*संसाधनों की कमी के बीच लम्भुआ पशु चिकित्सालय में तीन दिन की बछिया और बकरी का सफल ऑपरेशन, चिकित्सक की कार्यशैली की लोगों ने की सराहना* लम्भुआ, सुलतानपुर। राजकीय पशु चिकित्सालय लम्भुआ भले ही लंबे समय से संसाधनों और सुविधाओं की कमी से जूझ रहा हो, लेकिन यहां तैनात पशु चिकित्सक डॉ. श्रवण कुमार द्वारा सीमित व्यवस्थाओं के बीच पशुओं का उपचार और जटिल ऑपरेशन किए जाने से पशुपालकों को राहत मिल रही है। हाल ही मे चिकित्सालय में एक तीन दिन की बछिया और एक बकरी का सफल ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद पशुपालकों ने चिकित्सक के प्रयासों की सराहना की।जौनपुर के अंगुली गांव निवासी अभिषेक यादव पुत्र गोरखनाथ अपनी महज तीन दिन की बछिया को लेकर लम्भुआ पशुचिकित्सालय पहुंचे थे। पशुपालक के अनुसार जन्म के बाद से ही बछिया को मल त्यागने में परेशानी हो रही थी। जांच में सामने आया कि बछिया में मल त्यागने का प्राकृतिक मार्ग नहीं था, जबकि पेशाब के दो अलग-अलग रास्ते बने हुए थे। यह स्थिति उसके लिए गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. श्रवण कुमार ने आवश्यक प्रक्रिया के बाद बछिया का ऑपरेशन किया और मल त्यागने के लिए मार्ग बनाया। ऑपरेशन सफल रहा और उपचार के बाद बछिया की हालत में सुधार बताया गया। इतनी कम उम्र के पशु का सफल ऑपरेशन होने पर पशुपालक ने चिकित्सक के प्रति आभार जताया।इसी दौरान लेदे पुत्र रामबली अपनी बकरी को लेकर चिकित्सालय पहुंचे। बताया गया कि बकरी के पेट में करीब सात माह का गर्भ था, लेकिन गर्भस्थ बच्चे की मौत हो चुकी थी। स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप आवश्यक था। डॉ. श्रवण कुमार ने ऑपरेशन कर मृत बच्चों को बाहर निकाला। बताया गया कि बकरी के पेट में दो बच्चे थे और दोनों की मौत हो चुकी थी। ऑपरेशन के बाद बकरी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि लम्भुआ का राजकीय पशु चिकित्सालय स्वयं लंबे समय से सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। पर्याप्त व्यवस्थाओं के अभाव में भी यहां गंभीर मामलों में उपचार और ऑपरेशन किए जा रहे हैं। लोगों के मुताबिक डॉ. श्रवण कुमार की तैनाती के बाद पशुपालकों में इस चिकित्सालय में अपने पशुओं का इलाज कराने का भरोसा बढ़ा है और दूर-दराज के लोग भी उपचार के लिए यहां पहुंच रहे हैं।पशुपालकों ने कहा कि पशु उनके लिए केवल जानवर नहीं बल्कि उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन हैं। ऐसे में समय पर इलाज और ऑपरेशन की सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से राजकीय पशु चिकित्सालय लम्भुआ में आवश्यक संसाधन, उपकरण, दवाएं तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि चिकित्सकों को बेहतर ढंग से उपचार करने में सुविधा मिले और पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए भटकना न पड़े लोगों का कहना है कि यदि चिकित्सालय को पर्याप्त संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो यहां पशुओं के गंभीर मामलों का और बेहतर उपचार संभव हो सकता है। सीमित संसाधनों में दो जटिल मामलों में सफल उपचार ने एक ओर चिकित्सक की कार्यक्षमता को सामने रखा है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सालय में मूलभूत सुविधाओं की जरूरत भी उजागर की है।
*संसाधनों की कमी के बीच लम्भुआ पशु चिकित्सालय में तीन दिन की बछिया और बकरी का सफल ऑपरेशन, चिकित्सक की कार्यशैली की लोगों ने की सराहना* लम्भुआ, सुलतानपुर। राजकीय पशु चिकित्सालय लम्भुआ भले ही लंबे समय से संसाधनों और सुविधाओं की कमी से जूझ रहा हो, लेकिन यहां तैनात पशु चिकित्सक डॉ. श्रवण कुमार द्वारा सीमित व्यवस्थाओं के बीच पशुओं का उपचार और जटिल ऑपरेशन किए जाने से पशुपालकों को राहत मिल रही है। हाल ही मे चिकित्सालय में एक तीन दिन की बछिया और एक बकरी का सफल ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद पशुपालकों ने चिकित्सक के प्रयासों की सराहना की।जौनपुर के अंगुली गांव निवासी अभिषेक यादव पुत्र गोरखनाथ अपनी महज तीन दिन की बछिया को लेकर लम्भुआ पशुचिकित्सालय पहुंचे थे। पशुपालक के अनुसार जन्म के बाद से ही बछिया
को मल त्यागने में परेशानी हो रही थी। जांच में सामने आया कि बछिया में मल त्यागने का प्राकृतिक मार्ग नहीं था, जबकि पेशाब के दो अलग-अलग रास्ते बने हुए थे। यह स्थिति उसके लिए गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. श्रवण कुमार ने आवश्यक प्रक्रिया के बाद बछिया का ऑपरेशन किया और मल त्यागने के लिए मार्ग बनाया। ऑपरेशन सफल रहा और उपचार के बाद बछिया की हालत में सुधार बताया गया। इतनी कम उम्र के पशु का सफल ऑपरेशन होने पर पशुपालक ने चिकित्सक के प्रति आभार जताया।इसी दौरान लेदे पुत्र रामबली अपनी बकरी को लेकर चिकित्सालय पहुंचे। बताया गया कि बकरी के पेट में करीब सात माह का गर्भ था, लेकिन गर्भस्थ बच्चे की मौत हो चुकी थी। स्थिति बिगड़ने
पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप आवश्यक था। डॉ. श्रवण कुमार ने ऑपरेशन कर मृत बच्चों को बाहर निकाला। बताया गया कि बकरी के पेट में दो बच्चे थे और दोनों की मौत हो चुकी थी। ऑपरेशन के बाद बकरी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि लम्भुआ का राजकीय पशु चिकित्सालय स्वयं लंबे समय से सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। पर्याप्त व्यवस्थाओं के अभाव में भी यहां गंभीर मामलों में उपचार और ऑपरेशन किए जा रहे हैं। लोगों के मुताबिक डॉ. श्रवण कुमार की तैनाती के बाद पशुपालकों में इस चिकित्सालय में अपने पशुओं का इलाज कराने का भरोसा बढ़ा है और दूर-दराज के लोग भी उपचार के लिए यहां पहुंच रहे हैं।पशुपालकों ने कहा कि पशु उनके लिए केवल जानवर नहीं बल्कि उनकी
आजीविका का महत्वपूर्ण साधन हैं। ऐसे में समय पर इलाज और ऑपरेशन की सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से राजकीय पशु चिकित्सालय लम्भुआ में आवश्यक संसाधन, उपकरण, दवाएं तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि चिकित्सकों को बेहतर ढंग से उपचार करने में सुविधा मिले और पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए भटकना न पड़े लोगों का कहना है कि यदि चिकित्सालय को पर्याप्त संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो यहां पशुओं के गंभीर मामलों का और बेहतर उपचार संभव हो सकता है। सीमित संसाधनों में दो जटिल मामलों में सफल उपचार ने एक ओर चिकित्सक की कार्यक्षमता को सामने रखा है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सालय में मूलभूत सुविधाओं की जरूरत भी उजागर की है।
- *संसाधनों की कमी के बीच लम्भुआ पशु चिकित्सालय में तीन दिन की बछिया और बकरी का सफल ऑपरेशन, चिकित्सक की कार्यशैली की लोगों ने की सराहना* लम्भुआ, सुलतानपुर। राजकीय पशु चिकित्सालय लम्भुआ भले ही लंबे समय से संसाधनों और सुविधाओं की कमी से जूझ रहा हो, लेकिन यहां तैनात पशु चिकित्सक डॉ. श्रवण कुमार द्वारा सीमित व्यवस्थाओं के बीच पशुओं का उपचार और जटिल ऑपरेशन किए जाने से पशुपालकों को राहत मिल रही है। हाल ही मे चिकित्सालय में एक तीन दिन की बछिया और एक बकरी का सफल ऑपरेशन किया गया, जिसके बाद पशुपालकों ने चिकित्सक के प्रयासों की सराहना की।जौनपुर के अंगुली गांव निवासी अभिषेक यादव पुत्र गोरखनाथ अपनी महज तीन दिन की बछिया को लेकर लम्भुआ पशुचिकित्सालय पहुंचे थे। पशुपालक के अनुसार जन्म के बाद से ही बछिया को मल त्यागने में परेशानी हो रही थी। जांच में सामने आया कि बछिया में मल त्यागने का प्राकृतिक मार्ग नहीं था, जबकि पेशाब के दो अलग-अलग रास्ते बने हुए थे। यह स्थिति उसके लिए गंभीर परेशानी का कारण बनी हुई थी।मामले की गंभीरता को देखते हुए डॉ. श्रवण कुमार ने आवश्यक प्रक्रिया के बाद बछिया का ऑपरेशन किया और मल त्यागने के लिए मार्ग बनाया। ऑपरेशन सफल रहा और उपचार के बाद बछिया की हालत में सुधार बताया गया। इतनी कम उम्र के पशु का सफल ऑपरेशन होने पर पशुपालक ने चिकित्सक के प्रति आभार जताया।इसी दौरान लेदे पुत्र रामबली अपनी बकरी को लेकर चिकित्सालय पहुंचे। बताया गया कि बकरी के पेट में करीब सात माह का गर्भ था, लेकिन गर्भस्थ बच्चे की मौत हो चुकी थी। स्थिति बिगड़ने पर चिकित्सकीय हस्तक्षेप आवश्यक था। डॉ. श्रवण कुमार ने ऑपरेशन कर मृत बच्चों को बाहर निकाला। बताया गया कि बकरी के पेट में दो बच्चे थे और दोनों की मौत हो चुकी थी। ऑपरेशन के बाद बकरी को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया।स्थानीय लोगों का कहना है कि लम्भुआ का राजकीय पशु चिकित्सालय स्वयं लंबे समय से सुविधाओं और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है। पर्याप्त व्यवस्थाओं के अभाव में भी यहां गंभीर मामलों में उपचार और ऑपरेशन किए जा रहे हैं। लोगों के मुताबिक डॉ. श्रवण कुमार की तैनाती के बाद पशुपालकों में इस चिकित्सालय में अपने पशुओं का इलाज कराने का भरोसा बढ़ा है और दूर-दराज के लोग भी उपचार के लिए यहां पहुंच रहे हैं।पशुपालकों ने कहा कि पशु उनके लिए केवल जानवर नहीं बल्कि उनकी आजीविका का महत्वपूर्ण साधन हैं। ऐसे में समय पर इलाज और ऑपरेशन की सुविधा मिलना बेहद जरूरी है। उन्होंने सरकार और जिला प्रशासन से राजकीय पशु चिकित्सालय लम्भुआ में आवश्यक संसाधन, उपकरण, दवाएं तथा अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि चिकित्सकों को बेहतर ढंग से उपचार करने में सुविधा मिले और पशुपालकों को अपने पशुओं के इलाज के लिए भटकना न पड़े लोगों का कहना है कि यदि चिकित्सालय को पर्याप्त संसाधन और आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध करा दी जाएं तो यहां पशुओं के गंभीर मामलों का और बेहतर उपचार संभव हो सकता है। सीमित संसाधनों में दो जटिल मामलों में सफल उपचार ने एक ओर चिकित्सक की कार्यक्षमता को सामने रखा है, वहीं दूसरी ओर चिकित्सालय में मूलभूत सुविधाओं की जरूरत भी उजागर की है।4
- पंचायत में उठीं किसानों की समस्याएं, सीओ-एसडीएम ने सुना पक्ष शीघ्र समाधान का दिया आश्वासन भारतीय किसान यूनियन राष्ट्रवादी की ओर से सोमवार को तहसील जयसिंहपुर के बगल बाग में किसानों की पंचायत आयोजित की गई। पंचायत की अध्यक्षता जिला उपाध्यक्ष राज नारायण तिवारी ने की। पूर्व सूचना के बावजूद संबंधित विभागों के अधिकारियों और उपजिलाधिकारी के पंचायत में उपस्थित नहीं होने से किसान नाराज हो गए। आक्रोशित किसानों ने नारेबाजी करते हुए उपजिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर दिया। किसानों के आक्रोश की जानकारी मिलने पर उपजिलाधिकारी संदीप कुमार यादव किसानों के बीच पहुंचे। उन्होंने कहा कि उन्हें पंचायत की जानकारी नहीं थी। उन्होंने तत्काल संबंधित विभागों के अधिकारियों को बुलाकर किसानों की समस्याओं पर वार्ता कराने का आश्वासन दिया। इसके करीब 10 मिनट बाद उपजिलाधिकारी संदीप कुमार यादव, तहसीलदार मयंक मिश्रा, क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार सिंह, विद्युत विभाग के अधिशासी अभियंता और खंड विकास अधिकारी जयसिंहपुर एसएन चतुर्वेदी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने किसानों की समस्याओं को बिंदुवार सुना और उनके निस्तारण को लेकर विस्तार से चर्चा की। किसानों ने क्षेत्राधिकारी सुनील कुमार सिंह और उपजिलाधिकारी संदीप कुमार यादव को विभिन्न समस्याओं से अवगत कराते हुए अपना मांगपत्र सौंपा। अधिकारियों ने किसानों को उनकी समस्याओं के शीघ्र निस्तारण का आश्वासन दिया। इसके बाद किसानों का आक्रोश शांत हुआ। बाबा संदीप श्रीवास्तव बने तहसील अध्यक्ष, कृष्णा वर्मा को मिली सचिव की जिम्मेदारी पंचायत के दौरान संगठनात्मक स्तर पर भी महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। जिला अध्यक्ष गौरी शंकर पांडे की मौजूदगी में सर्वसम्मति से बाबा संदीप श्रीवास्तव को तहसील अध्यक्ष जयसिंहपुर और कृष्णा वर्मा को तहसील सचिव मनोनीत किया गया। इस दौरान प्रदेश महासचिव रामकृपाल सिंह, जिला अध्यक्ष गौरी शंकर पांडे, जिला उपाध्यक्ष राज नारायण तिवारी व रमेश चंद्र दुबे, अरविंद चतुर्वेदी, तहसील प्रभारी कादीपुर कमालुद्दीन, तहसील उपाध्यक्ष लंभुआ अरविंद उपाध्याय, मोतिगरपुर ब्लॉक अध्यक्ष राम सुरेश यादव, सनी यादव, विशाल धुरिया, यशोदा, पिंकी दुबे, ए. गौतम पांडे, महेंद्र यादव, रामकिशन, बंसराज मौर्य, बड़े मिश्रा, सियाराम विश्वकर्मा, कृष्ण यादव, राजेश तिवारी सहित सैकड़ों पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।1
- शराबी पति से परेशान महिला की गुहार पर पुलिस बनी शहरा दरोगा ने घर पहुंच कर दिखाई इंसानियत प्रतापगढ़। शराबी पति की प्रताड़ना से परेशान महिला ने पुलिस से मदद की गुहार लगाई। महिला ने बताया कि उसका पति आए दिन उसके साथ मारपीट करता है और घर में मिलने वाला राशन भी शराब में खर्च कर देता है, जिससे परिवार के सामने खाने तक का संकट खड़ा हो जाता है। बिहारगंज क्षेत्र की रहने वाली महिला की शिकायत पर एसआई लक्ष्मीकांत सिंह मौके पर पहुंचे। घर की स्थिति देखकर पुलिसकर्मी भी हैरान रह गए। घर में राशन का अभाव था और छोटे बच्चे भूखे थे। स्थिति को देखते हुए एसआई लक्ष्मीकांत सिंह ने बच्चों को पहले खाना खिलाया तथा परिवार के लिए राशन और जरूरत के कपड़ों की व्यवस्था कराई। पुलिस की इस मानवीय पहल से परिवार के चेहरों पर मुस्कान लौट आई। वहीं पुलिस प्रशासन की ओर से महिला की शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आवश्यक कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कही गई। पुलिस की इस पहल ने एक बार फिर साबित किया कि कानून-व्यवस्था के साथ जरूरतमंदों की मदद और मानवीय संवेदना भी पुलिस की जिम्मेदारी का अहम हिस्सा है।1
- *मांधाता सरकारी अस्पताल में इलाज या बाहर की दवा का खेल?* *अस्पताल में 195 प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने का दावा, फिर मरीजों को बाहर की दवाएं क्यों? महिला चिकित्सक पर हर गर्भवती को अल्ट्रासाउंड लिखने के आरोप, लैब में *मांधाता सरकारी अस्पताल में इलाज या बाहर की दवा का खेल?* *अस्पताल में 195 प्रकार की दवाएं उपलब्ध होने का दावा, फिर मरीजों को बाहर की दवाएं क्यों? महिला चिकित्सक पर हर गर्भवती को अल्ट्रासाउंड लिखने के आरोप, लैब में जांच के नाम पर ₹50-100 लेने का भी सवाल* प्रतापगढ़। सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद मरीजों को बेहतर एवं सुलभ इलाज उपलब्ध कराना है, लेकिन मांधाता क्षेत्र के सरकारी अस्पताल को लेकर सामने आ रही शिकायतें इस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। आरोप है कि अस्पताल में इलाज कराने पहुंचने वाले गरीब मरीजों को बीमारी का डर दिखाकर महंगी एंटीबायोटिक समेत कई दवाएं बाहर से खरीदने के लिए लिखी जा रही हैं। सवाल यह है कि जब अस्पताल में पर्याप्त दवाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों को बाहर के मेडिकल स्टोर का रास्ता क्यों दिखाया जा रहा है? मामला यहीं तक सीमित नहीं बताया जा रहा। अस्पताल में कार्यरत महिला चिकित्सक को लेकर भी मरीजों की ओर से शिकायतें सामने आने का दावा है कि गर्भवती महिलाओं के पर्चे पर नियमित रूप से अल्ट्रासाउंड लिखा जा रहा है। यदि यह आरोप सही है तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या प्रत्येक गर्भवती महिला के लिए अल्ट्रासाउंड वास्तव में चिकित्सकीय रूप से आवश्यक है या फिर इसकी प्रक्रिया की भी जांच होनी चाहिए? *195 प्रकार की दवाएं उपलब्ध, फिर बाहर से खरीदारी क्यों?* सबसे बड़ा सवाल अस्पताल की दवा व्यवस्था को लेकर है। चिकित्सा प्रभारी द्वारा बताया गया कि अस्पताल में 195 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। इसके बावजूद चिकित्सकों द्वारा बाहर की दवाएं लिखे जाने की शिकायतें सामने आ रही हैं। यदि सरकारी अस्पताल के स्टॉक में संबंधित बीमारी की दवा मौजूद है और फिर भी मरीज को बाहर से वही अथवा समान दवा खरीदने की सलाह दी जा रही है, तो इसकी जांच कौन करेगा? क्या अस्पताल के दवा स्टॉक और मरीजों के पर्चों का मिलान कराया गया है? क्या कभी यह देखा गया कि चिकित्सकों ने उपलब्ध दवाओं के बजाय बाहर की दवाएं कितनी बार लिखीं? इन सवालों पर अस्पताल प्रशासन से स्पष्ट जवाब अपेक्षित है। *लैब में जांच के नाम पर ₹50 से ₹100 लेने का आरोप* अस्पताल की लैब व्यवस्था को लेकर भी गंभीर शिकायत सामने आई है। आरोप है कि लैब में कार्यरत शिव कुमार द्वारा ब्लड जांच के नाम पर किसी मरीज से ₹50 तो किसी से ₹100 तक लिए जा रहे हैं। यदि सरकारी अस्पताल की संबंधित जांच निःशुल्क है, तो मरीजों से रकम लेने का अधिकार किसने दिया? और यदि जांच के लिए कोई निर्धारित शुल्क है, तो उसकी सरकारी रसीद मरीजों को क्यों नहीं दी जा रही? इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है। *गरीब की मजबूरी पर कौन कमा रहा है?* सरकारी अस्पताल में आने वाला अधिकांश मरीज वह है जो निजी अस्पतालों का महंगा इलाज वहन नहीं कर सकता। ऐसे में यदि उसे बाहर की दवा, जांच या अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा जाता है तो उसकी जेब पर सीधा असर पड़ता है। मामला केवल ₹50, ₹100 या किसी एक दवा का नहीं है। असली सवाल सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही का है। जिलाधिकारी और स्वास्थ्य विभाग को चाहिए कि मांधाता अस्पताल के पिछले कुछ महीनों के ओपीडी पर्चों, दवा स्टॉक रजिस्टर, मरीजों द्वारा लिखी गई दवाओं, अल्ट्रासाउंड सलाह और लैब जांच से संबंधित रिकॉर्ड का मिलान कराएं। यदि आरोप गलत हैं तो जांच से स्थिति साफ हो जाएगी और यदि कहीं अनियमितता है तो जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। *जनता के सवाल जवाब कौन देगा?* 195 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं तो बाहर की दवा क्यों? हर गर्भवती महिला को अल्ट्रासाउंड लिखने का चिकित्सकीय आधार क्या है? लैब में ₹50-100 लिए जाने की शिकायत की जांच कब होगी? मरीजों से ली गई रकम की रसीद क्यों नहीं? अस्पताल के पर्चों और दवा स्टॉक का ऑडिट कब होगा? मांधाता का सरकारी अस्पताल गरीब मरीजों के भरोसे का केंद्र है। इसलिए सवाल यह नहीं कि आरोप किसने लगाए, बल्कि सवाल यह है कि सरकारी अस्पताल की व्यवस्था इन आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए कितनी तैयार है। खबर जनपद न्यूज़ 241
- सुलेमपुर में हरे आम के पेड़ की कटान, चिलबिल बताने पर उठे सवाल UP44 CT 1037 पिकअप में लदी मिली आम की लकड़ी, वन विभाग की कार्रवाई पर नजर जयसिंहपुर/सुलतानपुर। जयसिंहपुर क्षेत्र के ग्राम सुलेमपुर में हरे आम के पेड़ की कटान का मामला सामने आया है। सूचना के बाद मौके पर पहुंचे वन विभाग के कर्मचारियों द्वारा प्रारंभिक तौर पर कटे पेड़ को चिलबिल का पेड़ बताया गया। वहीं, बाद में वीडियो कॉल के माध्यम से घटनास्थल का निरीक्षण कराए जाने पर पेड़ आम का होने की बात सामने आई। जानकारी के अनुसार ग्राम सुलेमपुर में राहुल निषाद ठेकेदार द्वारा हरे आम के पेड़ की कटान कराए जाने की सूचना वन विभाग को मिली थी। सूचना पर वन विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर वन विभाग की ओर से पेड़ को चिलबिल का बताए जाने के बाद मीडिया कर्मी ने जयसिंहपुर रेंज के रेंजर मोहम्मद जायर से मामले की जानकारी ली। इसके बाद वीडियो कॉल के माध्यम से रेंजर को घटनास्थल और काटे गए पेड़ की स्थिति दिखाई गई। वीडियो निरीक्षण के दौरान पेड़ की पहचान आम के हरे पेड़ के रूप में किए जाने की बात सामने आई। घटनास्थल पर UP44 CT 1037 नंबर की पिकअप में आम की लकड़ी लदी होने की जानकारी भी सामने आई है। इससे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। अब सवाल यह है कि आम के हरे पेड़ की कटान के लिए संबंधित व्यक्ति के पास वन विभाग अथवा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति थी या नहीं। मामले में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि वन विभाग द्वारा लकड़ी को कब्जे में लेकर जांच की जाती है या नहीं तथा पेड़ की कटान के संबंध में कोई वैध दस्तावेज अथवा अनुमति प्रस्तुत की जाती है। फिलहाल पूरे मामले में वन विभाग की आगामी कार्रवाई पर नजर बनी हुई है। कटान की अनुमति, पेड़ की वास्तविक प्रजाति और नियमों के उल्लंघन की स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।1
- राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के मामले में अब 29 सितंबर को होगी सुनवाई। सुल्तानपुर राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि के मामले में अब 29 सितंबर को होगी सुनवाई। वादी पक्ष के अधिवक्ता संतोष पांडेय द्वारा की गई आंशिक बहस। अब 29 सितम्बर को बहस की सुनवाई की तिथि हुई नियत। करीब 8 वर्ष पुराने मामले में चल रहा मानहानि का केस। कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल ने तत्कालीन बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह पर दिया था आपत्तिजनक बयान। इसी बयान से आहत बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने दाखिल किया था परिवाद। कोर्ट ने परिवाद स्वीकार कर मुकदमा चलाने का दिया था आदेश। मामले में जमानत पर चल रहे हैं राहुल गांधी। कोर्ट में राहुल गांधी दर्ज करवा चुके हैं अपना बयान। दीवानी में एमपी एमएलए कोर्ट में चल रहा मानहानि का केस।1
- तालाब की जमीन पर शौचालय निर्माण का आरोप, दबाव में तहसील प्रशासन नही कर रहा कार्रवाई। जयसिंहपुर तहसील क्षेत्र के उमरी गांव में तालाब की जमीन पर शौचालय निर्माण कर अवैध कब्जा किए जाने का मामला सामने आया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी जमीन पर निर्माण कार्य की जानकारी राजस्व विभाग के अधिकारियों को होने के बावजूद अब तक मौके पर पहुंचकर जांच नहीं की गई। इससे निर्माण कार्य लगातार जारी है। ग्रामीणों के मुताबिक तालाब की जमीन पर एक स्थानीय जनप्रतिनिधि द्वारा शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। निर्माण शुरू होने की जानकारी संबंधित अधिकारियों को है। आरोप है कि अधिकारियों को जानकारी होने के बावजूद निर्माण कार्य रोकने या मौके की जांच कराने की कार्रवाई नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी जमीन पर इस तरह कब्जा किए जाने से तालाब का स्वरूप प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि संबंधित व्यक्ति इससे पहले भी सरकारी जमीन पर कब्जा करने का प्रयास करता रहा है। ग्रामीणों ने तहसील प्रशासन से मौके की जांच कराकर तालाब की जमीन को कब्जामुक्त कराने और निर्माण कार्य पर रोक लगाने की मांग की है।2
- दुष्कर्म के मामले में वांछित अभियुक्त को थाना चांदा पुलिस ने मुम्बई से किया गिरफ्तार, ट्रांजिट रिमांड पर सुलतानपुर लाया गया *थाना चांदा, जनपद सुलतानपुर* *दिनांक – 21.09.2026* *दुष्कर्म के मामले में वांछित अभियुक्त को थाना चांदा पुलिस ने मुम्बई से किया गिरफ्तार, ट्रांजिट रिमांड पर सुलतानपुर लाया गया* *पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर श्री विनीत जायसवाल के निर्देशन में अपराध एवं अपराधियों के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के क्रम में, अपर पुलिस अधीक्षक सुलतानपुर के मार्गदर्शन एवं क्षेत्राधिकारी लम्भुआ के कुशल पर्यवेक्षण में थाना चांदा पुलिस द्वारा सर्विलांस एवं मुखबिर तंत्र की सहायता से दुष्कर्म के मामले में वांछित अभियुक्त को *मुम्बई (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार* करने में सफलता प्राप्त की गई। थाना चांदा पर पंजीकृत मु0अ0सं0 220/2026, धारा 64(1)/351(3)/352 बीएनएस में वांछित अभियुक्त आसिफ खान पुत्र मुस्लिम खान, निवासी ग्राम सिंहनपुर (ताले मुड़ैला), थाना चांदा, जनपद सुलतानपुर, उम्र करीब 21 वर्ष की तलाश की जा रही थी। सर्विलांस एवं मुखबिर से प्राप्त सूचना के आधार पर थाना चांदा पुलिस टीम द्वारा अभियुक्त को सोनापुर, भांडुप (पश्चिम), थाना भांडुप क्षेत्रान्तर्गत, मुम्बई (महाराष्ट्र) से गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तारी के उपरान्त अभियुक्त को माननीय न्यायालय प्रथम वर्ग न्याय दण्डाधिकारी, कोर्ट संख्या-53, मुलुण्ड, मुम्बई के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जहाँ से अभियुक्त का 03 दिवस का ट्रांजिट रिमांड प्राप्त किया गया। ट्रांजिट रिमांड प्राप्त होने के उपरान्त अभियुक्त को जनपद सुलतानपुर लाया गया। अभियुक्त को माननीय न्यायालय ए0सी0जे0एम0/कोर्ट संख्या-17, सुलतानपुर के समक्ष प्रस्तुत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। *गिरफ्तार अभियुक्त का नाम व पता:*--आसिफ खान पुत्र मुस्लिम खान, निवासी ग्राम सिंहनपुर (ताले मुड़ैला), थाना चांदा, जनपद सुलतानपुर, उम्र करीब 21 वर्ष। *गिरफ्तार करने वाली पुलिस टीम:* निरीक्षक श्री धर्मेन्द्र कुमार मिश्रा, थाना चांदा, जनपद सुलतानपुर। कां0 सूर्यभान, थाना चांदा, जनपद सुलतानपुर।1