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माधव नगर में बमों की गूंज, पुरानी रंजिश ने लिया हिंसक रूप

9 hrs ago
user_Sourabh Shrivastava
Sourabh Shrivastava
पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
9 hrs ago

माधव नगर में बमों की गूंज, पुरानी रंजिश ने लिया हिंसक रूप

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • Post by Sourabh Shrivastava
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    Post by Sourabh Shrivastava
    user_Sourabh Shrivastava
    Sourabh Shrivastava
    पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    9 hrs ago
  • मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस सचिव रजनी वर्मा का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, ‘एपस्टीन फाइल’ मामले में केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग कटनी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई एपस्टीन फाइल को लेकर अब कटनी में भी सियासत तेज हो गई है। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की सचिव रजनी वर्मा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस पदाधिकारियों ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार के एक मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और तत्काल इस्तीफे की मांग की है। ज्ञापन में रजनी वर्मा ने कहा कि हाल ही में सार्वजनिक हुई एपस्टीन फाइल में लाखों दस्तावेज, वीडियो, फोटो और ईमेल सामने आए हैं, जिनमें कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इन दस्तावेजों में भारत सरकार के एक केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल बताया जा रहा है, जो बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस सचिव रजनी वर्मा ने कहा कि यदि इस तरह के गंभीर आरोपों में किसी मंत्री का नाम सामने आता है तो यह न केवल देश की छवि को धूमिल करता है, बल्कि आम जनता के मन में असुरक्षा और अविश्वास की भावना भी पैदा करता है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित मंत्री को पद से हटाया जाए। साथ ही यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि समाज में इस तरह के अपराधों पर सख्त रोक लग सके। महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो इस मुद्दे को लेकर संगठन आंदोलन को और तेज करेगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान महिला कांग्रेस की कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
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    मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस सचिव रजनी वर्मा का केंद्र सरकार पर तीखा हमला, ‘एपस्टीन फाइल’ मामले में केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की उठी मांग
कटनी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में आई एपस्टीन फाइल को लेकर अब कटनी में भी सियासत तेज हो गई है। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की सचिव रजनी वर्मा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस पदाधिकारियों ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार के एक मंत्री के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और तत्काल इस्तीफे की मांग की है।
ज्ञापन में रजनी वर्मा ने कहा कि हाल ही में सार्वजनिक हुई एपस्टीन फाइल में लाखों दस्तावेज, वीडियो, फोटो और ईमेल सामने आए हैं, जिनमें कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इन दस्तावेजों में भारत सरकार के एक केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल बताया जा रहा है, जो बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है।
मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस सचिव रजनी वर्मा ने कहा कि यदि इस तरह के गंभीर आरोपों में किसी मंत्री का नाम सामने आता है तो यह न केवल देश की छवि को धूमिल करता है, बल्कि आम जनता के मन में असुरक्षा और अविश्वास की भावना भी पैदा करता है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि जब तक मामले की निष्पक्ष जांच पूरी नहीं हो जाती, तब तक संबंधित मंत्री को पद से हटाया जाए। साथ ही यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए, ताकि समाज में इस तरह के अपराधों पर सख्त रोक लग सके।
महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं की गई तो इस मुद्दे को लेकर संगठन आंदोलन को और तेज करेगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान महिला कांग्रेस की कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहीं।
    user_Balkishan Namdev
    Balkishan Namdev
    Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • *जागो जिला प्रशासन मैहर की करोड़ों की शासकीय संपत्ति पर काग्रेस नेता का कब्जा साथ होटल तैयार* मैहर:- शहर के देवी जी रोड में एक नहीं बल्कि तीन-तीन होटल सरकारी जमीन में कब्जा करने के बाद तैयार हो गई और प्रशासन को इतने बड़े घोटाले की भनक तक नहीं लगी, हालांकि यह बात कहना गलत होगा कि प्रशासन को जानकारी नहीं लगी जानकारी भी थी बल्कि इस मामले में मैहर के पूर्व राजस्व अधिकारी ने जमकर मलाई भी खाई थी। हनुमान टोला देवी जी रोड में स्थित होटल हंस वाहिनी के संचालक व कांग्रेस नेता चूड़ामणि बढोलिया होटल वासुकी के संचालक निल्लू पाठक होटल आशुतोष के संचालक प्रभाकर मिश्रा द्वारा सरकारी जमीन में कब्जा कर अवैध रूप से बिना अनुमति के गगनचुम्बी होटल तान दी गयी। बताया जाता है कि होटल बनने के पहले इस जगह झुग्गी झोपड़ी हुआ करती थी जिसका पीला पट्टा बना हुआ था जो सिर्फ 20 - 25 के लिए वैध था। मगर आज मौके पर जाकर देखा जाए तो वह झोपड़ी तोड़कर आलीशान होटल खड़ी हो चुकी है। अकेले होटल हंस वाहिनी के संचालक द्वारा रसूख के दम पर लगभग डेढ़ सौ से 200 फीट जमीन मे बाउंड्री वॉल करके कब्जा कर लिया गया, यही हाल जमीन माफिया व होटल वासुकी के संचालक निल्लू पाठक का है। यह आदमी सरकारी जमीन में कब्जा करने में माहिर है। कुछ इसे मिलती-जुलती कहानी होटल आशुतोष के संचालक प्रभाकर मिश्रा का भी यही हाल है। कुल मिलाकर नेतागिरी की आड़ में झाड़ काटने का काम तीनों मिलकर कर रहे हैं। और राजस्व को करोड़ों का चूना लगाने में पीछे नहीं हट रहे। इस मामले को मैहर अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। ताकि मामले की बारीकी से जांच कर इन होटलो को नेस्तनाबुत करने की कार्रवाई की जाए अगर स्थानीय जिला प्रशासन इन भू माफिया पर कार्यवाही नहीं करता तो, हाई कोर्ट में जाने की तैयारी कर ली गई है।
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    *जागो जिला प्रशासन मैहर की करोड़ों की शासकीय संपत्ति पर काग्रेस नेता का कब्जा साथ होटल तैयार* 
मैहर:- शहर के देवी जी रोड में एक नहीं बल्कि तीन-तीन होटल सरकारी जमीन में कब्जा करने के बाद तैयार हो गई और प्रशासन को इतने बड़े घोटाले की भनक तक नहीं लगी, हालांकि यह बात कहना गलत होगा कि प्रशासन को जानकारी नहीं लगी जानकारी भी थी बल्कि इस मामले में मैहर के पूर्व राजस्व अधिकारी ने जमकर मलाई भी खाई थी।
हनुमान टोला देवी जी रोड में स्थित होटल हंस वाहिनी के संचालक व कांग्रेस नेता चूड़ामणि बढोलिया होटल वासुकी के संचालक निल्लू पाठक होटल आशुतोष के संचालक प्रभाकर मिश्रा द्वारा सरकारी जमीन में कब्जा कर अवैध रूप से बिना अनुमति के गगनचुम्बी होटल तान दी गयी।
बताया जाता है कि होटल बनने के पहले इस जगह झुग्गी झोपड़ी हुआ करती थी जिसका पीला पट्टा बना हुआ था जो सिर्फ 20 - 25 के लिए वैध था।  मगर आज मौके पर जाकर देखा जाए तो वह झोपड़ी तोड़कर आलीशान होटल खड़ी हो चुकी है। अकेले होटल हंस वाहिनी के संचालक द्वारा रसूख के दम पर लगभग डेढ़ सौ से 200 फीट जमीन मे बाउंड्री वॉल करके कब्जा कर लिया गया, यही हाल जमीन माफिया व होटल वासुकी के संचालक निल्लू पाठक का है। यह आदमी सरकारी जमीन में कब्जा करने में माहिर है।
कुछ इसे मिलती-जुलती कहानी होटल आशुतोष के संचालक प्रभाकर मिश्रा का भी यही हाल है।
कुल मिलाकर नेतागिरी की आड़ में झाड़ काटने का काम तीनों मिलकर कर रहे हैं। और राजस्व को करोड़ों का चूना लगाने में पीछे नहीं हट रहे।
इस मामले को मैहर अनुविभागीय अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है। ताकि मामले की बारीकी से जांच कर इन होटलो को नेस्तनाबुत करने की कार्रवाई की जाए
अगर स्थानीय जिला प्रशासन इन भू माफिया  पर कार्यवाही नहीं करता तो, हाई कोर्ट में जाने की तैयारी कर ली गई है।
    user_Naresh Bajaj
    Naresh Bajaj
    पत्रकार कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • Post by Saurabh Singh
    1
    Post by Saurabh Singh
    user_Saurabh Singh
    Saurabh Singh
    पत्रकार शाहनगर, पन्ना, मध्य प्रदेश•
    11 hrs ago
  • Post by Shivcharan Yadav
    1
    Post by Shivcharan Yadav
    user_Shivcharan Yadav
    Shivcharan Yadav
    Local News Reporter रीठी, कटनी, मध्य प्रदेश•
    6 hrs ago
  • *“देशभक्ति-जनसेवा के नारे पर अमानवीयता का दाग: क्या बदेरा थाना में लौट आया अंग्रेजी दौर का कोतवाली राज?” महज 3000 रुपये की लूट की रिपोर्ट लिखाने पहुंचे फरियादी के साथ कथित मारपीट, पैरों के तलवों पर गंभीर चोट का आरोप — कार्रवाई न होने से उठे सवाल* *मैहर* जिले के बदेरा थाना से सामने आई एक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पुलिस का आदर्श वाक्य *“देशभक्ति और जनसेवा”* बताया जाता है, उसी पर एक फरियादी के साथ कथित अमानवीय व्यवहार करने के आरोप लगने से क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि यह घटना कहीं न कहीं अंग्रेजी हुकूमत के उस दौर की याद दिलाती है,*जब पुलिस आम जनता के लिए भय का प्रतीक मानी जाती थी।* प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला मात्र 3000 रुपये की लूट की शिकायत से जुड़ा बताया जा रहा है। *भदनपुर निवासी रामभजन प्रजापति* अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कई बार बदेरा थाना पहुंचे। आरोप है कि पुलिस द्वारा उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें बार-बार टालते हुए *“दूसरे दिन आने”* के लिए कहा जाता रहा। बताया जाता है कि *3 मार्च 2026 को रामभजन प्रजापति लूट की एफआईआर दर्ज कराने थाने गए थे।* रिपोर्ट दर्ज न होने पर वे अगले दिन भी थाने पहुंचे। पीड़ित का आरोप है कि *4 मार्च की सुबह लगभग 10 बजे उन्हें थाने बुलाया गया, जहां पहले उन्हें खाना खिलाया गया और उसके बाद उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।* पीड़ित के अनुसार इस मारपीट से उनके *पैरों के तलवों में गंभीर चोट आई है, जिसके कारण उनका चलना-फिरना और दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हो गई है।* इस घटना को पुलिस की ज्यादती बताते हुए उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय मैहर पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। *हालांकि घटना सामने आने के बाद भी अब तक किसी ठोस कार्रवाई के संकेत नहीं मिलने से क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।* लोगों का कहना है कि यदि एक साधारण नागरिक अपनी छोटी-सी शिकायत लेकर थाने जाता है और उसके साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो यह कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। *अब सभी की निगाहें प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं* कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है या नहीं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।
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    *“देशभक्ति-जनसेवा के नारे पर अमानवीयता का दाग: क्या बदेरा थाना में लौट आया अंग्रेजी दौर का कोतवाली राज?” महज 3000 रुपये की लूट की रिपोर्ट लिखाने पहुंचे फरियादी के साथ कथित मारपीट, पैरों के तलवों पर गंभीर चोट का आरोप — कार्रवाई न होने से उठे सवाल*
*मैहर* जिले के बदेरा थाना से सामने आई एक घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस पुलिस का आदर्श वाक्य *“देशभक्ति और जनसेवा”* बताया जाता है, उसी पर एक फरियादी के साथ कथित अमानवीय व्यवहार करने के आरोप लगने से क्षेत्र में चर्चा और आक्रोश का माहौल बन गया है। लोगों का कहना है कि यह घटना कहीं न कहीं अंग्रेजी हुकूमत के उस दौर की याद दिलाती है,*जब पुलिस आम जनता के लिए भय का प्रतीक मानी जाती थी।*
प्राप्त जानकारी के अनुसार मामला मात्र 3000 रुपये की लूट की शिकायत से जुड़ा बताया जा रहा है। *भदनपुर निवासी रामभजन प्रजापति* अपनी रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए कई बार बदेरा थाना पहुंचे। आरोप है कि पुलिस द्वारा उनकी शिकायत दर्ज करने के बजाय उन्हें बार-बार टालते हुए *“दूसरे दिन आने”* के लिए कहा जाता रहा।
बताया जाता है कि *3 मार्च 2026 को रामभजन प्रजापति लूट की एफआईआर दर्ज कराने थाने गए थे।* रिपोर्ट दर्ज न होने पर वे अगले दिन भी थाने पहुंचे। पीड़ित का आरोप है कि *4 मार्च की सुबह लगभग 10 बजे उन्हें थाने बुलाया गया, जहां पहले उन्हें खाना खिलाया गया और उसके बाद उनके साथ बेरहमी से मारपीट की गई।* पीड़ित के अनुसार इस मारपीट से उनके *पैरों के तलवों में गंभीर चोट आई है, जिसके कारण उनका चलना-फिरना और दैनिक दिनचर्या भी प्रभावित हो गई है।* इस घटना को पुलिस की ज्यादती बताते हुए उन्होंने पुलिस अधीक्षक कार्यालय मैहर पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई है और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
*हालांकि घटना सामने आने के बाद भी अब तक किसी ठोस कार्रवाई के संकेत नहीं मिलने से क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर कई तरह के सवाल उठने लगे हैं।* लोगों का कहना है कि यदि एक साधारण नागरिक अपनी छोटी-सी शिकायत लेकर थाने जाता है और उसके साथ ऐसा व्यवहार होता है, तो यह कानून व्यवस्था और मानवाधिकारों के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
*अब सभी की निगाहें प्रशासन और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं* कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई सामने लाई जाती है या नहीं और पीड़ित को न्याय मिल पाता है या नहीं।
    user_Deepak Tiwari (Sonu)
    Deepak Tiwari (Sonu)
    पत्रकार मैहर, सतना, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • बाघों की दहलीज पर खड़ा कैलाश वॉटर पार्क प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश को ठेगा दिखा रहा वॉटर पार्क रसूख के आगे नतमस्तक उमरिया प्रशासन उमरिया// विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो अपनी गर्जना और प्राकृतिक शांति के लिए जाना जाता है, आज भ्रष्टाचार के शोर और अवैध निर्माण की जद में है। उमरिया के ग्राम महामन में स्थित कैलाश वॉटर पार्क वन्यजीव संरक्षण अधिनियमों की धज्जियां उड़ाते हुए न केवल सीना ताने खड़ा है, बल्कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) भोपाल के स्पष्ट निर्देशों को भी बौना साबित कर रहा है। आखिर वो कौन सी अदृश्य शक्ति है, जिसके संरक्षण में यह वॉटर पार्क इको-सेंसिटिव जोन के नियमों को पैरों तले रौंद रहा है। नियमों की कब्र पर खड़ा कैलाश का साम्राज्य सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 13.12.2016 को जारी अधिसूचना के बिंदु क्रमांक 4(11)(क) के अनुसार, संरक्षित क्षेत्र की सीमा से 01 किलोमीटर के भीतर किसी भी प्रकार का नया वाणिज्यिक निर्माण पूर्णत: प्रतिबंधित है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कैलाश वॉटर पार्क की पक्की बाउंड्री वॉल बांधवगढ़ के खितौली कोर परिक्षेत्र से महज 10 से 12 मीटर की दूरी पर पाई गई है। यह सीधे तौर पर बाघों के घर में अनधिकृत घुसपैठ है। पीसीसीएफ की रिपोर्ट ने खोली पोल भोपाल मुख्यालय से जारी प्रतिवेदन ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया है। विभाग के अभिमत में स्पष्ट लिखा है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक को इस मामले में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का कानूनी अधिकार ही नहीं था। नियमत: इस प्रकरण को इको सेंसिटिव जोन की निगरानी समिति के समक्ष रखा जाना अनिवार्य था, जिसे दरकिनार कर दिया गया। वॉटर पार्क से निकलने वाले प्रदूषित पानी को नजरअंदाज करते हुए इसे प्रदूषण न फैलाने वाले उद्योग की श्रेणी में रखकर गुमराह किया गया। वन्यजीवों के लिए धीमा जहर दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख है कि वॉटर पार्क में पानी के निस्तार के पूर्व जल उपचार संयंत्र का सही ढंग से संचालन और उसकी अनुमति आवश्यक है। पार्क से निकलने वाला क्लोरीन युक्त और प्रदूषित पानी सीधे तौर पर क्षेत्र के भूजल और वन्यजीवों के जल स्रोतों को जहरीला बना रहा है। क्या विभाग किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है? जब बाघों की दहलीज पर इस तरह का वॉटर वेस्ट बहेगा, तो पारिस्थितिक तंत्र का विनाश निश्चित है। शैलानियों की जान से खिलवाड़ और शांति भंग टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से मात्र चंद मीटर की दूरी पर वॉटर पार्क का संचालन न केवल वन्यजीवों की शांति भंग कर रहा है, बल्कि वहां आने वाले शैलानियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। शोर-शराबे और मानवीय दखल से विचलित होकर यदि कोई हिंसक वन्यजीव इंसानी बस्ती या पार्क की ओर रुख करता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा? सिस्टम के मुंह पर तमाचा प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने 14 अगस्त 2025 को अपने प्रतिवेदन में साफ कर दिया कि यह निर्माण नियमों के विरुद्ध है और आवश्यक कार्यवाही हेतु फाइल आगे बढ़ाई गई है। बावजूद इसके, वॉटर पार्क का पुन: शुरू होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर एक गरीब अपनी जमीन पर झोपड़ी बनाए तो वन विभाग डंडा लेकर पहुंच जाता है, लेकिन टाइगर रिजर्व की नाक के नीचे करोड़ों का वॉटर पार्क फल-फूल रहा है और अधिकारी फाइल-फाइल खेल रहे हैं। कैलाश वॉटर पार्क केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का जीता-जागता स्मारक है। यदि तत्काल प्रभाव से इस पर ताला नहीं जड़ा गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो वह दिन दूर नहीं जब बांधवगढ़ की पहचान केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।
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    बाघों की दहलीज पर खड़ा कैलाश वॉटर पार्क  
प्रधान मुख्य वन संरक्षक के आदेश को ठेगा दिखा रहा वॉटर पार्क 
रसूख के आगे नतमस्तक उमरिया प्रशासन
उमरिया// विश्व प्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व, जो अपनी गर्जना और प्राकृतिक शांति के लिए जाना जाता है, आज भ्रष्टाचार के शोर और अवैध निर्माण की जद में है। उमरिया के ग्राम महामन में स्थित कैलाश वॉटर पार्क वन्यजीव संरक्षण अधिनियमों की धज्जियां उड़ाते हुए न केवल सीना ताने खड़ा है, बल्कि प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यप्राणी) भोपाल के स्पष्ट निर्देशों को भी बौना साबित कर रहा है। आखिर वो कौन सी अदृश्य शक्ति है, जिसके संरक्षण में यह वॉटर पार्क इको-सेंसिटिव जोन के नियमों को पैरों तले रौंद रहा है। 
नियमों की कब्र पर खड़ा कैलाश का साम्राज्य
सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल से एक चौंकाने वाला सच सामने आया है। भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा 13.12.2016 को जारी अधिसूचना के बिंदु क्रमांक 4(11)(क) के अनुसार, संरक्षित क्षेत्र की सीमा से 01 किलोमीटर के भीतर किसी भी प्रकार का नया वाणिज्यिक निर्माण पूर्णत: प्रतिबंधित है, लेकिन आश्चर्य की बात यह है कि कैलाश वॉटर पार्क की पक्की बाउंड्री वॉल बांधवगढ़ के खितौली कोर परिक्षेत्र से महज 10 से 12 मीटर की दूरी पर पाई गई है। यह सीधे तौर पर बाघों के घर में अनधिकृत घुसपैठ है।
पीसीसीएफ की रिपोर्ट ने खोली पोल
भोपाल मुख्यालय से जारी प्रतिवेदन ने इस पूरे खेल का पर्दाफाश कर दिया है। विभाग के अभिमत में स्पष्ट लिखा है कि बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के उप संचालक को इस मामले में अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने का कानूनी अधिकार ही नहीं था। नियमत: इस प्रकरण को इको सेंसिटिव जोन की निगरानी समिति के समक्ष रखा जाना अनिवार्य था, जिसे दरकिनार कर दिया गया। वॉटर पार्क से निकलने वाले प्रदूषित पानी को नजरअंदाज करते हुए इसे प्रदूषण न फैलाने वाले उद्योग की श्रेणी में रखकर गुमराह किया गया।
वन्यजीवों के लिए धीमा जहर
दस्तावेजों में स्पष्ट उल्लेख है कि वॉटर पार्क में पानी के निस्तार के पूर्व जल उपचार संयंत्र का सही ढंग से संचालन और उसकी अनुमति आवश्यक है। पार्क से निकलने वाला क्लोरीन युक्त और प्रदूषित पानी सीधे तौर पर क्षेत्र के भूजल और वन्यजीवों के जल स्रोतों को जहरीला बना रहा है। क्या विभाग किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार कर रहा है? जब बाघों की दहलीज पर इस तरह का वॉटर वेस्ट बहेगा, तो पारिस्थितिक तंत्र का विनाश निश्चित है।
शैलानियों की जान से खिलवाड़ और शांति भंग
टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र से मात्र चंद मीटर की दूरी पर वॉटर पार्क का संचालन न केवल वन्यजीवों की शांति भंग कर रहा है, बल्कि वहां आने वाले शैलानियों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकता है। शोर-शराबे और मानवीय दखल से विचलित होकर यदि कोई हिंसक वन्यजीव इंसानी बस्ती या पार्क की ओर रुख करता है, तो इसका जिम्मेदार कौन होगा?
सिस्टम के मुंह पर तमाचा
प्रधान मुख्य वन संरक्षक कार्यालय ने 14 अगस्त 2025 को अपने प्रतिवेदन में साफ कर दिया कि यह निर्माण नियमों के विरुद्ध है और आवश्यक कार्यवाही हेतु फाइल आगे बढ़ाई गई है। बावजूद इसके, वॉटर पार्क का पुन: शुरू होना प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। स्थानीय ग्रामीणों और वन्यजीव प्रेमियों में भारी आक्रोश है। उनका कहना है कि अगर एक गरीब अपनी जमीन पर झोपड़ी बनाए तो वन विभाग डंडा लेकर पहुंच जाता है, लेकिन टाइगर रिजर्व की नाक के नीचे करोड़ों का वॉटर पार्क फल-फूल रहा है और अधिकारी फाइल-फाइल खेल रहे हैं। कैलाश वॉटर पार्क केवल एक निर्माण नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का जीता-जागता स्मारक है। यदि तत्काल प्रभाव से इस पर ताला नहीं जड़ा गया और जिम्मेदार अधिकारियों पर गाज नहीं गिरी, तो वह दिन दूर नहीं जब बांधवगढ़ की पहचान केवल कागजों तक सीमित रह जाएगी।
    user_Neeraj Singh Raghuvanshi
    Neeraj Singh Raghuvanshi
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    5 hrs ago
  • मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस जिला सचिव रजनी वर्मा का बड़ा हमला: ‘एपस्टीन फाइल’ में नाम आने पर केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग कटनी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित एपस्टीन फाइल को लेकर कटनी में महिला कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की जिला सचिव रजनी वर्मा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस पदाधिकारियों ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार के एक मंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तत्काल इस्तीफे की मांग की। ज्ञापन में रजनी वर्मा ने कहा कि हाल ही में सामने आई एपस्टीन फाइल में लाखों दस्तावेज, वीडियो, तस्वीरें और ईमेल सार्वजनिक किए गए हैं, जिनमें कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इन दस्तावेजों में भारत सरकार के एक केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल बताया जा रहा है, जो बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है। महिला कांग्रेस का कहना है कि यदि इस तरह के गंभीर आरोपों में किसी मंत्री का नाम सामने आता है तो यह न केवल देश की छवि को धूमिल करता है, बल्कि आम जनता के मन में असुरक्षा और अविश्वास की भावना भी पैदा करता है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए। जिला सचिव रजनी वर्मा ने मांग की कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक संबंधित मंत्री को पद से हटाया जाए। साथ ही यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में इस तरह के अपराधों पर सख्त रोक लग सके। महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा। ज्ञापन सौंपने के दौरान महिला कांग्रेस की कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद
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    मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस जिला सचिव रजनी वर्मा का बड़ा हमला: ‘एपस्टीन फाइल’ में नाम आने पर केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे की मांग
कटनी। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित एपस्टीन फाइल को लेकर कटनी में महिला कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। मध्य प्रदेश महिला कांग्रेस की जिला सचिव रजनी वर्मा के नेतृत्व में महिला कांग्रेस पदाधिकारियों ने महामहिम राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपकर केंद्र सरकार के एक मंत्री के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तत्काल इस्तीफे की मांग की।
ज्ञापन में रजनी वर्मा ने कहा कि हाल ही में सामने आई एपस्टीन फाइल में लाखों दस्तावेज, वीडियो, तस्वीरें और ईमेल सार्वजनिक किए गए हैं, जिनमें कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की बात कही जा रही है। आरोप है कि इन दस्तावेजों में भारत सरकार के एक केंद्रीय मंत्री का नाम भी शामिल बताया जा रहा है, जो बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है।
महिला कांग्रेस का कहना है कि यदि इस तरह के गंभीर आरोपों में किसी मंत्री का नाम सामने आता है तो यह न केवल देश की छवि को धूमिल करता है, बल्कि आम जनता के मन में असुरक्षा और अविश्वास की भावना भी पैदा करता है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराई जानी चाहिए।
जिला सचिव रजनी वर्मा ने मांग की कि जब तक पूरे मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो जाती, तब तक संबंधित मंत्री को पद से हटाया जाए। साथ ही यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की जाए, ताकि समाज में इस तरह के अपराधों पर सख्त रोक लग सके।
महिला कांग्रेस ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे को लेकर आंदोलन तेज किया जाएगा।
ज्ञापन सौंपने के दौरान महिला कांग्रेस की कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद
    user_Balkishan Namdev
    Balkishan Namdev
    Electrician कटनी (मुरवारा), कटनी, मध्य प्रदेश•
    12 hrs ago
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