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OBC पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 52 %परसेंट 52% दो है फिर भी 27% परसेंट आरक्षण मांगा था पर 13% परसेंट हॉल करती है जाति का जनगणना करवाओ जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए

2 hrs ago
user_Jay Jawan Jay Kisan
Jay Jawan Jay Kisan
Lawyer Majholi, Jabalpur•
2 hrs ago

OBC पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 52 %परसेंट 52% दो है फिर भी 27% परसेंट आरक्षण मांगा था पर 13% परसेंट हॉल करती है जाति का जनगणना करवाओ जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए

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  • OBC पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 52 %परसेंट 52% दो है फिर भी 27% परसेंट आरक्षण मांगा था पर 13% परसेंट हॉल करती है जाति का जनगणना करवाओ जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए
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    OBC पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 52 %परसेंट 52% दो है फिर भी 27% परसेंट आरक्षण मांगा था पर 13% परसेंट हॉल करती है जाति का जनगणना करवाओ जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए
    user_Jay Jawan Jay Kisan
    Jay Jawan Jay Kisan
    Lawyer Majholi, Jabalpur•
    2 hrs ago
  • किसानों की मांगों पर गरजे किसान, MSP गारंटी से लेकर कर्जमाफी तक उठाई आवाज भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने तहसीलदार को सौंपा प्रधानमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन, बिजली निजीकरण रोकने, खाद की उपलब्धता और अवैध शराब पर अंकुश लगाने की मांग सिहोरा। किसानों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर 27 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने तहसील कार्यालय सिहोरा में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री और कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। यूनियन के जिलाध्यक्ष एडवोकेट रमेश पटेल के नेतृत्व में पहुंचे किसान पदाधिकारियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी, किसान पेंशन और फसल बीमा में सुधार सहित कई मांगें उठाईं। ज्ञापन में कृषि क्षेत्र से जुड़े कानूनों और नीतियों में बदलाव के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बिक रही अवैध शराब पर रोक लगाने की भी मांग की गई। MSP गारंटी और कर्जमाफी की मांग किसान यूनियन ने मांग की कि छह वर्षों से लंबित MSP गारंटी के मुद्दे पर निर्णय लेते हुए सभी फसलों के लिए C2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया जाए। इसके अलावा किसानों की कर्जमाफी, किसान पेंशन योजना और फसल बीमा व्यवस्था में सुधार किया जाए, ताकि किसानों को आर्थिक राहत मिल सके। कृषि और श्रम संबंधी नीतियों का विरोध ज्ञापन में बिजली के निजीकरण और बीज विधेयक 2025 का विरोध करते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की गई। यूनियन ने चार श्रम संहिताओं को रद्द करने तथा अमेरिका के साथ कृषि उत्पादों और डेयरी से संबंधित समझौते को तत्काल निरस्त करने की मांग भी रखी। किसानों का कहना है कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसलों में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। धान पंजीयन से लेकर खाद की उपलब्धता तक उठाए मुद्दे किसानों ने धान की पराली जलाने पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने, धान पंजीयन में छूटे खसरों को जोड़ने और वंचित किसानों का पंजीयन कराने की मांग की। इसके साथ ही कृषि पंपों के हॉर्स पावर लोड में सुधार करने तथा मझगवां-सरौली क्षेत्र में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डबल लॉक केंद्र खोलने की मांग उठाई गई। गांवों में अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग ज्ञापन में ग्रामीण क्षेत्रों में गांव-गांव बिक रही अवैध शराब पर रोक लगाने की मांग भी शामिल रही। किसान यूनियन ने संबंधित विभागों से किसानों की समस्याओं का निराकरण करने और मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई करने की अपील की। इस दौरान जिला पंचायत सदस्य प्रदीप पटेल, ओबीसी जिलाध्यक्ष जितेन्द्र कुमार कुर्मी सहित लक्ष्मीनारायण पटेल, अशोक पटेल, बिहारी पटेल, केके पटेल, राजेश पटेल, एडवोकेट दिलीप पटेल, एडवोकेट रामगोपाल पटेल, संत कुमार पटेल, प्रमोद पटेल, अखिलेश पटेल, रणजीत पटेल, वीरेंद्र पटेल, सुरेंद्र पटेल, अमरजीत पटेल, गंगाराम पटेल, अजीत पटेल, रोहित पटेल, अनिल पटेल, रघुवर पटेल, जागेश्वर पटेल, ओमकार पटेल, सुनील पटेल, अमित पटेल और मनोज पटेल सहित सैकड़ों किसान एवं यूनियन पदाधिकारी उपस्थित रहे।
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    किसानों की मांगों पर गरजे किसान, MSP गारंटी से लेकर कर्जमाफी तक उठाई आवाज


भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने तहसीलदार को सौंपा प्रधानमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन, बिजली निजीकरण रोकने, खाद की उपलब्धता और अवैध शराब पर अंकुश लगाने की मांग
सिहोरा।
किसानों की विभिन्न समस्याओं और लंबित मांगों को लेकर 27 अक्टूबर को भारतीय किसान यूनियन टिकैत ने तहसील कार्यालय सिहोरा में प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री और कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा। यूनियन के जिलाध्यक्ष एडवोकेट रमेश पटेल के नेतृत्व में पहुंचे किसान पदाधिकारियों ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, कर्जमाफी, किसान पेंशन और फसल बीमा में सुधार सहित कई मांगें उठाईं। ज्ञापन में कृषि क्षेत्र से जुड़े कानूनों और नीतियों में बदलाव के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में बिक रही अवैध शराब पर रोक लगाने की भी मांग की गई।
MSP गारंटी और कर्जमाफी की मांग
किसान यूनियन ने मांग की कि छह वर्षों से लंबित MSP गारंटी के मुद्दे पर निर्णय लेते हुए सभी फसलों के लिए C2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ जोड़कर न्यूनतम समर्थन मूल्य लागू किया जाए। इसके अलावा किसानों की कर्जमाफी, किसान पेंशन योजना और फसल बीमा व्यवस्था में सुधार किया जाए, ताकि किसानों को आर्थिक राहत मिल सके।
कृषि और श्रम संबंधी नीतियों का विरोध
ज्ञापन में बिजली के निजीकरण और बीज विधेयक 2025 का विरोध करते हुए इन्हें वापस लेने की मांग की गई। यूनियन ने चार श्रम संहिताओं को रद्द करने तथा अमेरिका के साथ कृषि उत्पादों और डेयरी से संबंधित समझौते को तत्काल निरस्त करने की मांग भी रखी। किसानों का कहना है कि कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े फैसलों में किसानों के हितों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
धान पंजीयन से लेकर खाद की उपलब्धता तक उठाए मुद्दे
किसानों ने धान की पराली जलाने पर लगाए गए प्रतिबंध को हटाने, धान पंजीयन में छूटे खसरों को जोड़ने और वंचित किसानों का पंजीयन कराने की मांग की। इसके साथ ही कृषि पंपों के हॉर्स पावर लोड में सुधार करने तथा मझगवां-सरौली क्षेत्र में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए डबल लॉक केंद्र खोलने की मांग उठाई गई।
गांवों में अवैध शराब की बिक्री पर रोक लगाने की मांग
ज्ञापन में ग्रामीण क्षेत्रों में गांव-गांव बिक रही अवैध शराब पर रोक लगाने की मांग भी शामिल रही। किसान यूनियन ने संबंधित विभागों से किसानों की समस्याओं का निराकरण करने और मांगों पर गंभीरता से कार्रवाई करने की अपील की।
इस दौरान जिला पंचायत सदस्य प्रदीप पटेल, ओबीसी जिलाध्यक्ष जितेन्द्र कुमार कुर्मी सहित लक्ष्मीनारायण पटेल, अशोक पटेल, बिहारी पटेल, केके पटेल, राजेश पटेल, एडवोकेट दिलीप पटेल, एडवोकेट रामगोपाल पटेल, संत कुमार पटेल, प्रमोद पटेल, अखिलेश पटेल, रणजीत पटेल, वीरेंद्र पटेल, सुरेंद्र पटेल, अमरजीत पटेल, गंगाराम पटेल, अजीत पटेल, रोहित पटेल, अनिल पटेल, रघुवर पटेल, जागेश्वर पटेल, ओमकार पटेल, सुनील पटेल, अमित पटेल और मनोज पटेल सहित सैकड़ों किसान एवं यूनियन पदाधिकारी उपस्थित रहे।
    user_मोहम्मद रिजवान मंसूरी
    मोहम्मद रिजवान मंसूरी
    सिहोरा, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • सागर में OBC का जनसैलाब! 27% आरक्षण की मांग पर पैदल मार्च आखिर 27% आरक्षण की मांग को लेकर सागर में हजारों लोग सड़कों पर क्यों उतरे? 🤔 महिलाओं, युवाओं और पुरुषों का पैदल मार्च, देखिए जमीनी हकीकत इस ग्राउंड रिपोर्ट में।
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    सागर में OBC का जनसैलाब! 27% आरक्षण की मांग पर पैदल मार्च
आखिर 27% आरक्षण की मांग को लेकर सागर में हजारों लोग सड़कों पर क्यों उतरे? 🤔 महिलाओं, युवाओं और पुरुषों का पैदल मार्च, देखिए जमीनी हकीकत इस ग्राउंड रिपोर्ट में।
    user_Pushpendra Lodhi
    Pushpendra Lodhi
    जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    2 hrs ago
  • दमोह: ग्रामीणों ने भैंसों से लदे वाहन को पकड़ा, क्रूरता पूर्वक किया जा रहा था परिवहन सुहेला के पास ग्रामीणों ने रोका वाहन, भैंसों के शरीर पर मिले घाव के निशान दमोह। जिले के हिंडोरिया थाना क्षेत्र के सुहेला के पास ग्रामीणों ने भैंसों से लदे एक वाहन को पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि वाहन में भैंसों का क्रूरता पूर्वक परिवहन किया जा रहा था। वाहन में कुछ भैंसें दर्द से तड़पती मिलीं, वहीं उनके शरीर पर घाव के निशान भी दिखाई दिए। ग्रामीणों के वाहन रोकने पर उसमें सवार आरोपियों ने भागने का प्रयास किया। घटना के बाद मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा है। मामले में पुलिस की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
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    दमोह: ग्रामीणों ने भैंसों से लदे वाहन को पकड़ा, क्रूरता पूर्वक किया जा रहा था परिवहन
सुहेला के पास ग्रामीणों ने रोका वाहन, भैंसों के शरीर पर मिले घाव के निशान
दमोह। जिले के हिंडोरिया थाना क्षेत्र के सुहेला के पास ग्रामीणों ने भैंसों से लदे एक वाहन को पकड़ लिया। बताया जा रहा है कि वाहन में भैंसों का क्रूरता पूर्वक परिवहन किया जा रहा था। वाहन में कुछ भैंसें दर्द से तड़पती मिलीं, वहीं उनके शरीर पर घाव के निशान भी दिखाई दिए।
ग्रामीणों के वाहन रोकने पर उसमें सवार आरोपियों ने भागने का प्रयास किया। घटना के बाद मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा है। मामले में पुलिस की कार्रवाई की विस्तृत जानकारी सामने आना बाकी है।
    user_भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    भगवत सिंह लोधी पत्रकार
    Photographer जबेरा, दमोह, मध्य प्रदेश•
    21 hrs ago
  • स्वर्ण सरोवर गीत माला की प्रस्तुति ने मोहा श्रोताओं का दिल, स्वर्ण सरोवर गीत माला की प्रस्तुति ने मोहा श्रोताओं का दिल, महाराज अजमीढ़ देव जयंती के अवसर पर स्वर्ण सरोवर गीत माला की प्रस्तुति ने जबलपुर के श्रोताओं का दिल जीत लिया प्रस्तुति में नए पुराने गीतों का संगम देखने को मिला, स समस्त स्वर्णकार समाज राष्ट्रीय अध्यक्ष सीता देवी जी ने बताया कि अजमीढ़ देव जयंती के अवसर पर हम लोग सभी भंडारे का और मिलजुलकर सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन करते हैं
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    स्वर्ण सरोवर गीत माला की  प्रस्तुति ने मोहा श्रोताओं का दिल,
स्वर्ण सरोवर गीत माला की  प्रस्तुति ने मोहा श्रोताओं का दिल, 
महाराज अजमीढ़  देव जयंती के अवसर पर स्वर्ण सरोवर गीत माला की प्रस्तुति ने  जबलपुर  के श्रोताओं का  दिल जीत लिया प्रस्तुति में नए पुराने गीतों का संगम देखने को मिला, 
स
समस्त स्वर्णकार समाज राष्ट्रीय अध्यक्ष  सीता देवी जी ने बताया कि अजमीढ़ देव  जयंती के अवसर पर हम लोग सभी भंडारे का और मिलजुलकर सामाजिक कार्यक्रम का आयोजन करते हैं
    user_Sarvesh Tiwari
    Sarvesh Tiwari
    Psychologist जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    22 min ago
  • कान्हा में बाघों की मौत पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत की आशंका पर उठे सवाल, सितंबर-अक्टूबर में मरे दो बाघों का कारण बताने के निर्देश; 16 नवंबर को अगली सुनवाई जबलपुर। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सितंबर और अक्टूबर में हुई दो बाघों की मौत का कारण बताने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इस संबंध में सरकार से रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है। यह मामला कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत और उनमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण की आशंका से जुड़ा है। मुंबई निवासी सुब्रत चक्रवर्ती ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की है। सालभर में 20 से अधिक बाघों की मौत का दावा याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अदालत को बताया कि इस साल कान्हा टाइगर रिजर्व में 20 से अधिक बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। याचिका में यह भी कहा गया कि पांच बाघों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत होने की बात सामने आई है। इन मौतों के कारणों और वायरस के प्रसार को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, सभी मौतों के कारणों की पुष्टि जांच और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर ही हो सकेगी। मुक्की वन्यजीव उपचार केंद्र में रखे गए थे दो बाघ याचिका में बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व के दो बाघों को मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में रखा गया था। याचिकाकर्ता ने वायरस के प्रसार में संक्रमित कुत्तों और सामूहिक जलस्रोतों की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए। याचिका के अनुसार, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संक्रमित होने पर बाघों के स्वाभाविक व्यवहार पर असर पड़ सकता है। इससे उनकी शिकार करने की क्षमता और व्यवहार प्रभावित होने की आशंका रहती है। दो हजार से अधिक कुत्तों का कराया गया टीकाकरण सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण कराया गया है। यह कदम वन्यजीवों में संक्रमण के खतरे को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है। हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सितंबर और अक्टूबर में हुई दो बाघों की मौत का कारण बताने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। अब मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। उस दिन सरकार की ओर से प्रस्तुत जानकारी के आधार पर आगे की सुनवाई हो सकती है। सच तक पत्रिका न्यूज़ ✍️ रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा, जबलपुर नोट: खबर में बाघों की मौत और वायरस से संबंधित विवरण याचिका में प्रस्तुत दावों तथा सुनवाई के दौरान बताई गई जानकारी पर आधारित हैं। सभी मौतों के कारणों की पुष्टि संबंधित जांच रिपोर्टों से ही होगी।
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    कान्हा में बाघों की मौत पर जबलपुर हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगी रिपोर्ट

कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत की आशंका पर उठे सवाल, सितंबर-अक्टूबर में मरे दो बाघों का कारण बताने के निर्देश; 16 नवंबर को अगली सुनवाई

जबलपुर। मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को सितंबर और अक्टूबर में हुई दो बाघों की मौत का कारण बताने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने इस संबंध में सरकार से रिपोर्ट मांगी है। मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को निर्धारित की गई है।

यह मामला कान्हा टाइगर रिजर्व में बाघों की मौत और उनमें कैनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) के संक्रमण की आशंका से जुड़ा है। मुंबई निवासी सुब्रत चक्रवर्ती ने इस संबंध में जनहित याचिका दायर की है।

सालभर में 20 से अधिक बाघों की मौत का दावा

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने अदालत को बताया कि इस साल कान्हा टाइगर रिजर्व में 20 से अधिक बाघों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो चुकी है। याचिका में यह भी कहा गया कि पांच बाघों की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से मौत होने की बात सामने आई है।

इन मौतों के कारणों और वायरस के प्रसार को लेकर चिंता जताई गई है। हालांकि, सभी मौतों के कारणों की पुष्टि जांच और संबंधित रिपोर्टों के आधार पर ही हो सकेगी।

मुक्की वन्यजीव उपचार केंद्र में रखे गए थे दो बाघ

याचिका में बताया गया कि कान्हा टाइगर रिजर्व के दो बाघों को मुक्की स्थित वन्यजीव उपचार केंद्र में रखा गया था। याचिकाकर्ता ने वायरस के प्रसार में संक्रमित कुत्तों और सामूहिक जलस्रोतों की संभावित भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए।

याचिका के अनुसार, कैनाइन डिस्टेंपर वायरस से संक्रमित होने पर बाघों के स्वाभाविक व्यवहार पर असर पड़ सकता है। इससे उनकी शिकार करने की क्षमता और व्यवहार प्रभावित होने की आशंका रहती है।

दो हजार से अधिक कुत्तों का कराया गया टीकाकरण

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कैनाइन डिस्टेंपर वायरस के प्रसार को रोकने के लिए कान्हा टाइगर रिजर्व और आसपास के क्षेत्रों में दो हजार से अधिक कुत्तों का टीकाकरण कराया गया है।

यह कदम वन्यजीवों में संक्रमण के खतरे को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब

मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए सितंबर और अक्टूबर में हुई दो बाघों की मौत का कारण बताने के निर्देश दिए हैं।

अदालत ने राज्य सरकार से इस संबंध में रिपोर्ट मांगी है। अब मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी। उस दिन सरकार की ओर से प्रस्तुत जानकारी के आधार पर आगे की सुनवाई हो सकती है।

सच तक पत्रिका न्यूज़
✍️ रिपोर्ट: दीपक विश्वकर्मा, जबलपुर

नोट: खबर में बाघों की मौत और वायरस से संबंधित विवरण याचिका में प्रस्तुत दावों तथा सुनवाई के दौरान बताई गई जानकारी पर आधारित हैं। सभी मौतों के कारणों की पुष्टि संबंधित जांच रिपोर्टों से ही होगी।
    user_Deepak Vishwakarma
    Deepak Vishwakarma
    Photographer जबलपुर, जबलपुर, मध्य प्रदेश•
    16 hrs ago
  • गुबराधरी में कथित कच्ची शराब का खेल, महिलाओं ने लगाए अभद्रता और जान से मारने की धमकी के आरोप गुबराधरी में कथित कच्ची शराब का खेल, महिलाओं ने लगाए अभद्रता और जान से मारने की धमकी के आरोप करीब 50 महिलाएं पहुंचीं एसपी कार्यालय, अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर कार्रवाई की मांग कटनी। एनकेजे थाना क्षेत्र के ग्राम गुबराधरी में कथित अवैध कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री को लेकर विवाद सामने आया है। मंगलवार को गांव की करीब आधा सैकड़ा महिलाएं शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं। महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन सौंपकर अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। शिकायत में महिलाओं ने आरोप लगाया कि ग्राम टेढ़ी हट्टा निवासी संजू लुनिया और छोटू लुनिया, पिता कल्लू लुनिया, कथित तौर पर गांव में कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री कर रहे हैं। महिलाओं के मुताबिक, जब ग्रामीण इस गतिविधि का विरोध करते हैं, तो उनके साथ गाली-गलौज की जाती है। शिकायत में महिलाओं के साथ अभद्रता करने और दुष्कर्म के बाद हत्या कर शव कहीं फेंक देने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। शराब के सेवन के बाद विवाद होने का आरोप शिकायतकर्ता महिलाओं का कहना है कि गांव में शराब के सेवन के बाद आए दिन विवाद, मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं होती हैं। इससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। महिलाओं ने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कराकर कथित अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। पुलिस कार्रवाई पर टिकी निगाहें गांव की करीब 50 महिलाओं के एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत करने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
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    गुबराधरी में कथित कच्ची शराब का खेल, महिलाओं ने लगाए अभद्रता और जान से मारने की धमकी के आरोप
गुबराधरी में कथित कच्ची शराब का खेल, महिलाओं ने लगाए अभद्रता और जान से मारने की धमकी के आरोप
करीब 50 महिलाएं पहुंचीं एसपी कार्यालय, अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर कार्रवाई की मांग
कटनी। एनकेजे थाना क्षेत्र के ग्राम गुबराधरी में कथित अवैध कच्ची शराब के निर्माण और बिक्री को लेकर विवाद सामने आया है। मंगलवार को गांव की करीब आधा सैकड़ा महिलाएं शिकायत लेकर पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचीं। महिलाओं ने पुलिस अधीक्षक को आवेदन सौंपकर अवैध शराब के कारोबार पर रोक लगाने और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिकायत में महिलाओं ने आरोप लगाया कि ग्राम टेढ़ी हट्टा निवासी संजू लुनिया और छोटू लुनिया, पिता कल्लू लुनिया, कथित तौर पर गांव में कच्ची शराब का निर्माण और बिक्री कर रहे हैं। महिलाओं के मुताबिक, जब ग्रामीण इस गतिविधि का विरोध करते हैं, तो उनके साथ गाली-गलौज की जाती है। शिकायत में महिलाओं के साथ अभद्रता करने और दुष्कर्म के बाद हत्या कर शव कहीं फेंक देने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं।
शराब के सेवन के बाद विवाद होने का आरोप
शिकायतकर्ता महिलाओं का कहना है कि गांव में शराब के सेवन के बाद आए दिन विवाद, मारपीट और गाली-गलौज की घटनाएं होती हैं। इससे ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। महिलाओं ने पुलिस प्रशासन से मामले की जांच कराकर कथित अवैध शराब निर्माण और बिक्री पर रोक लगाने तथा उन्हें सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।
पुलिस कार्रवाई पर टिकी निगाहें
गांव की करीब 50 महिलाओं के एसपी कार्यालय पहुंचकर शिकायत करने के बाद अब पुलिस की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
    user_Shivcharan Yadav
    Shivcharan Yadav
    Local News Reporter रीठी, कटनी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • OBC पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 52 %परसेंट 52% दो है फिर भी 27% परसेंट आरक्षण मांगा था पर 13% परसेंट हॉल करती है जाति का जनगणना करवाओ जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए
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    OBC पिछड़ा वर्ग की जनसंख्या 52 %परसेंट 52% दो है फिर भी 27% परसेंट आरक्षण मांगा था पर 13% परसेंट हॉल करती है जाति का जनगणना करवाओ जिसकी जितनी संख्या भारी उसकी उतनी हिस्सेदारी मिलनी चाहिए
    user_Jay Jawan Jay Kisan
    Jay Jawan Jay Kisan
    Lawyer Majholi, Jabalpur•
    2 hrs ago
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