लैलूंगा तहसील से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चल रहे एक प्रशिक्षण केंद्र में तानाशाही और मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां 'आइकॉनिक कंप्यूटर एंड मल्टी एजुकेशन' नामक प्रशिक्षण केंद्र के संचालकों ने एक गरीब छात्रा को सिर्फ इसलिए जबरन बाहर का रास्ता दिखा दिया, क्योंकि उसने अपने भविष्य और रोजगार को लेकर सवाल पूछने की 'जुर्रत' की थी। पीड़िता ने अब इस अन्याय के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (SDM) लैलूंगा के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की गुहार लगाई है। ग्राम पंचायत नारायणपुर (मुकडेगा) की निवासी पीड़िता इस केंद्र से HHA (Home Health Aide) का प्रशिक्षण ले रही थी। पीड़िता का आरोप है कि जब भी वह प्रशिक्षण के दौरान नौकरी और HHA कोर्स के बाद रोजगार के अवसरों जैसे बुनियादी सवाल पूछती थी, तो संस्था संचालक और अध्यापिका भड़क जाते थे। हद तो तब हो गई जब संस्था संचालक ने लिखित कारण देने से साफ इनकार करते हुए कहा, "यह मेरी संस्था है, मैं लिखित प्रमाण नहीं दूंगा। जो करना है कर लो।" पीड़ित छात्रा के पास इस बदसलूकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। इसके बाद, छात्रा पर 'बार-बार एक ही प्रश्न पूछकर कक्षा का माहौल खराब करने' का झूठा आरोप लगाकर उसे निष्कासित कर दिया गया। शिकायत पत्र के अनुसार, 6 जुलाई को छात्रा किसी कारणवश केंद्र नहीं जा पाई थी, जिसकी सूचना उसने अध्यापिका को व्हाट्सएप पर दी थी। अगले दिन, 7 जुलाई को भारी बारिश के कारण उसकी बस छूट गई, जिसकी वजह से उसे केंद्र पहुँचने में देर हो रही थी। नारायणपुर से लैलूंगा केंद्र की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। छात्रा ने सुबह 8:28 बजे ही शिक्षिका को व्हाट्सएप पर देरी की सूचना दी, लेकिन अध्यापिका ने सुबह 9:00 बजे तक पहुंचने का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया। इसके ठीक बाद, सुबह 9:51 बजे पीड़ित छात्रा के व्हाट्सएप पर एक संदेश आया कि "आपका दाखिला खारिज कर दिया गया है, अपनी यूनिफॉर्म केंद्र में जमा कर देना।" संस्था ने बिना कोई नोटिस दिए या पीड़िता को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सीधे तौर पर उसे निष्कासित कर दिया, जो नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। संस्था ने नियम का हवाला देते हुए कहा कि प्रशिक्षणार्थी महीने में केवल 3 दिन का अवकाश ले सकता है और छात्रा ने नियमों का उल्लंघन किया है। जबकि पीड़िता के अनुसार, जुलाई माह में यह उसका मात्र दूसरा अवकाश था। संस्था संचालक और स्टाफ के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान होकर पीड़िता ने 8 जुलाई 2026 को एसडीएम लैलूंगा के पास शिकायत पत्र दर्ज कराया है। उसने एसडीएम से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने, संस्था की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई की वैधता जांचने, उसका भविष्य बर्बाद होने से बचाने के लिए उसे पुनः प्रशिक्षण में प्रवेश दिलाने और दोषी पाए जाने पर इस निरंकुश प्रशिक्षण संस्था के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है या इन रसूखदार निजी संस्था संचालकों की जेबें भरना। अब देखना यह होगा कि लैलूंगा प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या ऐक्शन लेता है।
लैलूंगा तहसील से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चल रहे एक प्रशिक्षण केंद्र में तानाशाही और मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां 'आइकॉनिक कंप्यूटर एंड मल्टी एजुकेशन' नामक प्रशिक्षण केंद्र के संचालकों ने एक गरीब छात्रा को सिर्फ इसलिए जबरन बाहर का रास्ता दिखा दिया, क्योंकि उसने अपने भविष्य और रोजगार को लेकर सवाल पूछने की 'जुर्रत' की थी। पीड़िता ने अब इस अन्याय के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (SDM) लैलूंगा के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की गुहार लगाई है। ग्राम पंचायत नारायणपुर (मुकडेगा) की निवासी पीड़िता इस केंद्र से HHA (Home Health Aide) का प्रशिक्षण ले रही थी। पीड़िता का आरोप है कि जब भी वह प्रशिक्षण के दौरान नौकरी और HHA कोर्स के बाद रोजगार के अवसरों जैसे बुनियादी सवाल
पूछती थी, तो संस्था संचालक और अध्यापिका भड़क जाते थे। हद तो तब हो गई जब संस्था संचालक ने लिखित कारण देने से साफ इनकार करते हुए कहा, "यह मेरी संस्था है, मैं लिखित प्रमाण नहीं दूंगा। जो करना है कर लो।" पीड़ित छात्रा के पास इस बदसलूकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। इसके बाद, छात्रा पर 'बार-बार एक ही प्रश्न पूछकर कक्षा का माहौल खराब करने' का झूठा आरोप लगाकर उसे निष्कासित कर दिया गया। शिकायत पत्र के अनुसार, 6 जुलाई को छात्रा किसी कारणवश केंद्र नहीं जा पाई थी, जिसकी सूचना उसने अध्यापिका को व्हाट्सएप पर दी थी। अगले दिन, 7 जुलाई को भारी बारिश के कारण उसकी बस छूट गई, जिसकी वजह से उसे केंद्र पहुँचने में देर हो रही थी। नारायणपुर से लैलूंगा केंद्र की
दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। छात्रा ने सुबह 8:28 बजे ही शिक्षिका को व्हाट्सएप पर देरी की सूचना दी, लेकिन अध्यापिका ने सुबह 9:00 बजे तक पहुंचने का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया। इसके ठीक बाद, सुबह 9:51 बजे पीड़ित छात्रा के व्हाट्सएप पर एक संदेश आया कि "आपका दाखिला खारिज कर दिया गया है, अपनी यूनिफॉर्म केंद्र में जमा कर देना।" संस्था ने बिना कोई नोटिस दिए या पीड़िता को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सीधे तौर पर उसे निष्कासित कर दिया, जो नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। संस्था ने नियम का हवाला देते हुए कहा कि प्रशिक्षणार्थी महीने में केवल 3 दिन का अवकाश ले सकता है और छात्रा ने नियमों का उल्लंघन किया है। जबकि पीड़िता के अनुसार, जुलाई माह में यह उसका मात्र दूसरा
अवकाश था। संस्था संचालक और स्टाफ के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान होकर पीड़िता ने 8 जुलाई 2026 को एसडीएम लैलूंगा के पास शिकायत पत्र दर्ज कराया है। उसने एसडीएम से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने, संस्था की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई की वैधता जांचने, उसका भविष्य बर्बाद होने से बचाने के लिए उसे पुनः प्रशिक्षण में प्रवेश दिलाने और दोषी पाए जाने पर इस निरंकुश प्रशिक्षण संस्था के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है या इन रसूखदार निजी संस्था संचालकों की जेबें भरना। अब देखना यह होगा कि लैलूंगा प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या ऐक्शन लेता है।
- लैलूंगा तहसील से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना के तहत चल रहे एक प्रशिक्षण केंद्र में तानाशाही और मनमानी का एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां 'आइकॉनिक कंप्यूटर एंड मल्टी एजुकेशन' नामक प्रशिक्षण केंद्र के संचालकों ने एक गरीब छात्रा को सिर्फ इसलिए जबरन बाहर का रास्ता दिखा दिया, क्योंकि उसने अपने भविष्य और रोजगार को लेकर सवाल पूछने की 'जुर्रत' की थी। पीड़िता ने अब इस अन्याय के खिलाफ अनुविभागीय अधिकारी (SDM) लैलूंगा के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराकर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की गुहार लगाई है। ग्राम पंचायत नारायणपुर (मुकडेगा) की निवासी पीड़िता इस केंद्र से HHA (Home Health Aide) का प्रशिक्षण ले रही थी। पीड़िता का आरोप है कि जब भी वह प्रशिक्षण के दौरान नौकरी और HHA कोर्स के बाद रोजगार के अवसरों जैसे बुनियादी सवाल पूछती थी, तो संस्था संचालक और अध्यापिका भड़क जाते थे। हद तो तब हो गई जब संस्था संचालक ने लिखित कारण देने से साफ इनकार करते हुए कहा, "यह मेरी संस्था है, मैं लिखित प्रमाण नहीं दूंगा। जो करना है कर लो।" पीड़ित छात्रा के पास इस बदसलूकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। इसके बाद, छात्रा पर 'बार-बार एक ही प्रश्न पूछकर कक्षा का माहौल खराब करने' का झूठा आरोप लगाकर उसे निष्कासित कर दिया गया। शिकायत पत्र के अनुसार, 6 जुलाई को छात्रा किसी कारणवश केंद्र नहीं जा पाई थी, जिसकी सूचना उसने अध्यापिका को व्हाट्सएप पर दी थी। अगले दिन, 7 जुलाई को भारी बारिश के कारण उसकी बस छूट गई, जिसकी वजह से उसे केंद्र पहुँचने में देर हो रही थी। नारायणपुर से लैलूंगा केंद्र की दूरी लगभग 25 किलोमीटर है। छात्रा ने सुबह 8:28 बजे ही शिक्षिका को व्हाट्सएप पर देरी की सूचना दी, लेकिन अध्यापिका ने सुबह 9:00 बजे तक पहुंचने का कड़ा अल्टीमेटम दे दिया। इसके ठीक बाद, सुबह 9:51 बजे पीड़ित छात्रा के व्हाट्सएप पर एक संदेश आया कि "आपका दाखिला खारिज कर दिया गया है, अपनी यूनिफॉर्म केंद्र में जमा कर देना।" संस्था ने बिना कोई नोटिस दिए या पीड़िता को अपना पक्ष रखने का मौका दिए बिना सीधे तौर पर उसे निष्कासित कर दिया, जो नियमों की धज्जियां उड़ाने जैसा है। संस्था ने नियम का हवाला देते हुए कहा कि प्रशिक्षणार्थी महीने में केवल 3 दिन का अवकाश ले सकता है और छात्रा ने नियमों का उल्लंघन किया है। जबकि पीड़िता के अनुसार, जुलाई माह में यह उसका मात्र दूसरा अवकाश था। संस्था संचालक और स्टाफ के इस अड़ियल और गैर-जिम्मेदाराना रवैये से परेशान होकर पीड़िता ने 8 जुलाई 2026 को एसडीएम लैलूंगा के पास शिकायत पत्र दर्ज कराया है। उसने एसडीएम से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने, संस्था की तानाशाहीपूर्ण कार्रवाई की वैधता जांचने, उसका भविष्य बर्बाद होने से बचाने के लिए उसे पुनः प्रशिक्षण में प्रवेश दिलाने और दोषी पाए जाने पर इस निरंकुश प्रशिक्षण संस्था के खिलाफ नियमानुसार सख्त से सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की मांग की है। इस घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना का उद्देश्य युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना है या इन रसूखदार निजी संस्था संचालकों की जेबें भरना। अब देखना यह होगा कि लैलूंगा प्रशासन इस गंभीर शिकायत पर क्या ऐक्शन लेता है।4
- छत्तीसगढ़ के मैनपाट में एक बाइकर्स गैंग का आतंक फैल गया है, जिसके कारण क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों में भारी दहशत देखी जा रही है। इस गैंग की गतिविधियों ने पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।1
- अम्बिकापुर नगर निगम के वार्ड क्रमांक 13, शिवशंकर वार्ड में गंदगी का आलम है, जहाँ सड़कों पर जगह-जगह कचरे के ढेर लगे हुए हैं। स्थानीय निवासियों के अनुसार, नगर निगम के सफाई कर्मचारी रोज़ सुबह 6 बजे से पूरे वार्ड में सफाई करते हैं। इसके बावजूद, कुछ रहवासियों की लापरवाही के कारण लोग कचरा सड़कों पर इधर-उधर फेंक देते हैं, जिससे सफाई के बाद भी वार्ड में गंदगी बनी रहती है। नागरिकों ने साफ तौर पर कहा है कि जब तक लोग स्वयं जिम्मेदारी नहीं लेंगे, तब तक वार्ड साफ नहीं हो सकता। वार्ड 13 के पार्षद ने इस समस्या पर अपनी बात रखते हुए बताया कि सफाई के लिए प्रतिदिन टीम भेजी जा रही है और सफाई कर्मचारी रोज़ सुबह 6 बजे से शिवशंकर वार्ड में लगातार सफाई कर रहे हैं। उन्होंने सभी नागरिकों से निवेदन किया है कि वे कचरा केवल डस्टबिन में ही डालें और स्वच्छता अभियान में अपना सहयोग दें। इसके अतिरिक्त, वार्ड में पोल और नाली की समस्या भी मौजूद है, जिसके बारे में पार्षद ने जानकारी दी कि इसका प्रस्ताव नगर निगम में प्रक्रियाधीन है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जैसे ही यह प्रस्ताव पारित होगा, संबंधित काम तुरंत शुरू करवा दिए जाएंगे। प्रशासन ने अम्बिकापुर को स्वच्छ बनाने के लिए लोगों से अपील की है कि वे सफाई कर्मियों का सहयोग करें और गंदगी न फैलाएं।3
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दमन की धरती से देशवासियों को संबोधित करते हुए पिछले 11 वर्षों में भारत द्वारा विकास, सुशासन और जनकल्याण के क्षेत्र में हासिल की गई अभूतपूर्व उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार का संकल्प केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है, जिसके तहत गरीब, किसान, युवा और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य किया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने दमन में विभिन्न विकास परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण भी किया। उन्होंने कहा कि ये परियोजनाएं क्षेत्र के आर्थिक विकास, पर्यटन, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के नए अवसरों को बढ़ावा देंगी। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि विकसित भारत के निर्माण में दमन और दीव की महत्वपूर्ण भूमिका है, और केंद्र सरकार इस क्षेत्र के विकास के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है। प्रधानमंत्री ने बताया कि आज भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया, स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसे अभियानों ने देश को एक नई पहचान दी है। इन प्रयासों के तहत करोड़ों लोगों को पक्के घर, स्वच्छ पेयजल, बिजली, गैस कनेक्शन और मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर देते हुए नारी शक्ति को देश के विकास की सबसे बड़ी ताकत बताया। उन्होंने कहा कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा रहा है, जिसके परिणामस्वरूप आज महिलाएं हर क्षेत्र में नए कीर्तिमान स्थापित कर रही हैं। युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए, उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति, कौशल विकास कार्यक्रम और स्टार्टअप संस्कृति ने उनके लिए नए अवसर पैदा किए हैं, और उन्होंने युवाओं से विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। प्रधानमंत्री ने दोहराया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाना है, जिसके लिए आधुनिक बुनियादी ढांचे, बेहतर कनेक्टिविटी, डिजिटल सेवाओं और जनभागीदारी को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि देश के 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयासों से भारत विश्व की अग्रणी शक्तियों में शामिल होगा। दमन में आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने प्रधानमंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया और विकास परियोजनाओं के लिए उनका आभार व्यक्त किया, जिससे क्षेत्र के विकास को नई दिशा मिली और विकसित भारत के संकल्प को भी मजबूती मिली।1
- अजरदीप सोनवानी जी द्वारा श्री कृष्ण की आरती पर एक हिंदी वीडियो उपलब्ध है। यह वीडियो सादी शैली में प्रस्तुत किया गया है और इसमें आरती का विस्तृत अर्थ समझाया गया है।4
- बारिश के मौसम में फुलवारी डीपा का संपर्क पूरी तरह कट जाता है, जिससे स्थानीय निवासियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यह समस्या पुल सड़क का निर्माण न होने के कारण लगातार बनी हुई है, जिससे लोगों की परेशानी में लगातार वृद्धि हो रही है।1
- छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में वेदांता पावर प्लांट से जुड़े 400 से अधिक भू-विस्थापित परिवारों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले 13 वर्षों से पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति के तहत मिलने वाले लाभ नहीं मिले हैं। इस मामले में, प्रभावित परिवारों ने छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में न्यायालय की अवमानना याचिका दायर की है, जिसमें वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कुल चार पक्षों को प्रतिवादी बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का दावा है कि हाईकोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी पात्र भू-विस्थापित परिवारों को न तो नियमानुसार भत्ता दिया गया और न ही पुनर्वास नीति के अन्य लाभ उपलब्ध कराए गए। यह विवाद सक्ती जिले के ग्राम सिंघीतराई स्थित उस पावर प्लांट से संबंधित है, जिसे पहले एथेना पावर प्लांट के नाम से जाना जाता था और जिसका अधिग्रहण वेदांता समूह ने वर्ष 2022 में किया। प्लांट की स्थापना के लिए वर्ष 2008 में आसपास के गांवों की लगभग 1,000 एकड़ भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिससे 800 से अधिक परिवार प्रभावित हुए थे। भू-विस्थापितों का कहना है कि छत्तीसगढ़ पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीति-2007 के तहत उन्हें रोजगार या निर्धारित भत्ता मिलना चाहिए था। उनके अनुसार, प्लांट का संचालन वर्ष 2013 में शुरू हुआ, 2016 में बंद हो गया और वर्ष 2025 में दोबारा शुरू होने के बाद भी 400 से अधिक प्रभावित परिवारों को न तो रोजगार मिला और न ही भत्ते का भुगतान किया गया। प्रभावित परिवारों के अनुसार, वर्ष 2021 में 37 परिवारों ने इस मुद्दे को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में उठाया था। सुनवाई के बाद हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार को आवश्यक कार्रवाई कर पात्र परिवारों को राहत देने के निर्देश दिए थे। इसके बाद, जिला प्रशासन द्वारा गठित एक समिति ने भी प्लांट प्रबंधन को पात्र भू-विस्थापितों को नियमानुसार भत्ता देने के निर्देश जारी किए थे। याचिका में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव शम्मी आबिदी, सक्ती कलेक्टर अमृत विकास तोपनो और डभरा एसडीएम को भी पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि इन स्पष्ट निर्देशों के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और करीब दो माह पहले सक्ती कलेक्टर के निर्देश के बाद भी प्रभावित परिवारों को आज तक कोई राहत नहीं मिली है। इसी आधार पर अब यह अवमानना याचिका दायर की गई है। यह मामला केवल एक औद्योगिक परियोजना तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और न्यायालय के आदेशों के पालन को लेकर महत्वपूर्ण सवाल खड़े करता है, जिसके अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बनने की संभावना है। इस मामले में अब हाईकोर्ट की आगामी सुनवाई और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं।1
- वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के निर्देशन में रायगढ़ जिले में अवैध शराब के विरुद्ध चलाए जा रहे "ऑपरेशन आघात" के तहत छाल पुलिस ने ग्राम खेदापाली में बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने यहां सविता सतनामी, पति झंगलूराम सतनामी (उम्र 27 वर्ष) को अवैध रूप से महुआ शराब बेचते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया। मौके से 15-15 लीटर क्षमता के दो प्लास्टिक जरीकेन में भरी कुल 30 लीटर महुआ शराब जब्त की गई, जिसकी अनुमानित कीमत ₹6,000 बताई गई है। यह कार्रवाई थाना प्रभारी निरीक्षक नासिर खान को मिली मुखबिर की सूचना के आधार पर की गई, जिसमें बताया गया था कि सविता सतनामी अपने घर के समीप इमली के पेड़ के नीचे अवैध रूप से महुआ शराब बेच रही है। सूचना मिलते ही थाना प्रभारी के निर्देशानुसार सहायक उप निरीक्षक शिव खरे के नेतृत्व में पुलिस टीम ने तत्काल मौके पर दबिश दी और महिला को ग्राहकों को शराब बेचते हुए पकड़ा। आरोपिया सविता सतनामी के विरुद्ध धारा 34(2) और 59(क) छत्तीसगढ़ आबकारी अधिनियम के तहत अपराध पंजीबद्ध कर वैधानिक कार्रवाई की गई है। इस सफल कार्रवाई में सहायक उप निरीक्षक शिव खरे, प्रधान आरक्षक अशोक देवांगन, शंकर सिंह क्षत्री, शंभू पाण्डेय और महिला आरक्षक रंजिता चौहान की सराहनीय भूमिका रही।2