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वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई है, जहाँ हर बिल्डिंग पूरी तरह से नष्ट हो गई है और कोई भी इमारत साबुत नहीं बची है। इस त्रासदी को दुनिया की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक के रूप में देखा जा रहा है।
रामानंद सागर
वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई है, जहाँ हर बिल्डिंग पूरी तरह से नष्ट हो गई है और कोई भी इमारत साबुत नहीं बची है। इस त्रासदी को दुनिया की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक के रूप में देखा जा रहा है।
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- वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई है, जहाँ हर बिल्डिंग पूरी तरह से नष्ट हो गई है और कोई भी इमारत साबुत नहीं बची है। इस त्रासदी को दुनिया की सबसे बड़ी आपदाओं में से एक के रूप में देखा जा रहा है।1
- रामनगर (बाराबंकी) स्थित यूनियन इंटर कॉलेज के सेवानिवृत्त शिक्षक उमेश प्रताप सिंह का गुरुवार सुबह उनके आवास पर 75 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की सूचना मिलते ही शिक्षकों, शिष्यों, परिजनों और क्षेत्रवासियों में गहन शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में लोगों ने उनके आवास पहुंचकर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके व्यक्तित्व व योगदान को याद किया। उमेश प्रताप सिंह यूनियन इंटर कॉलेज रामनगर में जीव विज्ञान के सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत रहे थे और वर्ष 2013-14 में सेवानिवृत्त हुए थे। विद्यालय के प्रधानाचार्य डॉ. कमलेश सिंह और वरिष्ठ शिक्षक सुधाकर दीक्षित ने बताया कि उमेश सिंह अत्यंत उदार स्वभाव के शिक्षक थे। वे अपने विषय के गहन जानकार होने के साथ-साथ बहुमुखी प्रतिभा के धनी भी थे, और विद्यार्थियों के प्रति उनका व्यवहार हमेशा आत्मीय व प्रेरणादायक रहा। प्रधानाचार्य डॉ. कमलेश सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि विद्यालय के विकास और विद्यार्थियों के मार्गदर्शन में उमेश प्रताप सिंह का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे समर्पित और कर्मठ शिक्षक बार-बार नहीं मिलते, और उनके निधन से यूनियन इंटर कॉलेज परिवार को अपूरणीय क्षति हुई है। शिक्षकों और कर्मचारियों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। क्षेत्रवासियों ने उमेश सिंह को उनके सरल स्वभाव, अनुशासन और शिक्षा के प्रति समर्पण के लिए याद किया, जिसके कारण उन्होंने समाज में अपनी एक अलग पहचान बनाई थी। सभी ने कहा कि उनका योगदान और उनकी शिक्षाएं सदैव याद की जाएंगी। उमेश प्रताप सिंह की अंत्येष्टि में क्षेत्रवासियों के साथ-साथ जिले भर के जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक और अधिकारी शामिल हुए, और सभी ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इसी अवसर पर, क्षेत्र के एक अन्य प्रतिष्ठित परिवार में भी शोक का माहौल रहा, जहाँ पूर्व ब्लॉक प्रमुख रामनगर राजन सिंह के चाचा, वरिष्ठ अधिवक्ता पूर्णेन्द्र प्रताप सिंह के पिता और ग्राम प्रधान देवसानी विवेक सिंह के बड़े पापा का भी निधन हो गया। उनका अंतिम संस्कार दोपहर तीन बजे तक उनके पैतृक आवास ग्राम देवसानी में संपन्न हुआ, जहाँ क्षेत्रवासियों और शुभचिंतकों ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।1
- बुधवार को बाराबंकी की नगर पंचायत स्थित श्री शिव शक्ति धाम भुईयां माता मंदिर परिसर श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के रंगों में सराबोर हो उठा, जहाँ मां दुर्गा एवं भगवान श्री पशुपतिनाथ की प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव का भव्य शुभारंभ कलश यात्रा के साथ हुआ। इस दौरान पूरा कस्बा भक्तिमय वातावरण में डूबा नजर आया और हर ओर जयकारों की गूंज सुनाई दी। नगर पंचायत अध्यक्ष रामशरण पाठक के नेतृत्व में निकली यह विशाल कलश यात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर नगर के प्रमुख मार्गों से होती हुई पावन सरयू तट तक पहुँची। सरयू तट पर सैकड़ों श्रद्धालु महिलाओं ने श्रद्धा और विश्वास के साथ कलशों में पवित्र जल भरा, जिसके बाद वे पुनः मंदिर पहुँचकर यात्रा का समापन किया। इसके उपरांत, मंदिर परिसर में विद्वान आचार्य राम नरेश शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधि-विधान के साथ कलश स्थापना संपन्न कराई। इस दौरान वातावरण वेद मंत्रों की दिव्य ध्वनि और शंखनाद से गूंज उठा, जिससे पूरा परिसर आध्यात्मिक ऊर्जा से आलोकित हो गया।1
- बाराबंकी में 25 जून 2026 को जिलाधिकारी श्री ईशान प्रताप सिंह ने राज्य मार्ग-127 के अंतर्गत भेलसर -टिकैतनगर -रामनगर -फतेहपुर मार्ग के प्रस्तावित चौड़ीकरण और सुदृढ़ीकरण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। लगभग 27 किलोमीटर की यह परियोजना, जो चेनज 8.00 से 35.00 तक फैली है, इसकी अनुमानित लागत ₹91.87 करोड़ है। जिलाधिकारी ने परियोजना की प्रगति का जायजा लिया और आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान, जिलाधिकारी ने विद्युत पोल शिफ्टिंग और सड़क के मार्ग में बाधक वृक्षों के पातन की धीमी प्रगति पर गहरा रोष व्यक्त किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को आपसी समन्वय स्थापित कर एक निर्धारित कार्ययोजना के तहत इन कार्यों को तीव्र गति से पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि सड़क निर्माण कार्य में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो। इस अवसर पर, जिलाधिकारी ने सड़क निर्माण में उपयोग की जा रही जीएसबी परत का भी निरीक्षण किया और उसकी गुणवत्ता का परीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्यों को निर्धारित तकनीकी मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप ही संपन्न करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही, उन्होंने निर्माण एजेंसी द्वारा स्थापित प्लांट का भी अवलोकन किया और कार्य में इस्तेमाल होने वाली निर्माण सामग्रियों की गुणवत्ता बनाए रखने तथा उनका नियमित परीक्षण सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया। जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि यह परियोजना क्षेत्रीय आवागमन को सुगम बनाने और जनसामान्य को बेहतर सड़क संपर्क उपलब्ध कराने की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सभी संबंधित विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण ढंग से पूरा करें। इस स्थलीय निरीक्षण के दौरान लोक निर्माण विभाग, निर्माण खंड-01 के अधिशासी अभियंता, सहायक अभियंता सहित अन्य संबंधित अधिकारी और कार्यदायी संस्था के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।4
- लखनऊ के अलीगंज स्थित एक निजी कोचिंग संस्थान में हुए दर्दनाक अग्निकांड में जान गंवाने वाले छात्रों को गुरुवार को बाराबंकी में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की गई। इण्डियन स्टूडेंट पॉवर के तत्वावधान में डॉ. भीमराव अंबेडकर पार्क, सतरिख नाका में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में संगठन पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और नागरिकों ने दिवंगत विद्यार्थियों की आत्मा की शांति के लिए दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए। संगठन के संरक्षक पंकज गुप्ता ‘पंकी’ ने इस घटना को पूरे समाज को झकझोर देने वाला बताया। उन्होंने कहा कि देश और प्रदेश में पहले भी ऐसी दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन समय बीतने के साथ सुरक्षा मानकों की अनदेखी फिर शुरू हो जाती है। उन्होंने विद्यालयों, कोचिंग संस्थानों, अस्पतालों और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं की नियमित जांच एवं समीक्षा को अनिवार्य बनाने की मांग की। संगठन के अध्यक्ष सिद्धार्थ कनौजिया ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जहाँ बड़ी संख्या में लोग एकत्रित होते हैं, वहाँ अग्निशमन उपकरणों, आपातकालीन निकास मार्गों और सुरक्षा व्यवस्थाओं का समय-समय पर निरीक्षण आवश्यक है। उन्होंने बताया कि ऐसी घटनाएँ केवल किसी एक संस्थान की विफलता नहीं, बल्कि पूरे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय हैं। जिला महासचिव विनीत वर्मा और हिमांशु सैनी ने कहा कि हादसे में जान गंवाने वाले अधिकांश छात्र अपने उज्ज्वल भविष्य के सपनों को पूरा करने के लिए घरों से दूर रहकर पढ़ाई कर रहे थे, और सुरक्षा मानकों की कथित अनदेखी व लापरवाही के कारण उन्हें असमय अपनी जान गंवानी पड़ी। उन्होंने पूरे मामले की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग की। श्रद्धांजलि सभा में उपस्थित लोगों ने शासन और प्रशासन से प्रदेश भर के कोचिंग संस्थानों एवं शैक्षणिक प्रतिष्ठानों की सुरक्षा व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इस कार्यक्रम में केशव राम, मोनू वर्मा, अविनाश वर्मा, अभिषेक, दिलीप वर्मा, राघवेंद्र सुमन, अनुपम, अमित सूर्यवंशी, नेहा सिंह आनंद, मालती यादव, जया श्रीवास्तव सहित संगठन के अनेक पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।4
- जिला बाराबंकी की तहसील फतेहपुर और आसपास के इलाकों में 9 मुहर्रम यौमे आशूरा का मुख्य जुलूस कर्बला की शहादत की याद में शांतिपूर्ण और पारंपरिक तरीके से निकाला गया। इस दौरान अज़ादार काले कपड़े पहनकर 'या हुसैन' के नारे बुलंद करते हुए नज़र आए। पुलिस की कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह जुलूस निकाला गया, जिसमें अलम और ताजिया उठाए गए। जुलूस में भारी भीड़ देखने को मिली, जो विभिन्न मार्गों से होकर गुज़रा। इस अवसर पर थाना फतेहपुर प्रभारी अमित कुमार सिंह, चौकी प्रभारी अजय पांडे और पुलिस बल मौजूद रहा।4
- बाराबंकी जिले के घुंघटेर स्थित बाबागंज विद्युत केंद्र पर बृहस्पतिवार को भारतीय किसान यूनियन अरा श्रमिक जनशक्ति संगठन के जिला अध्यक्ष सतीश के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दिया और जोरदार नारेबाजी की। जिला अध्यक्ष ने मांग की है कि शाम के समय विद्युत कटौती को बंद किया जाए, क्योंकि रात्रि में बार-बार कटौती और लो वोल्टेज की समस्या बनी रहती है। उन्होंने बताया कि रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लगभग 40 बार बिजली काटी जाती है, जिससे हर 10 मिनट की कटौती के कारण उपभोक्ताओं के टीवी, पंखे, फ्रिज, कूलर और इन्वर्टर जैसे उपकरण जलने का खतरा रहता है। संगठन ने बिजली विभाग को जल्द सुधार की चेतावनी देते हुए गांव में सरकार के निर्देशों का पालन करने की मांग की। किसानों ने यह भी मांग की कि जले हुए ट्रांसफार्मरों को 72 घंटे के भीतर बदला जाए, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे ट्रांसफार्मरों की मरम्मत में बिजली विभाग के कर्मचारी 24 घंटे लगाते हैं और फिर भी उन्हें ठीक करने नहीं जाते, जिसकी शिकायत ग्रामीण उपभोक्ता लगातार करते रहते हैं। आगामी धान की रोपाई के मद्देनजर खेतों में लटक रहे 11000 लाइन के तारों को तत्काल सही करने की मांग भी की गई। इसके अतिरिक्त, किसानों ने शिकायत की कि गांव में बिजली बिल रीडर समय पर नहीं आते, जिससे उपभोक्ताओं के काफी बिल जमा हो जाते हैं और फिर बिजली विभाग कैंप लगाकर कनेक्शन काट देता है; इसे रोका जाए और हर महीने बिजली बिल निकालकर उपभोक्ताओं को दिए जाएं। कुल मिलाकर, यह घेराव भारतीय किसान यूनियन श्रमिक जनशक्ति की 10 सूत्री मांगों को लेकर किया गया था। इस दौरान, बिजली विभाग के कर्मचारियों ने गेट को अंदर से बंद कर लिया, जिससे नाराज होकर भारतीय किसान यूनियन के कार्यकर्ता गेट पर ही धरने पर बैठ गए। घटना की जानकारी मिलते ही बाबागंज विद्युत केंद्र के जेई विवेक मिश्रा मौके पर पहुंचे, उन्होंने किसानों का प्रार्थना पत्र लिया और आश्वासन दिया कि सभी बिंदुओं पर जांच कर जल्द ही सुधार किया जाएगा। इस प्रदर्शन में जिला अध्यक्ष सतीश के साथ मोहम्मद वास, जुबेर खान, आदित्य कुमार, पार्वती प्रसाद, सरवन यादव, गुड्डू, किरण देवी, शांति देवी, सीमा यादव, सुनीता देवी, माया देवी, लता देवी सहित सैकड़ों की संख्या में किसान और मजदूर मौजूद रहे।1
- उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के तितावी थाना क्षेत्र के माड़ी गांव स्थित एक दोना बनाने की फैक्ट्री में श्रम विभाग, पुलिस और प्रशासन की संयुक्त छापेमारी के बाद 13 मजदूरों को बंधुआ मजदूरी से मुक्त कराया गया है। इन मजदूरों ने आरोप लगाया है कि उन्हें पिछले दो वर्षों से बंधक बनाकर रखा गया था और अमानवीय यातनाएं दी जा रही थीं। पुलिस के अनुसार, इन मजदूरों को हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, झारखंड, बिहार, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और नेपाल जैसे विभिन्न राज्यों से 8 से 12 हजार रुपये मासिक वेतन का लालच देकर लाया गया था। हालांकि, फैक्ट्री पहुँचने पर उनका वेतन तो दूर, उनके मोबाइल फोन और आधार कार्ड तक छीन लिए गए, जिससे वे बाहरी दुनिया से पूरी तरह कट गए। मजदूरों ने आरोप लगाया कि उन्हें दिन में केवल एक बार चोकर की सूखी रोटी दी जाती थी। काम में जरा सी भी कमी होने पर उन्हें लाठी-डंडों, बेल्ट, गर्म लोहे और भालों से पीटा जाता था, साथ ही कुत्तों से कटवाने जैसी भयानक यातनाएँ भी दी जाती थीं। सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह था कि मजदूरों की निगरानी के लिए फैक्ट्री परिसर में दो पिटबुल कुत्ते पाले गए थे, जिनके खौफ से कोई भी मजदूर भागने की हिम्मत नहीं कर पाता था। यह मामला बंधुआ मजदूरी का एक खौफनाक सच उजागर करता है, जहां 13 मजदूरों को बचाया जा सका, जबकि एक दर्दनाक खुलासे में यह भी आरोप लगाया गया कि तीन अन्य मजदूरों को मारकर गाड़ दिया गया था। बचे हुए मजदूरों की कहानियाँ दिल दहला देने वाली हैं और यह भयावह स्थिति सभी को झकझोर कर रख देगी।1