श्रावण मास में शिवमय हुआ रामघाट, वैदिक मंत्रों की गूंज से आलोकित हो रही तपोभूमि अमरकंटक अनूपपूर - नमक-चमक रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप, दैनिक हवन एवं विशाल भजन-भंडारे से भक्तिमय बना वातावरण प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थस्थल अमरकंटक के नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 स्थित पावन रामघाट में श्रावण मास के आगमन के साथ सम्पूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा है। माँ नर्मदा के उत्तर तट पर प्रतिदिन गूंजते वैदिक मंत्र, श्रीरुद्रम के नमकम्-चमकम् का सस्वर पाठ, महामृत्युंजय मंत्र जाप, रुद्राभिषेक, शिव पूजन, यज्ञ-हवन एवं सत्संग से तपोभूमि अमरकंटक दिव्य आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो रही है। "त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥" श्रावण मास के शुभारंभ से प्रारंभ यह महाअनुष्ठान संपूर्ण मास निरंतर संचालित रहेगा। नर्मदा परिक्रमावासी संत स्वामी पूर्ण दास महाराज (मौनी बाबा) के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में प्रतिदिन भगवान आशुतोष का रुद्राभिषेक कर विश्वशांति, राष्ट्र की समृद्धि, जनकल्याण, उत्तम स्वास्थ्य एवं प्रकृति के संतुलन की मंगलकामना की जा रही है। उनके अनुसार श्रावण मास शिव आराधना का सर्वोत्तम काल है, जिसमें श्रद्धा से किया गया जप, तप एवं अभिषेक जीवन को सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सेवा और अन्नदान की सनातन परंपरा भी निरंतर निभाई जा रही है। प्रतिदिन श्रद्धालुओं, नर्मदा परिक्रमा वासियों एवं दूर-दराज़ से आने वाले भक्तों के लिए भजन-कीर्तन, विशाल भंडारा, प्रातः बालभोग, मध्याह्न महाप्रसाद, संध्या अल्पाहार एवं रात्रि भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। स्वामी पूर्ण दास महाराज का संकल्प है कि इस पावन धाम से कोई भी श्रद्धालु भूखा वापस न लौटे। "अन्नदानं परं दानं विद्यादानमतः परम्। अन्नेन क्षणिका तृप्तिर्विद्यया अमृतमश्नुते॥" महर्षि विद्यालय, जबलपुर से पधारे विद्वान वैदिक ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से नमक-चमक रुद्राभिषेक संपन्न कराया जा रहा है। इस महाअनुष्ठान में पंडित नीलकंठ प्यासी, पंडित जगदीश प्यासी, पंडित नंद कुमार शर्मा, पंडित वेद प्रकाश गर्ग, पंडित मनीष दुबे, पंडित प्रांजल अग्निहोत्री, पंडित दिलीप गर्ग, पंडित सुहागी द्विवेदी, पंडित वेद कृष्ण शास्त्री तथा पंडित रोहित तिवारी सहित अनेक विद्वान आचार्य-पुरोहित वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, हवन एवं शिव पूजन संपन्न करा रहे हैं। उनके मुखारविंद से निकली वैदिक ऋचाओं की पावन अनुगूंज सम्पूर्ण रामघाट को शिवभक्ति के दिव्य वातावरण से अनुप्राणित कर रही है। स्कन्द पुराण में कहा गया है— "श्रावणे मासि यो भक्त्या शंकरं पूजयेद् नरः। सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकं स गच्छति॥" अर्थात जो श्रद्धालु श्रावण मास में भगवान शिव का श्रद्धापूर्वक पूजन करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर शिवकृपा का अधिकारी बनता है। नर्मदा महापुराण में भी माँ नर्मदा के उत्तर तट को तप, जप, यज्ञ एवं शिव आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। श्रावण मास में रामघाट पर उमड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था, हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष, धूप-दीप एवं हवन की दिव्य सुगंध, वैदिक मंत्रों की अनुगूंज और अन्नदान की अखंड सेवा ने अमरकंटक को आध्यात्मिक चेतना से सराबोर कर दिया है। यह महाअनुष्ठान केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा, लोकमंगल और सेवा-साधना का जीवंत एवं प्रेरणादायी प्रतीक बन गया है।
श्रावण मास में शिवमय हुआ रामघाट, वैदिक मंत्रों की गूंज से आलोकित हो रही तपोभूमि अमरकंटक अनूपपूर - नमक-चमक रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय मंत्र जाप, दैनिक हवन एवं विशाल भजन-भंडारे से भक्तिमय बना वातावरण प्रमुख धार्मिक एवं आध्यात्मिक तीर्थस्थल अमरकंटक के नगर परिषद क्षेत्र अंतर्गत वार्ड क्रमांक 10 स्थित पावन रामघाट में श्रावण मास के आगमन के साथ सम्पूर्ण वातावरण शिवमय हो उठा है। माँ नर्मदा के उत्तर तट पर प्रतिदिन गूंजते वैदिक मंत्र, श्रीरुद्रम के नमकम्-चमकम् का सस्वर पाठ, महामृत्युंजय मंत्र जाप, रुद्राभिषेक, शिव पूजन, यज्ञ-हवन एवं सत्संग से तपोभूमि अमरकंटक दिव्य आध्यात्मिक आभा से आलोकित हो रही है। "त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥" श्रावण मास के शुभारंभ से प्रारंभ यह महाअनुष्ठान संपूर्ण मास निरंतर संचालित रहेगा। नर्मदा परिक्रमावासी संत स्वामी पूर्ण दास महाराज (मौनी बाबा) के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में प्रतिदिन भगवान आशुतोष का रुद्राभिषेक कर विश्वशांति, राष्ट्र की समृद्धि, जनकल्याण, उत्तम स्वास्थ्य एवं प्रकृति के संतुलन की मंगलकामना की जा रही है। उनके अनुसार श्रावण मास शिव आराधना का सर्वोत्तम काल है, जिसमें श्रद्धा से किया गया जप, तप एवं अभिषेक जीवन को सुख, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है। धार्मिक अनुष्ठानों के साथ सेवा और अन्नदान की सनातन परंपरा भी निरंतर निभाई जा रही है। प्रतिदिन श्रद्धालुओं, नर्मदा परिक्रमा वासियों एवं दूर-दराज़ से आने वाले भक्तों के लिए भजन-कीर्तन, विशाल भंडारा, प्रातः बालभोग, मध्याह्न महाप्रसाद, संध्या अल्पाहार एवं रात्रि भोजन की निःशुल्क व्यवस्था की गई है। स्वामी पूर्ण दास महाराज का संकल्प है कि इस पावन धाम से कोई भी श्रद्धालु भूखा वापस न लौटे। "अन्नदानं परं दानं विद्यादानमतः परम्। अन्नेन क्षणिका तृप्तिर्विद्यया अमृतमश्नुते॥" महर्षि विद्यालय, जबलपुर से पधारे विद्वान वैदिक ब्राह्मणों द्वारा शास्त्रोक्त विधि-विधान से नमक-चमक रुद्राभिषेक संपन्न कराया जा रहा है। इस महाअनुष्ठान में पंडित नीलकंठ प्यासी, पंडित जगदीश प्यासी, पंडित नंद कुमार शर्मा, पंडित वेद प्रकाश गर्ग, पंडित मनीष दुबे, पंडित प्रांजल अग्निहोत्री, पंडित दिलीप गर्ग, पंडित सुहागी द्विवेदी, पंडित वेद कृष्ण शास्त्री तथा पंडित रोहित तिवारी सहित अनेक विद्वान आचार्य-पुरोहित वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय जाप, हवन एवं शिव पूजन संपन्न करा रहे हैं। उनके मुखारविंद से निकली वैदिक ऋचाओं की पावन अनुगूंज सम्पूर्ण रामघाट को शिवभक्ति के दिव्य वातावरण से अनुप्राणित कर रही है। स्कन्द पुराण में कहा गया है— "श्रावणे मासि यो भक्त्या शंकरं पूजयेद् नरः। सर्वपापविनिर्मुक्तः शिवलोकं स गच्छति॥" अर्थात जो श्रद्धालु श्रावण मास में भगवान शिव का श्रद्धापूर्वक पूजन करता है, वह समस्त पापों से मुक्त होकर शिवकृपा का अधिकारी बनता है। नर्मदा महापुराण में भी माँ नर्मदा के उत्तर तट को तप, जप, यज्ञ एवं शिव आराधना के लिए अत्यंत पुण्यदायी बताया गया है। श्रावण मास में रामघाट पर उमड़ रही श्रद्धालुओं की आस्था, हर-हर महादेव के गगनभेदी जयघोष, धूप-दीप एवं हवन की दिव्य सुगंध, वैदिक मंत्रों की अनुगूंज और अन्नदान की अखंड सेवा ने अमरकंटक को आध्यात्मिक चेतना से सराबोर कर दिया है। यह महाअनुष्ठान केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, वैदिक परंपरा, लोकमंगल और सेवा-साधना का जीवंत एवं प्रेरणादायी प्रतीक बन गया है।
- खबर / ब्रेकिंग पुलिस अधीक्षक शहडोल के निर्देशन में यातायात पुलिस ने मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों के विरुद्ध विशेष अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान तेज आवाज कर ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाली दो मोटरसाइकिलों पर चालानी कार्रवाई की गई, जबकि एक बुलेट मोटरसाइकिल को जब्त किया गया। यातायात पुलिस ने वाहन चालकों से नियमों का पालन करने तथा मॉडिफाइड साइलेंसर का उपयोग न करने की अपील की है। नियमों के उल्लंघन पर आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।1
- 1962 संजीवनी योजना पर सवाल: डीजल नहीं होने से नहीं पहुंची पशु चिकित्सा टीम, बीमार भैंस की मौत का आरोप डिंडौरी। - मध्यप्रदेश शासन की पशु चिकित्सा विभाग की 1962 संजीवनी योजना एक बार फिर सवालों के घेरे में है। डिंडोरी जिले के जनपद पंचायत समनापुर अंतर्गत ग्राम छांटा में एक किसान ने आरोप लगाया है कि समय पर पशु चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने के कारण उसकी भैंस की मौत हो गई। पीड़ित किसान के अनुसार, उसने अपनी बीमार भैंस के इलाज के लिए 1962 संजीवनी योजना के हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया। किसान का कहना है कि पहली बार फोन करने पर संबंधित पशु चिकित्सक ने बताया कि पिछले 15 दिनों से वाहन के लिए डीजल उपलब्ध नहीं है, इसलिए टीम मौके पर नहीं पहुंच सकती। किसान को किसी अन्य स्थान से इलाज कराने की सलाह दी गई। किसान ने बताया कि 4 अगस्त को उसने दोबारा 1962 सेवा पर कॉल किया, लेकिन इस बार भी संबंधित डॉक्टर ने वही जवाब दिया कि डीजल उपलब्ध नहीं होने के कारण सेवा देना संभव नहीं है। आरोप है कि समय पर इलाज नहीं मिलने से उसकी भैंस की हालत लगातार बिगड़ती गई और अंततः उसकी मौत हो गई। इस मामले में जब जिला पशु चिकित्सा विभाग के उपसंचालक से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा कि यदि किसान ने 1962 सेवा पर कॉल दर्ज कराया है, तो संबंधित टीम को मौके पर जाना अनिवार्य है। उन्होंने यह भी कहा कि डीजल नहीं होने जैसी कोई समस्या विभाग के संज्ञान में नहीं है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि विभाग के वरिष्ठ अधिकारी डीजल की कमी से इनकार कर रहे हैं, तो फिर संबंधित डॉक्टर द्वारा किसान को डीजल न होने का हवाला देकर सेवा देने से इनकार क्यों किया गया? आखिर इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है? यदि समय पर पशु चिकित्सकीय सहायता मिल जाती, तो क्या किसान की भैंस की जान बच सकती थी? यह मामला न केवल 1962 संजीवनी योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को मिलने वाली आपातकालीन सेवाओं की वास्तविक स्थिति भी उजागर करता है। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करता है या नहीं।2
- कलेक्टर ने कृषको के तालाब मे मत्स्य बीज छोडे तथा किया वृक्षारोपण कलेक्टर ने कृषको के तालाब मे मत्स्य बीज छोडे तथा किया वृक्षारोपण कलेक्टर श्रीमती राखी सहाय ने मानपुर विकासखंड के पडवार एवं चिल्हारी ग्राम मे कृषको के खेतो मे जाकर समन्वित कृषि कार्य का अवलोकन किया, उन्होने कृषको के तालाब मे मत्स्य बीज छोडे और वृक्षारोपण भी किया। कलेक्टर ने कृषक सोनाली मजूमदार एवं बिहारी काछी के खेत मे किये जा रहे फसल विवधीकरण का अवलोकन करते हुये कृषको से संवाद भी किया। इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि परंपरागत खेती के स्थान पर मांग आधारित व बाजार आधारित फसलो को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता है। किसान भाईयो को अपने खेतो मे कई तरह के फसल व उधानिकी फसल को लेना होगा तभी कृषि को आय का साधन बनाया जा सकता है। उन्होने कहा कि एक ही खेत मे विभिन्न प्रकार की फसलें लेने से एक फसल का नुकसान होने पर दूसरे से भरपाई होती है। उन्होने कृषक द्वारा अपने खेत मे लगाये गये हल्दी, मिर्च एवं विभिन्न प्रकार की सब्जियो के साथ ही फलदार पौधे जैसे आम, जामुन व कटहल भी लगाये थे। कृषक बिहारी काछी ने बताया कि वह डेढ एकड के खेत मे विभिन्न फसलो एवं उद्यानिकी फसलो के उत्पादन लेते है साथ ही साथ वह मत्स्य उत्पादन का भी लाभ प्राप्त कर सकेगा। कलेक्टर ने अपेक्षा की जिले के किसान इसी प्रकार बाजार आधारित फसलो का उत्पादन लेकर अपनी आय मे वृद्धि कर सकेगे। उन्होने कृषि विभाग के अधिकारियो को निर्देश दिये की अधिक से अधिक पात्र किसानो को शासन की योजनाओ का लाभ दिलाया जाना सुनिश्चित करें। इस अवसर पर एसडीएम हरनीत कौर, डिप्टी कलेक्टर प्रिया अग्रवाल, उप संचालक कृषि संग्राम सिंह, उप संचालक उद्यान झनक सिंह मरावी एवं कृषि विभाग के मैदान कर्मचारी उपस्थित रहे।1
- एक युवक की सनक 50 हजार किलोमीटर की स्कैटिंग अब जगन्नाथ पुरी की यात्रा1
- हमारे देश के बड़े-बड़े नेताओं के बेटे और बेटियां कहां पढ़ रहे हैं इसका डाटा ।1
- शहडोल नवागत कलेक्टर श्री पार्थ जायसवाल ने विभागीय अधिकारियों की बैठक ली।1
- अतरिया व कूकड़ाटोला (Gadasarai) से कॉलेज पहुंच मार्ग पुलिया रास्ता को ठीक= करवाएं अतरिया व कूकड़ाटोला (Gadasarai) से कॉलेज पहुंच मार्ग पुलिया रास्ता को ठीक= करवाएं जिससे विद्यार्थियों को असुविधा न हो, विद्यार्थियों को सही शिक्षा प्राप्त हो.....1