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विश्वकर्मा जयंती पर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आमजन की खुशहाली की कामना विश्वकर्मा जयंती पर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आमजन की खुशहाली की कामना छीपाबड़ौद - बारां श्री राधा कृष्ण यादव नवयुवक मंडल द्वारा विश्वकर्मा जयंती के उपलक्ष्य में भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा कर क्षेत्र एवं आमजन की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। आयोजन समिति के *अजय यादव* ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का प्रथम शिल्पकार माना जाता है। निर्माण, कला एवं शिल्प के क्षेत्र में भगवान विश्वकर्मा का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते समाज के कई लोगों ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर पूजा-अर्चना कर भगवान विश्वकर्मा का स्मरण किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा जी से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान नवयुवक मंडल के कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। Jitendra Kushwah Mob. 8969999627

1 hr ago
user_JITENDRA KUSHWAH
JITENDRA KUSHWAH
छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
1 hr ago

विश्वकर्मा जयंती पर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आमजन की खुशहाली की कामना विश्वकर्मा जयंती पर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आमजन की खुशहाली की कामना छीपाबड़ौद - बारां श्री राधा कृष्ण यादव नवयुवक मंडल द्वारा विश्वकर्मा जयंती के उपलक्ष्य में भगवान विश्वकर्मा

जी की पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा कर क्षेत्र एवं आमजन की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। आयोजन समिति के *अजय यादव* ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा

को दुनिया का प्रथम शिल्पकार माना जाता है। निर्माण, कला एवं शिल्प के क्षेत्र में भगवान विश्वकर्मा का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते समाज के कई लोगों ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर पूजा-अर्चना कर भगवान

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विश्वकर्मा का स्मरण किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा जी से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान नवयुवक मंडल के कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। Jitendra Kushwah Mob. 8969999627

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  • प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर छीपाबड़ौद में जला ‘आशीर्वाद का दीया’ प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर छीपाबड़ौद में जला ‘आशीर्वाद का दीया’ छीपाबड़ौद / बारां छीपाबड़ौद में विधायक सिंघवी के आवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर गुरुवार को ‘एक दिया आशीर्वाद का’ कार्यक्रम के तहत छीपाबड़ौद में दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री के प्रति शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं व्यक्त की गईं। भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री के जन्मदिन से ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई है। इस अवसर पर माननीय विधायक *प्रताप सिंह सिंघवी* के मार्गदर्शन में क्षेत्रवासियों एवं कार्यकर्ताओं ने दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना की। इस दौरान छबड़ा प्रधान *हरिओम नागर*, मण्डल अध्यक्ष *हितेश वैष्णव*, नगर अध्यक्ष *अशोक पारिक*, राजेश सुमन, शिवनारायण नामदेव, अर्जुन सोनी और आशिक अहमद आदि भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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    प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर छीपाबड़ौद में जला ‘आशीर्वाद का दीया’

प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर छीपाबड़ौद में जला ‘आशीर्वाद का दीया’
छीपाबड़ौद / बारां
छीपाबड़ौद में विधायक सिंघवी के आवास पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर गुरुवार को ‘एक दिया आशीर्वाद का’ कार्यक्रम के तहत छीपाबड़ौद में दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री के प्रति शुभकामनाएं एवं मंगलकामनाएं व्यक्त की गईं। भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री के जन्मदिन से ‘सेवा संकल्प अभियान’ की शुरुआत की गई है।
इस अवसर पर माननीय विधायक *प्रताप सिंह सिंघवी* के मार्गदर्शन में क्षेत्रवासियों एवं कार्यकर्ताओं ने दीप प्रज्वलित कर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के स्वस्थ, दीर्घायु एवं यशस्वी जीवन की कामना की।
इस दौरान छबड़ा प्रधान *हरिओम नागर*, मण्डल अध्यक्ष *हितेश वैष्णव*, नगर अध्यक्ष *अशोक पारिक*, राजेश सुमन, शिवनारायण नामदेव, अर्जुन सोनी और आशिक अहमद आदि भाजपा कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
    user_JITENDRA KUSHWAH
    JITENDRA KUSHWAH
    छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    1 hr ago
  • दहीखेड़ा में संगीतमय शिव महापुराण कथा की पूर्णाहुति, प्रसादी में उमड़े श्रद्धालु दहीखेड़ा ​कस्बे के महाकालेश्वर महादेव बड़े स्कूल के पास सोरती चौक में 10 सितंबर से चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीशिव महापुराण कथा का गुरुवार को हवन-यज्ञ में आहुतियों के साथ विधि-विधान से समापन हुआ। पप्पू नागर,राकेश शर्मा और बलराम गुर्जर ने बताया कि कथावाचक पं. रामबाबू महाराज बर्डग्वालिया के मुखारविंद से प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक कथा का वाचन किया गया, जिसमें क्षेत्र के कई गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने शिव महिमा का श्रवण किया। गुरुवार को कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर आयोजित हवन में समीर माहेश्वरी, राधेश्याम नागर, रमेश राठौर एवं प्रकाश गोस्वामी ने 2100-2100 रुपए की बोली लगाकर आहुतियां समर्पित कीं। यज्ञ संपन्न होने के पश्चात आयोजित महाप्रसादी वितरण में सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर धर्म लाभ लिया।
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    दहीखेड़ा में संगीतमय शिव महापुराण कथा की पूर्णाहुति, प्रसादी में उमड़े श्रद्धालु
दहीखेड़ा ​कस्बे के महाकालेश्वर महादेव बड़े स्कूल के पास सोरती चौक में 10 सितंबर से चल रही सात दिवसीय संगीतमय श्रीशिव महापुराण कथा का गुरुवार को हवन-यज्ञ में आहुतियों के साथ विधि-विधान से समापन हुआ। पप्पू नागर,राकेश शर्मा और बलराम गुर्जर ने बताया कि कथावाचक पं. रामबाबू महाराज बर्डग्वालिया के मुखारविंद से प्रतिदिन दोपहर 12 से 3 बजे तक कथा का वाचन किया गया, जिसमें क्षेत्र के कई गांवों से बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने शिव महिमा का श्रवण किया। गुरुवार को कथा की पूर्णाहुति के अवसर पर आयोजित हवन में समीर माहेश्वरी, राधेश्याम नागर, रमेश राठौर एवं प्रकाश गोस्वामी ने 2100-2100 रुपए की बोली लगाकर आहुतियां समर्पित कीं। यज्ञ संपन्न होने के पश्चात आयोजित महाप्रसादी वितरण में सैकड़ों की तादाद में श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण कर धर्म लाभ लिया।
    user_Pradeep Nagar
    Pradeep Nagar
    Photographer खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    5 hrs ago
  • सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ मे चिकित्सा विभाग द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित पनवाड़ विकसित भारत जनसेवा अभियान के अंतर्गत सीएचसी पनवाड़ में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में डॉ मुकेश नागर जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी झालावाड़, डॉ लेखराज मालव डिप्टी सीएमएचओ हेल्थ, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ नीतीश कटारिया,प्रशासक देवराज सोलंकी, मोहन लाल नागर,बीपीएम प्रवीण शर्मा चिकित्सा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित आमजन ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए स्वैच्छिक रक्तदान किया। इस अवसर पर डॉ मुकेश नागर जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी झालावाड़ ने कहा कि रक्तदान एक महान सामाजिक सेवा है, जिससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है। स्वस्थ एवं पात्र व्यक्तियों को नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
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    सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पनवाड़ मे चिकित्सा विभाग द्वारा रक्तदान शिविर आयोजित
पनवाड़ विकसित भारत जनसेवा अभियान के अंतर्गत सीएचसी पनवाड़ में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में डॉ मुकेश नागर जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी झालावाड़, डॉ लेखराज मालव डिप्टी सीएमएचओ हेल्थ,  चिकित्सा अधिकारी प्रभारी डॉ नीतीश कटारिया,प्रशासक देवराज सोलंकी, मोहन लाल नागर,बीपीएम प्रवीण शर्मा चिकित्सा विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों सहित आमजन ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए स्वैच्छिक रक्तदान किया।
इस अवसर पर डॉ मुकेश नागर जिला प्रजनन एवं शिशु स्वास्थ्य अधिकारी झालावाड़ ने कहा कि रक्तदान एक महान सामाजिक सेवा है, जिससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति का जीवन बचाया जा सकता है। स्वस्थ एवं पात्र व्यक्तियों को नियमित रूप से स्वैच्छिक रक्तदान के लिए आगे आना चाहिए।
    user_Ram raj Nagar
    Ram raj Nagar
    Local News Reporter खानपुर, झालावाड़, राजस्थान•
    8 hrs ago
  • क्षत्रिय राजपूत सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार वंश के वंशज सामने आएं ग्वालियर कोर्ट में मामला गुजरात क्षेत्र के शासकों में आज विदेशी षड्यंत्र का शिकार, गोचर गुजर गुज्जर के बाद, गुर्जर लिखकर जाती को क्षेत्र में बदलकर विवाद किया जा रहा है, जबकि क्षत्रिय राजपूत समाज से उनके वंशज मौजूद हैं सामने है,भारत सरकार लोकतंत्र में आरक्षण व्यवस्था कि समिक्षा करे, क्षत्रिय राजपूत समाज को लेकर सोचिए, हजारों वर्षों से बलिदान त्याग शोर्य पराक्रम वालीं कोम राजपूत समाज के द्वारा हर रियासत का रिकॉर्ड दांव भारत गणराज्य में विलय गवाह है फिर भी दस्तावेज कोर्ट में दिए गए हैं,महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी उसी में से क्षत्रिय समाज के महिरभोज प्रतिहार वंश रहा है सभी भाई अपने हिसाब से सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार जी को लेकर पोस्ट कर रहे है। अच्छी बात है महापुरुषों कि कोई जाती नहीं होती। लेकिन उनको जाती मे मत बाटो। अगर उनकी जाती का पता लगाना है तो किसी कि भी जाती उनके वंश से पता लगती है और उनके वंशज से। जो अभी नागौद रियासत के उनके वंशज कुंवरअरुणोदयसिंह है। आप उनसे ऐक बार बात करो। क्यों फालतू कि राजनीती के चक्र मे पढ़ रहे हो ..ये वीडियो उनके वंशज का है बाकि ये सब मामला ग्वालियर कोर्ट मे भी चल रहा है। उनसे जाकर पता करो सच्चाई का। क्षत्रिय सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार अमर रहे🚩🙏🏻 क्षत्रियसम्राटमिहिरभोज #नागौद
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    क्षत्रिय राजपूत सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार वंश के वंशज सामने आएं ग्वालियर कोर्ट में मामला 
गुजरात क्षेत्र के शासकों में आज विदेशी षड्यंत्र का शिकार, गोचर गुजर गुज्जर के बाद, गुर्जर लिखकर जाती को क्षेत्र में बदलकर विवाद किया जा रहा है, जबकि क्षत्रिय राजपूत समाज से उनके वंशज मौजूद हैं सामने है,भारत सरकार लोकतंत्र में आरक्षण व्यवस्था कि समिक्षा करे, क्षत्रिय राजपूत समाज को लेकर सोचिए, हजारों वर्षों से बलिदान त्याग शोर्य पराक्रम वालीं कोम राजपूत समाज के द्वारा हर रियासत का रिकॉर्ड दांव भारत गणराज्य में विलय गवाह है फिर भी दस्तावेज कोर्ट में दिए गए हैं,महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी उसी में से क्षत्रिय समाज के महिरभोज प्रतिहार वंश रहा है 
सभी भाई अपने हिसाब से सम्राट मिहिरभोज प्रतिहार जी को लेकर पोस्ट कर रहे है। अच्छी बात है महापुरुषों कि कोई जाती नहीं होती। लेकिन उनको जाती मे मत बाटो। अगर उनकी जाती का पता लगाना है तो किसी कि भी जाती उनके वंश से पता लगती है और उनके वंशज से। जो अभी नागौद रियासत के उनके वंशज कुंवरअरुणोदयसिंह  है। आप उनसे ऐक बार बात करो। क्यों फालतू कि राजनीती के चक्र मे पढ़ रहे हो ..ये वीडियो उनके वंशज का है बाकि ये सब मामला ग्वालियर कोर्ट मे भी चल रहा है। उनसे जाकर पता करो सच्चाई का। 
क्षत्रिय सम्राट मिहिर भोज प्रतिहार अमर रहे🚩🙏🏻
क्षत्रियसम्राटमिहिरभोज #नागौद
    user_जितेंद्र सिंह (पंवार)राजपूत
    जितेंद्र सिंह (पंवार)राजपूत
    मनोहर थाना, झालावाड़, राजस्थान•
    10 hrs ago
  • फतेहगढ़ में विश्वकर्मा पूजन पर लोक संस्कृति ने बांधा समां डीजे और सोशल मीडिया की चकाचौंध के बीच पारंपरिक लोकगीत-नृत्यों ने दिलाई अपनी जड़ों की याद फतेहगढ़/गुना। भगवान विश्वकर्मा पूजन दिवस के अवसर पर फतेहगढ़ में निकले भव्य चल समारोह में इस बार धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय लोक संस्कृति और पारंपरिक लोकगीत-नृत्यों की मनमोहक झलक देखने को मिली। आधुनिक दौर में जहां डीजे और सोशल मीडिया की चमक-दमक ने पारंपरिक लोक कलाओं को पीछे धकेल दिया है, वहीं विश्वकर्मा पूजन के अवसर पर समाजजनों ने लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया। फतेहगढ़ स्थित सिद्ध झिरिया आश्रम विश्वकर्मा मंदिर से भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना के बाद चल समारोह प्रारंभ हुआ। ढोल की थाप, पारंपरिक गीतों और लोकनृत्य के साथ निकला जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों और चौराहों से होकर गुजरा। समारोह में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए। आधुनिकता के दौर में लोक संस्कृति के संरक्षण की जरूरत भारतीय संस्कृति में लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामूहिक जीवन की पहचान रहे हैं। गांवों में होने वाले धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लेकिन बदलते समय के साथ मनोरंजन के साधन भी तेजी से बदले हैं। डीजे, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और आधुनिक संगीत की बढ़ती लोकप्रियता के बीच कई पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य नई पीढ़ी से दूर होते जा रहे हैं। कई लोक कलाएं आज संरक्षण और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की चुनौती का सामना कर रही हैं। विश्वकर्मा समारोह बना संस्कृति का मंच फतेहगढ़ में आयोजित विश्वकर्मा पूजन समारोह में पारंपरिक लोकनृत्य और गीतों ने इस बदलाव के बीच अलग ही रंग भर दिया। समाज की महिलाओं और युवाओं ने पारंपरिक अंदाज में प्रस्तुति देकर न केवल समारोह में उत्साह बढ़ाया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश भी दिया। चल समारोह के दौरान नगर में जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति का यह संगम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों और युवाओं ने भी पारंपरिक प्रस्तुतियों को देखा और उनका आनंद लिया। सिर्फ आयोजन नहीं, संस्कृति बचाने की पहल विश्वकर्मा पूजन के अवसर पर हुए इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी लोक परंपराओं को भूलना नहीं चाहिए। लोकगीत और लोकनृत्य हमारी सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा हैं। इन्हें केवल किसी विशेष अवसर तक सीमित रखने के बजाय स्कूलों, सामाजिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी से जोड़ने की जरूरत है। फतेहगढ़ का यह आयोजन इसी सांस्कृतिक विरासत की एक खूबसूरत झलक बनकर सामने आया, जहां भगवान विश्वकर्मा की भक्ति के साथ भारतीय लोक संस्कृति की परंपरा भी कदमताल करती नजर आई।
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    फतेहगढ़ में विश्वकर्मा पूजन पर लोक संस्कृति ने बांधा समां
डीजे और सोशल मीडिया की चकाचौंध के बीच पारंपरिक लोकगीत-नृत्यों ने दिलाई अपनी जड़ों की याद
फतेहगढ़/गुना। भगवान विश्वकर्मा पूजन दिवस के अवसर पर फतेहगढ़ में निकले भव्य चल समारोह में इस बार धार्मिक आस्था के साथ-साथ भारतीय लोक संस्कृति और पारंपरिक लोकगीत-नृत्यों की मनमोहक झलक देखने को मिली। आधुनिक दौर में जहां डीजे और सोशल मीडिया की चमक-दमक ने पारंपरिक लोक कलाओं को पीछे धकेल दिया है, वहीं विश्वकर्मा पूजन के अवसर पर समाजजनों ने लोकगीत और लोकनृत्य के माध्यम से अपनी सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर दिया।
फतेहगढ़ स्थित सिद्ध झिरिया आश्रम विश्वकर्मा मंदिर से भगवान विश्वकर्मा की पूजा-अर्चना के बाद चल समारोह प्रारंभ हुआ। ढोल की थाप, पारंपरिक गीतों और लोकनृत्य के साथ निकला जुलूस नगर के प्रमुख मार्गों और चौराहों से होकर गुजरा। समारोह में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग बड़ी संख्या में शामिल हुए।
आधुनिकता के दौर में लोक संस्कृति के संरक्षण की जरूरत
भारतीय संस्कृति में लोकगीत और लोकनृत्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक परंपराओं, रीति-रिवाजों और सामूहिक जीवन की पहचान रहे हैं। गांवों में होने वाले धार्मिक एवं सामाजिक आयोजनों में लोकगीतों और पारंपरिक नृत्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
लेकिन बदलते समय के साथ मनोरंजन के साधन भी तेजी से बदले हैं। डीजे, मोबाइल फोन, सोशल मीडिया और आधुनिक संगीत की बढ़ती लोकप्रियता के बीच कई पारंपरिक लोकगीत और लोकनृत्य नई पीढ़ी से दूर होते जा रहे हैं। कई लोक कलाएं आज संरक्षण और अगली पीढ़ी तक पहुंचाने की चुनौती का सामना कर रही हैं।
विश्वकर्मा समारोह बना संस्कृति का मंच
फतेहगढ़ में आयोजित विश्वकर्मा पूजन समारोह में पारंपरिक लोकनृत्य और गीतों ने इस बदलाव के बीच अलग ही रंग भर दिया। समाज की महिलाओं और युवाओं ने पारंपरिक अंदाज में प्रस्तुति देकर न केवल समारोह में उत्साह बढ़ाया, बल्कि नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का संदेश भी दिया।
चल समारोह के दौरान नगर में जगह-जगह लोगों ने जुलूस का स्वागत किया। धार्मिक आस्था के साथ लोक संस्कृति का यह संगम लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। बच्चों और युवाओं ने भी पारंपरिक प्रस्तुतियों को देखा और उनका आनंद लिया।
सिर्फ आयोजन नहीं, संस्कृति बचाने की पहल
विश्वकर्मा पूजन के अवसर पर हुए इस आयोजन ने यह संदेश भी दिया कि आधुनिकता के साथ आगे बढ़ना जरूरी है, लेकिन अपनी लोक परंपराओं को भूलना नहीं चाहिए। लोकगीत और लोकनृत्य हमारी सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा हैं। इन्हें केवल किसी विशेष अवसर तक सीमित रखने के बजाय स्कूलों, सामाजिक कार्यक्रमों और धार्मिक आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी से जोड़ने की जरूरत है।
फतेहगढ़ का यह आयोजन इसी सांस्कृतिक विरासत की एक खूबसूरत झलक बनकर सामने आया, जहां भगवान विश्वकर्मा की भक्ति के साथ भारतीय लोक संस्कृति की परंपरा भी कदमताल करती नजर आई।
    user_Deepak ojha
    Deepak ojha
    Local News Reporter गुना नगर, गुना, मध्य प्रदेश•
    1 hr ago
  • झालावाड_गत दिनो अतिवृष्टि के दौरान सराहनीय कार्य करने वाले राहत वीरों का सम्मान,ग्रामीण क्षेत्र के 26 राहतवीरो का सम्मान,तेज बारिश बाढ मे फंसे लोगों और स्कूली बच्चों को किया था रेस्क्यू,मिनी सचिवालय कलेक्ट्रेट सभागार मे हुआ सम्मान,प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित,डीएम एसपी ने किया सम्मानित । झालावाड जिले मे 10 और 11 अगस्त को हुई भारी बारिश के दौरान जलभराव में फंसे लोगों को बचाने और राहत कार्यों में सहयोग करने वाले 26 नागरिकों को आज 'जल-वीर सम्मान' से नवाजा गया। जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ व एसपी अमित कुमार ने सभी जल-वीरों को सम्मान-पत्र प्रदान किए। इन नागरिकों में जिले के कामखेड़ा, रायपुर, झालरापाटन, सुनेल और मनोहरथाना क्षेत्र के लोग शामिल हैं। गौरतलब है कि गत दिनो भारी बारिश के बाद जिले के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। ऐसे समय में कई स्थानों पर प्रशासन और पुलिस टीमों के पहुंचने से पहले ही स्थानीय नागरिकों ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने जलभराव में फंसे बच्चों, महिलाओं और अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। स्थानीय लोगों के इस सहयोग से राहत और बचाव कार्यों में तेजी आई। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने जल-वीरों के साहस और सेवा भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय स्थानीय नागरिकों का सहयोग बेहद जरूरी होता है। मौके पर मौजूद लोग स्थिति को देखकर तत्काल निर्णय लेकर प्रभावित लोगों की मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जल-वीरों का सम्मान उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ ही समाज में मानवता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है। वहीं जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने कहा कि तेज बारिश के दौरान दूरदराज के इलाकों में बचाव दल को पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसे में मौके पर मौजूद लोगों की समझदारी और तत्परता काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने अगस्त में सुनेल में हुई घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां स्थानीय लोगों ने बच्चों और आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। सम्मानित 26 जल-वीरों ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ प्रशासन और पुलिस टीमों के राहत कार्यों में भी सहयोग किया। प्रशासन ने उनके योगदान को आपदा के समय सामुदायिक सहभागिता और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बताया।
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    झालावाड_गत दिनो अतिवृष्टि के दौरान सराहनीय कार्य करने वाले राहत वीरों का सम्मान,ग्रामीण क्षेत्र के 26 राहतवीरो का सम्मान,तेज बारिश बाढ मे फंसे लोगों और स्कूली बच्चों को किया था रेस्क्यू,मिनी सचिवालय कलेक्ट्रेट सभागार मे हुआ सम्मान,प्रशस्ति पत्र देकर किया सम्मानित,डीएम एसपी ने किया सम्मानित ।
झालावाड जिले मे 10 और 11 अगस्त को हुई भारी बारिश के दौरान जलभराव में फंसे लोगों को बचाने और राहत कार्यों में सहयोग करने वाले 26 नागरिकों को आज 'जल-वीर सम्मान' से नवाजा गया। जिला मुख्यालय पर आयोजित कार्यक्रम में जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ व एसपी अमित कुमार ने सभी जल-वीरों को सम्मान-पत्र प्रदान किए। इन नागरिकों में जिले के कामखेड़ा, रायपुर, झालरापाटन, सुनेल और मनोहरथाना क्षेत्र के लोग शामिल हैं।
गौरतलब है कि गत दिनो भारी बारिश के बाद जिले के कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बन गई थी। ऐसे समय में कई स्थानों पर प्रशासन और पुलिस टीमों के पहुंचने से पहले ही स्थानीय नागरिकों ने मोर्चा संभाल लिया। उन्होंने जलभराव में फंसे बच्चों, महिलाओं और अन्य लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। स्थानीय लोगों के इस सहयोग से राहत और बचाव कार्यों में तेजी आई।
जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने जल-वीरों के साहस और सेवा भावना की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय स्थानीय नागरिकों का सहयोग बेहद जरूरी होता है। मौके पर मौजूद लोग स्थिति को देखकर तत्काल निर्णय लेकर प्रभावित लोगों की मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जल-वीरों का सम्मान उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ ही समाज में मानवता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का माध्यम भी है।
वहीं जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने कहा कि तेज बारिश के दौरान दूरदराज के इलाकों में बचाव दल को पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसे में मौके पर मौजूद लोगों की समझदारी और तत्परता काफी महत्वपूर्ण हो जाती है।
उन्होंने अगस्त में सुनेल में हुई घटना का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां स्थानीय लोगों ने बच्चों और आम नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। 
सम्मानित 26 जल-वीरों ने प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ प्रशासन और पुलिस टीमों के राहत कार्यों में भी सहयोग किया। प्रशासन ने उनके योगदान को आपदा के समय सामुदायिक सहभागिता और मानवीय संवेदनशीलता का उदाहरण बताया।
    user_HARI MOHAN CHUDAWAT
    HARI MOHAN CHUDAWAT
    Local News Reporter झालरापाटन, झालावाड़, राजस्थान•
    4 hrs ago
  • भुजरिया तालाब पर हुआ बड़े उत्साह पूर्वक मोर विसर्जन का कार्यक्रम गुना लक्ष्मी नारायण मंदिर भूजरिया तालाब पर हुआ मोहर विसर्जन। विवाह होने के बाद परंपरा अनुसार तालाब पर मोर विसर्जन बड़ी धूमधाम से महिलाएं गाजेबाजे के साथ मोहर का विसर्जन करने भुजरिया तालाब पर पहुंची जहां पर प्रशासन का कोई भी इंतजाम देखने को नहीं मिला भुजरिया तालाब मंदिर महंत राघवेंद्र दास ने बताया कि प्रशासन का कोई भी इंतजाम यहां पर नहीं है मंदिर की तरफ से कुछ लडको को पैसे देकर के तालाब में अंदर खड़े किया गया जो पानी में तैरना जानते थे जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना ना घटित हो भुजरिया ताला सबसे पुराना घाट है हजारों की संख्या में महिलाएं मोर विसर्जन करने के लिए पहुंचते हैं
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    भुजरिया तालाब पर हुआ बड़े उत्साह पूर्वक मोर विसर्जन का कार्यक्रम
गुना लक्ष्मी नारायण मंदिर भूजरिया तालाब पर हुआ मोहर विसर्जन।        विवाह होने के बाद परंपरा अनुसार तालाब पर मोर विसर्जन बड़ी धूमधाम से महिलाएं गाजेबाजे के साथ मोहर का विसर्जन करने भुजरिया तालाब पर पहुंची जहां पर प्रशासन का कोई भी इंतजाम देखने को नहीं मिला भुजरिया तालाब मंदिर महंत राघवेंद्र दास ने बताया कि प्रशासन का कोई भी इंतजाम यहां पर नहीं है मंदिर की तरफ से कुछ लडको को पैसे देकर के तालाब में अंदर खड़े किया गया जो पानी में तैरना जानते थे जिससे किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना ना घटित हो
भुजरिया ताला सबसे पुराना घाट है हजारों की संख्या में महिलाएं मोर विसर्जन करने के लिए पहुंचते हैं
    user_रणधीर चदेल
    रणधीर चदेल
    पत्रकार (फोटोग्राफर) Guna, Madhya Pradesh•
    11 hrs ago
  • विश्वकर्मा जयंती पर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आमजन की खुशहाली की कामना विश्वकर्मा जयंती पर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आमजन की खुशहाली की कामना छीपाबड़ौद - बारां श्री राधा कृष्ण यादव नवयुवक मंडल द्वारा विश्वकर्मा जयंती के उपलक्ष्य में भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया। इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा कर क्षेत्र एवं आमजन की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। आयोजन समिति के *अजय यादव* ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का प्रथम शिल्पकार माना जाता है। निर्माण, कला एवं शिल्प के क्षेत्र में भगवान विश्वकर्मा का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते समाज के कई लोगों ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर पूजा-अर्चना कर भगवान विश्वकर्मा का स्मरण किया। कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा जी से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान नवयुवक मंडल के कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे। Jitendra Kushwah Mob. 8969999627
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    विश्वकर्मा जयंती पर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आमजन की खुशहाली की कामना

विश्वकर्मा जयंती पर श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना, आमजन की खुशहाली की कामना
छीपाबड़ौद - बारां
श्री राधा कृष्ण यादव नवयुवक मंडल द्वारा विश्वकर्मा जयंती के उपलक्ष्य में भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा-अर्चना का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से भगवान विश्वकर्मा जी की पूजा कर क्षेत्र एवं आमजन की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
आयोजन समिति के *अजय यादव* ने बताया कि भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का प्रथम शिल्पकार माना जाता है। निर्माण, कला एवं शिल्प के क्षेत्र में भगवान विश्वकर्मा का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते समाज के कई लोगों ने विश्वकर्मा जयंती के अवसर पर पूजा-अर्चना कर भगवान विश्वकर्मा का स्मरण किया।
कार्यक्रम में उपस्थित श्रद्धालुओं ने भगवान विश्वकर्मा जी से सभी के जीवन में सुख, समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस दौरान नवयुवक मंडल के कार्यकर्ता एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
Jitendra Kushwah 
Mob. 8969999627
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    JITENDRA KUSHWAH
    छिपाबड़ौद, बारां, राजस्थान•
    1 hr ago
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