शिशु मंदिर में माता लिंगेश्वरी शिक्षण समिति का पुनर्गठन, प्रवीर सिंह बदेशा बने सचिव शिशु मंदिर में माता लिंगेश्वरी शिक्षण समिति का पुनर्गठन, प्रवीर सिंह बदेशा बने सचिव फरसगांव :- स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में सोमवार, 30 मार्च को माता लिंगेश्वरी शिक्षण समिति की कार्यकारिणी का पुनर्गठन संपन्न हुआ। इस दौरान कांकेर से आए चुनाव अधिकारी भरत मटियारा की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कराई गई। बैठक की शुरुआत समिति के सदस्यों के चयन से हुई। नियमानुसार निष्क्रिय पुराने सदस्यों को प्रस्ताव पारित कर कार्यकारिणी से अलग किया गया। इस अवसर पर आजीवन सदस्य, स्थायी सदस्य, साधारण सदस्य एवं मनोनीत सदस्य उपस्थित रहे। चुनाव प्रक्रिया के दौरान सर्वसम्मति से प्रवीर सिंह बदेशा को व्यवस्थापक (सचिव) चुना गया। वहीं सह-सचिव के रूप में भास्कर सिंह वर्मा, अध्यक्ष पद पर दीपेंद्र कुमार मसीह, उपाध्यक्ष के रूप में उत्तम कुमार घोष तथा कोषाध्यक्ष के रूप में उग्रेशचंद्र मरकाम को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा सदस्य के रूप में श्रीमती शशिकला सोनी, मार्त्तण्ड प्रताप सिंह, अनिल बाजपेई, प्रवीण पांडे और कमलोचन नेताम को कार्यकारिणी में शामिल किया गया। चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव अधिकारी भरत मटियारा ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की। कार्यक्रम में विभाग समन्वयक संगम लाल पांडे, विद्यालय के आचार्य बसंत कौशिक, कीर्तन यादव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
शिशु मंदिर में माता लिंगेश्वरी शिक्षण समिति का पुनर्गठन, प्रवीर सिंह बदेशा बने सचिव शिशु मंदिर में माता लिंगेश्वरी शिक्षण समिति का पुनर्गठन, प्रवीर सिंह बदेशा बने सचिव फरसगांव :- स्थानीय सरस्वती शिशु मंदिर में सोमवार, 30 मार्च को माता लिंगेश्वरी शिक्षण समिति की कार्यकारिणी का पुनर्गठन संपन्न हुआ। इस दौरान कांकेर से आए चुनाव अधिकारी भरत मटियारा की मौजूदगी में पूरी प्रक्रिया शांतिपूर्ण ढंग से पूरी कराई गई। बैठक की शुरुआत समिति के
सदस्यों के चयन से हुई। नियमानुसार निष्क्रिय पुराने सदस्यों को प्रस्ताव पारित कर कार्यकारिणी से अलग किया गया। इस अवसर पर आजीवन सदस्य, स्थायी सदस्य, साधारण सदस्य एवं मनोनीत सदस्य उपस्थित रहे। चुनाव प्रक्रिया के दौरान सर्वसम्मति से प्रवीर सिंह बदेशा को व्यवस्थापक (सचिव) चुना गया। वहीं सह-सचिव के रूप में भास्कर सिंह वर्मा, अध्यक्ष पद पर दीपेंद्र कुमार मसीह, उपाध्यक्ष के रूप में उत्तम कुमार घोष तथा कोषाध्यक्ष के रूप में
उग्रेशचंद्र मरकाम को जिम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा सदस्य के रूप में श्रीमती शशिकला सोनी, मार्त्तण्ड प्रताप सिंह, अनिल बाजपेई, प्रवीण पांडे और कमलोचन नेताम को कार्यकारिणी में शामिल किया गया। चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव अधिकारी भरत मटियारा ने नवनिर्वाचित पदाधिकारियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल कार्यकाल की कामना की। कार्यक्रम में विभाग समन्वयक संगम लाल पांडे, विद्यालय के आचार्य बसंत कौशिक, कीर्तन यादव सहित अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
- फरसगांव के साप्ताहिक बाजार ने चलती ट्रक से गिरी धान की बोरियां, रोड में गिरे धान के लिए मची लूट से लगा जाम कोंडागांव :- जिले के फरसगांव में सोमवार के साप्ताहिक बाजार के दिन फरसगांव-रांधना बाजार रोड में सोमवार को उस समय अफरा-तफरी का माहौल बन गया, जब धान से भरी एक ट्रक से अचानक 4-5 बोरी धान सड़क पर गिर गई। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों की भीड़ जमा हो गई और गिरे हुए धान को उठाने की होड़ मच गई।प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, धान गिरते ही लोग बाल्टी, बोरी और अन्य बर्तनों के साथ धान बटोरने में जुट गए। देखते ही देखते सड़क पर भारी भीड़ लग गई, जिससे करीब 5 बजे यातायात बाधित हो गया और जाम की स्थिति बन गई। सूचना मिलते ही फरसगांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझाइश देकर सड़क खाली करवाई। पुलिस की मशक्कत के बाद जाम खुलवाया गया और यातायात सामान्य हो सका। इस घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है, लेकिन कुछ समय के लिए बाजार क्षेत्र में अव्यवस्था का माहौल बना रहा।2
- भानपुरी भीषण सड़क हादसा में एक व्यक्ति की मौत 3 घायल, तेज रफ्तार ट्रक कहर .बस्तर जिले के भानपुरी राष्ट्रीय राजमार्ग 30 मुख्यचौक में सोमवार को एक जबर्दस्त सड़क हादसा हो गया। तेज रफ्तार ट्रक एक महिला को बचाने के प्रयास में अनियंत्रित होकर सड़क किनारे लगी फल दुकान में जा घुसा। हादसा इतना अचानक हुआ कि दुकान में मौजूद कई लोग इसकी चपेट में आ गए। इस दुर्घटना में कई लोग घायल हो गए हैं, वहीं एक व्यक्ति की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही भानपुरी पुलिस मौके पर पहुंच गई और घायलों को तत्काल इलाज के लिए भानपुरी सिविल अस्पताल भेजा गया। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।3
- नारायणपुर में विकास को नई रफ्तार मिलती नजर आ रही है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग-130D के तहत शहर के महत्वपूर्ण मार्ग के सुदृढ़ीकरण के लिए 11.31 करोड़ रुपये की बड़ी स्वीकृति दी है, जिसे क्षेत्र के लिए एक अहम उपलब्धि माना जा रहा है। नारायणपुर जिले में आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्ग-130D, यानी कोंडागांव–नारायणपुर–कुतुल मार्ग के अंतर्गत गढ़बेंगाल चौक से मानसरोवर बखरूपारा तक लगभग 2 किलोमीटर सड़क के सुदृढ़ीकरण के लिए 11.31 करोड़ रुपये की प्रशासनिक, तकनीकी और वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। यह स्वीकृति वार्षिक योजना 2025-26 के अंतर्गत किलोमीटर 45.200 से 47.200 तक सड़क के एकमुश्त सुधार कार्य के लिए दी गई है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के अनुसार इस परियोजना में सड़क को आधुनिक तकनीकी मानकों के अनुरूप मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित बनाया जाएगा, जिससे शहर के भीतर यातायात व्यवस्था अधिक सुगम और व्यवस्थित हो सकेगी। इस महत्वपूर्ण स्वीकृति के पीछे नारायणपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं छत्तीसगढ़ सरकार में कैबिनेट मंत्री केदार कश्यप की सक्रिय पहल को प्रमुख माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि 07 जनवरी 2026 को उन्होंने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात कर इस मार्ग की जर्जर स्थिति से अवगत कराया था और शीघ्र सुदृढ़ीकरण की मांग की थी। उनके प्रयासों का ही परिणाम है कि इस परियोजना को अब स्वीकृति मिल गई है। देश में आधारभूत ढांचे के विकास को नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई गति मिली है, वहीं छत्तीसगढ़ में विष्णुदेव साय के नेतृत्व में विशेषकर दूरस्थ और आदिवासी अंचलों के विकास को प्राथमिकता दी जा रही है। इसी समन्वित प्रयास का असर अब नारायणपुर जैसे क्षेत्रों में भी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। इस संबंध में मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि डबल इंजन सरकार के संयुक्त प्रयासों से नारायणपुर सहित पूरे बस्तर क्षेत्र में विकास कार्यों को अभूतपूर्व गति मिली है। उन्होंने बताया कि इस सड़क के सुदृढ़ीकरण से न केवल शहर की यातायात व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि कोंडागांव–नारायणपुर–कुतुल मार्ग से आवागमन करने वाले हजारों लोगों को बड़ी राहत मिलेगी। निर्धारित योजना के अनुसार इस परियोजना का प्रारंभिक कार्य वर्ष 2025-26 में शुरू किया जाएगा, जबकि 2026-27 तक इसे पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। सड़क के बेहतर होने से क्षेत्र में व्यापार, आवागमन, पर्यटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद है। नारायणपुर में स्वीकृत यह सड़क परियोजना क्षेत्र के विकास में मील का पत्थर साबित हो सकती है। बेहतर सड़क सुविधा से न केवल लोगों का आवागमन आसान होगा, बल्कि पूरे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और विकास को भी मजबूती मिलेगी। क्षेत्रवासियों ने इस स्वीकृति पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए केंद्र और राज्य सरकार के प्रति आभार जताया है।1
- जगदलपुर नगर निगम कार्यालय में नगर निगम का आम बजट महापौर संजय पांडे ने किया पेश1
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- बलरामपुर। कलेक्टर राजेंद्र कटारा की अध्यक्षता में संयुक्त जिला कार्यालय के सभाकक्ष में समय-सीमा की बैठक आयोजित हुई। बैठक में कलेक्टर ने प्रधानमंत्री आवास, मनरेगा, राजस्व प्रकरण, आयुष्मान कार्ड, स्वास्थ्य और पेयजल की उपलब्धता सहित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। कलेक्टर श्री राजेंद्र कटारा ने राजस्व प्रकरणों की समीक्षा करते हुए अविवादित नामांतरण, सीमांकन, बंटवारा सहित अन्य राजस्व प्रकरणों का त्वरित एवं प्राथमिकता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए। उन्होंने आम नागरिकों से जुड़े राजस्व प्रकरणों तथा हाईकोर्ट में लंबित प्रकरणों का भी शीघ्र निराकरण करने को कहा। साथ ही कलेक्टर ने एग्री स्टेक पोर्टल में जिले के सभी पात्र किसानों का शत-प्रतिशत पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि शासन की योजनाओं का लाभ अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सके। प्रधानमंत्री आवास योजना एवं पीएम जनमन आवासों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने लक्ष्य के अनुरूप प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वीकृत, पूर्ण एवं अपूर्ण आवासों की विस्तृत जानकारी ली तथा लंबित आवासों को प्राथमिकता से पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र हितग्राहियों को समय पर लाभ मिल सके। उन्होंने पीएम जनमन के अंतर्गत स्वीकृत गतिविधियों की भी जानकारी लेकर कार्य में प्रगति लाने के निर्देश दिए। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के अंतर्गत पीएम जनमन मोबाइल मेडिकल यूनिट के संचालन एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने आयुष्मान भारत योजना एवं वय वंदन योजना के अंतर्गत कार्ड निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए शेष हितग्राहियों के कार्ड शीघ्र बनाने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने टीबी मुक्त भारत अभियान की प्रगति की जानकारी लेते हुए अधिक से अधिक स्क्रीनिंग करने के निर्देश दिए। कलेक्टर श्री कटारा ने गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल संबंधी समस्याओं का चिन्हांकन कर तत्काल समाधान करने के निर्देश दिए, ताकि ग्रीष्मकाल में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और सुचारू रूप से पेयजल उपलब्ध हो सके। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को पेयजल आपूर्ति पर सतत निगरानी बनाए रखने के निर्देश भी दिए। आगामी होने वाले जनगणना के संबंध में कलेक्टर श्री कटारा ने जिला सांख्यिकी अधिकारी से तैयारियों की जानकारी लेते हुए नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्रीमती नयनतारा सिंह तोमर, अपर कलेक्टर श्री आर.एस. लाल, श्री अभिषेक गुप्ता सहित विभागीय अधिकारीगण उपस्थित रहे।1
- छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक पर राज्यपाल को ज्ञापन, पुनर्विचार की मांग बलरामपुर, बलरामपुर जिले में भारत मुक्ति मोर्चा ने छत्तीसगढ़ विधानसभा द्वारा पारित “छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026” पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए राज्यपाल को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में राज्यपाल से विधेयक को सहमति न देने तथा पुनर्विचार के लिए विधानसभा को वापस भेजने की मांग की गई है। ज्ञापन में कहा गया है कि छत्तीसगढ़ में पहले से ही मध्य प्रदेश धर्म स्वातंत्र्य अधिनियम, 1968 में लागू है, जिसमें छल, बल या प्रलोभन से धर्मांतरण रोकने का प्रावधान मौजूद है। ऐसे में नए कानून की आवश्यकता पर प्रश्न उठाया गया है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि वर्तमान कानून का कई मामलों में दुरुपयोग हुआ है, जिससे धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध निराधार एफआईआर, गिरफ्तारी, सामाजिक बहिष्कार और उत्पीड़न की घटनाएं सामने आई हैं। ज्ञापन के अनुसार, प्रस्तावित नए विधेयक में सामूहिक धर्मांतरण पर आजीवन कारावास, नाबालिग, महिला, अनुसूचित जाति-जनजाति एवं ओबीसी वर्ग से जुड़े मामलों में 10 से 20 वर्ष की सजा, 10 से 25 लाख रुपये तक जुर्माना तथा अपराध को गैर-जमानती बनाए जाने जैसे कठोर प्रावधान शामिल हैं। साथ ही सोशल मीडिया और डिजिटल माध्यमों को भी कानून के दायरे में शामिल किया गया है। ज्ञापन में कहा गया है कि इससे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की शक्तियां अत्यधिक बढ़ जाएंगी, जिससे दुरुपयोग की आशंका बढ़ सकती है। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि विधेयक में झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ दंड का कोई प्रावधान नहीं है, जिससे कानून के दुरुपयोग की संभावना और बढ़ जाती है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि यह विधेयक संविधान के अनुच्छेद 14, 19, 21 और 25 में प्रदत्त मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करता प्रतीत होता है, क्योंकि धर्म परिवर्तन व्यक्ति की अंतःकरण की स्वतंत्रता का हिस्सा है। ज्ञापन में यह भी दावा किया गया है कि वर्तमान कानून के तहत अब तक किसी भी मामले में “बल, छल या प्रलोभन” से धर्मांतरण सिद्ध नहीं हुआ है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कानून का उपयोग न्याय से अधिक अन्य उद्देश्यों के लिए किया जा रहा है। ज्ञापन में ‘प्रलोभन’ जैसे शब्दों की अस्पष्ट परिभाषा पर भी आपत्ति जताई गई है। ज्ञापन के माध्यम से राज्यपाल से मांग की गई है कि विधेयक को पुनर्विचार के लिए विधानसभा को लौटाया जाए, वर्तमान और प्रस्तावित कानून की व्यापक समीक्षा कराई जाए, जिसमें सभी धर्मों के प्रतिनिधि, नागरिक समाज, मानवाधिकार संगठन और कानून विशेषज्ञ शामिल हों। साथ ही राज्य में धार्मिक अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं की निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की गई है। ज्ञापन के अंत में कहा गया है कि यदि इस मामले में उचित समाधान नहीं निकला तो जनहित याचिका के माध्यम से उच्चतम न्यायालय में न्यायिक हस्तक्षेप की मांग की जाएगी तथा राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर भी इस मुद्दे को उठाया जाएगा। ज्ञापन में यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी संगठन शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी बात रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नई दिल्ली धरमू एक्का ने इस काला कानून के बारे में विस्तृत रूप से लोगों को समझाएं, भारत मुक्ति मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक अमिन साय एक्का, राष्ट्रीय आदिवासी एकता परिषद बलरामपुर जिला संयोजक अनिल खलखो, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक घूरन यादव, राष्ट्रीय क्रिश्चियन मोर्चा बलरामपुर जिला संयोजक रंजीत बड़ा, मिखाई एक्का इस काला कानून बिल का जोरदार विरोध किया, सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष बसंत कुजूर ने समर्थन दिया साथ बलरामपुर जिले से भारी संख्या में भाग लिया इस कार्य क्रमसंपन्न किया गया।4
- नारायणपुर में कृषि को रसायन मुक्त और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा जैविक नियंत्रण विषय पर कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान किसानों को मित्र कीटों के माध्यम से फसल सुरक्षा की आधुनिक तकनीकों की जानकारी दी गई। नारायणपुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में “आदिवासी उप परियोजना (Tribal Sub Plan)” के अंतर्गत अखिल भारतीय जैविक नियंत्रण अनुसंधान परियोजना के तहत 28 मार्च 2026 को जैविक नियंत्रण पर एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। यह कार्यक्रम केंद्र के प्रमुख डॉ. दिव्येंदु दास के कुशल मार्गदर्शन और पर्यवेक्षण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. योगेश मेश्राम, मुख्य अन्वेषक (AICRP on Biological Control) ने किसानों को जैविक कीट नियंत्रण की अवधारणा और इसके महत्व के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी। उन्होंने बताया कि मित्र कीट (Beneficial Insects) फसलों के लिए हानिकारक कीटों को नियंत्रित कर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखते हैं। डॉ. मेश्राम ने किसानों को तना छेदक जैसे हानिकारक कीटों के नियंत्रण के लिए ट्राइकोग्रामा प्रजाति के अंड परजीवी के उपयोग की जानकारी दी। इसके साथ ही इल्ली अवस्था के नियंत्रण हेतु रेडूविड बग (मित्र परभक्षी कीट) के प्रयोग की सलाह दी गई। उन्होंने बताया कि बैसिलस थुरिंजिएन्सिस (BT) का उपयोग भी फसलों में हानिकारक कीटों के प्रभावी नियंत्रण के लिए अत्यंत उपयोगी है। रस चूसने वाले कीटों के नियंत्रण के लिए मेटाराइजियम एनिसोप्ली के प्रयोग की सलाह दी गई, वहीं खेतों में पीला चिपचिपा प्रपंच (Yellow Sticky Trap) लगाने से भी कीट नियंत्रण में मदद मिलती है। गाजर घास जैसी खरपतवार के नियंत्रण के लिए मैक्सिकन बीटल जैसे मित्र जीवों के उपयोग के बारे में भी किसानों को जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि जैविक कीट नियंत्रण न केवल फसलों को सुरक्षित रखता है, बल्कि पर्यावरण को भी प्रदूषण मुक्त बनाए रखता है। इससे मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है और मानव स्वास्थ्य पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ता। कार्यक्रम में कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. हरेंद्र टोंडे, डॉ. ललित वर्मा, डॉ. आलिया अफरोज एवं डॉ. अंकिता सिंह ने भी किसानों को जैविक खेती और जैविक कीट नियंत्रण के लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान केंद्र के अन्य कर्मचारी भी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के अंत में किसानों को जैविक कीट नियंत्रण के लिए मित्र जीवों का वितरण किया गया, ताकि वे इन तकनीकों को अपने खेतों में अपनाकर बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें। यह प्रशिक्षण कार्यक्रम किसानों के लिए अत्यंत उपयोगी साबित हुआ। इससे उन्हें रसायन मुक्त खेती अपनाने और जैविक तरीकों से फसल सुरक्षा करने की प्रेरणा मिली। कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक होगा, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा।1