*आरपीएस सेवा संस्थान ने असहाय परिवार के दो बच्चों को दिया आश्रय, सुरक्षित भविष्य की पहल* रामप्रवेश गुप्ता *महुआडांड़:* लातेहार जिले के ग्राम बारेसांड से मानवता और सामाजिक सेवा का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है, जहां अत्यंत गरीब और असहाय परिवार के दो मासूम बच्चों को आरपीएस सेवा संस्थान चेरिटेबल ट्रस्ट ने आश्रम में आश्रय देकर उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान की इस पहल की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। *मानसिक रूप से अस्वस्थ माता वही पिता है दृष्टि बाधित, पुत्र के आग में झुलसने के बाद से थे चिंतित* ग्राम बारेसांड, थाना बारेसांड, जिला लातेहार निवासी दिलबहार सिंह दृष्टिबाधित हैं, जबकि उनकी पत्नी तेतरी देवी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था। पिता दिलबाहर बताते हैं कि कुछ महीने पूर्व ही पुत्र आग से बुरी तरह झुलस गया था। तब ग्रामीणों और अधिकारियों के सहयोग से पुत्र को बचाया गया था। जिसके कारण सुरक्षा को लेकर विशेष चिंतित रहते हैं। माता-पिता दोनों शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग है ऐसे में बच्चों को नियंत्रित करना बहुत ही कठिन है। पुत्र के आग में झुलसने के दौरान घर पर होने के बावजूद घटना को समझने में उन्हें देर हुई थी, ऐसे में बच्चों की सुरक्षा माता-पिता के समक्ष एक बड़ी चुनौती थी। घटना के बाद से ही लगातार वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से मिल रहे थे। *आरपीएस सेवा संस्थान ने दिया असहाय बच्चों को आश्रय* आरपीएस सेवा संस्थान के संचालक कमलेश यादव ने बताया की बारेसाढ़ गांव के समाजसेवी एवं ग्रामीणों ने आरपीएस सेवा संस्थान से अपील की थी की इन असहाय गरीब बच्चों को भी अपने आश्रम में जगह दे जिसके बाद संस्थान द्वारा दोनों बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित वातावरण, उचित भोजन और समुचित देखभाल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आश्रम लाने का निर्णय लिया गया। यह पूरी प्रक्रिया अरविंद गुप्ता, श्रवण गुप्ता, वनपाल परमजीत तिवारी एवं बारेसांड थाना के एसआई कृष्णा गोड सोरे की उपस्थिति में संपन्न हुई।
*आरपीएस सेवा संस्थान ने असहाय परिवार के दो बच्चों को दिया आश्रय, सुरक्षित भविष्य की पहल* रामप्रवेश गुप्ता *महुआडांड़:* लातेहार जिले के ग्राम बारेसांड से मानवता और सामाजिक सेवा का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है, जहां अत्यंत गरीब और असहाय परिवार के दो मासूम बच्चों को आरपीएस सेवा संस्थान चेरिटेबल ट्रस्ट ने आश्रम में आश्रय देकर उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान की इस पहल की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। *मानसिक रूप से अस्वस्थ माता वही पिता है दृष्टि बाधित, पुत्र के आग में झुलसने के बाद से थे चिंतित* ग्राम बारेसांड, थाना बारेसांड, जिला लातेहार निवासी दिलबहार सिंह दृष्टिबाधित हैं, जबकि उनकी पत्नी तेतरी देवी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था। पिता दिलबाहर बताते हैं कि कुछ महीने पूर्व ही पुत्र आग से बुरी तरह झुलस गया था। तब ग्रामीणों और अधिकारियों के सहयोग से पुत्र को बचाया गया था। जिसके कारण सुरक्षा को
लेकर विशेष चिंतित रहते हैं। माता-पिता दोनों शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग है ऐसे में बच्चों को नियंत्रित करना बहुत ही कठिन है। पुत्र के आग में झुलसने के दौरान घर पर होने के बावजूद घटना को समझने में उन्हें देर हुई थी, ऐसे में बच्चों की सुरक्षा माता-पिता के समक्ष एक बड़ी चुनौती थी। घटना के बाद से ही लगातार वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से मिल रहे थे। *आरपीएस सेवा संस्थान ने दिया असहाय बच्चों को आश्रय* आरपीएस सेवा संस्थान के संचालक कमलेश यादव ने बताया की बारेसाढ़ गांव के समाजसेवी एवं ग्रामीणों ने आरपीएस सेवा संस्थान से अपील की थी की इन असहाय गरीब बच्चों को भी अपने आश्रम में जगह दे जिसके बाद संस्थान द्वारा दोनों बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित वातावरण, उचित भोजन और समुचित देखभाल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आश्रम लाने का निर्णय लिया गया। यह पूरी प्रक्रिया अरविंद गुप्ता, श्रवण गुप्ता, वनपाल परमजीत तिवारी एवं बारेसांड थाना के एसआई कृष्णा गोड सोरे की उपस्थिति में संपन्न हुई।
- रामप्रवेश गुप्ता *महुआडांड़:* लातेहार जिले के ग्राम बारेसांड से मानवता और सामाजिक सेवा का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है, जहां अत्यंत गरीब और असहाय परिवार के दो मासूम बच्चों को आरपीएस सेवा संस्थान चेरिटेबल ट्रस्ट ने आश्रम में आश्रय देकर उनके बेहतर भविष्य की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संस्थान की इस पहल की क्षेत्र में व्यापक सराहना हो रही है। *मानसिक रूप से अस्वस्थ माता वही पिता है दृष्टि बाधित, पुत्र के आग में झुलसने के बाद से थे चिंतित* ग्राम बारेसांड, थाना बारेसांड, जिला लातेहार निवासी दिलबहार सिंह दृष्टिबाधित हैं, जबकि उनकी पत्नी तेतरी देवी मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत दयनीय होने के कारण बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया था। पिता दिलबाहर बताते हैं कि कुछ महीने पूर्व ही पुत्र आग से बुरी तरह झुलस गया था। तब ग्रामीणों और अधिकारियों के सहयोग से पुत्र को बचाया गया था। जिसके कारण सुरक्षा को लेकर विशेष चिंतित रहते हैं। माता-पिता दोनों शारीरिक व मानसिक रूप से विकलांग है ऐसे में बच्चों को नियंत्रित करना बहुत ही कठिन है। पुत्र के आग में झुलसने के दौरान घर पर होने के बावजूद घटना को समझने में उन्हें देर हुई थी, ऐसे में बच्चों की सुरक्षा माता-पिता के समक्ष एक बड़ी चुनौती थी। घटना के बाद से ही लगातार वे अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सामाजिक कार्यकर्ताओं, ग्रामीणों एवं प्रशासनिक अधिकारियों से मिल रहे थे। *आरपीएस सेवा संस्थान ने दिया असहाय बच्चों को आश्रय* आरपीएस सेवा संस्थान के संचालक कमलेश यादव ने बताया की बारेसाढ़ गांव के समाजसेवी एवं ग्रामीणों ने आरपीएस सेवा संस्थान से अपील की थी की इन असहाय गरीब बच्चों को भी अपने आश्रम में जगह दे जिसके बाद संस्थान द्वारा दोनों बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित वातावरण, उचित भोजन और समुचित देखभाल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से आश्रम लाने का निर्णय लिया गया। यह पूरी प्रक्रिया अरविंद गुप्ता, श्रवण गुप्ता, वनपाल परमजीत तिवारी एवं बारेसांड थाना के एसआई कृष्णा गोड सोरे की उपस्थिति में संपन्न हुई।2
- मांदर की थाप पर झूमा चैनपुर, सरहुल महोत्सव में इक्कीस गांवों के खोड़ा दलों ने बिखेरी सांस्कृतिक छटा चैनपुर प्रखंड में प्रकृति और आस्था का महापर्व सरहुल हर्षोल्लास एवं पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया। जानकारी देते हुए शाम तीन बजे बताया गया कि प्रेम नगर स्थित सरना स्थल पर आयोजित मुख्य समारोह में श्रद्धा, संस्कृति और परंपरा का अद्भुत संगम देखने को मिला, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत ग्राम बैगा रवि प्रसाद बैगा द्वारा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना कर की गई। सरना स्थल पर विधिवत पूजा संपन्न कर क्षेत्र की सुख-शांति, अच्छी वर्षा और समृद्धि की कामना की गई। परंपरा अनुसार बैगा द्वारा श्रद्धालुओं के कानों में सरई फूल लगाया गया तथा जल अर्पित कर आशीर्वाद दिया गया। पूजा के बाद सरना स्थल से भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो प्रेम नगर एवं बस स्टैंड होते हुए पूरे नगर का भ्रमण किया। इस दौरान पूरा क्षेत्र मांदर, ढोल, नगाड़ा और झांझ की गूंज से गुंजायमान रहा। पारंपरिक वेशभूषा में पुरुष, महिलाएं और युवा एक साथ लोकधुनों पर थिरकते नजर आए। महोत्सव में कुल इक्कीस गांवों के श्रद्धालुओं ने भाग लिया। दुर्गा मंदिर परिसर में विभिन्न गांवों से पहुंचे खोड़ा दलों ने आकर्षक लोकनृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में इंस्पेक्टर जितेंद्र राम, प्रखंड विकास पदाधिकारी यादव बैठा एवं जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा उपस्थित रहे। अतिथियों ने कलाकारों और खोड़ा दलों को सम्मानित करते हुए प्रकृति संरक्षण एवं सांस्कृतिक परंपराओं को बचाए रखने का संदेश दिया। समारोह को सफल बनाने में आयोजन समिति के अध्यक्ष कुलदीप बैगा, सचिव अंतु भगत, संतोष कुमार, बसंत कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों और ग्रामीणों का सराहनीय योगदान रहा। सरहुल पर्व को लेकर पूरे चैनपुर क्षेत्र में उत्सव और उल्लास का वातावरण बना रहा। #Sarhul2026 #SarhulFestival #ChainpurGumla #JharkhandCulture #AdivasiSanskriti #SarnaDharma #GumlaNews #JharkhandNews #LocalNews #FestivalCelebration #TraditionalDance #PublicAppNews1
- चैनपुर (गुमला): चैनपुर थाना क्षेत्र के केड़ेंग गांव में एक मामूली विवाद ने अचानक हिंसक रूप ले लिया, जिसमें एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया गया। घटना में गंभीर रूप से घायल जेम्स टोप्पो को इलाज के लिए सदर अस्पताल गुमला रेफर किया गया है, जहां उसकी स्थिति नाजुक बताई जा रही है।1
- यह पर्व वसंत ऋतु के आगमन और नई फसलों के स्वागत का एक अत्यंत खूबसूरत और प्राचीन आदिवासी उत्सव है। चैनपुर क्षेत्र में सरहुल को लेकर स्थानीय लोगों और जनजातीय समाज में एक अलग ही उत्साह और उमंग देखने को मिला। सरहुल का शाब्दिक अर्थ 'साल (सखुआ) के पेड़ों की पूजा' है, जो इस बात का प्रमाण है कि प्रकृति ही हमारी सच्ची रक्षक है।4
- Post by Ratan Choudhry1
- बलरामपुर। जिले में एक किसान ने न्याय मिलने की खुशी अनोखे तरीके से मनाई। हाई कोर्ट के आदेश के बाद किसान राजदेव मिंज रविवार को बैंड-बाजे और ग्रामीणों के साथ नाचते-गाते धान बेचने खरीदी केंद्र पहुंचे। किसान का धान प्रशासनिक प्रक्रिया में फंस गया था और समय पर टोकन नहीं कटने के कारण उसकी फसल सरकारी खरीदी में नहीं बिक पाई थी। बाद में किसान ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां से उसे राहत मिली। जानकारी के अनुसार जिला मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर चित विश्रामपुर पंचायत निवासी किसान राजदेव मिंज का करीब 524 बोरा धान ऑनलाइन टोकन नहीं कट पाने के कारण निर्धारित समय में सरकारी खरीदी केंद्र में नहीं बिक पाया था। किसान का आरोप है कि वह कई बार अपने भाइयों के साथ धान खरीदी केंद्र टोकन कटवाने पहुंचा, लेकिन उनका टोकन नहीं काटा गया। यहां तक कि उनका आवेदन भी नहीं लिया गया और यह कहकर लौटा दिया गया कि खरीदी की लिमिट खत्म हो चुकी है। किसान ने बताया कि इस संबंध में अधिकारियों से भी संपर्क किया गया, लेकिन वहां से सिर्फ आश्वासन ही मिला। अंततः परेशान होकर किसान ने छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट में याचिका दायर की। मामले की सुनवाई के बाद माननीय हाई कोर्ट ने किसान के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रशासन को धान खरीदी कराने का आदेश दिया। कोर्ट के आदेश के बाद रविवार को किसान राजदेव मिंज अपने गांव के लोगों के साथ ट्रैक्टर में धान लोड कर बैंड-बाजे के साथ बरदर धान खरीदी केंद्र पहुंचे। न्याय मिलने की खुशी में किसान और ग्रामीण बैंड की धुन पर नाचते-गाते हुए खरीदी केंद्र तक पहुंचे और वहां धान की तौल कराकर समर्थन मूल्य पर अपनी फसल बेची। इस दौरान कांग्रेस जिलाध्यक्ष हरिहर प्रसाद यादव भी अपने कार्यकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंचे और किसान का समर्थन किया। उन्होंने धान खरीदी व्यवस्था को लेकर राज्य की बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए इसे किसान विरोधी सरकार बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट का यह फैसला प्रदेश के किसानों की जीत है। धान खरीदी केंद्र में किसान के जश्न को देखने के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण और स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। न्याय मिलने की खुशी में किसान और उसके समर्थकों ने बैंड-बाजे के साथ जश्न मनाया और अपनी फसल की तौल कराई।1
- बलरामपुर जिले के विकासखंड कुसमी के अंतर्गत ग्राम इदरीकला के ग्रामीण आज भी मूलभूत योजना जैसे हक के लिए वांछित है चुनाव के दौरान नेता मंत्री आते हैं और आश्वासन के पुल बांधते हैं लेकिन चुनाव खत्म होते ही सारे आश्वासन ठंडा बस्ते में चला जाता है आखिर कौन है इसका इदरीकला के ग्रामीण कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन शॉप कर न्याय गुहार लगा रहे हैं1
- मशरूम खेती से बदलेगी डुमरी की तस्वीर, पाँच सौ जनजातीय परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की पहल 📍 डुमरी (गुमला) : आकांक्षी प्रखंड कार्यक्रम के अंतर्गत डुमरी प्रखंड में मशरूम कल्टीवेशन परियोजना के माध्यम से जनजातीय एवं पीवीटीजी परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विशेष पहल शुरू की गई है। जानकारी देते हुए शाम छह बजे बताया गया कि जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में इस योजना को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। जिला योजना पदाधिकारी रमण कुमार ने बताया कि इस योजना के तहत डुमरी प्रखंड के कुल पाँच सौ पीवीटीजी एवं जनजातीय परिवारों को मशरूम खेती से जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रथम चरण में मॉडल गांव औरापाट के पैंतालीस परिवारों के बीच मशरूम किट का वितरण किया गया तथा उन्हें ऑयस्टर मशरूम उत्पादन का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान लाभुकों को कम लागत में घर के छोटे स्थानों पर मशरूम उत्पादन की आधुनिक तकनीक सिखाई गई। साथ ही उत्पादन, भंडारण एवं विपणन से जुड़ी जानकारी दी गई, ताकि ग्रामीण परिवार नियमित आय अर्जित कर सकें। उन्होंने बताया कि परियोजना के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। मशरूम उत्पादन से जुड़े लाभुकों को उनके उत्पाद की खरीद सुनिश्चित करने के लिए चेक प्रदान किए जा रहे हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि होने के साथ जीवन स्तर में भी सुधार देखने को मिल रहा है। जिला प्रशासन का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों को स्वरोजगार से जोड़ते हुए आर्थिक रूप से सशक्त बनाना है, ताकि डुमरी प्रखंड आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ सके। #GumlaNews #DumriGumla #MushroomFarming #AakankshiBlockProgram #JharkhandNews #RuralDevelopment #SelfReliance #TeamPRDGumla1