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बालचद
- बालचदसुनेल, झालावाड़, राजस्थानहमें जहां से राशन कार्ड बना है वहां से हमें गेहूं नही मिले हैं कृपया करके हमें गेहूं दिलवाने कि कृपा करें12 hrs ago
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- Post by बालचद2
- Post by पत्रकार आयुष गुप्ता1
- परवन बांध में मकानों के मुवावजे में दी जा रही राशि में भेदभाव का आरोप ,ग्रामीणों ने विधायक की अगुवाई में दिया ज्ञापन झालावाड़। जिले के खानपुर क्षेत्र के अकावद परवन बांध परियोजना के डूब क्षेत्र में आ रहे गांवो में कुछ गांव के मकानों में कम ज्यादा मुवावजा दिए जाने की कार्यवाई का ग्रामीणों ने विरोध किया है उनका कहना है कि सभी को समान रूप से राशि मिले इसको लेकर आज सोमवार शाम 5 बजे करीब खानपुर विधायक सुरेश गुर्जर की अगवाई में जिला कलक्टर अजय सिंह राठौड़ से मुलाकात कर ज्ञापन के माध्यम से अवगत कराया है। इस पर जिला कलेक्टर ने संबंध राजस्व अधिकारी से बात कर इस मामले में फिर से कार्रवाई करने का आश्वाशन दिया है। जिला कलेक्टर को सोपे ज्ञापन में बताया कि खानपुर तहसील के अकावदकला में परवन नदी पर परवन बांध परियोजना का निर्माण किया जा रहा है। बांध परियोजना के सम्पूण डूब क्षेत्र के गावं खेरखेडा के 264 मकानों को पुनर्वास व स्थापन किया जा रहा है। इसकी सर्वे रिपोर्ट व पुरष्कार मूल्यांकन 2017 में किया जा कर 2025 में मुआवजा वितरण किया गया वो भी अपर्याप्त मुआवजा दिया है, किसी को 20 हजार रुपए तो किसी को 30 हजार रुपए किसी को 80 हजार रुपए दिए है। जबकि हमारें पास के गांव भीलखेडा के ग्रामिणों को किसी को 10 लाख किसी को 15 लाख व किसी को 25 लाख का मुआवजा वितरण किया गया है। जबकि दोनो गांव समान डूब में है व दोनो गावं के चैक एक दिनांक को जारी हुए है। इस इतने कम व अपर्याप्त मुआवजे से खेरखेडा के ग्रामीण संतुष्ट नहीं है और चिंता में है कि इस अपर्याप्त मुआवजे से पूर्नवास व पुनर्स्थापन स्थान अब नए आवास का निर्माण कैसे होगा। उल्लेखनीय है कि खानपुर क्षेत्र के अकावद में परवन नदी पर बांध बनाया जा रहा है, इसमें ग्रामीणों की जमीने डूब में आने के कारण इनको दूसरे ऊंचे स्थानों पर बसाया गया था, लेकिन उनकी जमीनों का और मकान का मुआवजा प्राप्त नहीं मिलने का ग्रामीणों ने आरोप लगाया है।1
- Post by हिन्दी दैनिक दो गज दूरी1
- 𝘂𝗷𝗷𝗮𝗻 𝗿𝗲𝗹𝘃𝗲 𝗽𝗹𝗲𝘁𝗳𝗼𝗿𝗺1
- Post by वचन(कमल ) प्रजापति1
- रामगंजमंडी जलदाय विभाग कार्यालय परिसर में एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। यहाँ स्थित एक पुराने और जर्जर कमरे की छत की पट्टियां अचानक ढह गईं। गनीमत यह रही कि घटना रविवार यानी छुट्टी के दिन हुई, जिससे कार्यालय में कोई कर्मचारी या नागरिक मौजूद नहीं था, अन्यथा जान-माल का बड़ा नुकसान हो सकता था। सोमवार सुबह करीब 11 बजे जानकारों से मिली जानकारी के अनुसार, यह कमरा पिछले कई वर्षों से अत्यंत जर्जर अवस्था में था। अब चर्चा है कि कार्यालय के पास से गुजर रही रेलवे लाइन पर तेज रफ्तार ट्रेनों के गुजरने से होने वाले कंपन (वाइब्रेशन) के कारण कमजोर हो चुकी पट्टियां टूटकर गिर गईं। वहीं विभागीय अधिकारियों ने बताया कि यह भवन लगभग 30-35 साल पुराना है। इसकी जर्जर हालत को देखते हुए इसे पहले ही बंद कर दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि आगामी दिनों में ताकली डैम के टेंडर जारी होने वाले हैं। इसी योजना के तहत इस जर्जर कमरे को भी शामिल कर इसकी मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य करवाया जाएगा।1
- Post by पत्रकार आयुष गुप्ता1