शहडोल में प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल: वन क्षेत्र में घटनाओं के बाद भी कार्रवाई का इंतज़ार... शहडोल। जिले के गोहपारू वन क्षेत्र में हाल ही में हुई घटनाओं ने प्रशासनिक सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां एक तेंदुए की कुएं में गिरने से मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के कर्मचारियों पर हमले की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। इससे लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। मुख्य सवाल जो उठ रहे हैं: 👉 वन्यजीव सुरक्षा पर लापरवाही? तेंदुए की मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे। यदि कुएं के आसपास सुरक्षा दीवार या घेराबंदी होती, तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी। 👉 कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरा वन विभाग की टीम पर हमले की घटना ने यह साफ कर दिया है कि फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। ऐसे में उनके मनोबल पर भी असर पड़ रहा है। 👉 जिम्मेदारी तय क्यों नहीं? घटनाओं के बाद भी अब तक किसी स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं होने से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बढ़ रही चिंता गोहपारू क्षेत्र में लगातार सामने आ रही घटनाओं से ग्रामीणों और कर्मचारियों दोनों में असुरक्षा की भावना है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। क्या होनी चाहिए आगे की कार्रवाई? पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए वन्यजीव सुरक्षा के लिए मूलभूत ढांचे (जैसे कुओं की सुरक्षा) को मजबूत किया जाए फील्ड कर्मचारियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए संबंधित मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए निष्कर्ष गोहपारू की घटनाएं सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन संकेतों को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाता है या नहीं।
शहडोल में प्रशासनिक सुस्ती पर सवाल: वन क्षेत्र में घटनाओं के बाद भी कार्रवाई का इंतज़ार... शहडोल। जिले के गोहपारू वन क्षेत्र में हाल ही में हुई घटनाओं ने प्रशासनिक सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां एक तेंदुए की कुएं में गिरने से मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के कर्मचारियों पर हमले की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। इससे लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। मुख्य सवाल जो उठ रहे हैं: 👉 वन्यजीव सुरक्षा पर लापरवाही? तेंदुए की मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे। यदि कुएं के आसपास सुरक्षा दीवार या घेराबंदी होती, तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी। 👉 कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरा वन विभाग की टीम पर हमले की घटना ने यह साफ कर दिया है कि फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। ऐसे में उनके मनोबल पर भी असर पड़ रहा है। 👉 जिम्मेदारी तय क्यों नहीं? घटनाओं के बाद भी अब तक किसी स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं होने से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बढ़ रही चिंता गोहपारू क्षेत्र में लगातार सामने आ रही घटनाओं से ग्रामीणों और कर्मचारियों दोनों में असुरक्षा की भावना है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। क्या होनी चाहिए आगे की कार्रवाई? पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए वन्यजीव सुरक्षा के लिए मूलभूत ढांचे (जैसे कुओं की सुरक्षा) को मजबूत किया जाए फील्ड कर्मचारियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए संबंधित मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए निष्कर्ष गोहपारू की घटनाएं सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन संकेतों को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाता है या नहीं।
- मैहर। शहर के व्यस्त काली माता चौक में गुरुवार सुबह तेज रफ्तार का खतरनाक नजारा देखने को मिला। अनियंत्रित गति से दौड़ रहा एक ऑटो अचानक बेकाबू हो गया और सड़क किनारे खड़ी एक कार से जा टकराया। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो मौके पर ही पलट गया। इस हादसे में ऑटो में सवार स्कूल जा रही एक छात्रा गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना के तुरंत बाद आसपास मौजूद लोगों ने मानवता दिखाते हुए छात्रा को ऑटो से बाहर निकाला और बिना देर किए जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका इलाज जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि ऑटो चालक तेज रफ्तार में वाहन चला रहा था और संतुलन बिगड़ने के कारण यह दुर्घटना हुई। हादसे के बाद इलाके में कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि दुर्घटना के तुरंत बाद चालक मौके से फरार हो गया। इससे स्थानीय लोगों में नाराज़गी देखी गई और उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि आरोपी चालक को जल्द पकड़कर सख्त कार्रवाई की जाए। बढ़ती लापरवाही पर सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में तेज रफ्तार और लापरवाह ड्राइविंग की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं, लेकिन इस पर प्रभावी नियंत्रण नहीं हो पा रहा है। मांग फरार चालक की तुरंत गिरफ्तारी व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक निगरानी बढ़ाई जाए स्कूल टाइम में विशेष सुरक्षा व्यवस्था लागू हो1
- शहडोल गुरुवार को nh43 बायपास मार्ग में तेज रफ्तार स्कॉर्पियो वाहन अनियंत्रित होकर पलट गया हालांकि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों ने जानकारी देते हुए बताया है कि वाहन काफी तेज था और सामने से एक ट्रक आ रहा था, अचानक स्कॉर्पियो वाहन अनियंत्रित हो गया और पलट गया वहीं मौके पर स्थानीय लोगों की काफी भीड़ भी लगी रही है।1
- आज दिनांक 2.4.26 को श्री हनुमान जन्म उत्सव हनुमान जयंती के उपलक्ष में आज श्रमजीवी पत्रकार महासंघ के तत्वाधान में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया जिस पर श्रमजीवी पत्रकार के सभी पदाधिकारी राहुल सिंह राणा अरविंद द्विवेदी शैलेंद्र तिवारी जुनैद खान अनिल तिवारी द्वारा कलेक्टर परिषद मंदिर प्रांगण में विशाल भंडारे का आयोजन कर सभी भक्तों को प्रसाद वितरण किया गया जिसमें अजय पाल जितेंद्र विश्वकर्मा गणेश केवट अजय केवट अखिलेश मिश्रा राजन महाराज मनोज सिंह दीपक केवट सोनू खान स़वी खान बंटी अरुण द्विवेदी अमित तिवारी निलेश गुप्ता एवं सभी भारतीय श्रमजीवी पत्रकार महासंघ के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे1
- Post by Ashok Sondhiya1
- गर्मी में मां के संग पानी में मस्ती करते दिखे 4 शावक, बांधवगढ़ का दिल छू लेने वाला VIDEO वायरल उमरिया तपस गुप्ता (7999276090) जिले के बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से एक बेहद खूबसूरत और सुकून देने वाला वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। यह वीडियो खितोली जोन क्षेत्र का बताया जा रहा है, जहां रविवार की शाम एक बाघिन अपने चार नन्हे शावकों के साथ पानी में खेलती और उन्हें सिखाती नजर आई। गर्मी के इस मौसम में जहां जंगल के अधिकांश हिस्सों में पानी की कमी हो जाती है, वहीं ऐसे जलस्रोत वन्यजीवों के लिए राहत का सबसे बड़ा सहारा बन जाते हैं। वायरल वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि बाघिन अपने शावकों के साथ पानी में उतरकर न सिर्फ खुद को ठंडक दे रही है, बल्कि अपने बच्चों को भी पानी में रहने और सुरक्षित रहने के तरीके सिखा रही है। चारों शावक बेहद चंचल अंदाज में कभी पानी में छलांग लगाते दिखे, तो कभी मां के आसपास खेलते नजर आए। उनकी मासूम हरकतों ने इस वीडियो को और भी खास बना दिया है। मां बाघिन पूरे समय सतर्क नजर आई और हर पल अपने शावकों पर नजर रखती दिखी, जो जंगल के जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों के बीच यह वीडियो खासा चर्चा का विषय बना हुआ है। लोग इसे बांधवगढ़ के समृद्ध वन्यजीव और सुरक्षित माहौल का प्रतीक मान रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एक साथ चार शावकों का स्वस्थ और सक्रिय नजर आना इस बात का संकेत है कि क्षेत्र में शिकार और प्राकृतिक संसाधन पर्याप्त हैं। गौरतलब है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख टाइगर रिजर्व में से एक है, जहां बाघों की अच्छी खासी संख्या पाई जाती है। यहां का खितोली जोन खासतौर पर बाघों की मूवमेंट और उनके व्यवहार को देखने के लिए जाना जाता है। फिलहाल यह वीडियो लोगों के दिलों को छू रहा है और जंगल के उस खूबसूरत पहलू को सामने ला रहा है, जहां ममता, सुरक्षा और जीवन का संतुलन एक साथ नजर आता है।1
- उमरिया जिले की सियासत में कांग्रेस की एक सूची ने ऐसा बवंडर खड़ा कर दिया है जिसकी गूंज अब संगठन की साख तक पहुंच गई है। मामला मध्य प्रदेश कांग्रेस केश कला शिल्पी प्रकोष्ठ की प्रदेश स्तरीय नव-नियुक्त प्रबंध समिति से जुड़ा है जहां एक नाम ने पूरी राजनीति गरमा दी। सूची में उमरिया निवासी अनुज सेन को प्रदेश सचिव घोषित कर दिया गया लेकिन असली विवाद यहीं से शुरू हुआ। चौंकाने वाली बात यह है कि अनुज सेन खुद को भारतीय जनता पार्टी का सक्रिय कार्यकर्ता बताते हैं और वर्तमान में भाजपा नगर मंडल उमरिया में मंत्री पद पर काबिज हैं। ऐसे में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की सूची में उनका नाम शामिल होना सीधे-सीधे संगठन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। अनुज सेन ने इस घटनाक्रम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने साफ कहा कि उनका कांग्रेस से कोई संबंध नहीं है और वे वर्षों पहले ही पार्टी छोड़ चुके हैं। उनके मुताबिक, बिना जानकारी और सहमति के उनका नाम जोड़ना सिर्फ एक गलती नहीं बल्कि साजिश भी हो सकती है। सेन ने दो टूक कहा कि वे आगे भी भाजपा के साथ ही जुड़े रहेंगे। बताया जा रहा है कि अनुज सेन करीब 8 साल पहले कांग्रेस से अलग हो चुके थे और तब से लगातार भाजपा की राजनीति में सक्रिय हैं। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कांग्रेस की सूची तैयार करने में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या यह सिर्फ लापरवाही है या फिर संगठन के भीतर गहरी गड़बड़ी? इस पूरे मामले ने कांग्रेस को असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। विपक्ष को बैठे-बिठाए हमला करने का मौका मिल गया है वहीं संगठन के भीतर भी असंतोष की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। एक साधारण सूची में इस तरह की गलती ने कांग्रेस की गंभीरता और विश्वसनीयता दोनों पर चोट पहुंचाई है। विवाद बढ़ता देख कांग्रेस संगठन के महासचिव एडवोकेट पुष्पराज सिंह सामने आए और सफाई दी। उन्होंने स्वीकार किया कि अनुज सेन पहले कांग्रेस में थे लेकिन अब पार्टी का हिस्सा नहीं हैं। उनके अनुसार सूची में नाम शामिल होना एक तकनीकी त्रुटि है, जिसे जल्द ही ठीक कर लिया जाएगा। हालांकि यह सफाई कई सवालों को शांत करने में नाकाफी साबित हो रही है। क्या इतनी अहम नियुक्ति सूची बिना सही जांच के जारी कर दी गई? क्या संगठन में समन्वय की कमी है या फिर जिम्मेदारी तय करने का अभाव? उमरिया का यह मामला अब एक साधारण नाम जुड़ने की गलती नहीं रह गया है बल्कि कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और कार्यशैली पर बड़ा सवाल बनकर खड़ा हो गया है। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि कांग्रेस इस नुकसान की भरपाई कैसे करती है या यह मुद्दा आगे और सियासी रंग लेता है।1
- हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी वन विकास निगम हनुमान मंदिर मे हनुमान जयंती बड़ी धूम धाम से मनाया गया एवं रामायण. कीर्तन. भजन के साथ विशाल भंडारे का आयोजन किया4
- शहडोल। जिले के गोहपारू वन क्षेत्र में हाल ही में हुई घटनाओं ने प्रशासनिक सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर जहां एक तेंदुए की कुएं में गिरने से मौत हो गई, वहीं दूसरी ओर वन विभाग के कर्मचारियों पर हमले की घटना ने सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में लंबे समय से अव्यवस्थाएं बनी हुई हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही। इससे लोगों में नाराज़गी बढ़ती जा रही है। मुख्य सवाल जो उठ रहे हैं: 👉 वन्यजीव सुरक्षा पर लापरवाही? तेंदुए की मौत को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या सुरक्षा इंतजाम पर्याप्त थे। यदि कुएं के आसपास सुरक्षा दीवार या घेराबंदी होती, तो शायद यह घटना टाली जा सकती थी। 👉 कर्मचारियों की सुरक्षा पर खतरा वन विभाग की टीम पर हमले की घटना ने यह साफ कर दिया है कि फील्ड में काम कर रहे कर्मचारियों की सुरक्षा पर्याप्त नहीं है। ऐसे में उनके मनोबल पर भी असर पड़ रहा है। 👉 जिम्मेदारी तय क्यों नहीं? घटनाओं के बाद भी अब तक किसी स्तर पर स्पष्ट जवाबदेही तय नहीं होने से प्रशासनिक कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बढ़ रही चिंता गोहपारू क्षेत्र में लगातार सामने आ रही घटनाओं से ग्रामीणों और कर्मचारियों दोनों में असुरक्षा की भावना है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते सुधारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो हालात और गंभीर हो सकते हैं। क्या होनी चाहिए आगे की कार्रवाई? पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए वन्यजीव सुरक्षा के लिए मूलभूत ढांचे (जैसे कुओं की सुरक्षा) को मजबूत किया जाए फील्ड कर्मचारियों के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई जाए संबंधित मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए निष्कर्ष गोहपारू की घटनाएं सिर्फ एक इलाके की समस्या नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल हैं। अब देखना होगा कि प्रशासन इन संकेतों को गंभीरता से लेकर ठोस कदम उठाता है या नहीं।1