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दिव्यांग बेटे की पढ़ाई के लिए मां का अद्भुत समर्पण, दिनभर स्कूल में रहकर करती है देखभाल; इलेक्ट्रिक साइकिल की मांग

7 hrs ago
user_सुधीर यादव
सुधीर यादव
Local News Reporter सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
7 hrs ago

दिव्यांग बेटे की पढ़ाई के लिए मां का अद्भुत समर्पण, दिनभर स्कूल में रहकर करती है देखभाल; इलेक्ट्रिक साइकिल की मांग

More news from मध्य प्रदेश and nearby areas
  • कलेक्टर ने जिला स्तरीय जनसुनवाई में 63 आवेदनों पर की सुनवाई अनूपपुर - कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित नर्मदा सभागार में आज जिला स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की गई। कलेक्टर रत्नाकर झा ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए आवेदकों की समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई में प्राप्त 63 आवेदनों की सुनवाई करते हुए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवेदनों का परीक्षण कर नियमानुसार त्वरित एवं संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनीं तथा प्राप्त आवेदनों के निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही की। जनसुनवाई में वार्ड क्रमांक 2 अनूपपुर निवासी श्रीमती जुगून्ती बाई ने बैटरी चालित साइकिल (मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल) उपलब्ध कराए जाने के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। ग्राम सुलखारी, तहसील जैतहरी निवासी सोनशाह राठौर ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि का लाभ दिलाए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। वहीं ग्राम कैल्हौरी, तहसील अनूपपुर निवासी पुष्पराज ढीमर ने गरीबी रेखा श्रेणी के राशन कार्ड में नाम जोड़े जाने के संबंध में आवेदन दिया। इसी प्रकार ग्राम पंचायत दुलहरा निवासी रूपलाल कोरी ने विद्युत पोल स्थापित किए जाने तथा ग्राम करपा, तहसील पुष्पराजगढ़ निवासी जीवन नायक ने कृषि विभाग के माध्यम से रीपर मशीन उपलब्ध कराने हेतु अनुदान राशि का लाभ दिलाए जाने के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। ग्राम बकही, तहसील अनूपपुर निवासी श्रीमती ललिया बाई ने भूमि के एवज में एसईसीएल से मुआवजा राशि दिलाए जाने तथा ग्राम पड़री, तहसील अनूपपुर निवासी गुड्डा सिंह ने नया विद्युत ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाने के संबंध में आवेदन दिया। वार्ड क्रमांक 10 कोतमा निवासी लक्ष्मण सोनी ने स्वेच्छानुदान मद से सहायता राशि प्रदान किए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए। जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी, अपर कलेक्टर बलबीर रमन, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर सुश्री प्राशी अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
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    कलेक्टर ने जिला स्तरीय जनसुनवाई में 63 आवेदनों पर की सुनवाई
अनूपपुर -  
कलेक्ट्रेट कार्यालय स्थित नर्मदा सभागार में आज जिला स्तरीय जनसुनवाई आयोजित की गई। कलेक्टर रत्नाकर झा ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए आवेदकों की समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई में प्राप्त 63 आवेदनों की सुनवाई करते हुए कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवेदनों का परीक्षण कर नियमानुसार त्वरित एवं संतुष्टिपूर्ण निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने भी आवेदकों की समस्याएं सुनीं तथा प्राप्त आवेदनों के निराकरण के लिए आवश्यक कार्यवाही की।
जनसुनवाई में वार्ड क्रमांक 2 अनूपपुर निवासी श्रीमती जुगून्ती बाई ने बैटरी चालित साइकिल (मोटराइज्ड ट्राइसाइकिल) उपलब्ध कराए जाने के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। ग्राम सुलखारी, तहसील जैतहरी निवासी सोनशाह राठौर ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की राशि का लाभ दिलाए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। वहीं ग्राम कैल्हौरी, तहसील अनूपपुर निवासी पुष्पराज ढीमर ने गरीबी रेखा श्रेणी के राशन कार्ड में नाम जोड़े जाने के संबंध में आवेदन दिया।
इसी प्रकार ग्राम पंचायत दुलहरा निवासी रूपलाल कोरी ने विद्युत पोल स्थापित किए जाने तथा ग्राम करपा, तहसील पुष्पराजगढ़ निवासी जीवन नायक ने कृषि विभाग के माध्यम से रीपर मशीन उपलब्ध कराने हेतु अनुदान राशि का लाभ दिलाए जाने के संबंध में आवेदन प्रस्तुत किया। ग्राम बकही, तहसील अनूपपुर निवासी श्रीमती ललिया बाई ने भूमि के एवज में एसईसीएल से मुआवजा राशि दिलाए जाने तथा ग्राम पड़री, तहसील अनूपपुर निवासी गुड्डा सिंह ने नया विद्युत ट्रांसफॉर्मर स्थापित किए जाने के संबंध में आवेदन दिया। वार्ड क्रमांक 10 कोतमा निवासी लक्ष्मण सोनी ने स्वेच्छानुदान मद से सहायता राशि प्रदान किए जाने हेतु आवेदन प्रस्तुत किया। जनसुनवाई में जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे नागरिकों ने अपनी समस्याओं एवं मांगों से संबंधित आवेदन प्रस्तुत किए।
जनसुनवाई में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत श्रीमती अर्चना कुमारी, अपर कलेक्टर बलबीर रमन, अनुविभागीय अधिकारी राजस्व अनूपपुर सुश्री प्राशी अग्रवाल सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
    user_Anupam Singh patrkar
    Anupam Singh patrkar
    अनूपपुर, अनूपपुर, मध्य प्रदेश•
    7 hrs ago
  • पीएम आवास योजना सूची में गड़बड़ी ग्रामीणों ने की जांच की मांग, पीएम आवास योजना सूची में कथित घरवाली काआप, गर्मियों में कलेक्टर से की शिकायत और जांच की मांग आज तक लाइव 24 जिला ब्यूरो बाल्मीकि यादव पीएम आवास योजना सूची में गड़बड़ी, ग्रामीणों ने की जांच की मांग , पीएम आवास योजना सूची में कथित गड़बड़ी का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग मध्य प्रदेश उमरिया- जिले के ग्राम पंचायत कछरवार , थाना उमरिया के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की सूची में कथित अनिमियता का आरोप लगाते हुए कलेक्टर उमरिया को लिखित शिकायत दी गई है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्र हितग्राहियों को योजना के लाभ दिलाने की मांग की है। शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में पीएम आवास योजना के सर्वे के दौरान करीब 900 से 920 लोगों के सूची में नाम आये थे। आरोप है की जांच के बाद सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक के मार्गदर्शन में कई पात्र एवं गरीब हितग्राहीयो के नाम सूची से काट दिए गए हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि नई सूची तैयार करते समय कुछ ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए जो कथित तौर पर योजना के लिए अपात्र है।
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    पीएम आवास योजना सूची में गड़बड़ी ग्रामीणों ने की जांच की मांग, पीएम आवास योजना सूची में कथित घरवाली काआप, गर्मियों में कलेक्टर से की शिकायत और जांच की मांग
आज तक लाइव 24 जिला ब्यूरो बाल्मीकि यादव 
पीएम आवास योजना सूची में गड़बड़ी, ग्रामीणों ने की जांच की मांग , पीएम आवास योजना सूची में कथित गड़बड़ी का आरोप, ग्रामीणों ने कलेक्टर से की जांच की मांग 
मध्य प्रदेश 
उमरिया- जिले के ग्राम पंचायत कछरवार , थाना उमरिया के ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों की सूची में कथित अनिमियता का आरोप लगाते हुए कलेक्टर उमरिया को लिखित शिकायत दी गई है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर पात्र हितग्राहियों को योजना के लाभ दिलाने की मांग की है। शिकायत में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत में पीएम आवास योजना के सर्वे के दौरान करीब 900 से 920 लोगों के सूची में नाम आये थे। आरोप है की जांच के बाद सरपंच, सचिव एवं रोजगार सहायक के मार्गदर्शन में कई पात्र एवं गरीब हितग्राहीयो के नाम सूची से काट दिए गए हैं। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि नई सूची तैयार करते समय कुछ ऐसे लोगों के नाम जोड़े गए जो कथित तौर पर योजना के लिए अपात्र है।
    user_ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • chitraw me.bahut.dinsur.nikla Gram Panchayat chitram Thana tahsil jaisinagar Madhya Pradesh
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    chitraw me.bahut.dinsur.nikla
Gram Panchayat chitram Thana tahsil jaisinagar Madhya Pradesh
    user_Durgesh Ashirwar
    Durgesh Ashirwar
    Singer जयसिंहनगर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • नशा मुक्ति के लिए एक अभियान चलाना जरूरी है जो यह विडियो के माध्यम से सब सुन सकते है जागो ग्राहक जागो 🙏🙏
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    नशा मुक्ति के लिए एक अभियान चलाना जरूरी है जो यह विडियो के माध्यम से सब सुन सकते है जागो ग्राहक जागो 🙏🙏
    user_Purushottam Singh
    Purushottam Singh
    Farmer Anuppur, Madhya Pradesh•
    17 hrs ago
  • मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल? मानपुर में अवैध शराब का खेल! गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल पेट्रोल-डीजल पर कार्रवाई दिखी, लेकिन शराब के अवैध कारोबार पर चुप्पी क्यों? आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी — उमरिया। मानपुर। मानपुर क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर अब सवाल सिर्फ शराब बेचने वालों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से ऐसी कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, जिससे अवैध कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन पेट्रोल-डीजल से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर सकता है, तो फिर खुलेआम चल रही कथित अवैध शराब बिक्री पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों? शिकायतें हैं तो छापेमारी क्यों नहीं? मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, डोंड़का, भमरहा सहित कई गांवों और मुख्य मार्ग से लगे क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आने की बात स्थानीय नागरिकों द्वारा कही जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि कुछ स्थानों पर शराब की बिक्री निर्धारित समय के बाद भी किए जाने की शिकायतें हैं। यदि ये शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन मैदानी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई? यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी? अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या आबकारी विभाग के पास क्षेत्र की नियमित निगरानी की व्यवस्था नहीं है? क्या पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय की कमी है? क्या शिकायतों की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचती? या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए। छोटे कारोबार से बड़ा नेटवर्क बनने का खतरा ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में छोटी मात्रा से शुरू होने वाली अवैध शराब बिक्री पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह आगे चलकर बड़े अवैध नेटवर्क का रूप ले सकती है। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्रामीण और युवा आबादी के बीच शराब की आसान उपलब्धता सामाजिक समस्या को बढ़ा सकती है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का असर परिवार, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। नशामुक्ति अभियान बनाम जमीन की हकीकत सरकार नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती है। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी ओर यदि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होती रहे तो केवल जागरूकता अभियान से समस्या का समाधान कैसे होगा? दीवारों पर नशामुक्ति के संदेश और गांवों में कथित अवैध शराब की बिक्री—इन दोनों के बीच का विरोधाभास आखिर कब खत्म होगा? प्रशासन से सीधे सवाल 1. मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं? 2. पिछले कुछ महीनों में आबकारी विभाग ने कितने छापे मारे? 3. कितने प्रकरण दर्ज किए गए और कितने आरोपियों पर कार्रवाई हुई? 4. क्या हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, दौड़का और भमराहा में जांच कराई गई? 5. यदि जांच नहीं हुई तो क्यों? 6. क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा? 7. क्या शराब की अवैध सप्लाई के स्रोत तक पहुंचने के लिए जांच की जाएगी? ग्रामीणों की मांग—अब दिखे जमीन पर कार्रवाई स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई या औपचारिक जांच के बजाय अचानक और संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए। आबकारी विभाग, पुलिस और राजस्व अमले की संयुक्त टीम बनाकर शिकायत वाले क्षेत्रों की जांच की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए। अब निगाह प्रशासन पर मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने प्रशासन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को महज ग्रामीणों की नाराजगी मानकर नजरअंदाज करता है या फिर मैदानी स्तर पर जांच कर सच सामने लाता है। क्योंकि सवाल सिर्फ शराब की अवैध बिक्री का नहीं है—सवाल यह भी है कि यदि कानून का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, तो कानून लागू करने वाले तंत्र की नजर आखिर कहां है?
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    मानपुर में अवैध शराब का खेल!
गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल?

मानपुर में अवैध शराब का खेल!
गांव-गांव में खुलेआम शराब बिक्री के आरोप, फिर भी आबकारी-पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
पेट्रोल-डीजल पर कार्रवाई दिखी, लेकिन शराब के अवैध कारोबार पर चुप्पी क्यों?
आशुतोष त्रिपाठी/जनचिंगारी — उमरिया।
मानपुर। मानपुर क्षेत्र में कथित अवैध शराब बिक्री को लेकर अब सवाल सिर्फ शराब बेचने वालों पर नहीं, बल्कि कार्रवाई के लिए जिम्मेदार सरकारी तंत्र की कार्यप्रणाली पर भी उठने लगे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि क्षेत्र के कई गांवों में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री की शिकायतें सामने आ रही हैं, बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों की ओर से ऐसी कोई बड़ी और प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दे रही, जिससे अवैध कारोबारियों में कानून का भय पैदा हो।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब प्रशासन पेट्रोल-डीजल से जुड़े मामलों में कार्रवाई कर सकता है, तो फिर खुलेआम चल रही कथित अवैध शराब बिक्री पर कार्रवाई करने में इतनी देरी क्यों?
शिकायतें हैं तो छापेमारी क्यों नहीं?
मानपुर जनपद पंचायत क्षेत्र के हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, डोंड़का, भमरहा सहित कई गांवों और मुख्य मार्ग से लगे क्षेत्रों में अवैध शराब बिक्री की शिकायतें सामने आने की बात स्थानीय नागरिकों द्वारा कही जा रही है।
ग्रामीणों का दावा है कि कुछ स्थानों पर शराब की बिक्री निर्धारित समय के बाद भी किए जाने की शिकायतें हैं। यदि ये शिकायतें गलत हैं तो प्रशासन मैदानी जांच कर स्थिति स्पष्ट क्यों नहीं करता? और यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो अब तक प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यही सवाल अब ग्रामीणों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।
कार्रवाई की जिम्मेदारी किसकी?
अवैध शराब की बिक्री पर कार्रवाई की जिम्मेदारी संबंधित विभागों की होती है। ऐसे में स्थानीय नागरिकों का सवाल है कि क्या आबकारी विभाग के पास क्षेत्र की नियमित निगरानी की व्यवस्था नहीं है?
क्या पुलिस और आबकारी विभाग के बीच समन्वय की कमी है?
क्या शिकायतों की सूचना जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचती?
या फिर शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही?
इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों को देना चाहिए।
छोटे कारोबार से बड़ा नेटवर्क बनने का खतरा
ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांवों में छोटी मात्रा से शुरू होने वाली अवैध शराब बिक्री पर समय रहते अंकुश नहीं लगाया गया तो यह आगे चलकर बड़े अवैध नेटवर्क का रूप ले सकती है।
सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि ग्रामीण और युवा आबादी के बीच शराब की आसान उपलब्धता सामाजिक समस्या को बढ़ा सकती है। नशे की बढ़ती प्रवृत्ति का असर परिवार, स्वास्थ्य, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर भी पड़ सकता है।
नशामुक्ति अभियान बनाम जमीन की हकीकत
सरकार नशे के खिलाफ जागरूकता अभियान चलाती है। युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश दिया जाता है। लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि दूसरी ओर यदि गांवों में शराब आसानी से उपलब्ध होती रहे तो केवल जागरूकता अभियान से समस्या का समाधान कैसे होगा?
दीवारों पर नशामुक्ति के संदेश और गांवों में कथित अवैध शराब की बिक्री—इन दोनों के बीच का विरोधाभास आखिर कब खत्म होगा?
प्रशासन से सीधे सवाल
1. मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री की कितनी शिकायतें प्राप्त हुईं?
2. पिछले कुछ महीनों में आबकारी विभाग ने कितने छापे मारे?
3. कितने प्रकरण दर्ज किए गए और कितने आरोपियों पर कार्रवाई हुई?
4. क्या हिरौली, बिजौरी, करौंदी टोला, दौड़का और भमराहा में जांच कराई गई?
5. यदि जांच नहीं हुई तो क्यों?
6. क्या पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम बनाकर अभियान चलाया जाएगा?
7. क्या शराब की अवैध सप्लाई के स्रोत तक पहुंचने के लिए जांच की जाएगी?
ग्रामीणों की मांग—अब दिखे जमीन पर कार्रवाई
स्थानीय नागरिकों ने मांग की है कि सिर्फ कागजी कार्रवाई या औपचारिक जांच के बजाय अचानक और संयुक्त छापेमारी अभियान चलाया जाए। आबकारी विभाग, पुलिस और राजस्व अमले की संयुक्त टीम बनाकर शिकायत वाले क्षेत्रों की जांच की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार कठोर कार्रवाई की जाए और कार्रवाई की जानकारी सार्वजनिक की जाए।
अब निगाह प्रशासन पर
मानपुर क्षेत्र में अवैध शराब बिक्री के आरोपों ने प्रशासन और आबकारी विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
अब देखना यह है कि प्रशासन इन शिकायतों को महज ग्रामीणों की नाराजगी मानकर नजरअंदाज करता है या फिर मैदानी स्तर पर जांच कर सच सामने लाता है।
क्योंकि सवाल सिर्फ शराब की अवैध बिक्री का नहीं है—सवाल यह भी है कि यदि कानून का उल्लंघन खुलेआम हो रहा है, तो कानून लागू करने वाले तंत्र की नजर आखिर कहां है?
    user_Ashutosh tripathi
    Ashutosh tripathi
    Court reporter मानपुर, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    15 hrs ago
  • धुरवार टोल प्लाजा शहडोल-शहडोल मे ट्रक ड्राइवर क़ो गाड़ी मे घुस कर टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने मार मार कर अधमरा कर दिया। बात केवल इतनी थी की गाड़ी का टैग नहीं लिया टोल प्लाजा के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए और टोल के कर्मचारियों कों नेम प्लेट के साथ ड्रेस मे होना चाहिए।* धुरवार टोल प्लाजा शहडोल-शहडोल मे ट्रक ड्राइवर क़ो गाड़ी मे घुस कर टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने मार मार कर अधमरा कर दिया। बात केवल इतनी थी की गाड़ी का टैग नहीं लिया टोल प्लाजा के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए और टोल के कर्मचारियों कों नेम प्लेट के साथ ड्रेस मे होना चाहिए।*
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    धुरवार टोल प्लाजा शहडोल-शहडोल मे ट्रक ड्राइवर क़ो गाड़ी मे घुस कर टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने मार मार कर अधमरा कर दिया।
बात केवल इतनी थी की गाड़ी का टैग नहीं लिया टोल प्लाजा के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए और टोल के कर्मचारियों कों नेम प्लेट के साथ ड्रेस मे होना चाहिए।*
धुरवार टोल प्लाजा शहडोल-शहडोल मे ट्रक ड्राइवर क़ो गाड़ी मे घुस कर टोल प्लाजा के कर्मचारियों ने मार मार कर अधमरा कर दिया।
बात केवल इतनी थी की गाड़ी का टैग नहीं लिया टोल प्लाजा के कर्मचारियों का पुलिस वेरिफिकेशन होना चाहिए और टोल के कर्मचारियों कों नेम प्लेट के साथ ड्रेस मे होना चाहिए।*
    user_पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    पंडित कृष्णा मिश्रा पत्रकार
    Insurance Agent सोहागपुर, शहडोल, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • निजी जमीन पर भवन विभाग के कब्जे का आरोप, किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत निजी जमीन पर वन विभाग के कब्जे का आरोप! किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत मध्य प्रदेश उमरिया के बांधवगढ़ तहसील के ग्राम मझमानीकला में निजी जमीन पर वन विभाग की कथित कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन पर मुनारे बनाकर कब्जे की कोशिश की जा रही है और खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया से शिकायत कर हस्तक्षेप की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
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    निजी जमीन पर भवन विभाग के कब्जे का आरोप, किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत
निजी जमीन पर वन विभाग के कब्जे का आरोप! किसानों ने कलेक्टर से की शिकायत
मध्य प्रदेश 
उमरिया के बांधवगढ़ तहसील के ग्राम मझमानीकला में निजी जमीन पर वन विभाग की कथित कार्रवाई को लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है। किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन पर मुनारे बनाकर कब्जे की कोशिश की जा रही है और खड़ी फसल को नुकसान पहुंचने की आशंका है। ग्रामीणों ने कलेक्टर उमरिया से शिकायत कर हस्तक्षेप की मांग की है। मांग पूरी नहीं होने पर धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी है।
    user_ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    ब्यूरो चीफ/बाल्मीकि यादव
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    10 hrs ago
  • चार करोड़ की बाईपास सड़क पर 300 मीटर का संकट विशालकाय गड्ढे में फंसा ट्रक, दो जेसीबी भी नहीं निकाल सकीं; शाम से ठप यातायात, मुख्य बाजार पर बढ़ा दबाव चार करोड़ की बाईपास सड़क पर 300 मीटर का संकट विशालकाय गड्ढे में फंसा ट्रक, दो जेसीबी भी नहीं निकाल सकीं; शाम से ठप यातायात, मुख्य बाजार पर बढ़ा दबाव मानपुर। नगर परिषद मानपुर में नवनिर्मित बाईपास सड़क का अधूरा 300 मीटर हिस्सा अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। सोमवार शाम विशालकाय गड्ढे में एक ट्रक फंस गया। उसे निकालने के लिए दो जेसीबी मशीनें लगाई गईं, लेकिन सुबह तक ट्रक बाहर नहीं निकल सका। शाम करीब 7 बजे से बाईपास मार्ग पर यातायात बाधित है और बड़े वाहनों को मुख्य बाजार से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे बाजार में यातायात का दबाव भी बढ़ गया है। *अब नाली क्रॉसिंग के नाम पर सड़क तोड़ने का मामला* मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि मानपुर-व्यौहारी रोड से जहां बाईपास सड़क शुरू होती है, उसी स्थान पर नाली क्रॉस करने के लिए नगर परिषद के ठेकेदार द्वारा सड़क का हिस्सा तोड़े जाने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बनी नवनिर्मित सड़क को कथित तौर पर बिना अनुमति तोड़ा गया, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत नहीं कराई जा रही है। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग को शिकायत भी की गई है, लेकिन शिकायत के बावजूद अब तक न तो क्षतिग्रस्त सड़क को दुरुस्त कराया गया और न ही संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध किसी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी राशि से बनी सड़क को क्षतिग्रस्त करने के मामले में जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कब होगी? *एक तरफ 300 मीटर अधूरा, दूसरी तरफ बनी सड़क भी क्षतिग्रस्त* बाईपास का करीब 300 मीटर हिस्सा भूमि विवाद एवं न्यायालयीन प्रकरण के कारण अधूरा बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सड़क के प्रारंभिक हिस्से में नाली क्रॉसिंग के लिए सड़क तोड़े जाने की शिकायत ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सड़क को अंधे मोड़ से मुक्त कर सीधा करने के उद्देश्य से ठेकेदार द्वारा सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए बेस तैयार किया गया था। लेकिन विवादित हिस्से में निर्माण रुकने के बाद यहां बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश में स्थिति और खराब हो जाती है तथा वाहन चालकों के साथ बच्चों और बुजुर्गों को भी जोखिम उठाकर गुजरना पड़ता है। *हाईकोर्ट प्रकरण के बीच प्रशासनिक भूमिका पर सवाल* स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क को सीधा करने और अंधे मोड़ को समाप्त करने को लेकर भूमि संबंधी विवाद का मामला माननीय उच्च न्यायालय तक पहुंचा था। न्यायालयीन प्रक्रिया के कारण निर्माण प्रभावित होने की बात सामने आई है। ऐसे में लोगों का कहना है कि स्थायी निर्माण में यदि कानूनी बाधा है तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था कर मार्ग को सुरक्षित रखना चाहिए। *रहवासियों की मांग—पहले रास्ता सुरक्षित करें, फिर विवाद का समाधान* स्थानीय रहवासियों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और नगर परिषद से मांग की है कि बाईपास मार्ग के विशालकाय गड्ढों को तत्काल गिट्टी-मुरम से भरकर आवागमन योग्य बनाया जाए। साथ ही नाली क्रॉसिंग के लिए जहां सड़क तोड़ी गई है, वहां भी सड़क को तत्काल दुरुस्त कराया जाए। लोगों का सीधा सवाल है—चार करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क की निगरानी कौन कर रहा है? यदि सड़क तोड़ने की अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और कार्रवाई कब होगी? और यदि 300 मीटर हिस्से में न्यायालयीन विवाद के कारण निर्माण संभव नहीं है, तो तब तक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कौन करेगा? अब देखना यह है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या बाईपास की इस बदहाल स्थिति पर तत्काल संज्ञान लेकर रास्ता दुरुस्त कराता है।
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    चार करोड़ की बाईपास सड़क पर 300 मीटर का संकट

विशालकाय गड्ढे में फंसा ट्रक, दो जेसीबी भी नहीं निकाल सकीं; शाम से ठप यातायात, मुख्य बाजार पर बढ़ा दबाव
चार करोड़ की बाईपास सड़क पर 300 मीटर का संकट
विशालकाय गड्ढे में फंसा ट्रक, दो जेसीबी भी नहीं निकाल सकीं; शाम से ठप यातायात, मुख्य बाजार पर बढ़ा दबाव
मानपुर। नगर परिषद मानपुर में नवनिर्मित बाईपास सड़क का अधूरा 300 मीटर हिस्सा अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। सोमवार शाम विशालकाय गड्ढे में एक ट्रक फंस गया। उसे निकालने के लिए दो जेसीबी मशीनें लगाई गईं, लेकिन सुबह तक ट्रक बाहर नहीं निकल सका। शाम करीब 7 बजे से बाईपास मार्ग पर यातायात बाधित है और बड़े वाहनों को मुख्य बाजार से होकर गुजरना पड़ रहा है, जिससे बाजार में यातायात का दबाव भी बढ़ गया है।
*अब नाली क्रॉसिंग के नाम पर सड़क तोड़ने का मामला*
मामले को और गंभीर बनाने वाली बात यह है कि मानपुर-व्यौहारी रोड से जहां बाईपास सड़क शुरू होती है, उसी स्थान पर नाली क्रॉस करने के लिए नगर परिषद के ठेकेदार द्वारा सड़क का हिस्सा तोड़े जाने की शिकायत सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब चार करोड़ रुपये की लागत से बनी नवनिर्मित सड़क को कथित तौर पर बिना अनुमति तोड़ा गया, लेकिन कार्य पूरा होने के बाद सड़क की मरम्मत नहीं कराई जा रही है।
इस संबंध में लोक निर्माण विभाग को शिकायत भी की गई है, लेकिन शिकायत के बावजूद अब तक न तो क्षतिग्रस्त सड़क को दुरुस्त कराया गया और न ही संबंधित ठेकेदार के विरुद्ध किसी कार्रवाई की जानकारी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि सरकारी राशि से बनी सड़क को क्षतिग्रस्त करने के मामले में जिम्मेदारी तय करने की कार्रवाई कब होगी?
*एक तरफ 300 मीटर अधूरा, दूसरी तरफ बनी सड़क भी क्षतिग्रस्त*
बाईपास का करीब 300 मीटर हिस्सा भूमि विवाद एवं न्यायालयीन प्रकरण के कारण अधूरा बताया जा रहा है। वहीं दूसरी ओर सड़क के प्रारंभिक हिस्से में नाली क्रॉसिंग के लिए सड़क तोड़े जाने की शिकायत ने निर्माण की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
सड़क को अंधे मोड़ से मुक्त कर सीधा करने के उद्देश्य से ठेकेदार द्वारा सड़क की चौड़ाई बढ़ाने के लिए बेस तैयार किया गया था। लेकिन विवादित हिस्से में निर्माण रुकने के बाद यहां बड़े-बड़े गड्ढे बन गए हैं। बारिश में स्थिति और खराब हो जाती है तथा वाहन चालकों के साथ बच्चों और बुजुर्गों को भी जोखिम उठाकर गुजरना पड़ता है।
*हाईकोर्ट प्रकरण के बीच प्रशासनिक भूमिका पर सवाल*
स्थानीय लोगों के अनुसार सड़क को सीधा करने और अंधे मोड़ को समाप्त करने को लेकर भूमि संबंधी विवाद का मामला माननीय उच्च न्यायालय तक पहुंचा था। न्यायालयीन प्रक्रिया के कारण निर्माण प्रभावित होने की बात सामने आई है। ऐसे में लोगों का कहना है कि स्थायी निर्माण में यदि कानूनी बाधा है तो प्रशासन को वैकल्पिक व्यवस्था कर मार्ग को सुरक्षित रखना चाहिए।
*रहवासियों की मांग—पहले रास्ता सुरक्षित करें, फिर विवाद का समाधान*
स्थानीय रहवासियों ने जिला प्रशासन, लोक निर्माण विभाग और नगर परिषद से मांग की है कि बाईपास मार्ग के विशालकाय गड्ढों को तत्काल गिट्टी-मुरम से भरकर आवागमन योग्य बनाया जाए। साथ ही नाली क्रॉसिंग के लिए जहां सड़क तोड़ी गई है, वहां भी सड़क को तत्काल दुरुस्त कराया जाए।
लोगों का सीधा सवाल है—चार करोड़ रुपये की लागत से बनी सड़क की निगरानी कौन कर रहा है? यदि सड़क तोड़ने की अनुमति नहीं थी तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी और कार्रवाई कब होगी? और यदि 300 मीटर हिस्से में न्यायालयीन विवाद के कारण निर्माण संभव नहीं है, तो तब तक सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था कौन करेगा?
अब देखना यह है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार करता है या बाईपास की इस बदहाल स्थिति पर तत्काल संज्ञान लेकर रास्ता दुरुस्त कराता है।
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    पत्रकारिता
    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    14 hrs ago
  • सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी _अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी _अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम रोहनिया से सामने आया है।पीड़िता सरोज बाई बैगा ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसे ‘सोधनिया’ यानी कथित डायन होने के शक में जबरन घर में घुसाकर बंधक बना लिया गया।इसके बाद उसके बाल पकड़कर घसीटा गया,बेरहमी से मारपीट की गई और गर्म चिमटे से उंगलियां दागने का आरोप है।इतना ही नहीं,महिला और उसके पति मुकेश बैगा को कथित तौर पर पिकअप वाहन में बैठाकर नयागांव स्थित पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता के मुताबिक 30 अगस्त की शाम करीब 5 बजे वह घर के पास रास्ते में थी।इसी दौरान कौशिल्या बाई उसे काम के बहाने अपने घर के भीतर ले गई।शिकायत के अनुसार वहां निरंजन सिंह,बिहारी सिंह, वीरेन्द्र सिंह,राजेन्द्र सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।आरोप है कि अंदर पहुंचते ही उसे पकड़ लिया गया और बाल खींचकर जमीन पर घसीटते हुए मारपीट की गई।इसके बाद गर्म चिमटे से उसकी उंगलियां छुआकर दागी गईं और ‘सोधनिया’ होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की गई।शिकायत में बताया गया है कि कथित बंधक बनाए जाने के बाद उसके पति मुकेश बैगा को भी वहां बुलाया गया। दोनों को पिकअप में बैठाकर नयागांव के एक पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता का दावा है कि पंडा ने उसे ‘सोधनिया’ नहीं बताया, जिसके बाद दोनों को वापस लाया गया।रास्ते में पति का मोबाइल भी कथित तौर पर छीन लिया गया,ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।महिला का आरोप है कि घटना उजागर करने या पुलिस में शिकायत करने पर उसे और उसके पति को जान से खत्म करने की धमकी दी गई तथा मामला दबाने के लिए पैसों का लालच भी दिया गया।पीड़िता के अनुसार उसने उमरिया थाने में लिखित शिकायत दी,लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अब उसने एसपी से निष्पक्ष जांच,आरोपियों पर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।_
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    सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी

_अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला
सोधनिया के शक में महिला को बनाया बंधक,गर्म चिमटे से उंगलियां भी दागी
_अंधविश्वास की आड़ में इंसानियत को शर्मसार करने वाला सनसनीखेज मामला कोतवाली थाना अंतर्गत ग्राम रोहनिया से सामने आया है।पीड़िता सरोज बाई बैगा ने पुलिस अधीक्षक को दी शिकायत में आरोप लगाया है कि उसे ‘सोधनिया’ यानी कथित डायन होने के शक में जबरन घर में घुसाकर बंधक बना लिया गया।इसके बाद उसके बाल पकड़कर घसीटा गया,बेरहमी से मारपीट की गई और गर्म चिमटे से उंगलियां दागने का आरोप है।इतना ही नहीं,महिला और उसके पति मुकेश बैगा को कथित तौर पर पिकअप वाहन में बैठाकर नयागांव स्थित पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता के मुताबिक 30 अगस्त की शाम करीब 5 बजे वह घर के पास रास्ते में थी।इसी दौरान कौशिल्या बाई उसे काम के बहाने अपने घर के भीतर ले गई।शिकायत के अनुसार वहां निरंजन सिंह,बिहारी सिंह, वीरेन्द्र सिंह,राजेन्द्र सिंह समेत अन्य लोग मौजूद थे।आरोप है कि अंदर पहुंचते ही उसे पकड़ लिया गया और बाल खींचकर जमीन पर घसीटते हुए मारपीट की गई।इसके बाद गर्म चिमटे से उसकी उंगलियां छुआकर दागी गईं और ‘सोधनिया’ होने का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की गई।शिकायत में बताया गया है कि कथित बंधक बनाए जाने के बाद उसके पति मुकेश बैगा को भी वहां बुलाया गया। दोनों को पिकअप में बैठाकर नयागांव के एक पंडा के पास ले जाया गया।पीड़िता का दावा है कि पंडा ने उसे ‘सोधनिया’ नहीं बताया, जिसके बाद दोनों को वापस लाया गया।रास्ते में पति का मोबाइल भी कथित तौर पर छीन लिया गया,ताकि वह किसी से संपर्क न कर सके।महिला का आरोप है कि घटना उजागर करने या पुलिस में शिकायत करने पर उसे और उसके पति को जान से खत्म करने की धमकी दी गई तथा मामला दबाने के लिए पैसों का लालच भी दिया गया।पीड़िता के अनुसार उसने उमरिया थाने में लिखित शिकायत दी,लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। अब उसने एसपी से निष्पक्ष जांच,आरोपियों पर कार्रवाई और सुरक्षा की मांग की है।शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।_
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    बांधवगढ़, उमरिया, मध्य प्रदेश•
    8 hrs ago
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