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टहरौली में यूजीसी एक्ट के समर्थन में युवाओं ने तहसील परिसर में किया प्रदर्शन

20 hrs ago
user_Sanjay kushwaha
Sanjay kushwaha
Local News Reporter टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
20 hrs ago

टहरौली में यूजीसी एक्ट के समर्थन में युवाओं ने तहसील परिसर में किया प्रदर्शन

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  • Post by Ankit Gotam
    1
    Post by Ankit Gotam
    user_Ankit Gotam
    Ankit Gotam
    रिपोर्टर टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    6 hrs ago
  • टहरौली में बड़ी साजिश में नाकाम हुए बच्चा चोर ग्रामीणों ने पकड़ा तो रो पड़ी महिला साथी
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    टहरौली में बड़ी साजिश में नाकाम हुए बच्चा चोर ग्रामीणों ने पकड़ा तो रो पड़ी महिला साथी
    user_Sanjay kushwaha
    Sanjay kushwaha
    Local News Reporter टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
  • निवाड़ी कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े ने अवैध निवाड़ी जिले की अवैध कॉलोनीयों को लेकर पांच अवैध कॉलोनाइजरों को नोटिस किया जारी 17 मार्च को साक्ष सहित उपस्थित होने के दिए निर्देश,,,,
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    निवाड़ी कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े ने अवैध निवाड़ी जिले की अवैध कॉलोनीयों को लेकर पांच अवैध कॉलोनाइजरों को नोटिस किया जारी 17 मार्च को साक्ष सहित उपस्थित होने के दिए निर्देश,,,,
    user_Hemant verma
    Hemant verma
    South Indian restaurant Niwari, Madhya Pradesh•
    50 min ago
  • Post by Kshatr Pal shivhare
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    Post by Kshatr Pal shivhare
    user_Kshatr Pal shivhare
    Kshatr Pal shivhare
    Actor Moth, Jhansi•
    20 hrs ago
  • तकनीकि विशेषज्ञ प्रोग्राम कॉर्डिनेटर आपदा प्रबंध संस्थान गृह विभाग भोपाल श्री अभिषेक मिश्रा एवं तकनीकि विशेषज्ञ श्री तुषार गोलाईत ने आपदा प्रबंधन की जानकारी साझा की जिला स्तरीय 'इंसिडेंट रिस्पांस टीम' (IRT) की समीक्षा बैठक एवं प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न -- आज कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक डॉ राय सिंह नरवरिया की उपस्थिति में जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय इंसिडेंट रिस्पांस टीम (IRT) की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला और समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में किसी भी संभावित आपदा (Disaster) से निपटने के लिए पूर्व तैयारियों को पुख्ता करना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा। तैयारियों की समीक्षा बैठक में बाढ़, भूकंप, और आगजनी जैसी संभावित आपदाओं के समय त्वरित रिस्पांस के लिए टीम के सदस्यों की भूमिकाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) के क्रियान्वयन के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई, ताकि आपदा के समय कमांड और कंट्रोल सिस्टम सुचारू रूप से कार्य कर सके। कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों (स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व, और अग्निशमन) को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों का समय-समय पर ऑडिट करें। आपदा के समय सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी संचार तंत्र (Communication Network) विकसित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि "आपदा प्रबंधन में 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती समय) सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि हमारी टीम प्रशिक्षित और सजग है, तो हम जान-माल के नुकसान को न्यूनतम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि "भूकंप को रोका नहीं जा सकता है परन्तु सही जानकारी , जागरूकता एवं पूर्व तैयारी से भूकंप के प्रभाव से होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है। आपदा प्रबंधन में 'इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम' (IRS) की भूमिका और तैयारी किसी भी प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदा के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए एक सुव्यवस्थित इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) सबसे प्रभावी हथियार है। प्रशासन और संगठनों को संकट के समय 'रिएक्ट' करने के बजाय 'रिस्पॉन्ड' करने की रणनीति पर काम करना चाहिए। आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए तकनीकि विशेषज्ञ प्रोग्राम कॉर्डिनेटर आपदा प्रबंध संस्थान गृह विभाग भोपाल श्री अभिषेक मिश्रा एवं तकनीकि विशेषज्ञ श्री तुषार गोलाईत निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझावों पर जोर दिया एवं जानकारी साझा की। पुलिस अधीक्षक डॉ राय सिंह नरवरिया ने कहा कि नदी किनारे बसे लोगों को नदी की गहराई की जानकारी प्रेषित की जाए तथा बचाव कार्य हेतु स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। आपदा प्रबंधन को जमीनी स्तर पर क्रियाशील बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित किया जा सके। आपदा प्रबंधन हेतु प्रारंभिक व्यवस्थाएं जैसे रस्सा, इमरजेंसी लाइट, स्थानीय तैराक इत्यादि मुहैया कराना सुनिश्चित करें। इमरजेंसी उपकरणों की व्यवस्था करना सुनिश्चित करें। कमांड और कंट्रोल का स्पष्ट ढांचा तकनीकि विशेषज्ञ प्रोग्राम कॉर्डिनेटर श्री मिश्रा ने बताया कि आपदा के समय भ्रम से बचने के लिए एक यूनिफाइड कमांड (Unified Command) का होना जरूरी है। इसमें पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल और आदेश की श्रृंखला (Chain of Command) बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए। पूर्व-चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems) तकनीक का लाभ उठाते हुए सटीक पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करें। सही समय पर दी गई सूचना लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने (Evacuation) के लिए कीमती समय प्रदान करती है।संसाधन मैपिंग (Resource Mapping) आपदा आने से पहले ही उपलब्ध संसाधनों जैसे एम्बुलेंस, राहत सामग्री, स्वयंसेवक और उपकरणों—की एक विस्तृत सूची और उनकी लोकेशन का डेटाबेस तैयार रखें। संकट के समय सही संसाधन की सही जगह उपलब्धता ही जीवन बचाती है। नियमित मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण तैयारी केवल कागजों पर नहीं होनी चाहिए। विभिन्न आपदा परिदृश्यों (जैसे बाढ़, भूकंप या आग) पर आधारित नियमित मॉक ड्रिल का आयोजन करें। इससे रिस्पॉन्स टीम की प्रतिक्रिया की गति (Response Time) में सुधार होता है। संचार के वैकल्पिक माध्यम बड़ी आपदाओं में अक्सर मोबाइल नेटवर्क और बिजली ठप हो जाती है। ऐसे में सैटेलाइट फोन, रेडियो संचार (HAM Radio) और वायरलेस नेटवर्क जैसे वैकल्पिक साधनों को तैयार रखना अनिवार्य है। सामुदायिक भागीदारी (Community Involvement) प्रशासन के पहुँचने से पहले स्थानीय लोग 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' होते हैं। स्थानीय समुदायों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा और बचाव कार्यों का प्रशिक्षण देकर आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। "आपदा प्रबंधन में हर सेकंड की कीमत होती है। एक पूर्व-निर्धारित इंसीडेंट रिस्पॉन्स प्लान न केवल अव्यवस्था को रोकता है, बल्कि राहत कार्यों में सटीकता लाता है।" बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री रोहन सक्सेना, एसडीएम श्री अशोक कुमार सेन, डिप्टी कलेक्टर सुश्री विनीता जैन, सुश्री मनीषा जैन, सुश्री स्वाति सिंह, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य और जिले के सभी महत्वपूर्ण विभागों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।
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    तकनीकि विशेषज्ञ प्रोग्राम कॉर्डिनेटर आपदा प्रबंध संस्थान गृह विभाग भोपाल श्री अभिषेक मिश्रा एवं तकनीकि विशेषज्ञ श्री तुषार गोलाईत ने आपदा प्रबंधन की जानकारी साझा की 
जिला स्तरीय 'इंसिडेंट रिस्पांस टीम' (IRT) की समीक्षा बैठक एवं प्रशिक्षण कार्यशाला संपन्न
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आज कलेक्टर श्रीमती जमुना भिड़े की अध्यक्षता एवं पुलिस अधीक्षक डॉ राय सिंह नरवरिया की उपस्थिति में जिला कलेक्ट्रेट सभागार में जिला स्तरीय इंसिडेंट रिस्पांस टीम (IRT) की एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला और समीक्षा बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य जिले में किसी भी संभावित आपदा (Disaster) से निपटने के लिए पूर्व तैयारियों को पुख्ता करना और विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना रहा।
तैयारियों की समीक्षा
बैठक में बाढ़, भूकंप, और आगजनी जैसी संभावित आपदाओं के समय त्वरित रिस्पांस के लिए टीम के सदस्यों की भूमिकाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। अधिकारियों को इंसिडेंट रिस्पांस सिस्टम (IRS) के क्रियान्वयन के बारे में तकनीकी जानकारी दी गई, ताकि आपदा के समय कमांड और कंट्रोल सिस्टम सुचारू रूप से कार्य कर सके।
कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों (स्वास्थ्य, पुलिस, राजस्व, और अग्निशमन) को निर्देश दिए कि वे अपने-अपने स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और उपकरणों का समय-समय पर ऑडिट करें। आपदा के समय सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए एक प्रभावी संचार तंत्र (Communication Network) विकसित करने पर जोर दिया गया। उन्होंने कहा कि "आपदा प्रबंधन में 'गोल्डन ऑवर' (शुरुआती समय) सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि हमारी टीम प्रशिक्षित और सजग है, तो हम जान-माल के नुकसान को न्यूनतम कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि "भूकंप को रोका नहीं जा सकता है परन्तु सही जानकारी , जागरूकता एवं पूर्व तैयारी से भूकंप के प्रभाव से होने वाली क्षति को कम किया जा सकता है।
आपदा प्रबंधन में 'इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम' (IRS) की भूमिका और तैयारी
किसी भी प्राकृतिक या मानव-निर्मित आपदा के समय जान-माल के नुकसान को न्यूनतम करने के लिए एक सुव्यवस्थित इंसीडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (IRS) सबसे प्रभावी हथियार है। प्रशासन और संगठनों को संकट के समय 'रिएक्ट' करने के बजाय 'रिस्पॉन्ड' करने की रणनीति पर काम करना चाहिए। आपदा प्रबंधन को सशक्त बनाने के लिए तकनीकि विशेषज्ञ प्रोग्राम कॉर्डिनेटर आपदा प्रबंध संस्थान गृह विभाग भोपाल श्री अभिषेक मिश्रा एवं तकनीकि विशेषज्ञ श्री तुषार गोलाईत निम्नलिखित महत्वपूर्ण सुझावों पर जोर दिया एवं जानकारी साझा की।
पुलिस अधीक्षक डॉ राय सिंह नरवरिया ने कहा कि नदी किनारे बसे लोगों को नदी की गहराई की जानकारी प्रेषित की जाए तथा बचाव कार्य हेतु स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित किया जाए। आपदा प्रबंधन को जमीनी स्तर पर क्रियाशील बनाना है, ताकि अधिक से अधिक लोगों को सुरक्षित किया जा सके। आपदा प्रबंधन हेतु प्रारंभिक व्यवस्थाएं जैसे रस्सा, इमरजेंसी लाइट, स्थानीय तैराक इत्यादि मुहैया कराना सुनिश्चित करें। इमरजेंसी उपकरणों की व्यवस्था करना सुनिश्चित करें।
कमांड और कंट्रोल का स्पष्ट ढांचा 
तकनीकि विशेषज्ञ प्रोग्राम कॉर्डिनेटर श्री मिश्रा ने बताया कि आपदा के समय भ्रम से बचने के लिए एक यूनिफाइड कमांड (Unified Command) का होना जरूरी है। इसमें पुलिस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय प्रशासन के बीच तालमेल और आदेश की श्रृंखला (Chain of Command) बिल्कुल स्पष्ट होनी चाहिए। पूर्व-चेतावनी प्रणाली (Early Warning Systems)
तकनीक का लाभ उठाते हुए सटीक पूर्वानुमान और चेतावनी प्रणालियों को मजबूत करें। सही समय पर दी गई सूचना लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने (Evacuation) के लिए कीमती समय प्रदान करती है।संसाधन मैपिंग (Resource Mapping)
आपदा आने से पहले ही उपलब्ध संसाधनों जैसे एम्बुलेंस, राहत सामग्री, स्वयंसेवक और उपकरणों—की एक विस्तृत सूची और उनकी लोकेशन का डेटाबेस तैयार रखें। संकट के समय सही संसाधन की सही जगह उपलब्धता ही जीवन बचाती है। नियमित मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण
तैयारी केवल कागजों पर नहीं होनी चाहिए। विभिन्न आपदा परिदृश्यों (जैसे बाढ़, भूकंप या आग) पर आधारित नियमित मॉक ड्रिल का आयोजन करें। इससे रिस्पॉन्स टीम की प्रतिक्रिया की गति (Response Time) में सुधार होता है। संचार के वैकल्पिक माध्यम बड़ी आपदाओं में अक्सर मोबाइल नेटवर्क और बिजली ठप हो जाती है। ऐसे में सैटेलाइट फोन, रेडियो संचार (HAM Radio) और वायरलेस नेटवर्क जैसे वैकल्पिक साधनों को तैयार रखना अनिवार्य है। सामुदायिक भागीदारी (Community Involvement) प्रशासन के पहुँचने से पहले स्थानीय लोग 'फर्स्ट रिस्पॉन्डर' होते हैं। स्थानीय समुदायों को बुनियादी प्राथमिक चिकित्सा और बचाव कार्यों का प्रशिक्षण देकर आपदा प्रबंधन को और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है। "आपदा प्रबंधन में हर सेकंड की कीमत होती है। एक पूर्व-निर्धारित इंसीडेंट रिस्पॉन्स प्लान न केवल अव्यवस्था को रोकता है, बल्कि राहत कार्यों में सटीकता लाता है।"
बैठक में जिला पंचायत सीईओ श्री रोहन सक्सेना, एसडीएम श्री अशोक कुमार सेन, डिप्टी कलेक्टर सुश्री विनीता जैन, सुश्री मनीषा जैन, सुश्री स्वाति सिंह, आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के सदस्य और जिले के सभी महत्वपूर्ण विभागों के नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।
    user_Bhupendra Singh Rajawat
    Bhupendra Singh Rajawat
    Local News Reporter निवाड़ी, निवाड़ी, मध्य प्रदेश•
    20 hrs ago
  • गुरसराय-गरोठा पुनर्गठन पेयजल योजना अधूरी, लोगों को अब भी नहीं मिला पानी गुरसराय (झांसी)। वर्ष 2019 में शुरू हुई गुरसराय-गरोठा पुनर्गठन पेयजल योजना के बावजूद नगर में अब तक पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सकी है। योजना के शुरू होने के बाद से ही संबंधित विभाग के अधिकारी जल्द ही घर-घर पानी पहुंचाने का आश्वासन देते रहे, लेकिन कई वर्षों बाद भी यह योजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है। नगर के विभिन्न वार्डों में अभी भी पाइपलाइन का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। बुधवार को भी नगर के मोहल्ला पटकाना सहित कई स्थानों पर पाइपलाइन जोड़ने और खुदाई का कार्य जारी रहा। कई इलाकों में अभी तक पाइपलाइन ही नहीं बिछाई गई है, जबकि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन डाली गई है वहां जगह-जगह लीकेज की समस्या सामने आ रही है। इसके चलते पानी की आपूर्ति घरों तक नहीं पहुंच पा रही और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय निवासी राकेश खरे, गगन माते, सार्थक नायक, कुलदीप खरे, आलोक खरे और शिवेंद्र सिंह परिहार का कहना है कि नगरवासी पिछले कई वर्षों से इस योजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया है। लोगों ने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द कार्य पूरा कर नगर में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू कराने की मांग की है। वहीं योजना से जुड़े प्रोजेक्ट मैनेजर कुश शाह ने बताया कि नगर के पटकाना और पाएगा मोहल्ले की पेयजल लाइन को जोड़ने का कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि आगामी दो दिनों में जलापूर्ति शुरू होने की संभावना है और पाइपलाइन में आ रही लीकेज की समस्या को भी जल्द ठीक कर दिया जाएगा। गुरसरांय से सोम मिश्रा की रिपोर्ट
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    गुरसराय-गरोठा पुनर्गठन पेयजल योजना अधूरी, लोगों को अब भी नहीं मिला पानी
गुरसराय (झांसी)। वर्ष 2019 में शुरू हुई गुरसराय-गरोठा पुनर्गठन पेयजल योजना के बावजूद नगर में अब तक पेयजल आपूर्ति सुचारू रूप से शुरू नहीं हो सकी है। योजना के शुरू होने के बाद से ही संबंधित विभाग के अधिकारी जल्द ही घर-घर पानी पहुंचाने का आश्वासन देते रहे, लेकिन कई वर्षों बाद भी यह योजना पूरी तरह धरातल पर नहीं उतर सकी है।
नगर के विभिन्न वार्डों में अभी भी पाइपलाइन का कार्य अधूरा पड़ा हुआ है। बुधवार को भी नगर के मोहल्ला पटकाना सहित कई स्थानों पर पाइपलाइन जोड़ने और खुदाई का कार्य जारी रहा। कई इलाकों में अभी तक पाइपलाइन ही नहीं बिछाई गई है, जबकि जिन क्षेत्रों में पाइपलाइन डाली गई है वहां जगह-जगह लीकेज की समस्या सामने आ रही है। इसके चलते पानी की आपूर्ति घरों तक नहीं पहुंच पा रही और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय निवासी राकेश खरे, गगन माते, सार्थक नायक, कुलदीप खरे, आलोक खरे और शिवेंद्र सिंह परिहार का कहना है कि नगरवासी पिछले कई वर्षों से इस योजना के पूरा होने का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें इसका लाभ नहीं मिल पाया है। लोगों ने संबंधित विभाग से जल्द से जल्द कार्य पूरा कर नगर में नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू कराने की मांग की है।
वहीं योजना से जुड़े प्रोजेक्ट मैनेजर कुश शाह ने बताया कि नगर के पटकाना और पाएगा मोहल्ले की पेयजल लाइन को जोड़ने का कार्य अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि आगामी दो दिनों में जलापूर्ति शुरू होने की संभावना है और पाइपलाइन में आ रही लीकेज की समस्या को भी जल्द ठीक कर दिया जाएगा।
गुरसरांय से सोम मिश्रा की रिपोर्ट
    user_Som mishra
    Som mishra
    पत्रकार गरौठा, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    52 min ago
  • महाराष्ट्र में हैरान करने वाला मामला: दसवीं का पेपर छठवीं की छात्राओं से चेक करवाया जा रहा है #spanishfootball #smallbusiness #personalgrowth #lifelessons #housing #entrepreneurship #HomeMaintenance #BudgetFriendly #celebritynews #TruckForSale
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    महाराष्ट्र में हैरान करने वाला मामला: दसवीं का पेपर छठवीं की छात्राओं से चेक करवाया जा रहा है
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    user_Kal Tak News कल तक न्यूज
    Kal Tak News कल तक न्यूज
    Press advisory गरौठा, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    1 hr ago
  • टहरौली में यूजीसी एक्ट के समर्थन में युवाओं ने तहसील परिसर में किया प्रदर्शन
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    टहरौली में यूजीसी एक्ट के समर्थन में युवाओं ने तहसील परिसर में किया प्रदर्शन
    user_Sanjay kushwaha
    Sanjay kushwaha
    Local News Reporter टहरौली, झांसी, उत्तर प्रदेश•
    20 hrs ago
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