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सडक पर पानी भरा हुआ है नाली मे पानी की निकासी nhi होरही है dukan दार को दिकत आरी है
Kayum khan
सडक पर पानी भरा हुआ है नाली मे पानी की निकासी nhi होरही है dukan दार को दिकत आरी है
- Kayum khanसांगानेर, जयपुर, राजस्थानtonk road बीलवा सडक पर पानी भर चुका है इसकी नालियों को मतलब निकास बंद कर दिया इसके वजह से दुकानदारों को तकलीफ हो रही है इस पर कोई प्रशासन ध्यान दे रही नहीं है यहां पर आए दिन आपसे हो रहे हैं हादसे से हो रहे हैं4 hrs ago
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- जनता की प्यास के साथ मजाक बर्दाश्त नहीं: पंडित करण शर्मा जयपुर नगर निगम के वार्ड संख्या 134 के कांग्रेस पार्षद और जननेता पंडित करण शर्मा के नेतृत्व में आज क्षेत्र की जनता और भारी संख्या में महिलाओं ने जलदाय विभाग (सिविल लाइंस फाटक) पर जोरदार प्रदर्शन किया। भीषण गर्मी के बीच पानी की किल्लत से जूझ रही महिलाओं ने जलदाय विभाग के कार्यालय के बाहर 'खाली मटके' फोड़कर विभाग की कार्यप्रणाली के खिलाफ अपना आक्रोश व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए पार्षद पंडित करण शर्मा ने कहा कि, "पूरा शहर भीषण गर्मी की तपिश झेल रहा है और स्वेज फार्म की जनता बूंद-बूंद पानी को तरस रही है। जलदाय विभाग के अधिकारियों को बार-बार अवगत कराने के बावजूद व्यवस्था में कोई सुधार नहीं हुआ है। आज महिलाओं ने मटके फोड़कर यह संदेश दिया है कि यदि विभाग की कुंभकर्णी नींद नहीं खुली, तो आने वाले दिनों में यह आंदोलन और उग्र होगा।" महिलाओं का आक्रोश: प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने विभाग के खिलाफ नारेबाजी करते हुए कहा कि पानी न आने के कारण घर चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि अगले 3 दिनों में समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो वे जलदाय विभाग के कार्यालय का घेराव कर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगी। इस दौरान पंडित करण शर्मा के साथ भारी संख्या में स्थानीय कार्यकर्ता, युवा और मातृशक्ति मौजूद रही।1
- जयपुर-खाटूश्यामजी, 1 मई। सीकर जिले के खाटूश्यामजी तीर्थ के दांतारामगढ़ रोड स्थित ‘श्रीकृष्णम गेस्ट हाउस’ में शुक्रवार तड़के हुई मारपीट और तोड़फोड़ की घटना में पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए तीन मुख्य आरोपियों को हिरासत में ले लिया है। शेष आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दी जा रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार सुबह करीब 5:23 बजे आपसी रंजिश, विशेषकर कर्मचारियों के दल-बदल को लेकर विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। इस दौरान कुछ गेस्ट हाउस संचालकों द्वारा अवैध रूप से परिसर में प्रवेश कर तोड़फोड़ और मारपीट की गई। *पुलिस ने संभाला मोर्चा:* घटना की गंभीरता को देखते हुए सीकर एसपी प्रवीण नायक नूनावत के निर्देश पर पुलिस ने तत्काल मोर्चा संभाला। पुलिस उपाधीक्षक आनंद राव के नेतृत्व में टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरोपियों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई की। पुलिस की इस सक्रियता के चलते तीन आरोपियों को हिरासत में ले लिया गया है, जबकि अन्य की तलाश जारी है। साथ ही, कानून-व्यवस्था की अवहेलना और पुलिस-प्रशासन को धमकी देने के मामलों को गंभीरता से लेते हुए नगरपालिका प्रशासन ने हमलावर पक्ष के गेस्ट हाउसों के खिलाफ सीजर (सीलिंग) की कार्रवाई शुरू कर दी है। सीकर एसपी प्रवीण नायक नूनावत ने बताया कि फिलहाल मौके पर शांति व्यवस्था कायम है। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की गहन जांच जारी है। उन्होंने कहा है कि अशांति पैदा करने वाले किसी भी दोषी व्यक्ति को बख्शा नहीं जायेगा।1
- जयपुर। अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ (एकीकृत) ने राज्य सरकार के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है. प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ के नेतृत्व में महासंघ ने मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और अतिरिक्त मुख्य सचिव (वित्त) को ज्ञापन देकर लंबित मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग रखी गई। महासंघ ने स्पष्ट किया है कि यदि कर्मचारियों और पेंशनर्स की समस्याओं का शीघ्र निराकरण नहीं हुआ, तो संगठन प्रदेश व्यापी आंदोलन के लिए बाध्य होगा। आंदोलन के मुख्य कारण RGHS सुविधा का ठप होना पिछले एक माह से निजी अस्पतालों ने RGHS के तहत इलाज बंद कर रखा है। कर्मचारियों के वेतन से नियमित कटौती होने के बावजूद कैंसर और गुर्दा रोग जैसे गंभीर मरीज दवाओं और जांच के लिए भटक रहे हैं। समर्पित अवकाश भुगतान पर अघोषित रोक: महासंघ के उपाध्यक्ष अजयवीर सिंह ने बताया वित्तीय वर्ष में देय समर्पित अवकाश का नगद भुगतान एक माह बीतने के बाद भी नहीं किया गया है. अघोषित रोक से प्रदेश के कर्मचारियों में भारी रोष व्याप्त है। महासंघ की दो टूक चेतावनी: प्रदेशाध्यक्ष गजेन्द्र सिंह राठौड़ ने कहा कि राज्य सरकार अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी से पीछे हट रही है, उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि इन अति-गंभीर परिस्थितियों का तुरंत समाधान कर चिकित्सा सुविधाएं बहाल नहीं की गईं और समर्पित अवकाश का भुगतान नहीं खोला गया, तो महासंघ प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन की घोषणा करेगा। "कर्मचारियों के धैर्य की परीक्षा लेना बंद करे सरकार, अन्यथा सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।" प्रतिनिधी मंडल में देवेन्द्र सिंह नरूका, ओमप्रकाश चौधरी, बहादुर सिंह, शशि शर्मा, नरपत सिंह, पप्पू शर्मा, राजेंद्र शर्मा, पहलाद राय अग्रवाल आदि शामिल रहे।1
- कारवार में स्थित बनी नदी बालाजी के मंदिर में जाएं उपाय करें आपको अवश्य लाभ प्राप्त होगा और कमेंट में बंदी नदी बालाजी जरूर लिखें1
- *देश की युवाशक्ति डिग्री से आगे बढ़कर कौशल संवर्धन की ओर अग्रसर* *भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, समाज को जोड़ने का जरिया* _*- केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान*_ हमारे हुनरमंद युवाओं को मिल रहा वैश्विक मंच*- राज्य सरकार ने इंग्लिश एंव फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी, हैदराबाद और नेशनल स्किल डवलपमेंट कॉर्पोरशन सहित विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थाओं के साथ किए एमओयू_* जयपुर, 1 मई। मुख्यमंत्री भजनल हमनें अब तक 351 परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ आयोजित करवाई है तथा एक भी पेपर लीक नहीं हुआ। उन्हांने कहा कि राज्य सरकार युवाओं को रोजगार के साथ-साथ कौशल से जोड़कर कुशल बना रही है और युवा अब नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि नौकरी देने वाला बन रहा है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को बिड़ला ऑडिटोरियम में विदेशी भाषा संचार कौशल कार्यक्रम के लिए एमओयू कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने स्वामी विवेकानंदजी का उल्लेख करते हुए युवाओं से विदेशी भाषा सीखने और देश-दुनिया में छा जाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के कौशल विकास के विजन को आगे बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने इंग्लिश एंव फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी, हैदराबाद और नेशनल स्किल डवलपमेंट कॉर्पोरशन के साथ एमओयू किए हैं। इसके माध्यम से हमारे युवाओं को फ्रेंच, जर्मन, स्पेनिश, जापानी और कोरियन सीखने का अवसर मिलेगा। उन्होंने कहा कि आज के युग में विदेशी भाषा सीखना आवश्यकता बन चुका है। विदेशी भाषा का ज्ञान युवाओं को बहुराष्ट्रीय कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विदेशों में रोजगार के अनेक अवसर प्रदान करता है। इसी तरह यह विदेशी पर्यटकों, उद्यमियों और प्रदेश के स्थानीय उद्योगों के बीच एक सेतु का कार्य भी करता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रमुख पयर्टन स्थलों की वजह से राजस्थान के लिए विदेशी भाषा का विशेष महत्व है। दुनिया भर से यहां सैलानी आते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की नीतियों से प्रदेश के कई अंचलों में पर्यटन उद्योग तेजी से विकसित हो रहा है। विदेशी भाषाएं जानने वाले गाइड, होटल मैनेजर, ट्रैवल एजेंट और व्यापारियों के लिए रोजगार के अवसर बढ़े हैं। उन्होंने कहा कि युवाओं के सपनों को पूरा करने के लिए राज्य सरकार ने प्रदेश में नये महाविद्यालयों के निर्माण और डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने का काम किया है। इसके लिए 71 नए राजकीय महाविद्यालय खोलने के साथ ही, 185 नए राजकीय महाविद्यालयों के भवनों का निर्माण किया गया है। जबकि गत सरकार ने पूरे 5 साल में केवल 57 महाविद्यालयों के भवन बनाए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने शिक्षा को रोजगार से जोड़ा और अब डिग्री से युवाओं के जीवन को नई दिशा मिल रही है। राज्य सरकार ने गुणवत्तापूर्ण कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए राज्य कौशल नीति और युवा नीति बनाई गई है। युवाओं को सवा लाख से अधिक पदों पर नियुक्तियां दी हैं। साथ ही, 1 लाख 33 हजार पदों पर भर्ती प्रक्रियाधीन है एवं सवा लाख पदों का भर्ती कैलेंडर जारी किया गया है। निजी क्षेत्र में भी अब तक 3 लाख रोजगार उपलब्ध कराए गए हैं। *राजस्थान के युवाओं में उद्यमिता के साथ-साथ संस्कृति को आत्मसात करने की प्रतिभा* _*- केन्द्रीय शिक्षा मंत्री*_ केन्द्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि राजस्थान के युवाओं में मेहनत, नवाचार, उद्यमिता के साथ-साथ भाषाओं और संस्कृतियों को आत्मसात करने की नैसर्गिक प्रतिभा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा से आज देश का युवा डिग्री और सर्टिफिकेट से आगे बढ़कर अपने कौशल एवं सामर्थ्य संवर्धन के प्रयास कर रहा है। उन्होंने कहा कि यूरोपीय यूनियन के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट से युवाओं को विदेशी भाषा से संबंधित रोजगार के अवसर उपलब्ध होंगे। *राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शिक्षा को बहुभाषी और अंतरराष्ट्रीय बनाने पर बल* उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं है, बल्कि समाज को जोड़ने और समझने का माध्यम है। विकसित भारत के सपने को साकार करने की दिशा में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें शिक्षा को बहुभाषी और अंतरराष्ट्रीय बनाने पर जोर दिया गया है। फ्रेंच, जर्मन, जापानी, कोरियन और स्पेनिश जैसी भाषाएं सीखने से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान की लोककथाएं जैसे पृथ्वीराज चौहान की गाथा विदेशी भाषा में अनुवादित होगी और दुनिया तक पहुंचेगी। उन्होंने कहा कि जापान और कोरिया जैसे देशों में रोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं। हमारे युवा इन देशों की भाषाएं सीखते हैं, तो वे न केवल सॉफ्टवेयर बल्कि हार्ड ट्रेड और मार्केटिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में भी अवसर पा सकते हैं। केन्द्रीय कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जयन्त चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शिक्षा नीति में मातृभाषाओं को प्राथमिक शिक्षा का आधार बनाया गया है। स्थानीय भाषा हमारे गौरवशाली अतीत संजोए रखने के साथ-साथ हमे विश्वास देती है, हमारी जड़ों से हमारा भावनात्मक जुड़ाव मजबूत करती है। उन्होंने कहा कि विदेशी भाषा संचार कौशल के लिए हुए एमओयू भारतीय छात्रों के लिए दुनिया भर में संभावनाओं के द्वार खोलने का काम करेंगे। जिससे हमारे युवाओं के कौशल एवं हुनर को वैश्विक मंच मिलेगा। चौधरी ने कहा कि पीएम सेतु में राजस्थान में बेहतरीन काम हुआ है। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचंद बैरवा ने कहा कि यह एमओयू केवल कागजी समझौता नहीं बल्कि हमारे युवाओं को अवसरों से जोड़ने का सशक्त एवं प्रभावी माध्यम है। कौशल, नियोजन एवं उद्यमिता राज्यमंत्री के.के विश्नोई ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में युवाओं की प्रतिभा को निखारा जा रहा है। इस अवसर पर राज्य सरकार तथा इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के मध्य विदेशी भाषा संचार कौशल कार्यक्रम के लिए एवं स्किल इंडिया इन्टरनेशनल सेंटर जयपुर की स्थापना के लिए राष्ट्रीय कौशल विकास निगम के मध्य एमओयू का आदान-प्रदान किया गया। साथ ही, नेशनल एन्टरप्रेन्योर एम्पावरमेंट ड्राइव के अन्तर्गत भी विभिन्न एमओयू संपादित हुए। इससे पहले इंग्लिश एंड फॉरेन लैंग्वेजेज यूनिवर्सिटी के जर्नल का विमोचन भी किया गया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने युवाओं से संवाद भी किया। इस दौरान मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, शिक्षा मंत्रालय में उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी, शिक्षाविद् सहित बड़ी संख्या में युवा उपस्थित रहे। वहीं, वीसी एवं माय भारत पोर्टल के माध्यम से प्रदेशभर के युवा जुड़े। ----1
- Post by Yogesh Kumar Gupta4
- सड़कों पर पानी भरना (खासकर निचले इलाकों में) ट्रैफिक जाम और धीमी आवाजाही बिजली सप्लाई में रुकावट मौसम में ठंडक, लेकिन उमस भी बढ़ सकती है1
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- अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस केवल उन लोगों का दिन ही नहीं है जो काम में लगे हुए हैं, बल्कि उन सभी परोलेटेरिएट (काम में लगे+काम से निकाले+युवाओं का भी है जो काम से बाहर हैं और रोजगार की तलाश में हैं।)का दिन है । इस दिन का नाम भी अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस है जिसको आम बोलचाल भाषा मे अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस या मई दिवस कहा जाता है। क्योंकि इतिहास में यह पहली बार 1 मई 1848 को मनाया गया और यह दिन यूरोप में काम करने का शिखर वाला दिन होता है इसलिए इसको चुना गया और आज भी पहली मई के दिन ही मनाया जाता है। आज के दौर में यह समझना और भी जरूरी हो गया है कि श्रम दिवस का सवाल केवल मजदूरी बढ़ाने, सेवा सुरक्षा या सेवा शर्तों से संबंधित ही नहीं, बल्कि सबको रोजगार गारंटी और काम करने के दिन की कानूनी अवधि को तय करने के सैद्धांतिक नियम को याद कर लागू करने का दिन भी हैं जिसका सापेक्ष रूप में संबंध तकनीकी उन्नति व उत्पादकता के साथ होता है जो बेरोजगारी दूर करने और काम के बोझ को घटाने का सूत्र देता है। श्रम दिवस का ऐतिहासिक संदर्भ एक प्राकृतिक दिन में 24 घंटे होते हैं, इनमें से जीवनयापन के लिए मजदूर कितने घंटे अपनी श्रम शक्ति बेचता है, यही“कार्य दिवस” या श्रम दिवस कहलाता है जो कभी भी 24 घंटे नहीं हो सकता तथा शून्य भी नहीं हो सकता। यह सीमा बहुत ही लचीली सीमा होती है जिसको श्रमिक अपने संघर्षों से तय करवाते हैं । इतिहास में यह कार्य दिवस कभी 20, 18, 16, 14, 12, 10 और अंतत: 1890 में 8 घंटे तक सीमित करवाया गया था । तब 8 घंटे काम, 8 घंटे आराम और 8 घंटे सामाजिक कार्यों के लिए सामान्य कार्य दिवस माना गया। लेकिन औद्योगिक क्रांति के बाद जब मशीनों का उपयोग बढ़ा तो उत्पादन भी बढ़ा लेकिन मशीन के विलोमानुपात में श्रमिकों की जरुरत घटने लगी/ बेरोजगारी पहली बार बड़े पैमाने पर सामने आई। इंग्लैंड में कारखानों के बाहर ‘श्रमिकों की जरुरत नहीं" जैसे बोर्ड लगाए जाने लगे। इसी दौर में मशीनों के खिलाफ संघर्ष करने वाला "लुडाइट आंदोलन" उभरा, जिनका कहना था कि मशीनें ही मजदूरों की दुश्मन हैं जो इनका रोजगार छीनती हैं लेकिन कार्ल मार्क्स ने सिद्धांत देकर सिद्ध किया कि तकनीकी उन्नति मानव की सहयोगी है उसका स्वागत किया जाना चाहिए उसको रोका नहीं जाना चाहिए और न ही रोका जा सकता है। संगठित संघर्ष और कार्य दिवस अवधि में कमी मजदूरों ने रोजगार तथा फ्री टाइम पाने के लिए संघर्षों के माध्यम से कार्य दिवस अवधि को समय समय पर कम करवाया। 19वीं सदी में यह 12 घंटे, फिर 10 घंटे तथा 8 घंटे तक सीमित करवाया। "कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो" के माध्यम से कार्ल मार्क्स और फ्रेडरिक एंगल्स ने इन संघर्षों को सैद्धांतिक दिशा दी और 1848 में काम के दिन को 10 घंटे के रूप में जब जीता गया तो इसे अपनी सैद्धांतिक जीत बताया। 1866 में अंतर्राष्ट्रीय वर्कर्स एसोसिएशन की बैठक में 8 घंटे के कार्य दिवस की आवश्यकता का प्रस्ताव पारित किया। इसके बाद 1 मई 1886 को शिकागो में मजदूरों ने 8 घंटे के कार्य दिवस के लिए ऐतिहासिक हड़ताल की। इस संघर्ष में कई मजदूरों ने अपनी जान दी, अंतत : 8 घंटे का कार्य दिवस एक वैश्विक मानक बन गया। कार्ल मार्क्स ने अपनी विश्व प्रसिद्ध कृति "दास कैपिटल' में लिखा कि मजदूर के जीवन का स्तर इस बात से तय होता हैं कि वह एक काम के दिन में कितना समय अपने लिए काम करता है और कितना समय बुर्जुआ वर्ग के लिए। "आवश्यक श्रम'' और "अतिरिक्त श्रम समय" का सवाल मार्क्सवाद के अनुसार कार्य दिवस दो भागों में बंटा होता है- "आवश्यक श्रम समय" : जिसमें मजदूर अपनी मजदूरी के बराबर उत्पादन करता है। "अतिरिक्त श्रम समय" : जिसमें वह पूंजीपति के लिए मुनाफा पैदा करता है। तकनीकी विकास के साथ "आवश्यक श्रम समय' घटता चला जाता है, लेकिन "अतिरिक्त श्रम समय' बढता चला जाता है। यही पूंजीवादी शोषण का आधार है।तकनीकी विकास, एआई और बढती बेरोजगारी:- आज तकनीक, ऑटोमेशन और एआई के कारण उत्पादन क्षमता कई गुना बढ़ चुकी है। एक व्यक्ति मशीन की सहायता से पहले के मुकाबले कई गुना अधिक उत्पादन कर देता है लेकिन इस का लाभ समाज को समान रूप से नहीं दिया जाता।परिणामस्वरूप- बेरोजगारी बढ़ जाती है। काम करने वालों पर काम का बोझ बढ़ जाता है। क्रयशक्ति घट जाती है। सामाजिक असमानता बढ़ जाती है जो लक्षण अब अपने चरम पर हैं। आज एक तरफ लाखों युवा बेरोजगार हैं, तो दूसरी तरफ काम करने वाले मजदूरों के पास फ्री टाइम नहीं है। इसलिए आज तकनीकी उन्नति के कारण कार्य दिवस अवधि कानूनी रूप से 8 घंटे से घटाकर 6 घंटे की जरुरत है। इतिहास में 8 घंटे का कार्य दिवस एक बड़ी उपलब्धि थी लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में यह पर्याप्त नहीं है। आज एक आई के दौर में जब उत्पादन क्षमता आश्चर्यजनक रूप से बढ़ चुकी है तो कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप से घटाना ही तार्किक और न्यायसंगत कदम है। इसलिए आज का केंद्रीय नारा होना चाहिए:“काम का दिन 6 घंटे या उससे कम किया जाए' जो बेरोजगारी को खत्म करेगा। रोजगार के अवसर बढ़ाएगा। मजदूरों को फ्री टाईम देगा। सामाजिक जीवन को बेहतर बनाएगा। बेरोजगार युवाओं का सवाल अंतर्राष्ट्रीय श्रम दिवस को केवल काम करने वालों तक सीमित करना अधूरा दृष्टिकोण है। बल्कि यह काम से बाहर बैठे युवाओं को रोजगार में लाने का सैद्धांतिक अवसर भी होता है। आज सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि- काम कर रहे लोगों पर काम का इतना बोझ क्यों तथा जो काम करना चाहते हैं, उन्हें काम क्यों नहीं मिल रहा? इस समस्या का सैद्धांतिक उत्तर व समाधान आज के दिन के अवसर पर सैद्धांतिक रूप में काम की अवधि को कानूनी रूप से कम करने में ही है जिसे हमने कई दशकों से तिलांजलि देकर आंखों से ओझल कर रखा है। हालांकि यह सूत्र सबसे कारगर सूत्र है। इसके अलावा कोई भी सूत्र वर्तमान सामाजिक संकट को हल नहीं करता। उदाहरण के तौर पर कार्य दिवस अवधि को कानूनी रूप में 8 घंटे से घटाकर 6 करने पर काम का समय 25% घटेगा और रोजगार के अवसर 33% बढ़ेंगे। इसी प्रकार काम के दिन को 20% सीमित करने पर रोजगार 25% बढता है। काम के दिन को 30% सीमित करने पर रोजगार 42% बढता है। काम के दिन को 40% सीमित करने तथा काम के दिन को 50%सीमित करने पर रोजगार के अवसर 100% बढ़ जाते हैं। निष्कर्ष: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस का वर्तमान संदेश:- आज जब साप्ताहिक कार्य घंटे 70-90 तक बढाने की बातें हो रही हैं, तब श्रम दिवस का सिद्धांत हमें एक अलग दिशा दिखाता है। सबको रोजगार मिले तथा रोजगार में लगे लोगों को फ्री टाइम देने का एक मात्र यही वह रास्ता है जिससे बेरोजगारी खत्म होगी। मजदूरों का जीवन बेहतर होगा। समाज अधिक न्यायपूर्ण बनेगा। अत: अंतरराष्ट्रीय श्रम दिवस पर शिकागो मजदूर आंदोलन 1886 के शहीदों को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उनके संघर्ष को आगे बढ़ाते हुए आज के दौर में 6 घंटे के कार्य दिवस को एक नए ऐतिहासिक लक्ष्य के रूप में स्थापित करें।1