नहर से सिंचाई के लिये परेशान हो रहे सिंगोला के किसान: स्थानीय से लेकर जिले तक नहीं हुई सुनवाई लांजी। क्षेत्र में नहरों के रोटेशन के बाद भी किसानों को रबी की फसल के लिये सिंचाई हेतु पानी का नहीं मिल पाना चिंताजनक है, ऐसा खुद सिंगोला के किसानों का कहना है, उनके हिसाब से रबी की फसल के लिये परेशानी बेशुमार है और उस पर भी स्थानीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर तक आवेदन दिये जा चुके है लेकिन आज भी स्थिति जस की तस ही बनी हुई है, किसानो की खार पड़े-पड़े पीली हुई जा रही है परन्तु इसकी खोज खबर लेने वाला कोई नहीं है, छोटे से लेकर बड़े किसान जब 26 फरवरी को ग्राम में ही रायशुमारी के लिये एकजुट हुये तो मिडिया से चर्चा के दौरान उन्होने बताया कि जिस प्रकार रोटेशन के समय भी टेल क्षेत्र तक पानी नहीं मिल रहा है तो ऐसे में उनके वोट और चुने हुये नेता आखिर कब उनके काम आयेंगे, बहरहाल कुछ किसानों ने तो यह तक कहा कि सिर्फ सड़के और पुल-पुलिया ही विकास का आधार है तो क्या किसानों को सिंचाई के लिये जल उपलब्ध कराना प्राथमिकता नहीं और यह विकास का कैसा आधार है जिसमें किसान ही परेशान है। - यह है रोटेशन प्रणाली कार्यपालन यंत्री जल संसाधन सर्वेक्षण संभाग बालाघाट के अंतर्गत संचालित बाघ दांयी तट नहर (अंतर्राज्जीय) परियोजना जो कि महाराष्ट्र एवं म.प्र. का संयुक्त उपक्रम है। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी रोटेशन प्रणाली के अंतर्गत रबी सिंचाई हेतु कार्यक्रम का निर्धारण किया गया है। रोटेशन प्रणाली के अनुसार वर्ष 2025-26 हेतु रबी कार्यकम अंतर्गत निम्नानुसार वितरक नहर में पानी दिया जाना प्रस्तावित है। जो की निम्नानुसार है 1. कुलपा कारंजा वितरक नहर क. 0 से 290 तक, कारंजा माइनर चैन क. 0 से 90 तक, सबमाइनर नं. 1 चैन क. 0 से 20 तक, सबमाइनर नं. 2 चैन क. 0 से 25 तक, कारंजा माइनर नं. 4 चैन क. 0 से 25, परसोडी माइनर चैन क. 0 से 32 तक, 2. सिंगोला वितरक नहर, सिंगोला वितरक नहर चैन क. 0 से 260 तक तक पानी दिया जाएगा। - यह प्रतिबंध भी है लागू यह विशेष उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्षानुसार रबी सिंचाई हेतु जल की उपलब्धता मध्यप्रदेश राज्य को आबंटित जल भण्डारण (जो कि महाराष्ट्र राज्य द्वारा निर्धारित किया जाता है) उपलब्ध करवाया जाता है। जो इस वर्ष आज दिनांक तक अप्राप्त है जिससे रबी कार्यक्रम में भविष्य में संशोधन किया जा सकता है। मुख्य नहर में विद्युत पम्प की अनुमति का निर्णय मध्यप्रदेश को आंवटित जल के आधार पर किया जावेगा। नहर का संचालन महाराष्ट्र राज्य द्वारा निर्धारित अनुसार ही किया जावेगा। मुख्य नहर में किसी प्रकार का अडावा/अवरोध लगाना प्रतिबंधित है अडावा लगाये जाने पर संबंधित कृषक पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी। प्रस्तावित रबी सिंचाई क्षेत्र के कृषकों से अपील की जाती है कि मुख्य नहर, वितरक नहर एवं माइनर के कोलाबे के समीप ही रबी धान फसल लगावे जिससे कि सुचारू सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सके। - यह है कहना है किसानों का सिंगोला के किसानों का कहना है कि पहले हिना कावरे और रमेश भटेरे के समय में रबी फसल को लेकर इतनी परेशानी नहीं होती थी जो कि अब हो रही है, जहां लांजी-आमगांव मुख्य मार्ग केे एक तरफ तो नहर झाड़ियों और मिट्टी से सफाई के अभाव में नाली जैसी हो गई है तो वहीं दूसरी तरफ नहर के पानी को विभाग द्वारा ही रोक दिये जाने की जानकारी किसानों के द्वारा दी गई, उसके बाद कुछ किसानों के द्वारा निजी तौर पर नहर के अड़ावे के पहले पंप की सहायता से नालियों के जरिये पानी सप्लाई की जा रही है, जो नालियां किसानों ने खुद के पैसो से जेसीबी की मदद से बनाई है। - अनसुलझी है किसानो की समस्या बहरहाल कुल मिलाकर देखा जाये तो किसानों की समस्या विगत कई दिनों के संघर्ष के बाद भी जस की तस बनी हुई है, चंद किसानो को रबी फसल के लिये पानी उपलब्ध हो रहा है तो वहीं किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है और ना ही स्थानीय जनप्रतिनिधि इस बात के लिये प्रयास कर रहे है, किसानों ने यहां तक कह दिया कि नेता अधिकारियों की भाषा बोल रहे है, जबकि पुराने नेता उनकी फसल की सिंचाई के लिये दौड़ तक लगा देते थे और उनको आज जो परेशानी हो रही है पहले के नेताओं के कार्यकाल में नहीं हुई, बहरहाल नियम कायदे जो भी हो किसान परेशान जरूर है और उनमें रबी फसल की सिंचाई हेतु आक्रोश भी देखा जा सकता है।
नहर से सिंचाई के लिये परेशान हो रहे सिंगोला के किसान: स्थानीय से लेकर जिले तक नहीं हुई सुनवाई लांजी। क्षेत्र में नहरों के रोटेशन के बाद भी किसानों को रबी की फसल के लिये सिंचाई हेतु पानी का नहीं मिल पाना चिंताजनक है, ऐसा खुद सिंगोला के किसानों का कहना है, उनके हिसाब से रबी की फसल के लिये परेशानी बेशुमार है और उस पर भी स्थानीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर तक आवेदन दिये जा चुके है लेकिन आज भी स्थिति जस की तस ही बनी हुई है, किसानो की खार पड़े-पड़े पीली हुई जा रही है परन्तु इसकी खोज खबर लेने वाला कोई नहीं है, छोटे से लेकर बड़े किसान जब 26 फरवरी को ग्राम में ही रायशुमारी के लिये एकजुट हुये तो मिडिया से चर्चा के दौरान उन्होने बताया कि जिस प्रकार रोटेशन के समय भी टेल क्षेत्र तक पानी नहीं मिल रहा है तो ऐसे में उनके वोट और चुने हुये नेता आखिर कब उनके काम आयेंगे, बहरहाल कुछ किसानों ने तो यह तक कहा कि सिर्फ सड़के और पुल-पुलिया ही विकास का आधार है तो क्या किसानों को सिंचाई के लिये जल उपलब्ध कराना प्राथमिकता नहीं और यह विकास का कैसा आधार है जिसमें किसान ही परेशान है। - यह है रोटेशन प्रणाली कार्यपालन यंत्री जल संसाधन सर्वेक्षण संभाग बालाघाट के अंतर्गत संचालित बाघ दांयी तट नहर (अंतर्राज्जीय) परियोजना जो कि महाराष्ट्र एवं म.प्र. का संयुक्त उपक्रम है। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी रोटेशन प्रणाली के अंतर्गत रबी सिंचाई हेतु कार्यक्रम का निर्धारण किया गया है। रोटेशन प्रणाली के अनुसार वर्ष 2025-26 हेतु रबी कार्यकम अंतर्गत निम्नानुसार वितरक नहर में पानी दिया जाना प्रस्तावित है। जो की निम्नानुसार है 1. कुलपा कारंजा वितरक नहर क. 0 से 290 तक, कारंजा माइनर चैन क. 0 से 90 तक, सबमाइनर नं. 1 चैन क. 0 से 20 तक, सबमाइनर नं. 2 चैन क. 0 से 25 तक, कारंजा माइनर नं. 4 चैन क. 0 से 25, परसोडी माइनर चैन क. 0 से 32 तक, 2. सिंगोला वितरक नहर, सिंगोला वितरक नहर चैन क. 0 से 260 तक तक पानी दिया जाएगा। - यह प्रतिबंध भी है लागू यह विशेष उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्षानुसार रबी सिंचाई हेतु जल की उपलब्धता मध्यप्रदेश राज्य को आबंटित जल भण्डारण (जो कि महाराष्ट्र राज्य द्वारा निर्धारित किया जाता है) उपलब्ध करवाया जाता है। जो इस वर्ष आज दिनांक तक अप्राप्त है जिससे रबी कार्यक्रम में भविष्य में संशोधन किया जा सकता है। मुख्य नहर में विद्युत पम्प की अनुमति का निर्णय मध्यप्रदेश को आंवटित जल के आधार पर किया जावेगा। नहर का संचालन महाराष्ट्र राज्य द्वारा निर्धारित अनुसार ही किया जावेगा। मुख्य नहर में किसी प्रकार का अडावा/अवरोध लगाना प्रतिबंधित है अडावा लगाये जाने पर संबंधित कृषक पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी। प्रस्तावित रबी सिंचाई क्षेत्र के कृषकों से अपील की जाती है कि मुख्य नहर, वितरक नहर एवं माइनर के कोलाबे के समीप ही रबी धान फसल लगावे जिससे कि सुचारू सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सके। - यह है कहना है किसानों का सिंगोला के किसानों का कहना है कि पहले हिना कावरे और रमेश भटेरे के समय में रबी फसल को लेकर इतनी परेशानी नहीं होती थी जो कि अब हो रही है, जहां लांजी-आमगांव मुख्य मार्ग केे एक तरफ तो नहर झाड़ियों और मिट्टी से सफाई के अभाव में नाली जैसी हो गई है तो वहीं दूसरी तरफ नहर के पानी को विभाग द्वारा ही रोक दिये जाने की जानकारी किसानों के द्वारा दी गई, उसके बाद कुछ किसानों के द्वारा निजी तौर पर नहर के अड़ावे के पहले पंप की सहायता से नालियों के जरिये पानी सप्लाई की जा रही है, जो नालियां किसानों ने खुद के पैसो से जेसीबी की मदद से बनाई है। - अनसुलझी है किसानो की समस्या बहरहाल कुल मिलाकर देखा जाये तो किसानों की समस्या विगत कई दिनों के संघर्ष के बाद भी जस की तस बनी हुई है, चंद किसानो को रबी फसल के लिये पानी उपलब्ध हो रहा है तो वहीं किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है और ना ही स्थानीय जनप्रतिनिधि इस बात के लिये प्रयास कर रहे है, किसानों ने यहां तक कह दिया कि नेता अधिकारियों की भाषा बोल रहे है, जबकि पुराने नेता उनकी फसल की सिंचाई के लिये दौड़ तक लगा देते थे और उनको आज जो परेशानी हो रही है पहले के नेताओं के कार्यकाल में नहीं हुई, बहरहाल नियम कायदे जो भी हो किसान परेशान जरूर है और उनमें रबी फसल की सिंचाई हेतु आक्रोश भी देखा जा सकता है।
- नहर से सिंचाई के लिये परेशान हो रहे सिंगोला के किसान: स्थानीय से लेकर जिले तक नहीं हुई सुनवाई लांजी। क्षेत्र में नहरों के रोटेशन के बाद भी किसानों को रबी की फसल के लिये सिंचाई हेतु पानी का नहीं मिल पाना चिंताजनक है, ऐसा खुद सिंगोला के किसानों का कहना है, उनके हिसाब से रबी की फसल के लिये परेशानी बेशुमार है और उस पर भी स्थानीय अधिकारियों से लेकर जनप्रतिनिधियों और कलेक्टर तक आवेदन दिये जा चुके है लेकिन आज भी स्थिति जस की तस ही बनी हुई है, किसानो की खार पड़े-पड़े पीली हुई जा रही है परन्तु इसकी खोज खबर लेने वाला कोई नहीं है, छोटे से लेकर बड़े किसान जब 26 फरवरी को ग्राम में ही रायशुमारी के लिये एकजुट हुये तो मिडिया से चर्चा के दौरान उन्होने बताया कि जिस प्रकार रोटेशन के समय भी टेल क्षेत्र तक पानी नहीं मिल रहा है तो ऐसे में उनके वोट और चुने हुये नेता आखिर कब उनके काम आयेंगे, बहरहाल कुछ किसानों ने तो यह तक कहा कि सिर्फ सड़के और पुल-पुलिया ही विकास का आधार है तो क्या किसानों को सिंचाई के लिये जल उपलब्ध कराना प्राथमिकता नहीं और यह विकास का कैसा आधार है जिसमें किसान ही परेशान है। - यह है रोटेशन प्रणाली कार्यपालन यंत्री जल संसाधन सर्वेक्षण संभाग बालाघाट के अंतर्गत संचालित बाघ दांयी तट नहर (अंतर्राज्जीय) परियोजना जो कि महाराष्ट्र एवं म.प्र. का संयुक्त उपक्रम है। प्रतिवर्षानुसार इस वर्ष भी रोटेशन प्रणाली के अंतर्गत रबी सिंचाई हेतु कार्यक्रम का निर्धारण किया गया है। रोटेशन प्रणाली के अनुसार वर्ष 2025-26 हेतु रबी कार्यकम अंतर्गत निम्नानुसार वितरक नहर में पानी दिया जाना प्रस्तावित है। जो की निम्नानुसार है 1. कुलपा कारंजा वितरक नहर क. 0 से 290 तक, कारंजा माइनर चैन क. 0 से 90 तक, सबमाइनर नं. 1 चैन क. 0 से 20 तक, सबमाइनर नं. 2 चैन क. 0 से 25 तक, कारंजा माइनर नं. 4 चैन क. 0 से 25, परसोडी माइनर चैन क. 0 से 32 तक, 2. सिंगोला वितरक नहर, सिंगोला वितरक नहर चैन क. 0 से 260 तक तक पानी दिया जाएगा। - यह प्रतिबंध भी है लागू यह विशेष उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्षानुसार रबी सिंचाई हेतु जल की उपलब्धता मध्यप्रदेश राज्य को आबंटित जल भण्डारण (जो कि महाराष्ट्र राज्य द्वारा निर्धारित किया जाता है) उपलब्ध करवाया जाता है। जो इस वर्ष आज दिनांक तक अप्राप्त है जिससे रबी कार्यक्रम में भविष्य में संशोधन किया जा सकता है। मुख्य नहर में विद्युत पम्प की अनुमति का निर्णय मध्यप्रदेश को आंवटित जल के आधार पर किया जावेगा। नहर का संचालन महाराष्ट्र राज्य द्वारा निर्धारित अनुसार ही किया जावेगा। मुख्य नहर में किसी प्रकार का अडावा/अवरोध लगाना प्रतिबंधित है अडावा लगाये जाने पर संबंधित कृषक पर नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी। प्रस्तावित रबी सिंचाई क्षेत्र के कृषकों से अपील की जाती है कि मुख्य नहर, वितरक नहर एवं माइनर के कोलाबे के समीप ही रबी धान फसल लगावे जिससे कि सुचारू सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सके। - यह है कहना है किसानों का सिंगोला के किसानों का कहना है कि पहले हिना कावरे और रमेश भटेरे के समय में रबी फसल को लेकर इतनी परेशानी नहीं होती थी जो कि अब हो रही है, जहां लांजी-आमगांव मुख्य मार्ग केे एक तरफ तो नहर झाड़ियों और मिट्टी से सफाई के अभाव में नाली जैसी हो गई है तो वहीं दूसरी तरफ नहर के पानी को विभाग द्वारा ही रोक दिये जाने की जानकारी किसानों के द्वारा दी गई, उसके बाद कुछ किसानों के द्वारा निजी तौर पर नहर के अड़ावे के पहले पंप की सहायता से नालियों के जरिये पानी सप्लाई की जा रही है, जो नालियां किसानों ने खुद के पैसो से जेसीबी की मदद से बनाई है। - अनसुलझी है किसानो की समस्या बहरहाल कुल मिलाकर देखा जाये तो किसानों की समस्या विगत कई दिनों के संघर्ष के बाद भी जस की तस बनी हुई है, चंद किसानो को रबी फसल के लिये पानी उपलब्ध हो रहा है तो वहीं किसानों का कहना है कि सिंचाई विभाग भी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा है और ना ही स्थानीय जनप्रतिनिधि इस बात के लिये प्रयास कर रहे है, किसानों ने यहां तक कह दिया कि नेता अधिकारियों की भाषा बोल रहे है, जबकि पुराने नेता उनकी फसल की सिंचाई के लिये दौड़ तक लगा देते थे और उनको आज जो परेशानी हो रही है पहले के नेताओं के कार्यकाल में नहीं हुई, बहरहाल नियम कायदे जो भी हो किसान परेशान जरूर है और उनमें रबी फसल की सिंचाई हेतु आक्रोश भी देखा जा सकता है।1
- 27 फरवरी शुक्रवार को सुबह 10 बजे मिली जानकारी अनुसार राज्य शासन के निर्देशानुसार श्रम विभाग की विभिन्न हितग्राही योजनाओं का लाभ अब डीबीटी के माध्यम से सीधे श्रमिकों के बैंक खातों में दिया जा रहा है। योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र श्रमिकों तक पहुंचे, इसके लिए ई केवाईसी अनिवार्य कर दिया गया है। जिला खैरागढ़ छुईखदान गंडई में कुल 6 हजार नौ सौ 84 पंजीकृत श्रमिकों का ई केवाईसी किया जाना है। राशन कार्ड एवं आधार डाटा का मिलान कर चरणबद्ध सत्यापन किया जा रहा है। श्रमपदाधिकारी उज्ज्वल भोई ने श्रमिकों से अपील की है कि जिनके मोबाइल पर डाटा असमानता का संदेश प्राप्त हुआ है, वे कलेक्टोरेट कार्यालय, कक्ष क्रमांक 23, खैरागढ़ में आधार की मूल प्रति के साथ पहुंचकर निःशुल्क ई केवाईसी पूर्ण कराएं।1
- वारासिवनी । चंद दिनों पूर्व नगर के विभिन्न चौक चौराहों पर नगरपालिका परिषद वारासिवनी द्वारा लगवाये गए सीसीटीवी कैमरे पुलिस विभाग के लिए उपयोगी साबित नहीं हो पा रहे है। गत दिनों फव्वारा चौक के पास एक सब्जी वाली महिला के साथ लूट करने की घटना वहॉ पर लगे हुए सीसीटीवी कैमरों की नजर में पूरी तरह से नहीं आ पाई। जिसके कारण पुलिस पिछले 3 दिनों में भी आरोपियों का पता नहीं लगा सकी है। वहीं बुधवार की रात्रि लगभग 9 बजे एक बड़े ट्रक द्वारा जय स्तम्भ चौक पर लगे हुए सीसीटीवी कैमरों को टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया गया। इस घटना के बाद पुलिस ने ट्रक को रोक लिया था और चालक को थाने में बुलाकर उससे पूछताछ भी की गई। इस बीच घटना की जानकारी नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों को पुलिस विभाग व नागरिकों द्वारा दी गई। लेकिन उसके बावजूद भी नगरपालिका की ओर से किसी भी अधिकारी, कर्मचारी या जनप्रतिनिधि ने ट्रक चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करवाने की जहमत नहीं उठाई। बताया जाता है कि ट्रक लालबर्रा मार्ग से जय स्तम्भ चौक होकर बालाघाट की ओर जा रहा था। इसी दौरान जय स्तम्भ चौक पर लगे हुए सीसीटीवी कैमरे से ट्रक टकरा गया। जिससे कैमरे क्षतिग्रस्त हो गए। इस घटना के बाद पुलिस ने ट्रक को रोक लिया और चालक को थाने में बुला लिया। जहॉ पर थाना प्रभारी पवन यादव ने उससे कागजातों के बारे में पूछताछ की, तो उसने सही तरीके से जवाब नहीं दिया। जिससे उनके बीच कुछ गरमा गरम बहस भी हो गई थी। वहीं ट्रक के बालाघाट निवासी मालिक से वारासिवनी के कुछ व्यापारियों ने नगरपालिका के अधिकारियों व पदाधिकारियों की चर्चा करवाई और उससे सीसीटीवी कैमरों को पहुॅचे नुकसान की भरपाई का वादा कर उसे छुड़वा दिया। सीसीटीवी कैमरों को कितना नुकसान पहुॅचा है, इसका आकलन अभी नहीं किया गया है। यहॉ पर विचारणीय बात यह भी है कि नगर के चौक चौराहों पर लगाए गए सीसीटीवी कैमरों का कंट्रोल रुम पुलिस थाना वारासिवनी में बनाया गया है और सभी कैमरों की देखरेख भी पुलिस विभाग को करनी चाहिए। लेकिन इस मामले में पुलिस विभाग ने अपनी ओर से कार्यवाही करने के स्थान पर गेंद नगरपालिका के पाले में डाल दी और उसका फायदा ट्रक चालक व मालिक दोनों को ही मिल गया। नगरपालिका के अधिकारियों व पदाधिकारियों ने सिर्फ सीसीटीवी कैमरों की नुकसानी की वसूली का समझौता कर ट्रक चालक व मालिक की लापरवाही को नजरअंदाज कर दिया। वैसे तो इसके पहले भी जय स्तम्भ चौक की बाऊंड्रीवाल को भी कुछ वाहन चालकों द्वारा क्षतिग्रस्त किया जा चुका है। उस समय भी नगरपालिका के अधिकारियों ने उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की रिपोर्ट नहीं लिखाते हुए उनसे समझौता कर लिया था। फिलहाल तो ट्रक की टक्कर से क्षतिग्रस्त हुए सीसीटीवी कैमरो को नगरपालिका ने निकलवा लिया है।1
- लांजी थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) गौतमसिंह मरकाम की अदालत ने आरोपी को कठोर सजा सुनाई है। अदालत ने आरोपी लक्ष्मीकांत उर्फ निकेश उमरे (22) निवासी लांजी क को 20 वर्ष के सश्रम कारावास तथा 7 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।1
- *राजनांदगांव में गरजे दिग्विजय सिंह: केंद्र-राज्य सरकार पर साधा निशाना, बोले—‘जनता सब देख रही है’*4
- देखिये हुआ एक बार फिर से बवाल मच गया ह्ड़कंप दुर्ग मे धर्म को लेकर फिर हुआ दो पक्छ मे हुड़दंग....1
- समाजसेवा कर सभी रहें हैं लेकिन एकजुट होकर जब लोग समाजसेवी कार्य करें तो क्षेत्र सरलता आसानी से बेहतर बनें इसलिए जब दुर्ग के शासकीय कर्मी, जनप्रतिनिधि से निवेदन करने पर भी जब सुनवाई ना हो तो लोगों को एकजुट होकर बेहतर वातावरण निर्माण हेतु आगे आने की जरूरत पर अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता यहीं 90% नागरिकों की ऐसी सोच होती हैं। लगभग चार महीनों से दुर्ग के शासकीय विभाग की सीढ़ियों के पास में ट्यूबलाइट कों सुधारने या नया लगाने मांग किया लेकिन छोटी सी समस्या मानकर अनदेखा किया अंधेरे में सीढ़ियों से दिव्यांग व बुजुर्ग आना जाना करते जों कि अंधेरे में खराब बंद ट्यूबलाइट होने से दिक्कत होती इसलिए शासकीय विभाग व जनप्रतिनिधियों के निराशाजनक नकारात्मक जवाब मिलने पर स्वयं से इस सीढ़ियों के अंधेरे वाले मार्ग में ट्यूबलाइट लगवाया ऐसी कई समस्याएं दुर्ग में व्याप्त हैं जो कि उचित नहीं इसलिए सामाजिक सेवाकार्य करने की कोशिश करता हूं। (जयवर्धन समाजसेवी दुर्ग 9202219810 हंसराज नवयुवक मंडल।).1
- लांजी बीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी करने तथा बीपीएम व बीसीएम का वेतन काटने के निर्देश लांजी। कलेक्टर मृणाल मीना की अध्यक्षता में 26 फरवरी को जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में स्वास्थ्य, आयुष एवं महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं की समीक्षा की गई। समीक्षा के दौरान गर्भवती माताओं के सुरक्षित प्रसव एवं बच्चों के कुपोषण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिये गए। कलेक्टर श्री मीना ने समीक्षा के दौरान ए. एन. सी.पंजीयन, ए. एन. सी. 4 जांच तथा हाई रिस्क महिलाओं के पंजीयन सहित आयरन शुक्रोज में लक्ष्य से कम उपलब्धि प्राप्त करने पर लाँजी बीएमओ डॉ.अक्षय उपराड़े को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिये। इसके साथ ही लाँजी बीपीएम मनीष पांडे का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिये गए। इसी प्रकार बीसीएम लांजी अरुणा रणदिवे का एक दिन का वेतन काटने के निर्देश दिये गए है। बैठक में स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं की समीक्षा के दौरान अनमोल पोर्टल पर सभी गर्भवती माताओं का अनिवार्य रूप से पंजीयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गए। माता के गर्भवती होते ही उसका पंजीयन अनमोल पोर्टल पर हो जाना चाहिए और उसके नियमित टीकाकरण एवं जांच पर विशेष ध्यान देना है। अनमोल पोर्टल पर पंजीकृत गर्भवती माताओं में से हाईरिस्क वाली माताओं को चिन्हित कर उनके सुरक्षित प्रसव के लिए उचित प्रबंधन अनिवार्य रूप से किया जाना है। कलेक्टर श्री मीना ने सख्त निर्देश दिये कि अनमोल पोर्टल पर किसी भी तरह से गलत एंट्री नही होना चाहिए। जिस एएनएम द्वारा गलत एंट्री की जा रही है उसके विरूद्ध सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिये गए।1