“बोरे बासी तिहार” 📍ग्राम खुर्सीटीकूल छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सम्मानित अध्यक्ष माननीय दीपक बैज जी के ग्राम खुर्सीटीकूल आगमन पर डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र के ग्राम रामपुर चौक में कांग्रेस जनों के साथ आत्मीय अभिनंदन किया। छत्तीसगढ़ की माटी, मेहनतकशों की पहचान और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का प्रतीक “बोरे बासी तिहार” केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रम, सम्मान और स्वाभिमान का उत्सव है। यह तिहार उन श्रमिकों, किसानों और मेहनतकश भाइयों-बहनों को समर्पित है, जिनके पसीने से प्रदेश की तरक्की की नींव मजबूत होती है। कांग्रेस सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री माननीय भूपेश बघेल जी द्वारा इस परंपरा को पुनर्जीवित कर “बोरे बासी तिहार” की शुरुआत की गई, ताकि मजदूरों के सम्मान, अस्मिता और अधिकार को नई पहचान मिल सके। यह पहल इस बात का प्रतीक है कि मेहनत करने वाला हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी है। आइए, इस अवसर पर हम सभी श्रमिक साथियों के सम्मान, अधिकार और अस्मिता को सशक्त बनाने का संकल्प लें।
“बोरे बासी तिहार” 📍ग्राम खुर्सीटीकूल छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के सम्मानित अध्यक्ष माननीय दीपक बैज जी के ग्राम खुर्सीटीकूल आगमन पर डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र
के ग्राम रामपुर चौक में कांग्रेस जनों के साथ आत्मीय अभिनंदन किया। छत्तीसगढ़ की माटी, मेहनतकशों की पहचान और हमारी सांस्कृतिक अस्मिता का
प्रतीक “बोरे बासी तिहार” केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि श्रम, सम्मान और स्वाभिमान का उत्सव है। यह तिहार उन श्रमिकों, किसानों और
मेहनतकश भाइयों-बहनों को समर्पित है, जिनके पसीने से प्रदेश की तरक्की की नींव मजबूत होती है। कांग्रेस सरकार के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री माननीय
भूपेश बघेल जी द्वारा इस परंपरा को पुनर्जीवित कर “बोरे बासी तिहार” की शुरुआत की गई, ताकि मजदूरों के सम्मान, अस्मिता और
अधिकार को नई पहचान मिल सके। यह पहल इस बात का प्रतीक है कि मेहनत करने वाला हर व्यक्ति सम्मान का अधिकारी
है। आइए, इस अवसर पर हम सभी श्रमिक साथियों के सम्मान, अधिकार और अस्मिता को सशक्त बनाने का संकल्प लें।
- Post by Ashish parihar Parihar1
- सुशासन तिहार में रेत माफियाओं पर तहसीलदार की ताबडतोड कार्रवाई, RTO-खनिज विभाग की चुप्पी पर उठे सवाल.! गोबरा नवापारा। महानदी का सीना छलनी कर शासन के राजस्व को करोड़ों का चूना लगा रहे रेत माफियाओं पर राजस्व विभाग ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। सुशासन तिहार के दौरान बेखौफ होकर अवैध रेत परिवहन कर रहे दर्जनों हाइवा तहसीलदार की टीम ने धर दबोचे। लेकिन इस कार्रवाई ने RTO और खनिज विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारी के अनुसार सुबह से ही गोबरा नवापारा तहसीलदार विक्रांत सिंह राठौर एक्शन मोड में थे। सूचना मिलते ही टीम ने मुख्य मार्गों पर घेराबंदी कर बिना रॉयल्टी पर्ची के अवैध रेत लेकर भाग रहे दर्जनों हाइवा पकड़े। अचानक हुई कार्रवाई से माफियाओं में हड़कंप मच गया। सवाल यह है कि रोजाना सैकड़ों ओवरलोड रेत हाइवा नेशनल हाईवे और शहर से गुजरते हैं, फिर भी जिम्मेदार RTO और खनिज विभाग कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति करते हैं। न तो नियमित जांच होती है, न ही नाकेबंदी। विभाग की इसी ढिलाई के चलते रेत माफियाओं के हौसले इतने बुलंद हैं कि सुशासन तिहार जैसे सरकारी अभियान के दौरान भी अवैध परिवहन बेरोकटोक जारी था।स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना विभागीय संरक्षण के इतने बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन और परिवहन संभव ही नहीं है। महानदी से अवैध खनन के कारण नदी का स्वरूप बिगड़ रहा है और शासन को हर महीने लाखों के राजस्व का नुकसान हो रहा है। फिलहाल जब्त हाइवा पर खनिज अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर जुर्माने की कार्रवाई की जा रही है।2
- नारायणपुर में IED ब्लास्ट की घटना में 4 जवानों की शहादत हुई है। यह हादसा IED डिफ्यूज करने के दौरान हुआ। घटना के बाद पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई है और सर्च ऑपरेशन तेज कर दिया गया है। इस बीच प्रदेश के गृह मंत्री विजय शर्मा ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की और घटना पर गहरा दुख जताया है। प्रदेशभर में शोक की लहर है और शहीदों को नमन किया जा रहा है। #Narayanpur #IEDBlast #CGNews #BreakingNews #VijaySharma #Martyrs #Chhattisgarh1
- रायपुर में आयोजित सतनामी समाज के विशाल सम्मेलन में सामाजिक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया। सम्मेलन में कफन प्रथा और मृत्यु भोज जैसी कुरीतियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया। इस दौरान 15 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर सर्वसम्मति बनी, जिनका उद्देश्य समाज में एकता, सादगी और सुधार को बढ़ावा देना है। कार्यक्रम में प्रदेशभर से मंत्री, विधायक, सामाजिक पदाधिकारी और हजारों समाजजन शामिल हुए।1
- बलरामपुर के ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान पहुंचे मुख्यमंत्री "जय बिहान" — जब मुख्यमंत्री खुद चलकर पहुंचे उन महिलाओं के पास, जो बदल रही हैं गांव की तस्वीर बलरामपुर, बलरामपुर जिला प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय एक खास जगह रुके — ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी)। यहां कोई बड़ा मंच नहीं था, कोई लंबा भाषण नहीं — बस एक प्रशिक्षण कक्ष था, जहां बैठी थीं वे महिलाएं, जो कभी घर की चारदीवारी तक सीमित थीं, और आज अपने गांव के पशुओं की सेहत की जिम्मेदारी उठा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कमरे में प्रवेश करते ही कहा "जय बिहान" और उस अभिवादन के साथ पूरे कमरे में एक ऊर्जा भर गई। केवली गांव की अनुराधा — एक साधारण महिला की असाधारण जिम्मेदारी जब मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षणार्थियों से उनके अनुभव जाने, तो विकासखंड रामचंद्रपुर के बगरा क्लस्टर की ग्राम केवली की अनुराधा गुप्ता आगे आईं। उन्होंने बताया कि वे बिहान योजना से जुड़कर *पशु सखी* के रूप में काम कर रही हैं। सुबह उठकर वे अपने गांव के पशुओं का सर्वे करती हैं, पशु चिकित्सकों को जानकारी देती हैं, और ग्रामीणों को पशुपालन की बारीकियां समझाती हैं। जो गाय-बैल कभी बीमार पड़ते थे और किसान हाथ मलता रह जाता था — आज अनुराधा उस किसान के दरवाजे तक पहले पहुंच जाती हैं। "पहले हमें खुद नहीं पता था कि पशुओं की बीमारी कैसे पहचानें — और आज हम दूसरों को बताते हैं।" यही वो बदलाव है जिसे मुख्यमंत्री ने करीब से देखा और महसूस किया। *510 जिंदगियां — जो आत्मनिर्भरता की राह पर चल पड़ी हैं* आरसेटी केवल एक संस्थान नहीं — यह उन सैकड़ों सपनों का पड़ाव है जो कभी संसाधनों की कमी से दम तोड़ देते थे। जिला बलरामपुर-रामानुजगंज में इस संस्थान के माध्यम से ग्रामीण बेरोजगार युवक-युवतियों और महिलाओं को कौशल आधारित प्रशिक्षण दिया जा रहा है। अब तक 16 बैचों में 510 प्रशिक्षणार्थी विभिन्न उद्यमी क्षेत्रों में तैयार हो चुके हैं — और हर एक अपने-अपने गांव में बदलाव की एक छोटी सी लौ बन चुका है। मुख्यमंत्री ने संस्थान की गतिविधियों का विस्तार से अवलोकन किया, प्रशिक्षणार्थियों से बात की और उनका उत्साह बढ़ाया। यह सिर्फ एक दौरा नहीं था — यह उस विश्वास की पुष्टि थी कि छत्तीसगढ़ के गांवों में बदलाव की असली ताकत वहां की महिलाओं के हाथों में है।4
- ब्रेकिंग न्यूज राजिम उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दिया बयान, पश्चिम बंगाल,असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में कल आने वाले चुनाव परिणाम को लेकर दिया बयान, कहा जनता के रुझानों से स्पष्ट है भाजपा एनडीए की सरकार बन रही है, कोपरा नगर पंचायत में अटल परिसर के लोकार्पण में पहुंचे हुवे थे उपमुख्यमंत्री अरुण साव,1
- Post by Kamal Kumar meshram4
- Post by Ashish parihar Parihar1
- भारी वाहनों ने राजिम–परसवानी चौबेबांधा पुल की सूरत बिगाड़ी पुल के जॉइंट पर बाहर निकला सरिया दे रहा दुर्घटना को न्योता राजिम। गरियाबंद जिले को धमतरी जिले से जोड़ने वाले राजिम–परसवानी चौबेबांधा पुल की हालत लगातार खराब होती जा रही है। पुल के जॉइंट से सरिया बाहर निकल आई है, जिससे किसी भी समय बड़ी दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ है। करीब 550 मीटर लंबा यह पुल कई जगहों पर उखड़ा हुआ नजर आ रहा है। कहीं जॉइंट उभरे हुए हैं तो कहीं गहरे गड्ढे बन चुके हैं। एक जॉइंट ऐसा भी है, जहां हर छह महीने में सरिया बाहर निकल आती है। मिली जानकारी के अनुसार, संबंधित विभाग द्वारा मरम्मत के नाम पर गिट्टी और सीमेंट डालकर औपचारिकता पूरी कर दी जाती है। न तो उचित तरीके से पानी डाला जाता है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन किया जाता है, जिससे कुछ ही दिनों में फिर से सरिया दिखाई देने लगती है। कई बार बाहर निकली सरिया को काटकर ऊपर से सीमेंट और गिट्टी डाल दी जाती है, लेकिन इस बार सरिया बड़े आकार में बाहर दिख रही है, जो धीरे-धीरे गड्ढे का रूप ले रही है। पुल के कई हिस्सों में गिट्टी और डामर उखड़ चुके हैं, जिससे नुकीले पत्थर साफ दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में पैदल चलना भी जोखिम भरा हो गया है—बिना जूते-चप्पल के चलना तो लगभग असंभव है। राहगीरों का कहना है कि पुल की मरम्मत अत्यंत आवश्यक है, लेकिन विभाग इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है। जानकारी के अनुसार, वर्ष 2005 में लगभग 4.50 करोड़ रुपये की लागत से नाबार्ड की सहायता से इस पुल का निर्माण कराया गया था, ताकि धमतरी जिले को राजिम से जोड़ा जा सकें। अविभाजित मध्यप्रदेश के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री पंडित श्यामाचरण शुक्ल द्वारा इसका भूमि पूजन किया गया था। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री (वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष) डॉ. रमन सिंह ने इसका शिलान्यास कर इसे जनता को समर्पित किया। निर्माण के लगभग 21 वर्षों में ही पुल की जर्जर स्थिति राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन गई है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस मार्ग पर भारी वाहनों की आवाजाही लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे पुल की संरचना पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है। पुल के समीप नया मेला ग्राउंड भी स्थित है, जहां पिछले दो वर्षों से प्रसिद्ध कुंभ कल्प मेला आयोजित किया जा रहा है। ऐसे में इस मार्ग का महत्व और बढ़ गया है तथा यहां चौबिसों घंटे आवागमन बना रहता है। बावजूद इसके, पुल की मरम्मत की ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा मेलों के दौरान सड़कों और पुलों की विशेष मरम्मत के निर्देश दिए जाते हैं, लेकिन संबंधित विभाग इस दिशा में उदासीन बना हुआ है। यदि समय रहते पुल की स्थायी मरम्मत नहीं की गई, तो किसी बड़ी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। इस संबंध में ब्रिज एसडीओ संतोष कुमार पेंडोले से संपर्क किया गया, लेकिन उनके मोबाइल नंबर से संदेश प्राप्त हुआ कि इस नंबर पर इनकमिंग कॉल रिसीव नहीं हो रही है।2