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लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के भड़गांव में सोमवार को आम तोड़ने के दौरान एक बच्चा पेड़ से गिरकर घायल हो गया। इस घटना के बाद एक व्यक्ति ने मानवता का परिचय देते हुए अपने निजी वाहन से घायल बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया।

1 hr ago
user_आलोक कुमार
आलोक कुमार
पत्रकार सेन्हा, लोहरदगा, झारखंड•
1 hr ago

लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के भड़गांव में सोमवार को आम तोड़ने के दौरान एक बच्चा पेड़ से गिरकर घायल हो गया। इस घटना के बाद एक व्यक्ति ने मानवता का परिचय देते हुए अपने निजी वाहन से घायल बच्चे को अस्पताल में भर्ती कराया।

More news from झारखंड and nearby areas
  • एक सोशल मीडिया पोस्ट में घर के भीतर उपयोग के लिए लकड़ी के बजाय पत्थर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। यह पोस्ट घर में पत्थर के उपयोग को प्राथमिकता देने के अनोखे सुझाव पर आश्चर्य व्यक्त करता है।
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    एक सोशल मीडिया पोस्ट में घर के भीतर उपयोग के लिए लकड़ी के बजाय पत्थर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। यह पोस्ट घर में पत्थर के उपयोग को प्राथमिकता देने के अनोखे सुझाव पर आश्चर्य व्यक्त करता है।
    user_AAM JANATA
    AAM JANATA
    लोहरदगा, लोहरदगा, झारखंड•
    14 hrs ago
  • गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र अंतर्गत लकेया गांव स्थित गौझीन डोभा में गाय के कटे हुए सिर की खोपड़ी, जबड़ा, खाल, सींग और पैर सहित अन्य अवशेष मिलने से हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सोमवार सुबह शौच के लिए डोभा के पास गए ग्रामीणों ने पानी में तैरते इन अंगों को देखा, जिसके बाद यह खबर पूरे प्रखंड क्षेत्र में तेजी से फैल गई। सूचना मिलते ही सिसई भरनो थाना प्रभारी, अंचलाधिकारी, मुखिया, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता, तथा भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुँचे। ग्रामीणों और हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी को हस्ताक्षर युक्त आवेदन देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। समाज सेवी संजय वर्मा ने गुमला डीसी समेत कई नेता और मंत्री को फोन कर इस घटना की जानकारी दी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सिसई में बूचड़खाना चलाए जाने के कारण ऐसी घटनाएँ हो रही हैं। प्रशासन ने जेसीबी मशीन की सहायता से नाला बनाकर डोभा का पानी बाहर निकाला और फिर बोरे में सभी अवशेषों को उठाकर दफन करने के लिए ले गए। अंचलाधिकारी अशोक बड़ाईक ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बकरीद पर्व से पूर्व सिसई थाना परिसर में शांति समिति की बैठक हुई थी, जहाँ सभी समुदाय के लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से नियमों का पालन करते हुए त्योहार मनाने को कहा गया था, इसके बावजूद नियम कानून को ताक पर रखकर ऐसा कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। थाना प्रभारी ने भी गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
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    गुमला जिले के सिसई थाना क्षेत्र अंतर्गत लकेया गांव स्थित गौझीन डोभा में गाय के कटे हुए सिर की खोपड़ी, जबड़ा, खाल, सींग और पैर सहित अन्य अवशेष मिलने से हिंदू संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है। सोमवार सुबह शौच के लिए डोभा के पास गए ग्रामीणों ने पानी में तैरते इन अंगों को देखा, जिसके बाद यह खबर पूरे प्रखंड क्षेत्र में तेजी से फैल गई।

सूचना मिलते ही सिसई भरनो थाना प्रभारी, अंचलाधिकारी, मुखिया, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता, तथा भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुँचे। ग्रामीणों और हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने थाना प्रभारी को हस्ताक्षर युक्त आवेदन देकर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। समाज सेवी संजय वर्मा ने गुमला डीसी समेत कई नेता और मंत्री को फोन कर इस घटना की जानकारी दी। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सिसई में बूचड़खाना चलाए जाने के कारण ऐसी घटनाएँ हो रही हैं।

प्रशासन ने जेसीबी मशीन की सहायता से नाला बनाकर डोभा का पानी बाहर निकाला और फिर बोरे में सभी अवशेषों को उठाकर दफन करने के लिए ले गए। अंचलाधिकारी अशोक बड़ाईक ने बताया कि मामले की हर पहलू से जांच की जाएगी और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि बकरीद पर्व से पूर्व सिसई थाना परिसर में शांति समिति की बैठक हुई थी, जहाँ सभी समुदाय के लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से नियमों का पालन करते हुए त्योहार मनाने को कहा गया था, इसके बावजूद नियम कानून को ताक पर रखकर ऐसा कृत्य बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। थाना प्रभारी ने भी गहन जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
    user_कृष्णा कुमार साहु
    कृष्णा कुमार साहु
    रिपोर्टर सिसई, गुमला, झारखंड•
    6 hrs ago
  • लातेहार जिला के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत गढ़बुढ़नी पंचायत के चुटिया टोला के चुरखाड़ में इन दिनों भीषण जल संकट गहरा गया है। 48 घंटे पहले हुई तेज बारिश के कारण नदी का गंदा पानी ग्रामीणों के एकमात्र सहारा रहे चुआड़ी में घुस गया है, जिससे पूरा टोला शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव के सभी जलमीनार सालों से खराब पड़े हैं और नल-जल योजना का लाभ भी आज तक उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में नदी किनारे खुद से बनाया गया चुआड़ी ही उनकी प्यास बुझाने, खाना बनाने और बच्चों को पानी पिलाने का एकमात्र स्रोत था। हालांकि, दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी में उफान आ गया और बाढ़ का कीचड़, कचरा व गंदगी से भरा पानी सीधे चुआड़ी में भर गया, जिससे वह पानी अब पीने लायक नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आ रही है और इसके इस्तेमाल से बीमारी का खतरा है। चुआड़ी के खराब होने के बाद से लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक दूर-दराज के झरनों और डोभा की तलाश में भटक रहे हैं। कई परिवारों के पास तो आज खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं है। एक ग्रामीण महिला ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि 48 घंटे से उनके बच्चे प्यासे हैं और नहाने-धोने तो दूर, पीने को एक लोटा साफ पानी भी नहीं मिल रहा। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी नल खराब हैं और अब नदी ने भी धोखा दे दिया है, ऐसे में गरीब लोग कहाँ जाएं। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने एक वीडियो जारी कर सांसद, विधायक, उपायुक्त लातेहार और प्रखंड प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी प्रमुख मांग है कि खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत करके गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
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    लातेहार जिला के महुआडांड़ प्रखंड अंतर्गत गढ़बुढ़नी पंचायत के चुटिया टोला के चुरखाड़ में इन दिनों भीषण जल संकट गहरा गया है। 48 घंटे पहले हुई तेज बारिश के कारण नदी का गंदा पानी ग्रामीणों के एकमात्र सहारा रहे चुआड़ी में घुस गया है, जिससे पूरा टोला शुद्ध पेयजल के लिए दर-दर भटकने को मजबूर है।

ग्रामीणों के अनुसार, गांव के सभी जलमीनार सालों से खराब पड़े हैं और नल-जल योजना का लाभ भी आज तक उन्हें नहीं मिला है। ऐसे में नदी किनारे खुद से बनाया गया चुआड़ी ही उनकी प्यास बुझाने, खाना बनाने और बच्चों को पानी पिलाने का एकमात्र स्रोत था। हालांकि, दो दिन पहले हुई मूसलाधार बारिश के बाद नदी में उफान आ गया और बाढ़ का कीचड़, कचरा व गंदगी से भरा पानी सीधे चुआड़ी में भर गया, जिससे वह पानी अब पीने लायक नहीं बचा है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी से दुर्गंध आ रही है और इसके इस्तेमाल से बीमारी का खतरा है।

चुआड़ी के खराब होने के बाद से लोग बूंद-बूंद पानी के लिए तरस गए हैं। महिलाएं और बच्चे सुबह से शाम तक दूर-दराज के झरनों और डोभा की तलाश में भटक रहे हैं। कई परिवारों के पास तो आज खाना बनाने के लिए भी पानी नहीं है। एक ग्रामीण महिला ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि 48 घंटे से उनके बच्चे प्यासे हैं और नहाने-धोने तो दूर, पीने को एक लोटा साफ पानी भी नहीं मिल रहा। उन्होंने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी नल खराब हैं और अब नदी ने भी धोखा दे दिया है, ऐसे में गरीब लोग कहाँ जाएं।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए, ग्रामीणों ने एक वीडियो जारी कर सांसद, विधायक, उपायुक्त लातेहार और प्रखंड प्रशासन से तत्काल मदद की गुहार लगाई है। उनकी प्रमुख मांग है कि खराब पड़े जलमीनारों की मरम्मत करके गांव में पानी की स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    15 min ago
  • राजधानी रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत हरमू बायपास रोड पर आज सदानंद चौक के समीप एक बड़ा हादसा हो गया। बालू से लदा एक तेज रफ्तार ट्रक (संख्या Jh –01EB7213) अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर ही पलट गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक काफी तेज गति में था और सदानंद चौक के पास चालक ने उस पर से नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद गाड़ी लड़खड़ाते हुए बीच सड़क पर पलट गई। ट्रक पर भारी मात्रा में बालू लदा था, जो पूरी सड़क पर बिखर गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे की चपेट में कोई अन्य वाहन या राहगीर नहीं आया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। ट्रक पलटने और बालू बिखरने के कारण व्यस्त हरमू बायपास रोड पर दोनों तरफ का यातायात पूरी तरह ठप हो गया, और देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना अरगोड़ा थाना पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को सड़क के बीच से हटवाया। पुलिस ने सड़क पर बिखरी बालू को भी साफ कराने का काम शुरू किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात को सामान्य कराया जा सका। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और चालक के संबंध में जानकारी जुटा रही है, क्योंकि यह घटना रांची के हरमू बायपास रोड पर तेज रफ्तार का एक उदाहरण बनी।
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    राजधानी रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र अंतर्गत हरमू बायपास रोड पर आज सदानंद चौक के समीप एक बड़ा हादसा हो गया। बालू से लदा एक तेज रफ्तार ट्रक (संख्या Jh –01EB7213) अचानक अनियंत्रित होकर सड़क पर ही पलट गया, जिससे मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रक काफी तेज गति में था और सदानंद चौक के पास चालक ने उस पर से नियंत्रण खो दिया, जिसके बाद गाड़ी लड़खड़ाते हुए बीच सड़क पर पलट गई। ट्रक पर भारी मात्रा में बालू लदा था, जो पूरी सड़क पर बिखर गया। गनीमत यह रही कि इस हादसे की चपेट में कोई अन्य वाहन या राहगीर नहीं आया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया और किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

ट्रक पलटने और बालू बिखरने के कारण व्यस्त हरमू बायपास रोड पर दोनों तरफ का यातायात पूरी तरह ठप हो गया, और देखते ही देखते वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। स्थानीय लोगों ने तुरंत इसकी सूचना अरगोड़ा थाना पुलिस को दी। जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुँची और क्रेन की मदद से दुर्घटनाग्रस्त ट्रक को सड़क के बीच से हटवाया। पुलिस ने सड़क पर बिखरी बालू को भी साफ कराने का काम शुरू किया, जिसके बाद धीरे-धीरे यातायात को सामान्य कराया जा सका। पुलिस इस मामले की जांच कर रही है और चालक के संबंध में जानकारी जुटा रही है, क्योंकि यह घटना रांची के हरमू बायपास रोड पर तेज रफ्तार का एक उदाहरण बनी।
    user_Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
    Brajesh Gope (एलआइसी अभिकर्ता)
    Insurance Agent लापुंग, रांची, झारखंड•
    12 hrs ago
  • झारखंड के लातेहार जिले के रिचूघुट्टा गांव में रविवार को पेशारार, देदरिया और भूसूर पंचायतों के प्रभावित ग्रामीणों, रैयतों और बेरोजगार युवकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का नेतृत्व विधायक प्रतिनिधि पवन कुमार ने किया, जिन्होंने आरोप लगाया कि हिंडालको पिछले 70 वर्षों से क्षेत्र में कार्यरत है, बावजूद इसके ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीवीसी की प्रस्तावित कोल साइडिंग परियोजना तब तक शुरू नहीं करने दी जाएगी, जब तक स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार और क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं। बैठक के दौरान ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। सभी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी 9 जून को 5 हजार ग्रामीणों की विशाल सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें कंपनी प्रबंधन को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। पवन कुमार ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा, क्योंकि उनका मानना है कि हिंडालको-डीवीसी की मनमानी अब नहीं चलेगी।
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    झारखंड के लातेहार जिले के रिचूघुट्टा गांव में रविवार को पेशारार, देदरिया और भूसूर पंचायतों के प्रभावित ग्रामीणों, रैयतों और बेरोजगार युवकों ने एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक का नेतृत्व विधायक प्रतिनिधि पवन कुमार ने किया, जिन्होंने आरोप लगाया कि हिंडालको पिछले 70 वर्षों से क्षेत्र में कार्यरत है, बावजूद इसके ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि डीवीसी की प्रस्तावित कोल साइडिंग परियोजना तब तक शुरू नहीं करने दी जाएगी, जब तक स्थानीय बेरोजगारों को रोजगार और क्षेत्र में मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित नहीं की जातीं।

बैठक के दौरान ग्रामीणों ने कंपनी प्रबंधन के खिलाफ स्थानीय हितों की अनदेखी का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। सभी ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि आगामी 9 जून को 5 हजार ग्रामीणों की विशाल सभा आयोजित की जाएगी, जिसमें कंपनी प्रबंधन को एक ज्ञापन सौंपा जाएगा। पवन कुमार ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें नहीं मानी गईं तो ग्रामीणों के साथ मिलकर उग्र आंदोलन किया जाएगा, क्योंकि उनका मानना है कि हिंडालको-डीवीसी की मनमानी अब नहीं चलेगी।
    user_Ram Kumar
    Ram Kumar
    Photographer लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    14 hrs ago
  • Post by Yuva team jharkhand
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    Post by Yuva team jharkhand
    user_Yuva team jharkhand
    Yuva team jharkhand
    Latehar, Jharkhand•
    14 hrs ago
  • लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में सोमवार को उत्तरी धाधू (पूर्वी भाग) एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति संबंधी लोक सुनवाई को ग्रामीणों के जोरदार विरोध के कारण बीच में ही रोकना पड़ा। प्रभावित गांवों के हजारों रैयत और ग्रामीण परियोजना रद्द करने की मांग को लेकर कार्यक्रम में शामिल हुए और इसका कड़ा विरोध किया। लोक सुनवाई कार्यक्रम की अध्यक्षता लातेहार के अपर समाहर्ता सलमान जफर खिजरी ने की, जिसमें झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) की प्रतिनिधि प्रियंका कुमारी सहित एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के अधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे। इस दौरान ग्रामीणों ने "एनटीपीसी वापस जाओ", "रैयतों का शोषण बंद करो" और "कोल कंपनी वापस जाओ" जैसे नारे लगाए। ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और निर्णयों को महत्व नहीं दे रही है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी प्रक्रिया से पहले कंपनी को संबंधित गांवों में जाकर ग्राम सभा आयोजित करनी चाहिए और बिना ग्राम सभा की सहमति के परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उत्तरी धाधू एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना के तहत कोल ब्लॉक विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, लेकिन वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। उनका कहना था कि कोयला खनन से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा और उनकी आजीविका व सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके कारण वे विस्थापन स्वीकार नहीं करेंगे और अपनी जमीन की रक्षा के लिए हर संभव संघर्ष करेंगे। ग्रेंजा, विशुनपुर, भैंसादोन, पिंडारकोम और मरंगलोइया जैसे प्रभावित गांवों के अधिकांश लोगों ने परियोजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस विरोध प्रदर्शन में जिला परिषद सदस्य अनीता देवी और आजसू प्रखंड अध्यक्ष सह विरोधी ग्रामीणों के नेता शंकर उरांव सहित कई जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे। ग्रामीणों की बड़ी संख्या में जनसुनवाई में पहुंचने का कारण यह था कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक या फर्जी रिपोर्ट तैयार कर उनकी जमीन पर कब्जा होने से रोकना चाहते थे। विरोध प्रदर्शन के चलते प्रशासन और परियोजना प्रबंधन को जनसुनवाई प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण रही, हालांकि ग्रामीणों ने भविष्य में भी अपने अधिकारों और जमीन की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखने की बात कही है।
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    लातेहार जिले के बालूमाथ प्रखंड कार्यालय परिसर में सोमवार को उत्तरी धाधू (पूर्वी भाग) एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना की पर्यावरणीय स्वीकृति संबंधी लोक सुनवाई को ग्रामीणों के जोरदार विरोध के कारण बीच में ही रोकना पड़ा। प्रभावित गांवों के हजारों रैयत और ग्रामीण परियोजना रद्द करने की मांग को लेकर कार्यक्रम में शामिल हुए और इसका कड़ा विरोध किया।

लोक सुनवाई कार्यक्रम की अध्यक्षता लातेहार के अपर समाहर्ता सलमान जफर खिजरी ने की, जिसमें झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद (जेएसपीसीबी) की प्रतिनिधि प्रियंका कुमारी सहित एनटीपीसी माइनिंग लिमिटेड के अधिकारी और अन्य प्रशासनिक पदाधिकारी मौजूद थे। इस दौरान ग्रामीणों ने "एनटीपीसी वापस जाओ", "रैयतों का शोषण बंद करो" और "कोल कंपनी वापस जाओ" जैसे नारे लगाए। ग्रामीणों का आरोप था कि कंपनी स्थानीय ग्राम सभाओं की सहमति और निर्णयों को महत्व नहीं दे रही है। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी प्रक्रिया से पहले कंपनी को संबंधित गांवों में जाकर ग्राम सभा आयोजित करनी चाहिए और बिना ग्राम सभा की सहमति के परियोजना को स्वीकार नहीं किया जाएगा।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि उत्तरी धाधू एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना के तहत कोल ब्लॉक विकसित करने की योजना बनाई जा रही है, लेकिन वे अपनी पुश्तैनी जमीन किसी भी कीमत पर नहीं देंगे। उनका कहना था कि कोयला खनन से क्षेत्र में प्रदूषण बढ़ेगा और उनकी आजीविका व सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा, जिसके कारण वे विस्थापन स्वीकार नहीं करेंगे और अपनी जमीन की रक्षा के लिए हर संभव संघर्ष करेंगे। ग्रेंजा, विशुनपुर, भैंसादोन, पिंडारकोम और मरंगलोइया जैसे प्रभावित गांवों के अधिकांश लोगों ने परियोजना के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। इस विरोध प्रदर्शन में जिला परिषद सदस्य अनीता देवी और आजसू प्रखंड अध्यक्ष सह विरोधी ग्रामीणों के नेता शंकर उरांव सहित कई जनप्रतिनिधि व सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे। ग्रामीणों की बड़ी संख्या में जनसुनवाई में पहुंचने का कारण यह था कि वे किसी भी प्रकार की भ्रामक या फर्जी रिपोर्ट तैयार कर उनकी जमीन पर कब्जा होने से रोकना चाहते थे।

विरोध प्रदर्शन के चलते प्रशासन और परियोजना प्रबंधन को जनसुनवाई प्रक्रिया स्थगित करनी पड़ी। क्षेत्र में स्थिति शांतिपूर्ण रही, हालांकि ग्रामीणों ने भविष्य में भी अपने अधिकारों और जमीन की रक्षा के लिए अपना संघर्ष जारी रखने की बात कही है।
    user_Manoj dutt dev
    Manoj dutt dev
    Local News Reporter लातेहार, लातेहार, झारखंड•
    5 hrs ago
  • झारखंड के लातेहार में कोयला खदानों के कारण ग्रामीण विकास के बजाय विनाश का सामना कर रहे हैं। खदानों से उड़ती धूल, जगह-जगह टूटी सड़कें और व्यापक प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। इसके बावजूद, आज तक कई प्रभावित परिवारों को उनका अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिल पाया है। यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आख़िर कब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी पीड़ा का समाधान होगा। प्रभावित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह पीड़ा अब हर मंच तक पहुँचाई जाएगी, क्योंकि जनता का दर्द ही उनकी राजनीति का आधार है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उन्हें तत्काल मुआवज़ा दिया जाए और प्रदूषण पर लगाम लगाई जाए।
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    झारखंड के लातेहार में कोयला खदानों के कारण ग्रामीण विकास के बजाय विनाश का सामना कर रहे हैं। खदानों से उड़ती धूल, जगह-जगह टूटी सड़कें और व्यापक प्रदूषण ने ग्रामीणों का जीना दूभर कर दिया है। इसके बावजूद, आज तक कई प्रभावित परिवारों को उनका अपेक्षित मुआवज़ा नहीं मिल पाया है।

यह गंभीर सवाल उठाया जा रहा है कि आख़िर कब जनता की आवाज़ सुनी जाएगी और उनकी पीड़ा का समाधान होगा। प्रभावित ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि उनकी यह पीड़ा अब हर मंच तक पहुँचाई जाएगी, क्योंकि जनता का दर्द ही उनकी राजनीति का आधार है। ग्रामीणों की प्रमुख मांग है कि उन्हें तत्काल मुआवज़ा दिया जाए और प्रदूषण पर लगाम लगाई जाए।
    user_Yuva team jharkhand
    Yuva team jharkhand
    Latehar, Jharkhand•
    15 hrs ago
  • बुढ़मू थाना क्षेत्र के ठाकुरगांव-बुढ़मू मुख्य पथ पर रविवार रात एक सड़क दुर्घटना में दो नाबालिगों की दुखद मौत हो गई। मृतकों की पहचान नामकुम थाना अंतर्गत लोवाड़ीह निवासी तुमिल खाखा के 17 वर्षीय पुत्र आयुष खाखा और अनूप लिंडा की 16 वर्षीय पुत्री सायना अंजलि लिंडा के रूप में हुई। ये दोनों आपस में मौसेरे भाई-बहन थे, जिन्होंने हाल ही में 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और गर्मी की छुट्टियां बिताने के लिए अपने नाना विलियम के घर बुढ़मू के सिदरौल आए हुए थे। मिली जानकारी के अनुसार, रविवार रात दोनों ठाकुरगांव की दिशा में चाउमीन और कोल्ड ड्रिंक लेने जा रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक तेज गति और नियंत्रण खोने के कारण एक पेड़ से जा टकराई, जिससे घटनास्थल पर ही दोनों की मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद बुढ़मू पुलिस ने दोनों नाबालिगों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया था। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं, और पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
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    बुढ़मू थाना क्षेत्र के ठाकुरगांव-बुढ़मू मुख्य पथ पर रविवार रात एक सड़क दुर्घटना में दो नाबालिगों की दुखद मौत हो गई। मृतकों की पहचान नामकुम थाना अंतर्गत लोवाड़ीह निवासी तुमिल खाखा के 17 वर्षीय पुत्र आयुष खाखा और अनूप लिंडा की 16 वर्षीय पुत्री सायना अंजलि लिंडा के रूप में हुई। ये दोनों आपस में मौसेरे भाई-बहन थे, जिन्होंने हाल ही में 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और गर्मी की छुट्टियां बिताने के लिए अपने नाना विलियम के घर बुढ़मू के सिदरौल आए हुए थे।

मिली जानकारी के अनुसार, रविवार रात दोनों ठाकुरगांव की दिशा में चाउमीन और कोल्ड ड्रिंक लेने जा रहे थे। इसी दौरान उनकी बाइक तेज गति और नियंत्रण खोने के कारण एक पेड़ से जा टकराई, जिससे घटनास्थल पर ही दोनों की मौत हो गई। घटना के तुरंत बाद बुढ़मू पुलिस ने दोनों नाबालिगों के शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए रिम्स भेज दिया था। सोमवार को पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिए गए हैं, और पुलिस ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
    user_Sanjay kumar
    Sanjay kumar
    Newspaper publisher बुरमू, रांची, झारखंड•
    1 hr ago
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