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छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट से जुड़े 400 से अधिक भू-विस्थापित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले 13 वर्षों से पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत मिलने वाले लाभ नहीं मिले हैं। इस मामले में, प्रभावित परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी पात्र भू-विस्थापित परिवारों को न तो नियमानुसार भत्ता दिया गया और न ही पुनर्वास नीति के अन्य लाभ उपलब्ध कराए गए। यह विवाद सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित उस पावर प्लांट से संबंधित है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था और जिसका अधिग्रहण वेदांता समूह ने वर्ष 2022 में किया। प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिससे 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। भू-विस्थापितों का कहना है कि छत्तीसगढ़ पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत उन्हें रोजगार या निर्धारित भत्ता मिलना चाहिए था। उनके अनुसार, प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ, 2016 में बंद हो गया और वर्ष 2025 में दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक प्रभावित परिवारों को न तो रोजगार मिला और न ही भत्ते का भुगतान किया गया। प्रभावित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों ने इस मुद्दे को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में उठाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई कर पात्र परिवारों को राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद, जिला प्रशासन द्वारा गठित एक समिति ने भी प्लांट प्रबंधन को पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश जारी किए थे। याचिका में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और करीब दो माह पहले सक्ती कलेक्टर के निर्देश के बाद भी प्रभावित परिवारों को आज तक कोई राहत नहीं मिली है। इसी आधार पर अब यह अवमानना याचिका दायर की गई है। यह मामला केवल एक औद्योगिक परियोजना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिसके अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनने की संभावना है। इस मामले में अब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

4 hrs ago
user_नरेश शर्मा जिला रायगढ़
नरेश शर्मा जिला रायगढ़
रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
4 hrs ago

छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट से जुड़े 400 से अधिक भू-विस्थापित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले 13 वर्षों से पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत मिलने वाले लाभ नहीं मिले हैं। इस मामले में, प्रभावित परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी पात्र भू-विस्थापित परिवारों को न तो नियमानुसार भत्ता दिया गया और न ही पुनर्वास नीति के अन्य लाभ उपलब्ध कराए गए। यह विवाद सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित उस पावर प्लांट से संबंधित है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था और जिसका अधिग्रहण वेदांता समूह ने वर्ष 2022 में किया। प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिससे 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। भू-विस्थापितों का कहना है कि छत्तीसगढ़ पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत उन्हें रोजगार या निर्धारित भत्ता मिलना चाहिए था। उनके अनुसार, प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ, 2016 में बंद हो गया और वर्ष 2025 में दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक प्रभावित परिवारों को न तो रोजगार मिला और न ही भत्ते का भुगतान किया गया। प्रभावित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों ने इस मुद्दे को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में उठाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई कर पात्र परिवारों को राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद, जिला प्रशासन द्वारा गठित एक समिति ने भी प्लांट प्रबंधन को पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश जारी किए थे। याचिका में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और करीब दो माह पहले सक्ती कलेक्टर के निर्देश के बाद भी प्रभावित परिवारों को आज तक कोई राहत नहीं मिली है। इसी आधार पर अब यह अवमानना याचिका दायर की गई है। यह मामला केवल एक औद्योगिक परियोजना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिसके अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनने की संभावना है। इस मामले में अब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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  • बारिश के मौसम में फुलवारी डीपा का संपर्क पूरी तरह कट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या पुल सड़क का निर्माण न होने के कारण लगातार बनी हुई है, जिससे लोगों की परेशानी में लगातार वृद्धि हो रही है।
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    बारिश के मौसम में फुलवारी डीपा का संपर्क पूरी तरह कट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या पुल सड़क का निर्माण न होने के कारण लगातार बनी हुई है, जिससे लोगों की परेशानी में लगातार वृद्धि हो रही है।
    user_Raigarh Chhattisgarh
    Raigarh Chhattisgarh
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    2 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट से जुड़े 400 से अधिक भू-विस्थापित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले 13 वर्षों से पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत मिलने वाले लाभ नहीं मिले हैं। इस मामले में, प्रभावित परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी पात्र भू-विस्थापित परिवारों को न तो नियमानुसार भत्ता दिया गया और न ही पुनर्वास नीति के अन्य लाभ उपलब्ध कराए गए। यह विवाद सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित उस पावर प्लांट से संबंधित है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था और जिसका अधिग्रहण वेदांता समूह ने वर्ष 2022 में किया। प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिससे 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। भू-विस्थापितों का कहना है कि छत्तीसगढ़ पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत उन्हें रोजगार या निर्धारित भत्ता मिलना चाहिए था। उनके अनुसार, प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ, 2016 में बंद हो गया और वर्ष 2025 में दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक प्रभावित परिवारों को न तो रोजगार मिला और न ही भत्ते का भुगतान किया गया। प्रभावित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों ने इस मुद्दे को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में उठाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई कर पात्र परिवारों को राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद, जिला प्रशासन द्वारा गठित एक समिति ने भी प्लांट प्रबंधन को पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश जारी किए थे। याचिका में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और करीब दो माह पहले सक्ती कलेक्टर के निर्देश के बाद भी प्रभावित परिवारों को आज तक कोई राहत नहीं मिली है। इसी आधार पर अब यह अवमानना याचिका दायर की गई है। यह मामला केवल एक औद्योगिक परियोजना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिसके अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनने की संभावना है। इस मामले में अब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
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    छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट से जुड़े 400 से अधिक भू-विस्थापित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले 13 वर्षों से पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत मिलने वाले लाभ नहीं मिले हैं। इस मामले में, प्रभावित परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी पात्र भू-विस्थापित परिवारों को न तो नियमानुसार भत्ता दिया गया और न ही पुनर्वास नीति के अन्य लाभ उपलब्ध कराए गए।

यह विवाद सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित उस पावर प्लांट से संबंधित है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था और जिसका अधिग्रहण वेदांता समूह ने वर्ष 2022 में किया। प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिससे 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। भू-विस्थापितों का कहना है कि छत्तीसगढ़ पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत उन्हें रोजगार या निर्धारित भत्ता मिलना चाहिए था। उनके अनुसार, प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ, 2016 में बंद हो गया और वर्ष 2025 में दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक प्रभावित परिवारों को न तो रोजगार मिला और न ही भत्ते का भुगतान किया गया।

प्रभावित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों ने इस मुद्दे को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में उठाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई कर पात्र परिवारों को राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद, जिला प्रशासन द्वारा गठित एक समिति ने भी प्लांट प्रबंधन को पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश जारी किए थे। याचिका में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और करीब दो माह पहले सक्ती कलेक्टर के निर्देश के बाद भी प्रभावित परिवारों को आज तक कोई राहत नहीं मिली है। इसी आधार पर अब यह अवमानना याचिका दायर की गई है।

यह मामला केवल एक औद्योगिक परियोजना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिसके अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनने की संभावना है। इस मामले में अब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।
    user_नरेश शर्मा जिला रायगढ़
    नरेश शर्मा जिला रायगढ़
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    4 hrs ago
  • छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की सेमरा शाखा को अब एक नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिसका नवीन परिसर सोमवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद कुमार अरोड़ा, कोरबा के क्षेत्रीय प्रबंधक नितिन चौधरी, शाखा प्रबंधक सुरजीत सिंह डनसेना, प्रबंधक किशोर कुमार सोने, सहायक प्रबंधक तुषार कंवर और कार्यालय सहायक हेमराज काजी सहित बैंक के बड़ी संख्या में ग्राहक मौजूद थे। कार्यक्रम के दौरान, क्षेत्रीय प्रबंधक नितिन चौधरी ने उपस्थित ग्राहकों को बैंक की आधुनिक डिजिटल बैंकिंग सेवाओं, जैसे मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बैंक की विभिन्न ऋण योजनाओं, जिनमें कार लोन, होम लोन और गोल्ड लोन शामिल हैं, के साथ-साथ अन्य बैंकिंग सुविधाओं की भी जानकारी दी। चौधरी ने ग्राहकों से अपील की कि वे अधिक से अधिक डिजिटल सेवाओं का उपयोग करें। बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं से प्रभावित ग्राहकों ने अधिकारियों और कर्मचारियों के सौहार्दपूर्ण व्यवहार तथा बेहतर ग्राहक सेवा की प्रशंसा की।
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    छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक की सेमरा शाखा को अब एक नए भवन में स्थानांतरित कर दिया गया है, जिसका नवीन परिसर सोमवार को भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के प्रबंध निदेशक अश्विनी कुमार तिवारी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उद्घाटन किया। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ ग्रामीण बैंक के अध्यक्ष विनोद कुमार अरोड़ा, कोरबा के क्षेत्रीय प्रबंधक नितिन चौधरी, शाखा प्रबंधक सुरजीत सिंह डनसेना, प्रबंधक किशोर कुमार सोने, सहायक प्रबंधक तुषार कंवर और कार्यालय सहायक हेमराज काजी सहित बैंक के बड़ी संख्या में ग्राहक मौजूद थे।

कार्यक्रम के दौरान, क्षेत्रीय प्रबंधक नितिन चौधरी ने उपस्थित ग्राहकों को बैंक की आधुनिक डिजिटल बैंकिंग सेवाओं, जैसे मोबाइल बैंकिंग और इंटरनेट बैंकिंग के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने बैंक की विभिन्न ऋण योजनाओं, जिनमें कार लोन, होम लोन और गोल्ड लोन शामिल हैं, के साथ-साथ अन्य बैंकिंग सुविधाओं की भी जानकारी दी। चौधरी ने ग्राहकों से अपील की कि वे अधिक से अधिक डिजिटल सेवाओं का उपयोग करें।

बैंक द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं से प्रभावित ग्राहकों ने अधिकारियों और कर्मचारियों के सौहार्दपूर्ण व्यवहार तथा बेहतर ग्राहक सेवा की प्रशंसा की।
    user_Lala upadhyay
    Lala upadhyay
    Local News Reporter Sakti, Chhattisgarh•
    6 hrs ago
  • सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में आबकारी एक्ट के तहत राजसात किए गए कुल 19 वाहनों की खुली नीलामी आगामी 10 जुलाई, 2026 को आयोजित की जाएगी। इन वाहनों में 03 कार, 15 मोटर साइकिल और 01 स्कूटी शामिल है। यह नीलामी पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सारंगढ़ के परिसर में सुबह 10 बजे से शाम तक चलेगी। खुली नीलामी में शामिल होने वाले फर्मों और व्यक्तियों को प्रत्येक दोपहिया वाहन के लिए ₹2000 और प्रत्येक चारपहिया वाहन के लिए ₹5000 का बैंक ड्राफ्ट पुलिस अधीक्षक सारंगढ़-बिलाईगढ़ के नाम पर बनाकर जमा करना होगा। निविदा की शर्तें एवं अन्य आवश्यक जानकारी कार्यालयीन समय पर कलेक्टर कार्यालय सारंगढ़ (जिला नाजिर शाखा) एवं पुलिस अधीक्षक सारंगढ़ से प्राप्त की जा सकती है।
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    सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में आबकारी एक्ट के तहत राजसात किए गए कुल 19 वाहनों की खुली नीलामी आगामी 10 जुलाई, 2026 को आयोजित की जाएगी। इन वाहनों में 03 कार, 15 मोटर साइकिल और 01 स्कूटी शामिल है। यह नीलामी पुलिस अधीक्षक कार्यालय, सारंगढ़ के परिसर में सुबह 10 बजे से शाम तक चलेगी।

खुली नीलामी में शामिल होने वाले फर्मों और व्यक्तियों को प्रत्येक दोपहिया वाहन के लिए ₹2000 और प्रत्येक चारपहिया वाहन के लिए ₹5000 का बैंक ड्राफ्ट पुलिस अधीक्षक सारंगढ़-बिलाईगढ़ के नाम पर बनाकर जमा करना होगा। निविदा की शर्तें एवं अन्य आवश्यक जानकारी कार्यालयीन समय पर कलेक्टर कार्यालय सारंगढ़ (जिला नाजिर शाखा) एवं पुलिस अधीक्षक सारंगढ़ से प्राप्त की जा सकती है।
    user_पत्रकारिकता
    पत्रकारिकता
    Local News Reporter सारंगढ़, सारंगढ़ बिलाईगढ़, छत्तीसगढ़•
    15 hrs ago
  • प्रशासन ने जेल में बंद राजकली पर सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई की है। यह कार्रवाई सीतामढ़ी स्थित उनके मकान में की गई।
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    प्रशासन ने जेल में बंद राजकली पर सख्ती दिखाते हुए कार्रवाई की है। यह कार्रवाई सीतामढ़ी स्थित उनके मकान में की गई।
    user_SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    SK Kashyapपत्रकार रींवापार
    Farmer बारपाली, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    5 hrs ago
  • लैलूंगा तहसील से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चल रहे एक प्रशिक्षण केंद्र में तानाशाही और मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां 'आइकॉनिक कंप्यूटर एंड मल्टी एजुकेशन' नामक प्रशिक्षण केंद्र के संचालकों ने एक गरीब छात्रा को सिर्फ इसलिए जबरन बाहर का रास्ता दिखा दिया, क्योंकि उसने अपने भविष्य और रोजगार को लेकर सवाल पूछने की 'जुर्रत' की थी। पीड़िता ने अब इस अन्याय के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (SDM) लैलूंगा के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की गुहार लगाई है। ग्राम पंचायत नारायणपुर (मुकडेगा) की निवासी पीड़िता इस केंद्र से HHA (Home Health Aide) का प्रशिक्षण ले रही थी। पीड़िता का आरोप है कि जब भी वह प्रशिक्षण के दौरान नौकरी और HHA कोर्स के बाद रोजगार के अवसरों जैसे बुनियादी सवाल पूछती थी, तो संस्था संचालक और अध्यापिका भड़क जाते थे। हद तो तब हो गई जब संस्था संचालक ने लिखित कारण देने से साफ इनकार करते हुए कहा, "यह मेरी संस्था है, मैं लिखित प्रमाण नहीं दूंगा। जो करना है कर लो।" पीड़ित छात्रा के पास इस बदसलूकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। इसके बाद, छात्रा पर 'बार-बार एक ही प्रश्न पूछकर कक्षा का माहौल खराब करने' का झूठा आरोप लगाकर उसे निष्कासित कर दिया गया। शिकायत पत्र के अनुसार, 6 जुलाई को छात्रा किसी कारणवश केंद्र नहीं जा पाई थी, जिसकी सूचना उसने अध्यापिका को व्हाट्सएप पर दी थी। अगले दिन, 7 जुलाई को भारी बारिश के कारण उसकी बस छूट गई, जिसकी वजह से उसे केंद्र पहुँचने में देर हो रही थी। नारायणपुर से लैलूंगा केंद्र की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। छात्रा ने सुबह 8:28 बजे ही शिक्षिका को व्हाट्सएप पर देरी की सूचना दी, लेकिन अध्यापिका ने सुबह 9:00 बजे तक पहुंचने का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया। इसके ठीक बाद, सुबह 9:51 बजे पीड़ित छात्रा के व्हाट्सएप पर एक संदेश आया कि "आपका दाखिला खारिज कर दिया गया है, अपनी यूनिफॉर्म केंद्र में जमा कर देना।" संस्था ने बिना कोई नोटिस दिए या पीड़िता को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सीधे तौर पर उसे निष्कासित कर दिया, जो नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। संस्था ने नियम का हवाला देते हुए कहा कि प्रशिक्षणार्थी महीने में केवल 3 दिन का अवकाश ले सकता है और छात्रा ने नियमों का उल्लंघन किया है। जबकि पीड़िता के अनुसार, जुलाई माह में यह उसका मात्र दूसरा अवकाश था। संस्था संचालक और स्टाफ के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान होकर पीड़िता ने 8 जुलाई 2026 को एसडीएम लैलूंगा के पास शिकायत पत्र दर्ज कराया है। उसने एसडीएम से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने, संस्था की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई की वैधता जांचने, उसका भविष्य बर्बाद होने से बचाने के लिए उसे पुनः प्रशिक्षण में प्रवेश दिलाने और दोषी पाए जाने पर इस निरंकुश प्रशिक्षण संस्था के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है या इन रसूखदार निजी संस्था संचालकों की जेबें भरना। अब देखना यह होगा कि लैलूंगा प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या ऐक्शन लेता है।
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    लैलूंगा तहसील से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चल रहे एक प्रशिक्षण केंद्र में तानाशाही और मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां 'आइकॉनिक कंप्यूटर एंड मल्टी एजुकेशन' नामक प्रशिक्षण केंद्र के संचालकों ने एक गरीब छात्रा को सिर्फ इसलिए जबरन बाहर का रास्ता दिखा दिया, क्योंकि उसने अपने भविष्य और रोजगार को लेकर सवाल पूछने की 'जुर्रत' की थी। पीड़िता ने अब इस अन्याय के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (SDM) लैलूंगा के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की गुहार लगाई है।

ग्राम पंचायत नारायणपुर (मुकडेगा) की निवासी पीड़िता इस केंद्र से HHA (Home Health Aide) का प्रशिक्षण ले रही थी। पीड़िता का आरोप है कि जब भी वह प्रशिक्षण के दौरान नौकरी और HHA कोर्स के बाद रोजगार के अवसरों जैसे बुनियादी सवाल पूछती थी, तो संस्था संचालक और अध्यापिका भड़क जाते थे। हद तो तब हो गई जब संस्था संचालक ने लिखित कारण देने से साफ इनकार करते हुए कहा, "यह मेरी संस्था है, मैं लिखित प्रमाण नहीं दूंगा। जो करना है कर लो।" पीड़ित छात्रा के पास इस बदसलूकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। इसके बाद, छात्रा पर 'बार-बार एक ही प्रश्न पूछकर कक्षा का माहौल खराब करने' का झूठा आरोप लगाकर उसे निष्कासित कर दिया गया।

शिकायत पत्र के अनुसार, 6 जुलाई को छात्रा किसी कारणवश केंद्र नहीं जा पाई थी, जिसकी सूचना उसने अध्यापिका को व्हाट्सएप पर दी थी। अगले दिन, 7 जुलाई को भारी बारिश के कारण उसकी बस छूट गई, जिसकी वजह से उसे केंद्र पहुँचने में देर हो रही थी। नारायणपुर से लैलूंगा केंद्र की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। छात्रा ने सुबह 8:28 बजे ही शिक्षिका को व्हाट्सएप पर देरी की सूचना दी, लेकिन अध्यापिका ने सुबह 9:00 बजे तक पहुंचने का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया। इसके ठीक बाद, सुबह 9:51 बजे पीड़ित छात्रा के व्हाट्सएप पर एक संदेश आया कि "आपका दाखिला खारिज कर दिया गया है, अपनी यूनिफॉर्म केंद्र में जमा कर देना।"

संस्था ने बिना कोई नोटिस दिए या पीड़िता को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सीधे तौर पर उसे निष्कासित कर दिया, जो नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। संस्था ने नियम का हवाला देते हुए कहा कि प्रशिक्षणार्थी महीने में केवल 3 दिन का अवकाश ले सकता है और छात्रा ने नियमों का उल्लंघन किया है। जबकि पीड़िता के अनुसार, जुलाई माह में यह उसका मात्र दूसरा अवकाश था।

संस्था संचालक और स्टाफ के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान होकर पीड़िता ने 8 जुलाई 2026 को एसडीएम लैलूंगा के पास शिकायत पत्र दर्ज कराया है। उसने एसडीएम से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने, संस्था की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई की वैधता जांचने, उसका भविष्य बर्बाद होने से बचाने के लिए उसे पुनः प्रशिक्षण में प्रवेश दिलाने और दोषी पाए जाने पर इस निरंकुश प्रशिक्षण संस्था के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है या इन रसूखदार निजी संस्था संचालकों की जेबें भरना। अब देखना यह होगा कि लैलूंगा प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या ऐक्शन लेता है।
    user_Ajit gupta
    Ajit gupta
    Local News Reporter पत्थलगाँव, जशपुर, छत्तीसगढ़•
    7 hrs ago
  • बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड के विष्णु नगर, वार्ड क्रमांक-16 निवासी श्रीमती ज्योति यादव को अपने पति के निधन के बाद श्रम पंजीयन कार्ड में आवश्यक संशोधन न होने के कारण बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस त्रुटि के चलते वे श्रम विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित हो रही थीं। अपनी समस्या के समाधान के लिए श्रीमती यादव ने चॉइस सेंटर के माध्यम से कई बार संशोधन आवेदन किया, लेकिन लंबे समय तक उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो पाया। आखिरकार, अपनी उम्मीदों को लेकर उन्होंने 12 जून को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही श्रम विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई की। संबंधित अधिकारियों ने श्रीमती यादव को कार्यालय बुलाकर उनके आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया। जांच के उपरांत, श्रम पंजीयन कार्ड में आवश्यक संशोधन करते हुए पारिवारिक विवरण को अद्यतन किया गया और परिवार के सदस्यों की सूची में उनकी पुत्री का नाम भी जोड़ा गया। इसके बाद उन्हें संशोधित श्रम पंजीयन कार्ड उपलब्ध करा दिया गया। संशोधित कार्ड प्राप्त होने के बाद श्रीमती ज्योति यादव अब श्रम विभाग की विभिन्न कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्र हो गई हैं। अपनी लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान से उन्हें काफी राहत मिली है। श्रीमती यादव ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी शिकायत पर हुई त्वरित कार्रवाई ने शासन के प्रति उनका विश्वास और मजबूत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को शिकायत दर्ज कराने का मात्र एक माध्यम नहीं, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को हल करने वाला एक सशक्त मंच बताया, जिससे प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित कार्रवाई के कारण आमजन का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
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    बिलासपुर जिले के बिल्हा विकासखंड के विष्णु नगर, वार्ड क्रमांक-16 निवासी श्रीमती ज्योति यादव को अपने पति के निधन के बाद श्रम पंजीयन कार्ड में आवश्यक संशोधन न होने के कारण बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। इस त्रुटि के चलते वे श्रम विभाग की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेने से वंचित हो रही थीं।

अपनी समस्या के समाधान के लिए श्रीमती यादव ने चॉइस सेंटर के माध्यम से कई बार संशोधन आवेदन किया, लेकिन लंबे समय तक उनकी समस्या का निराकरण नहीं हो पाया। आखिरकार, अपनी उम्मीदों को लेकर उन्होंने 12 जून को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई।

मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत मिलते ही श्रम विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया और त्वरित कार्रवाई की। संबंधित अधिकारियों ने श्रीमती यादव को कार्यालय बुलाकर उनके आवश्यक दस्तावेजों का सत्यापन किया। जांच के उपरांत, श्रम पंजीयन कार्ड में आवश्यक संशोधन करते हुए पारिवारिक विवरण को अद्यतन किया गया और परिवार के सदस्यों की सूची में उनकी पुत्री का नाम भी जोड़ा गया। इसके बाद उन्हें संशोधित श्रम पंजीयन कार्ड उपलब्ध करा दिया गया।

संशोधित कार्ड प्राप्त होने के बाद श्रीमती ज्योति यादव अब श्रम विभाग की विभिन्न कल्याणकारी और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ लेने के लिए पात्र हो गई हैं। अपनी लंबे समय से चली आ रही समस्या के समाधान से उन्हें काफी राहत मिली है। श्रीमती यादव ने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और जिला प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी शिकायत पर हुई त्वरित कार्रवाई ने शासन के प्रति उनका विश्वास और मजबूत किया है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेल्पलाइन को शिकायत दर्ज कराने का मात्र एक माध्यम नहीं, बल्कि आम नागरिकों की समस्याओं को हल करने वाला एक सशक्त मंच बताया, जिससे प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली और त्वरित कार्रवाई के कारण आमजन का भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
    user_Durgesh maravi
    Durgesh maravi
    कोरबा, कोरबा, छत्तीसगढ़•
    10 hrs ago
  • रायगढ़ में एक सूने मकान से ₹90,000 के जेवरात की चोरी हो गई है। चोरों ने अलमारी का ताला तोड़कर इस वारदात को अंजाम दिया, जब मकान मालिक का परिवार बिलासपुर गया हुआ था। इस संबंध में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
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    रायगढ़ में एक सूने मकान से ₹90,000 के जेवरात की चोरी हो गई है। चोरों ने अलमारी का ताला तोड़कर इस वारदात को अंजाम दिया, जब मकान मालिक का परिवार बिलासपुर गया हुआ था। इस संबंध में पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है।
    user_Raigarh Chhattisgarh
    Raigarh Chhattisgarh
    रायगढ़, रायगढ़, छत्तीसगढ़•
    3 hrs ago
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