी गई है तो किसके लिए खरीदी गई, कितनी संख्या में खरीदी गई, किस दर पर खरीदी गई और उसका वितरण किन हितग्राहियों या स्वच्छता कर्मियों को किया गया? यदि टूल किट खरीदी गई है तो उसका भौतिक सत्यापन और स्टॉक रजिस्टर का मिलान भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा होना चाहिए। क्या कागजों तक सीमित रह गई खरीदी? डस्टबिन और टूल किट की खरीदी को लेकर ग्रामीणों की ओर से यह आशंका जताई जा रही है कि कहीं रिकॉर्ड में दर्शाई गई खरीदी और वास्तविक सामग्री की मात्रा में अंतर तो नहीं है। हालांकि यह फिलहाल आरोप और आशंका है। इसे सत्य मानने से पहले संबंधित दस्तावेजों और सामग्री का भौतिक सत्यापन आवश्यक है। जांच में यह देखा जाना चाहिए कि भुगतान की गई पूरी राशि के अनुरूप सामग्री वास्तव में पंचायत को मिली या नहीं। सरपंच संघ अध्यक्ष की पंचायत में पारदर्शिता पर सवाल ग्राम पंचायत भारतपुर की सरपंच दसनी बाई के संबंध में यह भी उल्लेखनीय है कि उन्हें सरपंच संघ की अध्यक्ष बताया जा रहा है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में होने वाले विकास और खरीदी कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही का उदाहरण प्रस्तुत किया जाना चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि डस्टबिन और टूल किट खरीदी की स्वतंत्र जांच कराई जाए तथा खरीदी से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। जांच में सामने आ सकती है वास्तविक तस्वीर मामले की जांच के दौरान बिल-वाउचर, जीएसटी चालान, कोटेशन, स्वीकृति आदेश, भुगतान आदेश, स्टॉक रजिस्टर, सप्लाई रजिस्टर और मौके पर उपलब्ध सामग्री का मिलान किया जाए तो वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। जांच से यह भी पता चल सकेगा कि ₹1,76,035 के डस्टबिन और करीब ₹1 लाख की टूल किट वास्तव में खरीदी गई है या नहीं, खरीदी गई है तो कितनी मात्रा में और वर्तमान में वह सामग्री कहां मौजूद है। फिलहाल ₹1.76 लाख की डस्टबिन खरीदी और करीब ₹1 लाख की टूल किट खरीदी को लेकर उठे सवालों का जवाब पंचायत प्रशासन को दस्तावेजों के साथ देना चाहिए। वित्तीय अनियमितता या गबन का निष्कर्ष जांच के बाद ही निकाला जा सकता है। इस संबंध में सरपंच के गोलमोल जवाब है, जबकि सचिव और संबंधित आपूर्तिकर्ताओं का पक्ष सामने नहीं आया है।1
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- शिकायत के एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं, पंचायत की कथित अनियमितताओं पर जांच का इंतजार पत्थलगांव। ग्राम पंचायत सुखरापारा में पंचायत राज अधिनियम एवं नियमों के उल्लंघन सहित विभिन्न कथित अनियमितताओं को लेकर उप सरपंच एवं पंचगण द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), पत्थलगांव के समक्ष शिकायत प्रस्तुत किए जाने के बावजूद एक माह बीत जाने के बाद भी मामले में कार्रवाई नहीं होने से शिकायतकर्ताओं में नाराजगी है। शिकायत में ग्राम सभा एवं मासिक बैठक नियमित रूप से आयोजित नहीं करने, बैठक के बिना फर्जी कार्यवाही दर्ज करने, प्रधानमंत्री आवास योजना के पात्र एवं अपात्र हितग्राहियों का प्रस्ताव पंचों की सहमति के बिना तैयार करने तथा पंचायत निधि के कथित रूप से नियम विरुद्ध व्यय किए जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि पंचायत के बैंक खाते से उप सरपंच एवं पंचों की जानकारी अथवा सहमति के बिना राशि का आहरण किया जा रहा है। साथ ही पंचायत के आय-व्यय एवं संबंधित अभिलेख पंचों को उपलब्ध नहीं कराने की भी शिकायत की गई है। पंचायत कार्यों में सरपंच-पति के कथित हस्तक्षेप तथा पंचायत सचिव कार्यालय की सील निजी कब्जे में रखने जैसे आरोप भी आवेदन में लगाए गए हैं। शिकायत के साथ पंचायत के बैंक खातों से संबंधित दस्तावेज भी संलग्न किए गए हैं। शिकायतकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई तथा जांच में उन्हें भी शामिल किए जाने की मांग की थी। लेकिन शिकायत के एक माह बाद भी कार्रवाई नहीं होने से अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर पंचायत से जुड़ी इन गंभीर शिकायतों की जांच कब होगी? शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आरोप निराधार हैं तो जांच के माध्यम से स्थिति स्पष्ट की जाए और यदि अनियमितताएं हुई हैं तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की �1