शिमला पुलिस ने जिले के रोहड़ू में एक बुजुर्ग महिला की संदिग्ध मौत के पेचीदा 'ब्लाइंड मर्डर' मामले को सुलझाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने महज छह दिनों के भीतर इस हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाते हुए नेपाल मूल के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला बीती 16 जून 2026 को सामने आया था, जब रोहड़ू पुलिस थाने को शलाश डोगरी निवासी 77 वर्षीय श्रीमती गीता देवी के अपने घर में मृत पाए जाने की सूचना मिली। प्रारंभिक जांच में ही पुलिस को यह आभास हो गया था कि यह एक सामान्य मौत नहीं, बल्कि हत्या है। पुलिस ने आशंका जताई थी कि अज्ञात बदमाश चोरी की नीयत से घर में घुसे थे और पकड़े जाने के डर या विरोध करने पर उन्होंने बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी। यह मामला शुरुआत में पुलिस के लिए अत्यंत कठिन था क्योंकि घटनास्थल पर न कोई चश्मदीद गवाह था, न घर या आसपास सीसीटीवी कैमरा लगा था, और न ही शुरुआत में किसी बड़ी संपत्ति के गायब होने की पुष्टि हो पाई थी। इन चुनौतियों के बावजूद, 17 जून को रोहड़ू थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत तफ्तीश शुरू की गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, पुलिस टीमों ने तुरंत वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने शुरू किए; फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से जैविक और भौतिक सबूत एकत्र किए, जिसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। सुरागों के अभाव में, शिमला पुलिस ने मानवीय इनपुट और आधुनिक तकनीक का एक साथ इस्तेमाल किया। एक ओर जहां मृतका के करीबियों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों से गहन पूछताछ की जा रही थी, वहीं तकनीकी विंग ने घटनास्थल की ओर जाने वाले सभी रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। संदिग्ध वाहनों की आवाजाही को ट्रैक किया गया, और सबसे महत्वपूर्ण मोड़ मोबाइल टावर के डंप डेटा के गहन विश्लेषण से आया। लाखों मोबाइल सिग्नलों के बीच कड़ियां जोड़ते हुए, पुलिस आखिरकार उन तीन संदिग्धों तक पहुंच गई, जिनकी लोकेशन वारदात के वक्त घटनास्थल के बिल्कुल आसपास पाई गई थी। तकनीकी विश्लेषण से मिले पुख्ता सुराग के आधार पर, पुलिस ने 22 जून 2026 को तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान, वे वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने ज्यादा देर तक पुलिस को गुमराह नहीं कर पाए और अपना गुनाह कबूल कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान लाल बहादुर उर्फ लालू (28), नवीन (19), और संतोष (20) के रूप में हुई है, जो वर्तमान में शिमला के टिक्कर और चिड़गांव क्षेत्र में रह रहे थे। ASP मेहर पंवर के अनुसार, आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद कर उसे मुख्य साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया गया है। शिमला पुलिस की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई की चारों ओर सराहना हो रही है, जिसने इतनी कम अवधि में बिना किसी सीधे सुराग के इस पेचीदा हत्याकांड का पर्दाफाश कर अपराधियों को दबोच लिया। फिलहाल, पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
शिमला पुलिस ने जिले के रोहड़ू में एक बुजुर्ग महिला की संदिग्ध मौत के पेचीदा 'ब्लाइंड मर्डर' मामले को सुलझाने में बड़ी कामयाबी हासिल की है। पुलिस ने महज छह दिनों के भीतर इस हत्याकांड की गुत्थी को सुलझाते हुए नेपाल मूल के तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। यह मामला बीती 16 जून 2026 को सामने आया था, जब रोहड़ू पुलिस थाने को शलाश डोगरी निवासी 77 वर्षीय श्रीमती गीता देवी के अपने घर में मृत पाए जाने की सूचना मिली। प्रारंभिक जांच में ही पुलिस को यह आभास हो गया था कि यह एक सामान्य मौत नहीं, बल्कि हत्या है। पुलिस ने आशंका जताई थी कि अज्ञात बदमाश चोरी की नीयत से घर में घुसे थे और पकड़े जाने के डर या विरोध करने पर उन्होंने बुजुर्ग महिला की हत्या कर दी। यह मामला शुरुआत में पुलिस के लिए अत्यंत कठिन था क्योंकि घटनास्थल पर न कोई चश्मदीद गवाह था, न घर या आसपास सीसीटीवी कैमरा लगा था, और न ही शुरुआत में किसी बड़ी संपत्ति के गायब होने की पुष्टि हो पाई थी। इन चुनौतियों के बावजूद, 17 जून को रोहड़ू थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर विस्तृत तफ्तीश शुरू की गई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए, पुलिस टीमों ने तुरंत वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने शुरू किए; फॉरेंसिक विशेषज्ञों की टीम ने मौके से जैविक और भौतिक सबूत एकत्र किए, जिसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया। सुरागों के अभाव में, शिमला पुलिस ने मानवीय इनपुट और आधुनिक तकनीक का एक साथ इस्तेमाल किया। एक ओर जहां मृतका के करीबियों, रिश्तेदारों और ग्रामीणों से गहन पूछताछ की जा रही थी, वहीं तकनीकी विंग ने घटनास्थल की ओर जाने वाले सभी रास्तों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले। संदिग्ध वाहनों की आवाजाही को ट्रैक किया गया, और सबसे महत्वपूर्ण मोड़ मोबाइल टावर के डंप डेटा के गहन विश्लेषण से आया। लाखों मोबाइल सिग्नलों के बीच कड़ियां जोड़ते हुए, पुलिस आखिरकार उन तीन संदिग्धों तक पहुंच गई, जिनकी लोकेशन वारदात के वक्त घटनास्थल के बिल्कुल आसपास पाई गई थी। तकनीकी विश्लेषण से मिले पुख्ता सुराग के आधार पर, पुलिस ने 22 जून 2026 को तीनों आरोपियों को हिरासत में लिया। कड़ी पूछताछ के दौरान, वे वैज्ञानिक साक्ष्यों के सामने ज्यादा देर तक पुलिस को गुमराह नहीं कर पाए और अपना गुनाह कबूल कर लिया। पकड़े गए आरोपियों की पहचान लाल बहादुर उर्फ लालू (28), नवीन (19), और संतोष (20) के रूप में हुई है, जो वर्तमान में शिमला के टिक्कर और चिड़गांव क्षेत्र में रह रहे थे। ASP मेहर पंवर के अनुसार, आरोपियों की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल किया गया डंडा भी बरामद कर उसे मुख्य साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया गया है। शिमला पुलिस की इस त्वरित और सटीक कार्रवाई की चारों ओर सराहना हो रही है, जिसने इतनी कम अवधि में बिना किसी सीधे सुराग के इस पेचीदा हत्याकांड का पर्दाफाश कर अपराधियों को दबोच लिया। फिलहाल, पुलिस आरोपियों को रिमांड पर लेकर मामले के अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।
- आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। शिमला में भाजपा के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने दावा किया कि कांग्रेस को संविधान और लोकतंत्र की बात करने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है, क्योंकि देश के इतिहास में लोकतंत्र पर सबसे बड़ा प्रहार 25 जून 1975 को तत्कालीन कांग्रेस सरकार द्वारा लगाया गया आपातकाल था। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने अपने राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए पूरे देश को एक तरह से जेल में बदल दिया था। भाजपा ने ऐलान किया है कि 25 जून को पूरे देश में 'संविधान हत्या दिवस' मनाया जाएगा और लोकतंत्र की रक्षा के लिए संघर्ष करने वाले सेनानियों को सम्मानित किया जाएगा। पूर्व मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में देश का विभाजन, 1975 का आपातकाल और 1984 के सिख विरोधी दंगे, इन तीन घटनाओं ने देश की आत्मा को झकझोर कर रख दिया। उन्होंने बताया कि 25 जून 1975 की रात देशभर में आपातकाल लागू कर नागरिकों के मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस की स्वतंत्रता छीन ली गई और विपक्षी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा इंदिरा गांधी के चुनाव को निरस्त किए जाने के बाद कांग्रेस ने लोकतांत्रिक प्रक्रिया का सम्मान करने के बजाय आपातकाल का रास्ता चुना। उस दौरान अटल बिहारी वाजपेयी, लालकृष्ण आडवाणी, मोरारजी देसाई, जॉर्ज फर्नांडिस, चंद्रशेखर सहित हजारों नेताओं और कार्यकर्ताओं को मीसा कानून के तहत गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था, जहाँ लोगों के पास दलील, वकील या अपील का कोई अधिकार नहीं था। भारद्वाज ने आगे आरोप लगाया कि आपातकाल के दौरान 39वें और 42वें संविधान संशोधन के जरिए लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करने का प्रयास किया गया। इसमें न्यायपालिका की शक्तियों को सीमित करना, संसद और विधानसभाओं का कार्यकाल बढ़ाना और शीर्ष पदों के चुनावों को न्यायिक समीक्षा से बाहर करने की कोशिश करना शामिल था। उन्होंने कहा कि जबरन नसबंदी अभियान और सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग ने उस दौर को लोकतंत्र का सबसे काला अध्याय बना दिया। भारद्वाज ने इस बात पर जोर दिया कि उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जनसंघ और लोकतंत्र समर्थक संगठनों ने आपातकाल के खिलाफ संघर्ष किया और हजारों कार्यकर्ताओं ने जेल यात्राएं कीं। उन्होंने कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा कि आज वही कांग्रेस संविधान बचाने की बात कर रही है जिसने सबसे अधिक बार संविधान में संशोधन किए और लोकतांत्रिक संस्थाओं का दुरुपयोग किया। भाजपा नेता ने जानकारी दी कि 25 जून को शिमला में आयोजित 'संविधान हत्या दिवस' कार्यक्रम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल मुख्य वक्ता होंगे। इसके अतिरिक्त, 27 जून को पालमपुर में होने वाले एक अन्य कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार मुख्य वक्ता के रूप में शामिल होंगे। इन कार्यक्रमों के दौरान आपातकाल से जुड़े दस्तावेजों और तथ्यों पर आधारित एक प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी और लोकतंत्र सेनानियों तथा उनके परिजनों को सम्मानित किया जाएगा।1
- बम्म में स्थानीय लोगों ने एक जल सेवा छबील और पकौड़े के भंडारे का आयोजन किया। इस दौरान लोगों ने वहां उपस्थित सभी लोगों को पानी और पकौड़े वितरित किए।1
- पंचकूला पुलिस ने जिले को नशामुक्त बनाने के विशेष अभियान के तहत 24 घंटे के भीतर तीन शातिर नशा तस्करों को गिरफ्तार कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस कमिश्नर पंकज नैन के निर्देशों पर विभिन्न क्राइम यूनिट्स ने डीसीपी क्राइम एंड ट्रैफिक अमरिंदर सिंह की अगुवाई में यह कार्रवाई की। इन गिरफ्तारियों के दौरान आरोपियों के कब्जे से बाजार में करीब 31 लाख रुपये कीमत के नशीले पदार्थ बरामद किए गए हैं, जिसमें 21 लाख रुपये मूल्य की अफीम और 10 लाख रुपये मूल्य की हेरोइन शामिल है। नशा तस्करी के पहले मामले में, क्राइम ब्रांच सेक्टर-19 की टीम ने इंचार्ज प्रवीण मलिक के नेतृत्व में हरियाणा-यूपी बॉर्डर से अफीम लाकर ट्राईसिटी में सप्लाई करने की कोशिश कर रहे दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी पहचान उत्तर प्रदेश के बदायूं निवासी राज कुमार उर्फ ननौरी और बरेली निवासी संजय के रूप में हुई है, जो फिलहाल पंचकूला के रामगढ़ और मदनपुर में किराये पर रह रहे थे। पीएसआई अनुज मदान को मिली गुप्त सूचना के आधार पर, पुलिस ने सेक्टर-28 के कब्रिस्तान के पास नाकाबंदी कर एक किराये के ऑटो को रोका। तलाशी के दौरान राज कुमार के पिट्ठू बैग से 4 किलो 205 ग्राम अफीम और 32,500 रुपये ड्रग मनी बरामद हुई। थाना चंडीमंदिर में मामला दर्ज कर कोर्ट से आरोपियों का 4 दिन का पुलिस रिमांड हासिल किया गया है, ताकि यूपी के मुख्य सप्लायर और उसके अन्य नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। दूसरे मामले में, एसीपी क्राइम अरविंद कंबोज के अनुसार, एंटी नारकोटिक सेल की टीम ने सौरव रावत के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए सेक्टर-28 शमशान घाट के पास से चंडीगढ़ निवासी 21 वर्षीय करण पुत्र सतपाल को गिरफ्तार किया। एएसआई जितेंद्र कुमार को मिली मुखबिर की सूचना पर पुलिस टीम ने सिविल कपड़ों में जाल बिछाकर आरोपी को रंगे हाथों पकड़ा। तलाशी में उसके पास से 50 ग्राम हेरोइन, जिसकी बाजार कीमत लगभग 10 लाख रुपये है, एक मोबाइल फोन और 1200 रुपये नकद बरामद हुए। अदालत ने आरोपी करण को 29 जून 2026 तक के लिए पुलिस रिमांड पर भेजा है। पुलिस इस रिमांड के दौरान मुख्य हेरोइन सप्लायर प्रदीप की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। पुलिस की टीमें नशा माफियाओं के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए लगातार उनके संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं। इसी कड़ी में, डीसीपी पंचकूला सृष्टि गुप्ता के अनुसार, सेक्टर-16 पुलिस चौकी की टीम ने स्निफर डॉग्स की मदद से इंदिरा कॉलोनी और राजीव कॉलोनी में सघन तलाशी अभियान भी चलाया। पुलिस कमिश्नर पंकज नैन ने साफ किया है कि जिले में नशा तस्करों के खिलाफ यह सख्त कार्रवाई आगे भी निरंतर जारी रहेगी।4
- निर्जला एकादशी के पावन अवसर पर सरगल चौक में सेवा का एक अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया गया। इस पहल के तहत, 4 हजार लीटर मीठे पानी की छबील लगाकर उसका वितरण किया गया, साथ ही 50 किलो चने का भी वितरण किया गया।1
- जिन लोगों के आशियाने उजाड़ दिए गए हैं, उन्होंने पीने के पानी की व्यवस्था करने की मार्मिक अपील की है। अपनी बदहाली के बीच इन लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि उन्हें कम से कम पीने का पानी तो उपलब्ध कराया जाए।1
- हिमाचल प्रदेश के रामपुर पॉक्सो कोर्ट ने एक कड़े फैसले में, अपनी नाबालिग बहन को लगातार डराकर उसके साथ दुष्कर्म करने वाले सगे भाई को 20 साल की सख्त कारावास की सजा सुनाई है। इस घटना ने उन पारिवारिक रिश्तों को तार-तार कर दिया है, जहाँ एक बहन ने अपने ही भाई को अपना रक्षक माना था। न्यायालय ने दोषी भाई पर ₹10,000 का जुर्माना भी लगाया है।1
- पंचकूला के रामगढ़ में भीषण गर्मी के प्रकोप के बीच समाजसेवी दुकानदारों ने राहगीरों और वाहन चालकों की सेवा के लिए मीठे ठंडे पानी की छबील का आयोजन किया। इस पहल के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने रुककर ठंडा मीठा पानी पीकर गर्मी से राहत महसूस की और इस सामाजिक प्रयास की जमकर सराहना की। इस छबील सेवा में समाजसेवी एवं व्यापारियों के साथ-साथ बहादुर सैनी, सुशील सैनी, हरीश शर्मा और गाँव की महिलाओं व बच्चों ने भी सक्रिय रूप से सहयोग किया। सभी ने विशेष तौर पर राहगीरों और वाहन चालकों को रोककर उन्हें ठंडा मीठा पानी पिलाया, जिससे तपती गर्मी में उन्हें काफी आराम मिला। स्थानीय लोगों ने ऐसे सामाजिक और सेवा कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ये समाज में भाईचारे और मानवता की भावना को मजबूत करते हैं।1
- हिमाचल प्रदेश में मॉनसून के आगमन से पहले राज्य सरकार बरसाती आपदाओं से निपटने के लिए तैयारियों में जुट गई है। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कि आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए कई स्तरों पर काम किया जा रहा है, जिसमें किन्नौर के निचार क्षेत्र में फ्लैश फ्लड से हुए नुकसान पर भी सरकार की नजर है। मंत्री ने जानकारी दी कि आपदा से निपटने के लिए प्रदेशभर में 'आपदा मित्र' तैनात किए जाएंगे और पंचायत स्तर पर आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध करवाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षों से हिमाचल लगातार प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहा है, जिसके चलते लोगों को आपदा प्रबंधन के प्रति जागरूक किया जा रहा है। मॉक ड्रिल के माध्यम से भी लोगों को आपदा के समय अपनाए जाने वाले उपायों की जानकारी दी गई है। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में आपदा प्रबंधन को लेकर कई बैठकें हुई हैं, और अधिकारियों तथा जिला प्रशासन के स्तर पर लगातार समीक्षा की जा रही है। 'आपदा मित्रों' की ट्रेनिंग शुरू कर दी गई है और पंचायत घरों में रेस्क्यू उपकरण रखने की तैयारी चल रही है। साथ ही, 'आपदा मित्रों' को भी जरूरी उपकरण दिए जाएंगे। डिजास्टर एक्ट के तहत निजी कंपनियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। किन्नौर जिले की निचार पंचायत में आए फ्लैश फ्लड से एक जल परियोजना क्षतिग्रस्त हुई है और स्कूल आने-जाने का रास्ता भी प्रभावित हुआ है, जिसे खोलने का काम जारी है। प्रदेश में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी तैनात की जा रही हैं; एनडीआरएफ की टीमें ढली स्थित एपीएमसी भवन में रहेंगी, जबकि एसडीआरएफ की टीमें विभिन्न स्थानों पर तैनात की जाएंगी। किन्नौर जिले के उरनी में मंगलवार सुबह एक लोहे के पुल के अचानक टूट जाने पर मंत्री ने बताया कि घटना के बावजूद यातायात ज्यादा समय तक बाधित नहीं हुआ, क्योंकि क्षेत्र में पहले से वैकल्पिक मार्ग तैयार था। हालांकि, पुल गिरने से इलाके में चल रहे निर्माण कार्य प्रभावित होंगे और सेना के ट्रकों के आवागमन पर भी असर पड़ेगा। वैकल्पिक मार्ग से यात्रा करने में लगभग डेढ़ घंटे का अतिरिक्त समय लगने का अनुमान है।4