अमरोहा पुलिस ने नौगांवा थाना क्षेत्र में आम के बाग ठेकेदार की सनसनीखेज हत्या के मामले का महज दो दिन में खुलासा कर दिया है। इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक की जान किसी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उसके अपने बेटे ने ही अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर ली थी। पुलिस ने मृतक के पुत्र सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया है। नौगांवा सादात थाना क्षेत्र के गांव गजस्थल निवासी रईस अहमद टेंट हाउस का कारोबार करते थे और आम के बाग भी ठेके पर लेते थे। बीती एक-दो जून की रात वह बाग में अपनी चारपाई पर सो रहे थे, जब उन्हें गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया गया। उपचार के लिए पहले उन्हें जिला अस्पताल और फिर मेरठ मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव के निर्देशन में गठित टीम ने जब मामले की गहन जांच की तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। विवेचना में पता चला कि रईस अहमद ने व्यापार से करीब दो लाख रुपये कमाए थे, जिन्हें लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। आरोप है कि मृतक शराब पीने का आदी था और अक्सर अपनी पत्नी शाहजहां उर्फ सज्जो के साथ मारपीट और अभद्रता करता था, जिसके कारण बच्चे भी अपनी माँ का पक्ष लेते थे। पुलिस पूछताछ में मृतक के पुत्र आयान ने स्वीकार किया कि घरेलू विवाद और माँ के साथ होने वाले दुर्व्यवहार से परेशान होकर उसने अपने दोस्तों दीपांशु और दीपक के साथ मिलकर पिता की हत्या की योजना बनाई थी। योजना के तहत तीनों रात में बाग पहुँचे और सो रहे रईस के सिर में गोली मारकर फरार हो गए। पुलिस ने आयान, दीपांशु और दीपक को देहरा चौराहे से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त 12 बोर का तमंचा और खोखा कारतूस बरामद हुआ है। पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
अमरोहा पुलिस ने नौगांवा थाना क्षेत्र में आम के बाग ठेकेदार की सनसनीखेज हत्या के मामले का महज दो दिन में खुलासा कर दिया है। इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक की जान किसी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उसके अपने बेटे ने ही अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर ली थी। पुलिस ने मृतक के पुत्र सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया है। नौगांवा सादात थाना क्षेत्र के गांव गजस्थल निवासी रईस अहमद टेंट हाउस का कारोबार करते थे और आम के बाग भी ठेके पर लेते थे। बीती एक-दो जून की रात वह बाग में अपनी चारपाई पर सो रहे थे, जब उन्हें गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया गया। उपचार के लिए पहले उन्हें जिला अस्पताल और फिर मेरठ मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव के निर्देशन में गठित टीम ने जब मामले की गहन जांच की तो हैरान
करने वाले तथ्य सामने आए। विवेचना में पता चला कि रईस अहमद ने व्यापार से करीब दो लाख रुपये कमाए थे, जिन्हें लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। आरोप है कि मृतक शराब पीने का आदी था और अक्सर अपनी पत्नी शाहजहां उर्फ सज्जो के साथ मारपीट और अभद्रता करता था, जिसके कारण बच्चे भी अपनी माँ का पक्ष लेते थे। पुलिस पूछताछ में मृतक के पुत्र आयान ने स्वीकार किया कि घरेलू विवाद और माँ के साथ होने वाले दुर्व्यवहार से परेशान होकर उसने अपने दोस्तों दीपांशु और दीपक के साथ मिलकर पिता की हत्या की योजना बनाई थी। योजना के तहत तीनों रात में बाग पहुँचे और सो रहे रईस के सिर में गोली मारकर फरार हो गए। पुलिस ने आयान, दीपांशु और दीपक को देहरा चौराहे से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त 12 बोर का तमंचा और खोखा कारतूस बरामद हुआ है। पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।
- अमरोहा जनपद के रहरा थाना क्षेत्र के खेलिया खालसा गाँव में 26 वर्षीय कमलेश नाम की महिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। महिला की मौत की खबर मिलते ही उसके मायके वाले तुरंत मौके पर पहुँचे और उन्होंने ससुराल पक्ष पर गंभीर आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया, जिसके बाद पूरे गाँव में तनाव का माहौल बन गया है। बताया जा रहा है कि पिछले कुछ समय से परिवार में पैसों के लेन-देन और घरेलू बातों को लेकर अनबन चल रही थी। हाल ही में गंगा स्नान के दौरान भी दोनों पक्षों के बीच विवाद हुआ था। कमलेश अपने पीछे एक पाँच साल की बेटी और तीन साल के बेटे को छोड़ गई है, जो अपनी माँ को खोने के बाद रो-रोकर बेहाल हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए कई थानों की पुलिस और भारी बल गाँव में तैनात कर दिया गया है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है, और अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि जाँच पूरी होने के बाद आगे की आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।2
- नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने मऊ से अमरोहा आकर अपना कार्यभार ग्रहण कर लिया है। कार्यभार संभालने के तुरंत बाद, ईओ दिनेश कुमार चेयरमैन शशि जैन के निवास स्थान पहुंचे, जहाँ उन्होंने पूर्व पालिका अध्यक्ष और भाजपा के वरिष्ठ नेता अतुल कुमार जैन, युवा भाजपा नेता अखिल जैन और निखिल जैन से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान शहर के विकास पर व्यापक चर्चा हुई। अधिशासी अधिकारी दिनेश कुमार ने बताया कि उनकी पहली प्राथमिकता शहर का चौमुखी विकास सुनिश्चित करना और आम जनता की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर निपटाना रहेगी। उन्होंने पालिका के कर्मचारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि काम में किसी भी कीमत पर कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने समय पर काम पूरा करने पर जोर दिया और कहा कि सभी की संतुष्टि ही उनकी मुख्य पहल होगी, ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की परेशानी न हो और उन्हें पालिका द्वारा प्रदान की जा सकने वाली हर सुविधा मिल सके। ईओ दिनेश कुमार ने अमरोहा की जनता से अपील करते हुए कहा कि वे पालिका का सहयोग करें और शहर को साफ-सुथरा रखने में मदद करें।1
- उत्तर प्रदेश के हापुड़ जनपद में कोतवाली क्षेत्र के आलमपुर में एक 21 वर्षीय अविवाहित युवती ने गुरुवार सुबह फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली, जिससे उसके परिवार में गहरा कोहराम मच गया है। बताया गया है कि युवती ने 'किसी बात पर' यह कदम उठाया। जब परिजनों ने युवती को पुकारा और कोई आवाज नहीं मिली, तो वे उसके पास पहुँचे और उसे फंदे से लटका हुआ पाया। इस सूचना पर पुलिस तुरंत मौके पर पहुँची, लेकिन परिवार के सदस्यों ने युवती के शव का पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया। पुलिस इस पूरे मामले की गहनता से जाँच कर रही है।1
- साधु-संतों ने संसद में गाय हत्या पर प्रतिबंध लगाने और कानून बनाने के लिए गोलियां खाई थीं। आरोप है कि जवाहरलाल नेहरू के दोपहर के भोजन में गाय का मांस शामिल होता था और उन्हें इसका बहुत शौक था। कहा जाता है कि नेहरू का यह 'राजसिक भोजन' था और उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि गाय का मांस बिकना बंद हो गया, तो उनका दोपहर का भोजन भी बंद हो जाएगा। दावा है कि गाय का मांस मुस्लिम लीग द्वारा ही खाया जाता है, क्योंकि वे घास खाने वाले जानवरों को अपना शिकार मानते हैं और उनके लिए यह 'शुद्ध' है। आरोप है कि ये बकरी और गाय जैसे शाकाहारी जानवरों की बलि देते हैं और उनका मांस खाते हैं, इन शाकाहारी जानवरों का रक्त 'बाल' नामक शैतान पर चढ़ाते हैं, जबकि यह 'अल्लाह के रसूल' में नहीं लिखा है। यह भी कहा गया है कि ये अल्लाह के नाम पर लोगों की गर्दनें उड़ाते हैं, जबकि सऊदी अरब में जन्में इस्लाम के प्रमाणों को 'राजसिक प्रवृत्ति' में लाने के लिए आधुनिक यंत्रों जैसे फोन और कंप्यूटर का इस्तेमाल करना उनकी कौम में 'हराम' है। शरीयत के लिए इन्होंने जिहाद शुरू किया है, जिसका सरल तरीका है 'जहां जाओ वहां कब्जा करो'। जहां उनकी संख्या कम हो, वहां प्रेम से काम चलाने और जहां संख्या अधिक हो जाए, वहां 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' करके जमीन कब्जाने, स्त्रियों को नियंत्रित करने तथा देश के लोगों को अन्य वर्गों और जातियों में बांटने का आरोप है। आरोप लगाया गया है कि छतरपुर से कांग्रेस सरकार यही सब सिखाने के लिए मदरसों में पैसा दे रही थी। ये लोग हिंदुओं को भाई बनाकर उन्हें ही 'चारा' बना लेते हैं। इन्हें 'वास्तव में जोंबी' और 'मानव नहीं' बताया गया है। उनकी तुलना अमेरिका की 'एपस्टीन फाइल' के उन सदस्यों से की गई है, जो बच्चों के रक्त के शौकीन होते हैं और 'बाल शैतान' की पूजा करते हैं। दावा है कि नेहरू 'पंडित' नहीं थे, बल्कि उन्होंने स्वयं को 'पारसी पंडित' बताया था। राजनीति की आड़ में उन्होंने 'मोहम्मद दास करीम चंद्र गाजी' को 'महात्मा गांडू' घोषित कर दिया और स्वयं को 'पंडित नेहरू' घोषित कर दिया।1
- अमरोहा के कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी डॉ. नितिन गौड़ की अध्यक्षता में जिला स्वास्थ्य समिति की समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस दौरान जिलाधिकारी ने स्वास्थ्य सेवाओं की प्रगति का जायजा लेते हुए अवैध पैथोलॉजी लैब, क्लीनिक और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने जननी सुरक्षा योजना के तहत आशा कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों के लंबित भुगतानों को शीघ्र कराने का भी निर्देश दिया। बैठक में डॉ. गौड़ ने सभी चिकित्सालयों में डॉक्टरों को नेम बैज सहित एप्रन पहनकर आने और मरीजों व उनके तीमारदारों के साथ बेहतर व्यवहार करने पर जोर दिया। साथ ही, रिक्त सब-सेंटरों पर सीएचओ की तैनाती के लिए डिमांड पत्र भेजने और एएनएम की तैनाती संबंधी पूरी जानकारी उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने नियमित टीकाकरण का शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने और संस्थागत प्रसवों की संख्या बढ़ाने पर भी विशेष बल दिया। इस समीक्षा बैठक में आरबीएसके, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, ई-संजीवनी ओपीडी, ई-कवच, आभा आईडी, टीबी कार्यक्रम, आशा भुगतान एवं टीकाकरण कार्यक्रमों की प्रगति का भी मूल्यांकन किया गया। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी अश्वनी कुमार मिश्र, मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. रमाकांत सागर, सीएमएस डॉ. ए.के. भंडारी सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।2
- संभल में हसीना बेगम हॉस्पिटल के निदेशक सेठ कासिम और डॉक्टर तौसीफ अहमद के बीच चल रहा लंबा विवाद आखिरकार खत्म हो गया है। बताया जा रहा है कि यह विवाद कई दिनों तक जारी रहा और अस्पताल के हिसाब-किताब को लेकर दोनों पक्षों में मतभेद गहरे हो गए थे। यह मामला थाने से लेकर कचहरी तक पहुंच गया था, और डॉक्टर तौसीफ के खिलाफ एक केस भी दर्ज किया गया था। इस पूरे विवाद का सुखद अंत तब हुआ जब डॉक्टर तौसीफ अहमद अकेले सेठ कासिम के निवास पर पहुंचे। वहाँ दोनों ने बैठकर बातचीत की और सभी गलतफहमियों को दूर किया। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच एक समझौता भी लिखा गया, जिसमें यह तय किया गया कि भविष्य में इस तरह का कोई विवाद नहीं होगा। दोनों ने एक-दूसरे को गले लगाकर भाईचारे का संदेश दिया; सेठ कासिम ने डॉक्टर तौसीफ को छोटे भाई की तरह माफ कर दिया, और उनके रिश्ते फिर से सामान्य हो गए। डॉक्टर तौसीफ अहमद ने मीडिया के सामने आकर इस बात की पुष्टि की कि विवाद समाप्त हो गया है और उन्होंने अपनी गलती का एहसास किया है।1
- अमरोहा पुलिस ने नौगांवा थाना क्षेत्र में आम के बाग ठेकेदार की सनसनीखेज हत्या के मामले का महज दो दिन में खुलासा कर दिया है। इस हत्याकांड की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मृतक की जान किसी दुश्मन ने नहीं, बल्कि उसके अपने बेटे ने ही अपने दो दोस्तों के साथ मिलकर ली थी। पुलिस ने मृतक के पुत्र सहित तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया है। नौगांवा सादात थाना क्षेत्र के गांव गजस्थल निवासी रईस अहमद टेंट हाउस का कारोबार करते थे और आम के बाग भी ठेके पर लेते थे। बीती एक-दो जून की रात वह बाग में अपनी चारपाई पर सो रहे थे, जब उन्हें गंभीर रूप से घायल अवस्था में पाया गया। उपचार के लिए पहले उन्हें जिला अस्पताल और फिर मेरठ मेडिकल कॉलेज ले जाया गया, जहाँ इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक लखन सिंह यादव के निर्देशन में गठित टीम ने जब मामले की गहन जांच की तो हैरान करने वाले तथ्य सामने आए। विवेचना में पता चला कि रईस अहमद ने व्यापार से करीब दो लाख रुपये कमाए थे, जिन्हें लेकर परिवार में विवाद चल रहा था। आरोप है कि मृतक शराब पीने का आदी था और अक्सर अपनी पत्नी शाहजहां उर्फ सज्जो के साथ मारपीट और अभद्रता करता था, जिसके कारण बच्चे भी अपनी माँ का पक्ष लेते थे। पुलिस पूछताछ में मृतक के पुत्र आयान ने स्वीकार किया कि घरेलू विवाद और माँ के साथ होने वाले दुर्व्यवहार से परेशान होकर उसने अपने दोस्तों दीपांशु और दीपक के साथ मिलकर पिता की हत्या की योजना बनाई थी। योजना के तहत तीनों रात में बाग पहुँचे और सो रहे रईस के सिर में गोली मारकर फरार हो गए। पुलिस ने आयान, दीपांशु और दीपक को देहरा चौराहे से गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों के कब्जे से हत्या में प्रयुक्त 12 बोर का तमंचा और खोखा कारतूस बरामद हुआ है। पुलिस ने तीनों को न्यायालय में पेश कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।2
- अमरोहा के गजरौला-धनौरा मार्ग स्थित पक्के पुल के पास बृहस्पतिवार को हजरत भूरे शाह की मजार पर आयोजित उर्स के अंतिम दिन हजारों की संख्या में अकीदतमंदों का जनसैलाब उमड़ पड़ा। इन श्रद्धालुओं ने मजार पर चादरपोशी कर देश में अमन, चैन, भाईचारे और खुशहाली की दुआ मांगी, जिससे पूरे क्षेत्र में आध्यात्मिक और श्रद्धा का माहौल बन गया। यह उर्स सैकड़ों वर्षों से चला आ रहा एक ऐसा सिलसिला है जिससे लोगों की गहरी आस्था जुड़ी है। यही कारण है कि हर वर्ष दूर-दराज के क्षेत्रों से भी हजारों श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। इस उर्स की खास बात यह है कि इसमें सभी धर्मों के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते हैं, जो गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करता है। उर्स के अंतिम दिन अकीदतमंदों ने मजार पर चादर और फूल पेश कर अपनी-अपनी मुरादें मांगीं, क्योंकि उनका मानना है कि सच्चे दिल से की गई दुआएँ यहाँ ज़रूर कबूल होती हैं। दिनभर मजार परिसर में जायरीनों की भारी भीड़ रही, जिन्होंने पूरी अकीदत के साथ धार्मिक रस्मों में हिस्सा लिया। उर्स के पूरे आयोजन की व्यवस्था गजरौला बस्ती निवासी भूरे भाई के नेतृत्व में संपन्न हुई। उन्होंने बताया कि यह धार्मिक परंपरा उनके बुजुर्गों के समय से चली आ रही है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा के भी पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने पूरे आयोजन पर कड़ी नजर रखी, जिससे उर्स शांतिपूर्ण और सकुशल संपन्न हो सका। उर्स के समापन पर मजार परिसर में देश की तरक्की, सामाजिक सौहार्द और मानवता की भलाई के लिए विशेष दुआएँ की गईं। श्रद्धालुओं ने एक-दूसरे को मुबारकबाद देते हुए आपसी प्रेम और भाईचारे का संदेश भी दिया।3
- संभल से सपा सांसद जिया उर रहमान बर्क ने गाजियाबाद में हुए असद एनकाउंटर पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक ऑटोमोबाइल शोरूम का फीता काटकर उद्घाटन करने गाजियाबाद पहुंचे सांसद बर्क ने स्पष्ट कहा कि बुलडोजर की कार्रवाई या एनकाउंटर करना न्याय नहीं है; उनके अनुसार, जो भी सजा होनी चाहिए, वह केवल कोर्ट के माध्यम से ही दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वह असद की तरफदारी नहीं कर रहे, और भले ही असद की बहन के साथ छेड़छाड़ हुई हो या कोई और घटना हुई हो, सजा का प्रावधान न्यायालय से ही होना चाहिए। सांसद बर्क ने सरकार पर नीट पेपर लीक और इंटर की सीबीएसई मार्किंग को लेकर भी हमला बोला। उन्होंने मांग की कि दोषियों को बचाया नहीं जाना चाहिए, बल्कि उन पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। सीजेपी द्वारा प्रदर्शन करने के सवाल पर सांसद ने कहा कि भारत के संविधान में सभी को अपने मुद्दों पर बात रखने का अधिकार है। इसके अतिरिक्त, देश में पेट्रोल-डीजल के संकट का जिक्र करते हुए उन्होंने ऑटोमोबाइल शोरूम स्वामी को शुभकामनाएं दीं और सलाह दी कि डीजल-पेट्रोल बचाने के लिए इलेक्ट्रॉनिक वाहनों का उपयोग किया जाना चाहिए।1