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आज चंडीगढ़ के किसान भवन में देश भर के किसान संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 8 किसान समूहों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के लगभग 112 संगठनों और कई बुद्धिजीवियों ने भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य अमरीकी ट्रेड डील का विरोध करना था। सभी उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस ट्रेड डील का मिलकर विरोध करने का फैसला लिया। सभी किसान समूहों को एक मंच पर लाने के प्रयासों के तहत, सभी किसान समूहों के प्रतिनिधियों की अगली बैठक 1 जुलाई को पुनः किसान भवन, चंडीगढ़ में निर्धारित की गई है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूंनी भी इस पहल से जुड़े हुए हैं।
Dharamvir Singh
आज चंडीगढ़ के किसान भवन में देश भर के किसान संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 8 किसान समूहों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के लगभग 112 संगठनों और कई बुद्धिजीवियों ने भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य अमरीकी ट्रेड डील का विरोध करना था। सभी उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस ट्रेड डील का मिलकर विरोध करने का फैसला लिया। सभी किसान समूहों को एक मंच पर लाने के प्रयासों के तहत, सभी किसान समूहों के प्रतिनिधियों की अगली बैठक 1 जुलाई को पुनः किसान भवन, चंडीगढ़ में निर्धारित की गई है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूंनी भी इस पहल से जुड़े हुए हैं।
- User6373Mahidpur, Ujjain😤8 hrs ago
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- आज चंडीगढ़ के किसान भवन में देश भर के किसान संगठनों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में 8 किसान समूहों के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के लगभग 112 संगठनों और कई बुद्धिजीवियों ने भाग लिया, जिसका मुख्य उद्देश्य अमरीकी ट्रेड डील का विरोध करना था। सभी उपस्थित सदस्यों ने सर्वसम्मति से इस ट्रेड डील का मिलकर विरोध करने का फैसला लिया। सभी किसान समूहों को एक मंच पर लाने के प्रयासों के तहत, सभी किसान समूहों के प्रतिनिधियों की अगली बैठक 1 जुलाई को पुनः किसान भवन, चंडीगढ़ में निर्धारित की गई है। किसान नेता गुरनाम सिंह चढ़ूंनी भी इस पहल से जुड़े हुए हैं।1
- हरियाणा के मुलाना में सांसद वरुण चौधरी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में आम जनता की समस्याओं पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है, जिससे लोग भारी परेशानी में हैं। सांसद चौधरी ने कहा कि किसानों, मजदूरों, युवाओं और कर्मचारियों सहित समाज का हर वर्ग अपनी-अपनी समस्याओं से जूझ रहा है, लेकिन सरकार उनकी आवाज सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विकास कार्यों की गति धीमी पड़ गई है और कई क्षेत्रों में लोगों को अभी भी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।1
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- ICOP जर्नलिस्ट / जनता की आवाज के प्रांतीय अध्यक्ष विशाल शर्मा द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, धर्मनगरी कुरुक्षेत्र इस समय एक गंभीर और जानलेवा पर्यावरण संकट से जूझ रही है। शहर के जोहड़ों (तालाबों) की गंदी, जहरीली और सड़ चुकी मिट्टी को अवैध रूप से ओवरलोडेड 75-टायरी व अन्य भारी वाहनों के जरिए 24 घंटे लगातार शहर के बीच से ले जाया जा रहा है। सड़कों पर गिरने वाली यह जहरीली धूल टायरों के माध्यम से उड़कर सीधे आम जनता के फेफड़ों, मुंह, माथे और घरों तक पहुँच रही है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य और मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन हो रहा है। सवाल उठाया गया है कि जब शहर में कोई बड़ा निर्माण कार्य नहीं हो रहा, तो यह अवैध 'मिट्टी का बवंडर' किसके इशारे पर और किसके फायदे के लिए चलाया जा रहा है। इस जहरीली और दूषित मिट्टी के निरंतर उड़ने से कुरुक्षेत्र की जनता और आने वाली पीढ़ी (बच्चों) को फेफड़ों के गंभीर रोग जैसे सिलिकोसिस, क्रॉनिक ब्रोंकाइटिस और अस्थमा, साथ ही त्वचा व आंखों के गंभीर संक्रमण और कैंसर जैसी घातक बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। इस स्थिति को प्रशासनिक और पुलिस महकमे की अनदेखी, लापरवाही और कथित मिलीभगत का परिणाम बताते हुए, ICOP जर्नलिस्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज करने की मांग की है। इनमें BNS की धारा 270 (सार्वजनिक मार्ग पर उपेक्षापूर्ण कार्य से संकट), धारा 271/272 (जीवन के लिए संकटपूर्ण बीमारी फैलाने का खतरा), और धारा 292 (सार्वजनिक उपद्रव) शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा 15 और मोटर वाहन अधिनियम के तहत भी कार्रवाई की मांग की गई है, क्योंकि अवैध व बिना तिरपाल ढके ओवरलोडेड वाहन बेखौफ घूम रहे हैं, जो ट्रैफिक पुलिस की विफलता दर्शाता है। संस्था ने गृह मंत्रालय से सीधे तौर पर कुरुक्षेत्र और करनाल रीजन में चल रहे इस अवैध मिट्टी परिवहन नेटवर्क की उच्च न्यायालय की निगरानी में या एक स्वतंत्र टास्क फोर्स द्वारा तत्काल जांच कराने की मांग की है। साथ ही, स्थानीय प्रशासन, ट्रैफिक पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के उन जिम्मेदार अधिकारियों को चिह्नित करने की अपील की गई है जिनकी कथित शह पर यह अवैध कारोबार 24 घंटे फल-फूल रहा है। जनता के मानवाधिकारों, विशेषकर 'स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार' (अनुच्छेद 21) की रक्षा पर जोर देते हुए, ICOP जर्नलिस्ट ने चेतावनी दी है कि यदि इस गंभीर मुद्दे पर तुरंत अंकुश नहीं लगाया गया और दोषियों पर कानूनी कार्रवाई नहीं हुई, तो इस आवाज को न्यायालय के दरवाजे तक ले जाया जाएगा। प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि 'सत्य कड़वा हो सकता है, लेकिन जनता की भलाई के लिए इसे लिखना और दिखाना हमारा कर्तव्य है।'2
- हरियाणा के करनाल जिले के बड़ागांव में जमीन के बंटवारे से जुड़े एक पारिवारिक कलह ने दुखद मोड़ ले लिया है, जहाँ एक बुजुर्ग व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी गई है। इस मामले में परिवार का ही एक सदस्य मुख्य संदिग्ध बताया जा रहा है। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और फोरेंसिक टीम तत्काल घटनास्थल पर पहुँची और गहन जाँच शुरू की। पुलिस ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्रित किए हैं और आरोपी की तलाश जारी है। इस संबंध में आगे की कानूनी कार्रवाई भी शुरू कर दी गई है।1
- बरेली में आपराधिक गतिविधियों और समाज विरोधी कार्यों के आरोपों में सेवा से बर्खास्त किए जा चुके सिपाही सुरकेश शर्मा के खिलाफ पुलिस को नए साक्ष्य मिले हैं। भमोरा थाना पुलिस के अनुसार, उसके मोबाइल फोन से ऐसे रिकॉर्ड प्राप्त हुए हैं, जिनसे गाँव की राजनीति में दखलअंदाज़ी, महिलाओं को आगे कर झूठे मुकदमे दर्ज कराने और बाद में समझौते के नाम पर कथित वसूली जैसे मामलों के संकेत मिलते हैं। इसी कड़ी में, भमोरा थाना पुलिस ने शुक्रवार को सुरकेश शर्मा, उसकी पत्नी और अधिवक्ता कृतिका शर्मा, तथा उनके सहयोगी ओमवीर को गिरफ्तार किया। सुरकेश शर्मा के खिलाफ पहले से ही 17 मुकदमे दर्ज थे, और भमोरा थाने में दर्ज इस नए मामले के साथ अब उनके खिलाफ मामलों की कुल संख्या 18 हो गई है। पुलिस के अनुसार, सुरकेश शर्मा को चंदौली में तैनाती के दौरान लंबे समय तक अनुपस्थित रहने और आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त पाए जाने पर पहले निलंबित किया गया था, और बाद में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। वर्ष 2024 में तत्कालीन एसएसपी अनुराग आर्य ने उस पर 15 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था, जिसे बाद में बढ़ाकर 25 हजार रुपये कर दिया गया। पुलिस का दावा है कि सुरकेश के फोन से मिले व्हाट्सएप कॉल और अन्य रिकॉर्ड से कथित रंगदारी और अवैध गतिविधियों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं। पुलिस का यह भी आरोप है कि अधिवक्ता कृतिका शर्मा इन गतिविधियों में कानूनी सहायता प्रदान कर रही थीं। पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, सुरकेश शर्मा के खिलाफ रंगदारी, हत्या के प्रयास, अपहरण, मारपीट, धमकी और पॉक्सो एक्ट सहित कई गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। हाल ही में पुलिस ने उनकी क्लास-बी हिस्ट्रीशीट भी खोली थी। एसएसपी अनुराग आर्य ने इस विषय पर कहा कि कानून के तहत होने वाली कार्रवाई इस बात से प्रभावित नहीं होगी कि कोई व्यक्ति पहले पुलिस विभाग का हिस्सा रहा हो, और कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। दूसरी ओर, रंगदारी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों में आरोपी अधिवक्ता कृतिका शर्मा की गिरफ्तारी के बाद अदालत परिसर में वकीलों ने विरोध प्रदर्शन किया और पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए। हालांकि, एसीजेएम (जूनियर डिवीजन) की अदालत ने कृतिका शर्मा की जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया।1
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